Tuesday, July 7, 2026 6:06 am

सीरीज का पहला टेस्ट मैच पर्थ स्टेडियम में 22 नवंबर से खेला जाना है, वॉर्म-अप मैच में राहुल की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन

नई दिल्ली भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के आगाज में अभी ज्यादा समय नहीं बचा है। सीरीज का पहला टेस्ट मैच पर्थ स्टेडियम में 22 नवंबर से खेला जाना है। टेस्ट सीरीज की तैयारी भारतीय टीम पर्थ के पुराने टेस्ट वेन्यू वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट एसोसिएशन (WACA) स्टेडियम पर कर रही है। यहीं भारतीय टीम इंट्रा स्क्वॉड मैच खेल रही है, जिसमें भारतीय टीम के खिलाड़ियों के साथ इंडिया ए के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। मैच के पहले दिन केएल राहुल को चोटिल होकर मैदान से लौटना पड़ा। प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद उनकी कोहनी पर लग गई, जिसके बाद वह रिटायर आउट हो गए। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यशस्वी जायसवाल के साथ भारतीय पारी का आगाज कौन करेगा। कप्तान रोहित शर्मा पर्थ टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे, इंट्रा स्क्वॉड मैच में भी यशस्वी के साथ राहुल ओपन करने उतरे थे, जिसका मतलब है कि भारतीय टीम उनसे ही पर्थ टेस्ट में ओपन कराने का प्लान बना रही है। भारतीय टेस्ट स्क्वॉड का हिस्सा अभिमन्यु ईश्वरन भी हैं, लेकिन उन्होंने इंडिया ए के लिए ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ दो अनऑफिशियल टेस्ट में जिस तरह से प्रदर्शन किया, उसके बाद उनका प्लेइंग XI में खेलना मुश्किल नजर आ रहा है। इंट्रा स्क्वॉड मैच में विराट कोहली जब बैटिंग के लिए आए तो कुछ अच्छे शॉट्स खेले, लेकिन फिर दूसरी स्लिप में कैच थमाकर आउट हो गए। जायसवाल भी 15 रन बनाकर ही आउट हो गए। ब्रेक के समय तक बैटिंग साइड ने 28 ओवर में 106 रन बनाए थे, जबकि पांच विकेट निकल चुके थे। केएल राहुल की चोट को लेकर अभी तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। केएल राहुल अब बचे हुए इंट्रा स्क्वॉड मैच में उतरते हैं या नहीं, यह देखना अहम होगा। 22 नवंबर से टेस्ट मैच शुरू होना है, ऐसे में भारतीय टीम खिलाड़ियों की चोट पर करीबी नजर बनाए रखेगी। जसप्रीत बुमराह गेंदबाजी के दौरान अच्छे टच में नजर आए, जो भारतीय टीम के लिए बढ़िया साइन रहा। recent visitors 96

मध्य प्रदेश में बीजेपी का बूथ संगठन पर्व शुरू, हर इकाई में तीन महिलाओं को बनाया जाएगा सदस्य

भोपाल मध्य प्रदेश में बीजेपी (BJP) का बूथ संगठन पर्व शुरू हो गया है. इसमें बूथ स्तरीय इकाईयों का गठन किया जाएगा. हर इकाई में तीन महिलाओं को सदस्य बनाया जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भोपाल में हुजूर विधानसभा के बूथ क्रमांक-223 पर बूथ संगठन पर्व का शुभारंभ कर पन्ना प्रमुख बने. राज्य की पहली बूथ अध्यक्ष अर्चना गोस्वामी सहित 11 पदाधिकारियों और सदस्यों को सहमति से चुना गया. वहीं, पन्ना प्रमुख का दायित्व ग्रहण करने के बाद प्रदेशाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे बूथ पर पन्ना प्रमुख की भूमिका मिली है. संगठन पर्व के पहले फेज में सदस्यता पर्व में प्रदेश ने इतिहास रचा है और आज तक 1.65 करोड़ से ज्यादा सदस्य पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं. हमारा दूसरा फेज बूथ के संगठन पर्व की शुरुआत गुरुवार से हो गई. यह 20 नवंबर तक चलेगा. उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को लेकर बीजेपी हमेशा आगे रही है. बूथ संगठन पर्व का शुभारंभ कर पन्ना प्रमुख बने वीडी शर्मा संगठन पर्व पर प्रदेश के 65,013 बूथों में हर बूथ पर तीन महिलाओं को स्थान दिया जाएगा. बूथ कमेटी में हर वर्ग के लोगों को स्थान देने की शुरुआत भी हो गई है. इसी दिशा में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के लिए इंचार्ज, व्हाट्सएप इंचार्ज सहित लाभार्थी इंचार्ज भी बनाया गया और प्रदेशभर में इस तरह संगठन पर्व के तहत सभी वर्गों को शामिल कर प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. बीजेपेी अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार गरीब कल्याण की योजनाओं के माध्यम से गरीबों का कल्याण कर उनके जीवन में खुशियां लाने का काम कर रही हैं. केंद्र और राज्य सरकार नई-नई योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव जीतती है तो राहुल गांधी के सिर पर सेहरा सजाती है. हारने का आभास होता है तो गुंडागर्दी करने पर उतारू हो जाती है और प्रशासन एवं ईवीएम पर ठीकरा फोड़ती है. विजयपुर में कांग्रेस नेताओं ने गुंडागर्दी की है, मैनें वहां जाकर इसका विरोध किया है. 23 नवंबर को जब परिणाम आएंगे, तब विजयपुर और बुधनी की जनता का जवाब कांग्रेस को मिलेगा. recent visitors 65

