Wednesday, July 8, 2026 5:13 am

अब्बास अंसारी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की जमानत याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। कोर्ट ने अब्बास की जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस भी जारी किया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और संदीप मेहता की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी करते हुए उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक अब्बास अंसारी की विशेष अनुमति याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 9 मई के अपने आदेश में अब्बास की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, उसने निचली अदालत को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द सुनवाई पूरी करे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा था, “यह अदालत पीएमएलए की धारा 45 के संदर्भ में पहली नजर में यह संतुष्टि देने में असमर्थ है कि आवेदक दोषी नहीं है या फिर वह जमानत पर रहते समय कोई अपराध नहीं कर सकता।” कोर्ट ने अब्बास अंसारी के खिलाफ मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश किए गए मनी ट्रेल का भी संज्ञान लिया। बयान में कहा गया है कि मनी ट्रेल अंसारी को दो कंपनियों- मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन और मेसर्स आगाज से धन के लेनदेन से जोड़ता है। ईडी का आरोप है कि अंसारी ने इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया था। ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तीन अलग-अलग एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। पहले आपराधिक मामले में, यह आरोप लगाया गया था कि एक निर्माण कंपनी के भागीदारों ने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण किया था। वहीं, दूसरी एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मुख्तार अंसारी ने एक स्कूल बनाने के लिए विधायक कोष से धन लिया था। लेकिन, कोई स्कूल नहीं बनाया गया और जमीन का इस्तेमाल कृषि के लिए किया गया। तीसरी एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अंसारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी जमीन हड़प ली और एक अवैध मकान बना लिया।     recent visitors 79

जलवायु परिवर्तन के कारण हुई 10 फीसदी अधिक भारी बारिश वायनाड में भूस्खलन का कारण : अध्ययन

