GST ने जोमैटो को दिया 803 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस, शेयर बाजार में क्यों चढ़ गए इसके शेयर?

मुंबई  फूड और ग्रोसरी डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो (Zomato) को वस्तु एवं सेवा कर (GST) डिपार्टमेंट से 803.4 करोड़ रुपये का टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी ने गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंज को यह जानकारी दी। इसके एक दिन बाद यानी शुक्रवार को सुबह ही बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरा था। तब भी इसके शेयर एक दिन पहले के बंद भाव के मुकाबले ऊपर ट्रेड हो रहे थे। क्या है माजरा जोमैटो को जीएसटी विभाग से जो टैक्स नोटिस मिला है, उसमें 401.7 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड और इतनी ही राशि का जुर्माना (Penalty) और ब्याज शामिल है। यह डिमांड 29 अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2022 की अवधि के लिए बकाया कर से संबंधित है। जोमैटो ने क्या बताया जोमैटो ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया, "हमारा मानना है कि हमारे पास योग्यता के आधार पर एक मजबूत मामला है, जो हमारे बाहरी कानूनी और कर सलाहकारों की राय से समर्थित है। कंपनी उचित प्राधिकारी के समक्ष आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी।" कंपनी को जो टैक्स डिमांड नोटिस मिला है, वह जोमैटो और स्विगी जैसे एग्रीगेटर्स द्वारा एकत्र किए गए डिलीवरी शुल्क पर टैक्स एप्लिकेबिलिटी से संबंधित है। प्लेटफ़ॉर्म ने तर्क दिया है कि गिग वर्कर डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करते हैं और उन्हें ऑर्डर के आधार पर भुगतान किया जाता है। यूजर्स से इस डिलीवरी के लिए शुल्क लिया जाता है, सिवाय लॉयल्टी प्रोग्राम के, जहां प्लेटफ़ॉर्म शुल्क माफ करते हैं। यह डिलीवरी शुल्क गिग वर्कर को दिया जाता है। जीएसटी कानून क्या कहता है जीएसटी कानूनों के तहत, फूड की डिलीवरी एक ऐसी सेवा है जिस पर 18% की दर से टैक्स लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि चूंकि प्लेटफ़ॉर्म सेवा शुल्क एकत्र कर रहे हैं, इसलिए उन्हें टैक्स का भुगतान करना चाहिए। पिछले साल दिसंबर में इस मुद्दे पर जीएसटी अधिकारियों ने ज़ोमैटो को कारण बताओ नोटिस भेजा था। लाभ कमा रही है कंपनी जोमैटो ने बीते जुलाई-सितंबर की तिमाही में 4,799 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया था। इसी महीने कंपनी को 176 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। शेयर बाजार में क्या है शेयर का हाल बीते गुरुवार को, बीएसई पर ज़ोमैटो का शेयर मूल्य 2.4% गिरकर 284.90 रुपये पर बंद हुआ था। लेकिन आज यानी शुक्रवार को सुब 10:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 791 अंक डाउन था। लेकिन उस समय जोमैटो 286.55 रुपये पर ट्रेड हो रहा था। यह कल के बंद के मुकाबले 1.65 रुपये या 0.58% अधिक है। recent visitors 78

राजस्व व माइनिंग विभाग की टीम ने अवैध कोयला भंडारण पर दी दबिश, 60 टन अवैध कोयला जब्त

मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में कोयला के अवैध भंडारण पर राजस्व व माइनिंग विभाग की टीम ने एक साथ दबिश दी है. टीम ने साढ़े 3 लाख रुपए मूल्य का लगभग 60 टन अवैध कोयला जब्त किया है. जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रदीप बंगाली पर के ठिकानों पर राजस्व व माइनिंग विभाग की टीम संयुक्त दबिश दी है. आरोपी अवैध खदान में मजदूरों को लगाकर कोयला इकठ्ठा करने का काम करता था. प्रशासन की कार्रवाई के बाद अवैध कोयला तस्करों में खलबली मची हुई है. recent visitors 56

