Friday, July 10, 2026 3:54 pm

गेमिंग एप में लाभ दिलाने का झांसा देकर महिला से ठगे 17 लाख

अभनपुर गेमिंग एप में लाभ दिलाने का झांसा देकर शातिर ठग ने एक शिक्षिका महिला से 17 लाख 11 हजार 408 रुपए की ऑनलाइन ठगी की है. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है. यह मामला गोबरा नवापारा का है. जानकारी के मुताबिक, ज्योति तेजवानी पति स्वर्गीय नामदेव तेजवानी (53 वर्ष) निवासी गंज रोड गोबरा नवापारा को 5 नवंबर 2024 की रात 8:15 बजे के करीब Heizberg diamonds के संचालक ने टेलीग्राम में लिंक भेजा. ग्रुप में जुड़कर गेमिंग एप में लाभ दिलाने का झांसा देकर अपने बताए अलग-अलग खाता नंबर और यूपीआई में कुल 17 लाख 11 हजार 408 रुपए जमा करा कर धोखाधड़ी कर ली. मामले में थाना गोबरा नवापारा ने प्रार्थिया की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318-4 के तहत अपराध दर्ज किया है. recent visitors 67

जांच के लिए SIT हुई गठित, पायलट बाबा आश्रम की संपत्ति पर कई संतों के खुर्द बुर्द करने का आरोप

हरिद्वार. हरिद्वार में पायलट बाबा आश्रम के साधु संतों पर उनके इलाज में लापरवाही बरतने और करोड़ों की धोखाधड़ी करने समेत कई आरोप लगे हैं। इस मामले में अब एसएसपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी साधु संतों के विरुद्ध लगे गंभीर आरोपों की जांच करेगी। बता दें कि शिष्य ब्रहमानन्द गिरी ने जगजीतपुर में पायलट बाबा आश्रम के अन्य साधू संतों के खिलाफ आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की थी। जिसके बाद अब पुलिस जांच में जुटी है। एसआईटी में जूही मनराल क्षेत्राधिकारी नगर, मनोज नौटियाल थानाध्यक्ष कनखल, अमित नौटियाल थाना कनखल, पवन डिमरी सीआईयू हरिद्वार, जसवीर थाना कनखल और वसीम सीआईयू हरिद्वार को शामिल किया गया है। recent visitors 191

कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए: डीवाई चंद्रचूड़

नई दिल्ली देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शिवसेना (यूबीटी) की ओर से लगाए गए आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए। दरअसल, शिवसेना नेता संजय राउत ने बीते दिनों चंद्रचूड़ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने महाराष्ट्र में दल-बदल करने वाले नेताओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया था। राउत ने दावा किया कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं करके चंद्रचूड़ ने दलबदल के लिए दरवाजे और खिड़कियां खुली रखीं। एएनआई को दिए इंटरव्यू में पूर्व सीजेआई ने शिवसेना के आरोपों पर कहा, 'मेरा जवाब बहुत सरल है। पूरे साल हमने कई मौलिक संवैधानिक मामलों पर सुनवाई की। हम 9 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों, 7 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों और 5 जजों की पीठ के फैसलों से निपटते रहे। ऐसे में क्या किसी एक पक्ष या व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? माफ कीजिए, यह अधिकार मुख्य न्यायाधीश के पास होता है।' हमारे पास सीमित जनशक्ति, बोले चंद्रचूड़ डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 20 वर्षों से कई मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा, 'अगर आप कहते हैं कि हमें जो समय दिया गया उसमें हमने एक मिनट भी काम नहीं किया तो ऐसी आलोचना जायज है। आप देखिए कि कई अहम संवैधानिक मामले 20 बरसों से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। एससी इन 20 साल पुराने मामलों को क्यों नहीं ले रहा है और कुछ हालिया मुद्दों पर सुनवाई क्यों कर रहा है? इस बीच, अगर आप पुराने मामलों को लेते हैं तो आपको बताया जाएगा कि आपने इस विशेष केस को नहीं लिया। हमारे पास सीमित जनशक्ति है और न्यायाधीशों की निश्चित संख्या है। ऐसे में आपको संतुलन बनाना होता है।' 'हमने चुनावी बांड पर लिया फैसला' शिवसेना मामले में फैसला देर से लेने के आरोपों पर भी पूर्व सीजेआई ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'देखिए, यही समस्या है। असली दिक्कत यह है कि राजनीति का एक निश्चित वर्ग सोचता है कि अगर उनके एजेंडे का पालन करते हैं तो हम स्वतंत्र हैं। हमने चुनावी बांड पर फैसला लिया। क्या यह कोई कम महत्वपूर्ण मामला था? हमने हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामले में फैसला सुनाया, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के तहत मदरसों को बंद करने का मुद्दा शामिल रहा। हमने व्यक्तियों के विकलांगता अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई की। क्या ये कम जरूरी मामले थे?' शिवसेना यूबीटी का क्या है आरोप वर्ष 2022 में अविभाजित शिवसेना में विभाजन के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले पार्टी के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले पार्टी विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। शीर्ष अदालत ने अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का दायित्व विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ था। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को असली राजनीतिक दल घोषित किया था। राउत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के नतीजे पहले से तय थे। उन्होंने कहा कि अगर तत्कालीन पूर्व न्यायाधीश ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला किया होता, तो नतीजे अलग होते। recent visitors 64

