Tuesday, July 7, 2026 11:25 am

रतन टाटा ने की थी विदेशी कंपनियों को खरीदने की शुरुआत, JLR को खरीदकर टाटा मोटर्स ग्लोबल प्लेयर बन गई

नई दिल्ली दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का 9 अक्टूबर की देर रात देहांत हो गया। यह भारतीय कारोबार जगत के लिए एक स्वर्णिम युग के अंत सरीखा है। रतन टाटा साल 1991 में जेआरडी टाटा की जगह टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने। उन्होंने एक के बाद एक कंपनियों को खरीदकर टाटा ग्रुप के साम्राज्य को बढ़ाया। ये सौदे न सिर्फ देश में हुए, बल्कि रतन टाटा ने कई बड़ी विदेशी कंपनियों को खरीदा। टाटा कंज्यमूर प्रोडक्ट्स पहले टाटा टी नाम से कारोबार करती थी। इसने साल 2000 में दिग्गज ब्रिटिश चाय कंपनी- टेटली (Tetley Tea) को खरीदा। यह डील 45 करोड़ डॉलर में हुई। इस डील ने दुनिया को इसलिए भी हैरान किया, क्योंकि टेटली साइज में टाटा के मुकाबले दोगुनी बड़ी थी। इस डील के बाद टाटा टी दुनिया की सबसे बड़ी चाय कंपनियों में शुमार हो गई। यह पहली दफा था, जब किसी भारतीय कंपनी ने विदेशी कंपनी का अधिग्रहण किया हो। इससे टाटा ग्रुप के वैश्विक विस्तार की शुरुआत भी हो गई। दो बड़े ऑटोमेकर की खरीद टाटा मोटर्स ने दुनिया के दो बड़े ऑटोमेकर को खरीदा। पहली डील साल 2004 में हुई दक्षिण कोरिया की देवू (Daewoo) से। टाटा मोटर्स ने देवू की कमर्शियल व्हीकल यूनिट को 10.2 करोड़ डॉलर में खरीद लिया। इससे टाटा ग्रुप के पास ट्रक बनाने वाली एडवांस तकनीक आ गई। फिर टाटा मोटर्स ने 2008 में अमेरिकी ऑटोमेकर फोर्ड से Jaguar Land Rover (JLR) की खरीदा। इस 230 करोड़ डॉलर की डील ने टाटा मोटर्स को ऑटो सेक्टर की वैश्विक कंपनी बना दिया। दो स्टील कंपनियों से डील टाटा स्टील ने रतन टाटा की अगुआई में दो बड़े सौदे करके अपना दबदबा बढ़ाया। पहली डील2004 में हुई, जब टाटा स्टील ने सिंगापुर की स्टील कंपनी NatSteel को 48.6 करोड़ डॉलर में खरीदा। वहीं, दूसरा सौदा 2007 में हुआ। इस बार टाटा स्टील ने ब्रिटेन की Corus Steel को 1290 करोड़ डॉलर में खरीदा। यह अपने समय की सबसे बड़ी डील थी और इसने टाटा स्टील की दुनिया की टॉप-10 स्टील कंपनियों में शुमार कर दिया। अमेरिकी होटल में भी चेक-इन टाटा ग्रुप की होटल कंपनी- ताज होटल ने साल 2006 में अमेरिका के The Ritz-Carlton Boston Hotel को खरीदा। यह सौदा करीब 17 करोड़ डॉलर में हुआ। इससे ताज लग्जरी ब्रांड को वैश्विक विस्तार का मौका मिला और कंपनी ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में अपना दबदबा मजबूत किया। Brunner Mond को खरीदा टाटा ग्रुप की केमिकल कंपनी टाटा केमिकल्स ने 9 करोड़ पौंड में ब्रिटेन की सोडा ऐश बनाने वाली Brunner Mond को अपना बना लिया। इस अधिग्रहण की बदौलत टाटा केमिकल्स सोडा ऐश बनाने के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई। Starbucks के साथ ज्वाइंट वेंचर टाटा ग्लोबल बेवरेजेज ने अमेरिका की Starbucks के साथ फ्रेंचाइजी मॉडल की डील की। यह एक ज्वाइंट वेंचर था। इसकी बदौलत टाटा ग्रुप को भारत में स्टारबक्स आउटलेट्स लॉन्च करने की इजाजत मिल गई और उसने तेजी से बढ़ रहे कॉफी रिटेल मार्केट में एंट्री कर ली। BigBasket का अधिग्रहण रतन टाटा ने साल 2012 में रिटायर हो गए थे, लेकिन वह टाटा ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस बने रहे। टाटा ग्रुप ने मई 2021 में बिग बास्केट का अधिग्रहण किया। टाटा डिजिटल ने बिग बास्केट में मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीदी। इससे टाटा ग्रुप के लिए ई-कॉमर्स सेक्टर में एंट्री का रास्ता साफ हो गया। Air India को फिर अपना बनाया एयर इंडिया के साथ टाटा ग्रुप का भावनात्मक रिश्ता रहा है। इसकी शुरुआत 1930 के दशक में जेआरडी टाटा ने की थी। लेकिन, साल 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। साल 2022 में टाटा सन्स ने 18,000 करोड़ में एयर इंडिया को खरीदा। तब टाटा ग्रुप के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन और चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा थे। recent visitors 175

