प्रदूषण को लेकर सैनी सरकार की सख्ती, घटे पराली जलाने के मामले, 34 नई FIR हुई दर्ज

कैथल हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ 19 अक्तूबर से रेड एंट्री करने की कार्रवाई शुरू होने के बाद पराली जलाने के मामलों में तेजी से कमी दर्ज की गई है। पांच दिन में प्रदेश मेंं पराली जलाने के कुल 54 नए मामले आए हैं। इस सीजन में हॉट स्पॉट बन चुके कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल में पराली जलाने के मामलों में कमी आ रही है। पांच दिन में 54 मामले आए तिथि            नए मामले 19 अक्तूबर 15 20 अक्तूबर 11 21 अक्तूबर 2 22 अक्तूबर 11 23 अक्तूबर 15 34 नई एफआईआर, 11 किसानों की रेड एंट्री और 15 नए मामले आए बुधवार को पराली जलाने पर 11 किसानों की मेरी फसल मेरा बीमा पोर्टल के जरिए रेड एंट्री की गई। इसके अलावा 34 नई एफआईआर भी दर्ज की गईं। अभी तक राज्य में कुल 385 किसानों की रेड एंट्री और 127 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। 332 चालान कर किसानों से 8,40,000 रुपये जुर्माना वसूला गया है। अब तक राज्य में पराली जलाने के कुल 680 मामले सामने आ चुके हैं। देश के 36 प्रदूषित शहरों में हरियाणा के 10 जिले प्रदूषण रोकने के तमाम सरकारी दावों के बीच हरियाणा में हवा की सेहत दिन पर दिन खराब होती जा रही है। बुधवार को देश के 36 प्रदूषित शहरों में हरियाणा के 10 जिले शामिल हैं। इनमें भिवानी और करनाल का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लेवल रेड जोन में पहुंच गया है। हालांकि, मंगलवार के मुकाबले जींद और सोनीपत में प्रदूषण कम हुआ है। एक दिन पहले दोनों जिलों में प्रदूषण का स्तर रेड जोन में था। अब सोनीपत का एक्यूआई लेवल 272 और जींद का एक्यूआई लेवल 193 हो गया है। नौ जिलों में एक्यूआई लेवल 100 से 200 से बीच यलो जोन में है। नौ जिलों में प्रदूषण लेवल यलो जोन में भिवानी             290 करनाल            284 चरखी दादरी      259 गुरुग्राम             247 फरीदाबाद         238 रोहतक            228 कुरुक्षेत्र            221 हिसार             220 यमुनानगर        196 नारनौल            195 जींद                193 पानीपत            185 पंचकूला            184 कैथल             183 पलवल            136 अंबाला            111 सिरसा             111 recent visitors 72

एयरपोर्ट का टर्मिनल-1 बनकर तैयार, CM भजनलाल शर्मा 26 को करेंगे उद्घाटन, 27 अक्टूबर से होगा शुरू

जयपुर एयरपोर्ट के अनुमानित यात्री भार में 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ टर्मिनल-1 का उद्घाटन हवाई अड्डे की समग्र क्षमता को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 26 अक्टूबर को जयपुर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का उद्घाटन करेंगे। 1.5 मिलियन सालाना क्षमता वाले यह टर्मिनल को 27 अक्टूबर की मध्यरात्रि से अंतरराष्ट्रीय विमानों के लिए चालू हो जाएगा। जयपुर में अब दो टर्मिनल होंगे। टर्मिनल-1 पर अक्टूबर 27 की मध्यरात्रि से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन शुरू हो जाएगा। नया टर्मिनल हेरिटेज स्वरुप में विकसित किया गया हैं। जयपुर एयरपोर्ट के अनुमानित यात्री भार में 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ टर्मिनल-1 का उद्घाटन हवाई अड्डे की समग्र क्षमता को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। 2023 में लगभग 5.4 मिलियन यात्रियों ने टर्मिनल-2 से यात्रा की। इस वर्ष यातायात में और वृद्धि होने की संभावना है। हवाई कनेक्टिविटी में सुधार और अयोध्या, बीकानेर, आबूधाबी, कुआलालंपुर में नए मार्गों के खुलने से यात्री यातायात में प्रभावशाली वृद्धि हुई है। 27 अक्टूबर से सभी अंतरराष्ट्रीय यात्री सांगानेर थाने के पास स्थित टर्मिनल-1 से अपनी उड़ानें भर सकेंगे। जल्द ही यहां पर डमी चेक रन भी शुरू किया जाएगा। सीआरपीएफ ने संभाली सुरक्षा टर्मिनल-1 की सुरक्षा व्यवस्था में लगभग सीआरपीएफ के 100 कर्मचारियों तथा जवानो की ओर से संभाली जाएगी। डिपार्चर क्षेत्र में लगभग 10 इमीग्रेशन काउंटर स्थापित किए गए हैं, जबकि अर्रिवाल क्षेत्र में 14 काउंटर स्थापित किए गए हैं। टर्मिनल-1 भवन में 10 चेक-इन काउंटर होंगे। साथ ही एक समर्पित मेडिकल रुम, एम्बुलेंस सेवाएं, लाउन्ज भी सामान्य रुप से संचालित होंगे। पहली फ्लाइट आबूधाबी की 27 अक्टूबर को जयपुर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर उतरने वाली पहली फ्लाइट आबूधाबी से एतिहाद एयरवे की होगी। उड़ान रात 2.10 बजे उतरेगी और सभी यात्रियों का टर्मिनल-1 पर भव्य स्वागत किया जाएगा। recent visitors 72

