राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर जिलों में उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम हुआ

भोपाल उपभोक्ता दिवस' पर जिलों में जिला प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में खाद्य विभाग द्वारा उपभोक्ताओं की जागरूकता के लिये विभिन्न आयोजन किये गये। इस अवसर पर संगोष्ठी में जिला उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष/सदस्यों, उपभोक्ता संगठन के प्रतिनिधियों तथा उपभोक्ताओं से जुड़े विभागों-नापतौल, विद्य़ुत, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, ऑयल कंपनीज, बैंक और बीमा के विषय-विशेषज्ञों के द्वारा कार्यक्रम में उपभोक्ताओं को उपभोक्ताओं के अधिकार उपभोक्ता के बाद दायर करने की प्रक्रिया, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में उपभोक्ता के लिये किये गये प्रावधानों, ठगी एवं भ्रामक विज्ञापनों से बचने के तरीके आदि विभिन्न उपभोक्ता संबंधी विषयों पर व्याख्यान, परिचर्चा एवं संवाद हुआ। उपभोक्ता जागरूकता के लिये कुछ जिलों में 'उपभोक्ता जागरूकता रथ' भी भ्रमणार्थ निकाला गया। उपभोक्ता मार्गदर्शन के लिये विभिन्न उपभोक्ता से जुड़े विभागों द्वारा जिला स्तरीय 'उपभोक्ता प्रदर्शनी' आयोजित कर उपभोक्ताओं में जागरूकता प्रसारित की गई। आयोजन में उपभोक्ताओं की सफल कहानी, प्रश्नमंच आदि का भी समावेश किया गया।   recent visitors 48

67वीं नेशनल शूटिंग चैम्पियनशिप, मध्यप्रदेश ने राइफल इवेंट में जीते 2 कांस्य पदक

भोपाल भोपल में 15 से 31 दिसंबर 2024 तक आयोजित 67वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैम्पियनशिप में 24 दिसंबर को हुए राइफल इवेंट्स में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 कांस्य पदक अपने नाम किए। मध्यप्रदेश के पदक विजेता में 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम (सीनियर) मे कांस्य पदक ऐश्वर्य प्रताप सिंह, गौतमी भनोट ने जीता। इसी प्रकार 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम (यूथ) में कांस्य पदक सत्यार्थ पटेल, गौतमी भनोट ने हासिल किया। प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि विवेक पोरवाल प्रमुख सचिव राजस्व और राजीव भाटिया सचिव भारतीय राष्ट्रीय रायफल संघ रहे, जिन्होंने पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने पदक विजेता खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए कहा, "ऐश्वर्य प्रताप सिंह, गौतमी भनोट और सत्यार्थ पटेल जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। यह सफलता प्रशिक्षकों की मेहनत और खिलाड़ियों की लगन का नतीजा है।" उन्होंने अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक जॉयदीप कर्माकर और सहयोगी प्रशिक्षक वैभव सुनीता की भी सराहना की, जिनके मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने यह उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी ने इन उपलब्धियों के साथ अपनी श्रेष्ठता और प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया।   recent visitors 44

67वीं नेशनल शॉटगन चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश ने जीते 4 पदक

भोपाल नई दिल्ली में 11 दिसंबर 2024 से 19 जनवरी 2025 तक आयोजित 67वीं नेशनल शॉटगन चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य सहित कुल 4 पदक जीते। पदक विजेता खिलाड़ी और श्रेणियाँ     जूनियर स्कीट व्यक्तिगत (महिला)     वंशिका तिवारी ने रजत     सीनियर स्कीट टीम (महिला)     शिवानी रायकवार, वंशिका तिवारी, मानसी रघुवंशी ने कांस्य     जूनियर स्कीट टीम (महिला)     शिवानी रैकवार, काजल सिंह बघेल, मानसी रघुवंशी ने स्वर्ण     जूनियर स्कीट टीम (पुरुष)     ज्योतिर्दित्य सिंह सिसोदिया, दुष्यंत विजय भारद्वाज, उदयमान ने रजत कुल 4 पदक: स्वर्ण: 1,रजत: 2 और कांस्य: 1 खेल मंत्री की बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने टीम और खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा, "मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शॉटगन चैम्पियनशिप में अपने प्रदर्शन से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इनकी सफलता हमारे खेल अकादमी के उत्कृष्ट प्रशिक्षण और खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है।" खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मेहनत से मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर फिर से अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है।   recent visitors 45

