Friday, July 3, 2026 10:34 pm

विदेशीयो में बढ़ रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का रुतबा, कहा यूरोप की नहीं है ये ट्रेन

मुंबई सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस के प्रशंसक विदेश में भी हैं। हाल ही में UAE यानी संयुक्त अरब अमीरात के एक पत्रकार ने वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन का वीडियो साझा किया है। उन्होंने इसकी तुलना विदेश की आधुनिक ट्रेनों से की है। देश को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस 15 परवरी 2019 को मिली थी। तब ट्रेन नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी रूट पर दौड़ी थी। अब इनकी संख्या 100 के पार हो चुकी है। UAE के पत्रकार हसन सजवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन का है। उन्होंने लिखा, 'नहीं यह यूरो रेल नहीं है…। यह भारत की वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है।' पहली वंदे भारत स्लीपर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 सितंबर को ही BEML के बेंगलुरु रेल कॉम्पलैक्स में पहली स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इस ट्रेन में USB चार्जिंग, इंटीग्रेटेड रीडिंग लाइट, पब्लिक अनाउंसमेंट, सिक्युरिटी कैमरा, मॉड्युलर पैंट्री, दिव्यांगों के लिए खास बर्थ और टॉयलेट जैसी सुविधाएं हैं। खास बात है कि इससे पहले लॉन्च हुईं वंदे भारत में सिर्फ बैठकर ही यात्रा कर सकते थे। यहां चलेगी नई वंदे भारत रेल मंत्रालय ने कोसी क्षेत्र के यात्रियों को एक बड़ी सौगात देते हुए बिहार में पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल के सहरसा से सियालदह के बीच नई वंदे भारत ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अन्नया स्मृति ने मंगलवार को यहां बताया कि वंदे भारत ट्रेन को चलाने के पहले रेलवे बोर्ड एवं रेल मुख्यालय से ट्रेन मैनेजर और क्रू की ट्रेनिंग कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि पटना से चल रही वंदे भारत ट्रेन के क्रू और ट्रेन मैनेजर के साथ समस्तीपुर मंडल के कर्मियों को प्रशिक्षण लेने के लिए भेजा गया है। अन्नया स्मृति ने बताया कि समस्तीपुर मंडल के क्रू और मैनेजर नई वंदे भारत ट्रेन को मंडल के सहरसा से झाझा स्टेशन तक लेकर जाएंगे, जबकि झाझा से इस ट्रेन को दानापुर मंडल के कर्मचारी लेकर आगे जाएंगे। recent visitors 74

पति को शादी के बाद मिलने वाली सेक्स की छूट को खत्म किया जाता है तो एक नए अपराध का जन्म हो जाएगा- SC

