ऑस्ट्रेलिया के PM ने दिया सख्त जवाब, बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने के खिलाफ एलन मस्क

कैनबरा. ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया है। यह कदम सोशल मीडिया के युवाओं की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया। वहीं, दिग्गज टेक कारोबारी एलन मस्क ने इसकी आलोचना की है, जिस पर ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज भड़क गए है। उन्होंने मस्क पर पलटवार करते हुए कहा कि मस्क द्वारा इस निर्णय की आलोचना करना, एक्स के मालिक द्वारा अपने एजेंडे को बढ़ाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस निर्णय के बारे में किसी से भी बात करने को तैयार हैं। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध दरअसल,  लंबी और भावनात्मक बहस के बाद गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया ने बाद बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध को मंजूरी दे दी थी। ऑस्ट्रेलिया के इस निर्णय ने दुनिया भर के न्यायालयों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित किया। हालांकि यह निर्णय उसके प्रमुख सहयोगी अमेरिका के साथ उसके रिश्तों को भी खराब कर सकता है। अमेरिका में इसका विरोध तब शुरू हुआ जब दिग्गज टेक कारोबारी और अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के कैबिनेट में शामिल एलन मस्क ने एक पोस्ट में इसकी आलोचना की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह निर्णय सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों की इंटरनेट तक पहुंच को नियंत्रित करने का एक रास्ता प्रतीत होता है। हम किसी से भी बात करेंगे- अल्बनीज इस नियम को लागू करने को लेकर रविवार को जब अल्बनीज से पूछा गया कि क्या वह सोशल मीडिया प्रतिबंध के बारे में मस्क से बात करने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने कहा कि हम किसी से भी बात करेंगे। उन्होंने कहा कि एलन मस्क एक्स के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि हम इसे पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। इतने करोड़ डॉलर लगेगा जुर्माना यह कानून इंस्टाग्राम और फेसबुक के मालिक मेटा से लेकर टिकटॉक तक की दिग्गज टेक कंपनियों को नाबालिगों को लॉग इन करने से रोकने के लिए बाध्य करता है। इसके तहत टिकटॉक, फेसबुक, स्नैपचैट, रेडिट, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर छोटे बच्चों के खातों पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही अगर ये मंच ऐसा करने में नाकाम रहे तो पांच करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (3.3 करोड़ डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यह कानून जनवरी में अगले साल प्रभावी हो जाएगा। अल्बनीज को मिला देश की  77 फीसदी आबादी का साथ ऑस्ट्रेलिया के सरकारी यू गवर्नमेंट सर्वेक्षण के मुताबिक, 77 फीसदी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के कदम का समर्थन किया। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय में राजनीति और सार्वजनिक नीति के प्रोफेसर रोड्रिगो प्रेनो के मुताबिक, देश में  2025 की शुरुआत में संघीय चुनाव होने हैं। ऐसे में पीएम एंथनी अल्बनीज सहित संघीय सरकार ने माना कि यह एक ऐसी परेशानी है जिसका पूरे देश के लिए समाधान होना चाहिए। recent visitors 78

पीएम मोदी समेत तमाम नेताओं ने दी शुभकामनाएं, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का मन रहा स्थापना दिवस

