Wednesday, July 8, 2026 4:19 am

चित्रकला से बच्चों ने जाना ऊर्जा संरक्षण का महत्व, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर उकेरे चित्र

भोपाल राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह (14 दिसम्बर 2024 से 21 दिसम्बर 2024) के दौरान होने वाले विभिन्न आयोजनों में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा पी.एम. सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना विषय पर एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन चिनार पार्क में किया गया। प्रतियोगिता में शहर के 15 प्रतिष्ठित विद्यालयों के 210 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता 02 वर्गों में आयोजित की गयी थी, जिसमें जूनियर वर्ग (कक्षा 5 से 6) में प्रथम पुरस्कार जॉन मेरी (कार्मल कान्वेंट स्कूल बी.एच.ई.एल), द्वितीय पुरस्कार रिद्विमा महाराणा (कार्मल कान्वेंट स्कूल बी.एच.ई.एल), तृतीय पुरस्कार नायसा यादव (कार्मल कान्वेंट स्कूल बी.एच.ई.एल.) एवं सात्वंना पुरस्कार मो.मारूफ खान (ब्रिलियंट कान्वेंट स्कूल) ने प्राप्त किया। इसी प्रकार सीनियर वर्ग (कक्षा 7 से 8) में प्रथम पुरस्कार हिमांशी पाटिल (आनंद विहार स्कूल), द्वितीय पुरस्कार निदा अली (मॉडल हा.से. स्कूल), तृतीय पुरस्कार अरहम ईमरान (मॉडल हा.से.स्कूल) एवं सात्वंना पुरस्कार ऋषि कुमार कुशवाहा (मॉडल हा.से. स्कूल) ने प्राप्त किया। इसी के साथ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता हेतु स्कूल के मध्य एक रनिंग ट्राफी की घोषणा की गई जो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यालय को दी जाती है। इस वर्ष यह ट्राफी कार्मल कान्वेंट स्कूल, बी.एच.ई.एल. को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर दी गयी है। प्रतियोगिता के दौरान डॉ. कीर्ति सिंह (गीताजंली कॉलेज), डॉ. रेखा दीमन (हमीदिया कॉलेज) एवं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक श्री एन.के.भोगल ने निर्णायक की भूमिका निभाई। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं प्रशासन) श्री मेहताब सिंह, महाप्रबंधक (शहर वृत्त) भोपाल श्री ब्रजभान सिंह परिहार एवं उप महाप्रबंधक शहर संभाग दक्षिण श्री राकेश त्रिपाठी द्वारा पुरस्कार वितरित किये गये।   recent visitors 52

ASI ने गुपचुप तरीके से संभल में पांच तीर्थ स्थलों और 19 प्राचीन कूपों का निरीक्षण भी किया

संभल संभल में मंदिर मिलने के मुद्दे का मामला गरमाया हुआ है. इसी बीच ASI ने यहां मंदिर में कार्बन डेटिंग की. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने संभल में स्थित प्राचीन कार्तिकेय मंदिर की कार्बन डेटिंग गुपचुप तरीके से संपन्न की. इस प्रोसेस के लिए एक चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम तैनात की गई थी. ASI ने संभल में पांच तीर्थ स्थलों और 19 प्राचीन कूपों का निरीक्षण भी किया. प्राचीन तीर्थ श्मशान मंदिर टीम ने क्षेत्र में मौजूद 19 प्राचीन कूपों की स्थिति और ऐतिहासिक महत्व का भी गहन अध्ययन किया गया. सूत्रों के अनुसार, ASI ने इस निरीक्षण के दौरान प्रशासन से आग्रह किया था कि इसे मीडिया कवरेज से दूर रखा जाए. संभल क्षेत्र अपने प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है. ASI की इस गतिविधि से इतिहास के नए पहलुओं पर प्रकाश डालने की उम्मीद की जा रही है. क्या बोले संभल के डीएम? संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया है कि मंदिर का सर्वेक्षण सुरक्षित तरीके से पूरा कर लिया गया है. संभल के प्राचीन कार्तिकेय मंदिर की कार्बन डेटिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा गुप्त तरीके से की गई. सुरक्षा कारणों से इस प्रक्रिया को मीडिया कवरेज से दूर रखा गया. चार सदस्यीय ASI टीम ने प्रशासन से अनुरोध किया था कि निरीक्षण को गोपनीय रखा जाए. जिलाधिकारी संभल राजेंद्र पेंसिया के अनुसार, मंदिर का सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. 46 साल से बंद था मंदिर बता दें कि संभल में हिंसा के बाद जब उपद्रवियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया गया तो बिजली चोरी का मामला सामने आया था. 14 दिसंबर को पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब दीपा राय इलाके में चेकिंग के समय अचानक एक मंदिर मिल गया जो कि सन 1978 का बताया जा रहा है. यह मंदिर 46 सालों से बंद था. जो सपा सांसद के घऱ से 200 मीटर की दूरी पर था. इसके बाद 15 दिसंबर को मंदिर को खोला गया और वहां पूजा पाठ की गई. इसके बाद कुएं मिलने की जानकारी सामने आई और उसकी खुदाई कराई गई. वहीं, इसी बीच संभल के और इलाके सरायतरीन में भी मंदिर मिला. अब इसी मिले मंदिर की जांच और सर्वे के लिए ASI की टीम पहुंची है. recent visitors 68