नई दिल्ली मैरिटल रेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पतियों को पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने की छूट देने वाले प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को लेकर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या अगर पति को शादी के बाद मिलने वाली सेक्स की छूट को खत्म किया जाता है तो एक नए अपराध का जन्म हो जाएगा? सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिशअरा की बेंच ने आईपीसी (अब बीएनएस) की धारा 375 के अपवाद वाले क्लॉज पर सुनवाई की। इसके तहत अगर पत्नी नाबालिग नहीं है तो उसके साथ पति के शारीरिक संबंध बनाने को मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा, आपका कहना है कि मैरिटल रेप से जुड़े अपवाद को खत्म करने पर नए अपराध का जन्म नहीं होगा। अपवाद के चलते अगर कोई महिला 18 साल से ज्यादा उम्र की है तो शादी के बाद पति को उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की छूट मिलती है। मान लीजिए अगर इस अपवाद को खत्म कर दिया जाता है तो क्या नया अपराध पैदा हो जाएगा? क्या कोर्ट को स्वतंत्र रूप से इस अपवाद की संवैधानिक वैधता जांचने का अधिकार है? कुछ याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील करुणा नुंडी ने कहा कि इस तरह के सवाल निजी विचार बनाम भारत सरकार हो सकते हैं। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि संवैधानिक आदेशों में स्त्रीविरोध और पुरुषवाद का कोई स्थान नहीं है। सीजेआई ने कहा, अगर पति को मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया जाता है तो यह अपराध सामान्य प्रावधानों के अंतरगत ही आएगा या फिर कोर्ट को अलग अपराध का निर्माण करना होगा। सीजेआई ने कहा, उनका कहना है कि वैवाहिक संबंध में आने के बाद पति को खुद ही शारीरिक संबंध बनाने की छूट मिल जाती है। लेकिन इन तथ्यों को भी मानते हैं कि सहमति जरूरी है। बेंच ने इस बात की भी आशंका जताई की इस अपवाद को खत्म करने पर वैवाहिक संस्था में भी अस्थिरता आने की गुंजाइश है। इसपर नुंडी ने कहा, शादी सांस्थानिक नहीं बल्कि निजी होती है। इसको इस तरह से हिलाया नहीं जा सकता। वहीं सीनियर वकील कोलिन गोंसालवीस ने कहा कि कई अन्य देशों में इस तरह के अपवाद संवैधानिक नहीं हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग भी किया जा सकता है क्योंकि यह साबित करना ही मुश्किल हो जाएगा कि शारीरिक संबंध सहमति से बनाया गया था या फिर असहमति से। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया जिसमें याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति दी गई थी। recent visitors 80

22 बिलियन डॉलर की वैल्यू वाली बायजू की कीमत अब ‘शून्य’ है, रवींद्रन ने दुबई में अपने घर से की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली मुसीबतों में घिरी एडटेक स्टार्टअप बायजू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस तरह की अफवाहों का बाजार गरम है कि कंपनी के फाउंडर और सीईओ बायजू रवींद्रन देश छोड़कर दुबई भाग गए हैं। इस बीच बायजू रवींद्रन चार साल में पहले बार मीडिया से रूबरू हुए। दुबई से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह भागकर दुबई नहीं आए हैं और जल्दी ही स्वदेश लौटेंगे। बायजू पिछले करीब एक साल से दुबई में ही रह रहे हैं। इस बीच उनकी कंपनी को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कभी देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप रही बायजू की वैल्यू आज जीरो हो चुकी है। उस पर भारी कर्ज है। 44 साल के बायजू रवींद्रन ने दुबई में अपने घर से कहा, 'लोगों का यह सोचना दुर्भाग्यपूर्ण है कि मैं भागकर दुबई आया हूं। मैं अपने पिता के इलाज के लिए पिछले एक साल से यहां हूं। लेकिन मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि मैं भागकर नहीं आया हूं। मैं भारत आऊंगा और मैं स्टेडियमों को भरकर रख दूंगा। इस समय अभी तय नहीं हुआ है लेकिन जल्दी ही ऐसा होगा। मैं इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता निकाल लूंगाI' जीरो हो गई वैल्यू कुछ साल पहले बायजू 22 अरब डॉलर की वैल्यू के साथ देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप थी लेकिन आज इसकी कीमत जीरो रह गई है। बायजू रवींद्रन ने इसके लिए निवेशकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब वह कंपनी को आगे बढ़ा रहे थे तब निवेशक उनके साथ खड़े थे लेकिन संकट आते ही उन्होंने मुंह मोड़ लिया। बायजू पर आज भारी कर्ज है, उसे रेगुलेटरी जांच से गुजरना पड़ रहा है और उनसे अपनी फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में देरी की है। इससे कंपनी की वित्तीय हालत और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। बायजू रवींद्रन ने कहा कि दिसंबर 2021 में जब कंपनी पर संकट आया तो उसके बाद से निवेशकों ने कोई निवेश नहीं किया है। Prosus समेत कुछ निवेशकों ने पिछले 4-5 साल में कंपनी में कोई निवेश नहीं किया है। यह संकट कैश की कमी के चलते शुरू हुआ। आज कंपनी कई तरह की परेशानियों से घिरी है। कई कर्जदारों ने उसे एनसीएलटी में घसीट रखा है। कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं सब कारणों से इन अफवाहों को हवा मिली है कि कार्रवाई से बचने के लिए बायजू रवींद्रन दुबई भाग गए हैं। recent visitors 72

