Friday, July 10, 2026 5:48 am

दिल्ली में प्रदूषण स्तर फिर बढ़ा, एक्यूआई 400 के पार, ग्रैप-4 रहेगा जारी

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 396 है। वहीं, कुछ इलाकों में यह स्तर 400 के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, अलीपुर में एक्यूआई 416, आनंद विहार में 431, अशोक विहार में 420, और जहांगीरपुरी में 422 दर्ज किया गया है। इसके अलावा, मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में AQI 412, मंदिर मार्ग में 409, और मुंडका में 443 के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, नरेला में 415, नेहरू नगर में 420, पटपड़गंज में 409, और पंजाबी बाग में 413 के आंकड़े सामने आए हैं। रोहिणी में 432, शादीपुर में 423, सोनिया विहार में 425, विवेक विहार में 432 और वजीरपुर में 423 AQI रिकॉर्ड किया गया है। इन इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने से नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंचने के कारण यह प्रदूषण अब स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक बन गया है। बता दें कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के चौथे चरण (ग्रैप-4) को लागू कर दिया गया है। ग्रैप-4 लागू किए जाने के बाद वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। दिल्ली में कारखानों, निर्माण कार्यों, और यातायात पर कड़ी पाबंदियां लगाई गई है। आपको बताते चलें, प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और औसत एक्यूआई 450 को पार कर जाता है तो ग्रैप का चौथा चरण लागू किया जाता है। ग्रैप-4 लागू होने के बाद प्रतिबंध सबसे ज्यादा और सबसे कड़े होते हैं। राजधानी में ट्रक, लोडर समेत अन्य भारी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत नहीं है।   recent visitors 50

नोएडा प्राधिकरण के स्वीकृत पदों से ही डीएनजीआईआर के गठित सेल में स्टाफ को पोस्ट किया जाएगा

नोएडा न्यू नोएडा मास्टर प्लान अप्रूव हो चुका है। जमीन अधिग्रहण के लिए 1000 करोड़ रुपए रिजर्व किए गए हैं। नोएडा प्राधिकरण के स्वीकृत पदों से ही डीएनजीआईआर के गठित सेल में स्टाफ को पोस्ट किया जाएगा। ताकि समय से न्यू नोएडा को बसाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके। नोएडा प्राधिकरण न्यू नोएडा (डीएनजीआईआर) का नोडल है। ऐसे में अधिग्रहण से लेकर नया शहर बसाने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। नोएडा और न्यू नोएडा यानी डीएनजीआईआर में प्लाट काटने , प्लान्ड सिटी बसाने के लिए यहां कुल 43 पद स्वीकृत हैं। इसमें से महज 5 पद पर ही अधिकारी नियुक्त हैं। 38 पद खाली हैं। ऐसे में डीएनजीआईआर का काम बाधित हो रहा है। बता दें प्लानिंग विभाग का काम अर्जित भूमि पर नक्शा बनाना, प्लाट काटना और योजनाओं को खसरे के अनुसार सुपर इंपोज करना है। न्यू नोएडा में सबसे पहले जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाएगी। यहां किसानों से आपसी सहमति से जमीन खरीदी जाएगी। इसके लिए प्राधिकरण के भू लेख के साथ सलाहकार कंपनी भी मदद करेगी। हालांकि स्टाफ की कमी के चलते ये काम धीमी गति से चल रहा है। वर्तमान में नोएडा प्राधिकरण में भू लेख विभाग में 24 पद स्वीकृत हैं। इन सभी पद को मिलाकर कुल 9 अधिकारी ही नियुक्त हैं। 17 अब भी खाली हैं। जबकि बिना इन अधिकारियों का जमीन अधिग्रहण करना मुश्किल है। न्यू नोएडा में जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। यहां आपसी सहमति के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए सैटेलाइट सर्वे किया जा रहा है। जिसमें सभी फेज की तस्वीरें ली जा रही हैं। इसी निर्माण के अनुसार ही आबादी की जमीन का निर्धारण किया जाएगा। क्योंकि प्राधिकरण ने अक्टूबर 2024 में न्यू नोएडा की अधिसूचित करीब 209 वर्ग किमी के एरिया में निर्माण पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण ने बताया कि न्यू नोएडा के पहले फेज में 3165 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जाएगी।   recent visitors 61