नई दिल्ली  केरल के पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील वायनाड जिले में दो हफ्ते पहले बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन के लिए भारी बारिश जिम्मेदार थी, जो जलवायु परिवर्तन के कारण 10 फीसदी और तीव्र हो गई थी। भारत, स्वीडन, अमेरिका और ब्रिटेन के 24 अनुसंधानकर्ताओं का हालिया अध्ययन कुछ यही बयां करता है। अध्ययन के मुताबिक, वायनाड में लगभग दो महीने की मानसूनी बारिश के चलते पहले से ही अत्यधिक नम मिट्टी पर एक ही दिन में 140 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा, जिससे क्षेत्र विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आ गया और कम से कम 231 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। रेड क्रॉस रेड क्रिसेंट क्लाइमेट सेंटर में जलवायु जोखिम सलाहकार माजा वाह्लबर्ग ने कहा, “भूस्खलन का कारण बनी बारिश वायनाड के उस क्षेत्र में हुई, जो केरल में भूस्खलन के लिहाज से सबसे संदेनशील माना जाता है। जैसे-जैसे जलवायु गर्म हो रही है, और भी अधिक भारी बारिश की आशंका बढ़ रही है। यह तथ्य उत्तरी केरल में इसी तरह के भूस्खलन से निपटने की तैयारियों को पुख्ता करने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।” मानव जनित कारणों से होने वाले जलवायु परिवर्तन का असर आंकने के लिए ‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ (डब्ल्यूडब्ल्यूए) के अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने बेहद उच्च रेजोल्यूशन वाले जलवायु मॉडल का विश्लेषण किया, ताकि अपेक्षाकृत छोटे अध्ययन क्षेत्र में बारिश के स्तर का सटीक अंदाजा लगाया जा सके। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ये मॉडल जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की तीव्रता में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने की तरफ इशारा करते हैं। उन्होंने बताया कि अध्ययन में शामिल मॉडल यह अनुमान भी लगाते हैं कि अगर वैश्विक तापमान वृद्धि 1850 से 1900 तक के औसत तापमान से दो डिग्री सेल्सियस अधिक रहती है तो बारिश की तीव्रता में चार फीसदी और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि मॉडल के नतीजों को लेकर उच्च स्तर की अनिश्चितता’ है, क्योंकि अध्ययन क्षेत्र जटिल बारिश और जलवायु पैटर्न के साथ छोटा और पहाड़ी है। उन्होंने बताया कि गर्म वातावरण में आर्द्रता का स्तर अधिक होता है, जो भारी बारिश का कारण बनता है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, वैश्विक तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से वातावरण में नमी को कैद करने की क्षमता लगभग सात प्रतिशत बढ़ जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों के लगातार बढ़ते उत्सर्जन से पृथ्वी की सतह का औसत वैश्विक तापमान पहले ही लगभग 1.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया भर में बाढ़, सूखा और लू जैसी चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि के पीछे यही कारण है। डब्ल्यूडब्ल्यूए के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि वायनाड में वन आवरण, भूमि उपयोग परिवर्तन और भूस्खलन जोखिम के बीच संबंध मौजूदा अध्ययनों से भले ही पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन निर्माण सामग्री के लिए उत्खनन और जंगलों के दायरे में 62 प्रतिशत की कमी जैसे कारकों ने भारी बारिश के दौरान पहाड़ों को भूस्खलन के प्रति संभवत: अधिक संवेदनशील बना दिया है। अन्य अनुसंधानकर्ताओं ने भी जंगलों की कटाई, संवेदनशील पहाड़ियों में खनन और आर्द्रता का स्तर अधिक होने के कारण लंबे समय तक बारिश जैसे कारकों के संयोजन को वायनाड में भूस्खलन के लिए जिम्मेदार ठहराया है। कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीयूएसएटी) में उन्नत वायुमंडलीय रडार अनुसंधान केंद्र के निदेशक एस अभिलाष ने बताया था कि अरब सागर के गर्म होने से घने बादलों का निर्माण हो रहा है, जिससे केरल में कम अवधि में अत्यधिक भारी बारिश हो रही है और वहां भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) राष्ट्रीय दूरसंवेदी केंद्र की ओर से पिछले साल जारी भूस्खलन एटलस के मुताबिक, भारत में भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील 30 जिलों में से 10 केरल में हैं, और वायनाड इस मामले में 13वें स्थान पर है। ‘स्प्रिंगर’ पत्रिका में 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया था कि केरल में भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील इलाके पश्चिमी घाट क्षेत्र में मुख्यत: इडुक्की, एर्नाकुलम, कोट्टायम, वायनाड, कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में स्थित हैं। इसमें कहा गया था कि केरल में भूस्खलन की 59 फीसदी घटनाएं हरित क्षेत्र में हुईं। वायनाड में घटते वन क्षेत्र पर 2022 के एक अध्ययन से पता चला है कि 1950 से 2018 के बीच जिले में 62 प्रतिशत जंगल गायब हो गए, जबकि हरित क्षेत्र में लगभग 1,800 प्रतिशत की वृद्धि हुई।     recent visitors 83

स्वतंत्रता दिवस मनाने विद्यालय जा रहे नागौद में स्कूली बच्चों से भरा वlहन अनियंत्रित होकर पलट गया, 24 घायल

सतना मप्र के सतना जिले के नागौद में स्कूली बच्चों से भरा वlहन अनियंत्रित होकर पलट गया। इसमें 24 बच्‍चे घायल हो गए। वाहन पलटने के बाद से अफरातफरी का माहौल हो गया। घायल हुएसभी बच्चों को एंबुलेंस की मदद से शासकीय सिविल हॉस्पिटल नागौद भेजा गयाा है। अस्पताल में पुलिस बल मौजूद है। घटना परस्मानिया पठार सड़क मार्ग की बताई गई है। जानकारी मुताबिक के आदर्शी के नजदीक स्थित निजी विद्यालय का स्‍कूली वाहन पलट गया। बच्चों को नागौद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जिले के नागौद के परसमनिया पठार क्षेत्र में स्कूली बस पलट जाने के बाद दो दर्जन घायलों में से दो बच्चों को ज्यादा चोटें आई हैं। सभी बच्चों को नागौद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम कुशवाहा ने बताया कि नागौद के रहिकवारा स्थित बाल ज्ञान मंदिर आदर्शी की स्कूल बस गुरुवार की सुबह गुलौहा गांव के पास गुढ़ा चुनहाई पुलिया पर बेकाबू हो कर पलट गई।   बस के पलटने के बाद निकली बच्चों की चीख चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने मदद कर बच्चों को निकाला। हादसे की सूचना जसो थाना पुलिस को भी दी गई। बच्चों को एम्बुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया है। नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिभा यतेंद्र सिंह , एसडीएम एपी द्विवेदी, नागौद थाना प्रभारी ने अस्पताल पहुंच कर बच्चों का हाल जाना और इलाज की जानकारी ली। बारिश के बीच स्कूल बस स्लिप होकर पलट गई थाना प्रभारी अशोक पांडे ने बताया कि आदर्शी स्कूल के 24 बच्चे अलग-अलग गांवों से बस एमपी 19 पी 1201 में सवार हो कर स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान बारिश के बीच सड़क पर दौड़ रही स्कूल बस गुलौहा गांव के पास स्लिप होकर पलट गई। हादसे के बाद बच्चों में से एक के चेहरे पर चोट आई है जबकि एक के कंधे में फ्रैक्चर की आशंका है। शेष बच्चों को मामूली चोटें आई हैं। सभी का इलाज नागौद अस्पताल में चल रहा है। recent visitors 79

