सीएम योगी बोले- 1947 का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण, पीएम मोदी होते तो कोई बाल भी बांका न कर पाता

CM Yogi said the Partition of 1947 was proof of the Congress’s cowardice; had PM Modi been in charge, no one could have caused even the slightest harm. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 में हुआ देश का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण है। उस समय अगर सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री होते या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व देश के पास होता तो कोई भी हमारे देश का बाल भी बांका नहीं कर पाता पर कांग्रेस की बुजदिली के कारण देश का बंटवारा हुआ। इस दौरान लाखों की संख्या में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों का कत्लेआम हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दो कारणों से भारत गुलाम हुआ था जिनमें से एक कारण आपसी अंतर्विरोध था। जाति, क्षेत्र और भाषा को लेकर अंतर्विरोध और षड्यंत्रों के कारण देश कमजोर होता चला गया। इसका परिणाम गुलामी के रूप में आया। अंतर्विरोधों के कारण हम सामूहिक रूप से लड़ ही नहीं सकें। इसका दुष्परिणाम सामने आना ही था। देश गुलाम हो गया। सनातन काल से जो भारत एक भारत था वो टुकड़ों में बंट गया। आजादी के बाद शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुईमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बंटरवारे के बाद कांग्रेस राज में शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुई। निजी संपत्तियां बनाई गईं। होना तो ये चाहिए था कि पाकिस्तान से जो हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख आए थे उन्हें बसाने के लिए मदद करनी चाहिए थी पर उनकी मदद नहीं की गई। जमीनों की बंदरबांट हुई। उन्होंन कहा कि पहले की तरह आज भी सपा और कांग्रेस की मानसिकता विभाजनकारी है। ये लोग देश को और समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। सीएम योगी ने निकाला पैदल मार्च, डिप्टी सीएम हुए शामिलविभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ में पटेल प्रतिमा से लेकर लोकभवन तक पैदल मार्च निकाला गया जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। recent visitors 5

आज शाम थम जाएगा दतिया में चुनावी शोर, 2.20 लाख मतदाता करेंगे 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

Election campaigning in Datia will come to a halt this evening; 2.20 lakh voters will decide the fate of 21 candidates. विधानसभा उपचुनाव में मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता ही घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर सकेंगे। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में 2 लाख 20 हजार 344 मतदाता 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। ईवीएम में प्रत्याशियों के साथ नोटा का विकल्प भी रहेगा। तीन अगस्त को नतीजे आएंगे। दतिया में कुल 2,20,344 मतदाता हैं। इनमें 1,16,088 पुरुष और 1,04,246 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 10 अन्य मतदाता भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। विधानसभा क्षेत्र में 1,372 दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक उम्र के 1,237 और 443 सर्विस वोटर भी हैं। यही मतदाता 30 जुलाई को ईवीएम में बटन दबाकर 21 प्रत्याशियों की किस्मत तय करेंगे। भाजपा ने विकास को बनाया मुख्य मुद्दाभाजपा ने चुनाव प्रचार में दतिया के विकास को मुख्य मुद्दा बनाया। पार्टी ने ढाई साल से क्षेत्र में विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस को घेरा। भाजपा नेताओं ने मतदाताओं से कहा कि पार्टी प्रत्याशी के जीतने पर रुके हुए विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा। प्रचार के दौरान सरकार के काम और दतिया के विकास को लेकर भी जनता के बीच नेता पहुंचे। कांग्रेस ने नरोत्तम के साथ भाजपा को घेरावहीं कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में दतिया उपचुनाव में भाजपा के दावेदार माने जा रहे पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को निशाने पर रखा। पार्टी ने उनके कार्यकाल के दौरान दतिया में कानून-व्यवस्था और कथित गुंडागर्दी को लेकर लगातार सवाल उठाए। कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने को भी चुनावी मुद्दा बनाया और इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधा। दोनों दलों ने जातीय समीकरण साधने लगाई पूरी ताकतदतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 40-40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार प्रचार में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी रैली और जनसभा कर मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। करीब 10 से 15 कैबिनेट मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में जातीय और स्थानीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी दी गई। ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं ने भी प्रचार में मोर्चा संभाला। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार प्रचार करते रहे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा हेमंत कटारे, जयवर्धन सिंह और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अन्य नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। दोनों दलों ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए पूरी ताकत लगाई। आज पांच बजे के बाद बाहरी नेताओं की नो एंट्रीमंगलवार शाम पांच बजे प्रचार थमने के बाद बाहर से आए नेताओं को दतिया विधानसभा क्षेत्र की सीमा से बाहर जाना होगा। इसके बाद प्रत्याशी और स्थानीय कार्यकर्ता ही मतदाताओं से डोर-टू-डोर संपर्क कर सकेंगे। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद अब दोनों दलों का फोकस मतदान के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने पर रहेगा। 30 को ईवीएम में बंद हो जाएगा प्रत्याशियों का भाग्य30 जुलाई को मतदान के साथ ही 2.20 लाख मतदाताओं का फैसला ईवीएम में बंद हो जाएगा। 21 प्रत्याशियों के साथ नोटा भी विकल्प होगा और मतगणना में तय होगा कि दतिया की जनता ने किसके पक्ष में अपना जनादेश दिया। recent visitors 18