अटल जी: आधुनिक भारत के राष्‍ट्रपुरूष

भारत रत्‍न स्‍व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर विशेष अटल जी: आधुनिक भारत के राष्‍ट्रपुरूष कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः। स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्। श्रीमद्भगवद्गीता 4/18 धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी भोपाल अर्थात जो मनुष्य कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म को देखता है, वह सभी मनुष्यों में बुद्धिमान और सर्वश्रेष्ठ है। वह कर्म प्रवृत्ति रह कर भी सर्वदा दिव्य स्थिति में रहता है। भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भी एक ऐसे ही कर्मशील युगपुरुष थे, जो जीवनपर्यंत नि:स्वार्थ और अनासक्त भाव से अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहे। उनके कार्यों में व्यक्तिगत भाव किंचित मात्र भी नहीं रहा है। उनके प्रत्येक कर्म में सदैव राष्ट्रहित सर्वोपरि था। वे केवल राष्ट्र के लिए हीं जीते थे,उनकी हर श्‍वास के लिए थी। इसलिए उनका कर्तव्य पथ उन्हें मोक्ष के मार्ग पर लेकर जाता है। व्यक्तिगत उपबंध से स्वाधीन अटल जी का चिंतन और चिंता का विषय सदैव संपूर्ण राष्ट्र रहा है। भारत और भारतीयता की संप्रभुता एवं उसके संवर्धन की कामना ही उनके चिंतन और दर्शन में सर्वोपरि रही है। उन्होंने राष्ट्र के सम्मान और समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और कभी भी किसी भी संकट से विचलित नहीं हुए। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता की भावना,जिस ओजस्विता, तेजस्विता और वीरता के स्वरों के साथ व्यक्त हुई, वह राष्ट्र के गौरव को रेखांकित करती है। अटल जी कहते हैं- आज सिंधु में ज्वार उठा है, नगपति फिर ललकार उठा है, कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर, पांचजन्य हुँकार उठा है। शत–शत आघातों को सहकर, जीवित हिंदुस्तान हमारा, जग के मस्तक पर रोली-सा, शोभित हिंदुस्तान हमारा। दुनियाँ का इतिहास पूछता, रोम कहाँ, यूनान कहाँ है? घर–घर में शुभ अग्नि जलाता, वह उन्नत ईरान कहाँ है? दीप बुझे पश्चिमी गगन के, व्याप्त हुआ बर्बर अँधियारा, किंतु चीरकर तम की छाती, चमका हिंदुस्तान हमारा। अटल जी का राष्ट्रवादी चिंतन उनकी राजनीति, लेखनी और व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वह भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के प्रबल समर्थक थे। उनके विचारों के केंद्र में सदा भारत रहा है। उनका राष्ट्रवाद ‘’सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’’ के सिद्धांत पर आधारित था। उनका मानना था कि भारतीय सभ्यता की नींव में सहिष्णुता, विविधता और समानता के मूल्य निहित हैं। वे कहते हैं- भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्र पुरुष है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए। अटल जी एक आदर्शवादी राजनेता के साथ एक काव्य साधक भी थे। उनकी काव्य साधना में मानव समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता आद्योपांत प्रकट होती है। वह एक ऐसे भारत के निर्माण का स्वप्न देखते थे, जो भूख, भय, गरीबी, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो। उनकी काव्य साधना में एक कर्मयोगी की कर्तव्य-परायणता और राष्ट्रवाद की दृढ़ भावना की झलक दिखाई देती है। वह कहते हैं – पंद्रह अगस्त का दिन कहता, आजादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है,रावी की शपथ न पूरी है। दिन दूर नहीं खंडित भारत को, पुनः अखंड