दूध, पनीर से लेकर मिठाई, मसालों के साथ अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं जो हरियाणा में धड़ल्ले से मिलावटी बिक रहे

हरियाणा दूध दही के खाने के लिए मशहूर हरियाणा में धड़ल्ले से मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं। खुद खाद्य एवं औषधि विभाग के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। एक साल में विभाग की ओर से लिए गए कुल सैंपल में से 25 प्रतिशत फेल पाए गए हैं। मतलब ये खाद्य पदार्थ खाने लायक नहीं मिले। इनमें दूध, पनीर से लेकर मिठाई, मसालों के साथ अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक विभाग ने 1 अप्रैल, 2023 से लेकर 31 मार्च 2024 तक अलग-अलग खाद्य पदार्थों के कुल 2682 सैंपल लिए। जांच में 676 सैंपल फेल पाए गए हैं। आंकड़े ये भी बता रहे हैं कि पूरे प्रदेश में प्रतिदिन केवल सात और माह में केवल 210 सैंपल ही लिए जा रहे हैं। इसका सीधा सा मतलब ये है कि काफी संख्या में खाद्य पदार्थों की जांच विभाग कर ही नहीं पाता और लोगों को मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थ धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। न स्टाफ न अधिकारी बता दें कि कम सैंपल लिए जाने का सबसे बड़ा कारण ये है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न जांच व निगरानी के लिए अधिकारी हैं। स्थिति ये है कि इस समय प्रदेश के 22 जिलों में से मात्र सात जिलों में ही जिला खाद्य अधिकारी हैं और सभी के पास दो से तीन तीन जिलों के चार्ज है। दूसरा, फूड सेफ्टी आफिसर (एफएसओ) की बात करें तो प्रदेश में केवल 10 अधिकारी हैं और इनके पास भी कई-कई जिलों के चार्ज हैं। प्रदेश में फूड सेफ्टी ऑफिसर के 45 स्वीकृत पदों में से 43 लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्थायी तौर पर केवल दो पदों पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी काम कर रहे हैं। शेष अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर रखा गया है। पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग से अधिकारियों को डेप्यूटेशन पर लिया गया है और इनके भरोसे ही विभाग चल रहा है। recent visitors 106

