जल गंगा संवर्धन अभियान: 4 हजार 700 का मिला था लक्ष्य, बनाए 4 हजार 838

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश पुराने जल स्त्रोतों को सहेजने, नया जीवन देने और किसानों को सिंचाई व पीने के लिए नलकूप, कुओं से पर्याप्त मात्रा में पानी मिले, इसके लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) अंतर्गत खेत तालाब, कूप रिचार्ज पिट, सोख्ता गड्ढ़ा, बोरी बंधान सहित बारिश का पानी रोकने के लिए अन्य कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए सभी जिलों को लक्ष्य भी दिया गया है। खंडवा जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला बना है, जिसने कूप रिचार्ज पिट निर्माण में 100 फीसदी का लक्ष्य हासिल किया है। 4 हजार 700 का मिला था लक्ष्य, बनाए 4 हजार 838 जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत खंडवा जिले को 4 हजार 700 कूप रिचार्ज पिट बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसे समय से पहले और लक्ष्य से अधिक पूरा कर लिया गया है। जिले में 4 हजार 838 कूप रिचार्ज पिट बनाए गए हैं। जिला पंचायत सीईओ खंडवा नागार्जुन बी. गौड़ा ने बताया कि कलेक्टर ऋषव गुप्ता के मार्गदर्शन में जिले में 15 हजार कूप रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं, करीब 10 हजार का कार्य प्रगतिरत है। जल संचय, जन भागीदारी अभियान में देश में तीसरे नंबर पर है खंडवा जिला बारिश के पानी का संचयन करने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा " जल संचय, जन भागीदारी अभियान राष्ट्रीय अभियान चलाया जा रहा है, इसमें देश के सभी जिलों में बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट, स्टॉप डैम, सोख्ता गड्ढा सहित विभिन्न प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश का खंड़वा जिला 7 मई की स्थिति में देश में तीसरे नंबर पर है। 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक चलेगा अभियान प्रदेश में बारिश के पानी को सहेजने, पुराने जल स्रातों को संवारने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेशभर में 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। कूप रिजार्च पिट के फायदे कूप रिचार्ज पिट, जिसे रिचार्ज शाफ्ट या रिचार्ज पिट भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भू-जल स्तर को बढ़ावा देना है। बारिश का पानी जमीन के अंदर रिसने से भू-जल स्तर बढ़ता है। साथ ही कूप या नलकूपों के सूखने की संभावना भी कम रहती है। साथ ही सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहती है।   recent visitors 37

जल गंगा संवर्धन अभियान -इस वर्ष सबसे ज्यादा सीहोर जिले में शुरू हुए 687 से अधिक खेत-तालाब

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बारिश के पानी का संचयन करने और पुराने जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा अंतर्गत खेत-तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। सीहोर जिले ने बड़े पैमाने पर खेत-तालाब बनाने की मिसाल पेश की है। इस वर्ष 2025 में 687 से अधिक खेत तालाब प्रारंभ हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सीहोर जिले में लगभग 1670 खेत-तालाब के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 687 पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इसी प्रकार 2600 कूप रिचार्ज पिट का निर्माण किया जाना है। निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध जिला प्रशासन द्वारा 2250 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें से 1440 पर कार्य भी प्रारंभ हो गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिलों में चल रहे कार्यों की मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है। किसानों ने भी दिखाई रुचि, जिला प्रशासन की मेहनत लाई रंग, सिंचाई में होगा फायदा किसान अपने खेतों में अधिक से अधिक खेत-तालाब बनवाए, इसके लिए जिला प्रशासन सीहोर की मेहनत रंग लाई है। खेत-तालाब को बनवाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जागरूक किया गया। खेत तालाब का महत्व बताया। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीणों ने पानी के महत्व को समझा और खेत-तालाब को बनवाने में रुचि दिखाई। खेत-तालाब बनने से किसानों को सिंचाई के लिए आसानी से पानी मिलेगा। साथ पानी बहने के बजाय जमीन में जाएगा। इससे कुओं और ट्यूबवेल का वॉटर लेवल बढ़ेगा, जिसका फायदा किसानों को होगा। फसलों की सिंचाई के साथ कर सकेंगे मछली पालन सीहोर जिले की जनपद पंचायत इछावर की ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी के ग्राम बालापुरा के किसान पीयूष, बापू सिंह, हजारी लाल, रामप्रसाद ने बताया कि पथरीली व बंजर जमीन होने के साथ पानी की सुविधा भी नहीं थी। इस वजह से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती थी। अब गांव में खेत तालाब बन जाने से फसलों की दो से तीन बार सिंचाई कर सकेंगे। साथ ही मत्स्य पालन सहित अन्य कार्य भी कर सकेंगे। किसानों ने गांव में खेत-तालाब बनने से खुशी जताई है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी में अब तक 7 खेत-तालाब बनाए जा चुके हैं और 5 प्रगतिरत है। सिपरी सॉफ्टवेयर बना मददगार जिला प्रशासन सीहोर के अनुसार खेत-तालाब के निर्माण में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा तैयार कराया गया सिपरी साफ्टवेयर मददगार बना है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थल चयन करने में आसानी हुई है। सिपरी (Software for Identification and Planning of Rural Infrastructure) सॉफ्टवेयर एक उन्न्त तकनीक का सॉफ्टवेयर है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जियोमार्फोलॉजी और हाइड्रोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके संरचनाओं का सही स्थान तय किया जा सकता है।   recent visitors 50