MP के मंत्री लखन पटेल का वापस लिया गया प्रभार, क्या हैं इसके मायने; समझें

MP Minister Lakhan Patel stripped of his portfolio; understand the implications. मध्य प्रदेश के मंत्री लखन पटेल का प्रभार वापस ले लिया गया है। पशुपालन और डेयरी विकास विभाग अब मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि केंद्रीय नेतृत्व समीक्षा करेगा, और बदलाव की भोपाल ! मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में अचानक बदलाव किया गया है। देर रात राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन और डेयरी विकास विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात लखन पटेल का प्रभार वापस लिया गया और उसके तुरंत बाद गज नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। अब पशुपालन और डेयरी विकास विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है। अब संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही मध्य प्रदेश कैबिनेट में बदलाव हो सकता है। क्या बोले लखन पटेल इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद लखन पटेल का बयान सामने आया है। पटेल ने कहा कि किसी मंत्री को विभाग सौंपना या उससे विभाग वापस लेना मुख्यमंत्री का अधिकार है। इस तरह अब मध्य प्रदेश कैबिनेट में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इस मामले के ठीक पहले मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इंटरव्यू में कहा था कि सरकार और पार्टी ने हर मंत्री के राजनीतिक प्रभाव, उसके कामकाज के क्षेत्र और विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा करने के बाद उसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। हालांकि, इस मामले को भाजपा प्रशासनिक फैसला बता सकती है, लेकिन विभाग वापस लेने के समय से साफ हो गया है कि यह मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद लिए गए फैसले का नतीजा है। मंत्रिमंडल में कब होगा बदलाव बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से जब पूछा गया कि क्या एमपी कैबिनेट में बदलाव की संभावना है। इसका जवाब देते हुए खंडेलवाल ने किसी तरह के बदलाव से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब बदलाव जरूरी होंगे, सही समय पर किया जाएंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल बदलाव की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व जब फैसला करेगा, तभी मंत्रिमंडल में बदलाव किए जाएंगे। इस मामले पर बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मंत्रियों की समीक्षा पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट दिल्ली भी पहुंच चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि पटेल से विभाग वापस लेने वाले फैसले को कैबिनेट में बड़े फेरबदल के पहले बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मामले पर जब खंडेलवाल से पूछा गया कि क्या कोई मंत्री उम्मदी के मुताबिक काम नहीं कर रहा है. तो उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने साफ किया कि पार्टी संगठन के पास मंत्रियों के कामकाज की पूरी जानकारी है उन्होंने कहा कि पार्टी को मंत्रियों के कामकाज ओर उनके व्यवहार के बारे में केंद्रीय नेतृत्व को जानकारी मिलती रहती है। recent visitors 25

