अच्छे जमाने का संकेत, राजस्थान-केकड़ी के मेले में गोपाल महाराज के बेवाण के नीचे से निकली लाल गाय

केकड़ी. अन्नकूट महोत्सव के अंतर्गत केकड़ी के सांपला धाम पर प्रदेश का प्रसिद्ध गाय मेला शनिवार को धूमधाम से भरा। भगवान गोपाल महाराज की सवारी निकाली गई। इस दौरान शाम को भगवान के बेवाण के नीचे से लाल गाय निकली, जिससे आने वाले समय को अच्छा होने का संकेत मानकर क्षेत्रवासियों में हर्ष व्याप्त हो गया। केकड़ी जिले के सांपला ग्राम में सुप्रसिद्ध गाय मेला शनिवार को सम्पन्न हुआ। मेले में सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान गोपाल महाराज की भक्ति की। मंदिर के पंडित प्रहलाद चंद्र त्रिपाठी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर के सभी पुजारियों को हवन यज्ञ के माध्यम से जनेऊ धारण कराया गया। मंदिर को गोमूत्र पंचामृत से पवित्र कर सुबह 11 बजे ढोल नगाड़ों के साथ भगवान गोपाल महाराज का बेवाण निकाला गया, जो राम चौक मुख्य बाजार होता हुआ रावला चौक पहुंचा, जहां भगवान गोपाल महाराज के अनन्य भक्त अहिल्या बाई को एक चमत्कारी झांकी के माध्यम से दर्शन कराए गए। इस चमत्कारी झांकी के दर्शन के लिए अजमेर सहित जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा और कई जिलों के हजारों श्रद्धालु उमड़े। दोपहर को भगवान के बेवाण को कीर्ति स्तंभ पर लाया गया, जहां ठीकरे को लेकर गायों के बीच में पूजा अर्चना की गई और उसे गंगाजल छिड़क कर गायों के बीच घुमाया गया। शाम को करीब पौने पांच बजे ठीकरे के माध्यम से एक लाल रंग की गाय भीड़ में से होती हुई बेवाण के पास पहुंची और नीचे से निकल गई। इस दौरान पूरा वातावरण द्वारकाधीश के जयकारों से गूंज उठा। बेवाण के नीचे से निकली गाय को भगवान की परिक्रमा लगवाकर लड्डू खिलाया गया। भजन गायक रतन लाल पीपलवा व हरिराम चौधरी आदि ने भजनों की प्रस्तुति दी। सांपला का गाय मेला एक अनोखा अनुष्ठान है, जिसमें जिस रंग की गाय ठीकरे के माध्यम से बेवाण के नीचे से होकर निकलती है, उसी से आसपास के क्षेत्र में भविष्य के बारे में अनुमान लगाया जाता है। इस बार लाल गाय निकलने को अच्छे जमाने के संकेत माना जा रहा है। किसान लोग भी अब इसके आधार पर ही खेतों में फसल की बुवाई करेंगे। यह मेला पिछले 600 सालों से भरता आ रहा है, जिसमें आसपास के क्षेत्र के अलावा देशभर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। अन्नकूट के दिन यहां गांव में भगवान की सवारी निकाली जाती है तथा बड़ी संख्या में गांव के कीर्ति चौक में गायों को इकट्ठा किया जाता है। इन गायों में से कोई एक गाय खुदबखुद भगवान की सवारी के नीचे से निकलकर मंदिर के अंदर तक जाती है। इसी दृश्य को देखने के लिए हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। पिछले सैकड़ों सालों से निभाई जा रही इस परम्परा में सबसे पहले भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना कर उनके बेवाण को पूरे गांव में घुमाते हुए गायों के झुंड से करीब आधा किलोमीटर दूर रोककर भजन कीर्तन किए जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, हजारों गायों के झुंड में भगवान के घोटानुमा दडे को घुमाया जाता है, जिसके बाद इन हजारों गायों में से कोई एक गाय दौड़ती हुई भगवान के बेवाण तक पहुंचती है और बेवाण के नीचे से निकलकर मंदिर के अंदर तक जाती है। इस परंपरा के अनुसार गाय के रंग से आने वाली फसल कैसी होगी, इसका आकलन किया जाता है। सांपला गांव में आयोजित होने वाला द्वारिकाधीश गोपाल महाराज का यह गाय मेला ऐतिहासिक है। मान्यता है कि पुरातन काल में यहां स्वयं द्वारकाधीश पधारते थे। उनके यहां आने की स्मृति में ही बरसों से यह मेला भरता आ रहा है। कहा जाता है कि गांव के दामोदर दास महाराज भगवान कृष्ण के भक्त थे, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर संवत 1474 में द्वारका से भगवान द्वारकाधीश गोपाल महाराज गांव के बाहर से निकलने वाले रेवड़ में बैल की पैठ (गाड़ी) पर सवार होकर आए और मूर्तियों के रूप में सांपला गांव में आकर दर्शन दिए, तभी से यह मेला भर रहा है। मेला ग्राउंड में सैकड़ों गायों के झुंड के बीच चांदी के ठिकरे को गायों के बीच घुमाया जाता है, जिसके बाद कोई एक गाय सवारी के नीचे से निकलकर मंदिर में जाती है। इसके विपरीत यदि कोई गाय नहीं आती है तो इसे पुजारी द्वारा भगवान की सेवा और पूजा-अर्चना में लापरवाही माना जाता है, जिसे लेकर सभी पुजारियों के हाथ बंधवाकर द्वारकाधीश गोपाल महाराज के भक्त दामोदरदास के चरणस्थल पर जाकर क्षमा याचना कराई जाती है और चांदी के सवा रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है। recent visitors 185