‘विस्थापित सीरियाई जनता पर स्वदेश वापसी के लिए कोई दबाव नहीं- UN

दमिश्क संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा है कि सीरिया में 27 नवंबर को युद्ध के जोर पकड़नेे के बाद से 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। आईडीपी टास्क फोर्स ने कहा, “सीरिया में 27 नवंबर को युद्ध के तेज हाेने के बाद से 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं।” संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लगभग 6,40,000 लोग अलेप्पो प्रांत से भाग गए, जबकि 3,34,000 लोग इदलिब से और 1,36,000 लोग हमा से भाग गए। उल्लेखनीय है कि सीरियाई सशस्त्र विपक्ष ने रविवार को राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया। रूसी अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति बशर असद ने सीरियाई संघर्ष के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के बाद पद छोड़ दिया और सीरिया छोड़कर रूस चले गए, जहाँ उन्हें शरण दी गई। इसके बाद मोहम्मद अल-बशीर (जो हयात तहरीर अल-शाम और अन्य विपक्षी समूहों द्वारा गठित इदलिब-आधारित प्रशासन चलाते थे) को मंगलवार को अंतरिम प्रधानमंत्री नामित किया गया। 13 साल का गृह युद्ध और 60 लाख शरणार्थी, इन देशों में रह रहे हैं सीरिया के लोग 8 दिसंबर को सीरिया में 13 साल लंबे गृह युद्ध के बाद सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद रूस भाग गए. इसी के साथ असद परिवार का 54 साल पुराना राज खत्म हो गया. इसमें 24 साल तो खुद बशर अल-असद के हैं. उनके सत्ता से हटने के बाद, राजधानी दमिश्क समेत दुनिया भर में सीरियाई लोगों ने जश्न मनाया. यह जश्न खास तौर पर उन लाखों सीरियाई लोगों के लिए मायने रखता है, जो गृह युद्ध की त्रासदी से बचने के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हुए. हालांकि, इस बदलाव के साथ ही यूरोपीय देशों में सीरियाई शरणार्थियों को वापस भेजने की मांग भी जोर पकड़ रही है. जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, बेल्जियम और ब्रिटेन जैसे देशों ने उनके असाइलम आवेदनों पर रोक लगा दी है. आखिर किन देशों में सबसे ज्यादा सीरियाई शरणार्थी रहते हैं? इतने सीरियाई को दूसरे देशों में लेनी पड़ी शरण 2011 में, अल-असद के खिलाफ जब विद्रोह की शुरुआत हुई तो सीरिया की आबादी लगभग 2 करोड़ थी. इसके बाद के वर्षों में लगभग पाँच लाख लोग मारे गए, दस लाख से अधिक घायल हुए और लगभग 1.3 करोड़ लोग अपना घर छोड़कर भाग गए. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक, कम से कम 74 लाख सीरियाई आंतरिक रूप से विस्थापित हैं, जिनमें से लगभग 49 लाख पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं. इसके अलवा 13 लाख लोग अधिकतर यूरोप में बस गए हैं. सबसे अधिक पंजीकृत सीरियाई शरणार्थियों वाले पड़ोसी देशों में तुर्किये, लेबनान, जॉर्डन और इराक शामिल हैं. इन शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या यूरोपीय देशों में भी है. न्यूज मैगजीन ‘पॉलिटिको’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 से अब तक लगभग 45 लाख सीरियाई लोग यूरोप आए. यूरोपीय संघ (ईयू) ने 2015 से 2023 के बीच लगभग 13 लाख सीरियाई शरणार्थियों को सुरक्षा का दर्जा दे चुका है. तुर्किए में रहते हैं सबसे ज्यादा रिफ्यूजी सीरिया के लगभग आधे पंजीकृत शरणार्थी, या 31 लाख तुर्किये में रहते हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी शरणार्थी आबादी की मेजबानी करता है. तुर्की सीरिया का पड़ोसी देश भी है इसलिए सीरियाई लोगों ने यही शरण सबसे पहले ली. तुर्की सरकार सीरियाई लोगों को टेम्पोररी प्रोटेक्टेड स्टेट्स देता है जिससे उन्हें कानूनी रूप से रहने की इजाजत मिलती है. मगर इससे किसी को भी देश की नागरिकता नहीं मिलती. उसके बाद दूसरे नंबर पर आता है लेबनान. जो कि लगभग 7 लाख 74 हजार पंजीकृत शरणार्थियों को शरण देता है. अगर इसमें अपंजीकृत व्यक्तियों को शामिल कर लिया जाए तो कुल संख्या करीब 15 लाख हो जाती है. लेबनान में हर पांच में से एक व्यक्ति सीरियाई शरणार्थी है. दोनों देशों के बीच आवाजाही आसान थी क्योंकि सीमा पार करने के लिए एक आईडी कार्ड ही काफी था. इसलिए शरणार्थियों ने बड़ी संख्या में और तेज़ी से लेबनान में शरण लेना शुरू कर दिया. तीसरा देश है जर्मनी. यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक जर्मनी में 7 लाख 16 हजार सीरियाई शरणार्थी रहते हैं. एंजेला मर्केल की सरकार ने सीरिया के गृहयुद्ध से भाग रहे शरणार्थियों के लिए जर्मनी की सीमाओं को बंद नहीं करने का निर्णय लिया था. उस समय माहौल यह था कि जर्मनी प्रबंधन कर लेगा हालांकि अब चीजें काफी बदल गई हैं. उसके बाद ईराक है जहां 2 लाख 86 हजार लोग रहते हैं. फिर इजिप्ट है 1 लाख 56 हजार शरणार्थियों के साथ. उसके बाद ऑस्ट्रिया, स्वीडेन, नीदरलैंड्स और ग्रीस है. यूरोप में शरणार्थियों को वापस भेजने पर क्यों जोर? असद को सत्ता से बेदखल किए जाने से पहले भी कुछ देश सीरियाई शरणार्थियों को असाइलम ना देने और उन्हें वापस भेजने की बात उठा रहे थे. अलजजीरा के मुताबिक इसमें सबसे बड़ी बाधा, यूरोपीयन यूनियन एजेंसी फॉर असाइलम (EUAA) की तरफ से की तय की गई सुरक्षित देश की परिभाषा दरअसल EUAA का सेक्शन 4.3.2 कहता है कि शरण के लिए आवेदन करने वाले को या शरणार्थी को उसके देश वापस भेजने के लिए जरूरी है कि उस देश में कानूनों का पालन लोकतांत्रिक तरीके से होता हो, राजनीतिक घटनाक्रम उत्पीड़न, यातना, या सजा का कारण ना बनते हों. इन मानकों पर सीरिया खरा नहीं उतरता था. अब असद के बाहर होने के बाद एक बार फिर सीरियाई शरणार्थियों का मुद्दा फिर गर्म हो गया है. हालांकि यूएनएचसीआर के मुताबिक, सीरिया में वापसी में बढ़ोतरी हुई है. 2024 के पहले आठ महीनों में, लगभग 34,000 सीरियाई शरणार्थियों के घर लौटने की पुष्टि की गई थी. संख्या इससे अधिक भी हो सकती है.   recent visitors 77