अखिलेश यादव ने हिंसा के पीड़ित के बयान के साथ लिखा कि न्याय का मान न्यायालय ही सुनिश्चित करेगा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुई हिंसा व आगजनी के बाद सियासी बयानबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक कटिंग के माध्यम से संभल हिंसा के पीड़ित के बयान के साथ लिखा कि न्याय का मान न्यायालय ही सुनिश्चित करेगा। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया के माध्यम से संभल हिंसा के पीड़ित के बयान को पोस्ट किया और लिखा कि किसी को धमकाकर कोरे काग़ज़ पर अंगूठा लगवाना भी गुनाह है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय तत्काल संज्ञान ले और दोषी शासन-प्रशासन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करके, इस घटना के लिए जिम्मेदार सभी को सजा दे। न्याय का मान न्यायालय ही सुनिश्चित करेगा। इसके पहले सपा मुखिया ने पत्रकारों से बातचीत में संभल हिंसा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि जामा मस्जिद में दोबारा सर्वे का काम क्यों किया? उन्होंने कहा कि मैं भी संभल जाऊंगा। संभल जाने से क्यों रोका जा रहा है। संभल का हाल जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि संभल में न्याय नहीं मिल रहा है। हम संविधान का सम्मान करते हैं। हम संविधान का उत्सव कैसे मनाएं? उत्सव ढोंग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान को नहीं मानती है। उधर,संभल में हिंसा के बाद अब हालात सामान्य हो रहे हैं। बाजार खुल गए हैं। स्कूल भी खुले। हिंसाग्रस्त इलाके में पुलिस बल तैनात है। कड़ी निगरानी की जा रही है। पुलिस अब भी संभल बवाल से जुड़े मामलों में सतर्कता बरत रही है। वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।   recent visitors 44

7 दिनों में मांगे कैंसर के इलाज के डॉक्यूमेंट, छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने सिद्धू को जारी किया 850 करोड़ का लीगल नोटिस