बनाएंगे। गिलगित से गारो पर्वत तक, आजादी पर्व मनाएंगे। वाजपेयी जी एक अदम्‍य साहसिक व्यक्तित्व के धनी थे, वे जो सोच लेते थे उसे करके ही मानते थे। उनके राजनीतिक निर्णय में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनका राष्ट्रवाद ‘’आत्मनिर्भर भारत’’ की अवधारणा पर आधारित था। वह भारत को आर्थिक, सामरिक और वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल विजय जैसे अद्वितीय कार्य उनकी इस कविता को चरितार्थ करते हैं – टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी, अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर, लिखता हूं, मिटाता हूं गीत नया गाता हूं । वे भारत की एकता और अखंडता के लिए कितने सजग और संघर्षशील थे। यह बात उनकी कविताओं में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे कहते हैं – आहुति बाक़ी यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा। अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ।। अटल जी का राष्ट्रवाद समावेशी था। वे धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर थे, किंतु इसका आशय तुष्टीकरण नहीं था। उनका मानना था कि सभी धर्म का सम्मान होना चाहिए और किसी भी धर्म को विशेष लाभ नहीं मिलना चाहिए। वह भारत के सभी वर्गों, धर्म और जातियों के लिए समान अवसर और समान अधिकार सुनिश्चित करना चाहते थे। वाजपेयी जी एक आदर्शवादी और सिद्धांतवादी राजनेता थे। उनके चिंतन में राजनीति और नैतिकता का गहरा संबंध था। उनका मानना था,कि राजनीति में नैतिक मूल्यों का पालन किया जाना आवश्‍यक है। वह कहते थे – ‘’राजनीति में विरोध हो लेकिन विरोधी को शत्रु न माने।’’ उनका मानना था कि, राजनीति में विचारों का संघर्ष हो सकता है लेकिन उसे व्यक्तिगत वैमनस्‍य में नहीं बदलना चाहिए। इन्हीं राजनीतिक आदर्श ने उन्हें भारतीय राजनीति का अजातशत्रु बना दिया है।दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके सर्वांगीण राष्ट्रवादी चिंतन के कारण ही वर्ष 1994 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री व्‍ही०पी० नरसिम्हा राव द्वारा विशेष आग्रह कर अटल जी को जिनेवा में मानवाधिकारों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा था। भारत जैसे बड़े गणतांत्रिक राष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष द्वारा सरकार का पक्ष प्रस्तुत किए जाने की यह घटना अपने आप में आश्चर्यजनक थी। इस घटना के कारण भारत के लोकतंत्र के प्रति विश्व में निष्ठा और विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ। यह घटना अटल जी की योग्यता और उत्कृष्टता का प्रमाण है अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राष्ट्रवादी राजनेता नहीं ही नहीं थे, बल्कि एक गहरे दार्शनिक चिंतक भी थे। उनका दार्शनिक चिंतन, जीवन, राजनीति, समाज और राष्ट्रीयता के व्यापक आयाम को समेटे हुए था। उनकी विचारधारा, मानवीय मूल्य, सहिष्णुता और सत्य निष्ठा पर आधारित थी। उनका दार्शनिक दृष्टिकोण मानवता के प्रति करुणा और मानव कल्याण की भावना से ओत-प्रोत था। उनकी कविता ‘जीवन की ढलान पर’,’मिले दो पल आराम के’ इस विचारधारा को सहज ही अभिव्यक्त करती है। अटल जी का दार्शनिक चिंतन समाज और अर्थव्यवस्था के समावेशी विकास पर केंद्रित था। उनका मानना था कि देश का विकास तभी संभव है,जब समाज के सभी वर्गों को सामान अवसर प्राप्त होंगे एक अवसर पर अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा था कि, ‘’हमने समाज के एक बड़े वर्ग को समाज की मुख्य धारा से … Read more

