Saturday, July 4, 2026 4:12 am

साय सरकार की बड़ी पहल, चार संभागों में 83 नए चिकित्सा अधिकारियों की संविदा नियुक्ति

रायपुर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रदायगी के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संविदा पदों पर चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति प्रदान करते हुए पदस्थापना आदेश जारी किए गए हैं. प्रदेश के रायपुर संभाग के शासकीय अस्पतालों में 31 चिकित्सा अधिकारियों, बिलासपुर संभाग में 22 चिकित्सा अधिकारियों, सरगुजा संभाग में 03 चिकित्सा अधिकारियों के साथ दुर्ग संभाग में 27 चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा आज इन नवीन संविदा चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं. इन डॉक्टरों को संबंधित जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला चिकित्सालयों में पदस्थ किया गया है. नवीन संविदा चिकित्सा अधिकारी की पदस्थापना से त्वरित इलाज में तेजी आएगी और चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा. चिकित्सकों की सूची – रायपुर संभाग के लिए चिकित्सा अधिकारी (संविदा) के जारी आदेश में डॉ शुभम विश्वकर्मा, डॉ प्रिदम्बिनी नायक, डॉ तोयेष चंद्राकर, डॉ स्मृति इंगोले, डॉ साहिल कुमार, डॉ मिलनदीप कौर, डॉ देवांग शाह, डॉ नीलम जायसवाल, डॉ चंद्र शेखर जायसवाल, डॉ वाय. मुनमुन, डॉ यशवंत सोनी, डॉ दीक्षा थवाईत, डॉ ऋतम्भरा शर्मा, डॉ वैशाली चौरसिया, डॉ यूसुफ उस्मानी, डॉ एम शिवानी राव, डॉ निशा पैकरा, डॉ शिखा शुक्ला, डॉ सोनाली अवधिया, डॉ सुब्रनिल घोष, डॉ सचिन अग्रवाल, डॉ अम्मूनाथ अनमोल पांडेय, डॉ प्रशांत कुमार पांडेय, डॉ अदिबा खान, डॉ श्रेया मुखर्जी, डॉ एशिनी अग्रवाल, डॉ प्रीति खालखो, डॉ विकास सिंह, डॉ विपिन कुमार सिंह, डॉ संग्राम येरेवार, डॉ मयंक शर्मा. बिलासपुर संभाग के लिए डॉ सावी शुक्ला, डॉ सोनाली प्रकाश, डॉ धनंजय कुमार निर्मलकर, डॉ विवेक पटेल, डॉ कृष्ण कुमार कुम्भकार, डॉ अदिति सिंह, डॉ नीलमणी सिंह, डॉ जोन कुजूर, डॉ पूजा सिंह, डॉ निशि निर्मलकर, डॉ प्रफुल्लता कंवर, डॉ अमीशा टेकाम, डॉ पूर्णिमा कंवर, डॉ दिव्या अंकित रोहलेदार, डॉ अनुभूति नंद, डॉ अदिति मारिया लाकरा, डॉ रितीशा वेरोनिका थॉमस,डॉ प्रियंका सिंह पैकरा, डॉ संदीप पटेल, डॉ ज्योत्सना गुप्ता, डॉ स्मृति रानी लकड़ा, डॉ त्रिलोक जागीतानाथ हिमधर. दुर्ग संभाग के लिए डॉ कृति ठाकुर, डॉ दामिनी नाग, डॉ शशांक बारले, डॉ प्रिया चन्दानन, डॉ श्रीयम शुक्ला, डॉ सुदीप्ता पाल, डॉ संध्या कंवर, डॉ सौरीन चटर्जी, डॉ सुधांशु शेखर सेनापति, डॉ नवेद मालिक, डॉ सुलेखा विंध्यराज, डॉ मोनिका मरकाम, डॉ हितेश प्रसाद पात्रे, डॉ अंजलि आर जोसेफ, डॉ प्रणय दत्ता, डॉ मोहम्मद असहर खान, डॉ पलक मेश्राम, डॉ रुपाली सिंह, डॉ राजेश्वर प्रसाद हेटली, डॉ अवधेश सिदार, डॉ प्रतीक साहू, डॉ प्रियंका गेन्ड्रे, डॉ मोहम्मद अरशद अंसार, डॉ सैयद ताजिश अली, डॉ अकांक्षा श्रीवास्तव, डॉ योगिता पांडरे, डॉ भाविका टंडन के साथ सरगुजा संभाग के लिए डॉ भोजमनियां, डॉ प्रेमा कुजूर और डॉ अभिषेक नामदेव को विभिन्न जिलों में पदस्थ किया गया है. recent visitors 61

महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री ने कहा-महायुति में आपसी समझ बेहतर है, आज मुख्यमंत्री पद को लेकर भी फैसला हो जाएगा

मुंबई महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पैतृक गांव पहुंचने के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चा पर शिंदे ने कहा कि मैं पहले ही अपना बिना शर्त समर्थन महायुति को दे चुका हूं, महायुति में आपसी समझ बेहतर है, आज मुख्यमंत्री पद को लेकर भी फैसला हो जाएगा। मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंश के बीच अपने पैतृक गांव पहुंचे शिंदे ने कहा कि मैं अब स्वस्थ हूं। चुनाव के थकावट भरे कार्यक्रम के बाद मैं यहां पर आराम करने के लिए आया था। सीएम के रूप में अपने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान मैंने कोई छुट्टी नहीं ली। लोग अभी भी मुझसे मिलने आ रहे हैं। इसी थकावट के कारण मैं बीमार हो गया था। अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं। शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार लोगों की बात सुनेगी। मैंने पहले ही संगठन नेतृत्व को अपना बिना शर्त समर्थन दे दिया है। उनका जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के बारे में बात करते हुए शिंदे ने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 2.5 सालों में जो काम किया है उसे इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार के बेहतर प्रदर्शन के कारण ही लोगों ने हमें ऐतिहासिक जनादेश दिया है। जनता पर हमारा आशीर्वाद ऐसा रहा कि विपक्ष के पास विपक्ष का नेता चुनने की भी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि महायुति के तीनों सहयोगियों की आपसी समझ बहुत अच्छी है, जहां तक मुख्यमंत्री के पद का सवाल है तो उसका फैसला कल हो जाएगा। इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जनता ने महायुति को ऐतिहासिक जनादेश दिया है। चुनावी नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार सस्पेंस बना हुआ है। महायुति में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तारीख का ऐलान तो कर दिया है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा नहीं की है। भाजपा के सूत्रों की मानें तो देवेन्द्र फडणवीस का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे है। फडणवीस पहले भी एक पंचवर्षीय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि निवर्तमान एकनाथ शिंदे सरकार में वह उपमुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। recent visitors 69

ब्रिक्स देशों को नई मुद्रा विकसित करने या ‘शक्तिशाली डॉलर’ की जगह पर कोई अन्य करेंसी अपनाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी: ट्रंप