बीजापुर मुठभेड़ में सुरक्षा बल ने दो वर्दीधारी नक्सली को मार गिराया

बीजापुर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ प्रवास के पहले शुक्रवार की सुबह बासागुड़ा थाना क्षेत्र के लेंड्रा के जंगल में नक्सलियों से हुए मुठभेड़ में सुरक्षा बल ने दो वर्दीधारी नक्सली को मार गिराया है। पुलिस के अनुसार लेंड्रा क्षेत्र में भारी संख्या में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना के बाद केंद्रीय रिजर्व बल (सीआरपीएफ), डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम को अभियान पर भेजा गया था। लेंड्रा के जंगल में पहुंचते ही नक्सलियों ने जवानों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। जवानों की जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली वहां से भाग खड़े हुए। घटनास्थल की सर्चिंग पर दो वर्दीधारी नक्सली के शव और स्वचालित हथियार पुलिस को मिले हैं। बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद मौके की सर्चिंग करने पर घटनास्थल से 2 नग 12 बोर सिंगल शॉट गन, 1 नग कंट्री मेड गन, वायर, 5 किलो का टिफिन बम, प्रिंटर, नक्सली वर्दी, साहित्य एवं अन्य नक्सली सामग्री बरामद हुई है। घटना में मारे गए नक्सलियों की शिनाख्तगी एवं अन्य वैधानिक कार्यवाही थाना बासागुड़ा द्वारा की जा रही है। दो दिन पहले मुनगा में मारा गया था प्लाटून कमांडर बीजापुर जिले में ही दो दिन पहले सुरक्षा बल ने मुनगा के जंगल में हुए मुठभेड़ में एक वर्दीधारी नक्सली को मार गिराया था। मारे गए नक्सली की पहचान गंगालूर एरिया कमेटी प्लाटून कमांडर पांडू माड़वी के रूप में की गई है। recent visitors 58