इजरायली बड़ा धमाका हमास प्रमुख सिनवार की मौत पर बोले बाइडेन- यह दुनिया के लिए अच्छा

बेरुत इजराइल डिफेंस फोर्सेज ने अपने सैन्य अभियान के तहत गाजा में गुरुवार को अपने सबसे बड़े दुश्मन हमास प्रमुख याह्या सिनवार को मार गिराया। सिनवार ने पिछले साल इजराइल पर हमास के आतंकी हमले की अगुवाई की थी और वह इजराइल के हिट लिस्ट में था। सिनवार की मौत के बाद इजरायल ने अपना बदला पूरा कर लेने की बात कही लेकिन बंधकों की रिहाई तक उसकी लड़ाई जारी रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने याह्या सिनवार की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। उन्होंने कहा कि डीएनए परीक्षण से पुष्टि हुई है कि सिनवार मारा गया है। यह इजरायल और अमेरिका के साथ पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। यह इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए एक अच्छा अवसर है। इससे एक साल से जारी गाजा युद्ध समाप्त हो जाएगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने भी कहा है कि हजारों निर्दोष लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार हमास नेता याह्या की मौत की वजह से अमेरिका, इजरायल और पूरी दुनिया बेहतर स्थिति में है। यह गजा में हो रहे युद्ध को खत्म करने का एक मौका है। इजराइल ने गुरुवार रात हमास प्रमुख याह्या सिनवार को मार गिराने का दावा किया था। इजरायल और अमेरिका की तरफ से दावा किया जाता रहा है कि पिछले साल 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल में हुए आतंकी हमले का नेतृत्व याह्या सिनवार ने ही किया था जिसमें 12 सौ लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोगों को बंधक बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि जुलाई में हमास नेता इस्माइल हनिया के तेहरान में इजरायली कार्रवाई में मारे जाने के बाद सिनवार को हमास प्रमुख बनाया गया था। सिनवार का जन्म 1962 में खान यूनिस के गाजा शहर के एक शरणार्थी शिविर में हुआ था। हमास का गठन 1987 में हुआ था और याह्या सिनवार उसके संस्थापक सदस्यों में से एक था। अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात सिनवार ने संदेह होने पर अपने 12 सहयोगियों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद उसे खान यूनिस का कसाई कहा जाने लगा। क्या सिनवार या हमास का कोई विकल्प भी खड़ा हो चुका है, जो खाली जगह भरेगा? इन सवालों के जवाब के लिए एक बार सिनवार की हिस्ट्री जानते चलें. अस्सी के दशक में हमास को खड़ा करने में जो शुरुआती लोग थे, उनमें से एक सिनवार भी था. उसे इजरायली सेना ने कई बार पकड़ा भी. साल 2011 में कैदियों की अदलाबदली के दौरान छूटकर वो वापस हमास की कमान संभालने लगा.  