सीएम मोहन यादव ने कहा गुरु नानक जीवन भर सच्चाई और बराबरी के लिए काम करते रहे

भोपाल  सीएम मोहन यादव ने गुरु नानक जयंती पर भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेका है। साथ ही प्रदेश के लोगों को गुरु पर्व की बधाई दी है। सीएम मोहन यादव ने इस मौके पर लोगों को संबोधित भी किया है। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज अखंड भारत के प्रणेता थे। सीएम मोहन यादव ने कहा कि वह जीवन भर सच्चाई और बराबरी के लिए काम करते रहे हैं। अखंड भारत में हुआ उनका जन्म सीएम मोहन यादव ने कहा कि वह पूरी दुनिया के लिए आदर्श हैं। उनका जन्म अखंड भारत में हुआ। वह अखंड भारत के प्रणेता थे। इसके साथ ही 17 नवंबर को सीएम हाउस में प्रकाश पर्व का बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव की शिक्षाएं एवं आदर्श जीवन मानव सेवा के लिए हमें सर्वदा प्रेरित और हमारा पथ प्रदर्शित करती रहेंगी। ''सतनाम श्री वाहेगुरु'' मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिख धर्म के संस्थापक, परम श्रद्धेय श्री गुरु नानक देव जी की जयंती पर अरेरा कॉलोनी, भोपाल स्थित गुरुद्वारे पहुंचकर मत्था टेका और सबके मंगल के लिए प्रार्थना की।@DrMohanYadav51 #CMMadhyaPradesh #गुरु_नानक_जयंती pic.twitter.com/6UaUQQ0Iev — Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) November 15, 2024 recent visitors 75

रणजी ट्रॉफी में एक ही पारी में 10 विकेट लेने वाले अंशुल महज तीसरे गेंदबाज हैं, अनिल कुंबले की बराबरी

नई दिल्ली रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप सी में केरल और हरियाणा के बीच मैच रोहतक में खेला जा रहा है। मैच के तीसरे दिन हरियाणा के तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने कमाल कर डाला। केरल की पहली पारी के 10 के 10 विकेट अंशुल कंबोज के नाम हुए, रणजी ट्रॉफी में एक ही पारी में 10 विकेट लेने वाले अंशुल महज तीसरे गेंदबाज हैं, वहीं फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अगर इस कारनामा की बात करें तो उनसे पहले तीन ही ऐसे गेंदबाज हैं, जो ऐसा कर चुके हैं, जिसमें से एक नाम अनिल कुंबले का भी है। अनिल कुंबले ने 1998-99 पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान (अब अरुण जेटली स्टेडियम) पर यह कमाल किया था। अंशुल कंबोज से पहले रणजी ट्रॉफी में ऐसा करने वाले दो गेंदबाज सुभाष गुप्ते और देवाशीष मोहंती हैं। गुप्ते ने 1954-55 में ऐसा किया था, वहीं देवाशीष मोहंती ने 2000-01 में यह कारनामा कर दिखाया था। हरियाणा का यह तेज गेंदबाज इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2024 के समय चर्चा में आया था। 2024 में अंशुल मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा थे और उन्हें तीन मैच खेलने का मौका भी मिला था। इस दौरान कंबोज ने तीन मैचों में दो विकेट चटकाए। उन्होंने मयंक अग्रवाल और श्रेयस अय्यर का विकेट चटकाया था। बाबा अपराजिता, जलज सक्सेना, सचिन बेबी जैसे बैटर्स केरल टीम में हैं। कंबोज ने इनफॉर्म बैटर बाबा अपराजिता को तो खाता भी नहीं खोलने दिया। केरल की ओर से तीन बैटर्स ने पचासा ठोका। रोहन कुन्नूमल, अक्षय चंद्रन, सचिन बेबी और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने पचासा ठोके। कंबोज ने 30.1 ओवर में महज 49 रन देकर 10 विकेट चटकाए। कंबोज बॉलिंग ऑलराउंडर हैं और बैटिंग में भी ठीक-ठाक प्रदर्शन कर लेते हैं। 23 साल के इस युवा तेज गेंदबाज ने आईपीएल मेगा ऑक्शन से कुछ दिन पहले ऐसा प्रदर्शन कर कई फ्रेंचाइजी टीमों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया होगा। recent visitors 122