चिनाब नदी पर बने बगलिहार और सलाल डैम के कई गेटों को खोल दिया गया

जम्मू भारत और पाकिस्तान के तनाव की बीच कई डैम के पानी को भारत की ओर से रोक दिया गया था। भारत ने सबसे पहले सिंधु नदी का पानी रोक दिया था, जिसके बाद चिनाब नदी पर बने डैम से भी पानी को भी रोक दिया गया था। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद से चिनाब नदी पर बने बगलिहार और सलाल डैम को बंद कर दिया था। हालांकि आज शुक्रवार को चिनाब नदी पर बने दोनों डैम के कुछ गेट खोल दिया गए। इसके वीडियो भी सामने आए है। दोनों डैम के कई गेट खुले दरअसल, भारत की ओर से पिछले सप्ताह ही चिनाब नदी के पानी को रोक दिया गया था। इसमें पहले बगलिहार डैम और फिर सलाल डैम को बंद करके पानी रोका गया था। हालांकि जम्मू-कश्मीर में बीते दिनों आई बारिश के बाद डैम का जलस्तर बढ़ गया था। इसके बाद अब रामबन में चिनाब नदी पर बने बगलिहार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं। इसके अलावा चिनाब नदी पर ही बने रियासी के सलाल बांध के भी तीन गेट खोल दिए गए हैं। इस दौरान दोनों डैम से पानी का फ्लो आगे बढ़ता हुआ दिखा और चिनाब नदी में कई दिनों के बाद से सूखा खत्म हुआ। पानी रुकने से सूखी नदी बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत ने सबसे पहले सिंधु नदी पर बने बांध को बंद कर दिया था। भारत ने तत्काल प्रभाव से सिंधु जल समझौते को खत्म कर दिया था। बता दें कि विश्व बैंक द्वारा ये सिंधु जल संधि की गई थी। इस संधि पर 1960 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इसे अक्सर दो शत्रुतापूर्ण पड़ोसियों के बीच शांतिपूर्ण सहयोग के एक दुर्लभ उदाहरण के रूप में सराहा जाता है। उन्होंने कहा कि स्थिति सुबह के समय क्षेत्र की छानबीन करने पर स्पष्ट होगी. घुसपैठ की यह कोशिश ऐसे दिन में हुई है जब भारत ने जम्मू, पठानकोट, उधमपुर एवं कुछ अन्य स्थानों पर पाकिस्तान द्वारा मिसाइल एवं ड्रोन से किए गए हमलों को विफल कर दिया. वहीं, दूसरी तरफ जम्मू शहर में शुक्रवार तड़के धमाकों की आवाज गूंजने पर तत्काल ‘ब्लैकआउट’ हो गया. यह घटना भारत द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की पाकिस्तानी सेना की कोशिशों को विफल करने के कुछ घंटों बाद हुई. सायरन बजने के बाद सुबह 3:50 से 4:45 बजे के बीच धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने खतरे को बेअसर कर दिया. वीडियो में आसमान में उड़ती हुई चीजों और धमाकों को दिखाया गया है क्योंकि हमले को बेअसर कर दिया गया. रातभर संघर्षविराम का उल्लंघन किये जाने की खबरें हैं। इस दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ, राजौरी और जम्मू जिलों में गोलाबारी की। इस पर भारतीय सैनिकों ने भी जवाबी कार्रवाई की. ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में जम्मू के उपायुक्त ने निवासियों से शांत रहने का आग्रह किया. भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर क्षेत्र में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं. recent visitors 49