न्यूयॉर्क अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को नई मुद्रा विकसित करने या 'शक्तिशाली डॉलर' की जगह पर कोई अन्य करेंसी अपनाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो ब्रिक्स देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा और उन्हें अमेरिकी बाजारों से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित किया जाएगा। ब्रिक्स में दुनिया की दो सबसे बड़ी उभरती शक्तियां चीन और भारत भी शामिल हैं। ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस बात की कोई संभावना नहीं है कि ब्रिक्स इंटरनेशनल ट्रेड में अमेरिकी डॉलर की जगह ले लेगा, और जो भी देश ऐसा करने की कोशिश करेगा, उसे अमेरिका को अलविदा कह देना चाहिए।" भारत और ब्रिक्स के अन्य आठ सदस्यों के लिए अमेरिकी बाजार को बंद करने की धमकी देते हुए उन्होंने कहा, "हमें इन देशों से यह प्रतिबद्धता चाहिए कि वे न तो नई ब्रिक्स मुद्रा बनाएंगे, न ही शक्तिशाली अमेरिकी डॉलर की जगह किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे, अन्यथा उन्हें 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा और उन्हें अद्भुत अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपने उत्पाद बेचने को विदा कहना होगा।" चीन, मैक्सिको और कनाडा से आयात पर उच्च टैरिफ की धमकी देने के बाद ट्रंप ने अब ब्रिक्स को यह चेतावनी दी है। विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर पहले ही ब्रिक्स देशों की साझा मुद्रा के विचार को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल जोहान्सबर्ग में समूह के शिखर सम्मेलन से पहले कहा था, "ब्रिक्स देशों की मुद्रा जैसा कोई विचार नहीं है।" भारत ब्रिक्स देशों की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालांकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फिर भी जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में एक आम मुद्रा का प्रस्ताव रखा, लेकिन इस पर कोई प्रगति नहीं हुई। अपने अभियान के दौरान, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दुनिया की प्रमुख व्यापारिक मुद्रा के रूप में डॉलर के भविष्य को ख़तरा है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन इसे अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, "यह सोच कि ब्रिक्स देश डॉलर से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं और हम खड़े होकर देखते रहें, खत्म हो चुकी है।" ब्रिक्स देशों को दी गई ट्रंप की चेतावनी एक तरह से टेस्टिंग है। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन से देश सार्वजनिक रूप से भारत जैसा रुख अपनाएंगे। यह बीजिंग के लिए एक पूर्व चेतावनी है। ब्रिक्स, अपने पहले सदस्यों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना एक संक्षिप्त नाम है। इस साल इसका विस्तार करके इसमें ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को शामिल किया गया। कई अन्य देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने के लिए आवेदन किया है। recent visitors 119

रिपोर्ट में कोयंबटूर और गुड़गांव भारत के उभरते नौकरी बाज़ार की वादा की गई भूमि के रूप में उभर रहे

