Sunday, July 5, 2026 10:38 pm

सभी यात्री सुरक्षित, तकनीकी खराबी के कारण कोच्चि जाने वाले विमान की चेन्नई में आपातकालीन लैंडिंग

चेन्नई. कोच्चि जाने वाले एक निजी विमान में तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद सोमवार को चेन्नई एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। एयरपोर्ट के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। विमान में 100 से अधिक यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे। अधिकारियों ने बताया कि सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। अधिकारियों के अनुसार, चेन्नई से 117 यात्रियों को लेकर विमान कोच्चि के लिए रवाना हुआ। बाद में तकनीकी गड़बड़ी का पता लगने के बाद पायलट ने विमान को वापस चेन्नई की तरफ मोड़ दिया और आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। recent visitors 81

‘बागी 4’ का लेटेस्ट पोस्टर जारी, संजय दत्त का नया लुक देखकर सभी हैरान

मुंबई  साजिद नाडियाडवाला की फ्रैंचाइज फिल्म 'बागी 4' का एक और लेटेस्ट पोस्टर जारी किया गया है। टाइगर श्रॉफ स्टारर मूवी के पिछले तीनों पार्ट्स ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया था और अब चौथे पार्ट को लेकर भी लोगों के बीच भयंकर क्रेज बढ़ रहा है। अब के पोस्टर में संजय दत्त के किरदार और लुक को रिवील किया गया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। उनका ये अवतार आपने पहले शायद ही कभी देखा होगा। टाइगर श्रॉफ का जब पोस्टर जारी किया गया था को वह बाथरूम में कमोड पर बैठे हुए थे। खून से लथपथ थे। और आसपास लाशें पड़ी हुई थीं। जैसे कि वह लोगों के साथ लड़ने के बाद थक-हारकर बैठ गए हों। हाथ में उनके एक बड़ा चाकू भी था और दूसरे हाथ में शराब की बोतल थी। इसके साथ लिखा था कि इस बार वह पिछली बार की तरह नहीं होंगे। उनका किरदार अलग होगा। संजय दत्त का 'बागी 4' में लुक और किरदार वहीं, संजय दत्त ने अपना लुक जारी किया गया। वह एक कुर्सी पर बैठे हुए चीख रहे हैं। गोद में एक लड़की की बॉडी पड़ी है, जिसका सफेद रंग का सूट खून से एकदम लाल हो रखा है। वहीं संजय शर्ट और चेहरे पर खून लगा है। इस नजारे को देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे वह लड़की की मौत को देख दुख में चीख रहे हैं। वहीं इनके किरदार के बारे में लिखा है कि हर आशिक एक विलेन है। टाइगर श्रॉफ की मां आयशा ने लुटाया प्यार संजय दत्त और टाइगर श्रॉफ स्टारर फिल्म अगले साल 5 सितंबर, 2025 को थिएटर्स में रिलीज होगी। अब संजय दत्त का ये खतरनाक लुक देखकर टाइगर श्रॉफ की मां आयशा श्रॉफ ने दो रेड हार्ट इमोजी के साथ लिखा, 'संज।' वहीं, एक यूजर ने लिखा, 'बाबा की एंट्री विलेन में हुई तो हीरो की जमानत जब्त।' एक ने लिखा, 'दत्त साहब अग्नीपथ जैसा विलेन बनो। जिसमें मजा आएगा।' वहीं कुछ फैंस ने फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट जताई। कहा कि इस बार कुछ तो अलग होने वाला है। recent visitors 251

पहली बार 14.10 डिग्री सेल्सियस हुआ वैश्विक तापमान, 2024 बना इतिहास का सबसे गर्म साल

ब्रसेल्स. दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन का असर अब तेजी से दिखने लगा है। इस बीच यूरोप की जलवायु परिवर्तन एजेंसी कॉपरनिकस ने डराने वाला अनुमान जारी किया है। एजेंसी ने कहा है कि 2024 का साल दुनिया के इतिहास में सबसे गर्म साल होने वाला है। एजेंसी ने कहा कि यह लगभग तय है कि 2024 रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल होगा। बयान में कहा गया है कि यह पहली बार होगा, जब औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा होगा। एजेंसी ने कहा कि इस साल इतिहास का दूसरा सबसे गर्म नवंबर दर्ज किया गया। 2023 का नवंबर अब भी इतिहास में सबसे गर्म नवंबर बना हुआ है। इस बार नवंबर में सतह पर हवा का तापमान 14.10 डिग्री सेल्सियस रहा है, जो कि 1991 से 2020 के औसत तापमान के मुकाबले 0.73 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। नवंबर में ही ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ा एक और अनचाहा रिकॉर्ड भी बना है। इस दौरान औसत वैश्वित तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.62 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। कॉपरनिकस एजेंसी के मुताबिक, बीते 17 महीनों में यह 16वां महीना है, जब औसत वैश्विक तापमान पूर्व औद्योगिक काल के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। भारत के मौसम विभाग के मुताबिक, 1901 के बाद से भारत के लिए यह दूसरा सबसे गर्म नवंबर रहा है। इश दौरान औसत अधिकतम तापमान 29.37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो कि सामान्य से 0.62 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। 2024 में जनवरी से नवंबर तक की बात करें तो औसत वैश्विक तापमान 1991-2020 के तापमान से करीब 0.72 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। वहीं, जनवरी-नवंबर 2023 के मुकाबले इस साल इसी दौर में तापमान 0.14 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। 1.50 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने की संभावना यूरोपीय एजेंसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2023 का तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.48 डिग्री सेल्सियस अधिक था, इसलिए यह भी लगभग निश्चित है कि 2024 का वार्षिक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा। recent visitors 63