बिना परीक्षा दिल्ली मेट्रो में मिल रही है नौकरी, लाखों में होगी महीने की सैलरी

नईदिल्ली दिल्ली की जान दिल्ली मेट्रो में सरकारी नौकरी पाने का शानदार मौका आ गया है। जी हां, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने जनरल मैनेजर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर और सुपरवाइजर के लिए उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। ऐसे में इच्छुक अभ्यर्थी दिल्ली मेट्रो की आधिकारिक वेबसाइट delhimetrorail.com पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। सुपरवाइजर के लिए 8 नवंबर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर के लिए 12 नवंबर और जनरल मैनेजर के लिए उम्मीदवार 13 नवंबर तक अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। Delhi Metro Vacancy 2024 Notification: वैकेंसी डिटेल्स दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने इन तीनों पदों को भरने के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किया है। अभ्यर्थी नीचे टेबल से वैकेंसी डिटेल्स के साथ पदानुसार आधिकारिक नोटिफिकेशन भी डाउनलोड कर सकते हैं। Delhi Metro Jobs Eligibility: योग्यता जनरल मैनेजर के पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियर में बैचलर डिग्री या इसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। प्रोजेक्ट डायरेक्टर के लिए सिविल इंजीनियरिंग बैचलर डिग्री में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक भी होने जरूरी है। वहीं सुपरवाइजर के पद पर इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियर/ आईटी/कंप्यूटर साइंस आदि में फुल टाइम डिप्लोमा होना चाहिए। योग्यता संबंधित जानकारी विस्तार से अभ्यर्थी भर्ती के आधिकारिक नोटिफिकशन से चेक कर सकते हैं। Metro Supervisor Salary: एज लिमिट     सैलरी- सुपरवाइजर के पद पर चयनित उम्मीदवारों को 50,000-72,600 रुपये प्रति माह सैलरी मिलेगी। वहीं प्रोजेक्ट डायरेक्टर को 1,20,000-2,80,000/- प्रतिमाह और जनरल मैनेजर को 12,0000-2,80,000/-रुपये मंथली सैलरी दी जाएगी।     चयन प्रक्रिया- दिल्ली मेट्रों में इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन बिना किसी परीक्षा के सीधे साक्षात्कार के जरिए किया जाएगा।     आयुसीमा- यह भर्ती डेप्यूटेशन और Absorption बेस पर हो रही है। इसीलिए इसमें अभ्यर्थी पदानुसार अधिकतम 50-62 वर्ष तक आवेदन कर सकते है। Delhi Metro Jobs 2024 Apply Online: यहां करें अप्लाई दिल्ली मेट्रो की इस भर्ती में उम्मीदवारों को ऑफलाइन आवेदन करना होगा। निर्धारित आखिरी तारीख तक अभ्यर्थियों को जरूरी दस्तावेज निर्धारित पते पर भेजने होंगे। पता है- एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (HR), दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेश लिमिटेड, मेट्रो भवन, फायर ब्रिज लेन, बारहखंबा रोड, नई दिल्ली। इस भर्ती से संबंधित अन्य किसी भी जानकारी के लिए अभ्यर्थी डीएमआरसी की आधिकारक वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। recent visitors 83

