Sunday, July 5, 2026 10:58 am

संपदा 2.0 से कोई भी व्यक्ति अब घर बैठे निर्धारित दस्तावेजों का पंजीयन कर सकता है

संतोष मिश्रा भोपाल मध्यप्रदेश में विकसित की गई ई-पंजीयन एवं ई-मुद्रांक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली का नवीन संस्करण 2.0 विकसित किया गया है। इससे नागरिकों को और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में मदद मिली है। संपदा 2.0 से कोई भी व्यक्ति अब घर बैठे निर्धारित दस्तावेजों का पंजीयन कर सकता है। इसके लिये विभागीय पोर्टल https://sampada.mpigr.gov.in पर कोई भी व्यक्ति स्वयं पंजीकृत होकर अपने दस्तावेज का पंजीयन अथवा ई-स्टाम्प जारी कर सकता है। राज्य सरकार ने इसकी प्रक्रिया को बहुत सरलीकृत कर दिया है। अब दस्तावेजों के पंजीयन के लिये कार्यालय आने अथवा सेवा प्रदाता की सेवाएं लेने की आवश्यकता नहीं रही है। संपदा 2.0 पोर्टल में पंजीयन कार्य करने वाले पक्षकारों की "आधार" बेस्ड ई-केवायसी होगा। इसमें पेन कार्ड का सत्पापन आयकर विभाग के इंटीग्रेटेड सिस्टम पर आधारित होगा। संपत्ति की पहचान यूनिक आईडी से की जा सकेगी। संपत्ति की जियो मैपिंग के आधार पर ही गाइडलाइन दर निर्धारित होगी। इस आधार पर स्वत: ही संपत्ति का मूल्यांकन हो जायेगा। इस सॉफ्टवेयर में ऑटोमेटिक प्रारूप आधारित लेखन की व्यवस्था की गई है। शुल्कों के भुगतान के लिये संपदा वॉलेट मौजूद है। समस्त भुगतान सायबर ट्रेजरी या संपदा वॉलेट से सिंगल क्लिक द्वारा किया जा सकता है। पोर्टल में दस्तावेजों के निष्पादन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल हस्ताक्षर आधारित किया गया है। ई-हस्ताक्षर के साथ ऑटोमेटिकली पक्षकारों का फोटो अटैच होने संबंधित प्रबंध भी सॉफ्टवेयर में किया गया है। संपदा 2.0 में चयनित दस्तावेजों के लिये फेसलेस पंजीयन का विकल्प भी उपलब्ध है। इसमें पंजीयन कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिकली प्रेजेन्टेशन एवं वर्चुअल फाइनल करने की सुविधा के साथ कार्यवाही के प्रमाणीकरण के लिये ओटीपी की सुविधा भी दी गई है। इसमें पंजीयन, रिटर्न, रिफ्यूजल की सुविधा भी इलेक्ट्रॉनिकली उपलब्ध है। यह पक्षकारों को वीडियो केवायसी से पंजीयन सुविधा भी देता है। इसमें दोनों मोड (असिस्‍टेड एवं नॉन असिस्टेड) उपलब्ध