नई दिल्ली। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अपना 60वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर बीएसएफ कर्मियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सीमा सुरक्षा बल को उसके स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। बीएसएफ साहस, समर्पण और असाधारण सेवा का प्रतीक और रक्षा की एक महत्वपूर्ण पंक्ति के रूप में खड़ा है। उनकी सतर्कता और साहस हमारे राष्ट्र की सुरक्षा में योगदान करते हैं।" केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जवानों को बधाई देते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा, "बीएसएफ के जवानों और उनके परिवारों को स्थापना दिवस की बधाई। बीएसएफ के सैनिकों ने भारत के सम्मान और महत्वाकांक्षाओं की पूरी मजबूती के साथ रक्षा की है और इसके लिए जान की बाजी लगाने से कभी पीछे नहीं हटे। उनकी वीरता और बलिदान प्रेरणा का अटूट स्रोत हैं, जिसने देशभक्तों की पीढ़ियों को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया है कि हमारा राष्ट्र हमेशा आगे बढ़ता रहे। सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को मेरी श्रद्धांजलि।" बीएसएफ ने एक्स पोस्ट पर लिखा, "60वें सीमा सुरक्षा बल दिवस के अवसर पर हम सीमा प्रहरी राष्ट्र रक्षा और राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दुहराते हैं। अपने ध्येय वाक्य जीवनपर्यन्तकर्त्तव्य को आत्मसात करते हुए हर सीमा प्रहरी अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्ण समर्पण से कटिबद्ध है।" बीएसएफ स्थापना दिवस 1 दिसंबर को मनाया जाता है क्योंकि शांति काल के दौरान भारत की भूमि सीमा की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के लिए जिम्मेदार सैन्य इकाई की स्थापना 1965 में इसी दिन की गई थी। भारत की विस्तृत सीमाएं 15,000 किलोमीटर से अधिक तक फैली हुई हैं। बीएसएफ इन सीमाओं की सुरक्षा की बहुत बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाती है। recent visitors 71

इंसान के मरने के दिन की सटीक भविष्यवाणी करती है ‘मृत्यु घड़ी’, एआई तकनीक का कमाल

वॉशिंगटन. हमेशा से ही इंसान को इस बात में रुचि रही है कि वह कितने दिन जिएगा या उसकी जिंदगी कितनी लंबी है। अब दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) का है। ऐसे में एआई तकनीक की मदद से अब इसका भी अनुमान लगाया जा सकता है कि आपकी मृत्यु का दिन कौन सा हो सकता है। हाल ही में एआई की मदद से एक मृत्यु घड़ी बनाई गई है, जो कि एक एप है। इसकी मदद से इंसान की मृत्यु के दिन का करीब-करीब सटीक पता लगाया जा सकता है। एक मार्केट खुफिया फर्म के मुताबिक इस मृत्यु घड़ी एप के नतीजे इतने सटीक हैं कि जुलाई में इसके लॉन्च होने के बाद से ही अब तक इसे 1,25,000 लोगों द्वारा इसे डाउनलोड कर लिया गया है। इस एप को पांच करोड़ प्रतिभागियों और 1200 से ज्यादा जीवन प्रत्याशा अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। यह एप किसी व्यक्ति के आहार, व्यायाम, तनाव के स्तर, नींद के बारे में जानकारी का इस्तेमाल करके उस व्यक्ति की मौत के संभावित दिन की भविष्यवाणी करती है। इस एप के डेवलेपर ब्रेंट फ्रैंसन कना कहना है कि इसके परिणाम बहुत मानक हैं। यह डेथ क्लॉक (मृत्यु घड़ी) स्वस्थ जीवन शैली वाले लोगों के बीच खासी लोकप्रिय हो रही है और फिटनेस और स्वास्थ्य श्रेणी में यह एप शीर्ष पर है।  उल्लेखनीय है कि लोगों की जीवन प्रत्याशा, सरकारों, बीमा कंपनियों के लिए आर्थिक और वित्तीय गणना के लिहाज से हमेशा से अहम रही है। इसी के आधार पर सरकारें और बीमा कंपनियां जीवन बीमा और पेंशन फंड में पॉलिसी कवरेज की गणना करती हैं। आर्थिक स्थिति और जीवन प्रत्याशा में है सीधा संबंध यह डेथ क्लॉक एप यूजर्स को ऐसे सुझाव भी देती है, जिससे वह अपनी जीवन शैली में सुधार कर अपनी मृत्यु दर को कम कर सकते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंसान की जीवन प्रत्याशा और उसकी आर्थिक स्थिति के बीच सीधा अंतर पाया गया है। अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित शोध में पाया गया है कि सबसे अमीर और सबसे गरीब लोगों के जीवन वर्षों में पुरुषों में 15 साल और महिलाओं में 10 साल का अंतर पाया गया है। मतलब अमीर पुरुष गरीब पुरुषों के मुकाबले औसतन 15 साल ज्यादा जीते हैं। recent visitors 61

