Wednesday, July 8, 2026 9:13 am

नियद नेल्लानार से बदल रही बस्तर के गांवों की तस्वीर, छत्तीसगढ़-विष्णुदेव के सुशासन में बम की जगह फिर गूंजी मांदल

जगदलपुर. अपने विशिष्ट मानव और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बस्तर अंचल के लोग अपनी अनोखी संस्कृति और परंपराओं का निर्वहन करने के लिए विश्वभर में विख्यात हैं. यहां के आदिवासी कठिन परिस्थितियों में भी खुशहाल जीवन जीने के लिए खुद को प्रकृति के अनुकूल बनाकर रखने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में यहां के आदिवासियों के खुशहाल जीवन को नक्सलियों की नजर लग गई थी. अब आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन से बस्तर वासियों का वक्त बदला है. एक बार फिर धीरे-धीरे बस्तर क्षेत्र के आदिवासी अपने पुराने दिनों की ओर लौटने लगे हैं. उनकी समस्याओं के उन्मूलन के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने ‘‘नियद नेल्लानार‘‘ (आपका अच्छा गांव) योजना संचालित किया है, जिसके बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. नियद नेल्लानार योजना विष्णुदेव साय सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसमें सुरक्षा कैंपों के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ शत प्रतिशत हितग्राहियों तक पहुंचाने की मुहिम चलायी जा रही है. इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन से इसका असर अब अंदरूनी गांवों में भी देखने को मिल रहा है. स्थानीय हाट बाजार अब गुलजार होने लगे हैं. बंद पड़े हाट बाजार और स्कूल अब फिर से शुरू हो रहे हैं, जिससे बस्तर अंचल की तस्वीर बदल रही है. सालों से बम धमाकों के बीच दहशत में जीवन गुजारने वाले आदिवासियों के जीवन का पुराना दौर लौटने लगा है और इन इलाकों में सािलों बाद मांदर की थाप फिर गूंजने लगी है. छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार ने आदिवासी समुदाय के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ अपना ध्यान केंद्रित किया है. राज्य की लगभग 3 करोड़ आबादी में एक तिहाई जनसंख्या आदिवासी समुदाय की है. आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र विष्णुदेव साय सरकार के सुशासन से समग्र विकास की ओर अग्रसर है. आदिवासी समुदायों में होने वाले विकास का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि इन इलाको में केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही पीएम जनमन योजना और राज्य सरकार की नियद नेल्ला नार योजना आदिवासियों का जीवन बदलने वाली साबित हो रही है. राज्य शासन की नियद नेल्लानार योजना जिसका शाब्दिक अर्थ होता है आपका अच्छा गांव योजना. ये योजना जनकल्याण का अभिनव उपक्रम साबित हो रही है. इस योजना के अंतर्गत माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित नए कैम्पों के आसपास के 5 किमी के दायरे में आने वाले 96 गांवों का चयन कर शासन के 17 विभागों की 53 योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं के तहत आवास, अस्पताल, पानी, बिजली, पुल-पुलिया, स्कूल इत्यादि मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए ब्याज रहित ऋण दिए जाने की भी योजना है.. शेष जिलों के विद्यार्थियों को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाएगा.. ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा 4 लाख रूपए रखी गई है. बस्तर के दूरस्थ इलाकों में जिस तरह स्वास्थ्य, सड़क, संचार और सुरक्षा नेटवर्क को मजबूती दी जा रही है, उसका लाभ आदिवासी वर्ग को मिलता दिखाई दे रहा है. इस योजना के आ जाने से न सिर्फ़ आदिवासी समाज के जीवन स्तर में गुणवत्ता का संचार हो रहा है बल्कि सरकार की पहल से प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद की समस्या को परास्त भी किया जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को आदिवासी समुदाय तक पहुंचाने के लिए नए-नए प्रयास किए जा रहे हैं.. आदिवासी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का वातावरण बदल रहा है.. साय सरकार पिछले 10 माह में आदिवासी समुदाय के आवास, पेयजल, विद्युत और सड़क सहित सभी बुनियादी जरूरतों पर तेजी से काम कर रही है. रायपुर से विशाखापट्नम तक इकोनॉमी कॉरिडोर छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय की बसाहट ज्यादातर वनांचल क्षेत्रों में है. इन क्षेत्रों में सड़क, नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है.. केन्द्र सरकार द्वारा भी भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से विशाखापट्नम तक इकोनॉमी कॉरिडोर बनाया जा रहा है.. इसका सीधा फायदा भी आदिवासी इलाकों को मिलेगा.. केन्द्र सरकार द्वारा नगरनार में देश का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र भी शुरू किया गया है, इससे बस्तर अंचल के विकास को नई गति मिली है. राज्य के आदिवासी क्षेत्रों और अयोध्या धाम तक सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने रायगढ़-धरमजयगढ़-मैनपाट-अंबिकापुर-उत्तरप्रदेश सीमा तक कुल 282 किमी तक के मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग की है. यह मार्ग प्रदेश के चार जिलों से होकर गुजरता है एवं धार्मिक नगरी अयोध्या से छत्तीसगढ़ राज्य को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है.. इस मार्ग के लिए भारत सरकार से हरी झण्डी मिल गई है. 36 कॉलेजों के भवन-छात्रावास के लिए 131 करोड़ 52 लाख की मंजूरी राज्य सरकार द्वारा 36 कॉलेजों के भवन-छात्रावास निर्माण के लिए 131 करोड़ 52 लाख रूपए मंजूर किए गए है.. इससे प्रदेश के 36 कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ होंगे तथा शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. इस स्वीकृति में अधिकांश आदिवासी बहुल क्षेत्रों के कॉलेजों को शामिल किया गया है.. नई दिल्ली के ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर अब 185 कर दी गई है.. नई दिल्ली में रहकर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की तैयारी करने के इच्छुक अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अब इस हॉस्टल में तीन गुने से भी अधिक सीटें उपलब्ध होंगी..आईआईटी की तर्ज पर राज्य के जशपुर, बस्तर, कबीरधाम, रायपुर और रायगढ़ में प्रौद्योगिकी संस्थानों का निर्माण किया जाएगा.. राज्य में छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन की स्थापना भी की जा रही है. प्रदेश के 263 स्कूलों में चल रही पीएमश्री योजना प्रदेश के 263 स्कूलों में पीएमश्री योजना शुरू की गई है, जिसके तहत इन स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है.. इस योजना के तहत स्कूलों में स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों को भी पढ़ाया जाएगा. पीएमश्री स्कूल आदिवासी बहुल इलाकों में भी स्कूलों को अपग्रेड किया रहा है, इससे इन क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक, ज्ञानपरक और कौशल युक्त … Read more