महिलाओं के लिए प्रदेश में बनेगा अलग उद्योग क्षेत्र , मिलेगी पार्थक जमीन

भोपाल मप्र ऐसा राज्य है, जहां पर हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे लाने का प्रयास प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। उनकी शिक्षा से लेकर शादी और जनप्रतिनिधि तक में बराबरी की भागीदारी तय करने के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब इसी कड़ी में उन्हें उद्योगपति बनाने के लिए प्रयास शुरु कर दिए गए हैं। इसके तहत अब प्रदेश में महिला उद्यमियों को सशक्त करने और आगे बढ़ाने के लिए उनके लिए विशेष आरक्षित औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना तैयार की गई है।  इस क्षेत्र में सिर्फ महिला उद्यमी ही अपने उद्योग स्थापित कर सकेंगी। इसके साथ ही उद्योग लगाने पर विशेष सुविधाएं भी दी जाएंगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग द्वारा इसके लिए काम शुरु कर दिया गया है। अब इस क्षेत्र के लिए जगह की तलाश की जा रही है। माना जा रहा है कि इसकी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा महिला उद्यमियों के सम्मेलन में की जा सकती है। अफसरों की माने तो इसके लिए जिन स्थानों पर विचार किया जा रहा है उसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर और देवास जिला शामिल है। इनमें से कहीं भी महिला उद्यमी पार्क बनाया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार एमएसएमई उद्यमों के लिए विभाग के पास 1500 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। यहां लैंड प्रीमियम पर 90 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है। जमीन आवंटन से लेकर इन्सेंटिव और अन्य लाभ लेने के लिए पूरी प्रक्रिया विभाग ने ऑनलाइन की है। इससे छोटे उद्यम करने वाली महिलाओं को इससे बहुत फायदा होगा। रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है एमएसएमई: कम लागत और बड़ा काम। यही वो तरीका है जो अर्थव्यवस्था को गति देकर मध्य प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) का विस्तार सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार इसे प्राथमिकता में ले और वो सभी सुविधाएं उपलब्ध कराए जो छोटे उद्योगों के लिए वातावरण बनाने का काम करें। सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। 194 औद्योगिक क्षेत्र केवल एमएसएमई के लिए बनाए गए हैं और प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर में क्लस्टर बनाए गए हैं। सरकार के अनुसार तीन लाख 54 हजार एमएसएमई इकाइयों को पंजीकृत किया है। इनमें 18.33 लाख नौकरियां उत्पन्न करने की क्षमता है। इसके साथ-साथ ग्रामीण कुटीर उद्योग पर भी फोकस करना होगा। स्थानीय स्तर पर इसको लेकर काफी संभावनाएं भी हैं। अभी 31 औद्योगिक विकास केंद्र स्थापित प्रदेश के 7 जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, रीवा और जबलपुर, उज्जैन, सागर को विकसित जिलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। राज्य में 25 विकासशील जिले हैं। मप्र सरकार द्वारा 31 औद्योगिक विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं।  प्रदेश में 10 साल में 30 लाख 13 हजार 41.607 करोड़ रुपये के 13 हजार 388 निवेश प्रस्ताव आए। इनमें तीन लाख 47 हजार 891 करोड़ रुपये के 762 पूंजी निवेश हुए हैं। इन पूंजी निवेश से प्रदेश में दो लाख सात हजार 49 बेरोजगार को रोजगार मिला है। इसी तरह वर्ष 2007 से अक्टूबर 2016 तक आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन पर 50.84 करोड़ रुपये व्यय किए गए और 366 औद्योगिक इकाइयों को 1224 करोड़ रुपये की अनुदान राशि दी गई। अधिकारियों के अनुसार एमएसएमई उद्यमों के लिए विभाग के पास 1500 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। यहां लैंड प्रीमियम पर 90 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है। जमीन आवंटन से लेकर इन्सेंटिव और अन्य लाभ लेने के लिए पूरी प्रक्रिया विभाग ने ऑनलाइन की है। इससे छोटे उद्यम करने वाली महिलाओं को इससे बहुत फायदा होगा। महिला उद्यमियों को मिलेगी यह सुविधाएं महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए जो सुविधाएं दी जाएंगी, उसमें  प्लांट, मशीनरी और भवन निर्माण पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी,  पेटेंट कराने के लिए 5 लाख तक की सहायता,  क्वालिटी सर्टिफिकेशन, एनर्जी ऑडिट आदि की फीस में छूट। अधोसंरचना विकास में 3 करोड़ तक की सहायता,  ईटीपी आदि बनाने में 1 करोड़ तक की सहायता प्रदेश में एमएसएमई की स्थिति – 42942 करोड़: कुल निवेश – 639045 करोड़: टर्नओवर – 2.3 लाख: मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं मध्यप्रदेश में – 1.5 लाख: सर्विस यूनिट – 2.2 लाख: ट्रेडिंग यूनिट – 1500 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध recent visitors 83

