रामनगरी में दीपोत्‍सव की तैयारियां अंतिम चरण में, पांच किलोमीटर दूर से देखा जा सकेगा मनमोहक नजारा

अयोध्या रामनगरी में 30 अक्‍टूबर को होने वाले दीपोत्‍सव के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस साल यहां संगीत की धुन पर ग्रीन आतिशबाजी शो का आयोजन किया जाएगा। राम की पैड़ी पर आसमान में 600 फीट तक ऊंचाई पर आतिशबाजी से सरयू का आकाश जगमगाएगा। इस आतिशबाजी को चार से पांच किलोमीटर क्षेत्र के लोग बड़ी संख्‍या में देख सकेंगे। इस बार पुराने सरयू पुल पर ग्रीन एरियल फायर क्रैकर्स शो किया जाएगा। एक्सिस कम्‍युनिकेशन के प्रमुख संजय सिंह ने बताा कि 30 अक्‍टूबर को शाम को पुराने सरयू पुल पर आतिशबाजी, लेजर शो, फ्लेम शो और संगीत के संगम से भव्‍य कार्यक्रम प्रस्‍तुत किया जाएगा। इस आयोजन का मुख्‍य आकर्षण प्रदूषणमुक्‍त ग्रीन आतिशबाजी होगी। देश और दुनिया से आ रहे श्रद्धालु गौरतलब है कि अयोध्‍या में राम मंदिर की प्राणप्रतिष्‍ठा के बाद पहली बार होने जा रहा दीपोत्‍सव बेहद खास है। इस बार देश और दुनिया को गवाह बनने का मौका मिलेगा। सात समंदर पार के रामभक्‍त भी दीपोत्‍सव के साक्षी बन सकेंगे। प्रशासन की ओर से दूरदर्शन समेत अन्‍य सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म पर दीपोत्‍सव के लाइव प्रसारण की तैयारी की जा रही है। यहां सजाए गए मंच अयोध्‍या के दीपोत्‍सव में 10 मंच तैयार किए जा रहे हैं। इन्हीं मंचों पर कलाकार रामलीलाओं और रामकथा पर नृत्‍य नाटिकाओं का प्रस्तुतीकरण करेंगे। ये मंच गुप्‍तारघाट, बड़ी देवकाली, रामघाट, बिड़ला धर्मशाला, भरत कुंड, तुलसी उद्यान, भजन संध्या हनुमानगढ़ी, बस अड्डा बाईपास और रामकथा पार्क पर बनाए जा रहे हैं। रामकथा प्रसंगों की निकलेगी शोभायात्रा शोभायात्रा की झांकियों में भी रामलीला दल के कलाकार रामकथा से जुड़े प्रसंगों की झांकियां अपने रथों के मंचों से पेश करेंगे। इसमें मनु सतरूपा, नारद मोह, पृथ्‍वी पुकार, पुत्रेष्‍ठ यज्ञ, रामजन्‍म, मुनि आगमन, ताड़का वध, अहिल्‍या उद्धार, गंगा उत्‍पति, धनुषयज्ञ, राम विवाह, राम वनवास, केवट प्रसंग, शूर्पणखा प्रसंग, सीताहरण, लंका दहन, रामेश्वर स्थापना, राम राज्याभिषेक, राम दरबार और राम मंदिर की झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। recent visitors 88