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” 13 हजार 500 कृषकों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में 30 मार्च से प्रारंभ किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में उद्यानिकी विभाग द्वारा गाँव-गाँव में आयोजित की जा रही "पानी चौपाल" आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गई है। "पानी चौपाल" में मैदानी अमले द्वारा गाँव के किसानों को जल संरक्षण के साथ, कम पानी से होनी वाली फसलों, कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों को जोड़कर अधिक लाभ कमाने और नवीन उद्यानिकी तकनीकियों की समझाइश दी जा रही है। इसके साथ ही अभियान के दौरान ही फलोद्यान,‍ड्रिप लाइन, प्लास्टिक मलचिंग, सब्जी क्षेत्र, मसाला क्षेत्र, पुष्प क्षेत्र विस्तार योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये उद्यानिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से पंजीयन भी कराया जा रहा है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना "पर ड्रॉप-मोर क्रॉप" अंतर्गत 13 हजार 500 कृषकों को 76.68 करोड़ रूपये की लागत स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 5 हजार हैक्टेयर में फलदार पौधों का रोपण, सभी विकासखंड में उपलब्ध जल से सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उचित प्रबंधन पर कार्यशालाओं का आयोजन करने तथा अभियान के लिये 25 लाख से अधिक फलदार पौधे उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिये "पानी चौपाल" में ही किसानों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की जा रही है। "पानी-चौपाल" गुना जिले के गुना विकासखंड ग्राम अकावदा में, विकासखंड चाचौड़ा की ग्राम पंचायत उकविदा, शिवपुर, टीकमगढ़ जिले के विकासखंड जतारा के नतोवली ग्राम पंचायत सेवार, रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड के ग्राम सलवानिया और ग्राम सोहौला, छतरपुर जिले के लवकुश नगर विकासखंड के ग्राम में, अशोक नगर जिले के विकासखंड मुगांवली की शासकीय संजय निकुंज गोपालिया में, नर्मदापुरम के विकासखंड माखननगर, मैहर जिले के विकासखंड मुख्यालय के ग्रामों में, सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम खैराजी सहित प्रदेश के सेकड़ों ग्रामों में पानी चौपालों का आयोजन लगातार जारी है। पानी चौपाल में किसानों के आये सुझाव और समास्याओं पर अमल व निराकरण एक साथ किया जाएगा।   recent visitors 39