शासकीय विद्यालयों में पर्याप्त विद्युत व्यवस्था के लिये दिये गये निर्देश

भोपाल शासकीय विद्यालयों की कक्षाओं में विद्युत व्यवस्था के संबंध में मिलने वाली शिकायतों को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिये है। निर्देशों मे कहा गया है कि सर्दी में ठंडी हवा से बचाव के लिये खिड़कियों को बंद करने पर कक्षाओं में पर्याप्त प्रकाश की आवश्यकता बढ़ जाती है। प्रकाश के अभाव में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें सुधार के लिये कक्षाओं में आवश्यक प्रकाश की व्यवस्था की जायें। प्रत्येक कक्षा में कम से कम 4 एलईडी ट्यूबलाईट की व्यवस्था की जाएं। प्रकाश व्यवस्था के लिये 7 हजार 125 हाई और हायर सेकण्डरी स्कूलों में प्रति विद्यालय के मान से 20 हजार रूपये की राशि सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है। शाला प्रभारियों को प्रकाश व्यवस्था के साथ बिजली के स्विच बोर्ड और आंतरिक विद्युतीकरण व्यवस्था अन्तर्गत तार की मरम्मत के लिये भी कहा गया है। ऐसे शासकीय विद्यालयों में जहाँ विद्युतीकरण नहीं है, एमपीईबी से प्राक्लन प्राप्त कर स्वीकृति के लिये वरिष्ठ कार्यालय को भेजे जाएं। उक्त कार्य को प्राथमिकता दिये जाने के लिये भी कहा है।   recent visitors 46

कृष्णा वर्मा के जीवन में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना का योगदान, चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई

सफलता की कहानी बेमेतरा बेमेतरा शहर के कृष्णा वर्मा, उम्र 12 वर्ष, एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें क्रोनिक किडनी डिजीज (ब्ज्ञक्) स्टेज-5 से ग्रसित पाया गया, जिसके चलते उन्हें तत्काल किडनी के इलाज की आवश्यकता थी। उनके पिता दिनेश वर्मा, जो एक मिस्त्री का कार्य करके अपने परिवार का जीवन-यापन करते हैं, आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं थे कि बेटे का महंगा इलाज करा सकें। परिवार में कुल 5 सदस्य हैं, जिनमें उनकी दो बेटियां भी हैं। कृष्णा की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी। परिवार के लिए यह एक बेहद कठिन समय था। इलाज के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता थी, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ने उन्हें असहाय बना दिया। तभी उन्हें मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के बारे में जानकारी मिली। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बेमेतरा के मार्गदर्शन में इस योजना के अंतर्गत कृष्णा वर्मा के इलाज के लिए 6 लाख 53 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई। यह राशि उनके इलाज के लिए संजीवनी साबित हुई। जून 2024 में कृष्णा का किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा हुआ, और अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। कृष्णा के पिता दिनेश वर्मा ने इस योजना का लाभ मिलने पर गहरी राहत महसूस की। उनका कहना था कि यदि यह आर्थिक सहायता न मिली होती, तो उनका बेटे का इलाज कराना उनके लिए असंभव था। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और इस योजना के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उनका मानना है कि इस योजना ने न केवल उनके बेटे को नया जीवन दिया, बल्कि उनके परिवार को आर्थिक संकट से भी बचा लिया। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना ने कृष्णा वर्मा जैसे कई जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उनकी जिंदगी बदल दी है। इस योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को जीवन रक्षक इलाज मुहैया कराना सरकार की एक अत्यंत सराहनीय पहल है। दिनेश वर्मा जैसे गरीब और मेहनतकश व्यक्ति के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। कृष्णा वर्मा की यह सफलता कहानी यह साबित करती है कि सही समय पर मिली सरकारी सहायता और सामूहिक प्रयास किसी की भी जिंदगी बदल सकते हैं। अब कृष्णा न केवल स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि उनके परिवार के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई है। यह कहानी सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और समाज के कमजोर वर्ग को सशक्त बनाने की एक प्रेरणादायक मिसाल है। recent visitors 63