है। पंजीकृत दस्तावेजों का केवल इलेक्ट्रॉनिक संस्करण ही संधारित किया जायेगा। संपदा 2.0 पोर्टल में पक्षकार स्वयं या सेवा प्रदाता के सहयोग से संपत्ति का पंजीयन कर सकता है। इसमें खरीदी या बेचे जाने वाली संपत्ति की पहचान संबंधित विभाग द्वारा प्रदत्त यूनिक आईडी तथा नक्शे पर चिन्हांकित संपत्ति से की जाती है। पक्षकारों की पहचान "आधार" बेस्ड ई-केवायसी से होती है। पोर्टल में चयनित दस्तावेज के आधार पर विलेख स्वत: तैयार होता है। विलेख के प्रारूप पर इलेक्ट्रॉनिकली सहमति के बाद शुल्क का ऑनलाइन भुगतान होता है। इसके बाद "आधार" बेस्ड ई-साईन या डिजिटल साइन के द्वारा ऑनलाइन ही दस्तावेजों का निष्पादन हो होता है। संपदा 2.0 पोर्टल में पंजीकरण के लिये 3 विकल्प (पारंपरिक रूप से कार्यालय में उपस्थित होकर, फेसलेस पंजीयन और रिमोट पंजीयन) उपलब्ध कराये गये है। पंजीयन के लिये सुविधा अनुसार कार्यालय में आने के लिये स्लॉट आरक्षित कर सकते है। फेसलेस और रिमोट पंजीयन में एआई आधारित वीडियो केवायसी से प्रत्येक पक्षकार की पहचान एवं लाइवलीनेस चेक किया जा सकता है। इसके द्वारा समस्त स्व-घोषणाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। इसमें भी नॉन असिस्टेड विकल्प की स्थिति में ऑनलाइन प्रेजेन्टेशन होता है। पंजीयन के लिये स्लॉट बुकिंग के लिये असिस्टेड विकल्प की स्थिति में वर्चुअल इंटरेक्शन के लिये स्लॉट आरक्षण की सुविधा उपलब्ध है। "लाभाथियों ने साझा किये अपने अनुभव" पंजीयन विभाग की संपदा 2.0 लागू होने के बाद विभिन्न जिलों के लाभार्थियों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए इसे सुविधाजनक बताया है। गुना के विष्णु प्रसाद बशैंया ने अनुभव साझा किया कि पूरा काम ऑनलाइन और पहले से अधिक व्यवस्थित रूप से हुआ है। गुना की सुअंकिता ने बताया कि संपदा 2.0 से कम समय में बेहतर तरीके से काम हो जाना संभव हो गया है। मुझे तुरंत दस्तावेज मेरे मोबाइल पर प्राप्त हो गये है। इसी तरह का अनुभव रतलाम के राकेश पाटीदार का भी रहा। उन्होंने दुकान की रजिस्ट्री संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर से कराई जिसमें गवाह की आवश्यकता भी नही पड़ी और कोई परेशानी नहीं आई। साथ ही रजिस्ट्री भी मोबाइल पर हाथों हाथ प्राप्त हो गई।   recent visitors 59