जल संकट से जूझ रहे उफरी गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया

भोपाल डिंडोरी जिले के करंजिया ब्लॉक का उफरी गांव, जहां कभी जल संकट विकराल रूप ले लेता था, अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा से आत्मनिर्भर हो चुका है। यह वही गांव है, जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जहां महिलाओं और बच्चों का बड़ा हिस्सा अपने दिन का अधिकांश समय पानी की व्यवस्था करने में ही गंवा देता था। अब यह सब बीते समय की बात हो गई है। गांव के बुजुर्ग गंगाराम बैगा बताते हैं, "गर्मियों में पानी की इतनी दिक्कत थी कि कई बार हमें रात में भी पानी भरने जाना पड़ता था। कई बार तो ऐसा हुआ कि झिरियों से गंदा पानी पीने के कारण गांव के कई लोग बीमार पड़ गए। हमें कभी उम्मीद नहीं थी कि हमारे गांव में भी नल से पानी मिलेगा। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।" पीएम जनमन योजना बनी संजीवनी जल संकट से जूझ रहे इस गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यहां एक बड़ी पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया, जिससे पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, ताकि उन्हें जल संकट से मुक्ति मिल सके। गांव की महिला श्रीमती सुकली बाई कहती हैं, "पहले हमें रोज सुबह जल्दी उठकर पानी के लिए निकलना पड़ता था। कई बार रात में भी पानी भरना पड़ता था, क्योंकि सुबह भीड़ अधिक होती थी। हमारी पूरी दिनचर्या पानी पर निर्भर थी, खेती-किसानी और बच्चों की देखभाल भी पीछे छूट जाती थी। अब हमें यह चिंता नहीं रहती, अब समय बचता है और हम अन्य कामों पर ध्यान दे सकते हैं।" नल से जल, 110 परिवारों के जीवन में बदलाव लगभग 530 जनसंख्या वाले उफरी गांव में जल जीवन मिशन के तहत 110 परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन दिए गए। अब ग्रामीणों को पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध है, जिससे कई समस्याएं हल हो गई हैं। सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब बीमारियों का खतरा कम हो गया है। पहले दूषित पानी पीने के कारण गांव में डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां आम थीं, लेकिन अब स्वास्थ्य केंद्र में ऐसे मामलों में काफी कमी आई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उनके जीवन को सरल और सुखद बनाने वाली क्रांतिकारी पहल है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को हृदय से स्वीकार किया है और प्रधानमंत्री जनमन योजना को विकास का वह स्रोत माना है, जिसने उफरी को नई पहचान दी है। पानी की हर बूंद के साथ अब यहां विकास की नई लहर बह रही है। विकास की ओर बढ़ता उफरी अब गांव में महिलाएं पानी भरने की चिंता से मुक्त होकर अपने घर-परिवार और आजीविका पर ध्यान दे सकती हैं। बच्चे बिना किसी रुकावट के स्कूल जा रहे हैं, और सबसे बड़ी राहत यह है कि गंदे पानी से होने वाली बीमारियों का डर अब नहीं सताता। गांव के कई परिवार अब आजीविका के नए साधनों की ओर बढ़ रहे हैं। पीएम जनमन योजना जल जीवन मिशन से हुए इस सकारात्मक बदलाव से पूरा गांव उत्साहित है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है और कहा है कि यह योजना उनके लिए केवल जल उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अब उफरी गांव विकास की एक नई राह पर आगे बढ़ रहा है, जहां हर घर जल है और हर घर खुशहाली की ओर अग्रसर है।   recent visitors 40

ग्वालियर को भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा

ग्वालियर  एमपी के ग्वालियर में चंबल नदी और कोतवाल बांध से ग्वालियर तक पानी लाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है। इससे ग्वालियर शहर की जनता को 30 वर्ष तक भरपूर मात्रा में पानी मिलेगा। भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।  नगर निगम ने 24 मार्च-2024 को चंबल से पानी लाने के लिए 458.68 करोड़ रुपए का ठेका इनविराड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया है और कंपनी ने कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्य कंपनी को 24 महीने में पूरा करना है। चंबल से ग्वालियर को प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा, जो शहर की बढ़ती आबादी की पानी की जरूरत को पूरा करेगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 90 एमएलडी पानी रोज ● चंबल नदी का पानी मुरैना नगर निगम के इंटेकवेल के माध्यम से देवरी गांव में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर आएगा। यहां से गुजर रही पाइप लाइन से निगम पानी संपवेल पर लेगा। ● देवरी गांव से चंबल का 90 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी प्रतिदिन भेजा जाएगा। कोतवाल बांध से 60 एमएलडी पानी के लिए लाइन डाली जाएगी, जो देवरी से आ रही लाइन से जुड़ेगी। यहां डाली जाएगी पाइप लाइन मुरैना : मुरैना शहर के अंदर 7.50 किमी के दायरे में डक्ट बनाकर पाइप लाइन डाली जा रही। यहां पूर्व में ही ड्राइंग व डिजाइन तैयार किए जा चुके हैं। नूराबाद : सर्विस रोड पर दो किमी खुदाई कर डक्ट बनाई जाएगी। बानमोर : बानमोर से गुजर रहे हाईवे के पास ही 3.50 किलोमीटर की खुदाई कर पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। नोट : प्रोजेक्ट में 43 किमी लाइन। चंबल वाटर प्रोजेक्ट- कब क्या हुआ 06 अक्टूबर-2023 को महाराज बाड़ा पर तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान और 16 दिसंबर 2024 को सीएम डॉ. मोहन यादव ने जीवाजी विवि के कैंपस में भूमिपूजन किया। 24 दिसंबर-2024 के वर्क ऑर्डर जारी हुए। 06 फरवरी-2025 से कार्य शुरू हुआ। 24 महीने में प्रोजेक्ट का काम पूरा करना होगा। recent visitors 41