इसके बाद से वो गाजा में हमास को लगातार ताकतवर बनाता गया. बाहरी दुनिया से संवाद और फंडिंग जुटाने का काम भी इसके हिस्से था. इस नेता के बारे में कुख्यात था कि ये हर उस शख्स का गला काट देता था, जो इसे इजरायल के पक्ष में लगे, फिर चाहे वो फिलिस्तीनी जनता क्यों न हो. पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर बड़ा नागरिक हमला हुआ. खुफिया एजेंसियों ने माना कि अटैक का मास्टरमाइंड सिनवार ही है. हमले के साथ-साथ हमास ने ढाई सौ से ज्यादा लोगों को बंधक भी बना लिया. इसके बाद से आईडीएफ सिनवार को पकड़ने या मारने की फिराक में थी. यहां तक कि उसकी सूचना देने वालों को 4 लाख डॉलर इनाम तक का वादा कर दिया. आखिरकर गुरुवार को सिनवार मारा गया, डीएनए टेस्ट के बाद जिसकी पुष्टि भी इजरायल ने कर दी. गाजा में क्यों है चुप्पी इतनी बड़ी घटना के बाद भी हमास की पैरवी करने वाले किसी मुस्लिम देश की बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई, जो पहले हर इजरायली वार पर हो-हल्ला किया करते थे. यहां तक कि गाजा में भी सन्नाटा है. कोई कुछ भी कहने से बच रहा है. इसके पीछे इजरायल का डर नहीं, बल्कि एक बड़ा कारण ये भी है कि गाजा पट्टी में सिनवार की लोकप्रियता लगातार गिर रही थी. आधी से ज्यादा आबादी सिनवार से परेशान पेलेस्टाइन सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च ने पिछले महीने एक सर्वे के नतीजे जारी किए. इसकी मानें तो गाजा की 65 फीसदी जनता सिनवार की लीडरशिप से नाखुश थी. वे मान रहे थे कि इसी लीडरशिप के चलते गाजा पट्टी तबाह हुई. वहां चालीस हजार से ज्यादा लोग मारे गए. वहीं कथित लीडर सालभर से हमास के सघन टनल नेटवर्क में छिपा हुआ था. सिनवार का चैप्टर क्लोज हो चुका, लेकिन क्या हमास नाम की किताब भी साथ ही बंद हो जाएगी? गुरुवार को सिनवार की मौत कन्फर्म करते हुए इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे 'गाजा के लिए हमास के बाद शुरुआत' कहा. साथ ही साथ ये भी साफ कर दिया कि उनकी सेना बंधकों को छुड़ाने तक वहीं जमी रहेगी. इसके बाद क्या- ये सवाल बार-बार उठ रहा है. हमास के बाद कौन से विकल्प बाकी फिलिस्तीनी चरमपंथी गुट हमास का गाजा में केवल हेडक्वार्टर नहीं था, बल्कि यही संगठन इस पट्टी पर शासन चला रहा था. हालांकि ये कोई चुनी हुई सरकार नहीं थी. वो साल 2007 से इस क्षेत्र पर एकतरफा शासन कर रहा था. बता दें कि साल 2006 में फिलिस्तीन (गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक) में इलेक्शन हुए थे. इसमें हमास विपक्षियों पर भारी रहा. इसके बाद उसने फिलिस्तीनी अथॉरिटी से सत्ता छीन ली और अपना अलग राजकाज चलाने लगा. अब लगभग सारे लीडरों को खो चुका हमास अनाथ हो चुका है. ऐसे में गाजा में उसके रूल की फिलहाल तो कोई संभावना नहीं. खाली फ्रेम में कई तस्वीरें आ सकती हैं इनमें एक दावेदार है, फिलिस्तीनी अथॉरिटी. फिलहाल वेस्ट बैंक में काम कर रही अथॉरिटी को लेकर अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकमत हो जाए तो राष्ट्रपति महमूद अब्बास की सरकार गाजा को भी कंट्रोल कर सकती है. एक संभावना ये भी है कि तुरंत कोई रास्ता न निकलता देख इजरायली सेना कुछ समय के लिए वहीं रुक जाए, और अप्रत्यक्ष सैन्य कंट्रोल रखे. ये इसलिए भी हो सकता है क्योंकि इजरायल बार-बार हमास के कमर तोड़ देने की बात कह रहा है. अगर फिलहाल वो गाजा पट्टी से एकदम से हट जाए तो हो सकता है कि बचे-खुचे विद्रोही वापस अपना काम शुरू कर दें. किसी भी युद्धग्रस्त या ताजा-ताजा युद्ध से निकले … Read more

UGC NET Result 2024: यूजीसी नेट परीक्षा का स्कोर कार्ड जारी , यहां क्लिक कर सबसे पहले देखें नतीजे

