मुख्यमंत्री साय ने रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया

 रायपुर मुख्यमंत्री   विष्णु  देव  साय ने  सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा जी के निधन को अत्यंत दुःखद बताते हुए गहरा  शोक व्यक्त किया है।   साय ने  कहा  कि  रतन  टाटा ने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके योगदान को भारतवासी सदैव याद रखेंगे। उनका सादगी पूर्ण जीवन, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की भावना एक मिसाल थी। वह सदैव हमारी यादों में जीवित रहेंगे। उनका निधन भारत और उद्योग जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। देश और समाज में बेहतर बदलाव के लिए उनके द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों, उनके शुभचिंतकों को संबल प्रदान करने की विनम्र प्रार्थना करता हूं। recent visitors 70

भारत ने 82 रन से दर्ज की जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदों है बाकी

दुबई भारत और श्रीलंका के बीच महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 का 12वां मैच बुधवार (9 अक्टूबर) को खेला गया. मैच में भारतीय टीम ने 82 रनों से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद बरकरार रखी है. मैच में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 173 रनों का टारगेट सेट किया. जवाब में श्रीलंकाई टीम 90 रनों पर ही सिमट गई. हरमन और मंधाना ने खेली अर्धशतकीय पारी भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 3 विकेट पर 172 रन बनाए. टीम के लिए कप्तान हरमनप्रीत कौर और उपकप्तान स्मृति मंधाना ने फिफ्टी जमाई. हरमन ने 27 गेंदों पर नाबाद 52 रनों की आतिशी पारी खेली. जबकि मंधाना ने 38 गेंदों पर 50 रन जड़े. इनके अलावा ओपनर शेफाली वर्मा ने 40 गेंदों पर 43 रन जड़े. मैच में हरमन और मंधाना ने 1-1 छक्का जमाया. जेमिमा रोड्रिग्ज ने 16 और ऋचा घोष ने 6 रन बनाए. श्रीलंका के लिए कप्तान चमारी अट्टापट्टू और अमा कंचना ने 1-1 विकेट लिया. टी20 वर्ल्ड कप में तेज फिफ्टी लगाने वाली भारतीय बैटर 27 – हरमनप्रीत कौर Vs श्रीलंका, दुबई, 2024 31 – स्मृति मंधाना vs ऑस्ट्रेलिया, गुयाना, 2018 32 – हरमनप्रीत कौर vs ऑस्ट्रेलिया, केपटाउन, 2023 33 – हरमनप्रीत कौर vs न्यूजीलैंड, गुयाना, 2018 36 – मिताली राज vs श्रीलंका, बासेतेर, 2010 पॉइंट्स टेबल में भारतीय टीम ने किया सुधार ग्रुप ए में भारत और श्रीलंका दोनों के लिए ही यह टूर्नामेंट का तीसरा मैच था. भारतीय टीम ने अब तक 2 मैच जीते और एक गंवाया है. भारत ने पिछले मैच में पाकिस्तान को 6 विकेट से धूल चटाई थी. श्रीलंका पांचवें पायदान पर है. उसने टूर्नामेंट में एक भी जीत दर्ज नहीं की है. यह मैच जीतने के साथ ही भारतीय टीम पॉइंट्स टेबल में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है. साथ ही टीम का नेट रनरेट प्लस में 0.576 पर पहुंच गया है. जबकि मैच से पहले यह माइन में -1.217 था. पॉइंट्स टेबल में फिलहाल ऑस्ट्रेलिया 2 जीत के साथ टॉप पर है. उसका नेट रनरेट 2.524 है. मैच में भारत और श्रीलंका की प्लेइंग-11 भारतीय टीम: शेफाली वर्मा, स्मृति मांधना, जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, सजीवन सजना, अरुंधति रेड्डी, श्रेयंका पाटिल, आशा सोभना और रेणुका ठाकुर सिंह. श्रीलंकाई टीम: विशमी गुणरत्ने, चमारी अट्टापट्टू (कप्तान), हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, नीलाक्षी डी सिल्वा, अनुष्का संजीवनी (विकेटकीपर), अमा कंचना, सुगंधिका कुमारी, इनोशी प्रियदर्शनी, उदेशिका प्रबोधनी और इनोका राणावीरा.   recent visitors 64