बाजार में बढ़ रही है स्किल्ड ब्रांड मैनेजर्स की मांग

आज भारतीय उपभोक्ताओं के पास हर उत्पाद के लिए कई विकल्प उपलब हैं, क्योंकि हर कंपनी अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए ग्राहक को आकर्षित करने की कोशिश करती है। इस पूरी प्रक्रिया में ब्रांडिंग की बड़ी भूमिका होती है। उपभोक्ता के मन में एक प्रोडक्ट की स्थायी जगह बनाने में ब्रांडिंग का बड़ा हाथ होता है। हर बड़ी कंपनी अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज को बाजार में प्रमोट करने के लिए ब्रांड मैनेजर्स को हायर करती है। ब्रांडिंग प्रक्रिया में नए उत्पाद के लॉन्च होने से लेकर उसे उपभोक्ता की जिंदगी का अहम हिस्सा बनाने तक की रणनीति शामिल होती है। हर कंपनी अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज की ब्रांडिंग के लिए ऐसे लोगों को हायर करना चाहती है, जिनके पास प्रमोशन के विभिन्न आइडियाज हों। अगर आप भी इस तरह के करियर ऑप्शन की तलाश में हैं, तो ब्रांड मैनेजमेंट आपके लिए आदर्श करियर बन सकता है। कैसे करें शुरूआत? ब्रांड मैनेजमेंट में करियर बनाने के लिए आप ग्रेजुएशन के बाद ब्रांड मैनेजमेंट से एमबीए करके स्पेशलाइजेशन हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा एमबीए-मार्केटिंग से स्पेशलाइजेशन करके इस करियर को शुरू किया जा सकता है। करियर की संभावनाएं ब्रांड मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद फ्रेशर्स को एंट्री लेवल पर असिस्टेंट ब्रांड मैनेजर की जॉब मिल सकती है। अपने अच्छे आइडियाज, परफॉर्मेंस और इनोवेशन से उम्मीदवार मिड लेवल तक पहुंच सकते हैं यानी ब्रांड मैनेजर बन सकते हैं। किस एरिया में जॉब? प्रतिभाशाली और स्किल्ड ब्रांड मैनेजर्स की मांग फार्मास्यूटिकल, मोबाइल, इंश्योरेंस, हेल्थकेयर कंपनियों, मीडिया हाउसेस, ऑटोमोबाइल कंपनीज वगैरह में काफी है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए हर कंपनी अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग आकर्षक तरीके से करनी चाहती है। कितना पैकेज? इस इंडस्ट्री में फ्रेशर्स का स्टार्टिंग सैलेरी पैकेज तीन से साढ़े तीन लाख प्रति वर्ष हो सकता है। सैलेरी पैकेज इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कौन-से संस्थान में और किस शहर में काम कर रहे हैं। ये गुण जरूरी…. ब्रांड मैनेजर बनने के लिए एक व्यक्ति को न मोटिवेटेड और बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहना जरूरी होता है। -अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स होनी चाहिए। -सुपरविजन, प्रॉब्लम सॉल्विंग और प्लानिंग स्किल्स में भी आगे होने चाहिए। -उम्मीदवार किस तरह के आइडियाज के साथ प्रोडक्ट की ब्रांडिंग कितने क्रिएटिव तरीके से करते हैं और उसका कैसा रिस्पांस मिलता है, यह भी बहुत मायने रखता है।     recent visitors 80

रीवा बजरंग खाद भंडार में एसडीएम और कृषि विभाग की छापे मार कार्यवाई मिली खासा अनियमितता