महतारी वंदन की राशि को जमा कर अहिरवार समाज की महिलाओं ने बड़े कार्य के लिए निकाला अनूठा रास्ता

 महासमुंद महासमुंद के सुभाषनगर में रहने वाली निम्न और मध्यम वर्गीय महिलाओं ने छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदना योजना के तहत मिलने वाली राशि को एक नई दिशा देकर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की है। अहिरवार समाज की 14 महिलाओं ने सामूहिक रूप से इस योजना की राशि को बचत और बड़े कार्यों में निवेश का जरिया बनाया है, जिससे उनका जीवन न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है, बल्कि सामूहिकता की भावना भी मजबूत हुई है। हर महीने मिलने वाली 1,000 रुपए की राशि को व्यक्तिगत खर्चों में उपयोग करने के बजाय इन महिलाओं ने इसे मिलकर 14,000 रुपए के सामूहिक फंड में तब्दील कर दिया। यह फंड हर महीने की 5 तारीख को आयोजित बैठक के माध्यम से जरूरतमंद महिला को दिया जाता है। इस राशि से महिलाएं अपने परिवार की बड़ी आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं। समूह की सदस्य उत्तरा कहती हैं, “पहले यह राशि छोटे-मोटे खर्चों में खत्म हो जाती थी। लेकिन जब हमने इसे मिलकर बचाने का निर्णय लिया, तो इसे बड़े कामों में लगाना संभव हो पाया।“ अब तक इस सामूहिक प्रयास के तहत सविता ने अपने पति की जूते की दुकान को बढ़ाने में मदद की, चंद्रिका ने अपने दामाद की बरसी पर होने वाले खर्च को पूरा किया, कोमिन ने अपने घर का पलस्तर कराया, नरगिस ने अपनी फैंसी स्टोर को विकसित किया, और गणेशी ने अपने जीवन का सपना पूरा करते हुए गंगा दर्शन किया। इसी प्रकार से शकीला ने अपनी नातिन को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया, जबकि ईश्वरी हठीले ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर में सीढ़ी बनवाई। उत्तरा ने अपनी बेटी की हॉस्टल फीस भरी, और रेमा ने गोदरेज की आलमारी खरीदकर अपने परिवार के लिए सहूलियत बढ़ाई। महिलाओं का कहना है कि इस योजना ने उन्हें आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराया है। गणेशी कहती हैं, “कोई हमें एक रुपए देने तैयार नहीं था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने हमें हर महीने 1,000 रुपए देकर ऐसा सहारा दिया, जैसे मायके में पिता और बड़े भाई देते हैं।“महतारी वंदना योजना से सुभाषनगर की महिलाओं ने यह साबित किया है कि सही दिशा में किया गया छोटा प्रयास भी बड़ी उपलब्धियों की ओर ले जा सकता है। recent visitors 133