धान उपार्जन केंद्र में लगी भीषण आग, कार्यालय हुआ जलकर खाक

सारंगढ़ छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ में  बीती रात बोहराबहाल धान उपार्जन केन्द्र के कार्यालय में भीषण आग लग गई, जिससे कार्यालय जलकर खाक हो गया. बोहराबहाल में झोपड़ी बनाकर कार्यालय का संचालन किया जा रहा था. जहां रविवार रात 1 बजे आग लगने से करीब 10 हजार बारदाना, कंप्यूटर सेट, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, मोटरसाइकिल समेत अन्य कई कीमती सामान जलकर राख हो गए. आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह हादसा यह साबित करता है कि धान खरीदी के केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का अभाव है. स्थानीय लोगों का कहना है कि धान उपार्जन केंद्रों में महज दिखावे के लिए तैयारियां की जाती हैं, जबकि सामान्य दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. इस हादसे ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि करोड़ों रुपये का धान बिना किसी सुरक्षा के खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है, जो बड़ी क्षति का कारण बन सकता है. recent visitors 68

वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने चांसलर के 86वें जन्मदिन पर यूनिवर्सल हायर एजुकेशन ट्रस्ट को 10 लाख किए दान

भोपाल वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय को वीआईटी विश्वविद्यालय के सम्मानित चांसलर के 86वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में यूनिवर्सल हायर एजुकेशन ट्रस्ट (यूएचईटी) को 10 लाख रुपए के महत्वपूर्ण दान की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। जन्मदिन समारोह कार्यक्रम में  माननीय चांसलर डॉ. जी विश्वनाथन को  वाईस प्रेसिडेंट, शंकर विश्वनाथन , असिस्टेंट वाईस प्रेसिडेंट  सुश्री कदम्बरी एस. विश्वनाथन और ट्रस्टी श्रीमती रमनी बालासुंदरम की उपस्थिति में चेक प्रदान किया गया। यह योगदान शैक्षिक सुधारों को आगे बढ़ाने और यूएचईटी द्वारा समर्थित छात्रों और समुदायों के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के प्रति संस्थान के समर्पण को रेखांकित करता है। इस तरह की पहल हमेशा वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की पहचान रही है, जो शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, समावेशिता और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावशाली परियोजनाएं चलाती है। विश्वविद्यालय ने चांसलर डॉ. जी विश्वनाथन ,एक दूरदर्शी नेता और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी, ने हमेशा विश्व स्तरीय शिक्षा के साथ युवा दिमागों को सशक्त बनाने का समर्थन किया है। उनके जन्मदिन पर किया गया यह दान, शिक्षा के माध्यम से बेहतर भविष्य बनाने के लिए उनके आजीवन समर्पण का एक प्रमाण है। यह धनराशि यूएचईटी को परिवर्तनकारी कार्यक्रमों का नेतृत्व करने, बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और शिक्षा परिदृश्य में सार्थक बदलाव लाने वाली पहलों को लागू करने में सक्षम बनाएगी। इस अवसर पर बोलते हुए, कुलाधिपति ने इस भाव के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया और एक स्थायी और समावेशी शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय कुलाधिपति को उनके 86वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देता है और समाज के उत्थान और भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने वाली ऐसी प्रभावशाली पहलों को जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। recent visitors 49

52 हजार साल पहले उल्कापिंड टकराने से हुई थी उत्पन्न, महाराष्ट्र के बुलढाणा की लोनार झील UNESCO में शामिल?

