दिल्ली जल बोर्ड में 11 लाख कंज्यूमर्स के 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से है बकाया

नई दिल्ली  जिस तरह से दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां बिजली बिल बकाया होने पर ऑफिस में बैठे-बैठे ही किसी भी कंज्यूमर्स की बिजली मीटर से सप्लाई डिस्कनेक्ट कर देती हैं, जल बोर्ड भी बकाया बिलों की वसूली के लिए कुछ ऐसा ही तकनीकी मैनेजमेंट सिस्टम डिवेलप करने का प्लान बना रहा है। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि करीब 11 लाख ऐसे कंज्यूमर्स हैं, जिनका का करीब 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से बकाया है। मीटर न लगाने वालों की पहचान की जाएगी जल बोर्ड अफसरों के अनुसार जल बोर्ड को घाटे से उबारने के लिए रोजाना सीनियर अफसरों के साथ बैठकें चल रही हैं। इस दौरान यह बात सामने आई कि दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या तो 52 लाख से भी अधिक है, लेकिन पानी उपभोक्ताओं की संख्या बिजली उपभोक्ताओं की तुलना में करीब आधी है। अधिकारियों ने कहा कि बिजली कंपनियों ने जिन लोगों को कनेक्शन दिया है, उनसे डेटा लेकर प्रत्येक घरों का सर्वे किया जाए। ताकि यह पता चल सके कि पानी के उपभोक्ताओं की वास्तविक संख्या कितनी है। उसी के हिसाब से फिर बिलिंग प्रोसेस शुरु किया जाए। ऐसे में जल बोर्ड के रेवेन्यू काफी बढ़ सकता है। कनेक्शन काटने के लिए स्कॉडा सिस्टम जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में पानी उपभोक्ताओं की कुल संख्या करीब 28.26 लाख है। इसमें से 11 लाख के आसपास ऐसे उपभोक्ता है, जिन्हें अपने पानी के बिलों पर आपत्ति हैं और लंबे समय से बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं और लगातार उनका पानी का बिल बढ़ता जा रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं का एरियर के रूप में करीब 5700 करोड़ रुपये बकाया है। भविष्य में पानी के बकाया बिलों का समय पर भुगतान के लिए पाइप लाइनों के वॉल्व पर स्कॉडा सिस्टम लगाने की बात की जा रही है, ताकि किसी भी उपभोक्ता का पानी का बिल अधिक समय से बकाया है, तो उसका कनेक्शन जल बोर्ड अधिकारी ऑफिस में बैठे ही काट दे। सबसे पहले कमर्शल और बल्क वॉटर कंस्यूमर पर एक्शन स्काडा सिस्टम पूरी तरह से डिवेलप होने के बाद सबसे पहले इस कैटिगरी में कमर्शल कंस्यूमर्स और बल्क वॉटर कंस्यूमर्स को शामिल किया जाएगा। दिल्ली में कमर्शल कंस्यूमर्स की संख्या 82 हजार से अधिक है। बल्क कंस्यूमर्स 4300-4500 हैं। यह प्रयोग सफल होने के बाद दूसरे कैटिगरी के पानी उपभोक्ताओं को इस सिस्टम के तहत शामिल किया जाएगा।   recent visitors 43

मुख्यमंत्री की पर्यावरण संतुलन और आर्थिक संवर्धन से जिले में जल संरक्षण की बहुआयामी पहल:-महेन्द्र सिंह मरपच्ची