दोपहर 01:30 बजे से रात 09.07 तक राखी बांधने का उत्तम मुहूर्त, रक्षा बंधन पर भद्रा व पंचक का साया

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र या राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को उम्र भर रक्षा का वचन और उपहार देता है। रक्षाबंधन पर राखी भद्रा या पंचक में नहीं बांधी जाती है। इस साल राखी के दिन भद्रा व पंचक दोनों का साया है, ऐसे में लोगों के बीच राखी बांधने के मुहूर्त को लेकर कंफ्यूजन है। राखी बांधने का बेस्ट टाइम- रक्षाबंधन कब है: हर साल सावन मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन 19 अगस्त 2024, सोमवार को है। रक्षाबंधन पर भद्रा व पंचक का समय: रक्षाबंधन के दिन भद्रा सुबह 05 बजकर 52 मिनट से दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। पंचक शाम सात बजे से 20 अगस्त को सुबह 05 बजकर 52 मिनट तक रहेंगे। पूर्णिमा तिथि कब से कब तक: पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त 2024 को सुबह 03 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी जो कि 19 अगस्त 2024 को दोपहर 11 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। ये हैं राखी बांधने के उत्तम मुहूर्त- रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय – 01:30 पी एम से 09:07 पी एम रक्षाबंधन के लिये अपराह्न का मुहूर्त – 01:42 पी एम से 04:19 पी एम रक्षाबंधन के लिये प्रदोष काल का मुहूर्त – 06:55 पी एम से 09:07 पी एम राखी बांधने की विधि- राखी बांधने से पहले थाली में राखी, रोली, अक्षत व मिठाई रखें। अब भाई को दाहिने हाथ में राखी बांधे और उसे मिठाई खिलाएं। भाई की आरती उतारें और सुखद जीवन की कामना करें। राखी बंधवाने के बाद भाई को बहन का आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए। recent visitors 147

पहले परीक्षण में ही लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम ‘गौरव’ ने लक्ष्य पर साधा सटीक निशाना