रायपुर. हाल ही में नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के 4थे स्टेज के कैंसर से बिलकुल ठीक होने को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था, जिसमें नवजोत सिद्धू ने दावा किया था कि उनकी पत्नी केवल 40 दिनों में बिना किसी मेडिकल ट्रीटमेंट या दवाई के ठीक हो गईं, वो भी सिर्फ अपने खान-पान में कुछ बदलाव करके. इस मामले को लेकर अब छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने आज नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी के नाम पर लीगल नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में सोसाइटी ने सिद्धू दम्पत्ति को 7 दिन के भीतर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के स्वास्थ्य दस्तावेज मंगाए गए हैं, जिससे उनके (नवजोत सिंह सिद्धू) की तरफ से किए गए दावों को वे साबित कर सकें. वहीं ऐसा नहीं करने पर उनपर 850 करोड़ का क्षतिपूर्ती का दावा करने की चेतावनी दी है. सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ कुलदीप सोलंकी ने बताया कि नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी पत्नी के असाध्य कैंसर रोग के सम्बंध में अमृतसर स्थित आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस व मीडिया में बोलते हुए खुलासा किया कि उनकी पत्नी का स्टेज 4 कैंसर को लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव कर मात दे दी है. उन्होंने दावा किया कि, सिर्फ डाइट में कुछ चीजों को शामिल करके उनकी पत्नी 40 दिन में कैंसर को मात दे दी है. जिसे सुनकर देश विदेश के कैंसर ग्रसित मरीजों में भ्रम व एलोपेथी मेडिसिन के विरोध की स्थिति उत्पन्न हो रही है. इसलिए हम इस लीगल नोटिस के जरिये सिद्धू परिवार से स्पष्टीकरण व दस्तावेज की मांग कर रहे हैं. CG सिविल सोसाइटी ने पत्र में पूछे ये सवाल:– 0- जो दावा नवजोत सिद्धू ने अपनी पत्नी के स्वास्थ्य को लेकर किया है, क्या श्रीमती सिद्धू उनके बयान का पूर्ण समर्थन करते हैं? 0- क्या श्रीमती सिद्धू को लगता है कि एलोपेथी मेडीसिन का जो इलाज आपने विभिन्न अस्पतालों में करवाया है उनके इलाज उपचार से आपको कोई भी लाभ नहीं हुआ है? 0- क्या आपके कैंसर फ्री होने में सिर्फ आपकी डाइट, नीम पत्ता, नींबू पानी, तुलसी पत्ता, हल्दी का ही सेवन किया है किसी भी एलोपेथी मेडीसीन का उपयोग नहीं किया है? 0- यदि आप अपने पति के दावे के समर्थन करती हैं तो वे सभी प्रमाणित दस्तावेज हमें 7 दिनों के भीतर उपलब्ध करावें, जिनसे यह साबित हो सके कि आपने महज 40 दिनों में बिना मेडिसिन लिए, बिना चिकित्सकीय सहायता के मात्र डाइट को बदलाव करके स्टेज 4 के कैंसर को समाप्त कर आप कैंसर फ्री हो गए हैं. CG सिविल सोसाइटी ने इसके साथ ही नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी को लिखा- अगर आप अपने पति के दावों के समर्थन में कोई प्रमाणित दस्तावेज और मेडिकल प्रमाण नहीं रखते हैं तो आप फिर से एक प्रेस वार्ता कर स्पष्टीकरण देवें. क्योंकि अन्य कैंसर मरीजों को भ्रम हो रहा है और वे अपनी मेडिसिन, इलाज, चिकित्सकीय उपचार छोड़कर आपके व आपके पति के कहे बातों पर भरोसा कर के अपने जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं जिनके जिम्मेदार आप होंगे. उन्होंने पत्र में आगे लिखा- प्रेस वार्ता में आपकी (सिद्धू दंपत्ति) तरफ से दिए गए बयानों से एलोपेथी पद्धति, एलोपेथी मेडिसिन, उसके चिकित्सकों व चिकित्सकीय मापदंडों के लिए भ्रम फैला गए हैं जिससे होने वाले सभी जनहानि, स्वास्थ्य की क्षति, मानहानि और मरीजों के जीवन के साथ होने वाले खिलवाड़ के साथ ही मरीजों के बिगड़ने वाले हालातों के जवाबदार आप दंपत्ति होंगे. इस स्थिति में 100 मिलियन डॉलर (Rs 850 crores) की राशि भी कम ही आंकलित होगी. CG सिविल सोसाइटी ने शो कॉज नोटिस में लिखा कि (सिद्धू दंपत्ति) आप 7 दिनों के भीतर सभी स्वास्थ्य दस्तावेज भेज कर 40 दिनों में में ठीक होने वाले कथन को प्रमाणित करें, या प्रेस कांफ्रेंस कर अपने बयान (झूठे दावों) को वापिस ले और कथनों से फैले भ्रम को दूर करें, ताकि लोगों को किसी प्रकार की स्वास्थ्य हानी या जन हानि न हो. वहीं 7 दिनों के भीतर ऐसा नहीं करने पर आप (सिद्धु दम्पत्ति) आपके कारण फैले भ्रम से होने वाली सभी घटना, दुर्घटना, जन-हानि, धन-हानि, सभी प्रकार की क्षति के लिए जिम्मेदार होंगे. इसके लिए आप पर 100 मिलियन डॉलर यानि 850 करोड़ रुपए का विधिवत क्षतिपूर्ति दावा किया जाएगा. recent visitors 60

