बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को ब्रिटेन ने दिया जोर का झटका, जिस देश में पहले पहुंचीं, वहीं शरण लें

नई दिल्ली बांग्लादेश की कल तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना आज शरण की मोहताज हैं। वह 5 अगस्त को पीएम पद से इस्तीफा देकर भारत आ गई थीं और फिलहाल यहीं हैं। कहा जा रहा है कि वह ब्रिटेन में शरण लेना चाहती हैं, जहां उनकी बहन और बेटे रहते हैं। लेकिन इस बीच ब्रिटेन से शरण की उम्मीद लगाए शेख हसीना को झटका लगा है। ब्रिटेन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमारे इमिग्रेशन रूल्स किसी व्यक्ति को शरण के लिए आने या फिर अस्थायी तौर पर रहने की परमिशन नहीं देते। ब्रिटिश गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की शरण तो किसी को भी उस देश में ही मांगनी चाहिए, जहां वह सबसे पहले सुरक्षित पहुंचा हो। इस तरह ब्रिटेन ने एक तरह से शेख हसीना को भारत में ही शरण मांगने का सुझाव दिया है। सर कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाले ब्रिटेन से विकल्प खारिज होने की सूरत में शेख हसीना को अब किसी नए विकल्प पर विचार करना होगा। अब तक भारत सरकार की ओर से शेख हसीना के ठहरने पर कुछ कहा नहीं गया है। लेकिन बांग्लादेशी मीडिया का कहना है कि शेख हसीना अंतरिम ठहराव के लिए ही भारत पहुंची थीं और वह यहां से किसी और देश जा सकती हैं। लेकिन अब तक वह हिंडन एयरबेस में ही ठहरी थीं। कुछ वक्त पहले उन्हें दिल्ली में ही किसी सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया है। ब्रिटिश गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि यदि किसी को संरक्षण चाहिए तो जिस भी देश में वह सबसे पहले पहुंचे, वहीं उसे शरण मांगनी चाहिए। अब तक यह भी साफ नहीं है कि शेख हसीना ने ब्रिटेन से शरण मांगी है अथवा नहीं। 76 साल की शेख हसीना को हिंसक प्रदर्शनों के चलते सोमवार को देश छोड़ना पड़ा था और उससे ठीक पहले इस्तीफा दिया था। नौकरियों में कोटे के विरोध में वहां ऐसा आंदोलन हुआ कि 300 से ज्यादा लोग अब तक मारे जा चुके हैं। यही नहीं शेख हसीना के निकलने के बाद भी देश में हिंसा का दौर जारी है और करीब 100 लोग फिर मारे जा चुके हैं। कहा जा रहा है कि हसीना को निकलने के लिए सेना से 45 मिनट मिले थे। शेख हसीना अब जाएं तो जाएं कहां यदि शेख हसीना को ब्रिटेन में शरण नहीं मिलती है तो उन्हें किसी और देश का रुख करना होगा। इसके अलावा तब तक भारत में ही रहना होगा। सूत्रों का कहना है कि भारतीय एजेंसियां भी चाहती हैं कि शेख हसीना यहां ज्यादा दिन न रहें। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके यहां ठहरने से बांग्लादेश में भारत के खिलाफ माहौल बन सकता है। भारत के लिए बांग्लादेश से अच्छे संबंध रखना जरूरी है क्योंकि पाकिस्तानी एजेंसियां वहां हावी हो सकती हैं। ऐसे में हसीना की कीमत पर भारत सरकार ढाका से संबंध नहीं बिगाड़ना चाहेगी। recent visitors 109

रायपुर रेलवे स्टेशन पर टला हादसा, आधा दर्जन रेल यात्री लिफ्ट में फंसे, लिफ्ट का दरवाजा तोड़ निकाला बाहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के रायपुर रेलवे स्टेशन से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां प्लेटफार्म नंबर पर एक पर लगे लिफ्ट में आधा दर्जन रेल यात्री फंस गए, जिससे स्टेशन पर हड़कंप मच गया। फंसे हुए लोगों को दरवाजा तोड़कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। जानकारी के अनुसार दूसरे प्लेटफार्म से जब ओवरब्रिज क्रॉस कर यात्री प्लेटफार्म नंबर एक पर आ रहे थे, इसी दौरान अचानक, लिफ्ट में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इससे लिफ्ट रुक गई। लिफ्ट के रुक जाने से उसमें सवार रेल यात्रियों में घबराहट फैल गई। लिफ्ट में एक बच्‍चा सहित पांच यात्री सवार थे। तुरंत इस घटना की जानकारी स्‍टेशन अधीक्षक को दी गई। स्टेशन प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किया और लिफ्ट का दरवाजा तोड़कर फंसे हुए रेल यात्रियों को बाहर निकाला। इस घटना ने स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। घटना के बाद लिफ्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से इस असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। recent visitors 92

छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री विष्णु देव बोले-बच्चे की पहली पाठशाला है परिवार, मेगा पालक शिक्षक बैठक में पहुंचे

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय बंदरचुंआ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित मेगा पालक शिक्षक बैठक कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां उन्होंने पालक शिक्षक बैठक में शामिल होकर पालकों से कार्यक्रम को लेकर उनके अनुभव जाने। बच्चों के माता पिता के साथ कुछ बच्चों के दादा दादी भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि  परिवार किसी भी बच्चे की पहली पाठशाला है और माता पिता पहले गुरु। शासकीय स्कूलों में पालक शिक्षक संवाद का कार्यक्रम शुरू किया गया है जिससे पालकों को उनके बच्चों के पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी मिले और बच्चे के शैक्षणिक प्रगति में उनकी भी सहभागिता हो। उन्होंने बताया कि आज स्कूलों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत सी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने पालकों से अनुरोध किया कि अपने बच्चों के शिक्षकों से सतत संपर्क में रहें। इससे बच्चे के पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी मिलेगी ही साथ ही आपकी सहभागिता से बच्चे के गलत संगत में जाने की आशंका भी नही होगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पालकों को सम्मानित भी किया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी साढ़े पांच हजार संकुलों में मेगा पालक शिक्षक मीटिंग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री महोदय ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात रखी कि प्राइवेट स्कूल में पीटीएम आयोजित होता है लेकिन सरकारी स्कूलों में यह नही होता है। इसे हमें लागू किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर यह पालक शिक्षक बैठक आयोजित किया जा रहा है। यह बच्चे के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाएगा। पालक शिक्षक बैठक का मुख्य उद्देश्य है पढ़ाई लिखाई और स्कूली गतिविधियों में शिक्षकों के साथ पालकों की सहभागिता हो। दादा ने बताया-मैं भी यहां से पढ़ा मेरा पोता भी यहीं से पढ़ रहा – डोंडापानी के श्री हरिसेवक चौहान ने बताया कि वे खुद इसी स्कूल से पढ़े हैं और अब उनका एक पोता यहां से पढ़कर अभी एमएससी कर रहा है। वहीं दूसरा पोता अभी जीव विज्ञान विषय के साथ कक्षा 11वीं में है। उन्होंने इस कार्यक्रम को शिक्षा गुणवत्ता बेहतर करने की दिशा में एक शानदार पहल बताया। उन्होंने कहा कि हमारे शिक्षक कहते थे मैं आपको तो पढ़ा ही रहा हूं आपके साथ आपके बच्चों की अच्छी शिक्षा का माध्यम भी बन रहा हूं क्योंकि आप शिक्षित होंगे तो आपका बच्चा भी निश्चित रूप से शिक्षित होगा। पालक शिक्षक के बीच संवाद से बच्चे के शिक्षा के स्तर की निरंतर मॉनिटरिंग होगी और उनकी नींव मजबूत होगी। इसी प्रकार फिलसिता कुजूर ने बताया कि मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नही हूं लेकिन अपनी पोती को अच्छे से पढ़ाने लिखाने का प्रयास कर रहे हैं। पालक शिक्षक बैठक सभी पालकों को उनके बच्चों के बारे में जानकारी मिलेगी जिससे वे घर में भी बच्चों पर मेहनत कर पाएंगे। recent visitors 97

दूसरे देशों के साथ जर्मनी की वायु सेना भी पहली बार भारतीय जमीन पर सैन्य अभ्यास में शामिल हो रही है