झोपड़ी में सोते समय हमले में मौत, छत्तीसगढ़-रायगढ़ में हाथी ने अधेड़ ग्रामीण को कुचला

रायगढ़. रायगढ़ जिले में हाथी के हमले से फिर एक ग्रामीण की मौत हो गई। घटना की जानकारी के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम मृतक के परिजनों को सहायता राशि देते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गई है। जानकारी के अनुसार, लैलूंगा रेंज के बगुडेगा के लाख पहरी जंगल में बीती रात हाथी ने एक अधेड़ ग्रामीण अगनु अगरिया 45 साल को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि मृतक अगनु बगुडेगा बस्ती से अलग जंगल के किनारे एक झोपड़ीनुमा घर में रहता था और बीती रात खान खाने के बाद रात 11 बजे करीब वह सोने गया था, जहां एक दंतैल हाथी ने उसका सामना हो गया। इसके बाद हाथी ने उसे कुचलकर मौत के घाट उतार कर वापस जंगल में चला गया। परिजनों को दी गई सहायता राशि इस घटना की जानकारी बुधवार की सुबह गांव के ग्रामीणों को लगने के बाद उन्होंने उक्त मामले की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिये अस्पताल भेजते हुए मृतक के परिजनों को तत्कालिक सहायता राशि देते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गई है। दहशत में ग्रामीण गांव के ग्रामीणों ने बीते कुछ समय से उनके क्षेत्र में 22 हाथी विचरण कर रहे हैं और हाथियों के इस दल के द्वारा किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसी बीच बीती रात हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो जाने के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। जिले में 152 हाथी वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इन दिनों रायगढ़ जिले में 151 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं। हाथियों के इस दल में नर हाथी की संख्या 38, मादा हाथी की संख्या 76 के अलावा 37 हाथी शावक शामिल है। सबसे अधिक हाथी छाल रेंज के कुडेकेला बीट में 42 हाथी विचरण कर रहे हैं। recent visitors 77