प्रदेश के शासकीय विभागों के लिए तकनीकी प्रगति का ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है

 सोनिया परिहार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, आईटी और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में मध्यप्रदेश हर दिन नए आयाम स्थापित कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए, प्रदेश ने अपने शासकीय विभागों और नागरिकों के लिए तकनीकी प्रगति और डिजिटल सुविधाओं का ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। राज्य डिजिटल भारत के सपने को साकार करते हुये डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। इसमें मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रोनिक विकास निगम (एमपीएसईडीसी) और मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। म.प्र. में विकसित सॉफ्टवेयर ने देश में बनाई पहचान मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) की अगुवाई में प्रदेश ने डिजिटल प्रौद्योगिकी में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। संपदा 2.0 और साइबर तहसील जैसे प्लेटफॉर्म नागरिक सेवाओं को सरल बना रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। संपदा 2.0 ने संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर ई-पंजीकरण, ई-स्टाम्प, स्टाम्प शुल्क की गणना और दस्तावेज़ खोज जैसे कार्यों को घर बैठे संभव बनाया गया है। साइबर तहसील ने राजस्व न्यायालयों की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुव्यवस्थित करते हुए भ्रष्टाचार को कम करने और जनता को त्वरित सेवाएं प्रदान करने का सफल प्रयास किया गया है। निवेश और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाएँ (आईटीईएस), इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) और डेटा केंद्रों की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, राज्य में दूरदर्शी "आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश प्रोत्साहन नीति 2023" बनाई गई है। राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए यह नीति डिज़ाइन की गई है। जबलपुर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पॉलिसी के दिशा निर्देश लॉन्च किए थे। नीति में निवेशकों को वित्तीय और गैरवित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रावधान किए गए है। सभी वित्तीय सहायता, आवश्यक अनुमतियाँ, अनुमोदनों, आवेदनों और किसी भी अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के लिए पूर्ण रूप से डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया गया है। राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के लिये प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप नीति-2022 लागू है। राज्य में एवीजीसी नीति-2024 भी लागू की जा रही है, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खुला है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा आदि को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति 2024 भी तैयार की गई है। विकसित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वर्तमान में प्रदेश में 2 हजार से अधिक आईटी/आईटीईएस एवं ईएसडीएम इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें एमपीएसईडीसी में पंजीकृत 650 इकाइयां हैं, जिन्हें राज्य की नीतियों का लाभ मिला है। इन इकाइयों का टर्न ओवर 10 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष से अधिक है। देश की 50 से अधिक बड़ी आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां मध्यप्रदेश में स्थापित हैं। प्रदेश से हर वर्ष 500 मिलियन डॉलर का निर्यात आईटी से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से होता है। राज्य में 5 आईटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं। राज्य सरकार द्वारा 15 आईटी पार्क बनाए गए हैं, जिनसे डेढ़ लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। राज्य में 1200 से अधिक तकनीकी स्टार्ट-अप स्थापित हैं, जिनमें से दो "नीव क्लाउड और शॉप किराना" यूनिकॉर्न कंपनी हैं। आईटी/आईटीएस/ईएसडीएम और डेटा सेंटर क्षेत्र में बढ़ता निवेश राज्य में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव और इंटरैक्टिव सेशन में आईटी/आईटीएस/ईएसडीएम और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेशकों ने विशेष उत्साह दिखाया। इस क्षेत्र में निवेश से रोजगार से नए अवसर सृजित होंगे। सागर में 1700 करोड़ से अधिक निवेश से डेटा स्थापित किया जा रहा है। बेंगलुरु में आयोजित इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट के दौरान, एमपीएसईडीसी ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर संघ,, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसोसिएशन ऑफ जिओस्पेशल इंडस्ट्रीज और टाई ग्लोबल जैसे प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उद्योग संघों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। जबलपुर, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु में कई बड़ी कंपनियों से करोड़ों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यूके-जर्मनी से एसआरएएम-एमआरएएम ग्रुप द्वारा 25000 करोड़ रूपये निवेश से सेमी कंडक्टर और साइंस टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ। जीआईएस तकनीक का बढ़ता उपयोग राज्य में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक का भी व्यापक उपयोग हो रहा है। 5G के लिए योजना, अनुमोदन और जीआईएस आधारित सेवाएं प्रदान करने के लिए "गति-शक्ति संचार पोर्टल" विकसित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए सर्वेक्षण, निगरानी और कार्यान्वयन के लिए "जल रेखा" जैसे पोर्टल कार्य कर रहे है। जीआईएस द्वारा तैयार किये गये लोकपथ मोबाइल ऐप और वेब एप्लिकेशन से पूरे राज्य में सड़कों से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने एवं उनके निराकरण को मॉनिटर करने की सुविधा दी जा रही है। शोध और शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के अंतर्गत राज्य में विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उज्जैन तारामंडल में 3डी-4K प्रोजेक्शन सिस्टम का अपग्रेडेशन और वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला डोंगला का ऑटोमेशन इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं। प्रशासनिक डिजिटलीकरण और पारदर्शिता सरकार ने ई-एचआरएमएस पोर्टल और अन्य डिजिटल मंचों के जरिए मानव संसाधन और सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटाइज्ड किया है। मुख्यमंत्री प्रगति पोर्टल ने विभिन्न योजनाओं और निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग को सुगम बनाया है। आईटी क्षेत्र में विगत एक वर्ष में प्राप्त उपलब्धियों ने डिजिटल प्रौद्योगिकी से प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई है और नागरिकों के जीवन को भी सरल और सुविधाजनक बनाया है। इन नवाचारों ने राज्य को आईटी निवेशकों के लिए एक आदर्श स्थान बना दिया है। प्रदेश डिजिटल भारत के सपने को साकार करते हुये वैश्विक आईटी मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।   recent visitors 51

MP में जल्द ही एक और नई रेल लाइन पर भी काम शुरू होगा, नई रेल लाइन बुंदेलखंड और महाकौशल के बीच बिछाई जाएगी