हरियाणा में कांग्रेस की हवा, प्रदीप गुप्ता समेत कई चुनावी पंडित इस बार गलत साबित हुए हैं और उनमें से एक योगेंद्र यादव भी हैं

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले योगेंद्र यादव ने राज्य में कांग्रेस के आने की भविष्यवाणी की थी। यही नहीं उन्होंने कांग्रेस की हवा, आंधी और सुनामी जैसा दावा भी कर दिया था। इसे लेकर अब वह ट्रोल हो रहे हैं। प्रदीप गुप्ता समेत कई चुनावी पंडित इस बार गलत साबित हुए हैं और उनमें से एक योगेंद्र यादव भी हैं। योगेंद्र यादव ने अब बताया है कि आखिर कहां उनसे हरियाणा के माहौल को समझने में चूक हुई और कैसे भाजपा की सत्ता में वापसी हो गई। योगेंद्र यादव कहते हैं कि यह चुनाव एक टी-20 मैच की तरह था, जो आखिरी गेंद तक खेला गया और अंत में जीत भाजपा को मिली। योगेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे लेख में कहा, 'भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर 1 फीसदी से भी कम का रहा है। क्रिकेट की भाषा में बात करें तो यह टी-20 मैच जैसा था, जो दो ओवर रहते हुए ही खत्म होना चाहिए था। लेकिन यह आखिरी गेंद तक खिंच गया। अब तीन सवाल पर मंथन करना चाहिए। हमने इसे इतना आसान चुनाव क्यों माना? यह इतनी टाइट फाइट वाला संघर्ष कैसे बन गया? आखिर हरियाणा के चुनाव में कैसे हार गए?' मुख्य तौर पर हरियाणा में कांग्रेस की नीति की भाजपा ने काट खोज ली और अपने समीकरणों के जरिए चुनाव जीत लिया। वह कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में 19 फीसदी का इजाफा हुआ था। राज्य में किसान, पहलवान और जवान का नैरेटिव बना था। योगेंद्र यादव लिखते हैं, 'मैं भी मान रहा था कि यह जो नैरेटिव बना है, उससे कांग्रेस को बढ़त मिलेगी। वह अब कमजोर नहीं होगी। ऐसा अनुमान इसलिए था क्योंकि किसान, पहलवान के नैरेटिव पर पड़ने वाला वोट जेजेपी और इनेलो को मिलता नहीं दिख रहा था। इसके अलावा राहुल गांधी के आक्रामक अभियान से ऐसा लग रहा था कि दलित वोट बड़ी संख्या में कांग्रेस को ही मिलेगा।' लोकसभा में अच्छी बढ़त, पर विधानसभा में कैसे हार गई कांग्रेस यह स्थिति लोकसभा चुनाव में दिखी भी थी और 19 फीसदी वोट शेयर बढ़ाते हुए कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले एक पर्सेंट की बढ़त पा ली थी। लेकिन ऐसा लगता है कि किसान, पहलवान, संविधान और जवान के नारे ने काम नहीं किया। यही नहीं ऐसा लगा कि कांग्रेस अति-आत्मविश्वास में आ गई है। 10 साल की सरकार के खिलाफ जमीन पर ऐंटी इनकम्बैंसी थी और ऐसा लग रहा था कि भाजपा की स्थिति 2014 और 2019 के मुकाबले कमजोर होगी। यह चुनाव दो तरफा था और कांग्रेस भाजपा को मिलाकर 79 फीसदी वोट पड़ा, जो 2014 में 55 पर्सेंट ही था। कांग्रेस जाट समुदाय के भरोसे रह गई, भाजपा ने बना ली रणनीति योगेंद्र यादव लिखते हैं, 'किसान जवान पहलवान और संविधान के नैरेटिव में यह गलती हुई। मैं भी उन विश्लेषकों में से एक था, जो मानते थे कि इसका तात्कालिक लाभ कांग्रेस को होगा। हालांकि मैंने लोकसभा चुनाव की तरह ही इस बार भी सीटों का अनुमान जाहिर नहीं किया था, लेकिन यह साफ कहा था कि कांग्रेस को फायदा मिलेगा।' योगेंद्र यादव ने कहा कि कांग्रेस शायद जाट समुदाय पर ज्यादा निर्भर हो गई, जबकि भाजपा अपनी रणनीति पर अमल करती रही। वहीं सब कोटा वाले विवाद से उसे दलित वोटों के बंटवारे का भी मौका मिला। इसके अलावा नायब सिंह सैनी को सीएम बनाने को भी वह भाजपा की कामयाब रणनीति मानते हैं। recent visitors 120