जल गंगा संवर्धन अभियान : कुओं, बावड़ियों और तालों के पुनर्जीवित होने से बढ़ने के साथ सुरक्षित रहेगा भूजल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में जन सहयोग उमड़ रहा है। इसमें निरंतर जन सहभागिता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के माँ क्षिप्रा के तट रामघाट से 30 मार्च को प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी जुटने से स्पष्ट है कि प्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के ‘जन सहयोग से जल संरक्षण’ की मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर अग्रिम पंक्ति में आ गया है। राज्य सरकार 'खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में' के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। इसे सफल बनाने के लिए "जल गंगा संवर्धन अभियान" में वर्षा जल संचयन, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उज्जैन में जन सहभागिता से आगे बढ़ रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उज्जैन से प्रारंभ किये गये अभियान में जल संरक्षण, जल स्त्रोंतो के पुनरूद्धार, भू-जल स्तर सुधार, पुराने कुओं-बावड़ियों के जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों की साफ-सफाई, पौध-रोपण, छोटी नदियों, तालाब जैसी जल संरचनाओं के संरक्षण करने के लिए चल रहे इस अभियान में अब जन सहयोग भी उमड़ने लगा है। उज्जैन जिला पंचायत सीईओ श्रीमति जयति सिंह के साथ जनपद पंचायत उज्जैन की टीम ने भी जन सहयोग से चिंतामण बावड़ी, गोठड़ा बावड़ी, राणावड़ बावड़ी और बामोरा बावड़ी की साफ-सफाई की। इंदौर में धर्मगुरु बता रहे हैं जल की महत्ता इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरक्षण की महत्ता जन-जन तक पहुँचाने के लिए धर्मगुरु भी जुड़ रहे हैं। धर्मगुरु अपने उपदेशों से जल की महत्ता जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इनकी प्रेरणा से नागरिक श्रमदान कर बावड़ी, कुँओं और तालाबों को संवार रहे हैं। इन्दौर जिले के बरलाई जागीर गांव में चारभुजा नाथ मंदिर सांवेर के गुरु आनंदाचार्य ने आश्रम के बटुकों के साथ पूजन-अर्चन किया। मंत्रोच्चार के साथ जल का पूजन भी किया गया। उन्होंने उपस्थित जनों को जल की महत्ता समझाते हुए कहा कि जल की एक-एक बूँद जीवनदायी होती है। हमारी धार्मिक मान्यताओं में भी जल का विशेष स्थान है। इसलिए सभी को मिलकर जल को सहेजने चाहिये। आनंदाचार्य के आह्वान पर श्रद्धालुओं ने बरलाई जागीर की बावड़ी के लिये श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान", प्रदेश में जल की प्रचुर उपलब्धता और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। सीधी में जन श्रमदान से जल संरचनाओं की सफाई, चौपाल संगोष्ठियों से जन जागरण मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद ने महाविद्यालयों के विद्यार्थियौं के सहयोग से सीधी की सबसे महत्वपूर्ण जल संरचना गोपालदास तालाब में से गाद निकाल कर उसकी साफ-सफाई के लिए श्रमदान का क्रम प्रारंभ किया है, जो अलग-अलग जल संरचनाओं की सफाई के रूप में निरंतर जारी है। इसके साथ ही जल संरक्षण के प्रति जन सामान्य को जागरुक बनाने के लिए चौपाल संगोष्ठी, दीवार लेखन और निबंध-कविता आदि साहित्यिक प्रतियोगिताओं के आयोजन भी कराए जा रहे हैं। नवांकुर संस्था जन-चेतना ग्राम विकास समिति ने सीधी जिले के आदर्श ग्राम नदहा की तिरचुली नदी में श्रमदान से स्वच्छता अभियान चलाया। जनता ने श्रमदान कर गांव के हैंडपम्पों के आसपास और जलाशय की सफाई एवं गहरीकरण किया। श्योपुर में सीप नदी के गिर्राज घाट पर श्रमदान से शुरू हुआ नदी सफाई का क्रम श्योपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान में जन-अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ने समाजसेवियों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से सीप नदी के गिर्राज घाट पर साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। सिवनी में जन-सहयोग के लिए जागरुकता रैली औऱ श्रमदान सिवनी जिले में जल गंगा संवर्धन-अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में नदी, कुंओं, तालाबों, बावड़ियों सहित अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही इस अभियान में जनसमुदाय को जोडने के लिए जागरूकता रैली और दीवार लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।   recent visitors 37