BPSC 70th CCE प्रारंभिक परीक्षा स्थगित, अब इस दिन होगा एग्जाम

पटना बीपीएससी 70वीं CCE परीक्षा अब 17 नवंबर 2024 को नहीं होगा. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने बीपीएससी 70वीं इंटीग्रेटेड संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा (BPSC 70th CCE Prelims) आगे टालने का फैसला लिया है. यह परीक्षा अब दिसंबर में आयोजित की जाएगी. बीपीएससी 70वीं सीसीई प्रीलिम्स एग्जाम पहले 17 नवंबर 2024 को आयोजित किया जाना था, जिसे अब दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है. यह परीक्षा अब 13 और 14 दिसंबर 2024 को आयोजित की जाएगी. हालांकि इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अभी जारी है, जो 18 अक्टूबर तक चलेगी. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. क्यों स्थगित हुई बीपीएससी की परीक्षा? आयोग ने एक पत्र के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को सूचित किया कि परीक्षा 'अपरिहार्य कारणों' से स्थगित कर दी गई है. पत्र में, उन्होंने 7 से 8 लाख बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परीक्षा में बैठने की संभवना है. उम्मीदवारों की अतनी बड़ी संख्या को समायोजित करने के लिए जिला स्तर पर पर्याप्त संख्या में परीक्षा केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. वैकेंसी डिटेल्स इस परीक्षा के माध्यम से कुल 1957 रिक्तियों को भरा जाएगा, इनमें 70वीं सीसीई के लिए 1954 रिक्तियां और बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) पदों के लिए 4 रिक्तियां शामिल हैं. इससे पहले कुल 1929 रिक्तियां निकाली गई थीं, जिन्हें बाद में बढ़ा दिया गया है. कैसे करें अप्लाई? स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट onlinebpsc.bihar.gov.in पर जाएं. स्टेप 2: यदि यह पहली बार आवेदन कर रहे हैं, तो उम्मीदवारों को एक बार पंजीकरण करना होगा. अगर पहले से रजिस्टर्ड हैं, तो वे क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके सीधे लॉग इन कर सकते हैं. स्टेप 3: एप्लीकेशन फॉर्म भरें, फीस जमा करें और जरूरी दिशानिर्देशों के अनुसार सभी वेलिड डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें. स्टेप 4: एक बार डॉक्यूमेंट्स अपलोड हो जाने के बाद, सबमिट बटन पर क्लिक करें. स्टेप 5: आपका फॉर्म जमा हो जाएगा. आगे के लिए कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट ले लें. एग्जाम पैटर्न 2024 में बीपीएससी 70वीं सीसीई परीक्षा के दो चरण होंगे- एक प्रारंभिक परीक्षा और उसके बाद मुख्य परीक्षा. प्रारंभिक परीक्षा दो घंटे लंबी होगी और इसमें कुल 150 अंकों के ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल शामिल होंगे. गलत आंसर के लिए नेगेटिव मार्किंग लागू होगी. प्रारंभिक परीक्षा में क्वालीफाई होने वाले उम्मीदवार मुख्य परीक्षा दे सकेंगे. आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 600 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि अन्य सभी आवेदकों के लिए शुल्क 150 रुपये है. जो लोग पहचान के लिए अपने आधार कार्ड का उपयोग करते हैं उन्हें 200 रुपये का अतिरिक्त बायोमेट्रिक शुल्क भी देना होगा. recent visitors 72

सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनाएगा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर फैसला