अंतर्राष्ट्रीय टाइगर तस्कर ताशी शेरपा की जमानत निरस्त

भोपाल स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश को मिली बढी सफलताएसटीएसएफ ने विगत 08 वर्षों से फरार अंतर्राष्ट्रीय टाइगर तस्कर ताशी शेरपा को भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) से 24 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। उक्त आरोपी मध्यप्रदेश के सतपुडा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम के अंतर्गत वन्यजीव टाइगर व पेंगोलिन के अवयवों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अवैध व्यापार के गिरोह के सरगना है व विगत 08 वर्षों से फरार था। ताशी शेरपा टाइगर तस्कर की जमानत याचिका कई बार विभिन्न न्यायालयों (मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायालय व उच्च न्यायालय) द्वारा खारिज की जा चुकी है। इसके उपरांत उक्त आरोपी ने सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली के समक्ष जमानत याचिका दायर की थी, जिसकी विस्तृत सुनवाई उपरांत सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये जमानत याचिका निरस्त कर दी तथा न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नर्मदापुरम को जुलाई 2025 तक प्रकरण के निराकरण करने के निर्देश भी दिये। इस प्रकरण में एसटीएसएफ ने कुल 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनके विरूद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय नर्मदापुरम के द्वारा 05-05 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 7 लाख 10 हजार रूपये का अर्थदंड का आदेश पारित किया गया है एवं प्रकरण में 3 देशों के 7 अंतर्राष्ट्रीय तस्कर फरार है।   recent visitors 122

प्रदूषण से कान, नाक और गले पर भी बुरा असर पड़ता है, हल्के में न लें

नई दिल्ली दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण अति गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। महीने भर से सिलसिला जारी है हालांकि बीच में कुछ हद तक स्थिति नियंत्रण में थी लेकिन एक बार फिर एक्यूआई ने लोगों की पेशानी पर बल डाल दिया है। प्रदूषण से कान, नाक और गले पर भी बुरा असर पड़ता है। हाल ही में इसे लेकर दिल्ली में एक सर्वे कराया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य निकल कर सामने आए। हेल्थकेयर प्रदाता प्रिस्टीन केयर द्वारा कराए सर्वेक्षण में दिल्ली, मेरठ, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, रोहतक, चंडीगढ़, कानपुर आदि शहरों के 56,176 व्यक्तियों को शामिल किया गया। इनमें से लगभग आधे (41 प्रतिशत) ने उच्च प्रदूषण की अवधि के दौरान आंखों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी, जबकि 55 प्रतिशत ने अपने कान, नाक या गले को प्रभावित करने वाली समस्याओं की बात बताई। इनमें से 38 प्रतिशत ने प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन और सूजन की शिकायत की है। इसके प्रभावित लोगों में आंखें में लालिमा और खुजली जैसे आम लक्षण दिखाई दिए। लोगों ने प्रदूषण बढ़ने के दौरान इन बीमारियों में वृद्धि का उल्लेंख किया। इसमें गले में खराश, नाक में जलन और कान में तकलीफ जैसी ईएनटी समस्याएं भी शामिल थीं। इन स्वास्थ्य समस्यांओं ने दीर्घकालिक चिंताएं पैदा की। इस सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि ईएनटी समस्यांओं से जूझ रहे 68 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों से परामर्श नहीं करते। प्रिस्टिन केयर के ईएनटी सर्जन डॉ. धीरेंद्र सिंह ने बताया, ”खतरनाक वायु गुणवत्ता सभी के स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है। बच्चे विशेष रूप से इसके प्रति संवेदनशील हैं। ऐसी हवा के संपर्क में आने से नाक और कान में संवेदनशील श्लेष्म झिल्ली में जलन हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ पुरानी स्थितियां हो सकती हैं। इन सबसे बचने के लिए बाहरी संपर्क को कम करना, मास्क पहनना और हाइड्रेटेड रहना आवश्यक है। इसके साथ ही आंखों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।” वही प्रिस्टिन केयर के सह-संस्थापक डॉ वैभव कपूर ने कहा, “यह जानकर आश्चर्य होता है कि लोग प्रदूषण और स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभाव को कितने हल्के में लेते हैं। आंख और ईएनटी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि के उपायों की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है। बढ़ते प्रदूषण के स्तर के साथ, व्यक्तियों को अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है।” इन चुनौतियों के बावजूद सर्वेक्षण ने जनता के बीच इससे निपटने के उपायों को अपनाने में कमी नजर आई। केवल 35 प्रतिशत ने सुरक्षात्मक आईवियर या धूप का चश्मा पहनने की सूचना दी, और लगभग 40 प्रतिशत ने उच्च प्रदूषण वाले दिनों में ईएनटी से संबंधित मुद्दों के लिए कोई विशेष सावधानी नहीं बरतने की बात स्वीकार की। फिर भी, आधे से अधिक लोगों ने आंखों और ईएनटी स्वास्थ्य पर प्रदूषण के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में चिंता व्यक्त की।   recent visitors 133