कई नेताओं ने छोड़ा सपा का साथ, थामा कमल का हाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति के पुरोधा रहे समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद अखिलेश यादव के सामने अपने यादव वोट बैंक को बचाने की चुनौती है. साथ ही अपने नेताओं को भी संभालने की जरूरत है. बता दें कि मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद समाजवादी पार्टी के कई बड़े यादव नेता और अन्य बिरादरियों के नेताओं ने सपा का साथ छोड़ दिया है. प्रदेश में यादवों की संख्या करीब 12 प्रतिशत है, जबकि पिछड़े वर्ग के यादव की संख्या साढ़े 19 फीसदी है. ऐसे में इटावा, मैनपुरी, औरैय्या, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद में सपा का गढ़ माना जाता है. यहां पर तमाम कोशिशें की गई, लेकिन समाजवादी पार्टी की जड़ों को हिलाया नहीं जा सका है. हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से स्थितियां अब बदल चुकी हैं. कभी थे करीब अब दूरी बढ़ चुकी है कभी समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले यादव नेताओ का एक बड़ा धड़ा अब अलग अलग सियासी दलों के साथ खड़ा हो चुका है. जिसमें पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव, पूर्व सांसद सुखराम सिंह यादव, पूर्व मंत्री देवेंद्र सिंह यादव, पूर्व सभापति रमेश यादव, पूर्व विधायक हरिओम यादव अब साइकिल छोड़कर कमल खेमे के साथ खड़े हैं. इस तरह से कई और यादव नेता गुमनामी में है और समाजवादी पार्टी के खिलाफ कार्य कर रहे हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए अखिलेश-शिवपाल में छिड़ी थी रार मुलायम सिंह यादव के जीवित रहते ही शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव में भरे मंच पर रार छिड़ी थी. जिसकी वजह से हर तरफ सपा की फजीहत हुई थी. इसके बाद शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी छोड़कर नई पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी भी बनाए थे, लेकिन समय बीतने के बाद अखिलेश और शिवपाल में समझौता हुआ और आज शिवपाल फिर से सपा के साथ हैं. अभी हाल में लोकसभा चुनाव में भी बदायूं से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया था, लेकिन शिवपाल सिंह यादव अपने बेटे के लिए टिकट के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने कहना पड़ा था, जिसके बाद उनके पुत्र को टिकट दिया गया. recent visitors 63