विश्व जल दिवस पर विशेष लेख एमसीबी/मनेंद्रगढ़  जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन और सभ्यता की धुरी है। मनुष्य के अस्तित्व से लेकर कृषि, उद्योग और पर्यावरण तक जल की अनिवार्यता स्पष्ट है। लेकिन आज जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सतत जल प्रबंधन की दिशा में प्रयासों को तेज करना है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका प्रभाव पूरे देश और छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की हुई प्रतिबद्धता         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इस मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है । मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति को देखें तो अबतक कुल 60,379 नल कनेक्शन पूर्ण किया किया गया है । जबकि जिले की 19 गांवों को शत-प्रतिशत नल कनेक्शन से जोड़ा गया है, जिससे वहां के लोगों को अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई है, जिससे जल आपूर्ति निरंतर बनी रहे। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की चुनौतियां और उसके संभावनाएं छत्तीसगढ़ जल संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां महानदी, हसदेव, शिवनाथ, इंद्रावती, अरपा और खारून जैसी प्रमुख नदियां हैं, जो कृषि, उद्योग और पेयजल कबआपूर्ति के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। लेकिन अनियंत्रित जल दोहन, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे कई जिलों में पानी की कमी देखी जा जाती है। मानसून में अनिश्चितता के कारण कुछ इलाके बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं, जबकि अन्य हिस्से सूखे की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी हो गया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए किया जा रहा सशक्त प्रयास           केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें  "कैच द रेन" अभियान के तहत गांवों और शहरों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में पुराने कुओं, तालाबों और झीलों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को गति मिले। "अटल भूजल योजना"  विशेष रूप से भूजल स्तर को सुधारने के लिए बनाई गई है, जिसमें समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस योजना के तहत बोरवेल रिचार्जिंग, जल पुनर्भरण संरचनाओं और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। वहीं "अमृत सरोवर मिशन"  के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अबतक 96 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ये सरोवर जल संरक्षण को बढ़ावा देने, भूजल स्तर में सुधार लाने, और कृषि एवं आजीविका के साधनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा ये सरोवर सामुदायिक गतिविधियों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रोत्साहित करते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न अमृत सरोवर स्थलों पर संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिससे सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता में वृद्धि होती है। इन सरोवरों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को सिंचाई, मछली पालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसके अलावा "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना" के अंतर्गत किसानों को माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव हो सके। इससे जल की बर्बादी कम होती है और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। "अमृत योजना" के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जल संकट को दूर करने में मदद मिल रही है। जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति की जनभागीदारी जरूरी       छत्तीसगढ़ और पूरे देश में जल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर को पुनः भरना आवश्यक है। स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकों जैसे कि डिजिटल वॉटर मीटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को लागू किया जाना चाहिए। औद्योगिक इकाइयों को जल पुनर्चक्रण अनिवार्य करना चाहिए, ताकि जल अपव्यय को कम किया जा सके। गांवों में पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनर्निर्माण कर उन्हें जल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि में पानी की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जल संरक्षण की शिक्षा देकर युवाओं के साथ साथ हर व्यक्ति को भी जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। विश्व जल दिवस के दिन जल संरक्षण का संकल्प लेने का सही समय        विश्व जल दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताने और ठोस कार्रवाई करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ पूरे देश और छत्तीसगढ़ को मिल रहा है। लेकिन केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। हर नागरिक को जल बचाने की दिशा में योगदान देना होगा। यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो भविष्य में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है। हमें आज ही जल संरक्षण के ठोस उपाय अपनाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध जल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। जल संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। इस विश्व जल दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए … Read more

जलप्रदाय परियोजना से 6300 घरों में नल कनेक्शन, लागत 69.86 करोड़ रूपये

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत संचालित मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा छतरपुर जिले में पर्यटन नगरी खजुराहो और राजनगर में जलप्रदाय परियोजना का कार्य किया गया है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से क्रियान्वित खजुराहो जलप्रदाय योजना की लागत 69 करोड़ 86 लाख रूपये है। परियोजना लागत में 10 वर्षों का संचालन और संधारण भी शामिल है। परियोजना से 6300 घरों में नल कनेक्शन खजुराहो जलप्रदाय योजना में खजुराहो के लगभग 4200 एवं राजनगर के 2100 घरों के नल कनेक्शन से जोड़ा गया है। इस परियोजना से 30 हजार से अधिक आबादी को साफ पानी मिल रहा है। परियोजना के लिये कुटनी डेम पर इंटैक वैल स्थापित किया गया है। पानी को शुद्ध करने केलिये 10 एमएलडी क्षमता का वॉटर ट्रीटमेंट लगाया गया है। परियोजना में जल संग्रहण के लिये खजुराहो में 5 ओवरहेड टेंक और राजगर में 2 ओवरहेड टेंक बनाये गये हैं। राजनगर में एक ग्राउंड लेवल स्टोरेज रिजर्वायर भी बनाया गया है। परियोजना के पूरा होने से इन दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को नल से साफ पानी मिल रहा है। परियोजना से पहले नागरिकों को पानी प्राप्त करने में जो परेशानियां हुआ करती थीं, उनसे अब छुटकारा मिल गया है।   recent visitors 49

बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा

छतरपुर 'बुंदेलखंड' के नाम के साथ ही सूखा ग्रस्त इलाका, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याएं जुड़ी हुई हैं। पानी के संकट से जूझते इस पूरे इलाके को पानीदार बनाने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट की आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने किया। चंदेल कालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने में मप्र का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संरक्षण पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं (NGO), और पब्लिक की मदद से काम करेगी। जल संरक्षण पर काम कर रही गैर सरकारी संस्थाओं ने ओरछा में वर्कशॉप आयोजित की। इस कार्यशाला में जल पुरुष राजेंद्र सिंह, मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और जल संरक्षण पर काम करने वाले संजय सिंह तमाम एक्सपर्ट्स ने मंथन किया। चंदेल राजाओं ने बनवाए बांध, तालाब और बावड़ियां बुंदेलखंड मप्र और उप्र के 7-7 जिलों में बंटा हुआ है। इस इलाके में 9वीं से 16वीं शताब्दी तक चंदेलों का शासन रहा है। पानी की कमी से यह इलाका हमेशा जूझता रहा है। चंदेल राजाओं ने बरसाती पानी को सहेजने के लिए 2 पहाड़ों के बीच पत्थर और मिट्‌टी का प्रयोग करते हुए बांधों का निर्माण कराया। पहाड़ियों के तराई इलाके में बरसाती पानी इकट्‌ठा हो सके। इन तालाबों को बनाने में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया। जिसमें एक तालाब के भरने पर वेस्टवियर के जरिए उसके तराई इलाके का तालाब भर सके। इन तालाबों के साथ ही बावड़ियां भी बनवाई गई। ताकि तालाबों और बांधों के किनारे की बावड़ियां भर सकें। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं।। पानी पर काम करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- उन तालाबों में डीसिल्टिंग की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं हैं। क्योंकि वहां का जो डेटा हमारे पुरखों ने बनाया उसमें कोई नुकसानदेह चीजें नहीं हैं। पानी की आवक को निरंतर करना। अगर कोई अतिक्रमण है तो उनको दूर करना। पानी आने के रास्तों को खोलने के लिए प्रशासनिक जरूरत पड़ती है। ऐसी कोई जानकारियां जो वहां पर काम करने वाले लोग हैं या फिर जो जल के क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं उनके कोई सुझाव हैं। जो भी सुझाव विमर्श में सामने आएंगे उसके लिए सरकार कटिबद्ध है। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए पानी पर काम करना ही होगा। ये हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। पानी के रास्ते में बनी सड़कों पर विभाग बनवाएगा पुलिया मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- हमें एक बार चिह्नित करना पडे़गा कि हम शुरुआत कहां से करें। दमोह में मैने किया था बेलाताल में एसपी के सामने पुलिया थी, उसे हमने तोड़ दिया था। मुझे लगता है कि कैचमेंट खोलना हमारे नैतिक बल पर निर्भर करता है। प्रशासन की जरूरत तब पडे़गी तब वहां कोई अवरोध पैदा करे। दूसरी बात ये है कि अगर सीसी रोड बना दिया तो वहां पुलिया बनानी पडे़गी। ऐसे निर्माण की गारंटी हम जैसे मंत्रालय के लोग ही ले सकते हैं। आप बरसात के पहले पुलिया बना दो, अन्यथा वो फिर समस्या पैदा होगी। पानी आएगा तो रास्ता रुक जाएगा। हमारी मानवीय भूलों के कारण जो अवरोध पैदा हुए हैं। उसमें किसी बदलाव की जरूरत पड़ती है। तो फिर उसे हम अपने विभाग की प्राथमिकता में शामिल करेंगे। पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण पर काम करने वाली जल सहेलियों (महिलाओं के समूह) ने 2 फरवरी को ओरछा से यात्रा शुरू की है। जल सहेलियों की यह 18 दिवसीय यात्रा ओरछा के कंचना घाट से शुरू होकर छतरपुर के जटाशंकर धाम में पूरी होगी। इस यात्रा के दौरान जल सहेलियां गांव-गांव जाकर जल संरक्षण का संदेश देंगी और लोगों को जल प्रबंधन के महत्व को समझाएंगी। recent visitors 54

जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया

जबलपुर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा जबलपुर परियोजना इकाई के अतंर्गत 7 नगरीय निकायों में जल प्रदाय योजना का काम पूरा कर लिया गया है। यह कंपनी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्य कर रही है। एशियन डेवपलमेंट बैंक की सहायता से नर्मदा पेयजल योजना तैयार की गई है। इस योजना को नर्मदा पेयजल योजना भेड़ाघाट के नाम से जाना जा रहा है। इस पेयजल योजना से जिन निकायों को पेयजल उपलब्ध हो रहा है, उनमें भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा और दमोह जिले का तेंदूखेड़ा शामिल हैं। जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया गया है। वहीं जल शोधन के लिए 31 एमएलडी का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। सभी 7 निकायों में जल संग्रहण के लिए कुल 13 उच्च स्तरीय टंकियों का निर्माण किया गया है। हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचे, इसके लिए 159 किलोमीटर की मुख्य पाईप लाईन और 328 किलोमीटर की वितरण पाईप लाईन बिछाई गई है। भेड़ाघाट जल प्रदाय योजना से 7 नगरों में 32 हजार से अधिक घरों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। इन नगरों की 1 लाख 62 हजार की आबादी लाभन्वित हो रही है। योजना की विशेष बात यह है कि आगामी 30 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर योजना डिजाइन की गई है। दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ योजना की लागत लगभग 257 करोड़ रूपये है। पहले इन निकायों में जल प्रदाय की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं थी। महिला हो या बच्चे पानी लेने के लिए घर से दूर जाकर कठिन कार्य करते थे। पूर्व में इन नगरों में हैंडपंप के आस-पास लंबी कतारें होती थीं और जनसामान्य तकलीफों का सामना करता था। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की कोशिशों से शोधन उपरांत शुद्ध पानी घर घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। शोधित पानी होने के कारण जल से होने वाली बीमारियों से भी जनसामान्य को छुटकारा मिला है। recent visitors 131

नीचे जहरीली गैस की पाइप लाइन से हो सकता है रिसाव, राजस्थान-जैसलमेर में रेगिस्तान फाड़कर निकला पानी

जैसलमेर। जैसलमेर में मोहनगढ़ नहरी क्षेत्र में शनिवार को ट्यूबवेल खुदाई के दौरान पानी का फव्वारा फूट गया। पानी करीब 50 घंटों तक लगातार उसी रफ्तार से बाहर निकलता रहा। किसी के समझ नहीं आया है कि आखिर ये कैसे हो रहा है? शनिवार सुबह पांच बजे धरती फाड़कर निकलना शुरू हुआ पानी सोमवार की सुबह सात बजे अपने आप बंद हो गया। इधर, उप तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट ललित चारण ने बताया कि जैसलमेर के मोहनगढ़ उप तहसील के 27 बीडी के जोरा माइनर पर ट्यूबवेल खोदते समय जमीन से पानी निकलने की घटना हुई थी। इसके बाद पानी का रिसाव अपने आप बंद हो गया है। फिर रिसाव की आशंका हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस जगह किसी भी वक्त रिसाव फिर से शुरू हो सकता है। ऐसे में जमीन के नीचे जहरीली गैस का भी रिसाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि जमीन धंसने और विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है। इसलिए जिला कलेक्टर ने क्षेत्र में धारा 163 लगाई थी, जोकि अभी भी प्रभावी है। ग्रामीणों में खौफ बता दें कि एक किसान के खेत में ट्यूबवेल के लिए बोरिंग का काम चल रहा था। इस दौरान अचानक जमीन फट गई और पानी का तेज फव्वारा फूट पड़ा। ऐसे में मशीन और ट्रक जमीन में दफन हो गए। वहीं जमीन से भारी प्रेशर के साथ पानी निकलने लगा। यह मंजर देखकर ग्रामीण भी डर गए। आमजन के आवागमन पर अस्थाई रोक जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत आदेश जारी कर मोहनगढ़ की सुथार मंडी के 27 बीड़ी क्षेत्र में पानी की अनियतंत्रित निकासी वाले बोरवेल के 500 मीटर परिधि को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर आम नागरिकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर पवन कुमार ने बताया कि अनियंत्रित निकासी वाले बोरवेल का रविवार को केयर्न एनर्जी कंपनी के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया है।अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने बताया कि मोहनगढ़ विकास अधिकारी द्वारा भराव क्षेत्र से पानी निकासी के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। वहीं जोधपुर विद्युत वितरण निगम के द्वारा जलभराव क्षेत्र में आने वाली बिजली लाइनों की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। recent visitors 75