भोपाल मध्य प्रदेश में जल्द ही एक और नई रेल लाइन पर भी काम शुरू हो सकता है. माना जा रहा है कि रेलवे मध्य प्रदेश को एक और नई रेल लाइन की सौगात दे सकता है. यह रेल लाइन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड और महाकौशल के बीच बिछाई जाएगी, फिलहाल प्रदेश में इंदौर-मनमाड और बुधनी इंदौर रेलवे लाइन पर काम किया जा रहा है. वहीं केंद्रीय रेल मंत्री ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही मध्य प्रदेश को एक और रेल लाइन पर काम शुरू हो सकता है. सागर-करेली-छिंदवाड़ा के बीच बिछेगी रेल लाइन दरअसल, सागर-करेली-छिंदवाड़ा के बीच बिछाई जाने वाली बहुप्रतिक्षित रेल लाइन को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री ने घोषणा की है इस प्रोजेक्ट के लिए जल्द ही डीपीआर के सर्वे को स्वीकृति दी जाने वाली है. जिससे अब क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी है कि लंबे समय से हो रही इस रेल लाइन की मांग अब पूरी हो सकती है. क्योंकि डीपीआर सर्वे जल्द पूरा होने के बाद रेल मंत्रालय इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकता है. यह रेल लाइन तीन जिलों में बिछाई जाएगी, जिसमें सागर, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा जिला शामिल रहेगा. बता दें कि इसकी मांग कई बार उठ चुकी है, स्थानीय सांसद भी संसद में इस मांग को उठा चुके हैं. 120 किलोमीटर का सफर होगा कम सागर-करेली-छिंदवाड़ा के बीच रेल लाइन बिछाए जाने के बाद करीब 120 किलोमीटर का सफर कम हो जाएगा. जबकि तीन घंटे से भी ज्यादा समय की बचत होगी. बता दें कि हाल ही में संसद सत्र कै दौरान सागर की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने इस रेल लाइन को बिछाने का प्रस्ताव रखा था. खास बात यह है कि इस रेल लाइन को भविष्य में सागर से ललितपुर तक ले जाने की तैयारी है. सांसद ने कहा यह रेल लाइन कृषि, व्यापार और पर्यटन के नजरिए से भी मध्य प्रदेश के लिए अहम साबित होगी. क्योंकि अब तक सागर और नरसिंहपुर जिले सीधे तौर पर सड़क मार्ग से जुड़े हैं, लेकिन रेल लाइन से जुड़ने के बाद महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में आर्थिक विकास और तेजी से होगा, जबकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच परिवहन भी आसान होगा. इसके अलावा होशंगाबाद से सांसद दर्शन चौधरी और दमोह से सांसद राहुल सिंह लोधी और छिंदवाड़ा से सांसद विवेक बंटी साहू ने भी इसकी मांग की थी. ऐसे में माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू हो सकता है.  recent visitors 58