भारत ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया के एक वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर ली

नई दिल्ली भारत और साउथ अफ्रीका के बीच चार मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का तीसरा मैच सेंचुरियन में 13 नवंबर को खेला गया, जहां भारत ने रोमांचक मुकाबले में 11 रनों से जीत दर्ज की।भारत ने इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया के एक वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा जीत दर्ज करने के मामले में भारत ने ऑस्ट्रेलिया की बराबरी की है। टी20 इंटरनेशनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने साउथ अफ्रीका को 17-17 बार हराया है। ऑस्ट्रेलिया ने जहां 25 मैचों में साउथ अफ्रीका को हराया है, वहीं भारत ने 30 मैचों में साउथ अफ्रीका को 17 बार हराया है। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर वेस्टइंडीज है। वेस्टइंडीज ने साउथ अफ्रीका को 26 मैचों में 14 बार हराया है, वहीं इंग्लैंड ने 26 मैचों में साउथ अफ्रीका को 12 बार हराया है। पांचवें नंबर पर पाकिस्तान है, जिसने साउथ अफ्रीका को 22 मैचों में 12 बार हराया है। श्रीलंका ने 18 मैचों में पांच बार, न्यूजीलैंड ने 15 मैचों में 1 बार साउथ अफ्रीका को हराया है। मैच की बात करें तो सेंचुरियन में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवर में छह विकेट पर 219 रन बनाए। तिलक वर्मा ने 56 गेंदों पर 107 रन ठोके और प्लेयर ऑफ द मैच भी बने। उनके अलावा अभिषेक शर्मा ने 25 गेंदों पर 50 रन जड़े। जवाब में साउथ अफ्रीका की टीम 20 ओवर में सात विकेट पर 208 रन ही बना पाई और भारत ने मैच 11 रनों से अपने नाम कर लिया। मार्को यैनसन ने 17 गेंदों पर 54 रन ठोके और एक समय ऐसा लगा था कि वह मैच भारत के कब्जे से निकाल लेंगे। अर्शदीप सिंह ने चार ओवर में 37 रन देकर तीन विकेट चटकाए। वहीं वरुण चक्रवर्ती ने चार ओवर में 54 रन देकर दो विकेट निकाले। चार मैचों की सीरीज का पहला मैच भारत ने जीता, जबकि दूसरा मैच जीतकर साउथ अफ्रीका ने सीरीज में वापसी की थी। भारत ने तीसरा मैच जीतकर चार मैचों की सीरीज में अजेय बढ़त बना ली है। recent visitors 49