सनातन धर्म के अधिकारों पर सवाल: देवकीनंदन ठाकुर की धर्म संसद में बड़ी घोषणाएँ

Question on the rights of Sanatan Dharma: Big announcements made by Devkinandan Thakur in Dharma Sansad देश में वक्फ तो सनातन बोर्ड क्यों नहीं? – देवकीनंदन ठाकुर का सवाल और धर्म संसद का ऐलान भोपाल। प्रख्यात कथावाचक Devkinandan Thakur in Dharma Sansad ने हाल ही में वक्फ बोर्ड और सनातन धर्म के अधिकारों को लेकर एक बड़ी मांग उठाई है। जबलपुर, मध्य प्रदेश में एक सभा के दौरान उन्होंने यह सवाल किया कि यदि देश में वक्फ बोर्ड के तहत संपत्तियों का प्रबंधन किया जा सकता है, तो सनातन धर्म के लिए ऐसा कोई बोर्ड क्यों नहीं है? इसके लिए उन्होंने “सनातन बोर्ड” की आवश्यकता पर जोर दिया और राजनीतिक पार्टियों से इस पर स्पष्ट रुख अपनाने का आग्रह किया। तिरुपति प्रसाद विवाद और हिंदुओं की धार्मिक आस्था देवकीनंदन ठाकुर ने तिरुपति मंदिर के प्रसाद में कथित रूप से चर्बी मिलाए जाने की घटना पर भी गहरी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, यह आस्था और धर्म का गंभीर उल्लंघन है और इसे 100 करोड़ हिंदुओं की हत्या के समान माना जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रसाद में अशुद्धता फैलाने वाले दोषियों को फांसी या आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे कृत्य से हिंदुओं की धार्मिक भावना को गहरी चोट पहुँचती है और इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। वक्फ बोर्ड बनाम सनातन बोर्ड: धार्मिक संतुलन की माँग देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि देश में वक्फ बोर्ड के पास अनेक संपत्तियों का स्वामित्व है, जिनमें कुछ संसद और एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर भी दावा किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐसे ही हालात बने रहे तो 10-12 सालों में वक्फ बोर्ड पूरे देश पर अधिकार जमाने का दावा करेगा। इसके मद्देनजर उन्होंने माँग की कि जैसे वक्फ बोर्ड को संपत्तियाँ दी गई हैं, उसी प्रकार सनातन बोर्ड को भी संपत्तियाँ दी जानी चाहिए ताकि धार्मिक संतुलन बना रहे। राजनीतिक दलों से सवाल और धर्म संसद का आयोजन देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि इस विषय पर सभी राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट करना होगा और सनातन बोर्ड के मुद्दे पर उनका समर्थन भी करना होगा। उन्होंने घोषणा की कि 16 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सनातन धर्म के अधिकारों और संरक्षण के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। धर्म संसद में उठाए जाने वाले मुद्दे आगामी धर्म संसद में लव जिहाद, गौ हत्या, कृष्ण जन्मभूमि की वापसी, और अन्य धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। देवकीनंदन ठाकुर ने जनता से इस धर्म संसद में पहुँचने का आह्वान किया ताकि इन गंभीर मुद्दों पर व्यापक समर्थन और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा सके। ऐतिहासिक स्थलों की वापसी का संकल्प देवकीनंदन ठाकुर ने इस दौरान एक और महत्वपूर्ण बात कही कि जामा मस्जिद की सीढ़ियों में भगवान केशव की छवि को दबाकर रखा गया है। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि इसे हर हाल में वापस लाया जाएगा, क्योंकि यह सनातन धर्म के मान-सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। बेटी भी अपनी, बेटा भी अपना: भेदभाव से बचे, संतुलित समाज की ओर बढ़ें यह भी पड़े: https://mysecretnews.com/both-your-daughter-and-your-son-should-avoid-excesses/ देवकीनंदन ठाकुर द्वारा उठाए गए ये मुद्दे न केवल सनातन धर्म की आस्था से जुड़े हैं, बल्कि धार्मिक संपत्तियों के संतुलन और सम्मान की भी माँग करते हैं। उनकी पहल से समाज में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल और अन्य धार्मिक संस्थाएँ इस पर क्या रुख अपनाती हैं। धर्म संसद के आयोजन के साथ ही इन मुद्दों पर और भी गहन विमर्श होने की संभावना है, जो भारत के धर्म-समाज की दिशा और संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। recent visitors 231

बेटी भी अपनी, बेटा भी अपना: भेदभाव से बचे, संतुलित समाज की ओर बढ़ें,,,

Both your daughter and your son should avoid excesses. ✍️प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट आजकल समाज में दिखावा ज्यादा ही चल रहा बेटीयों के लिए, ऐसे ऐसे विडियों डाले जाते है मानो बेटे नालायक ही होते हैं,बेटा होना गुनाह है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना चल रही अच्छा है,बेटी है तो कल है और अच्छा पर क्या बेटा होना,,,, अपराध है,सजा है। समाज की सोच सकारात्मक हो चली बेटी को बोझ अब नहीं समझा जाता,, पर क्या बेटे बोझ है,बेटे कल नहीं। हमे बेटे बेटी में भेदभाव नहीं करना चाहिए,बेटे को पिता को मारते बेटी को बचाते दिखा रहे,बेटी पिता का रास्ता देख रही,,, तो क्या बेटे नहीं देखते। समझने की आवश्यकता है कि यह विडियो, स्लोगन आदि बच्चों में क्या प्रभाव डाल रहे। Both your daughter and your son should avoid excesses. बेटी हमेशा पिता से ज्यादा लगाव रखती है,बेटा मां से और यह  स्थापित सच्चाई है। पुत्र मां को जन्म से लेकर मृत्यु तक मुंह पर रखता है नाम, दुनिया के सारे स्वाद स्वादिष्ट कहेगा पर कहेगा मेरी मां के हाथ से बने,,,,खाने का स्वाद ही अलग,,,वह दादा परदादा भी बन जाए अपनी मां के सामने बेटा ही, ठीक ऐसे ही पिता बेटी को दिल में रखता है, क्योंकि बेटी में उसे अपनी मां की छवि नजर आती है, बेटी भी ध्यान रखने में मां समान रखती है। पंरतु हमें समाजिक स्तर पर, पारिवारिक जीवन में, ध्यान रखना चाहिए और  बेटा बेटी एक समान,, परिवार की है शान।।।। जैसी सकारात्मक सोच रखे, बेटी भी पढे बेटा भी, बेटी भी शान बेटा भी शान ,,,मेरा परिवार महान,,,। कृपया बालमन को समझे,, अन्यथा हीनभावना से ग्रस्त अपने बच्चे को पाऐंगे। यह भी पड़े: https://mysecretnews.com/services-civil-conduct-act-are-retired-officers/ बेटा-बेटी दोनों परिवार की शान हैं। हमें चाहिए कि हम अपने बच्चों में आपसी समानता और सम्मान का भाव जगाएँ। सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हमारे बच्चे किसी प्रकार की हीनभावना का शिकार न हों। हमारे लिए बेटा-बेटी एक समान हैं और यह सोच ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव रखेगी। “बेटी भी अपनी, बेटा भी अपनी शान। दोनों से है परिवार महान।” recent visitors 275