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना पहली बार कई देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही है. इसमें दूसरे देशों के साथ जर्मनी की वायु सेना भी पहली बार भारतीय जमीन पर सैन्य अभ्यास में शामिल हो रही है. दुनिया के कई हिस्सों से दर्जनों युद्धक विमानों का बेड़ा दक्षिण भारत के सुलुर एयरबेस पर पहुंच चुका है. मंगलवार से शुरू हो रहा यह सैन्य अभ्यास कई मामलों में अनोखा है. इसे तरंग शक्ति नाम दिया गया है. इसमें जर्मनी समेत 10 देश अपने विमानों के साथ हिस्सा ले रहे हैं. इस मौके पर जर्मन रक्षा मंत्री भी भारत आए हैं. पर्यवेक्षकों को भी मिला दें तो कुल 18 देशों की इसमें भागीदारी है. दक्षिण एशिया में इस तरह के सैन्य अभ्यास कम ही होते हैं. भारतीय वायु सेना ने 51 मित्र देशों को इस सैन्य अभ्यास के लिए निमंत्रण भेजा था. यह अभ्यास दो चरणों में हो होगा. पहला चरण मंगलवार, 6 अगस्त से 14 अगस्त तक है. इसमें जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन भारत के साथ युद्ध की अलग-अलग स्थितियों का अभ्यास करेंगे. भारत और जर्मनी रक्षा संब्ध बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं तरंग शक्ति का दूसरा चरण इसी महीने के आखिर में होना है. इसके लिए राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर तैयारी चल रही है. इसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, सिंगापुर, ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका हिस्सा लेंगे. पिछले हफ्ते भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ एयर मार्शल एपी सिंह ने पत्रकारों से कहा, "इस अभ्यास का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हमारे मित्रों के साथ रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करना है." जर्मन विमानों पर रहेगी नजर पहली बार जर्मनी के विमान इस अभ्यास के लिए भारत आए हैं. इस अभ्यास से पहले ही दोनों देश अपने रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में बढ़ने का एलान कर चुके हैं. जर्मन वायु सेना लुफ्तवाफे यूरोफाइटर टायफून जेट विमानों का बेड़ा ले कर आई है. इसके साथ ही एयरबस ए400एम परिवहन विमान को भी भारतीय अभ्यास में तैनात किया गया है. भारतीय सेना अंतरराष्ट्रीय बाजार में मध्यम आकार के परिवहन विमानों की तलाश में है. वायु सेना के रिटायर हो चुके एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने डीडब्ल्यू को बताया, "भारतीय वायु सेना मध्यम आकार के परिवहन विमानों की तलाश में है. इसके लिए तीन विमानों पर नजर हैः ब्राजील का एमब्रेयर सी-390, एयरबस ए400एम जिसमें जर्मनी साझीदार है और लॉकहीड सी-130 जो अमेरिका की ओर से पहले ही उड़ान भर रहे हैं." चोपड़ा ने यह भी कहा, "हमने जर्मनों और फ्रांसीसियों के साथ मध्यपूर्व में कुछ अभ्यासों के दौरान एयरबस ए400एम को पहले उड़ाया है, वहां इन देशों ने हमें ये विमान दिखाए थे. देखते हैं आगे यह कैसे बढ़ता है." भारत को लेकर जर्मन कंपनियों की उम्मीद बढ़ी रक्षा पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह अभ्यास भारत को यूरो फाइटर और ए400एम को वास्तविक परिस्थितियों में परखने का एक अच्छा मौका देगा. दिल्ली में मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की एसोसिएट फेलो स्वास्ति राव का कहना है, "जर्मनी के ए400एम की भार उठाने की क्षमता 37 टन है, अगर आप भारत के टेंडर को देखें तो, हमारी जो जरूरत है, जर्मनी उससे थोड़ा ज्यादा दे रहा है जो भारत के लिए अच्छा है." राव ने ध्यान दिलाया कि भारत को मध्यम आकार के परिवहन विमान की जरूरत लद्दाख इलाके में चीन के साथ चल रहे तनाव की वजह से है. राव का कहना है, "अगर आप जानते हैं कि बेहद ऊंचाई वाले ये इलाके कितने अहम हैं और कठिन हैं तो उन परिस्थितियों में ऐसे भार उठाने की क्षमता वाले विमान हमारे हक में होंगे और हम बेहतर योजना बना सकेंगे." राव के मुताबिक समय की भूमिका अहम होती है और 2-3 विमानों के बार-बार चक्कर लगाने से ऐसे हालात में काम नहीं बनता. इसकी बजाय एक ही साथ सब कुछ ले जाने की क्षमता काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. भारत क्या हासिल करना चाहता है बड़े अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के साथ भारत अपने आपको भारत प्रशांत श्रेत्र में एक मजबूत ताकत के रूप में दिखाना चाहता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रूस पर निर्भर रही भारतीय वायु सेना में इस विशाल सैन्य अभ्यास के जरिए पश्चिमी देशों के ज्यादा उन्नत हथियारों के शामिल होने से आए बदलाव को भी दिखाने की कोशिश हो रही है. दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना ने इस अभ्यास के जरिए अपनी बढ़ती ताकत का भी प्रदर्शन किया है. चोपड़ा का कहना है, "इस तरह के जटिल और कई तरह की ताकत वाले अभ्यास में बड़ी योजना बनानी पड़ती है. कई सारे बड़े ताकत वाले विमान उड़ान भरेंगे. कई कई महीनों तक योजना बनाने और वायु शक्ति के मामले में आपसी समझ को बढ़ाने के साथ ही वास्तविक अभियानों पर हमारा ध्यान है. यह सब सुलुर में दिखेगा." जर्मनी का क्या फायदा है? जर्मनी का भारत के प्रति रुख बदल रहा है. खासतौर से यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जर्मनी भारत के साथ रक्षा संबंधों को आगे बढ़ा रहा है. जर्मनी की दिलचस्पी भारत प्रशांत क्षेत्र में भी है क्योंकि चीन उस इलाके में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और इलाके के देशों पर उसने दबाव बढ़ाने की नीति अपनाई है. इस स्थिति में भारत के साथ रक्षा समझौते काफी अहम साबित होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत दिलचस्पी होते हुए भी भारत प्रशांत क्षेत्र में जर्मनी के लिए अकेले बहुत कुछ करना संभव नहीं होगा क्योंकि जर्मन मॉडल डिफेंस प्लेयर का मॉडल नहीं है. जर्मनी के पास बेहतहीन रक्षा उद्योग है लेकिन मजबूत सेना नहीं.   recent visitors 91

