Saturday, July 4, 2026 9:25 pm

राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड संस्कृत शिक्षा को दे रहा है बढ़ावा

भोपाल प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड अरूण, उदय और प्रभात कक्षाओं का संचालन 53 चयनित एजुकेशन फॉर ऑल (ईएफए) स्कूल में कर रहा है। इन विद्यालयों में संस्कृत माध्यम की कक्षाएं इस वर्ष शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हो गई हैं। देश की सांस्कृतिक विरासत में संस्कृत भाषा का प्राचीन काल से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत भाषा के विस्तार के लिये विशेष प्रावधान रखे गये हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उल्लेख किया गया है कि संस्कृत भाषा केवल संस्कृत पाठशाला एवं विश्वविद्यालयों तक सीमित न रहे बल्कि इसे मुख्य धारा में लाया जाये। इसके अनुपालन में प्रदेश में प्री-स्कूल के 3 वर्ष तथा कक्षा 1 और 2 के 2 वर्ष इस प्रकार बच्चे की उम्र 3 से 8 वर्ष की अवधि में बच्चों को संस्कृत माध्यम से पढ़ाई कराये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग संस्कृत माध्यम के विद्यालयों के संचालन की निगरानी भी रख रहा है। संस्कृत भाषा एक बीज भाषा है। यह भाषा सभी भाषाओं की जननी है। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों के मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की अवस्था से पूर्व हो जाता है। शोध में यह बात भी सामने आयी है कि जो विद्यार्थी प्रारंभ से संस्कृत भाषा बोलते हैं, वे बाद के वर्षों में विश्व की किसी भी भाषा को बोलने की क्षमता रखते हैं। इसको दृष्टिगत रखते हुए 53 संस्कृत विद्यालय प्रदेश में प्रारंभ किये गये हैं। यह एक ऐसा अनोखा प्री-स्कूल है, जिसमें छोटे बच्चों को संस्कृत माध्यम से भारतीय संस्कृति और परम्परा के बारे में सीखने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। इन विद्यालयों में पुस्तकालय, प्रदर्शन क्षेत्र, कठपूतली का कोना, विश्राम क्षेत्र, कहानी का कोना, कला कोना, खिलौनों का कोना, उत्सव की दीवार, भोजन क्षेत्र, संस्कृत अध्ययन सामग्री, बाल उपवन, तुलसी का बर्तन और ध्यान कुटिया जैसी सुविधाएं बच्चों को उपलब्ध कराई गई हैं।   recent visitors 62

मतदाता शिक्षा और मतदान जागरूकता के अभियान में चार श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

भोपाल भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली द्वारा मतदाता शिक्षा और मतदान जागरूकता के सर्वोत्तम अभियान के लिये नेशनल मीडिया अवार्ड-2024 प्रदान किये जायेंगे। मीडिया संस्थानों को पुरस्कार चार श्रेणियों में प्रदान किये जायेंगे। पुरस्कार मतदाताओं को मतदान के लिये प्रेरित करने और मतदान के प्रति जागरूकता के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये चलाये जा रहे उत्कृष्ट अभियानों को प्रोत्साहित करने के लिये दिये जायेंगे। आयोग ने 10 दिसम्बर 2024 तक संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक (टेलीविजन) मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक (रेडियो) मीडिया और ऑनलाइन (इंटरनेट एवं सोशल) मीडिया श्रेणियों में पृथक-पृथक पुरस्कार दिये जायेंगे। वर्ष-2024 में मतदान के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने के लिये मीडिया संस्थानों द्वारा किये गये उत्कृष्ट कार्यों और विशिष्ट उपलब्धियों को प्रदर्शित करते हुए चार पृथक-पृथक श्रेणियों में अपने प्रस्ताव भेजने होंगे। सभी नामांकनों पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा गठित मीडिया अवार्ड जूरी विचारोपरान्त निर्णय लेगी। नेशनल मीडिया अवार्ड-2024 से संबंधित विस्तृत विवरण (मेमोरेण्डम) कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश की वेबसाइट www.ceomadhyapradesh.nic.in और जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट www.mpinfo.org  पर उपलब्ध है। मीडिया संस्थान अपने प्रस्ताव श्री राजेश कुमार सिंह, अवर सचिव (संचार), भारत निर्वाचन आयोग, निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली 110001 को भेजे जा सकते हैं। संस्थान अपने प्रस्ताव मेमोरेण्डम में लिखी शर्तों का पालन करते हुए ई-मेल एड्रेस media-division@eci.gov.in पर भी भेज सकते हैं।   recent visitors 65