इंदौर कलेक्टर का समस्या सुलझाने का अलग स्टाइल

Indore Collector’s unique style of problem solving इस IAS के लोग दीवाने, पत्नी भी कलेक्टर, इन्हें कहते हैं बुजुर्गों और मजबूरों का मसीहा इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के फैन हो रहे इंदौरवासी, किसी भी समस्या का तुरंत कर देते हैं समाधान, मदद वाली कलेक्टरी चर्चा में. भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में इन दिनों जनसुनवाई में कुछ ऐसा ही नजारा देखने मिल रहा है, जहां कलेक्टर की मदद वाली अनोखी कलेक्टरी देखने मिल रही है। हम बात कर रहे हैं कलेक्टर शिवम वर्मा की। IAS शिवम वर्मा इन दिनों अपनी खास जनसुनवाई के लिए काफी लोकप्रिय हैं। किसी भी समस्या के समाधान के लिए अब इंदौर शहर के रहवासी सीधे कलेक्टर का रुख कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कोई अधिकारी या विभाग नहीं, सीधे कलेक्टर शिवम वर्मा के पास गए तो काम बन ही जाएगा। हर मंगलवार कलेक्टर से मिलने उमड़ती है भीड़ हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट में होने वाली जन सुनवाई में कुछ ऐसा ही नजारा देखने मिलता है, जहां कलेक्टर से मिलने की आस में जमकर भीड़ लगती है.यहां लोग अपनी-अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते हैं और बाकायदा इंदौर कलेक्टर उन्हें अपनी पास बुलाकर समस्या का समाधान तत्काल कर देते हैं। एक ओर जहां सरकारी कार्यालयों में धक्के खाए और ऐढ़ी घिसाए बिना काम नहीं होता तो वहीं, इसके ठीक उलट इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने विभिन्न समस्याओं से जूझते बुजुर्गों और मजबूर लोगों की मदद तत्काल कर रहे हैं। यही वजह है कि पूरे जिले से लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर यहां जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। इस IAS के लोग दीवाने, मिलने के लिए लगती है लाइनअपने पास बिठाकर समस्या सुनते हैं कलेक्टरकलेक्ट्रेट के मुख्य दरवाजे से लेकर जनसुनवाई के पंजीयन और लंबी लाइन की भारी मशक्कत और धक्का मुक्की के बाद जब लोग कलेक्ट्रेट में आईएएस शिवम वर्मा के कक्ष से लगे जनसुनवाई कक्ष में पहुंचते हैं तो वहां का नजारा राहत देने वाला होता है। कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर खुद आवेदक को अपने साइड में बिठाकर इत्मिनान से उसकी समस्या सुनते हैं। इसके बाद कलेक्ट्रेट संबंधित अधिकारी को तत्काल परेशानी हल करने के निर्देश देते हैं। बुजुर्गों पर दिया जाता है सबसे ज्यादा ध्यान सबसे खास बात यह है कि यहां बुजुर्गों को विशेष तरजीह दी जाती है। उन्हें सम्मान के साथ बिठाकर उनकी हर समस्या को गंभीरता से सुना जाता है। इस दौरान यहां कलेक्टर के निर्देश पर तमाम विभाग के आला अधिकारी बुजुर्गों की मदद के लिए तैनात नजर आते हैं। इतना ही नहीं, पिछली सुनवाई में आवेदकों के निराकरण की स्थिति के साथ भी अधिकारी तैयार रहते हैं। हर मंगलवार कलेक्टर से मिलने उमड़ती है भीड़ हर वर्ग के लोग समस्याएं लेकर यहां पहुंचते हैं यहां सुबह से ही भीड़ इतनी मचती है कि यहां तैनात कलेक्ट्रेट के सहायक स्टाफ के साथ सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग कम पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में यहां कई बार भीड़ नियंत्रित करने के लिए स्वयंसेवकों अथवा स्काउट गाइड आदि की भी मदद लेनी पड़ रही है। इस जनसुनवाई में आने वाले हर व्यक्ति की कोशिश यही रहती है कि वह किसी और से नहीं बल्कि सिर्फ कलेक्टर शिवम वर्मा को मिलकर ही अपनी समस्याएं बताएंगे। मौके पर कई बुजुर्गों से जब अन्य अधिकारी उनकी समस्याएं जानना चाहते हैं, तो वह कई बार समस्याएं तो बताते हैं लेकिन पूरी बात और कागज सिर्फ कलेक्टर को ही बताना चाहते हैं। इस स्थिति में हर मंगलवार को सुबह 9:00 बजे से लेकर दोपहर से शाम तक कलेक्टर शिवम वर्मा लोगों की भीड़ से घिरे रहते हैं। काम नहीं करने वालों पर एक्शन लेते हैं कलेक्टर जनसुनवाई में खुद कलेक्टर शिवम वर्मा जितनी समस्याओं को लेकर निराकरण के अलग-अलग निर्देश देते हैं। उनकी मॉनिटरिंग पर उनकी नजर रहती है। लिहाजा टीएल बैठक और अन्य बैठकों में वह जनसुनवाई के प्रकरणों की वस्तुस्थिति की समीक्षा करते हैं। कई बार जब लोगों की अथवा बुजुर्गों की समस्या का समाधान नहीं होता तो कलेक्टर संबंधित अफसर अथवा जिम्मेदार को दंडित करने से भी नहीं चूकते। IAS शिवम वर्मा की पत्नी भी कलेक्टर वर्तमान में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा 2013 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस ऑफिसर हैं, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी हैं। शिवम वर्मा भोपाल के मैनिट से बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने IAS क्लियर किया। उनकी धर्मपत्नी जयती सिंह भी आईएएस ऑफिसर होकर बड़वानी कलेक्टर हैं। इंदौर कलेक्टर से पूर्व शिवम वर्मा नगर निगम इंदौर में कमिश्नर भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने जिला पंचायत ग्वालियर में बतौर सीईओ काम संभाला है। अपनी इस पहले पर क्या कहते हैं कलेक्टर? अपनी इस मदद वाली कलेक्टरी पर आईएएस शिवम वर्मा कहते हैं, ” हमारा प्रयास रहता है कि माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्व में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंदों को पहुंचाया जाए। हम यह भी प्रयास करते हैं कि किसी भी व्यक्ति या खासतौर पर बुजुर्ग किसी भी योजना से वंचित न रह जाए और उसकी समस्या का तत्काल समाधान हो। लोगों की समस्या का समाधान करके आत्म संतुष्टि मिलती है।” recent visitors 23