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की तरफ से यूजीसी नेट परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया गया है. जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वह अब अपना रिजल्ट आधिकारिक साइट पर जाकर चेक कर सकते हैं. नतीजे चेक करने के लिए उम्मीदवारों को जरूरी क्रेडेंशियल दर्ज करने होंगे. रिजल्ट उम्मीदवार यहां दिए गए स्टेप्स के माध्यम से भी देख सकते हैं. ये परीक्षा का आयोजन देशभर में विभिन्न विषयों में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और सहायक प्रोफेसर के पद के लिए उम्मीदवारों की पात्रता का निर्धारण करती है. इस परीक्षा में लाखों उम्मीदवारों ने भाग लिया था. जिनका रिजल्ट को लेकर इंतजार अब खत्म हो चला है. ​कब हुआ था आयोजन इस बार यूजीसी NET परीक्षा का आयोजन 21, 22, 23, 27, 28, 29, 30 अगस्त और 2, 3, 4, 5 सितंबर को किया गया. यह परीक्षा देशभर में विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लाखों उम्मीदवारों ने भाग लिया. परीक्षा को दो शिफ्ट में आयोजित किया गया. पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और दूसरी शिफ्ट  3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित हुई थी. ​सीबीटी मोड में हुई थी परीक्षा यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराई गई. परीक्षा के कुछ दिन बाद उम्मीदवारों के लिए प्रोविजनल आंसर की जारी की गई थी. अब रिजल्ट जारी कर दिया गया है. अधिक डिटेल्स के लिए उम्मीदवार आधिकारिक साइट की मदद ले सकते हैं. ये हैं काम की वेबसाइट     ugcnet.nta.ac.in     ugcnet.ntaonline.in     nta.ac.in किस तरह रिजल्ट करें चेक     स्टेप 1: उम्मीदवार सबसे पहले यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाएं.     स्टेप 2: इसके बाद उम्मीदवार को होमपेज पर रिजल्ट का लिंक मिलेगा, उस पर क्लिक करें.     स्टेप 3: फिर अपने रोल नंबर, जन्म तिथि और अन्य आवश्यक विवरण भरें.     स्टेप 4: इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक कर दें     स्टेप 5: अब उम्मीदवार की स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा.     स्टेप 6: फिर उम्मीदवार इसे डाउनलोड कर लें.     स्टेप 7: अंत में अभ्यर्थी रिजल्ट पेज का प्रिंट आउट निकाल लें.   recent visitors 166

महाकाल मंदिर में सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे की विवादास्पद पूजा: नियमों की अनदेखी