बाथरूम से आती दुर्गंध भगाने के लिए अपनाएं ये सस्ते और घरेलू उपाय

घर कितना भी साफ-सुथरा क्यों न हो लेकिन बाथरूम में दुर्गंध तो देखने वाले का सारा मूड खराब हो जाता है। घर में मेहमान आए हुए तो आपको इस वजह से शर्मिदा होना पड़ सकता है। वैसे तो बाजार से ऐसे बहुत सारे प्रोडक्ट्स आसानी से मिल जाते हैं जो बाथरूम से आने वाली गंदी सी गंध को आसानी से दूर कर देते हैं लेकिन यह प्रोडक्ट्स काफी महंगे होते हैं। ऐसे में इसकी जगह पर घरेलू चीजों का इस्तेमाल किया जाए तो ज्यादा बेहतर ऑप्शन होता है। यह घरेलू चीजें आपको किचन से आसानी से मिल सकती है लेकिन ध्यान रहें कि इन चीजों को असर दिखाने में कुछ वक्त लगता है इसलिए थोड़ा संयम से काम लें। 1. नींबू का रस नींबू, किचन में मौजूद एक ऐसी चीज है, जिसके एक नहीं सैकड़ों उपयोग हैं। यह दुर्गंध दूर भगाने का सबसे बढ़िया तरीका है। ज्यादा मात्रा में नींबू के रस को फ्लोर पर डाल दीजिए। कुछ देर के लिए बाथरूम को बंद कर दीजिए। उसके बाद साफ पानी से बाथरूम को धो लीजिए। 2. बेकिंग सोडा बेकिंग सोडा की कुछ ज्यादा सी मात्रा लेकर उसे बाल्टी में पानी लेकर घोल लीजिए। उसके बाद फ्लोर पर उस पानी को फैला दीजिए। कुछ देर उसे उसी तरह रहने दें। बाद में साफ पानी से फ्लोर को साफ कर लीजिए। ऐसे सप्ताह में 2 बार करने से बाथरूम की बदबू चली जाएगी। 3. सिरका बाथरूम में स्मेल दूर भगाने के लिए आप सिरके का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। सिरके को ज्यादा मात्रा में पानी में मिक्स करके फर्श पर फैला लें। कुछ देर ऐसा ही छोड़ने के बाद बाथरूम को पानी से धो ले। आपका फर्श चमक उठेगा। 4. साबुन का पानी अगर आपके बाथरूम से बदबू आती है तो आप किसी सुगंधित डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। डिटर्जेंट पाउडर को पानी में मिलाकर फर्श की सफाई करने से एक ओर जहां फर्श चमक उठता है वहीं बदबू भी कम हो जाती है। सप्ताह में 2 से 3 बार ऐसा करने से दुर्गंध हमेशा के लिए दूर हो जाती है।   recent visitors 79

विजयपुर में वन मंत्री रामनिवास रावत को मिली हार, अब हार से कई नेताओं में जागी मंत्री पद की आस