जून 2025 तक पूरा हो जायेगा सड़क निर्माण का पहला चरण, बनेंगी 1284.29 किमी लम्बी 1035 सड़कें

भोपाल गांव-गांव तक पहुंच सड़क प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में केन्द्र सरकार प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत 3 विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सभी बसाहटों तक एप्रोच रोड तैयार कर रही हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पीएम जन-मन में प्रदेश की चिन्हित कुल 1295 पीवीटीजी बसाहटों में कुल 1284.29 किलोमीटर लम्बाई वाली 1035 सड़कें मंजूर की गई है। गांव-गांव तक कुल 1050 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इन सम्पर्क सड़कों का निर्माण कार्य 5 चरणों में पूरा किया जायेगा। पहला चरण जून 2025 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में 235 करोड़ रूपये की लागत से 295 किमी लम्बी 125 सड़कें बनाई जा रही है। इन पर काम तेजी से जारी है। पहले चरण के ही दूसरे भाग में 150.72 करोड़ रूपये की लागत से 180.29 किमी लम्बी 40 सड़कें बनाई जानीं है। इनके लिये निर्माण एजेंसी तय कर दी गई हैं। दूसरे चरण में 112.69 करोड़ रूपये लागत से 152 किमी लम्बी 60 सड़कें बनाई जायेंगी। तीसरे चरण 162 करोड़ रूपये की लागत से 216 किमी लम्बी 86 सड़कें निर्मित की जायेंगी। चौथे चरण में 187.74 करोड़ रूपये से 254 किमी लम्बी 97 सड़कें तथा 5वें चरण में 801 करोड़ रूपये लागत से 1187 किमी लम्बाई वाली 627 सड़कें तैयार की जायेंगी। पीएम जन-मन अभियान में सभी गांव-गांव पहुंच सड़़कें प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ाभागके अधीन निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपी आरआरडीए) द्वारा बनाई जायेंगी। निर्माण एजेंसी एमपी आरआरडीए द्वारा पहले चरण में मंजूर हुईं। सभी सड़कें जून 2025 तक निर्मित कर लेने के लिये तेजी से कार्य किया जा रहा है। दूसरे, तीसरे, चौथे एवं 5वें चरण में स्वीकृत सड़कों का निर्माण कार्य भी हर हाल में वर्ष 2025 के अंत तक पूरा कर लेने के लिये निर्माण एजेंसी ने ठोस तैयारी कर ली है। recent visitors 185

महाराष्ट्र में फरवरी में बीएमसी समेत 14 नगर निगमों में चुनाव, अलग होने पर निकाय चुनाव में अलग-थलग पड़ सकते हैं उद्धव