Worship of CM Eknath Shinde’s son in Mahakal temple: Question on ignoring rules उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आम और खास सभी के लिए एक ही नियम का दावा किया जाता रहा है, लेकिन वीआईपी कल्चर और प्रभावशाली लोगों के नियम तोड़ने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं. अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने परिवार सहित गर्भगृह में पूजा अर्चना कर मंदिर के नियम को तोड़ा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले में बिना अनुमति दर्शन के लिए गर्भगृह में जाने का दावा किया है. गुरुवार (17 अक्तूबर) की शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और मुंबई से सांसद श्रीकांत शिंदे परिवार के साथ महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने वीआईपी पॉइंट के जरिए दर्शन के लिए अधिकारियों से आग्रह किया. इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर समिति के बड़े अधिकारी के पीए के साथ श्रीकांत शिंदे का परिवार गर्भगृह तक पहुंच गया. इस दौरान उनके साथ उज्जैन जिले के एक बीजेपी विधायक भी मौजूद रहे. यहां सभी ने उस समय गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना की, जब भगवान महाकाल का भांग से श्रृंगार चल रहा था. इस घटना के बाद हंगामा मच गया है. कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, “भगवान के दरबार में भी बीजेपी सरकार आम और खास के बीच मतभेद कर रही है. यह न्यायोचित नहीं है.” महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने क्या कहा?महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में नियम सबके लिए बराबर है. उन्होंने कहा, किसी को भी अनुमति नहीं दी गई है कि वह गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना करे. प्रोटोकॉल के तहत जिन्हें अनुमति है, केवल वही प्रवेश कर सकते हैं. इनमें महामंडलेश्वर, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित वीआईपी शामिल हैं. महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ का भी कहना है कि उन्होंने भी किसी को गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी थी. महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश बंद हुए कई महीने हो गए हैं. महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. ऐसे में सभी को गर्भगृह से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. यदि महाकालेश्वर मंदिर समिति गर्भगृह दर्शन शुरू करवा देती है, तब भी 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को अंदर से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. जबकि गर्भगृह में जब दर्शन शुरू होते हैं तो बाहर से श्रद्धालुओं के दर्शन में परेशानी होती है. इस वजह से मंदिर समिति ने गर्भगृह दर्शन को पूरी तरह बंद कर रखा है. पहले 750 रुपये की रसीद कटवा कर श्रद्धालुओं को अंदर प्रवेश दिया जाता था. ऐसा नहीं है कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में जाकर पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने नियम तोड़ा है. पहले भी कई बार इस तरह की तस्वीरें आ चुकी हैं. मंदिर समिति द्वारा आम लोगों के गर्भगृह में प्रवेश की कोशिश करने पर भी एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, लेकिन रसूखदार लोगों पर अभी तक महाकालेश्वर मंदिर समिति का नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि शिव भक्तों में भी मंदिर समिति की दोहरी नीति को लेकर आक्रोश है. महाकालेश्वर मंदिर के भक्त राजेश प्रजापति का कहना है कि मंदिर में सभी के लिए नियम बराबर होना चाहिए. recent visitors 186

इंदौर के विजयनगर में फ्लैट से नीचे गिरी थी MBA छात्रा, पुलिस को बताया मोबाइल पर बात करते समय फिसला पैर

 इंदौर  विजयनगर थाना क्षेत्र में गुरुवार तो एमबीए की छात्रा तीसरी मंजिल से गिर गई। छात्रा को कमर और हाथों में चोट आई है। बयानों में छात्रा ने कहा मोबाइल पर बात करते समय पैर फिसल गया था। उसने विवाद से इनकार कर दिया है। टीआइ सीके पटेल ने बताया कि घटना स्कीम-54 की है। युवती का नाम नंदनी धनोतिया निवासी नेहरूनगर है। नंदनी एमबीए की पढ़ाई कर रही है। दोपहर को वह दोस्त दीपेश जैन से मिलने गई थी। अचानक तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई। गनीमत रही नंदनी नीचे बनी दुकान के शेड गिरी, जिससे उसकी जान बच गई। युवती के गिरने से लोग घबरा गए। इंदौर में हिंदू लड़कियों के साथ फ्लैट में मिले फैजान को पुलिस ने किया गिरफ्तार, नशा करवाता थाइंदौर में हिंदू लड़कियों के साथ फ्लैट में मिले फैजान को पुलिस ने किया गिरफ्तार, नशा करवाता था लोगों ने तुरंत ही पुलिस को मामले का सूचना दी। उसके बाद उसको लेकर अस्पताल पहुंच गए, जहां उसका इलाज चल रहा है। नंदनी के कमर और हाथों में चोट आई है। पैर फिसलने से नीचे गिरी लड़की टीआइ ने जानकारी दी कि नंदनी ने बयान में बताया कि दीपेश उसी के कॉलेज का छात्र है। वह उसका सीनियर है।वह उससे मिलने के लिए गई थी। इस दौरान मोबाइल पर फोन आ गया, तो वह बातचीत कर रही थी। मेरा ध्यान न होने की वजह से पैर फिसल गया और नीचे गिर गई। हादसे के समय रूम में था दीपेश दीपेश जैन ललितपुर का रहने वाला है। वह यहां किराये से रहकर पढ़ाई कर रहा है। उसने पुलिस को जानकारी दी कि हादसे के समय वह रूम में ही मौजूद था। नंदनी के मोबाइल पर कॉल आने से पहले वह बातचीत कर रहे थे। recent visitors 86