‘ये धर्म को बेचकर कमाई करते हैं, फिर उससे विधायक खरीदते हैं…’, राम मंदिर चंदा चोरी पर बोले दिग्विजय सिंह

“They make money by selling religion, then use it to buy MLAs…” — Digvijaya Singh on the Ram Mandir donation theft. Digvijaya Singh News: महिला कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे में चोरी का आरोप लगाया. BJP-RSS पर निशाना साधते हुए 5-6 जुलाई को अयोध्या में केस दर्ज कराने का ऐलान किया. महिला कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन और चंदे के मुद्दे पर भाजपा व आरएसएस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “हनुमान गढ़ी और गोरखनाथ मठ ने राम मंदिर की लड़ाई लड़ी. न तब वहां RSS थीं और ना तब वहां बीजेपी पार्टी थी. भगवान राम से प्रेम इन्हें तब उमड़ा जब इनके केवल 2 सांसद बचे. उन्होंने आगे कहा कि ये लोग धर्म को बेचकर अपनी कमाई करते हैं और उसे कमाई से वोट खरीदते हैं, विधायक खरीदते हैं, सांसद खरीदते हैं. हमारे ही चंदा की चोरी कर यह खरीद रहे हैं. मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचाया जा रहा है. मैंने जो चंदा दिया है, जिसकी इन्होंने चोरी की है, इसके लिए अपने वकील के माध्यम से 5-6 जुलाई को अयोध्या जाकर केस दर्ज कराऊंगा.” recent visitors 22

मैहर में भाजपा का कार्यक्रम बना अखाड़ा: सांसद व पूर्व मंत्री की मौजूदगी में भिड़े नेता, फीकी पड़ी उपलब्धियां

BJP event in Maihar turns into a battleground: Leaders clash in the presence of MP and former minister; focus shifts away from achievements. मैहर । BJP event in Maihar भारतीय जनता पार्टी द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित 12 साल बेमिसाल कार्यक्रम मैहर जिले की अमरपाटन विधानसभा के ताला मंडल में उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब मंच पर ही भाजपा के दो नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात मारपीट तक पहुंच गई। कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ता और पदाधिकारी उस समय हैरान रह गए, जब पार्टी की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में ही नेताओं के बीच हाथापाई शुरू हो गई। घटना के दौरान मंच पर सांसद गणेश सिंह, पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता मौजूद थे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल गया और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। नाम लेने को लेकर शुरू हुआ विवादप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान भाषण और मंच संचालन के क्रम में नेताओं के नामों के उल्लेख को लेकर विवाद शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल के भाई विजय पटेल और भाजपा ताला मंडल के महामंत्री मनीष चतुर्वेदी के बीच इसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई। दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ती गई और देखते ही देखते मामला इतना गरमा गया कि मंच पर ही हाथापाई शुरू हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। घटना के बाद कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच भी इस विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। वरिष्ठ नेताओं के सामने हुआ हंगामा BJP event in Maiharजिस मंच से भाजपा के 12 वर्षों की उपलब्धियों का बखान किया जाना था, वहीं पार्टी के दो पदाधिकारियों के बीच हुई मारपीट ने संगठन की छवि को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह रही कि जब यह विवाद हुआ तब सांसद गणेश सिंह और पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, जिसके बाद मामला शांत कराया गया। हालांकि, घटना के बाद कार्यक्रम का पूरा फोकस पार्टी की उपलब्धियों से हटकर विवाद पर आ गया। थाने पहुंचा मामला, शिकायत दर्जकार्यक्रम समाप्त होने के बाद विवाद थाने तक पहुंच गया। भाजपा ताला मंडल के महामंत्री मनीष चतुर्वेदी ने ताला थाने पहुंचकर विजय पटेल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। मंच पर माइक छीना गया। पीड़ित के चेहरे पर चोट आई है। फरियादी के साथ बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी थाने पहुंचे, जिन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शुरू की जांचताला थाना पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संगठन के भीतर मतभेदों की चर्चा तेजमंच पर हुई इस घटना के बाद भाजपा संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों और गुटबाजी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह का विवाद संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, मामले पर मैहर भाजपा जिला अध्यक्ष कमलेश सुहाने से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि दोनों कार्यकर्ताओं के बीच आपसी मतभेद हो गया था। यह पार्टी के आंतरिक फोरम से जुड़ा मामला है। दोनों पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनका कहना है कि बातचीत और स्पष्टीकरण के बाद मामला सुलझ गया है तथा अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है। कार्यकर्ताओं में चर्चा का विषय बनी घटनाताला मंडल में हुई यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक लोग इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठनात्मक कार्यक्रमों में इस तरह की घटनाएं न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश भी देती हैं। recent visitors 42