पीएम मोदी समेत तमाम नेता होंगे शामिल, महाराष्ट्र में महायुति सरकार का 5 दिसंबर को शपथ समारोह

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर जारी सस्पेंस के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने ऐलान किया है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर को होगा। चंद्रशेखर बावनकुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया, "महाराष्ट्र में महायुति सरकार का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार, 5 दिसंबर, 2024 को शाम 5 बजे मुंबई के आजाद मैदान में होगा। प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।" यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महायुति के सहयोगियों के साथ बैठक रद्द करके के बाद अपने गांव में मौजूद हैं। राज्य के अगले सीएम के चयन को लेकर एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी नेता अजित पवार ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की थी लेकिन तस्वीर अभी तक साफ नहीं हो पाई है। इस शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के शीर्ष नेता और भाजपा शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। इस बीच प्रशासन ने नई सरकार के गठन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 16 से 24 दिसंबर तक होने की संभावना है। बीते दिनों महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। मैंने उनसे कहा कि सरकार बनाने में हमारी तरफ से कोई अड़चन नहीं है। आप निर्णय लीजिए, भाजपा जो निर्णय लेगी, उस निर्णय की तामिल हो जाएगी। मैं आज आप सबको कहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पद के बारे में जो निर्णय लेंगे और भाजपा का जो उम्मीदवार होगा, उसको शिवसेना का पूरा समर्थन होगा।" महाराष्ट्र में एनडीए की बड़ी जीत के बाद नागपुर में देवेंद्र फडणवीस को अगला सीएम बनाए जाने के पोस्टर लगे थे। वहीं इससे पहले बारामती में कुछ पोस्टर्स में प्रदेश के अगले सीएम के तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजित पवार को दिखाया गया था। वहीं शिवसेना के नेता और कार्यकर्ता एकनाथ शिंदे को दोबारा मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में महायुति में सीएम पद को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 'महायुति' गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला है। महायुति में शामिल भाजपा ने 132, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 57 और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 41 सीटों पर जीत हासिल की है। recent visitors 56

एक और भारतीय की अहम नियुक्ति, अमेरिकी ट्रंप सरकार में कश पटेल होंगे एफबीआई के नए निदेशक