आयुष्मान भारत योजना गरीबों और वंचितों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रही है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि आयुष्मान भारत योजना स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति है, जो गरीबों और वंचितों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रही है। इस योजना से आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, साथ ही राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में भी योजना सहायक सिद्ध हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को उनकी बीमारी के इलाज के लिए एक नया संबल प्रदान किया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो रहा है और राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समग्र स्वास्थ्य के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों का निःशुल्क उपचार मिल रहा है। इस योजना के तहत गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में स्वास्थ्य और सुरक्षा का संचार हो रहा है। कैंसर से लड़ाई में मिला आयुष्मान योजना का साथ उमरिया ज़िले के करकेली जनपद पंचायत के ग्राम बड़ागांव निवासी सुरानी कोल को कैंसर बीमारी से लड़ने में आयुष्मान भारत योजना ने संबल प्रदान किया। रानी कोल को जब कैंसर का पता चला, तो उनका परिवार इलाज के लिए परेशान हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज कराना उनके लिए असंभव सा लग रहा था। आयुष्मान योजना से रानी कोल का सफल इलाज हुआ और आज वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस योजना के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि आयुष्मान भारत योजना उनके जैसे लाखों गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। सड़क हादसे में आयुष्मान योजना बनी जीवनरक्षक उमरिया के ग्राम बिजौरी के मनोज बैगा के लिए भी आयुष्मान योजना जीवनदायक साबित हुई। एक सड़क हादसे में मनोज बैगा को गंभीर चोटें आई थीं। आशा कार्यकर्ता और रोजगार सहायक ने उन्हें आयुष्मान योजना की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने अपना आयुष्मान कार्ड बनवाया। योजनान्तर्गत शहडोल के मेडिकल कॉलेज में उनका उपचार हुआ। आज मनोज बैगा और उनका परिवार प्रधानमंत्री मोदी जी का आभार व्यक्त करता है। उमरिया जिले में पिछले डेढ़ साल में 3 हज़ार 490 से गरीब और मध्यम वर्गीय लाभार्थियों को आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान की गई है। इस दौरान 57 लाख 83 हजार 900 रुपये की राशि का अनुदान प्रदान किया गया। हितग्राहियों ने इस योजना के माध्यम से सर्जरी, ऑर्थो सर्जरी, हार्निया सर्जरी, डायलिसिस, यूरिनरी ट्रैक्ट, सामान्य चिकित्सा और सामान्य प्रसव जैसी चिकित्सा सेवाओं का लाभ लिया है। recent visitors 46

प्रदेश में 4 पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत, दिसंबर तक सभी 41 ई-चेकगेट होंगे चालू, सात हजार खदानें जियो टैग

भोपाल अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश की मोहन सरकार इन दिनों एक्शन में है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अवैध परिवहन रोकने के लिए AI आधारित 41 E-चेकगेट को स्थापना किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इन E-चेकगेटों पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी लीडर, ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की मदद ली जाएगी. इन यंत्रों के माध्यम से वाहनों की जांच की जाएगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि परियोजना को सफल बनाने के लिए पहले पायलेट प्रोजेक्ट लाया जा रहा है. खनिज परिवहन के लिए खास मार्ग के 4 स्थानों पर E-चेकगेट स्थापित कर काम शुरू कर दिया गया है. 4 पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत, दिसंबर तक सभी 41 ई-चेकगेट होंगे चालू अवैध परिवहन पर नजर रखने के लिए भोपाल में एक राज्यस्तरीय कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है, जबकि भोपाल और रायसेन में जिला स्तर के सेंटर भी बनाए गए हैं। दिसंबर 2024 तक सभी 41 ई-चेकगेट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, 4 महत्वपूर्ण मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ई-चेकगेट लगाए जा चुके हैं, जो अवैध खनिज परिवहन को रोकने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दिसंबर E-चेकगेट स्थापित कने का लक्ष्य वहीं प्रदेश में अवैध परिवहन की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर भोपाल में कमांड एवं कंट्रोल सेंटर और जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमांड सेंटर स्थापित किए गए हैं. दिसंबर 2024 तक सभी 41 E-चेकगेट को स्थापित कर लेने का लक्ष्य है. खनन पर रोक के लिए उपग्रह-ड्रोन प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन की रोकथाम के लिए उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना भी प्रारंभ की गई है. इसके जरिए प्रदेश की सभी 7 हजार खदानों की जियो टैग कर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है. यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी तौर पर रोकथाम की जा सकेगी. परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-D इमेजिंग एवं वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आंकलन किया जा सकेगा. ड्रोन और सैटलाइट से खदानों पर नजर, थ्री-डी इमेजिंग के जरिए सटीकता प्रदेश में खनिज संपदा का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सैटलाइट और ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस पहल के तहत प्रदेश की 7,000 से अधिक खदानों को जियो-टैग कर उनकी सीमाओं का निर्धारण किया गया है। इस परियोजना के पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन की घटनाओं पर नजर रखी जा सकेगी, और स्वीकृत खदानों में खनिज उत्खनन का सटीक आंकलन थ्री-डी इमेजिंग और वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस के जरिए किया जा सकेगा। मई में कलेक्टरों को जारी हुए थे निर्देश इस तरह की व्यवस्था लागू करने का फैसला सरकार ने मई में लिया था। इसके बाद प्रमुख सचिव, खनिज साधन ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कार्यवाही की जा रही है। इस व्यवस्था को लागू करने में जिला स्तर पर Artificial Intelligence आधारित मानव रहित चेकगेट लगाए जाएंगे। कलेक्टरों से कहा गया था कि प्रदेश के 40 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है जहां से खनिजों का सर्वाधिक परिवहन होता है। इन सभी स्थलों पर आगामी 10 माह के भीतर चेकगेट व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। राज्य स्तर पर स्टेट कमांड सेंटर और जिला स्तर पर जिला कमांड सेंटर के माध्यम से अवैध परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी। चेकगेट के सॉफ़्टवेयर को ई-टीपी जारी करने वाले पोर्टल के साथ इंटीग्रेट कर बिना रॉयल्टी चुकाए परिवहन करने वाले वाहन मालिकों के विरुद्ध अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में आरएफ टैग लगाया जाएगा, जिसकी सहायता से वाहनों की वैधता की जांच की जा सकेगी।   recent visitors 59