22 से 30 अगस्त तक भोपाल में एयरफोर्स की होने वाली अग्निवीर भर्ती की भर्ती, , साढ़े सात हजार युवा होंगे शामिल

भोपाल राजधानी Bhopal के मोतीलाल नेहरू Police स्टेडियम में आगामी 22 अगस्त से 30 अगस्त तक प्रदेश के 15 जिलों Bhopal , अशोकनगर, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पन्ना, पांढुर्ना, रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा के पुरूष उम्मीदवारों के लिए अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन रैली का आयोजन किया जाएगा. साथ ही Madhya Pradesh एवं छतीसगढ़ के सभी जिलों के लिए सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी नर्सिंग सहायक और धर्मगुरू की भी सेना भर्ती रैली का आयोजन साथ में किया जाएगा. रोजगार तलाश रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. राजधानी भोपाल में 22 से 30 अगस्त तक सेना में भर्ती का आयोजन होने जा रहा है. भोपाल के मोतीलाल नेहरू पुलिस स्टेडियम में सेना भर्ती का आयोजन किया जाएगा. इस भर्ती प्रक्रिया में मध्य प्रदेश के 15 जिलों के युवा शामिल हो सकेंगे. सेना भर्ती कार्यालय भोपाल से प्राप्त जानकारी अनुसार, 22 अगस्त से 27 अगस्त तक अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्नि वीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक और अग्निवीर ट्रेड्समैन भर्ती का आयोजन होगा. युवा इस भर्ती प्रक्रिया में ले सकेंगे भाग इसी तरह 29 अगस्त को सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी, नर्सिंग सहायक की रैली का आयोजन किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि सेना के जरिये अप्रैल 2024 में सामान्य ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया था. ऑनलाइन परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार शारीरिक दक्षता सहित अन्य भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भर्ती रैली में भाग ले सकेंगे.  15 जिलों के युवा हो सकेंगे शामिल सेना भर्ती के लिए मध्य प्रदेश के 15 जिलों के युवा शामिल हो सकेंगे. इन जिलों में अशोक नगर, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पन्ना, पांढुर्णा, रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा के पुरुष उम्मीदवारों के लिए भर्ती आयोजन किया जाएगा. इसके तहत अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन के लिए भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा. इसके साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के लिए सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी, नर्सिंग सहायक और सेना भर्ती रैली का आयोजन साथ में ही किया जाएगा. एक दिन पहले तक प्रवेश भर्ती रैली में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र पर अंकित तारीख के एक दिन पहले विश्राम स्थली में रात 9 बजे तक ही प्रवेश दिया जाएगा. भर्ती रैली के लिए अभ्यर्थियों की दौड़ का आयोजन रात्रि 2 बजे से प्रारंभ होगा. ये डॉक्यूमेंट्स लाना जरूरी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रवेश पत्र और सभी दस्तावेज रैली अधिसूचना के अनुसार, साथ में आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर भी लेकर आना अनिवार्य है. भर्ती रैली में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र संबंधितों को ईमेल पर भेज दिया गया है. recent visitors 132

मुरैना में आरोपितों ने पहले पीड़ित को धमकाया और फिर रात को गोलीबारी की, ग्रामीणों ने किया हाइवे जाम