पालक को लाखों का नुकसान, राजस्थान-अलवर में बदमाशों ने मधुमक्खियों से भरे बॉक्स जलाए

अलवर. अलवर के निकट भरतपुर मार्ग पर स्थित बगड़ राजपूत में किए जा रहे मधुमक्खी पालन के डिब्बों में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी। यह मधुमक्खी पालन गांव के पास गोचर भूमि पर किया जा रहा था। आग लगने से लाखों मधुमक्खियां जलकर नष्ट हो गई और करीब सौ डिब्बे जलकर राख हो गए। आग लगने से आठ लाख रुपये का नुकसान हो गया। मधुमक्खी पालन करने वाला अपने गांव गया हुआ था।इस संबंध में अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिली है, लेकिन मधुमक्खी पालक को भारी नुकसान हुआ है। मधुमक्खी पालन का यह व्यापार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिला निवासी नोशाद का था। नोशाद ने बताया कि सहारनपुर में मधुमक्खी पालन करने वालों की बैठक थी, वह इसी में भाग लेने सहारनपुर गया हुआ था। पीछे से किसी ने जान बूझकर मधुमक्खी पालन के डिब्बों में आग लगा दी। उसने बताया कि उसके पास फोन आया कि उसकी मधुमक्खी के डिब्बों में आग लगा दी गई है। उसने तुरंत यहां आकर देखा तो करीब सौ डिब्बे जले हुए मिले। यह आग किसने लगाई, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। लेकिन यह आग जिसने भी लगाई, उसकी मंशा उसके प्रति अच्छी नहीं रही होगी। आग लगाने वाले के मन मे क्या मंशा रही, इसका भी पता नहीं चला है। लेकिन आग लगने वाले ने मधुमक्खी पालक का लाखों का नुकसान अवश्य कर दिया। इस नुकसान से उसको क्या फायदा हुआ, यह भी सोचने वाली बात है। क्योंकि इस आग में लाखों मधुमक्खियां भी जलकर मर गई। वैसे एक बात अवश्य है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी ने मधुमक्खी पालन के डिब्बों में आग लगाई हो। अन्यथा मधुमक्खी पालन का यह व्यवसाय कई जगहों पर होता है। लेकिन इससे पहले इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। खास बात यह है कि जिस जगह यह डिब्बे लगे हुए थे, वो रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के तहत आता है, जहां उपचुनाव हो रहे हैं। recent visitors 84

चिल्लाने पर भाग खड़ी हुईं महिलाएं, राजस्थान-बीकानेर में दो मासूम बच्चों के अपहरण की कोशिश