पारंपरिक खेलों और खिलाड़ियों को मिल रहा प्रोत्साहन, छत्तीसगढ़-अबूझमाड़ में बस्तर ओलंपिक का उत्साह

बस्तर/रायपुर. बस्तर संभाग के सभी जिलों में इन दिनों बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है। अबूझमाड़ जैसे बेहद पिछड़े इलाके में भी बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बस्तर ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं। बस्तर ओलंपिक के शुभंकर मस्कट वनभैंसा और पहाड़ी मैना से बच्चे, युवा और आम नागरिक को आकर्षित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर बस्तर संभाग में बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य के जनजातीय बहुल क्षेत्रों के खिलाड़ियों की खेल प्रतिभा को निखारना है और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर अंचल के लोगों से इन खेल प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि राज्य में खेल और खिलाड़ियों को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है और बस्तर अंचल में नई खेल अधोसंरचनाएं विकसित की जा रही है। बस्तर ओलंपिक के आयोजन के तहत प्रथम चरण में 6 नवम्बर से 16 नवम्बर तक विकासखण्ड स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। दूसरे चरण में 19 नवम्बर से 26 नवम्बर तक जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। इसके बाद अंतिम चरण में संभाग स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। बस्तर ओलंपिक में युवा खो-खो, कब्बडी, बालीबाल, ऊंची कूद, तवाफेक, फुटबाल, गोलाफेक, तीरदांजी, बैडमिन्टन जैसे खेलों का आयोजन किया जा रहा है। बचपन की यादें हो रही ताजा बस्तर ओलंपिक में ऐसे खेल शामिल किए गए हैं, जिसे ग्रामीणजन हमेशा से गांवों में खेलते आए हैं। ग्रामीण परिवेश से जुड़े खेल होने के कारण बिना किसी हिचक के इन खेलों में उत्साह के साथ शामिल हो रहे। इन आयोजनों में स्कूली बच्चों, ग्रामीण महिलाओं और बुजुर्गो को आनंद मिल रहा है। विशेषकर बुजुर्गों को अपने स्कूली जीवन और बचपन की याद ताजा हो रही है। बस्तर ओलंपिक सराहनीय पहल नारायणपुर के बोरावण्ड गांव के खिलाड़ी जयसिंह, रजनु यादव और उनके साथियों ने बस्तर ओलंपिक में अपने खेल को निखारने के इस अवसर के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ के सुदूर पहुंचविहीन गांव के प्रतिभावान युवाओं की खेल प्रतिभा को निखारने के लिए यह उनकी सराहनीय पहल है। उन्होंने बताया कि कबड्डी पुरुष वर्ग में उनकी टीम ने विकासखंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें ट्रॉफी, मेडल और टीम को ड्रेस प्रदान किया गया। जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार है। अबूझमाड़ अंचल में आ रहा बदलाव बस्तर ओलंपिक में शामिल हो रहे खिलाड़ियों ने बताया कि अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं में लगातार सुधार हो रहा है। इस क्षेत्र में माओवादी घटनाओं में कमी आई है और लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर हो रहा है। अबूझमाड़ के संवेदनशील इलाकों में सड़क, बिजली, पानी, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल और उप-स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं बढ़ रही है। ईरकभट्टी, मसपुर और गारपा जैसे दूरस्थ गांवों तक अब पक्की सड़कें बन चुकी है, जिससे इन गांवों के निवासियों को शहरों और बाजारों से जोड़ने में आसानी हो रही है। नारायणपुर से गारपा और मसपुर तक बस सेवाओं की शुरुआत भी इस क्षेत्र के विकास में एक अहम कदम है, जिससे लोगों को यातायात में सहूलियत मिल रही है। recent visitors 52