सीएम डॉ. मोहन यादव ने आज प्रदेश के 8वें टाइगर रिजर्व रातापानी का लोकार्पण किया

 रायसेन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को रायसेन जिले में स्थित 'रातापानी टाइगर रिजर्व' का लोकार्पण किया। इस दौरान सीएम ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण भी किया। जिले में सीएम के कार्यक्रम को लेकर बाइक रैली का भी आयोजन किया गया। भोपाल, सीहोर और रायसेन जिले के युवाओं की ‘एक विरासत से विकास की अनूठी दौड़’ बाइक रैली में सीएम और एक्टर रणदीप हुड्‌डा ने खुद बुलेट चलाई। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा, मुझे आज तक नहीं समझ आया कि टाइगर और लायन में जंगल का राजा लायन कैसे हो सकता है। जंगल का राजा तो टाइगर ही होता है। दोनों में मूल अंतर यह है कि टाइगर अपने भोजन के लिए खुद शिकार करता है। टाइगर रोज शाम को 4 बजे अपने एरिया की निगरानी करता है कि कहीं कोई घुसपैठिया तो नहीं आया। उसके उलटा लायन की जिंदगी में वह अपने परिवार में विश्वास करते हैं। वे परिवार में अपनी मादाओं के साथ रहता है। वह अपना शिकार खुद नहीं करता। बाकी लोग शिकार करते हैं, वह खाता है। इस दौरान सीएम ने फिल्म वीर सावरकर में रणदीप हुड्डा की एक्टिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा- दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस से कई लोग आज भी उनके बारे में नादानी की बात करते हैं।   राज्य का आठवां टाइगर रिजर्व है रातापानी जंगल मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ दिनों पहले ही रायसेन जिले के रातापानी जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किया है। कान्हा, सतपुड़ा, बांधवगढ़, पेंच, संजय दुबरी, पन्ना और वीरांगना दुर्गावती के बाद यह राज्य का आठवां टाइगर रिजर्व है। राज्य सरकार ने रातापानी टाइगर रिजर्व के लिए अधिसूचना जारी की थी। सीएम मोहन यादव ने आठवां टाइगर रिजर्व घोषित किया इसमे कहा गया कि टाइगर रिजर्व बनने से, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से बजट मिल सकेगा जिससे वन्यजीवों का बेहतर तरीके से प्रबंधन संभव होगा। इसमें कहा गया कि रातापानी टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 1,271.465 वर्ग किलोमीटर होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद रातापानी वन को राज्य का आठवां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। रणदीप हुड्डा ने भी चलाई बाइक कार्यक्रम के दौरान फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा ने कहा कि मैं कुरुक्षेत्र की धरती से आता हूं। जहां भगवान कृष्ण ने दुनिया को अन्याय के खिलाफ लड़ने की सीख दी थी। आज उस धरती पर आया हूं जहां भगवान ने शिक्षा ग्रहण की। कार्यक्रम में CM मोहन यादव और रणदीप हुड्डा के साथ कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर और भाजपा प्रभारी मंत्री डॉ महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। रातापानी में 96 बाघ रातापानी टाइगर रिजर्व एकमात्र लैंडस्केप बन गया है, जहां 96 बाघों ने उपस्थिति दर्ज कराई है। रातापानी टाइगर रिजर्व लैंडस्केप में वर्ष 2026 में होने वाली गणना में 150 से अधिक बाघ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। 2026 तक प्रदेश में बाघों की संख्या 1100 के आसपास हो सकती है। इसका सर्वे रातापानी टाइगर रिजर्व से शुरू होगा। रातापानी में इस समय 12 से अधिक बाघिन शावकों के साथ मूवमेंट कर रही हैं। इनकी संख्या तकरीबन 30 है। ये शावक गणना तक वयस्क हो जाएंगे। बाघिनों के मूवमेंट वाले इलाके में 60 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। लैंडस्केप क्या है… हर टाइगर रिजर्व का एरिया होता है। बाघों की गणना के दौरान एक जोन चिह्नित किया जाता है, इसे लैंडस्केप कहते हैं। रातापानी का लैंडस्केप भोपाल से देवास तक है। इसे वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तय करता है। टाइगर रिजर्व का मुख्य क्षेत्र 763.812 वर्ग किलोमीटर रातापानी टाइगर रिजर्व का मुख्य क्षेत्र 763.812 वर्ग किलोमीटर और बफर क्षेत्र 507.653 वर्ग किलोमीटर है। टाइगर रिजर्व में भौगोलिक रूप से स्थित नौ गांवों को वन की अधिसूचना में मुख्य क्षेत्र से बाहर रखा गया है जिससे ग्रामीणों के मौजूदा अधिकारों में कोई बदलाव नहीं होगा। भोपाल से सटा है ये रायसेन जिल बता दें कि रातापानी वन प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे रायसेन जिले में स्थित है। एनटीसीए की तकनीकी समिति ने एक दिसंबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित माधव राष्ट्रीय उद्यान को भी टाइगर रिजर्व का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। recent visitors 62