अनिर्वचनीय है उपकार का आनंद

भगवान महावीर ने कहा था कि संसार में लोक कल्याण, विश्वशांति, सद्भाव और समभाव के लिये अपरिग्रह का भाव जरूरी है। यही अहिंसा का मूल आधार है। परिग्रह की प्रवृत्ति अपने मन को अशांत बनाती है और हर प्रकार से दूसरों की शांति को भंग करती है। लेकिन आज हर बड़ी मछली छोटी मछली को निगल रही है। धनवान व्यक्ति परिग्रह और अहं प्रदर्शन के द्वारा असहायों एवं कमजोरों के लिये समस्याएं पैदा करता है। यह संसाधनों पर कब्जा ही नहीं करता बल्कि उसका बेहूदा प्रदर्शन करता है, जिससे मानसिक क्रोध बढ़ता है और हिंसा को बढ़ावा मिलता है। महावीर ने इसलिए एक-दूसरे के सहायक बनने की बात कही। उन्हीं के दिये उपदेशों से निकला शब्द है विसर्जन। समतामूलक समाज निर्माण के लिये जरूरी है कि कोई भी कितना ही बड़ा व्यवसायी बने, लेकिन साथ में अपरिग्रहवादी भी बने। अर्जन के साथ विसर्जन की राह पर कदम बढ़ाये। डा. अच्युता सामंता ने कलिंग विश्वविद्यालय के रूप में उच्च शिक्षा के बड़े गढ़ स्थापित किये तो उससे होने वाली आय को आदिवासी गरीब बच्चों के कल्याण में विसर्जित किया। 12 हजार से अधिक गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने वाले सामंता आज भी एक चटाई पर सोते हैं उनका कोई आशियाना नहीं है। इसी भांति गणि राजेंद्र विजयजी अपनी संतता को सार्थक करते हुए आदिवासी कल्याण के लिये अनेक योजनाएं संचालित कर रहे हैं, उनका भी कोई भव्य आश्रम नहीं है। ऐसे ही प्रयत्नों से हम भारत को विकसित होते हुए देख सकते हैं। तभी तो शंकराचार्य ने कहा है- दरिद्र कौन है? भारी तृष्णा वाला। और धनवान कौन है? जिसे पूर्ण संतोष है। गांधीजी ने अहमदाबाद में आश्रम शुरू किया, एक समय आर्थिक तंगी के कारण आश्रम बंद करने की नौबत आयी। गांधी जी मंथन कर रहे थे। आश्रम बंद होगा, यह बात निश्चित लग रही थी। एक शाम एक सर्वथा अनजाना व्यक्ति आया और रुपयों की एक थैली देकर, साबरमती के अंधकार में अदृश्य हो गया। आज तक यह पता नहीं लग सका कि व्यक्ति कौन था। आश्रम अगर चालू रह सका, तो उस व्यक्ति के कारण। निःस्वार्थ, सहज, सात्विक उपकार ऐसा ही होता है। सही रूप में विसर्जन, बिना किसी अपेक्षा के। ऐसा उपकार मनुष्य पर प्रकृति पल-पल करती रहती है। सूर्य, पृथ्वी, वायु आकाश एवं जंगलों की तरफ से सतत् होता रहता है- तभी हमारी जीवन है हम जिंदा हैं। इसीलिये जार्ज बनार्ड शा को कहना पड़ा कि कमाए बगैर धन का उपयोग करने की तरह ही खुशी दिए बगैर खुश रहने का अधिकार हमें नहीं है। रेल में या बस में थोड़ा सिकुड़ कर अगर आप किसी के लिये जगह बना देते हैं तो एक विशेष प्रकार के संतोष की अनुभूति होती है। स्मरण कीजिए, भूतकाल में कई बार आपके लिये किसी ने इसी प्रकार जगह बना दी थी। आज आप उनका नाम व चेहरा भी भूल गये होंगे। यह दुनिया भी एक रेल है। यहां भी ऐसे ही किसी अनजान के लिये थोड़ा संकोच करें बिना किसी अपेक्षा के, पेड़ अगर फल देता है तो क्या आपसे थैंक्यू की भी अपेक्षा करता है? सचमुच देने का सुख अप्रतिम है। कृतज्ञता अहंकार का विसर्जन है। संत तिरूवललुवर की उक्ति बहुत मर्मस्पर्शी है कि स्ेह शून्य व्यक्ति सब वस्तुओं को अपने लिए मानते हैं। स्नेह संपन्न व्यक्ति अपने शरीर को भी दूसरों का मानते हैं। उपकार का आनंद अनुभव करना है तो आपने जो किया उसे जितनी जल्दी ही भूल जाएं और आपके लिये किसी ने कुछ किया, उसे कभी न भूलें। आज जरूरत है हर समर्थ आदमी अपने से कमजोर का सहायक बने। तकलीफ तब होती है जब इसका उल्टा होता है।   recent visitors 71

रॉयल एनफील्ड अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को लॉन्च के लिए कर रही तैयार

नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को लॉन्च करने की तैयार कर चुकी है। कंपनी इसे इसी साल EICMA में पेश करने वाली है। इसे लेकर कंपनी एक टीजर भी जारी कर चुकी है जिसमें 4 नवंबर की तारीख को सेव करने की बात कही थी। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का टेस्ट म्यूल विदेशी सड़कों पर पहले ही देखा जा चुका है। ये फोटो रॉयल एनफील्ड की पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के प्रोटोटाइप को दिखाती हैं। इसकी फोटो को MCN ने शेयर किया है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल टेस्ट म्यूल में एक गोल LED हेडलाइट और एक पतला और लो-स्लंग बिल्ड दिखा है। ये बाइक एडजस्टेबल लीवर से भी लैस है। इसमें टर्न इंडिकेटर इंस्ट्रूमेंट कंसोल के करीब लगे हैं। इसके हार्डवेयर में गर्डर फोर्क्स, रोड-बायस्ड टायर के साथ एलॉय व्हील्स और एक खुला हुआ रियर फेंडर शामिल है। फ़ुटपेग न्यूट्रल तरीके से सेट किए गए दिखते हैं। रियर व्यू मिरर मौजूदा क्लासिक 350 पर दिखने वाले मिरर के समान दिखते हैं। रॉयल एनफील्ड की इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के बैटरी पैक और मोटर की डिटेल का खुलासा नहीं हुआ है। कंपनी अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के फ्रंट फोर्क्स, मेन फ्रेम, स्विंगआर्म समेत कई जगहों पर एल्युमीनियम का इस्तेमाल किया है। भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की कीमतें 1.50 लाख के आसपास है। कंपनी के लिए दूसरा बड़ा बेनिफिट ये भी है कि वो ओला की पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल से पहले इसे लॉन्च करने वाली है। रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के एक्सपेक्टेड फीचर्स रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का जो डिजाइन पहले भी लीक हो चुका है। इसके मुताबिक उसमें क्लासिकल स्टाइल वाले बॉबर का फॉर्म फैक्टर देखने के लिए मिलेंगे। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल में एक पिलियन को ले जाने की सुविधाहोगी। इसका चेसिस डिजाइन पूरी तरह से अनोखा होगा। इसमें रेक-आउट फ्रंट एंड, स्कूप्ड-आउट सोलो सैडल और खुला, झुका हुआ रियर फेंडर हो सकता है। फ्यूल टैंक एरिया पर लूपिंग फ्रेम प्रोडक्शन मोटरसाइकिलों से काफी अलग हो सकती है। यह देखने में काफी हद तक हार्ले-डेविडसन की क्रूजर मोटरसाइकिल जैसी नजर आ रही है। माना जा रहा है कि इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल में एक फ्रेम के तौर पर बैटरी पैक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें बैटरी कवर और मोटर दोनों को आसपास फिट किया जा सकता है। यह वैसा ही होगा जैसा कि हार्ले-डेविडसन की इलेक्ट्रिक बाइक्स बनाने वाली कंपनी लाइववायर ने अपने S2 मॉडल के साथ किया है। बाइक में बेल्ट ड्राइव बाइक के दाईं तरफ हो सकती है और इसमें दोनों तरफ डिस्क ब्रेक होंगे। बाइक की जो इमेज सामने आई है उससे ऐसा लगता है जैसे कि इसमें एक मोनोशॉक है जो स्विंगआर्म के ऊपरी एलिमेंट से जुड़ा है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का मुख्य आकर्षण फ्रंट सस्पेंशन सेटअप है, जहां गर्डर फोर्क्स देख सकते हैं। ये इलेक्ट्रिक 01 कॉन्सेप्ट में देखा गया था। गर्डर फोर्क्स में दो गर्डर आर्म्स होते हैं, जो दोनों तरफ से व्हील को पकड़ते हैं। एक टॉप डॉगबोन फ्रंट फोर्क असेंबली को बाइक के मेनफ्रेम से जोड़ता है। रॉयल एनफील्ड इलेक्ट्रिक बाइक डिजाइन पेटेंट प्रोडक्शन-स्पेक होने की संभावना नहीं है। इसके बजाय, यह रॉयल एनफील्ड के लिए अपकमिंग ऑटो शो में पेश करने के लिए एक अवधारणा हो सकती है। कॉन्सेप्ट व्हीकल के डिजाइन को पेटेंट कराना एक काफी आम बात है। प्रोडक्शन-स्पेक मॉडल में इस पेटेंट और USD फ्रंट फोर्क्स में देखे गए टायर से ज्यादा मोटे टायर हो सकते हैं। recent visitors 68

देश के साधु-संत, महंत, अखाड़ा प्रमुखों और महामंडलेश्वर आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर मुख्यमंत्री की घोषणा को सराहा है

