क्या मध्य प्रदेश में फिर से भारतीय किसान संघ सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतरा नजर आएगा ,धान की MSP 3100 रुपये करने की मांग

Will the Bharatiya Kisan Sangh (BKS) once again take to the streets with tractors in Madhya Pradesh, demanding an MSP of Rs 3,100 for paddy?

विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव 

जबलपुर। मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का ही एक अनुसांगिक संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) सड़कों पर उतरा है. दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने अनाज खरीदी के लिए भावांतर योजना शुरू की है. किसान संगठन का कहना है कि इस योजना से किसानों को नुकसान है और वह चाहते हैं की पूरी खरीदी समर्थन मूल्य पर हो इसके साथ ही किसानों ने धान का समर्थन मूल्य को ₹3100 किए जाने की मांग की है. जबलपुर में किसान संगठन ने ट्रैक्टर रैली निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया.

धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपये किये जाने की मांग

मध्य प्रदेश में भाजपा से जुड़े किसानों के संगठन ने जबलपुर में मंगलवार एक ट्रैक्टर रैली निकाली. इस ट्रैक्टर रैली में सैकड़ों की तादाद में किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर जबलपुर कृषि उपज मंडी से रैली के रूप में निकले और शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए जबलपुर के घंटाघर चौक पर पहुंचे. भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी राघवेंद्र पटेल ने बताया कि “दरअसल राज्य सरकार ने चुनाव के वक्त कहा था कि मध्य प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार ने धान के समर्थन मूल्य को मात्र 2,461 रुपए तक ही बढ़ाया है. हमारी मांग है कि धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाना चाहिए.”

भावांतर योजना फ्लॉप योजना: राघवेंद्र पटेल

वहीं, राज्य सरकार ने बीते दिनों भावांतर योजना शुरू की है जिसके तहत यदि कृषि उपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर नहीं हो पाती है तो भाव का अंतर सरकार किसान के खाते में डालेगी. राघवेंद्र पटेल का कहना है कि यह एक फ्लॉप योजना है और इससे किसान का फायदा नहीं होता. इसलिए उन्हें भावांतर नहीं चाहिए बल्कि उनका धान, गेहूं, चना समेत सभी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए.

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी ने बताया कि “आज यह हमारा शक्ति प्रदर्शन था और यह शक्ति प्रदर्शन पूरे प्रदेश में तहसील स्तर से लेकर देश की राजधानी तक में किया जाता है ताकि सरकार के सामने किसान अपनी एकजुटता पेश कर सकें. हमारे कई मुद्दे राज्य सरकार के सामने रखे हुए हैं और कुछ मुद्दों पर किसानों का केंद्र सरकार के सामने मतभेद है इसलिए आज के दिन हर साल हम शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं.”

मध्य प्रदेश में किसानों की परेशानियां

भारतीय किसान संघ के नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश का किसान राज्य सरकार से बिजली को लेकर परेशान है. वहीं, खाद की पूरी उपलब्धता और खाद वितरण में नए-नए प्रयोग भी किसान को परेशान कर रहे हैं. इन सब मुद्दों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए, लेकिन भावांतर और समर्थन मूल्य पर किसान संगठन के तेवर गर्म नजर आ रहे हैं.

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा लगभग 18% है और पीरियोडिक लेबर फोर्स (PLFS) सर्वे की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार आज भी भारत के 46% लोग कृषि के जरिए रोजगार प्राप्त करते हैं. हालांकि पहले की अपेक्षा यह निर्भरता घटी है. आज भी आधी आबादी कृषि पर आधारित है. ऐसी स्थिति में सरकार को ग्रामीण विकास और कृषि को फायदे का धंधा बनाने के लिए अपनी वर्तमान योजनाओं में परिवर्तन करना ही पड़ेगा.

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