मुख्यमंत्री मोहन यादव का निवेश पर फोकस- 6 रीजनल इंडस्ट्रियल सम्मिट में करीब 3 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार को आज  13 दिसंबर को एक साल पूरा हो रहा है. सरकार का फोकस समर्पण, सेवा, सुशासन, संस्कृति, त्योहार पर रहेगा. सीएम यादव घोषणापत्र में किए वादे भी बताएं. जानें सीएम मोहन यादव के 12 बड़े फैसले     निवेश पर फोकस- 6 रीजनल इंडस्ट्रियल सम्मिट में करीब 3 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव     स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े कदम- एमपी में 30 मेडिकल कॉलेज, जल्द संख्या 50 होगी     संस्कृति और धर्म से जोड़ा- जन्माष्टमी, गीता जयंती , गोवर्धन पूजा जैसे त्यौहार सरकार ने धूमधाम से मनाए     पर्यावरण के लिए- तेज लाउड स्पीकर, खुले में मांस की बिक्री पर रोक     हरे भरे होंगे खेत खलिहान- बुंदेलखंड क्षेत्र की केन-बेतवा वृहद परियोजना और पार्वती- कालीसिंध-चंबल परियोजना मंजूर     महिला सशक्तिकरण- मध्य प्रदेश में सिविल सेवाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत की जगह 35 प्रतिशत पदों पर आरक्षण मिलेगा     युवाओं को रोजगार- प्रदेश में जल्द अलग-अलग विभागों में करीब एक लाख सरकारी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, तैयारी पूरी हो चुकी है     दिग्गजों से तालमेल- सीएम बनने के बाद प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय जैसे केंद्र की राजनीति करने वाले दिग्गज सरकार में मंत्री बने, मोहन यादव ने तालमेल बैठाया     सियासत में भी 100% रिजल्ट- 2023 में सरकार बनने के बाद सीएम मोहन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2024 का लोकसभा चुनाव था, सभी 29 सीट जीती     उपचुनाव में परचम लहराया- डॉ मोहन यादव के सीएम बनने के बाद 3 उपचुनाव हुए बुधनी और अमरवाड़ा बीजेपी तो विजयपुर कांग्रेस जीती     महाराष्ट्र-हरियाणा में भी जलवा- मोहन यादव ने जिन 5 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया, उनमें से चार सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की     अफसरशाही पर सख्ती- लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिला तत्काल एक्शन- गुना हादसे के बाद कलेक्टर, एसपी बदले, शाजापुर कलेक्टर को विवादित बयान के बाद हटाया recent visitors 48

पुलिस आयुक्त ने सभी थानों के चार पहिया वाहनों पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए

इंदौर रात्रि गश्त और क्षेत्र में भ्रमण का बोलकर होटल या अपने ठिकानों पर जाने वाले पुलिसकर्मियों की निगरानी शुरू हो गई है। पुलिस आयुक्त ने सभी थानों के चार पहिया वाहनों पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाने के निर्देश दिए है। जोन-2 के छह वाहनों पर इसका ट्रायल चल रहा है। डीसीपी जोन-2 अभिनय विश्वकर्मा के मुताबिक जीपीएस का उद्देश्य गश्त को ज्यादा प्रभावी बनाना है। कईं बार पुलिसकर्मी क्षेत्र में भ्रमण करने में लापरवाही करते है। एक स्थान पर घंटों खड़ी रहती है गाड़ी कईं बार एक ही स्थान पर घंटों तक गाड़ी खड़ी रहती है। जीपीएस से डेशबोर्ड पर गाड़ी की लोकेशन देखी जाएगी। गश्त करने वाला पुलिस अधिकारी कहां-कहां गया इसकी पूरी रिपोर्ट अफसरों को मिलेगी। गाड़ी कितने किलोमीटर और कितने समय चली इसका ब्योरा भी मिलेगा। गश्त करने का दावा किया जाता है इससे गड़बड़ी करने वाले पुलिसकर्मियों को चिह्नित करने में सुविधा होगी। डीसीपी के मुताबिक कईं बार वारदात होने पर पुलिसकर्मियों द्वारा विधिवत गश्त करने का दावा किया जाता है। जीपीएस के माध्यम से फ्लैश बैक में जाकर गश्त करने वाले वाहन की लोकेशन निकाल सकते हैं। 6 वाहनों पर प्रयोग शुरू ट्रायल के तौर पर छह वाहनों पर प्रयोग शुरू किया है। इस दौरान कुछ वाहन दूसरे थाना क्षेत्र में जाना पाए गए है। पुलिसकर्मियों द्वारा बताया गया कि वो गश्त के दौरान मुलजिमों को ढूंढने गए थे। पुलिसकर्मियों पर एआई से निगरानी कर रहे डीसीपी डीसीपी के मुताबिक इसके पूर्व जोन-2 में एआई के माध्यम से पुलिसकर्मियों की निगरानी की जा रही है। रात्रि गश्त करने वाले पुलिसकर्मियों से फोटो सहित लोकेशन ली जाती है। इससे पुलिसकर्मी की उपस्थिति सुनिश्चित होती है। गश्त में गलत लोकेशन देने वाले पुलिसकर्मियों को चिह्नित कर लिया जाता है। recent visitors 63