साधु-संतों ने उज्जैन में भी स्थायी आश्रम बनाने के मुख्यमंत्री के निर्णय को सराहा स्वामी अवधेशानंद जी ने संतों के प्रति संवेदनशीलता के लिए मुख्यमंत्री को दिया साधुवाद देश के साधु-संत, महंत, अखाड़ा प्रमुखों और महामंडलेश्वर आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर मुख्यमंत्री की घोषणा को सराहा है अखाड़ा परिषद ने निर्णय को बताया विकासोन्मुखी भोपाल उज्जैन में वर्ष 2008 में होने वाले वैश्विक सिंहस्थ की तैयारियां राज्य शासन ने अभी से शुरू कर दी है। सिंहस्थ में पूरे देश से आने वाले साधु-संतों से भी उज्जैन की पहचान सदैव से रही है। साधु-संतों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा स्थायी आश्रम निर्माण के लिए की गई घोषणा को पूरे देश के साधु-संत, महंत, अखाड़ा प्रमुखों और महामंडलेश्वर आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर मुख्यमंत्री की घोषणा को सराहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हरिद्वार में जिस प्रकार साधु-संतों के अच्छे आश्रम बने हुए हैं, उसी प्रकार उज्जैन में भी साधु-संतों के स्थायी आश्रम बनवाने के प्रयास किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से योजना को आकार दिया जाएगा। सभी मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ साधु-संतों के लिए आश्रम निर्माण के कार्य समानांतर रूप से होंगे। समाज के इच्छुक सनातन धर्मावलंबियों के माध्यम से अन्न क्षेत्र, धर्मशाला, आश्रम, चिकित्सा केंद्र, आयुर्वेद केंद्र आदि सार्वजनिक गतिविधियों के संचालन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा की गई इस महत्वपूर्ण पहल का उज्जैन से लेकर हरिद्वार तक संत समाज ने स्वागत किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मां मनसा देवी ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष पंचायती निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय को अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताते हुए विकास के लिये नये आयाम स्थापित करने वाला बताया है। महांमडलेश्वर और अखाड़ों के प्रमुखों ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की है। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति में चिरकाल से अंतर्निहित “सर्वं खल्विदं ब्रह्म नेह नानास्ति किंचन” व “आत्मवत सर्व भूतेषु” जैसे दिव्य भावों के संपोषक, लोक कल्याणकारी योजनाओं तथा पारमार्थिक प्रवृत्तियों के प्रसारक संत सत्पुरुष ही हैं। स्वामी अवधेशानंद जी ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लिये गये निर्णय अनुसार उज्जैन में हरिद्वार की भाँति साधु संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर इत्यादि को स्थाई आश्रम बनाने की अनुमति दी जाना, अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने उज्जैन तीर्थ विकास एवं संतों के प्रति उनकी इस संवेदनशीलता के लिये मुख्यमंत्री को साधुवाद दिया। पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर 1008 आनंद विभूषित अवधूत बाबा अरुण गिरी जी महाराज (एनवायरमेंट बाबा) ने कहा कि संतों में बड़ा उल्लास और खुशी है। सिंहस्थ क्षेत्र उज्जैन में जो अखाड़ों की जगह है, संतों की जमीन है, उसमें पर्यावरण को बचाते हुए स्थायी निर्माण के लिए सभी संत समाज के लोग उनका स्वागत करते हैं। इससे हरिद्वार जैसा विकास उज्जैन का भी हो जाएगा, जब सभी संत महापुरुषों का वहां आश्रम बनेगा। राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, पीठाधीश्वर वाल्मिकी धाम ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी सूझबूझ और विवेक से अभुतपूर्व और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कुंभ मेला भारत के चार पवित्र स्थानो पर लगता है उसमें एक अवंतिका पुरी उज्जैन भी है। प्रसन्नता की बात है कि कुंभ, अवंतिका और मध्यप्रदेश के शासनकाल के इतिहास में डॉ. यादव के निर्णय से कुंभ-2028 में देश के उच्च कोटि के महात्मा तंबूओ में न रहकर पक्के आश्रम में रहेंगे। बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्णय इस लिये लिया है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। डॉ. यादव ने संकल्प लिया है कि 2028 में जो कुंभ आएगा उसमें हम देश के जितने भी निर्धारित अखाड़े हैं, उन सभी अखाड़ों का स्थायी निर्माण करके दिया जाएगा। उसके लिए एक हेक्टेयर के भू-खंड पर 25 प्रतिशत पर भवन निर्माण किया जा सकेगा। शेष भू-खंड अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिये खुला रहेगा। उन्होंने सन्यासी होने के नाते देश के तमाम साधु-संतों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और आशीर्वाद दिया। आचार्य महामंडलेश्वर श्रीपंचदशनाम आव्हान अखाडा हरिद्वार के अरुण गिरी जी महाराज (अवधूत बाबा), बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, पीठाधीश्वर वाल्मिकी धाम, (राज्यसभा सांसद), महंत रामेश्वर गिरी महाराज, सचिव श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा, अध्यक्ष, शैव मंडल उज्जैन, पीर रामनाथ जी महाराज, गादीपति, भर्तहरि गुफा, उज्जैन एवं महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज अध्यक्ष रामादल अखाड़ा परिषद उज्जैन ने भी मुख्यमंत्री के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की है।   recent visitors 122