नई दिल्ली अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुना सकता है। इसकी संभावना इसलिए है क्योंकि मामले की सुनवाई करने वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने की थी जो 10 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। फैसले का अल्पसंख्यक राजनीति पर भी होगा असर 10 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 15 कार्य दिवस बचे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था। अभी तक आठ महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। इस मामले में जो फैसला आएगा वह एएमयू का भविष्य तय करने वाला होगा। इससे तय होगा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान माना जाएगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसका अल्पसंख्यक राजनीति पर भी असर होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती इस मामले में एएमयू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच जनवरी 2006 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने उस फैसले में एएमयू में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में मुसलमानों को 50 फीसद आरक्षण रद्द करते हुए कहा था कि एएमयू कभी भी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं था, इसलिए पीजी पाठ्यक्रम में मुस्लिम छात्रों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाई कोर्ट ने मुस्लिम छात्रों को दिये जाने वाले आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के अजीज बाशा मामले में 1968 में दिए फैसले को आधार बनाया था, जिसमें कहा गया था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। हाईकोर्ट ने अजीज बाशा फैसले के बाद एएमयू कानून में 1981 में संशोधन कर इसे अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रविधानों को भी रद्द कर करते हुए संशोधन को इसलिए गलत ठहराया था कि इससे सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी किया गया है।   बड़ी पीठ के पास विचार के लिए भेजा गया 12 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार के लिए भेज दिया था। इसके अलावा, 1981 में भी अल्पसंख्यक दर्जे का एक मामला सात न्यायाधीशों को भेजा गया था, उसमें अजीज बाशा फैसले का मुद्दा भी शामिल था। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जेबी पार्डीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा की सात सदस्यीय पीठ ने आठ दिनों तक दोनों पक्षों की बहस सुनी। क्या है एएमयू की दलील? एएमयू ने अल्पसंख्यक दर्जे का दावा करते हुए दलील दी थी कि एएमयू की स्थापना मुसलमानों ने की थी। एएमयू ने 1968 के अजीज बाशा फैसले पर भी पुनर्विचार का अनुरोध किया जबकि केंद्र सरकार ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि न तो एएमयू की स्थापना मुसलमानों द्वारा की गई है और न ही उसका प्रशासन अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित होता है। केंद्र की दलील थी कि एएमयू की स्थापना 1920 में ब्रिटिश कालीन कानून के जरिए हुई थी और उस समय एएमयू ने अपनी मर्जी से अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ कर इंपीरियल कानून के जरिए विश्वविद्यालय बनना स्वीकार किया था। recent visitors 73

अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर रतन टाटा ने की थी शुरुआत

भारत के जाने-माने बिजनेसमैन और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार देर शाम निधन (Ratan Tata Dies) हो गया. 86 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उन्हें उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. 28 दिसंबर 1937 को पारसी फैमिली में जन्मे रतन टाटा का जीवन लोगों के प्रेरणादायक रहा है और ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. उन्होंने अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर काम किया, तो दूसरी ओर अपने कारोबार से होने वाली आमदनी का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दान करके देश के सबसे बड़े दानवीरों में शुमार रहे. यही नहीं उन्होंने अपनी काबिलियत की दम पर जिसे छुआ सोना बना दिया और कई लोगों की किस्मत भी बदली. आइए 10 तस्वीरों में जानते हैं उनके जीवन की झलक…   बचपन में माता-पिता हुए अलग, दादी ने पाला दिवंगत रतन टाटा (Ratan Tata) का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था और लेकिन उनका बचपन बहुच अच्छा नहीं बीता, दरअसल बचपन में ही 1948 उनके माता-पिता अलग हो गए थे और इसके बाद रतन टाटा का पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था.      अमेरिका से ली आर्किटेक्चर की डिग्री शुरुआती शिक्षा के बाद Ratan Tata हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गए और वहां से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने से पहले उन्होंने करीब 2 साल तक लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय के लिए नौकरी भी की थी. साल 1962 के अंत में दादी नवाजबाई टाटा की तबीयत खराब होने चलते वह नौकरी छोड़कर भारत वापस लौट आए थे. विदेश में प्यार, लेकिन नहीं हो सकी शादी रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की, लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें कभी किसी से प्यार नहीं हुआ. एक इंटरव्यू के दौरान खुद रतन टाटा ने अपनी लव लाइफ के बारे में विस्तार से बताया था. उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी में प्यार ने एक नहीं बल्कि चार बार दस्तक दी थी, लेकिन मुश्किल दौर के आगे उनके रिश्ते शादी के मुकाम तक पहुंच नहीं सके. दादी की तबीयत खराब होने के चलते वे अमेरिका से भारत आ गए थे, लेकिन उनकी प्रेमिका भारत नहीं आना चाहती थीं. उसी वक्त भारत-चीन का युद्ध भी छिड़ा हुआ था. आखिर में उनकी प्रेमिका ने अमेरिका में ही किसी और से शादी कर ली. इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान टाटा ग्रुप पर लगाया और समूह की कंपनियों को आगे बढ़ाने पर काम किया. टाटा स्टील से ऐसे की शुरुआत अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने पारिवारिक बिजनेस ग्रुप Tata के साथ करियर शुरू किया. लेकिन आपको बता दें कि जिस कंपनी ने Tata Family के सदस्य मालिक की पोजीशन पर थे, उस कंपनी में रतन टाटा ने एक सामान्य कर्मचारी के तौर पर काम शुरू किया. इस दौरान उन्होंने टाटा स्टील के प्लांट में चूना पत्थर को भट्ठियों में डालने जैसे काम भी किए और बिजनेस की बारीकियों को सीखीं थी.     