जोधपुर में हैं सारा अली खान, छत से दिखाई ‘ब्लू सिटी’

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान घूमने और देसी खाने की शौकीन हैं ये कई बार उन्होंने जाहिर भी किया है। वो राजस्थान की सूर्यनगरी जोधपुर में हैं। इसके साथ ही लेटेस्ट तस्वीर लजीज व्यंजनों के प्रति उनके ‘प्रेम’ को दर्शाता है। सारा ने इंस्टाग्राम स्टोरी सेक्शन में स्वादिष्ट व्यंजनों की एक तस्वीर साझा की। जिसमें एक दाल, सब्जी, चावल और रोटी शामिल हैं। अभिनेत्री ने पूल के किनारे अलाव की एक तस्वीर भी साझा की, जो एक शानदार हेरिटेज होटल जैसा दिखाई दे रहा है। इस पोस्ट को उन्होंने कोई कैप्शन तो नहीं दिया लेकिन राजस्थान का जियोटैग लगाया। दो थालियां और उनमें विशुद्ध राजस्थानी पकवान सजे दिखे थे। इसकी अगली तस्वीर ब्ल्यू सिटी का दीदार कराती है। ये कोलाज है। जिसमें छत है और उस पर धूप सेंकती अदाकारा हैं। इसमें उन्होंने लिखा है जोधपुर द ब्ल्यू सिटी। हाल ही में सारा ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें अपने पसंदीदा विंटर फूड का जिक्र था। टेबल पर सर्दियों की हरी सब्जियां रखी हुई थी एक पर उंधियू लिखा था जबकि दूसरे पर सरसों का साग लिखा था। अभिनेत्री ने पोस्ट पर ताजा और साग पनीर स्टिकर जोड़े थे। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “मेरी दो पसंदीदा चीजें, सर्दी आ गई है।” इसी बीच सारा को पैपराजी से बचाते हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जैसे ही पैपराजी उनकी तस्वीरें खींचने के लिए इकट्ठा हुए, एक बुजुर्ग व्यक्ति उसे कैमरों से बचाने के लिए आगे बढ़ा। वह आदमी काफी आगे चला गया, यहां तक कि पैपराजी से कैमरा फोन भी छीन लिया और उनके एंगल को बंद कर दिया, जिससे सारा सहित सभी लोग पूरी तरह से दंग रह गए। हंगामे के बीच अभिनेत्री ने अपने हाथों से इशारा करते हुए पूछा, “क्या हो रहा है?” अभिनेत्री आयुष्मान खुराना के साथ अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। आकाश कौशिक द्वारा निर्देशित (अभी तक शीर्षकहीन) फिल्म को एक जासूसी कॉमेडी बताया जा रहा है। recent visitors 39

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का कड़ाई से हो पालन: मुख्यमंत्री साय

रायपुर,  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में प्रदेश के सड़क सुरक्षा परिदृश्य, सड़क दुर्घटना के नियंत्रण के उपायों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने बैठक में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के नियंत्रण के लिए दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चार पहिया वाहन चालकों के लिए सीट बेल्ट के उपयोग तथा वाहन चलाते समय सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए जनजागरूकता अभियान को प्रभावी ढंग से चलाया जाए। मुख्यमंत्री श्री साय ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़कों पर ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्य में तेजी लाने, जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने, सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों के इलाज के लिए निर्माणाधीन ट्रामा स्टेब्लाईजेशन यूनिट्स का कार्य जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में परिवहन विभाग द्वारा तैयार कराया गया ‘‘बस संगवारी एप’’ लांच किया और परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा पर प्रकाशित पोस्टर का विमोचन किया।     बैठक में जानकारी दी गई कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक के राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद की पाठ्यपुस्तकों में सड़क यातायात नियमों से संबंधित अध्याय पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। बैठक में बताया गया कि यातायात व्यवस्था का इलेक्ट्रॉनिक सर्विलेंस रायपुर, बिलासपुर और नवा रायपुर में किया जा रहा है। भिलाई और दुर्ग में यह व्यवस्था आंशिक रूप से संचालित है। सितंबर 2023 से अक्टूबर 2024 तक 101 ब्लैक स्पॉट और 748 जंक्शन के सुधार कार्य पूर्ण किए गए हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने पर सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की संभावना 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर परिवहन विभाग द्वारा 6 लाख 70 हजार से अधिक तथा पुलिस विभाग द्वारा 4 लाख 87 हजार से अधिक चालानी कार्यवाही की गई है। 01 जनवरी 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक 7826 वाहन चालकों का लायसेंस निलंबित किया गया है। 8 दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों राजनांदगांव, धरसींवा अभनपुर, पाली, सिमगा, सुकमा, बेमेतरा और पत्थलगांव में ट्रामा स्टेब्लाईजेशन यूनिट निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई है। 14 हजार 261 वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस, 72 हजार से अधिक वाहनों में स्पीड गवर्नर तथा 2200 बसों में पेनिक बटन लगाए गए हैं। बैठक में ब्लैक स्पॉट की पहचान, सुधार की कार्यवाही, सड़कों में यातायात संकेतक, होर्डिंग्स हटाने, फुटपाथ, पार्किंग, सर्विस लेन से अतिक्रमण हटाने आदि कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्कूल शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, श्री बसव राजू एस. और श्री राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश, आबकारी सचिव श्रीमती आर. संगीता, एडीजी ट्रेफिक श्री प्रदीप गुप्ता, अपर परिवहन आयुक्त श्री डी. रविशंकर उपस्थित थे। सभी संभागों के आयुक्त एवं पुलिस महानिरीक्षक वर्चुअली बैठक में शामिल हुए। अंतर्विभागीय लीड एजेंसी के अध्यक्ष एवं एआईजी ट्रेफिक श्री संजय शर्मा ने बैठक में प्रेजेंटेशन दिया। recent visitors 51

आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा आवास : साय

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत 15,000 आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों और पीड़ित परिवारों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए यह पहल एक बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 15,000 आवास केवल मकान नहीं बल्कि उन परिवारों के लिए सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक हैं। हमारी सरकार इस योजना को पूरी पारदर्शिता और तत्परता के साथ लागू करेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश के विकास और शांति स्थापना की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन देने के लिए हमारी सरकार संकल्पबद्ध है। पीड़ित परिवारों को आवास मिल जाने से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना सामाजिक समरसता और विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि इस योजना में विशेष रूप से उन परिवारों को शामिल किया जाएगा जिनका नाम सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना 2011 और आवास प्लस 2018 की सूची में शामिल नहीं था। इन नामों को 6 दिसंबर 2024 तक आवास प्लस पोर्टल पर अपलोड करने की अनुमति केंद्र सरकार द्वारा दी गई है। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास देने की स्वीकृति हेतु निवेदन किया था परिणामस्वरूप 15 हजार आवास की स्वीकृति भारत सरकार से दी गयी है।            उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि इस विशेष परियोजना के तहत पुलिस अधीक्षक जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत को आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों की सूची प्रदान करेंगे। इसके बाद जिला पंचायत द्वारा इस सूची का सर्वेक्षण और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन उपरांत कलेक्टर के माध्यम से लाभार्थियों के लिए भूमि का चिन्हांकन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के दिशानिर्देशों के अनुरूप आवास निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होगी। recent visitors 83

निवेश के लिए आमंत्रित किया है कि वह हमारे लिए मेहमान नहीं, बल्कि परिवार का अंग हैं : यादव