मुंबई  शिवसेना (यूबीटी) महाविकास अघाड़ी से बाहर नहीं जाएगी। पार्टी के सांसद संजय राउत ने इस बयान से यूबीटी के कई नेता नाराज हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने उद्धव ठाकरे से महाविकास अघाड़ी से निकलने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि बीएमसी समेत निकाय चुनाव यूबीटी को अकेले लड़ना चाहिए। अब इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे की पार्टी में मतभेद सामने आ गए हैं। संजय राउत ने कहा कि विधानसभा की हार की समीक्षा अघाड़ी की तीनों पार्टियां मिलकर करेंगी। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से जुड़े फैसले बाद में लिए जाएंगे। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि अकेले चुनाव लड़ने से उद्धव ठाकरे राजनीति में अलग-थलग पड़ सकते हैं। ऐसे में नया चुनावी प्रयोग करना जोखिम भरा हो सकता है। अंबादास दानवे ने की थी एमवीए से एग्जिट करने की बात विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं। मुंबई में भी पार्टी को तगड़ा नुकसान हुआ। इस हार पर उद्धव ठाकरे तो चुप रहे, मगर उनकी पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। एमएलसी अंबादास दानवे ने बताया कि जीत की उम्मीद में कांग्रेस नेताओं ने प्रचार में कोताही की। वह मंत्री बनने के लिए सूट-बूट सिलाने में व्यस्त रहे। रणनीतिक तौर पर सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं कर कांग्रेस ने अघाड़ी का नुकसान किया। उन्होंने कहा कि अब निकाय चुनाव में पार्टी को एमवीए से अलग चुनाव लड़ना चाहिए। राज्य की सभी 288 सीटों पर खड़ा करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद संजय राउत ने सिरे से इस सलाह को खारिज कर दिया। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अभी जल्दीबाजी में नहीं हैं बल्कि वह निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। अघाड़ी से बाहर निकले तो नहीं मिलेगा दलित-मुस्लिम वोट उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी के साथ लोकसभा चुनाव भी लड़े थे और उन्हें 9 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी में बंटवारे के बाद यह जीत बड़ी थी। अघाड़ी के साथ होने के कारण उसे परंपरागत मराठा वोटरों के अलावा दलित और मुसलमानों का वोट मिला था। विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम वोटरों ने खुलकर शिवसेना को वोट किया। फरवरी में मुंबई समेत राज्य की 14 म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव होने हैं। अगले तीन महीनों में राजनीति हालात बदल सकते हैं और महायुति की लहर भी सुस्त पड़ सकती है। अगर यूबीटी अघाड़ी से अलग होगी तो पिछले दो चुनाव में वोट देने वाले समर्थकों के बीच गलत मैसेज जा सकता है। गठबंधन से बाहर निकलने का एक मायने और निकल सकता है कि उद्धव ठाकरे एक बार फिर हार्ड हिंदुत्व की राह पर चल पड़े हैं। सिर्फ उद्धव सेना नहीं हारी, अघाड़ी में सब हारे हैं एक नेता ने बताया कि अघाड़ी में जीता कोई नहीं है, मगर हारे सब हैं। विधानसभा चुनाव में न सिर्फ उद्धव सेना बल्कि पूरी महाविकास अघाड़ी को नुकसान हुआ है। शिवसेना यूबीटी सबसे ज्यादा 20 सीटें जीतने में सफल रही है, मगर कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीटों पर सिमटी है। निकाय चुनाव में जब सीटों के बंटवारे पर बात होगी, तब उद्धव सेना की पोजिशन मजबूत रहेगी। अघाड़ी से बाहर निकलते ही उद्धव की शिवसेना के वोट और कम हो जाएंगे। जहां तक बीएमसी चुनाव का सवाल है, उद्धव सेना का परफॉर्मेंस कांग्रेस और एनसीपी से बेहतर रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि उद्धव की नजर सिर्फ निकाय चुनाव पर नहीं है, बल्कि वह विधानसभा में विपक्ष की हैसियत को अपने पास रखना चाहते हैं। recent visitors 59