Tata Steel में काम करने के बाद साल 1991 में उन्होंने टाटा ग्रुप की कमान थामी और फिर शुरू हो गया टाटा की कंपनियों के बुलंदियों पर पहुंचने का सिलसिला. उन्होंने कारोबार विस्तार पर फोकस करना शुरू कर दिया. कारोबार के विस्तार पर किया फोकस टाटा समूह की बागडोर संभालने के बाद, उन्होंने वैश्विक विस्तार किया और टाटा टी (Tata Tea), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टाटा स्टील (Tata Steel) जैसी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया. आज इन कंपनियों का कोराबार बहुत बड़ा हो चुका है और ये कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं. JRD Tata के बाद सबसे योग्य उत्तराधिकारी जब Tata Group में जेआरडी का उत्तराधिकारी चुनने की बारी आई, तो उस समय रतन टाटा सबसे योग्य व्यक्ति थे, जो उनकी जगह ले सकते थे और समूह की कमान संभालने के बाद उन्होंने इसे साबित भी किया. हर बड़े फैसले में JRD की राय   JRD Tata के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए उन्होंने टाटा ग्रुप के कारोबार के विस्तार से जुड़े कई अहम फैसले लिए. हालांकि, कमान हाथ में लेने के बाद भी वो जेआरडी टाटा से हर बड़े कदम पर पर राय मशविरा जरूर करते थे. साल 1993 की ये तस्वीर कुछ यही बयां कर रही है.          ऑटो दिग्गज फोर्ड को झुकाया 90 के दशक में ऑटोमोबाइल सेक्टर में फोर्ड (Ford) का बड़ा नाम था, लेकिन टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors के हाल ठीक नहीं थे और रतन टाटा ने इसकी पैसेंजर कार डिविजन को बेचने का मन बनाते हुए फोर्ड के साथ डील की थी. लेकिन अमेरिकन कार निर्माता फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड ने डील के दौरान मजाक उड़ाते रतन टाटा का अपमान किया था. इसके बाद उन्होंने बिक्री का प्लान कैंसिल किया और टाटा मोटर्स को आगे बढ़ाने पर फोकस किया, महज 9 साल में बाजी पलटी और फोर्ड के दो लोकप्रिय ब्रांड जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदकर Bill Ford को झुकने पर मजबूर कर दिया. सरकार से मिला बड़ा सम्मान रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप का कारोबार (Tata Group Business) तेजी से आगे बढ़ा और देश ही नहीं दुनियाभर में TATA का डंका बजा. अपने मेहनत और काबिलियत की दम पर विशान साम्राज्य खड़ा करने वाले रतन टाटा को भारत सरकार की ओर से बड़े सम्मान मिले. साल 2000 में जहां रतन टाटा को पद्म भूषण दिया गया, तो साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्‍मानित किया गया था. देश को दी लखटकिया कार रतन टाटा ने एक ऐसा सपना देखा था, जिसे पूरा करना शायद हर किसी के बस में नहीं होता, लेकिन Ratan Tata ने ये कर दिखाया. हम बात कर रहे हैं देश की पहली लखटकिया कार Tata Nano के बारे में, भारत के आम आदमी को एक लाख में कार खरीदने का मौका रतन टाटा ने ही दिया था. उन्होंने बाजार में 2008 में टाटा नैनो उतारी, हालांकि यह कार उनकी उम्मीदों के अनुसार बाजार में धमाल नहीं दिखा पाई. रतन टाटा थे बड़े डॉग लवर दिवंगत Ratan Tata को बड़ा बिजनेसमैन, दरियादिल इंसान के … Read more