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जर्मनी के निवेशकों को ये कहते हुए मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है कि निवेशक हमारे लिए मेहमान नहीं, बल्कि परिवार का अंग हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव कल म्यूनिख (जर्मनी) में अपनी 3 दिवसीय यात्रा के प्रथम दिन इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भोपाल में फरवरी माह में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में आने के लिए जर्मनी के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने निवेशकों के हित में जटिलताओं को समाप्त/सरलीकृत कर प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को दूर करने का काम किया है। निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने पर बिजली और पानी की कमी नहीं आने दी जायेगी। निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारे परिवार का एक अंग हैं। उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने दी जाएगी। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के लिये भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी के अतीतकाल से बहुत गहरे संबंध है। यूरोप के सभी देशों से तुलना की जाए तो जर्मनी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा निवेश करने वाला देश है। हम जर्मनी के साथ एक नई तरह की साझेदारी चाहते हैं, जो केवल व्यापार तक ही सीमित न हो। हम चाहते हैं कि जर्मनी की कम्पनियां अपनी उन्नत तकनीक के साथ मध्यप्रदेश में निवेश करें। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो। मध्यप्रदेश आज भारत की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हमारी अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़ी है। विकास दर दोहरे अंक में है। एक पॉवर सरप्लस स्टेट है। ग्रीन एनर्जी की दिशा में प्रदेश काफी आगे बढ़ा है। इसके साथ ही पर्याप्त जल और भूमि की उपलब्धता भी मध्यप्रदेश की विशेषता है। इस अवसर पर डॉ. यादव ने जर्मन विद्वान मैक्स मूलर का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी सहित अन्य भाषाओं में अनुवाद किया। वे संस्कृत के भी विद्वान थे। स्वामी विवेकानंद भी उनकी प्रतिभा की प्रशंसा करते थे। जर्मनी ने विश्व युद्ध सहित अनेक कठिनाईयों का सामना किया है, लेकिन जर्मनी के नागरिकों की जीवटता सराहनीय है। डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश का इकलौता प्रदेश कहा जा सकता है, जहाँ उद्योग संबंधी सभी प्रकार की अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ मात्र 30 दिन में दी जाती हैं। इस महत्वपूर्ण विभाग की मॉनीटरिंग उत्साही, जिज्ञासु और कर्मठ अधिकारियों के हाथों में है। इसके अतिरिक्त वे स्वयं निरंतर इस विभाग की मॉनीटरिंग करते हैं। ‘इन्वेस्ट अपोर्चुनिटीज इन एमपी’ के लिए गुरुवार को जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन को संबोधित करते हुए जर्मनी में भारत के कौंसुलेट जनरल शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का भौगोलिक हृदय प्रदेश तो है ही, साथ ही यह भारत के आर्थिक विकास का भी प्रमुख गंतव्य बन रहा है। श्री सिन्हा ने बताया कि यहां 5 पूर्ण विकसित हवाई अड्डे, 4 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग और विस्तृत रेलवे नेटवर्क है। मध्यप्रदेश के शहरों से देश के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक किसी भी स्थान पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। मध्यप्रदेश में एडिटिव प्लास्टिक उत्पादक कंपनी बेयरलोशर के चेयरमेन डॉ. रोसेन्थाल ने मध्यप्रदेश में उद्यमिता के अपने 25 वर्ष के अनुभव साझा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में उनका इतना अच्छा अनुभव रहा कि उनकी कंपनी ने दुनिया भर के 15 प्लांट्स में सबसे बड़ा प्लांट मध्यप्रदेश में स्थापित किया। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने कहा कि मध्यप्रदेश, भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में योगदान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और प्रगतिशील प्रशासन के साथ राज्य इस राष्ट्रीय दृष्टिकोण में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तैयार है।   recent visitors 97

ग्राम बेलगहना में एनएसएस के 7 दिवसीय विशेष शिविर, छात्रों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

बिलासपुर ग्राम बेलगहना में आयोजित एनएसएस के 7 दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य और स्वच्छता को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित कीं भोजन के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में डाक विभाग की ब्रीफिंग ब्रांच पोस्ट मास्टर सूरज केलकर ने सुकन्या समृद्धि योजना, किसान विकास पत्र, बचत खाता, आवर्ती जमा खाता, स्वास्थ्य बीमा और पोस्ट ऑफिस ऐप के उपयोग की जानकारी दी। ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन जांचा गया साथ ही स्वास्थ्य शिविर में ग्रामवासियों और विद्यार्थियों का ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन जांचा गया।जिनका हीमोग्लोबिन कम पाया गया, उन्हें पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गई। इस कार्यक्रम में बिलासा ब्लड बैंक बिलासपुर के विशेषज्ञों का सहयोग सराहनीय रहा। प्रारंभिक सत्र में विद्यार्थियों ने सुबह प्रभात फेरी निकालकर नशा मुक्ति, मतदाता जागरूकता, स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश दिया। इसके बाद मुक्तिधाम की सफाई कर उसे स्वच्छ और आवागमन योग्य बनाया। स्वच्छता व स्वास्थ्य का संदेश फैलाया सायंकालीन सत्र में ग्रामवासियों से संपर्क कर उनकी समस्याओं को समझा गया और स्वच्छता व स्वास्थ्य का संदेश फैलाया गया। विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति, स्वच्छता और जागरूकता पर स्लोगन और नारों के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया। इसके बाद मुक्तिधाम में तीन घंटे की मेहनत से सफाई की गई। रास्तों को आवागमन योग्य बनाते हुए अनावश्यक कचरों का निपटान किया गया। गोष्ठी, स्वास्थ्य शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम दोपहर के गोष्ठी सत्र में डाक विभाग ने वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी, वहीं स्वास्थ्य शिविर में ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन जांच कर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी गई। शाम को ग्रामवासियों से संपर्क कर उनके बीच स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश प्रसारित किया गया। दिन का समापन प्रेरणादायक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसमें देशभक्ति, मतदाता जागरूकता और स्वच्छता पर आधारित नाटक और गीत प्रस्तुत किए गए। recent visitors 69