सांसद लालवानी ने इंदौर एयरपोर्ट को आगामी 25 सालों को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना भी केंद्रीय मंत्री नायडू से साझा की

इंदौर इंदौर एयरपोर्ट को नई सुविधाएं मिलने वाली है, जिसके बाद हवाई सफर बेहतर और ज्यादा सुरक्षित होगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू इंदौर में कई सुविधाओं का लोकार्पण करेंगे। इसमें नया फायर स्टेशन एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्रमुख है। केंद्रीय मंत्री नायडू के इंदौर आगमन की संभावित तारीख 22 दिसंबर है। नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू से मुलाकात कर उन्हें इंदौर आने का न्योता दिया दरअसल, इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू से मुलाकात कर उन्हें इंदौर आने का न्योता दिया है, जिसे केंद्रीय मंत्री नायडू ने स्वीकार किया। साथ ही सांसद लालवानी ने इंदौर एयरपोर्ट को आगामी 25 सालों को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना भी केंद्रीय मंत्री नायडू से साझा की। केंद्रीय मंत्री ने इंदौर में हवाई सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा दिलाया सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू से इंदौर आने का अनुरोध किया था जिस मंत्री नायडू ने सहर्ष स्वीकार किया है। लगातार विकसित होते इंदौर एवं आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखकर एयरपोर्ट के विकास के लिए एक प्लान भी साझा किया है, जिस पर मंत्री नायडू ने विस्तार से बात को सुना है और इंदौर में हवाई सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा दिलाया। इंदौर को नई सौगातें मिलने का रास्ता खुल सकता है इससे पहले सांसद लालवानी ने केंद्रीय मंत्री नायडू से मुलाकात कर नए टर्मिनल भवन, टैक्सी बे बनाने तथा इंदौर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा दिलाने की भी मांग की थी। नागरिक उड्डयन मंत्री मंत्री नायडू के इंदौर प्रवास के दौरान इन विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी और इंदौर को नई सौगातें मिलने का रास्ता खुल सकता है।   recent visitors 60

भोपाल, छतरपुर समेत 28 जिलों में शीतलहर: एमपी में अगले 4 दिन कड़ाके की सर्दी

भोपाल । मध्यप्रदेश में अगले 4 दिन तक कड़ाके की सर्दी पड़ने का अलर्ट है। शुक्रवार को भोपाल, जबलपुर समेत 28 जिलों में कोल्ड वेव (शीतलहर) चलेगी। रात के साथ दिन भी ठंडे रहेंगे। पहाड़ों में बर्फबारी और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से सर्द हवा चलना इसकी वजह है। इंदौर और उज्जैन में थोड़ी राहत रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, ‘शुक्रवार को जबलपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, सिवनी, नर्मदापुरम में सर्द हवा चलेगी। भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, नीमच, विदिशा, सीहोर, रायसेन, कटनी, सीधी में कोल्ड-डे और सर्द हवाएं दोनों का असर रहेगा। मंडला, मंदसौर, रतलाम, बैतूल, नरसिंहपुर में कोल्ड डे यानी ठंडा दिन रहेगा।’ उधर, कड़ाके की ठंड पड़ने से भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल गई है। स्कूल 1 घंटे बाद 9 बजे से लग रहे हैं। भोपाल के वन विहार, इंदौर, ग्वालियर के जू में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। मंदिरों में भगवान को भी ठंड से बचाने के जतन हो रहे हैं। इस साल दिसंबर की सर्दी ने ट्रेंड बदल दिया है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड और ट्रेंड देखें, तो दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में कड़ाके की ठंड पड़ती रही है, लेकिन इस बार पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी का असर है। भोपाल और इंदौर की रात तो पिछले 2 साल में सबसे ठंडी रही है, यानी दिसंबर की ठंड का रिकॉर्ड टूट गया है। नवंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में तो 36 साल का रिकॉर्ड टूटा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। अब दिसंबर में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। recent visitors 160