श्री रतन टाटा का निधन उद्योग जगत की बड़ी क्षति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

श्री रतन टाटा का निधन उद्योग जगत की बड़ी क्षति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने किया शोक व्यक्त भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जाने माने उद्योगपति श्री रतन टाटा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री रतन टाटा का निधन उद्योग जगत की बड़ी क्षति है। देश की अर्थव्यवस्था और वाणिज्य-उद्योग क्षेत्र में श्री रतन टाटा के योगदान को सदैव रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रतन टाटा की आत्मा की शांति और उनके मित्रजन एवं परिजन को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना भगवान महाकाल से की है।   recent visitors 59

स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी जरूरी – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक निजी अस्पताल भी जरूरी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में किया 100 बिस्तरीय देवराज मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का उदघाटन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित निजी अस्पताल भी जरूरी हैं। खुशी की बात है ग्वालियर की धरती पर आज ऐसे ही एक बड़े अस्पताल की शुरूआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम ग्वालियर में 100 बिस्तरीय देवराज अस्पताल (देवराज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अस्पतालों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। प्रसन्नता का विषय है कि एक किसान परिवार ने ग्वालियर में अपने बेटे की स्मृति में एक अस्पताल अर्थात आरोग्य मंदिर की स्थापना की है। उन्होंने इसके लिये देवराज अस्पताल के संस्थापक करन सिंह किरार एवं उनके परिवार को बधाई और शुभकामनायें दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी इस पुनीत पहल के लिये करन सिंह के परिवार का सम्मान और आदर करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब पूरी दुनिया में कोरोना का हाहाकार मचा हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के संसाधनों और बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के समस्त नागरिकों को कोरोना से बचाव के नि:शुल्क टीके लगवाए। साथ ही दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन भेजकर “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को चरितार्थ करके दिखाया। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि ऋषि गालव की तपोभूमि, तानसेन की साधना स्थली, वीरांगना लक्ष्मीबाई की बलिदान स्थली एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया की कर्म भूमि ग्वालियर में यह अस्पताल गरीब मरीजों के इलाज में अहम योगदान देगा। परिवार में आई रिक्तता को सेवा से भरने का काम सराहनीय – विधानसभा अध्यक्ष तोमर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि नवरात्रि के पावन पर्व पर ग्वालियर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा अस्पताल जुड़ रहा है। उन्होंने कहा परिवार में किसी भी व्यक्ति के असमय चले जाने से परिवार में बड़ी रिक्तता आती है। बिरले ही लोग होते हैं जो इस रिक्तता को सेवा से भरने के प्रयासों को मूर्तरूप दे पाते हैं। ग्वालियर में स्व. शीतला सहाय जी ने अपने पुत्र की कैंसर से मृत्यु होने पर देश का प्रतिष्ठित कैंसर हॉस्पिटल स्थापित कर यह काम करके दिखाया था। उसी श्रृंखला में आज करन सिंह किरार ने अपने दिवंगत पुत्र स्व. देवराज सिंह किरार की याद को चिरस्थायी बनाने के लिये बड़े अस्पताल की स्थापना की है। उन्होंने ईश्वर से कामना की है कि यह अस्पताल उत्तरोत्तर प्रगति करे, जिससे ग्वालियर क्षेत्र के निवासियों को बेहतर से बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश में केवल ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर व रीवा में मेडिकल कॉलेज थे। अब प्रदेश में 14 सरकारी मेडीकल कॉलेज हो गए हैं। इसके अलावा निजी मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी जरूरी – उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ तभी बेहतर और पर्याप्त होंगी, जब सरकार के साथ प्राइवेट सेक्टर भी बराबरी के साथ खड़ा होगा । उन्होंने दिल्ली, नागपुर व मुम्बई का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से ही ये महानगर मेडिकल हब के रूप में स्थापित हुए हैं। शुक्ल ने कहा खुशी की बात है कि ग्वालियर में 100 बैड के अत्याधुनिक अस्पताल की स्थापना हुई है और यह अस्पताल आगे चलकर एक हजार बैड और मेडिकल कॉलेज के साथ तैयार होगा। इससे प्रदेश सरकार भी उत्साहित है कि इस अस्पताल में सस्ती दर पर गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगीं। उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के लिये देवराज अस्पताल प्रबंधन को बधाई व शुभकामनाएं दीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के इलाज के लिये रियायत सराहनीय पहल – सांसद शर्मा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने कहा खुशी की बात है कि देवराज अस्पताल में मात्र 50 रूपए कंसलटेशन फीस पर इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मरीज भी एक अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करा सकेंगे। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिये आयुष्मान भारत जैसी क्रांतिकारी योजना को मूर्तरूप दिया है। हमें आशा है कि प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप देवराज अस्पताल भी गरीब मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। भगवान गणेश का पूजन एवं फीता काटकर किया अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य सभी अतिथियों ने भगवान गणेश का पूजन कर और फीता काटकर देवराज अस्पताल का उदघाटन किया। साथ ही अस्पताल परिसर में स्व. देवराज सिंह किरार की प्रतिमा का अनावरण भी किया। अस्पताल का जायजा भी लिया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदघाटन करने के बाद देवराज अस्पताल का जायजा भी लिया। उन्होंने अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, जनरल और प्राइवेट वार्ड, आईसीयू, ओपीडी और फॉर्मेसी सहित अस्पताल में उपलब्ध अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाटन समारोह का शुभारंभ किया। ज्ञात हो राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.-44 पर ग्राम खुरैरी – बड़ागाँव के समीप देवराज मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही अत्याधुनिक तकनीक के साथ ऑपरेशन थियेटर बनाए गए हैं। इसके अलावा वातानुकूलित जनरल वार्ड, सेमी प्राइवेट एवं प्राइवेट वार्ड, अत्याधुनिक आईसीयू और सीसीयू, फूड कोर्ट, फॉर्मेसी (मेडिकल स्टोर), सीएससीडी रेडियो इमेजिंग सुविधाएँ (एक्सरे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउण्ड) की सुविधा उपलब्ध है। हॉस्पिटल के उदघाटन कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, लोक स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, सांसद भारत सिंह कुशवाह, महापौर श्रीमती शोभा सिकरवार, विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, श्रीमती सरला रावत एवं अस्पताल के संस्थापक प्रबंधन से जुड़े अधिकारी, चिकित्सक व … Read more