नई दिल्ली भारत में अब मेट्रो शहरों तक सीमित करियर के अवसर जल्द ही अतीत की बात हो सकते हैं। एक नई आर्थिक लहर के तहत जयपुर और कोयंबटूर जैसे टियर-2 शहर अब संपन्न व्यापारिक केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। जैसा कि टीमलीज़ रिपोर्ट से पता चलता है, कोयंबटूर और गुड़गांव भारत के उभरते नौकरी बाज़ार की “वादा की गई भूमि” के रूप में उभर रहे हैं। टीमलीज़ एक प्रमुख भारतीय भर्ती और मानव संसाधन कंपनी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार ये शहर अपनी प्रचुर क्षमता, कम परिचालन लागत और ताज़ी प्रतिभा पूल की वजह से कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। इन शहरों में बेहतर बुनियादी ढांचा और विस्तारित कार्यबल के कारण, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, और कृषि जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। क्यों बढ़ रहे हैं टियर-2 शहर? जयपुर, कोयंबटूर और गुड़गांव जैसे शहर अब रोजगार सृजन के नए केंद्र बनते जा रहे हैं जो छात्रों और पेशेवरों के लिए मेट्रो शहरों की भीड़-भाड़ और समस्याओं का एक अच्छा विकल्प बन रहे हैं। टीमलीज़ की रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे पारंपरिक मेट्रो शहरों ने आज भी अपनी प्रमुखता नहीं खोई है। बेंगलुरु 53.1% के साथ सबसे आगे है इसके बाद मुंबई (50.2%) और हैदराबाद (48.2%) हैं। हालांकि छोटे शहरों में भी तेजी से रोजगार की संभावना बढ़ रही है। कोयंबटूर में 24.6%, गुड़गांव में 22.6% और जयपुर में 20.3% नौकरी वृद्धि देखी जा रही है। लखनऊ और नागपुर जैसे शहरों में भी रोजगार वृद्धि 18.5% और 16.7% है। कोयंबटूर और गुड़गांव: क्यों बन रहे हैं रोजगार केंद्र? कोयंबटूर और गुड़गांव जैसे शहर अब नए रोजगार केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। ये शहर अपनी कम परिचालन लागत, कुशल श्रमिकों और सहायक बुनियादी ढांचे के कारण कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। मेट्रो शहरों में बढ़ती लागत और संतृप्तता के कारण अब व्यवसाय इन शहरों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। इन शहरों में कई शैक्षणिक संस्थान और प्रशिक्षण केंद्र हैं जो कंपनियों को एक तैयार और योग्य कार्यबल प्रदान कर रहे हैं। इसके कारण कोयंबटूर और गुड़गांव में खासतौर पर आईटी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार का विस्तार हो रहा है। कम लागत पर बढ़ते अवसर कोयंबटूर और गुड़गांव में कम रियल एस्टेट लागत, सस्ती उपयोगिताएँ और कम श्रम खर्च की वजह से कंपनियों का ध्यान इन शहरों की ओर बढ़ा है। इससे उन व्यवसायों को भी फायदा हो रहा है जो ओवरहेड खर्चों को कम करने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में थे। आईटी और गैर-आईटी उद्योगों के लिए आदर्श इन टियर-2 शहरों की अपील केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कोयंबटूर और गुड़गांव जैसे शहरों में आईटी के साथ-साथ विनिर्माण, वित्त, और अन्य उद्योगों के लिए भी आदर्श अवसर हैं। कम लागत और कुशल श्रम की उपलब्धता इन शहरों को विविध उद्योगों के लिए आकर्षक बना रही है। मेट्रो शहरों की चुनौतियां हालांकि बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों की प्रमुखता कायम है लेकिन इन्हें भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण की वजह से बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा इन शहरों में कुछ विशेष क्षेत्रों में कौशल अंतराल भी देखने को मिल रहा है जो कंपनियों के लिए चुनौती बन रही है। भारत में रोजगार केंद्र अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं हैं। छोटे और उभरते शहर जैसे कोयंबटूर, गुड़गांव, जयपुर, लखनऊ और नागपुर तेजी से रोजगार सृजन के नए केंद्र बन रहे हैं। ये शहर कंपनियों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा, कम लागत और कुशल श्रमिकों के साथ आदर्श विकल्प बन रहे हैं। यही कारण है कि इन शहरों में रोजगार की वृद्धि हो रही है जो भविष्य में देश के समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। recent visitors 104

नारायण सिंह कुशवाह ने कहा- कल अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर पूरे प्रदेश हो आयोजन

भोपाल सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर पूरे प्रदेश के दिव्यांगों की क्षमताओं और उपलब्धियां का उत्सव मनाते हुए एक समावेशी समाज के निर्माण में प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए कार्यक्रम किये जाये। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि सुगम भारत अभियान के अंतर्गत हम सबको मिलकर सुगम वातावरण निर्माण और आईटीसी पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने का कार्य करना चाहिए इससे दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने का मार्ग प्रशस्त होगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों एवं सार्वजनिक स्थान पर दिव्यांगजनों के कार्यक्रम आयोजित किये जाएं। ऐसे आयोजनों से न केवल समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा बल्कि जनता को सुगमता के महत्व के प्रति हम जागरूक भी कर सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस हमारी समाज के इस वर्ग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने वाला दिवस है। दिव्यांगजन, समाज की मुख्य धारा से जोड़कर आगे लाना और उनके लिए समान अवसर उपलब्ध कराना हम सब का दायित्व है।   recent visitors 74