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सुगमता से हो रही धान की खरीदी

  रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों से सुगमता पूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। छत्तीसगढ़ में धान 14 नवम्बर सें शुरू हुए धान खरीदी का सिलसिला अनवरत रूप से जारी है। राज्य में 14 नवम्बर से अब तक 18.09 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। राज्य में अब तक 3.85 लाख किसानों ने अपना धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत 3706 करोड़ 69 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2025 तक चलेगी।  खाद्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस खरीफ वर्ष के लिए 27.68 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.45 लाख नए किसान शामिल है। इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 29 नवम्बर को 46345 किसानों से 2.12 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की गई है। इसके लिए 54805 टोकन जारी किए गए थे। recent visitors 64

कार्ययोजना के क्रियान्वयन” विषय पर कार्यशाला सम्पन्न

 रायपुर,   छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र (CGSCCC) द्वारा नवा रायपुर अटल नगर स्थित अरण्य भवन में ”सतत आवास और कृषि क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (APCC) के क्रियान्वयन” पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एयर कंडीशनर तापमान विनियमन पर पोस्टर और जलवायु परिवर्तन से संबंधित 100 सफलता कहानियों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया गया।     कार्यशाला में पद्मश्री उमा शंकर पांडे ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित अरण्य भवन में आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जल संकट आज विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। उन्होंने यह बात दोहराई कि पानी बनाया नहीं जा सकता, केवल बचाया जा सकता है। उन्होंने सभी से जल बचाने की अपील की और इस दिशा में ठोस व सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।     उन्होंने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए संग्रहालय और विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही, उन्होंने यह सुझाव दिया कि छात्रों को पानी बचाने के उपायों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए और ”पानी की पाठशाला” जैसी पहल शुरू की जाए, ताकि जल के महत्व और उसके संरक्षण की तकनीकों को लोगों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी पद्धतियां अपनाई जानी चाहिए, जिनसे घर का पानी घर में, गांव का पानी गांव में और जंगल का पानी जंगल में ही संरक्षित रहे। उन्होंने नया रायपुर में मौजूद जल संरचनाओं और जलाशयों की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की प्रशंसा की और नदियों को स्वच्छ रखने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।     प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या को कम करने के लिए समुदाय की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में ”प्लास्टिक का उपयोग न करने” और आम जनता के बीच जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), हरित भवन (ग्रीन बिल्डिंग), और हरित इस्पात (ग्रीन स्टील) जैसे नवाचारी उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को अपनी भूमिका समझनी होगी और पर्यावरण अनुकूल आदतें विकसित करनी होंगी। साथ ही, उन्होंने     जोर दिया कि जागरूकता अभियानों और स्थानीय स्तर पर प्रयासों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।     कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सतत आवास और कृषि क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रभावी समाधान खोजने के साथ-साथ (APCC) के तहत बनाई गई रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा करना है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र (CGSCCC) राज्य की जलवायु परिवर्तन संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री और वन मंत्री के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के मार्गदर्शन में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।     कार्यशाला में आबकारी विभाग की सचिव एवं आयुक्त आर. संगीता, आईआईटी मुंबई के क्लाइमेट स्टडीज विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघु मर्तुगुडे, तमिलनाडु WTC के पूर्व निदेशक डॉ. पन्नीरसेल्वम, रायपुर नगर निगम आयुक्त अविनाश मिश्रा, बेंगलुरु के वास्तुकार डॉ. सुजीत कुमार, अंबिकापुर नगर निगम के स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी रितेश सैनी और नर्मदा नैचुरल फार्म्स के संस्थापक संकल्प शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपने विचार और अनुभव साझा किए।      कार्यशाला में दो तकनीकी सत्र और दो पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। कार्यशाला में विभिन्न विषय विशेषज्ञों, अधिकारियों और पर्यावरणविदों सहित पीसीसीएफ आनंद बाबू, अतिरिक्त पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) प्रेम कुमार, वानिकी विशेषज्ञ बी.पी. सिंह, आईएफएस अधिकारी अमिताभ बाजपेयी, और कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया। recent visitors 54