रीवा  मध्य प्रदेश का रीवा जिला आए दिन किसी-न-किसी मुद्दे को लेकर चर्चा का विषय बना रहता है। कभी यहां चोरी, तो कभी डकैती, कभी हत्या जैसे मामले सामने आते ही रहते हैं। इससे लोगों में अलग सा भय देखने को मिल रहा है। लोग अपने घरों पर ताला लगा कर चंद घंटों के लिए भी बाहर नहीं निकलते हैं। हालांकि, पुलिस द्वारा लगातार ऐसे अपराधों को रोकने के लिए धड़-पकड़ अभियान चलाए जाते हैं। जिनमें उन्हें सफलता भी मिलती है। इसके बावजूद, शहर में नशे का कारोबार भी तेजी से अपने पैर पसार रहा है। इसका एक ताजा मामला हाल ही सामने आया है, जब पुलिस प्रशासन की टीम ने कार्रवाई करते हुए खाद और बीज की दुकान पर छापामारा है। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। मिल रही थी शिकायत दरअसल, पुलिस प्रशासन को लगातार खाद और बीज की कालाबाजारी की शिकायत मिल रही थी। इसके बाद टीम का गठन कर गुढ़ चौराहे में स्थित बजरंग खाद बीज भंडार दुकान पर दबीश दी गई। इस दौरान दुकानदार को भी जमकर फटकार लगाई गई। संबंधित दस्तावेज नहीं पाए जाने पर दुकान की गोदाम को सील कर दिया गया है। साथ ही आगे की कानूनी कार्रवाई कृषि विभाग को सौंप दी गई है। गोदाम सील इस दौरान एसडीएम वैशाली जैन, तहसीलदार शिव कुमार शंकर सहित पूरी प्रशासन टीम मौजूद रही। दुकान पहुंचने के बाद दुकानदार से सवाल भी किए गए, लेकिन दुकानदार ने कोई जवाब नहीं दिया। मामले को लेकर एसडीएम ने बताया कि शिकायतकर्ता की बयान दर्ज कर लिए गया है। फिलहाल, आगे की कार्रवाई की जा रही है। recent visitors 59

नगरपालिका परिषद ने मुलताई को अलग जिला घोषित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया

मुलताई  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में संभाग, जिलों और तहसीलों के पुनर्गठन को लेकर बनाए गए आयोग ने बैतूल की मुलताई (Multai) तहसील को पांढुर्ना जिले में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. लेकिन, दूसरी तरफ ना सिर्फ इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध हो रहा है, बल्कि मुलताई नगरपालिका परिषद ने तो इसे जिला घोषित करवाने का एक प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित कर दिया है और सारे राजनीतिक दल और संगठन इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. बता दें कि ताप्ती नदी (Tapti River) के उद्गम स्थल मुलताई को जिला बनाने की मांग को लेकर पिछले 15 सालों से आंदोलन जारी है, जो इस प्रस्ताव के बाद और तेज हो सकता है. 15 साल से हो रही जिला बनाने की मांग बैतूल की मुलताई तहसील को जिले और राज्य की पवित्र नगरी माना जाता है. पवित्र ताप्ती नदी का उद्गम स्थान मुलताई में है. मुलताई बैतूल जिले की पहचान है. इसे जिला घोषित किए जाने की मांग पिछले 15 साल से लगातार हो रही है, लेकिन अब राज्य पुनर्गठन आयोग के एक प्रस्ताव ने इस आग में घी का काम कर दिया है. आयोग ने मुलताई को जिला नहीं, बल्कि पांढुर्ना जिले में शामिल किए जाने का प्रस्ताव दिया है, जिसे लेकर मुलताई में विरोध के स्वर उठने लगे हैं. मुलताई के लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा हुआ, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं. नगरपालिका ने पारित किया प्रस्ताव जैसे ही मुलताई को पांढुर्ना में शामिल करने की बात सामने आई, वैसे ही मुलताई नगरपालिका परिषद ने मुलताई को जिला बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मुलताई या तो जिला बनेगा या फिर बैतूल में ही रहेगा. बैतूल के सांसद और केंद्रीय जनजातीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सहित जिले के सभी पांच भाजपा विधायकों ने ये कह दिया कि मुलताई तहसील किसी भी हाल में पांढुर्ना जिले का हिस्सा नहीं बनेगी. आयोग के प्रस्ताव ने दी हवा धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से मुलताई तहसील बैतूल जिले का एक अहम हिस्सा है. पिछले 15 साल से मुलताई को जिला बनाने की मांग को लेकर कई आंदोलन हुए हैं, जो आश्वासनों के बाद स्थगित हो गए. लेकिन, अब पुनर्गठन आयोग के प्रस्ताव ने इस मुद्दे को दोबारा हवा दे दी है. इससे मुलताई को जिला बनाने की मांग फिर से तेज हो रही है. इस मुद्दे पर आगामी दिनों में बड़े आंदोलन की संभावना है. अगर मुलताई पांढुर्ना जिले में शामिल नहीं भी हुआ, तब भी इसे जिला बनाने की मांग जारी रहेगी. recent visitors 55