भोपाल मध्य प्रदेश के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में मोहन यादव सरकार के मंत्री रामनिवास रावत को मिली हार ने भाजपा के कई नेताओं में मंत्री पद की आस जगा दी है। कई वरिष्ठ विधायक दावेदारों की कतार में नजर आने लगे हैं। राज्य में अभी हाल ही में दो विधानसभा क्षेत्र विजयपुर और बुधनी में उपचुनाव हुए हैं जिनमें से एक-एक स्थान पर भाजपा तथा कांग्रेस को जीत हासिल हुई है। विजयपुर में वन मंत्री रामनिवास रावत को कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा ने शिकस्त दी है। इस हार के बाद रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया मगर अब तक मंजूर नहीं हुआ है। वही बुधनी में भाजपा की रमाकांत भार्गव को जीत मिली। रामनिवास रावत कांग्रेस से विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुआ करते थे और उन्होंने भाजपा की सदस्यता लोकसभा चुनाव के दौरान ले ली थी। उन्हें पुरस्कार स्वरूप मोहन यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इस तरह मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में कुल 32 मंत्री हो गए थे। राज्य की विधानसभा में 230 विधायक हैं और तय नियम के अनुसार राज्य में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं। इस तरह अब तक दो पद ही रिक्त थे और अब रावत के चुनाव हारने के बाद तीन मंत्री बनाए जा सकते हैं। इन स्थितियों में कई दावेदार नजर आने लगे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, बृजेंद्र प्रताप सिंह, जयंत मलैया उनमें से हैं जो कई बार सरकार में मंत्री रह चुके हैं परंतु वर्तमान में वे मंत्रिमंडल में जगह हासिल नहीं कर पाए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास गृह विभाग सहित कई और विभाग भी हैं। इतना ही नहीं, आने वाले समय में रावत का वन विभाग भी उन्हीं के पास पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री वर्तमान में विदेश प्रवास पर हैं और उनके विदेशी प्रवास से लौटने के बाद ही फैसला हो सकता है। लेकिन राज्य की सियासत में संभावित मंत्रियों की चर्चा जोरों पर है। कई स्वतंत्र प्रभार के मंत्री ऐसे हैं जो वन विभाग चाहते हैं। इससे पहले रावत को वन विभाग नागर सिंह चौहान से लेकर दिया गया था। संभावना इस बात की ज्यादा है कि वन विभाग किसी जनजातीय वर्ग के विधायक को दिया जा सकता है।   recent visitors 38

स्कूल की प्रधान पाठक को आये धमकी भरे कॉल, छत्तीसगढ़-बिलासपुर में शिक्षिका का कक्षा में सोते वीडियो वायरल

बिलासपुर। न्यायधानी में सीपत स्थित शासकीय प्राथमिक शाला बरेली कन्या स्कूल की प्रधान पाठक ने धमकी और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। प्रधान पाठक का कहना है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षिका का कक्षा में सोते हुए एक वीडियो वायरल होने के बाद, अज्ञात नंबरों से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। इन कॉल्स में खुद को मंत्रालय का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने 25,000 रुपये की मांग की है। पैसे न देने पर शिक्षिका को तुरंत सस्पेंड और बर्खास्त करने की धमकी दी गई। बता दें कि मामले को लेकर शिक्षिका ने सीपत थाना में शिकायत दर्ज करवाई है, इसके अलावा उन्होंने वसूली के लिए आ रहे कॉल की रिकॉर्डिंग को भी साझा किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। साथ ही अपने बयान का एक वीडियो जारी कर शिक्षा विभाग और प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो में जो शिक्षिका नजर आ रही हैं, वह उस दिन अस्वस्थ थीं। इस संबंध में प्रधान पाठक ने पहले ही शिक्षा विभाग को स्पष्ट रिपोर्ट सौंप दी थी। प्रधान पाठक ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से की न्याय की अपील प्रधान पाठक लक्ष्मी माल्या ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन और शिक्षा विभाग से न्याय की अपील की है। वीडियो में उन्होंने बताया “हमारे विद्यालय में 88 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। चार शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम बच्चों और स्कूल के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण समर्पण के साथ काम कर रही है। लेकिन, इस प्रकार की धमकियां और झूठे प्रचार शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। मैं प्रशासन और शिक्षा विभाग से आग्रह करती हूं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।” गौरतलब है कि शिक्षिका का कक्षा में सोते हुए वीडियो वायरल होने के बाद प्रधान पाठक को धमकी भरे कॉल्स का मामला अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षकों के अधिकारों और गरिमा को लेकर यह मामला अन्य शिक्षकों में भी चिंता का कारण बन रहा है। अब देखना ये है कि शिक्षा विभाग इस मामले में आगे कब और क्या कार्रवाई करता है। recent visitors 48