मोहन सरकार देगी मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नए साल में 3 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता बढ़ेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के करीब 7 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल (New Year 2025) पर मोहन सरकार (Mohan Government) बड़ा तोहफा देने जा रही है. दरअसल, प्रदेश में DA यानी महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. यहां कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3 से 4 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. इसे लेकर वित्त विभाग तैयारी कर रहा है. वहीं दिसंबर महीने में प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के अकाउंट में एरियर की पहली किस्त की राशि भी आएगी. 3 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है महंगाई भत्ता जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 में 3 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता बढ़ाया जा सकता है. इससे पहले राज्य सरकार ने जनवरी 2024 में यह 46 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था. हालांकि केंद्रीय कर्मचारियों (Central employees) को जुलाई 2024 से 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं  केंद्र सरकार जनवरी 2025 से महंगाई भत्ता में फिर वृद्धि करने जा रही है. ऐसे में मोहन सरकार भी अपने कर्मचारियों को नए साल में तोहफा देने की तैयारी में हैं. राज्य सरकार ने की देरी बताते चलें कि अब तक मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाती थी, महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि की जाती थी, लेकिन अब इसमें विलंब हो रहा है। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है। केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत किया जा चुका है, लेकिन राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ नहीं मिला है। केंद्र सरकार फिर बढ़ाएगी महंगाई भत्ता सूत्रों का कहना है कि मप्र सरकार नए साल में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है, क्योंकि केंद्र सरकार फिर इसमें वृद्धि कर सकती है। राज्य सरकार के बजट में भी 56 फीसदी महंगाई भत्ते का प्राविधान है। ऐसे में महंगाई भत्ता बढ़ाने में बजट की भी कोई समस्या नहीं आएगी। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त इससे पहले मप्र सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की थी, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया। ऐसे में जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है। पहली किस्त दिसंबर में दी जाएगी। दूसरी जनवरी, तीसरी फरवरी और चौथी किस्त की राशि खातों में मार्च 2025 में आएगी। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की थी, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया. ऐसे में जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है. पहली किस्त दिसंबर में मिलेगी, जबकि दूसरी किस्त जनवरी में दी जाएगी. वहीं तीसरी किस्त फरवरी और चौथी किस्त की राशि मार्च 2025 में कर्मचारियों के खातों में आएगी. बता दें कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है. दरअसल, केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत दिया जा रहा है, जबकि राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ अभी तक नहीं मिला है.   recent visitors 68

PF का पैसा अब ATM से आसानी से निकालें, ट्रांसफर करने का झंझट खत्म, ऑटोमेटिक हो जाएगा ये काम, जानें तरीका

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. प्राइवेट सेक्‍टर्स के कर्मचारियों को रिटायमेंट फाइनेंशियल सिक्‍योरिटी देने वाला ये सिस्‍टम जल्‍द ही एक बड़े बदलाव के साथ आ सकता है. यह एक ऐसा बदलाव हो सकता है, जो कर्मचारियों की बड़ी परेशानी को खत्‍म कर देगा. दरअसल, खबर आई है कि सरकार EPFO के तहत एक ऐसे सिस्‍टम पर काम कर रही है, जिससे कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के सब्‍सक्राइबर्स पैसों की जरूरत पड़ने पर ATM के जरिए डेबिट कार्ड का उपयोग करते हुए PF का पैसा निकाल सकते हैं. एटीएम से पैसा निकालने की लिमिट भी तय की जाएगी, ताकि आपकी रिटायरमेंट पर भी फाइनेंशियल सिक्‍योरिटी बनी रहे और इमरजेंसी पर लिक्विडिटी भी रहे. कहा जा रहा है कि यह पहल सरकार की महत्वाकांक्षी EPFO ​​3.0 योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सेवाओं का आधुनिकीकरण करना और ग्राहकों को उनकी बचत पर अधिक कंट्रोल देना है. ज्‍यादा कंट्रीब्‍यूशन पर भी हो रही चर्चा एटीएम निकासी के साथ-साथ, श्रम मंत्रालय कर्मचारी योगदान पर 12% की सीमा को हटाने पर विचार कर रहा है, जिससे कर्मचारी अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप अधिक सेविंग कर सकेंगे. रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि सब्सक्राइबर्स को जल्द ही किसी भी समय मौजूदा सीमा से ज़्यादा राशि जमा करने की सुविधा मिल सकती है. जबकि नियोक्ता का योगदान स्थिरता के लिए सैलरी बेस्‍ड रहेगा, कर्मचारियों को अपने अकाउंट्स में पैसे जमा करने की आज़ादी मिल सकती है, जिससे बिना किसी प्रतिबंध के उनकी सेविंग बढ़ सकती है. EPS को लेकर भी हो रहा सुधार इसके अतिरिक्त, सरकार कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) में सुधार पर काम कर रही है. वर्तमान में, नियोक्ता के योगदान का 8.33% EPS-95 को आवंटित किया जाता है. प्रस्तावित परिवर्तनों से कर्मचारियों को सीधे योजना में योगदान करने की अनुमति मिल सकती है, जिससे उन्हें अपने पेंशन लाभ को बढ़ाने में मदद मिलेगी. कब से हो सकता है बड़ा बदलाव? EPFO सिस्‍टम में सीमित पहुंच और लचीलेपन के बारे में लंबे समय से चली आ रही चिंताओं से निपटने के लिए, इन उपायों का उद्देश्य लॉन्‍ग टर्म फाइनेंशियल सिक्‍योरिटी के साथ तत्काल तरलता आवश्यकताओं को संतुलित करना है. EPFO 3.0 सुधारों की आधिकारिक घोषणा 2025 की शुरुआत में होने की उम्मीद है, जो भारत के कार्यबल द्वारा अपनी सेविंग के मैनेजमेंट और उपयोग के तरीके में एक परिवर्तनकारी बदलाव कर सकता है. गौरतलब है कि अभी ईपीएफओ प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट फंड जमा करता है. पीएफ अकाउंट के तहत कर्मचारी और नियोक्‍ता दोनों की तरफ से सैलरी का 12 फीसदी कंट्रीब्‍यूशन दिया जाता है. फिर सरकार की तरफ से इसपर सालाना ब्‍याज दिया जाता है.   recent visitors 113