सीसीटीवी फुटेज से पकड़ाया एटीएम में तोड़फोड़ और चोरी का प्रयास करने वाला आरोपित

बिलासपुर  सरकंडा क्षेत्र में मोपका नया तालाब के पास स्थित बैंक आफ इंडिया के एटीएम में तोड़फोड़ और चोरी के प्रयास के मामले में चौकी प्रभारी एसआइ रामनरेश यादव ने बताया कि सान्तेश मिश्रा ने 23 नवंबर को बैंक आफ इंडिया के एटीएम में तोड़फोड़ की शिकायत की थी। इस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिससे आरोपित की पहचान संजय ध्रुव (25) निवासी बिल्हा नवागांव के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो वह गोलमोल जवाब दे रहा था। थाने लाकर कड़ाई करने पर आरोपित ने बताया कि वह गांव से शहर मजदूरी करने आया था। वह मोपका में अपने भतीजे के साथ रहकर काम की तलाश कर रहा था। काम नहीं मिलने के कारण वह कबाड़ एकत्र कर गुजर बसर कर रहा था। इसी दौरान उसने एटीएम लूटने की योजना बनाई। उसने दो रात एटीएम के आसपास रेकी की। इसके बाद वह घर से कुल्हाड़ी लेकर आया। तोड़फोड़ कर वह रकम निकालने में कामयाब नहीं हो सका। जिन कपड़ों से हुई पहचान उसे घर जाने से पहले जला दिया था मोपका चौकी प्रभारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपित के कपड़ों की पहचान की गई। पूछताछ में पता चला कि आरोपित अपने भतीजे के जैकेट को पहनता था। उसी को पहनकर वह एटीएम में घुसा था। पुलिस ने जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो बताया कि घर जाने के पहले उसने जैकेट को जला दिया था। इसके अलावा वह सुबह ही कबाड़ी के पास भी रुपये मांगने गया था। रुपये नहीं मिलने पर वह पैदल ही गांव चला गया। recent visitors 63

अरविंद केजरीवाल ने बताई अपनी ‘चिंता’, चुनाव हार गए तो उनका क्या होगा, उन्हें चिंता दिल्लीवालों की है

नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को 'आप' के स्थापना दिवस पर कहा कि 12 साल में उन्होंने देश को एक नया 'मॉडल ऑफ गवर्नेंस' दिया है। केजरीवाल ने इस दौरान दिल्ली चुनाव को लेकर भी बात की और कहा कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि हार गए तो उनका क्या होगा, उन्हें चिंता दिल्लीवालों की है। केजरीवाल ने भरोसा जताया कि कुछ सीटें कम-ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन सरकार उनकी ही बनेगी। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले 12 सालों में हर छह महीने में उनकी सरकार के लिए 'श्रद्धांजलि' लिखी गई और कहा गया कि अब आम आदमी पार्टी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले 14 मई 2014 को ओबिचूएरी लिखी गई थी। मैंने कहा था कि अमित शाह के साथ डिबेट के लिए तैयार हूं। उस दिन उन्होंने कहा था कि 16 मई 2014 के बाद यदि केजरीवाल राजनीति में रहा तो मैं डिबेट करूंगा। मैं हूं राजनीति में। मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और मैं जेल गए तब भी कहा गया कि अब यह पार्टी खत्म हो गई। देख लो अभी भी है आम आदमी पार्टी।' केजरीवाल ने कहा कि हर छह महीने में हमारी श्रद्धांजलि लिखी जाती है कि अब तो गए। एक पत्रकार मिले तीन चार दिन पहले, बोला कि केजरीवाल जी हवा तो यही है कि दिल्ली में आप लोगों की सरकार आ रही है, दो चार सीटें ऊपर नीचे हो सकती हैं, यही चल रहा है ना दिल्ली में आजकल कि 2-4 सीटें ऊपर नीचे हो जाए लेकिन सरकार तो… लेकिन कहता है कि मान लो केजरीवाल जी अगर आप हार गए तो आपका क्या होगा? मैंने कहा कि दोस्त मुझे इस बात कि चिंता नहीं कि हार गया तो मेरा क्या होगा। मुझे चिंता है कि मैं हार गया तो दिल्ली में पढ़ने वाले 18 लाख बच्चों का क्या होगा। दिल्ली जैसे स्कूल देश में कहीं नहीं हैं। बड़ी मुश्किल से स्कूल अच्छे किए हैं। हमारी सरकार चली गई तो उनके अभिभावकों का क्यो होगा जिन्होंने उम्मीद देखी है कि उनका भी बच्चा डॉक्टर इंजीनियर बनेगा। केजरीवाल ने आगे कहा कि मेरी चिंता इस बात की नहीं है कि मेरा क्या होगा। मैं यहां सत्ता के लिए नहीं आया। मुझे चिंता है कि दिल्ली में जब कोई गरीब बीमार होता है तो उसे पैसे की चिंता नहीं होती। उन सब लोगों का क्या होगा जिनके घर में कोई बीमार होता है। अगर हमारी सरकार चली गई तो दिल्ली में फिर से 8-10 घंटे के पावर कट लगने लगेंगे। हमारे देश की राजधानी का क्या होगा। 2 करोड़ लोगों का क्यो होगा। केजरीवाल ने कहा कि यह संयोग नहीं है कि उनकी पार्टी का गठन संविधान दिवस पर हुआ। उन्होंने कहा कि भगवान जो भी करते हैं उसके पीछे उनकी कुछ मंशा होती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 साल में क्या पाया, इस पर कोई कहेगा कि दो राज्यों में सरकार और कई प्रदेशों में विधायक हैं, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि है कि उनकी पार्टी ने शासन का नया तरीका दिया है, जिसमें लोगों को सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ उन्होंने लोगों को सुविधाएं दीं तो दूसरी तरफ इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी विकास किया और फिर भी बजट फायदे में रहा। उन्होंने कहा कि अब उनकी देखादेखी राजनीति में स्कूल, पानी, बिजली, सड़क आदि की बातें होने लगी हैं। recent visitors 62