अटल जी के नदी जोड़ो स्वप्न से मिली जनगण को सौगात: डॉ. मोहन यादव

भोपाल उजियारे में, अंधकार में, कल-कछार में, बीच धार में, क्षणिक जीत में दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।। कदम मिलाकर चलने का उद्गोष करने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज 100वीं जयंती है। भारत निर्माण के दृष्टा श्रद्धेय अटल जी को शत-शत नमन। श्रद्धेय अटल जी ने संघ के स्वयंसेवक से लेकर राष्ट्रधर्म के संपादक, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के दायित्वों के बीच कार्यकर्ताओं की पीढ़ियां निर्मित कीं। व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण की उनकी परिकल्पना के सभी पक्षों ने देश को आधार प्रदान किया। धरती को सुजलाम् सुफलाम् करने और समृद्धि के नये आयाम स्थापित करने के लिये श्रद्धेय अटल जी ने लगभग 20 वर्ष पूर्व नदी जोड़ो अभियान की संकल्पना की थी। उन्होंने देशभर की नदियों को जोड़कर बिखरी पड़ी जलराशि के समुचित प्रबंधन का सपना देखा था।उनका सपना था, देशभर की नदियां आपस में जुड़ें और जल की एक-एक बूंद का उपयोग समाज और राष्ट्र के लिये हो। श्रद्धेय अटल जी 100वीं जयंती पर आज मध्यप्रदेश में केन-बेतवा से विश्व की पहली नदी जोड़ो परियोजना द्वारा जल सुरक्षा का स्थायी समाधान करने की दिशा में महती कदम उठाया जा रहा है। मुझे यह बताते हुये प्रसन्नता है कि आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री और वर्तमान पीढ़ी के भागीरथ नरेन्द्र मोदी जी खजुराहो में देश की पहली, महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का शिलान्यास करेंगे। इसी के साथ श्रद्धेय अटल जी का नदियों को आपस में जोड़ने का संकल्प और समृद्धि का सपना मूर्तरूप लेगा।मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, सैकड़ों नदियों की विपुल जलराशि से समृद्ध है। प्रदेश की नदियों के आशीर्वाद से यह बहुउद्देशीय परियोजना बुंदेलखंड की जीवन रेखा साबित होगी। यह परियोजना छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर विकसित की जा रही है। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई के दौधन बांध एवं 2 टनल का निर्माण होगा। बांध में 2 हजार 853 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण किया जायेगा। इसमें दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मध्यप्रदेश के 10 जिले पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया के लगभग 2 हजार ग्रामों में 8.11 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी और लगभग 7 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी और 103 मेगावॉट जल विद्युत एवं 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इसका लाभ संपूर्ण मध्यप्रदेश को मिलेगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना से बुंदेलखंड के हर खेत तक सिंचाई के लिये पानी पहुंचेगा। प्रदेश में बिजली, कृषि, उद्योग और पेयजल के लिये भरपूर पानी उपलब्ध होगा। खेत को पानी मिलने से फसलों का अमृत बरसेगा। किसानों के जीवन में खुशहाली आयेगी और बुंदेलखंड की तस्वीर तथा तकदीर बदलेगी। इस परियोजना से खेती-किसानी, उद्योग, व्यवसाय और पर्यटन को गति मिलेगी जिससे पलायन रुकेगा और नागरिकों का जीवन खुशहाल होगा। जलराशि की विपुलता के साथ बाढ़ तथा सूखा, दोनों समस्याओं का समाधान होगा। हमारा संकल्प है विरासत के साथ विकास। इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुएपरियोजना में ऐतिहासिक चंदेलकालीन 42 तालाबों को सहेजने का कार्य किया जायेगा।यह तालाब वर्षाकाल में जल से भर जायेंगे। इससे धरती का जल स्तर बढ़ेगा जिसका लाभ लोगों को मिलेगा। मध्यप्रदेश कृषि बाहुल्य प्रदेश है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का हमारा लक्ष्य है। मुझे विश्वास है कि केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना से हम इस लक्ष्य को पूर्ण करने में सफल होंगे और बुंदेलखंड की प्रगति के नये द्वार खुलेंगे। इसी विश्वास के साथ मैंने बुंदेलखंड के किसानों से यह आग्रह किया था कि यहां के सूखे का तोड़ निकल जायेगा, किसी भी हाल में अपनी जमीन मत बेचना। मुझे खुशी है कि मेरा वह विश्वास सही साबित हुआ। यह हमारे लिये प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, इस समय जनकल्याण पर्व मना रहा है। अटल जी के 100वीं जयंती पर त्रिपक्षीय अनुबंध से केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की सौगात प्रदेशवासियों को मिलना अद्भुत संयोग है। मुझे बताते हुए हर्ष है कि कुछ दिनों पूर्व हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना की सौगात दी थी। इस परियोजना में 21 बांध, बैराज निर्मित किये जाएंगे। परियोजना से प्रदेश के 3217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। मालवा और चंबल क्षेत्र में 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। एक साथ प्रदेश में दो नदी जोड़ो परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाना ऐतिहासिक अवसर है। यह हमारे लिये गर्व की बात है कि इतिहास में बुंदेलखंड शौर्य, पराक्रम, वीरता और बलिदान का प्रतीक है। वीरों की भूमि बुंदेलखंड अब नदी परियोजना से विकास की भूमि के रूप में जानी जायेगी। मुझे बताते हुये आनंद है कि आज ही के दिन प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन ऊर्जा के प्रति किये गये प्रयास धरातल पर उतरने वाले हैं। पुण्य सलिला मां नर्मदा पर विकसित ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण करेंगे। परियोजना के प्रथम चरण में इस वर्ष अक्टूबर माह से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो गया है। लोकतंत्र की प्रथम इकाई, ग्राम पंचायत से आरंभ होती है। अटल जी ने गांव को सुशासित और सशक्त बनाने का अभियान चलाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने, श्रद्धेय अटलजी के स्वप्न को साकार करने के लिये गांव को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, समृद्ध और सुशासित बनाने का संकल्प लिया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत का अपना भवन हो, इसके लिये प्रधानमंत्री आज मध्यप्रदेश में 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन करेंगे। श्रद्धेय अटल जी की 100वीं जन्म जयंती पर आज शुरू होने वाली ऐतिहासिक परियोजनाओं और कार्यों से प्रगति के नये द्वार खुलेंगे। बुंदेलखंड जलशक्ति से संपन्न हो जायेगा और किसान समृद्ध होंगे। इससे समूचे क्षेत्र में खुशहाली आयेगी और युवाओं को नौकरी के लिये पलायन नहीं करना पड़ेगा। सौभाग्य से यह सब संभव हुआ है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और डबल इंजन की सरकार से। हमारी सरकार ने पहली बार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर उद्योगों को छोटे शहरों तक पहुंचाने का नवाचार किया है। … Read more