देर रात तक खंगाले दस्तावेज, छत्तीसगढ़-कोरबा में इलेक्ट्रानिक्स दुकान में जीएसटी की छापेमारी

कोरबा। जीएसटी की नजर व्यापारियों के कारोबार पर लगातार बनी हुई है. इसी कड़ी में जीएसटी की टीम ने बीती रात कटघोरा स्थित ज्योति इलेक्ट्रानिक्स में छापा मारा. इस कार्रवाई से कटघोरा से लेकर कोरबा तक के व्यापारियों में हड़कंप मचा रहा. इलेक्ट्रानिक्स कारोबारियों के लिए साल में व्यापार के सबसे अच्छे मौकों में से एक नवरात्रि के अवसर पर जीएसटी की टीम पहुंची. जीएसटी की टीम चार वाहनों में ज्योति इलेक्ट्रानिक्स में दबिश दी. कटघोरा के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में से एक ज्योति इलेक्ट्रानिक्स में टीम पहुंची. दुकान संचालक पवन अग्रवाल से पूछताछ करने के साथ देर रात तक दस्तावेज खंगालती रही. हालांकि, इस कार्रवाई में क्या-क्या खामियां पाई गई इसका खुलासा नहीं हुआ है. recent visitors 44

योगदान को सदैव रखेंगे याद, छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उद्योगपति रतन टाटा के निधन पर जताया शोक

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया X पर किए अपने पोस्ट में कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में रतन टाटा के योगदान को भारतवासी सदैव याद रखेंगे. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पोस्ट में लिखा कि सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है. उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया. उनका सादगी पूर्ण जीवन, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की भावना एक मिसाल थी. वह सदैव हमारी यादों में जीवित रहेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि रतन टाटा का निधन भारत और उद्योग जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. देश और समाज में बेहतर बदलाव के लिए उनके द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे. ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों, उनके शुभचिंतकों को संबल प्रदान करने की विनम्र प्रार्थना करता हूं. ॐ शांति! ""सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित श्री रतन टाटा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।     उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को…""     — Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) October 9, 2024 recent visitors 66

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से UPSSSC Van Daroga भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी किया

नई दिल्ली यूपी वन दारोगा भर्ती में भाग लेने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से UPSSSC Van Daroga भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है। रिजल्ट ऑनलाइन माध्यम से यूपीएसएसएससी की ऑफिशियल वेबसाइट पर PDF फॉर्मेट में घोषित किया गया है। अभ्यर्थी तुरंत ही आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या इस पेज पर दिए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक करके नतीजे चेक कर सकते हैं। पीडीएफ में चयनित उम्मीदवारों के अनुक्रमांक दर्ज हैं। 701 अभ्यर्थियों का हुआ चयन आपको बता दें कि यह भर्ती कुल 701 पदों के लिए निकाली गई थी। अब यूपीएसएसएससी की ओर से 701 पदों के सापेक्ष सभी रिक्त पदों के लिए अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी गई है। इसमें से अनारक्षित के 288 पदों, अनुसूचित जाति (SC) के 160 पदों, अनुसूचित जनजाति (ST) के 20 पदों, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 163 पदों और आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) के 70 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। क्षैतिज आरक्षण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित पदों 14, महिला के 140 पदों, सैन्य वियोजित/ भूतपूर्व सैनिक के 35 पदों, पर नियुक्तियां की गई हैं। कैसे चेक करें परिणाम यूपीएसएसएससी वन दारोगा भर्ती रिजल्ट चेक करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर विजिट करें। वेबसाइट के होम पेज पर आपको Notice Board में मुख्य परीक्षा वन दरोगा भर्ती रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करना होगा। अब एक पीडीएफ स्क्रीन पर ओपन हो जायेगा। इसके बाद अभ्यर्थी इसमें अपना रोल नंबर चेक कर सकते हैं। रिजल्ट के साथ कटऑफ अंक भी हुआ जारी यूपीएसएसएससी की ओर से रिजल्ट जारी होने के साथ ही कटऑफ भी जारी कर दिया गया है। कटऑफ सामान्य वर्ग के लिए 78.25 प्रतिशत, एससी के लिए 66.25 फीसदी, एसटी के लिए 61.75 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 75.25 फीसदी एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कटऑफ 75 फीसदी दर्ज किया गया है। भर्ती से जुड़ी अधिक डिटेल के लिए अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। recent visitors 153