पहले परीक्षण में ही लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम 'गौरव' ने लक्ष्य पर साधा सटीक निशाना -एक हजार किलोग्राम वर्ग का ग्लाइड बम लंबी दूरी पर लक्ष्य को भेदने में सक्षम -उड़ान डेटा टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम से कैप्चर किया गया नई दिल्ली  रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के तट पर भारतीय वायु सेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (एलआरजीबी) गौरव का पहला परीक्षण किया है। उड़ान के दौरान ग्लाइड बम ने लॉन्ग व्हीलर द्वीप पर स्थापित लक्ष्य को बिल्कुल सटीकता से मारकर अपनी उपयोगिता साबित की। डीआरडीओ के मुताबिक  ओडिशा के तट से लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम 'गौरव' का पहला उड़ान परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है। एलआरजीबी गौरव हवा से प्रक्षेपित 1,000 किलोग्राम वर्ग का ग्लाइड बम है, जो लंबी दूरी पर लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। प्रक्षेपित होने के बाद ग्लाइड बम आईएनएस और जीपीएस डेटा के संयोजन के साथ अत्यधिक सटीक हाइब्रिड नेविगेशन योजना का उपयोग करके लक्ष्य की ओर बढ़ता है। गौरव को हैदराबाद के रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया है। उड़ान परीक्षण के दौरान ग्लाइड बम ने लॉन्ग व्हीलर द्वीप पर स्थापित लक्ष्य को सटीक निशाना बनाया। परीक्षण प्रक्षेपण के दौरान संपूर्ण उड़ान डेटा को समुद्र तट के किनारे एकीकृत परीक्षण रेंज में तैनात टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए कैप्चर किया गया। उड़ान की निगरानी डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने की। विकास सह उत्पादन साझेदार अडाणी डिफेंस और भारत फोर्ज ने भी उड़ान परीक्षण के दौरान भाग लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना को बधाई दी। उन्होंने इसे सशस्त्र बलों की क्षमता को और मजबूत करने के लिए स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के देश के प्रयास में एक प्रमुख मील का पत्थर बताया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने एलआरजीबी के सफल उड़ान परीक्षण के लिए पूरी डीआरडीओ टीम को बधाई दी।     recent visitors 90

अध्ययन- प्लास्टिक की बोतल से पानी पिने से बढ़ सकता है Blood pressure

न्यू यॉर्क हमारा ग्रह कई चीजों से प्रदूषित हो चुका है। उनमें से एक है माइक्रोप्लास्टिक – प्लास्टिक के छोटे कण जो हमारे भोजन और पानी की आपूर्ति में पाए जाते हैं। इन्हें मनुष्यों के लिए सबसे हानिकारक पदार्थों में से एक माना जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। अब, न्यू यॉर्क पोस्ट के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि प्लास्टिक की बोतलों से पीने से रक्तप्रवाह में प्रवेश करने वाले माइक्रोप्लास्टिक के परिणामस्वरूप रक्तचाप बढ़ सकता है । इन्हें पहले से ही हृदय स्वास्थ्य, हार्मोन असंतुलन और यहां तक ​​कि कैंसर से जोड़ा गया है। यह नया अध्ययन ऑस्ट्रिया के डेन्यूब प्राइवेट यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग द्वारा किया गया है, और माइक्रोप्लास्टिक्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं की टीम ने प्रतिभागियों के एक समूह को एक तरल पदार्थ दिया जो प्लास्टिक की बोतल में नहीं था और पाया कि उनका रक्तचाप काफी कम हो गया। पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने अध्ययन में लिखा, "उल्लेखनीय रुझान देखे गए। अध्ययन के परिणामों से पहली बार पता चलता है कि प्लास्टिक के उपयोग में कमी से रक्तचाप में संभावित रूप से कमी आ सकती है, जो संभवतः रक्तप्रवाह में प्लास्टिक कणों की मात्रा में कमी के कारण हो सकता है । " उन्होंने आगे कहा, "प्लास्टिक की खपत में कमी के साथ रक्तचाप में कमी का संकेत देने वाले निष्कर्षों के आधार पर, हम यह अनुमान लगाते हैं कि रक्तप्रवाह में मौजूद प्लास्टिक कण उच्च रक्तचाप में योगदान कर सकते हैं।" उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि प्लास्टिक की बोतलों में पैक पेय पदार्थों से बचना चाहिए। कुछ वर्ष पहले, वैज्ञानिकों ने पाया कि बोतलों में पैक तरल पदार्थों के माध्यम से हर सप्ताह 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक्स मनुष्य के रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है। माइक्रोप्लास्टिक को शरीर में प्रवेश करने से रोकने के लिए बताए गए तरीकों में नल के पानी को उबालना और छानना शामिल है। इन तरीकों से माइक्रोप्लास्टिक (और नैनोप्लास्टिक) की मौजूदगी को लगभग 90 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। recent visitors 84