रेल मंत्रालय की 7,927 करोड़ रुपये लागत की 3 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी

रेलवे लाईन के विस्तार से प्रदेश के नागरिकों को सुविधा और पर्यटन को मिलेगा प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने रेलवे की तीन मल्टी ट्रैकिंग परियोजना को मिली मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय कैबिनेट का माना आभार रेल मंत्रालय की 7,927 करोड़ रुपये लागत की 3 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा रेल मंत्रालय की 7 हजार 927 करोड़ रुपये लागत की 3 मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान करने पर प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय कैबिनेट का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में रेलवे के बढ़ते नेटवर्क से प्रदेश विकास पथ पर तीव्र गति से अग्रसर है, प्रदेशवासियों के लिए आवागमन भी तीव्र गति से सुगम हुआ है। प्रदेश को मिल रही नित नई सौगातों के लिए प्रदेशवासी प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि रेल लाइन के विस्तार से धार्मिक, सांस्कृतिक एवं इको पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। इस पहल से प्रदेश में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (खंडवा), खजुराहो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, असीरगढ़ किला और रीवा किला जैसे विभिन्न आकर्षणों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के 7 जिलें होंगे कवर उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री-मंडल ने रेल मंत्रालय की 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी लागत 7 हजार 927 करोड़ रुपये है। इनमें जलगांव-मनमाड चौथी लाइन (160 किमी), भुसावल-खंडवा तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी) तथा प्रयागराज (इरादतगंज) मानिकपुर तीसरी लाइन (84 किमी) शामिल हैं। ये परियोजनाएँ 3 राज्यों अर्थात महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के 7 जिलों को कवर करेंगी। इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 639 किलोमीटर की वृद्धि होगी। निर्माण अवधि के दौरान लगभग एक लाख मानव-दिनों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे। इससे कोयला परिवहन और यात्री ट्रेनों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी और मालगाड़ी के यात्रा समय में कमी करने में भी मदद मिलेगी। तीर्थ यात्रियों, प्रकृति प्रेमियों को मिलेगा लाभ स्वीकृत परियोजना खंडवा और चित्रकूट जैसे 2 आकांक्षी जिलों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी, जिससे लगभग एक हजार 319 गांवों और लगभग 38 लाख आबादी को सेवा मिलेगी। मुंबई-प्रयागराज-वाराणसी रूट पर अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन को सक्षम करके कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा। नासिक (त्र्यंबकेश्वर) और वाराणसी (काशी विश्वनाथ) के ज्योतिर्लिंग के साथ प्रयागराज, चित्रकूट, गया और शिरडी जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को लाभ होगा। अजंता और एलोरा गुफाएँ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, देवगिरी किला, यावल वन्यजीव अभयारण्य, केवटी फॉल्स और पुरवा फॉल्स आदि जैसे विभिन्न आकर्षणों तक बेहतर पहुँच के माध्यम से प्रकृति प्रेमियों और इतिहास में रूचि रखने वाले पर्यटकों को भी सुविधा होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। recent visitors 34