जल्द जारी होगी लाड़ली बहनों को अगली किस्त, खाते में आएंगे 1250 रु

भोपाल. मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों के लिए खुशखबरी है। दिसंबर का महीना लग गया है, जल्द ही योजना की अगली किस्त आने वाली है। संभावना जताई जा रही है कि इस बार भी बहनों के खाते में समय से पहले 5 से 10 दिसंबर के बीच 19वीं किस्त के 1250 रुपए भेजे जा सकते है, हालांकि फाइनल डेट को लेकर अभी अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। दरअसल, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही बड़ी योजनाओं में से एक है। इसे पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू किया गया था, पहले 1000 रुपए दिए जाते है लेकिन अब 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। जून 2023 से नवंबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 18 किश्तों का अंतरण किया गया है।अब योजना की 19वीं किस्त का इंतजार है।इधर, सीएम के राशि बढ़ाने के संकेत के बाद संभावना है कि नए साल 2025 में राशि में इजाफा किया जा सकता है। लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी। इसमें 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी। इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था। अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। लाड़ली बहनों को जून 2023 से अक्टूबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 17 किश्तों का अंतरण किया गया है। इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। किसे मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है। महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए। अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो। यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी। विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। कैसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं। वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर क्लिक करें। दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें। कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें। ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी। recent visitors 49

तीन दिसंबर को पूरे होने जा रहे भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष, आज भी दफन है जहरीला कचरा

भोपाल. भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष इसी तीन दिसंबर को पूरे होने जा रहे हैं, पर गैस पीड़ितों को लेकर सरकारी वादों और जमीनी स्थिति में बहुत अंतर है। इतने वर्ष बाद भी जहरीला कचरा यूनियन कार्बाइड परिसर में दफन है। इस कारण भूजल प्रदूषित होने की बात सत्यापित हो चुकी है। वर्ष 2018 में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टाक्सिकोलाजी रिसर्च लखनऊ की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आ चुका है। भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास की 42 बस्तियों के भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन पाया गया था, जो कैंसर और किडनी की बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके बाद इस क्षेत्र में नर्मदा जल की आपूर्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। आशंका है इन कालोनियों के अतिरिक्त प्रदूषित भूजल आगे पहुंच गया हो पर वर्ष 2018 के बाद जांच ही नहीं कराई गई। गैस पीड़ित संगठन के कार्यकर्ताओं का दावा है कि रैपिड किट से उन्होंने इनके अतिरिक्त कारखाने की साढ़े तीन किमी की परिधि में आने वाली 29 अन्य कालोनियों में भी जांच की तो आर्गनो क्लोरीन मिला है, पर कितना मात्रा में है इसकी जांच बड़े स्तर पर सरकार द्वारा कराने की आवश्यकता है। गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबाया गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि त्रासदी के पहले परिसर में ही गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबा दिया जाता था। इसके अतिरिक्त परिसर में बनाए गए तीन छोटे तालाबों में भी पाइप लाइन के माध्यम जहरीला अपशिष्ट पहुंचाया जाता था। इस कचरे की कोई बात ही नहीं हो रही। कारखाने में रखे कचरे को नष्ट करने के लिए 126 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे पीथमपुर में जलाया जाना है। पुनर्वास के लिए मिली राशि में 14 वर्ष बाद खर्च नहीं हो पाए 129 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गैस पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2010 में 272 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें 75 प्रतिशत राशि केंद्र व 25 प्रतिशत राज्य सरकार की थी। इसमें भी 129 करोड़ रुपये आज तक खर्च नहीं हो पाए हैं। गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग आज तक इस राशि को खर्च करने की योजना ही नहीं बना पाया है। आर्थिक पुनर्वास के लिए 104 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 18 करोड़ रुपये स्वरोजगार प्रशिक्षण पर खर्च हुए बाकी राशि बची है। सामाजिक पुनर्वास के लिए 40 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें गैस पीड़ितों की विधवाओं के लिए पेंशन का भी प्रविधान है। 4399 महिलाओं को पेंशन मिल रही हैं। वर्ष 2011 से यह राशि एक हजार है जिसे बढ़ाया नहीं गया है। न ही किसी नए हितग्राही को शामिल किया गया है। recent visitors 62