MP में टूट रोकने विधायकों को कर्नाटक भेजेगी कांग्रेस, विशेष विमान से जाएंगे बेंगलुरू

Congress to send MLAs to Karnataka to prevent defections in MP; they will travel to Bengaluru by special flight. MP Congress MLA : एमपी में बीजेपी द्वारा राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को उतार देने के बाद से ही राजनैतिक हलचल तेज हो गई है। अपने दोनों उम्मीदवारों तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल की जीत के लिए जरूरी वोटों के बाद भी पार्टी के पास 48 वोट बच रहे हैं। कांग्रेस की सीट छीनने के लिए बीजेपी को महज 10 वोट चाहिए जिसके लिए हर तिकड़म भिड़ाई जा रही है। चर्चा है कि कांग्रेस के करीब 10 विधायक संपर्क में हैं। क्रास वोटिंग की आशंका कांग्रेस नेतृत्व को भी है। यही कारण है कि अपने विधायकों को बचाने के लिए उन्हें किसी अन्य राज्य में शिफ्ट कर रही है। पहले कांग्रेस विधायकों को हिमाचल ले जाने की बात कही जा रही थी लेकिन अब उन्हें कर्नाटक ले जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि शाम तक सभी विधायकों को बेंगलुरू शिफ्ट कर दिया जाएगा। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के विधानसभा में नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद सोमवार को सभी कांग्रेस विधायकों को सीधे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी यहां पहुंचे और सभी विधायकों के साथ लंच लिया। इसके बाद तीसरी सीट को लेकर बीजेपी की रणनीति का जवाब देने विचार विमर्श कर प्लान तैयार किया। https://x.com/UmangSinghar/status/2064052099705639222?s=20https://x.com/UmangSinghar/status/2064052099705639222?s=20 डिनर में लिया बड़ा फैसलाकांग्रेस का सियासी मंथन शाम को भी जारी रहा। अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए लंच पॉलिटिक्स के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ‘डिनर डिप्लोमेसी’ की। उन्होंने पार्टी के सभी विधायकों को अपने निवास पर डिनर पर आमंत्रित किया। यहां विधायकों को किसी अन्य कांग्रेस शासित राज्य में शिफ्ट करने का अहम फैसला लिया गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने बताया कि कांग्रेस विधायक दल एवं पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ रात्रि भोज पर आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर विस्तृत रणनीतिक चर्चा एवं विचार-विमर्श किया। पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि प्रभावी नेतृत्व और विधायकों की एकता से राज्यसभा चुनाव में विजय का मार्ग प्रशस्त होगा। कांग्रेस के सभी विधायक विशेष विमान से बेंगलुरू के लिए रवाना होगेपता चला है कि कांग्रेस अपने विधायकों की सुरक्षा और क्रॉस वोटिंग के खतरे को देखते हुए अब उन्हें कर्नाटक शिफ्ट कर रही है। मंगलवार को दोपहर में कांग्रेस के सभी विधायक विशेष विमान से बेंगलुरू के लिए रवाना हो जाएंगे। विधायक 18 जून तक बाहर ही रहेंगे। recent visitors 44