वॉशिंगटन. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के कश्यप उर्फ कश पटेल को संघीय जांच एजेंसी एफबीआई के नए निदेशक के रूप में नामित किया है। कश पटेल को डोनाल्ड ट्रंप का काफी करीबी माना जाता है और ट्रंप की जीत के बाद ही इस बात की चर्चा थी कि ट्रंप, कश पटेल को अहम जिम्मेदारी दे सकते हैं। कश पटेल अमेरिकी सरकार के भीतर डीप स्टेट को खत्म करने के मुखर समर्थक रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'कश एक शानदार वकील, जांचकर्ता और अमेरिका फर्स्ट योद्धा हैं, जिन्होंने अपना करियर भ्रष्टाचार को उजागर करने, न्याय की रक्षा करने और अमेरिकी लोगों की रक्षा करने में बिताया है।' डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान कश पटेल ने 'रूस होक्स' मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई थी। डोनाल्ड ट्रंप एफबीआई के मौजूदा निदेशक क्रिस्टोफर रे के कामकाज से खुश नहीं हैं। ट्रंप ने ही रे को साल 2017 में एफबीआई का निदेशक नियुक्त किया था, लेकिन गोपनीय दस्तावेजों से जुड़ी जांच में रे ने जिस तरह से ट्रंप के खिलाफ कार्रवाई की, उससे ट्रंप खासे नाराज हैं। एफबीआई की मौजूदा व्यवस्था के माने जाते हैं कड़े आलोचक कश पटेल जिस एफबीआई के निदेशक नामित किए गए है, उसी एफबीआई के वे मुखर आलोचक हैं। एक टीवी शो के दौरान कश पटेल (44 वर्षीय) ने एफबीआई में आमूलचूल परिवर्तन करने की बात कही है। जिसमें एफबीआई के खुफिया जानकारी जुटाने से रोकने और एफबीआई मुख्यालय का फिर से निर्माण कश पटेल की प्राथमिकता में है। कश पटेल का कहना है कि जैसे ही वह अपना पद संभालेंगे तो अगले दिन से ही वह एफबीआई मुख्यालय में काम करने वाले सात हजार कर्मचारियों को फील्ड में भेज देंगे क्योंकि उनका काम अपराधियों को पकड़ना है। कश पटेल ने ये भी कहा है कि वह एफबीआई का मुख्यालय वॉशिंगटन डीसी से बाहर बनाएंगे ताकि एफबीआई को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखा जा सके। कश पटेल अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी के अधीन काम करेंगे। कौन हैं कश पटेल कश पटेल का जन्म न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में हुआ था, उनके माता-पिता गुजराती मूल के थे, जो पूर्वी अफ्रीका से अमेरिका में जाकर बसे थे। कश पटेल ने कानून की डिग्री हासिल की है और वे फ्लोरिडा राज्य के सार्वजनिक अभियोजक के रूप में काम कर चुके हैं। कश पटेल बाद में न्याय विभाग से जुड़ गए और वहां एक अभियोजक के रूप में काम किया। न्याय विभाग में कश पटेल हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मामले देखते थे। कश पटेल के करियर ने यूटर्न उस वक्त लिया, जब वे रक्षा विभाग में बतौर वकील शामिल हुए। यहां से वे अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य डेविन नून्स के संपर्क में आए, जो उस समय संसद की खुफिया समिति के अध्यक्ष थे। नून्स ने ही कश पटेल को आतंकवाद विरोधी मामलों में बतौर वरिष्ठ वकील नियुक्त किया। ट्रंप सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान रूस मामले में एफबीआई जांच की जांच करने वाली रिपब्लिकन पार्टी की जांच का कश पटेल भी हिस्सा थे। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रिपब्लिकन पार्टी का घोषणा पत्र तैयार करने में भी कश पटेल की अहम भूमिका थी। बेटी इवांका के ससुर को डोनाल्ड ट्रंप ने दी अहम जिम्मेदारी डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बेटी इवांका ट्रंप के ससुर चार्ल्स कुशनर को अहम जिम्मेदारी देते हुए उन्हें फ्रांस में अमेरिका का नया राजदूत नियुक्त किया है। ट्रंप ने शनिवार को इसका एलान किया और चार्ल्स कुशनर को एक अच्छा समाजसेवी, व्यापार नेता बताया। गौरतलब है कि चार्ल्स कुशनर को साल 2005 में टैक्स गड़बड़ी के 16 मामलों में दोषी पाया गया था और एक मामले में उन्हें दो साल जेल की सजा भी हुई थी। हालांकि साल 2020 में ट्रंप ने चार्ल्स कुशनर की सजा माफ कर दी थी। recent visitors 99