बीकानेर. बीकानेर शहर के नयाशहर थाना इलाके में दो नाबालिग बच्चों को किडनैप करने का असफल प्रयास का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि व्यासों के चौक से बिन्नाणी चौक की ओर रिश्तेदार के यहां दीपावली रामा श्यामा करने जा रहे दो नाबालिगों को महिलाओं ने जबरन पकड़ लिया और साथ ले जाने लगी। बच्चों के चिल्लाने पर महिलाएं भाग खड़ी हुई। जानकारी मिली है कि लालाणी व्यास चौक निवासी केदारनाथ व्यास के पुत्र गिरिराज व विश्वम्भर व्यास के पुत्र गोविन्द अपने रिश्तेदार के यहां जाने को कहकर निकले। करीब आधे घंटे बाद दोनों घबराए हुए घर आए और गुमशुम होकर कमरे में बैठ गए। काफी देर तक कुछ भी नहीं बोलने पर उनसे पूछताछ की तो उन्होंने सारा घटनाक्रम बताया कि बिन्नाणी चौक जाने वाली गली में कुछ महिलाओं ने उन्हें पकड़ लिया और अपने साथ जाने के लिए कहा। मना करने पर डराने लगी। इस दौरान गोविंद ने महिलाओं से कहा, सॉरी हमसे क्या गलती हुई है, जो आप हमें ले जा रहे हो। काफी देर बहसबाजी के बाद एक मोटरसाइकिल सवार उधर से निकलता देख दोनों बच्चे चिल्लाए। उसके बाद महिलाएं घबराकर वहां से भाग गई। इस घटनाक्रम को लेकर बच्चों के पिता ने नयाशहर थाने में परिवाद दिया है। recent visitors 73

पाकिस्तान अब भारतीय रुपए को स्वीकार नहीं कर रहा, सिख जत्थों से कहा गया है कि वे डॉलर या पाउंड लेकर आएं

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने आर्थिक स्थिति में गिरावट के बावजूद, वहां भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए अपनी मुद्रा के उपयोग को सीमित करने की नई शर्तें लागू की  हैं। पाकिस्तान अब भारतीय रुपए को स्वीकार नहीं कर रहा है और वहां जाने वाले सिख जत्थों से कहा गया है कि वे डॉलर या पाउंड लेकर आएं। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान और पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा, "अब भारत की संगत से भारतीय रुपए नहीं लिए जाएंगे। श्रद्धालुओं को डॉलर या पाउंड लेकर आना होगा।" यह नया नियम 14 नवंबर को श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाने के लिए पाकिस्तान जाने वाले लगभग तीन हजार भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। अतीत में, भारतीय श्रद्धालु अपने साथ रुपये लेकर पाकिस्तान जाते थे, जहां उन्हें भारतीय रुपए को पाकिस्तानी नोटों में आसानी से एक्सचेंज करने की सुविधा थी। हर वर्ष लगभग 7,200 भारतीय सिख श्रद्धालु अपने धार्मिक तीर्थ स्थलों का दौरा करने के लिए पाकिस्तान जाते हैं, जहां वे 10,000 से 15,000 रुपए खर्च करते हैं। अब, जब भारतीय श्रद्धालुओं को विदेशी मुद्रा का प्रबंध करना होगा, कई लोगों को यह एक नई चुनौती प्रतीत होती है। श्री ननकाना साहिब सिख यात्री जत्था के प्रधान रोबिन गिल ने भारत के विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि 13-14 नवंबर को अटारी सीमा पर एक करंसी एक्सचेंज काउंटर खोला जाए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के डॉलर या पाउंड ले सकें। गिल ने यह भी बताया कि इस जत्थे में शामिल अधिकांश लोग बुजुर्ग किसान हैं, जिनके लिए विदेशी मुद्रा से परिचित होना कठिन हो सकता है। अगर सरकार सीमा पर एक्सचेंज काउंटर खोले, तो श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में कमी के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान ने भारतीय रुपये को स्वीकार करने से इनकार किया है। इससे न केवल सिख श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि यह पाकिस्तान की आर्थिक प्रणाली की कठिनाइयों को भी उजागर करता है।     recent visitors 141

भारत में टीबी 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 मामलों से घटकर 2023 में यह संख्या 195 हुई: WHO