लाखों रुपए की बनी बिल्डिंग 2 वर्ष में हुई खंडहर आखिर क्यों

 टीकमगढ़  टीकमगढ़ जिले की विकासखंड पलेरा की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत बमोरी कला जिसमें स्कूल हायर सेकेंडरी स्कूल लगभग 2011 की बनी वेल्डिंग पूरी तरह से 2वर्ष में ही पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी जिसमें एसडीएम जतारा के द्वारा स्कूल न लगाने के लिए आदेशित किया गया था 5 साल से ऊपर होने जा रहा है जिसमे ताला डाला हुआ है एवं ध्वस्त हालत में बिल्डिंग खड़ी हुई है आज तक नई बिल्डिंग के लिए न प्रस्ताव किया गया है ना ही संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है जिसमें मात्र बच्चे दो या तीन बरस उसमें बैठे जिसमें लाखों रुपए की लागत से बनी बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है जिसमें बड़ी-बड़ी दरारें आ गई है लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें सही मात्रा में सीमेंट सरिया डाला होता तो कैसे 2 साल में खंडर हो जाती अभी बमोरी कला में पुराने स्कूल की करीब सभी बिल्डिंग  खड़ी है अगर मिट्टी का मकान भी होता तो कम से कम 50 वर्ष तक खड़ा रहता अभी तो इतनी जल्दी खंडार नहीं होता    इसका सीमेंट हाथों से छूटता है यह एक जांच का विषय है बमोरी कला में CM रायज स्कूल के लिए जो शासन जमीन तलाश कर रही है यदि इसी बिल्डिंग को तोड़कर के तीन मंजिल नए सिरे से बनाई जाए तो CM स्कूल के लिए बहुत ही उपयुक्त जगह रहेगी एवं भविष्य में बच्चों को इधर-उधर न भटकना पड़ेगा अगर इस बिल्डिंग को नहीं गिराया गया आगे चलकर कोई भी घटना का रूप ले सकती है जिस ठेकेदार द्वारा यह बिल्डिंग बनाई गई थी उसके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई  ग्रामीणों की मांग है ठेकेदार को ब्लैकलिस्टेड करके उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए एवं बिल्डिंग को नए सिरे से बनाया जाये ग्रामीण का कहना है कि आगे जो बिल्डिंग बनाई जाएगी उसके लिए सही ठेकेदार का प्रशासन चुनाव करके उसको ही टेंडर दिया जाए जिससे की नई बिल्डिंग भ्रष्टाचार् की भेंट ना चढ़े recent visitors 38