बंगाली परंपराओं की दिखी झलक, छत्तीसगढ़-रायपुर कालीबाड़ी में भव्य आरती के साथ हुई मां दुर्गा की पूजा

रायपुर। राजधानी के कालीबाड़ी स्थित बंगाली मंदिर पूजा पंडाल में माता की भव्य आरती की गई. देवी मां के मुख खोलने के पश्चात बंगाली आरती से पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद लगभग 100 मातृ शक्तियों ने धूप दान लेकर ढ़ाकी के साथ मां दुर्गा की पूजा की, जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल हुए. महिलाओं ने पूजा एवं मां दुर्गा के आह्वान के दौरान उल्लू की ध्वनि निकालकर मां दुर्गा के जयकारे लगाए. मान्यता है कि जैसे शंख की ध्वनि को पवित्र माना जाता है, वैसे ही बंगाली समाज में जब भी कोई शुभ कार्य किया जाता है, तब समाज की महिलाएं उल्लू की ध्वनि निकालकर जयकारे लगाती हैं. मां दुर्गा के साथ-साथ भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी, स्वामी कार्तिकेय और देवी सरस्वती की भी विधिवत पूजा-अर्चना की गई. पंडाल को रंग-बिरंगी एलईडी लाइट्स से सजाया गया है. संध्या आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा. बता दें कि राजधानी रायपुर के काली बाड़ी स्थित बंगाली माता दुर्गा मंदिर में पिछले कई वर्षों से मां दुर्गा विराजती हैं. बंगाली वेशभूषा में महिलाएं यहां पूजा-अर्चना करती हैं, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त माता दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. recent visitors 112

राहुल गांधी यह दोहराते दिखे 100 में से महज 3 फीसदी ही ओबीसी अधिकारी हैं, अब पार्टी में ही नजरअंदाज करने के आरोप

नई दिल्ली संसद में भाषण से लेकर रैलियों तक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार यह दोहराते दिखे हैं कि आखिर देश के सचिवों में से कितने ओबीसी है। वह कहते रहे हैं कि 100 में से महज 3 फीसदी ही ओबीसी अधिकारी हैं, जबकि उनकी 60 फीसदी से ज्यादा आबादी है। वह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को ओबीसी, एससी और एसटी की उपेक्षा के आरोप में घेरते रहे हैं। लेकिन अब खुद कांग्रेस में ही इस मुद्दे पर बवाल मचा है और ओबीसी नेताओं को नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं। हरियाणा में हार के बाद राज्य में माहौल ही बदल गया है। अहीरवाल बेल्ट के सीनियर नेता कैप्टन अजय सिंह यादव ने पिछड़ों की उपेक्षा के आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'कांग्रेस को दक्षिण हरियाणा खासतौर पर गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद में सिर्फ एक सीट मिली है। अहीरवाल का कांग्रेस कार्यसमिति, केंद्रीय चुनाव समिति, कांग्रेस महासचिवों और हरियाणा प्रदेश कमेटी तक में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। ओबीसी कांग्रेस का चेयरमैन जैसे पद के पास तो कोई ताकत नहीं है। यह दंतहीन है।' यही नहीं उनकी पोस्ट पर एक अन्य नेता डॉ. अरुणेश यादव ने भी सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि आपने बिलकुल सही कहा है। इसके अलावा यदुवंशी कल्याण ट्रस्ट चलाने वाले संजय यादव ने भी कहा कि पिछड़ों को उनका अधिकार मिलना ही चाहिए। इस तरह कैप्टन अजय यादव की पोस्ट ने एक तरह से राहुल गांधी को आईना दिखाया है। पार्टी के भीतर ही पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप इसलिए खास है क्योंकि राहुल गांधी लगातार आरक्षण की 50 फीसदी सीमा खत्म करने, जातिगत जनगणना कराने और पिछड़ों को नौकरशाही से लेकर राजनीति तक में मौका देने की वकालत करते रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब कैप्टन अजय यादव का ही आरोप लगाना चिंता की बात है। दरअसल हरियाणा के नतीजों को लेकर एक राय यह भी सामने आई है कि जाटों की तुलना में कांग्रेस ने यादव, गुर्जर, सैनी, कश्यप जैसी अन्य ओबीसी बिरादरियों को कम महत्व दिया और इससे वे लोग भाजपा के साथ गए। इसके अलावा भाजपा सरकार ने अहीरवाल बेल्ट में नौकरियां भी खूब दी हैं। कैप्टन अजय यादव ने कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण नतीजों से पहले ही सीएम पद को लेकर मची खींचतान को भी माना है। recent visitors 69