नई दिल्ली विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में भारत में तपेदिक (टीबी) के मामलों में सुधार की सराहना की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 मामलों से घटकर 2023 में यह संख्या 195 हो गई है, जो 18% की गिरावट दर्शाती है। यह वैश्विक गिरावट 8% की तुलना में दोगुनी से अधिक है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट टीबी मामलों की खोज के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों का परिणाम है। देश भर में 1.7 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण के प्रयास भी इसकी एक वजह हैं। टीबी से मौतों में कमी पिछली रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने भारत में टीबी मृत्यु दर को कम किया था, और मौजूदा रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि टीबी से होने वाली मौतों में भी कमी आई है। यह संख्या 28 प्रति लाख जनसंख्या से घटकर 22 प्रति लाख जनसंख्या तक आ गई है, यानी 21% की गिरावट। बजट में वृद्धि स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि टीबी के लिए बजट आवंटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2015 में 640 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 3,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि टीबी कार्यक्रम के लिए अधिकांश धन सरकारी संसाधनों से आता है। तकनीकी प्रगति केंद्र सरकार ने टीबी के व्यापक प्रयोगशाला नेटवर्क के पूरक के लिए 800 से अधिक एआई-सक्षम पोर्टेबल चेस्ट एक्स-रे मशीनें खरीदने का फैसला किया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा टीबी प्रयोगशाला नेटवर्क है, जिसमें 7,767 त्वरित आणविक परीक्षण सुविधाएं और 87 संस्कृति तथा दवा संवेदनशीलता परीक्षण प्रयोगशालाएं शामिल हैं। भारत ने टीबी नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए सितंबर में, सरकार ने अपने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (एमडीआर-टीबी) के लिए एक नए उपचार योजना 'बीपीएएलएम' की शुरुआत की, जो कम समय में अधिक प्रभावी है। 2024 के पहले नौ महीनों में, भारत ने 19.8 लाख टीबी रोगियों की रिपोर्ट की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4% की वृद्धि है। इस प्रकार, भारत ने टीबी नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे टीबी के मामलों में कमी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो रहा है। recent visitors 77

कनाडा की राजनीति में खालिस्तानी समर्थकों का दखल बढ़ा, पूर्व सिख समुदाय सदस्य बॉब राय ने यह चिंताएं व्यक्त की

कनाडा कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों के बारे में हाल ही में उठे आरोपों ने व्यापक बहस पैदा कर दी है।  2 नवंबर 2024 को रिपोर्ट के अनुसार पूर्व सिख समुदाय सदस्य बॉब राय ने यह चिंताएं व्यक्त की हैं कि विश्व सिख संगठन (WSO) की कनाडा  सरकार में संभावित घुसपैठ हो रही है। राय का कहना है कि यह संगठन कनाडाई राजनीति को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कनाडा की राजनीति में खालिस्तानी समर्थकों का दखल बढ़ रहा है और ट्रूडो सरकार आंतकियों की कठपुतली बन चुकी है। उन्होंने कहा कि  WSO के पास कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) के साथ संपर्क हो सकता है, जिससे विदेशों से प्रभाव और सार्वजनिक सेवा के उच्च स्तरों पर टकराव के सवाल उठ रहे हैं। बॉब राय ने अपने सिख धर्म से दूरी बना ली है और कहा है कि उन्होंने इसे चरमपंथी समूहों द्वारा "हाइजैक" करने के कारण छोड़ा। उन्होंने कहा, "वे कभी मेरे लिए नहीं बोले, और मैं उनके चरमपंथी और आतंकवादी विचारधाराओं का समर्थन नहीं करता।" उनकी टिप्पणी WSO की अपनी कार्रवाई का औचित्य साबित करने की कोशिशों पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। राय के इन बयानों में सिख समुदाय में चरमपंथ की विवादास्पद भूमिका को भी उजागर किया गया है। उन्होंने WSO के संस्थापक अध्यक्ष जियान सिंह संधू और उनकी बेटी, बीसी सुप्रीम कोर्ट की जज पलबिंदर शेरगिल के प्रति संभावित हितों के टकराव का भी इशारा किया। राय ने 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 के बम विस्फोट की जांच, जो कि खालिस्तानी चरमपंथियों से जुड़ी एक भयानक घटना थी, से इन चिंताओं को जोड़ा। इस हादसे में 329 लोगों की जान गई थी। राय के बयानों के नतीजे गंभीर हैं, क्योंकि ये सरकार की संरचनाओं की निष्पक्षता और कुछ न्यायिक नियुक्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हैं। उनके आरोपों से CSIS की सामुदायिक संगठनों के साथ alleged involvement पर भी कॉल किया जा सकता है। कनाडाई राजनीतिक और न्यायिक प्रणाली में संभावित हितों के टकराव को लेकर लोग अधिक सतर्क हो रहे हैं और एक बड़ी मांग बढ़ रही है कि इन संबंधों की खुफिया जांच की जाए। हालांकि WSO ने इन आरोपों पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राय का दृष्टिकोण राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता को इस बात पर सोचने पर मजबूर कर रहा है कि राजनीतिक सक्रियता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की सीमाएँ क्या हैं। कनाडा में धार्मिक स्वतंत्रता, सामुदायिक प्रतिनिधित्व, और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर यह बहस आगे बढ़ रही है। कनाडाई नागरिक ध्यान से देख रहे हैं कि सरकार एजेंसियाँ और राजनीतिक नेता इन आरोपों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और विदेशों से हुई भ्रष्टाचार की चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।   recent visitors 113