खेड़ावदा ग्राम पंचायत ने गाँव को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील का खेड़ावदा गाँव आज पूरे जिले के लिए एक मिसाल बन चुका है। यहाँ की ग्राम पंचायत ने गाँव को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की हैं। स्वच्छता और साफ-सफाई के साथ अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को जोड़कर, खेड़ावदा को एक संपूर्ण 'ओडीएफ प्लस' मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया गया है। उज्जैन जिले में 726 ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम है। ओडीएफ प्लस ग्राम की निरंतरता बनाए रखने हेतु ग्राम पंचायत में स्वच्छता के साथ अन्य घटकों को समाहित किया जा रहा है, जिससे एक स्वच्छ सुजल आत्मनिर्भर ग्राम निर्मित हो। गाँव में स्वच्छता का जन अभियान स्वच्छता को एक बार का काम मानने के बजाय, इसे ग्रामीणों की आदत में बदलने के लिए जन अभियान चलाया। इस अभियान के तहत, बच्चों की टोलियाँ और महिलाओं के समूह गाँव के घर-घर जाकर कचरे के पृथक्करण (सूखा और गीला) की प्रक्रिया को समझाते है। लोगों को समझाया कि सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्र करने से उनका निष्पादन आसानी से किया जा सकता है। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था पंचायत ने मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छ पेयजल का महत्व समझते हुए आर.ओ. प्लांट और पेयजल टंकी की व्यवस्था की। गाँव का कोई भी व्यक्ति मात्र 6 रुपए देकर पूरे महीने स्वच्छ पानी ले सकता है। इससे न केवल गाँव के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ बल्कि पंचायत के प्रति उनका विश्वास भी बढ़ा। शिक्षा में स्वच्छता का समावेश ग्राम के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। शिक्षकों ने नियमित रूप से बच्चों को स्वच्छता के पाठ पढ़ाए, जिससे स्वच्छता का संदेश नई पीढ़ी में गहराई से उतरा। कचरा प्रबंधन और रोजगार ग्राम पंचायत ने बैंक से ऋण लेकर एक कचरा वाहन खरीदा और हर घर से कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था की। एकत्रित कचरे को पृथक कर गीले कचरे से खाद तैयार की गई, जिसे गाँव के किसान कृषि के लिए इस्तेमाल करते हैं। सूखे कचरे को कबाड़ में बेचकर सफाईकर्मियों के मानदेय की व्यवस्था की गई। गाँव के हर घर में डस्टबिन रखने के लिए प्रेरित किया गया ताकि लोग कचरे को खुले में न फेंकें। स्वच्छता के ढाँचे का निर्माण ग्राम में सी.सी. रोड, सामुदायिक स्वच्छता परिसर और आर.सी.सी. नालियों का निर्माण किया गया, जिससे बारिश के पानी की निकासी आसानी से हो सके। नालियों के अंतिम सिरे पर सामुदायिक सोक पिट बनाए गए जिससे पानी जमा न हो और सड़कों पर न फैले। सुरक्षा और सुंदरता का समावेश गाँव में सुरक्षा के लिए सभी चौराहों और शासकीय कार्यालयों में सी.सी.टीवी कैमरे लगाए गए हैं। विद्यालयों में भी सी.सी.टीवी, आर.ओ. वॉटर, और बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण किया गया है। बच्चों को हाथ धुलाई और स्वच्छता की आदतों के प्रति जागरूक किया गया है। कला के माध्यम से स्वच्छता का संदेश गाँव में कचरे से कलात्मक वस्तुएँ बनाकर गाँव की सुंदरता को बढ़ाया गया। इससे गाँव में स्वच्छता के साथ कलात्मकता और सौंदर्य का भी समावेश हुआ, जो अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। इंटरनेट में भी आत्मनिर्भर डिजिटल इंडिया की ओर कदम बढ़ाते हुए, ग्राम पंचायत खेड़ावदा को पूर्ण रूप से वाईफाई जोन बनाकर इन्टरनेट से कनेक्ट किया गया है एवं सभी चौराहों व शासकीय कार्यालयों पर सी.सी.टी.वी. केमरे लगाये गये है। खेड़ावदा आज एक आदर्श गाँव का प्रतीक है। यह कहानी बताती है कि कैसे एक गाँव अपने प्रयासों से स्वच्छ, सुजल और आत्मनिर्भर बन सकता है। खेड़ावदा की यह पहल अन्य गाँवों के लिए एक मॉडल है और इसका ग्राम पंचायतों द्वारा भी अनुकरण किया जा रहा है।   recent visitors 189