मुरैना मुरैना के बरेह गांव में चार आरोपितों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर एक व्यक्ति की हत्या कर दी। आरोपितों ने पहले पीड़ित को धमकाया और फिर रात को गोलीबारी की। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया, लेकिन आरोपितों के मकान तोड़ने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अंबाह-मुरैना रोड पर जाम लगा दिया। फायरिंग करने से मना करने पर मारी गोली अंबाह थाना क्षेत्र के बरेह गांव में प्रदीप सिंह तोमर, रामवरन सिंह तोमर के घर के सामने फायरिंग कर रहा था, जब रामवरन ने रोका तो धमकी देकर चला गया। देर रात को आरोपित आकर घर के सामने गाली गलौच किया और फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली अधेड़ के सीने में जा लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपित मौके से भाग निकले। पुलिस ने रामवरन के भाई राजवीर तोमर की शिकायत पर आरोपित प्रदीप सिंह तोमर, अमर सिंह तोमर व दो अज्ञात पर हत्या का मामला दर्ज किया है। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार की दोपहर ग्रामीणों ने बरेह गांव पर मुरैना-अंबाह रोड को जाम कर दिया। आरोपितों के मकान तोड़ने की मांग रामवरन सिंह तोमर का सुबह होने पर पीएम कराया गया। इस बीच स्वजन व ग्रामीणों की मांग थी कि आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके मकानों को तोड़ा जाए। इस मांग को लेकर दोपहर एक बजे के करीब ट्रैक्टर में शव रखकर ग्रामीणों ने बरेह गांव पर अंबाह-मुरैना रोड नेशनल हाइवे पर जाम लगा दिया। पुलिस एसडीओपी रवि भदौरिया, टीआइ व पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन शाम पांच बजे तक ग्रामीण एक ही मांग कर रहे थे कि आरोपितों के मकान तोड़े जाएं। recent visitors 74

बांग्लादेश में तख्तालपट के बाद पाकिस्तानी मीडिया भी खुश नजर आ रहा है और इसे असली आजादी बता रहा

ढाका बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ बताया जा रहा है। पाकिस्तान में पलने वाले कट्टरपंथी संगठनों ने हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को हवा देने का पूरा काम किया। वहीं अब बांग्लादेश में तख्तालपट के बाद पाकिस्तानी मीडिया भी खुश नजर आ रहा है और इसे असली आजादी बता रहा है। बता दें कि बांग्लादेश में आर्मी चीफ जनरल वकाल-उज-जमान ने अंतरिम सरकार बनाई है और नोबल विजेता यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया है। शेख हसीना के इस्तीफे के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है। पाकिस्तानी मीडिया की बात करें तो डॉन न्यूज ने अपने संपादकीय में इसे 'हसीना का पतन' बताया है। इस संपादकीय में कहा गया कि अगर सेना ने मौके पर दखल ना दिया होता तो स्थिति और खराब हो जाती। इस संपादकीय में कहा गया है कि विपक्ष को पिछले 15 सालों में दबाया गया और यह तख्तापलट उसी दबे हुए आक्रोश का नतीजा है। पाकिस्तान में 'ट्रिब्यून' अखबार के फ्रंट पेज पर इसे बांग्लादेश की जनता की जीत बताया गया है। जियो टीवी नेटवर्क ने लीड स्टोरी में कहा, 'खूनी प्रदर्शन के बाद पीएम शेख हसीना ने छोड़ा पद, बांग्लादेश से भाग निकलीं।' शेख हसीना की तस्वीर लगाई गई है जिसमें वह दुखी दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर इसे भारत के लिए झटका बताया जा रहा है। एक टीवी चैनल पर अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मादिहा लोधी ने कहा कि हसीना भारत की ओर और पाकिस्तान के खिलाफ थीं। जनता ने उन्हें ताकत दिखा दी। द ट्रिब्यून अखबार ने बांग्लादेश की सत्ता संभालने वाले सेना प्रमुख जनरल वकार का गुणगान किया है। बांग्लादेश के अखबारों ने अलग-अलग तरह से इसे पेश किया है। 'प्रोथोम आलो' ने लिखा है कि शेख हसीना अंत में भी बल प्रयोग करना चाहती थीं और रक्तपात करके भी सत्ता में बनी रहना चाहती थीं। 'सामयिक' पत्रिका ने लिखा है कि यह छात्रों की खून से सनी जीत है। 'नया दिगंत' ने मोहम्मद यूनुस को कोट करते हुए कहा है कि यह छात्रों की दूसरी और असली आजादी है। 'न्यू एज' ने लिखा है कि बांग्लादेश में जल्द बनेगी राष्ट्रीय सरकार। recent visitors 84