प्रयागराज पहुंचे पीएम मोदी, सीएम योगी ने किया अभिनंदन

प्रयागराज यूपी के प्रयागराज में जनवरी से शुरू होने वाले महाकुंभ से पहले पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को यहां पहुंचे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। सीएम ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि तीर्थराज प्रयागराज की पावन धरा पर प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन है। सीएम ने लिखा कि महाकुंभ भारत की समेकित आस्था, सर्वसमावेशी संस्कृति और अटूट एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है। महाकुंभ-2025 के लिए मिल रही आपकी सौगातों से प्रदेश की विकास एवं समृद्धि की यात्रा को और गति मिलेगी। लिखा कि आपके नेतृत्व में स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और डिजिटल महाकुंभ 2025 के भव्य-दिव्य आयोजन हेतु हम संकल्पित हैं। दरअसल प्रयागराज पहुंचने पर पीएम मोगी ने एक्स पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि  आस्था के महाकुंभ को दिव्य-भव्य बनाने के साथ ही श्रद्धालुओं को हर सुविधा देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। प्रयागराज में दर्शन-पूजन के बाद महाकुंभ से जुड़े विकास कार्यों का जायजा लूंगा। इस दौरान कई प्रोजेक्ट्स के लोकार्पण का भी सौभाग्य मिलेगा। इसे सीएम योगी ने रीपोस्ट करते हुए पीएम का आभारर जताया।     महाकुम्भ भारत की समेकित आस्था, सर्वसमावेशी संस्कृति और अटूट एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है। नि:संदेह, महाकुम्भ-2025, प्रयागराज के पावन अवसर पर मिल रही इन सौगातों से आपके मार्गदर्शन में जारी प्रदेश की विकास एवं समृद्धि की यात्रा को और गति प्राप्त होगी। recent visitors 45

इंदौर में लव मैरिज का हुआ दुखद अंत, काउंसलिंग के बाद भी पति-पत्नी में सुलह नहीं हुआ, कोर्ट की अनुमति से कराया अबॉर्शन

इंदौर  क्रूर पति का बच्चा मुझे नहीं चाहिए। इंदौर में एक प्रेग्नेंट महिला ने हाईकोर्ट से अनुमति लेकर अबॉर्शन करवाया है। उसने एक साल पहले लव मैरिज की थी। अबॉर्शन के साथ ही इस लव मैरिज का दुखद अंत हो गया है। बताया जा रहा है कि शादी के बाद पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव बढ़ने लगे थे। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट ने गर्भपात की अनुमति मांगी थी। महिला का कहना था कि पति का व्यवहार बहुत क्रूर था। इसलिए वह उसके बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती थी। हालांकि इससे पहले दोनों की काउंसलिंग की गई थी लेकिन दोनों तैयार नहीं हुए थे। परिवार की मर्जी के खिलाफ लव मैरिज की इंदौर में रहने वाले एक युवक और युवती ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह किया था। शुरुआती कुछ महीने तो सब ठीक रहा, लेकिन फिर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगे। इस बीच महिला गर्भवती हो गई, जिससे झगड़े और बढ़ गए। महिला ने पति पर दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करा दिया। ये दोनों मामले अभी भी कोर्ट में चल रहे हैं। पति लगातार कर रहा था दहेज की मांग महिला का कहना है कि पति लगातार दहेज की मांग करता था, जिसे पूरा करना उसके परिवार के लिए संभव नहीं था। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों अलग रहने लगे। 18 हफ्ते की गर्भवती महिला ने हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति मांगी। उसका कहना था कि वह ऐसे क्रूर पति से बच्चा नहीं चाहती। उसे डर था कि बच्चे का भविष्य अंधकारमय होगा। महिला बोली-नहीं चाहिए क्रूर पति से जन्म लेने वाला बच्चा। काउंसलर ने समझाइश देने की कोशिश की हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महिला वकील को काउंसलर नियुक्त किया। काउंसलर ने पति-पत्नी दोनों की काउंसलिंग की लेकिन कोई हल नहीं निकला। सुनवाई के दौरान जज ने भी दोनों को समझाने की कोशिश की लेकिन दोनों अपनी जिद पर अड़े रहे। एजुकेटेड होने के बावजूद दोनों साथ रहने को राजी नहीं हुए। रिश्ता बचाने की गुंजाइश नहीं बची शादी के बाद दोनों के बीच मतभेद इतने बढ़े कि रिश्ता बचाने की परिस्थिति बची ही नहीं। इस केस में आखिरी तक काफी प्रयास हुए कि ऐसा न हो लेकिन सफलता नहीं मिली। हाईकोर्ट ने गर्भपात की अनुमति दे दी हाईकोर्ट ने महिला की मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई। रिपोर्ट में बताया गया कि महिला 19 हफ्ते की गर्भवती है और गर्भपात के लिए फिट है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए महिला को गर्भपात की अनुमति दे दी। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ने महिला का गर्भपात करा दिया। recent visitors 158