बुलढाणा. लोनार झील भारत में महाराष्ट्र राज्य के बुलढाणा जिले में स्थित बेहद खूबसूरत और रहस्यमयी झील है। अब इस झील को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल करने के लिए योजना बनाई जा रही है। राज्य सरकार लोनार झील को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को एक प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रही है। जल्द पेश किया जाएगा प्रस्ताव: निधि पांडे अधिकारियों ने बताया कि इस जगह को पर्यटन और अनुसंधान के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने तथा इसका संरक्षण किए जाने के मकसद से यह कदम उठाया जा रहा है। अमरावती संभागीय आयुक्त निधि पांडे ने हाल ही में प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए लोनार में विभिन्न विभागों के अधिकारियों से मुलाकात की थी। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव जल्द ही प्रस्तुत किया जाएगा। 52 हजार पहले ऐसे बनी थी झील बुलढाणा जिलाधिकारी किरण पाटिल ने कहा, ‘हम प्रस्ताव को पूरी तरह तैयार करने के बाद पेश करेंगे। अन्य यूनेस्को स्थलों के उलट लोनार झील कई श्रेणियों में काफी खास है। यह भौगोलिक और वैज्ञानिक चमत्कारों में से एक है। दरअसल, कहा जाता है कि लोनार क्रेटर झील की उत्पत्ति लगभग 52,000 साल पहले पृथ्वी पर एक उल्कापिंड के टकराने से हुई था। इस झील की एक खास विशेषता यह है की इस झील का पानी खारा और क्षारीय दोनों है, जो भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया अपनी तरह की सिर्फ एक झील है।' झील में कई मंदिर अधिकारी ने बताया कि मुंबई से लगभग 460 किलोमीटर दूर लोनार झील में कई मंदिर हैं, जिसमें कुछ 1,200 साल पुराने मंदिर भी शामिल हैं। यूनेस्को ‘टैग’ 113 हेक्टेयर में फैली इस झील के ‘उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य’ होने के बारे में जानकारी सुनिश्चित करेगा।अगर यह स्वीकृति मिल जाती है तो लोनार झील, अजंता और एलोरा गुफाओं, एलीफेंटा गुफाओं तथा मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रतिष्ठित स्थानों के साथ भारत का 41वां यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन जाएगी। पिछले साल लाखों आए थे लाखों लोग आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल 4,26,000 से अधिक घरेलू पर्यटक, 72 अंतर्राष्ट्रीय यात्री और पांच शोधकर्ता इस स्थल पर आए थे। हालांकि, अधिकारियों ने झील में नहाने पर प्रतिबंध लगा दिया है और इसके आसपास के क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया है। साल 2020 में लोनार झील को रामसर संरक्षण संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की दलदली भूमि के रूप में चुना गया था। झील के आसपास 365 हेक्टेयर का क्षेत्र, जो करीब 77.69 हेक्टेयर में फैला हुआ है, को वर्ष जून 2000 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। recent visitors 59

गौरेला पेंड्रा मरवाही में वाहनों की रफ्तार थमी, विजिबिलिटी कम; घने कोहरे की चादर में लिपटा जिला

गौरेला पेंड्रा मरवाही अमरकंटक की तराई में बसे गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में सोमवार को एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। इलाके में घना कोहरा छाया हुआ है। कोहरे के चलते मौसम काफी खुशनुमा बना हुआ था। हालांकि घने कोहरे के चलते सड़कों पर विजिबिलिटी लगभग पांच मीटर के आसपास रह गई। कोहरे के चलते सड़कों पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार पर भी असर देखने को मिला। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में आज मौसम का बदला अंदाज देखने को मिला है। सुबह से पूरा जिला घने कोहरे की चादर से लिपटा रहा और इलाके में कोहरा इतना घना था कि विजिबिलिटी महज पांच मी ही रह गई थी। हालांकि, कल हल्का बूंदाबांदी भी कुछ जगहों में हुई थी। वहीं आने वाले दिनों में मौसम एक-दो दिनों ऐसा ही बने रहने की संभावना है। मौसम का यह बदला मिजाज लोगों को खूब रास आ रहा है। शानदार मौसम के लिए एक अलग पहचान रखने वाला गौरेला पेंड्रा मरवाही इलाके में इन दिनों मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। आज सुबह जब लोग घर से बाहर निकले तो मौसम देखकर ऐसा एहसास होने लगा। जैसे कि वह किसी हिल स्टेशन में हो पूरा इलाका घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ था। कोहरा इतना घना था, वहीं कोहरे की वजह से सड़कों में वाहन चलाना मुश्किल हो रहा था। जिससे दिन के वक्त भी वाहन लाइट जलाकर चलने को विवश रहे। घने कोहरे की वजह से सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुंच पा रही है। मौसम का यह बदला मिजाज लोगों को खूब रास आ रहा है। स्थानीय लोग बता रहे हैं। वहीं कोहरे के चलते सड़कों पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है और लोग दिन में भी अपने वाहनों के लाइट जलाकर चला रहे है। वहीं मौसम जानकारों की मानें तो मौसम साफ होने के बाद एक बार फिर ठंड बढ़ेगी। recent visitors 55