चीन के चिप उद्योग पर ट्रंप का बड़ा वार, अब तकनीकी दौड़ में पिछड़ जाएगा चीन?

वाशिंगटन ग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 200 चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित व्यापार सूची में डालने जा रही है, जिसमें चिप निर्माण उपकरण और सामग्री सप्लाई करने वाली प्रमुख कंपनियां शामिल होंगी। यह कदम चीन के सेमीकंडक्टर उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और मुश्किल बना सकता है। इस लिस्ट में हुवावे टेक्नोलॉजीज और उससे जुड़े चिप निर्माण प्लांट्स को भी निशाना बनाया गया है। हुवावे 2019 से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। अमेरिका के ये नए प्रतिबंध चीन की चिप सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। इनसे वेंचर कैपिटल और विशेष गैस सप्लाई करने वाली चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इन प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन प्रतिबंधों को अनुचित बताते हुए कहा है कि ये कदम अमेरिका-चीन आर्थिक संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी विवाद और गहरा हो गया है। अमेरिका के इन प्रतिबंधों का उद्देश्य चीन को एडवांस तकनीकों तक पहुंच से रोकना है, जिनसे उसकी सैन्य ताकत बढ़ सकती है। पिछले प्रतिबंधों के तहत अमेरिका ने चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उद्योग को Nvidia और ASML जैसी कंपनियों की एडवांस चिप्स और उपकरणों से वंचित कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया कदम चीन के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बड़ा झटका होगा। यह तकनीकी विवाद अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को और तेज कर रहा है, जिसका असर वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग पर गहराई से पड़ सकता है। दुविधा में पड़ा मैक्सिको चीन की यह योजना मैक्सिको को एक दुविधा में डालती हैं, जिसे ट्रम्प की सोमवार को दी गई धमकी ने और भी बदतर बना दिया है. ट्रंप ने साफ कहा है कि वह मैक्सिको के सामानों पर 25% टैरिफ लगाएंगे. देश में पहले से ही एक प्रमुख कार-निर्माण केंद्र है और आमतौर पर विदेशी निवेश का स्वागत करता है क्योंकि इससे रोजगार मिलता है. BYD, जो दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं में से एक है, उसका प्‍लांट लगना सामान्यतः एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती. लेकिन, मैक्सिको के अधिकारियों को डर है कि BYD का प्लांट ट्रम्प और उनके व्यापारिक सलाहकारों को गलत संदेश भेजेगा. चीन तलाश रहा पिछला दरवाजा मैक्सिको के अधिकारियों को लगता है कि अगर चीनी कंपनी उनके यहां आई तो अमेरिकी प्रशासन को यही लगेगा कि मैक्सिको चीनी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश का पिछला दरवाजा बनना चाहता है. यह हालात इसलिए और भी गंभीर नजर आ रहे हैं, क्‍योंकि अवैध घुसपैठ और ड्रग्‍स को लेकर पहले से ही मैक्सिको अमेरिका के निशाने पर है. recent visitors 68