नागालैंड आज मना रहा अपना स्थापना दिवस, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत तमाम नेताओं ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत तमाम नेताओं ने नागालैंड के लोगों को उनके राज्य दिवस पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "राज्य स्थापना दिवस पर नागालैंड के लोगों को शुभकामनाएं। वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध विरासत से संपन्न नागालैंड बहादुरी की भूमि भी है। विभिन्न विकास मापदंडों में नागालैंड की प्रगति सराहनीय है। इस खूबसूरत राज्य के लोगों को शांतिपूर्ण, समृद्ध और प्रगतिशील भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएं।" केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यवासियों को बधाई देते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा, "नागालैंड दिवस पर हमारी नागा बहनों और भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं। गौरवशाली संस्कृति और विरासत से समृद्ध, नागालैंड भारत की समृद्ध सांस्कृतिक छवि पर हमारी विविधता का एक अनुपम उदाहरण है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व में प्रदेश समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़े।" नागालैंड के सीएम नेफ्यू रियो ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा, "नागालैंड के लोगों को नागालैंड राज्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हम गर्व और कृतज्ञता के साथ राज्य के 62 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। यह एक प्रगति की यात्रा रही है। आइए हम अपनी विरासत का सम्मान करें और एक साथ मिलकर उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास करें।" नागालैंड के राज्यपाल ला गणेशन ने राज्य के 62वें राज्य दिवस के अवसर पर राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी तथा इसकी ऐतिहासिक यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं पर प्रकाश डाला है। राज्य दिवस की पूर्व संध्या पर एक वीडियो संदेश में राज्यपाल गणेशन ने कहा, "प्रदेशवासियों की अटूट भावना और मजबूत संकल्प हमारे लोगों की ताकत का प्रमाण है, जिन्होंने भारत के विशाल क्षेत्र में नागालैंड के लिए एक विशिष्ट पहचान बनाने के लिए अथक परिश्रम किया है। हमारे जीवंत त्यौहार और समृद्ध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां हमारी एकता और विविधता के प्रमाण हैं। यह एक अनमोल उपहार है जिसे अत्यंत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ संरक्षित किया जाना चाहिए।" वहीं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पर लिखा, "नागालैंड राज्य की स्थापना दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए यह प्रदेश प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे, यही कामना है।" recent visitors 102

पोप ने भारतीय धर्मगुरु को किया याद, ‘दुनिया में बढ़ रही नफरत, आज श्रीनारायण गुरु की शिक्षाओं की जरूरत’

वेटिकन. पोप फ्रांसिस ने कहा है कि आज जब हर जगह नफरत बढ़ रही है तो ऐसे समय में श्री नारायण गुरु का सार्वभौमिक मानव एकता का संदेश प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि समाज सुधारक का संदेश 'आज की हमारी दुनिया के लिए प्रासंगिक है, जहां हमें लोगों और देशों के बीच असहिष्णुता तथा नफरत बढ़ने के उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।' एर्नाकुलम जिले के अलुवा में श्री नारायण गुरु के सर्व-धर्म सम्मेलन के शताब्दी समारोह के अवसर पर शनिवार को वेटिकन में धर्मगुरु जुटे। इन धर्मगुरुओं और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पोप फ्रांसिस ने यह बात कही। पोप ने कहा कि 'आज दुनिया में जो अशांति का माहौल है और इसके लिए लोगों द्वारा अपने धर्मों की शिक्षाओं को न अपनाना एक बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि 'श्री नारायण गुरु ने अपने संदेश के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक जागृति को बढ़ावा देने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। गुरु ने अपने संदेश में कहा था कि सभी मनुष्य, चाहे उनकी जाति, धर्म और सांस्कृतिक परंपराएं कोई भी हों, एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं।' भेदभाव के खिलाफ थे श्री नारायण गुरु पोप ने कहा, 'श्री नारायण गुरु ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी स्तर पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। दुख की बात है कि कई समुदायों और लोगों को नस्ल, रंग, भाषा और धर्म के आधार पर रोजाना भेदभाव तथा तिरस्कार झेलना पड़ रहा है और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ऐसा उन लोगों और समुदाय के साथ हो रहा है जो गरीब और कमजोर तबके के हैं।'पोप फ्रांसिस ने वैश्विक असहिष्णुता से निपटने के लिए श्री नारायण गुरु की शिक्षाओं को अपनाने की अपील की। कौन थे श्री नारायण गुरु श्री नारायण गुरु (1856-1928), केरल के एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपनी शिक्षाओं में सामाजिक समानता की बात की। उन्होंने जातिगत भेदभाव की निंदा की और एकता और आध्यात्मिक ज्ञान पाने पर जोर दिया। एक पिछड़े हिंदू परिवार में जन्मे श्री नारायण गुरु ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने, करुणा, अहिंसा और धार्मिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर जोर दिया और इन्हीं कामों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। recent visitors 64