रूस की अदालत ने गूगल पर 2.5 डेसिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया, विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना

रूस रूस और गूगल के बीच चल रही तनातनी अब विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। रूस, जो यूक्रेन के साथ सीधे युद्ध में लगा हुआ है, अमेरिका के साथ आर्थिक संघर्ष भी कर रहा है। ऐसे में, रूस ने अमेरिकी टेक कंपनी गूगल पर ऐसा जुर्माना लगाया है, जिसकी राशि इतनी विशाल है कि यह धरती पर मौजूद कुल धन संपति से भी अधिक है। रूस की अदालत ने गूगल पर 2.5 डेसिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है, जो अमेरिकी गिनती के अनुसार 1 के आगे 36 ज़ीरो के बराबर है। इसे मान लेना मुश्किल है कि इतनी बड़ी राशि का कभी भुगतान किया जा सकेगा। विवाद की जड़ इस विवाद की शुरुआत लगभग चार साल पहले हुई थी, जब गूगल ने क्रेमलिन समर्थक यूजर्स तथा सरकारी मीडिया चैनलों, जैसे त्सारग्राद टीवी और आरआईए फैन के अकाउंट्स को यूट्यूब से हटा दिया था। गूगल का तर्क था कि इन चैनल्स ने प्रतिबंधित कानूनों और व्यापार नियमों का उल्लंघन किया है। इसके जवाब में, मास्को कोर्ट ने गूगल को आदेश दिया कि वह इन चैनलों के अकाउंट्स को फिर से बहाल करे, अन्यथा दैनिक 100,000 रूबल जुर्माना लगाया जाएगा। रूस के अधिकारी  गूगल पर बना रहे दबाव 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के साथ, गूगल ने कई अन्य रूस-समर्थित मीडिया चैनलों के अकाउंट भी बंद कर दिए। परिणामस्वरूप, रूस के 17 टीवी चैनलों ने गूगल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की, जिससे जुर्माने की राशि बढ़ती गई। रूस में गूगल का संचालन काफी हद तक घटित हो चुका है; हालांकि, कई अमेरिकी टेक कंपनियों की तरह, गूगल ने अपने सभी ऑपरेशन्स नहीं हटाए हैं। इसके बावजूद, रूस के अधिकारी निरंतर गूगल पर दबाव बना रहे हैं, और गूगल की रूसी सहायक कंपनी ने दिवालियापन के लिए आवेदन तक किया है। प्रतीकात्मक जुर्माना क्रेमलिन ने गूगल पर लगाए गए इस भारी भरकम जुर्माने को एक प्रतीकात्मक कदम बताया है, जिसका उद्देश्य गूगल को रूसी मीडिया पर अपने रुख को दोबारा विचार करने के लिए मजबूर करना है। रूस के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने कहा, "यह आंकड़ा उस गंभीरता को दर्शाता है, जिसके साथ रूस, YouTube द्वारा लागू किए गए इन प्रतिबंधों को देखता है।"हालांकि, YouTube रूस में अभी भी चालू है, परंतु यदि उन्होंने रूसी चैनलों पर अपने प्रतिबंध जारी रखा, तो रूस ने प्लेटफ़ॉर्म को पूरी तरह से ब्लॉक करने की धमकी दी है। इस मामले में गूगल को अदालत द्वारा फटकार भी लगाई गई है कि उन्होंने रूसी मीडिया को अपनी खबरें प्रसारित करने का अवसर नहीं दिया।  recent visitors 77