महाकुंभ के कारण भोपाल मंडल से होकर गुजरने वाली कई यात्री ट्रेनों को निरस्त कर दिया, 12 जनवरी तक 16 गाड़ियां कैंसिल

भोपाल दक्षिण मध्य रेलवे, सिकंदराबाद मंडल के काजीपेट-विजयवाड़ा खंड के मोटूमारी जंक्शन स्टेशन पर इंटरलाकिंग कार्य चल रहा है। इस कारण भोपाल मंडल से होकर गुजरने वाली कई यात्री ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। यह ट्रेनें हुईं निरस्त ट्रेन 22646 कोच्चुवेली-इंदौर एक्सप्रेस 28 दिसंबर से चार जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 22645 इंदौर-कोच्चुवेली एक्सप्रेस 30 दिसंबर से छह जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12511 गोरखपुर-कोचूवेली एक्सप्रेस 26 दिसंबर से पांच जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12512 कोचूवेली-गोरखपुर एक्सप्रेस 31 दिसंबर से आठ जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12521 बरौनी-एर्नाकुलम एक्सप्रेस 23 दिसंबर से छह जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12522 एर्नाकुलम-बरौनी एक्सप्रेस दिनांक 27 दिसंबर से 10 जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 01927 कानुपर-मदुरै स्पेशल 25 दिसंबर से आठ जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 01928 मदुरै-कानुपर स्पेशल 27 दिसंबर से 10 जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 04717 हिसार-तिरुपति स्पेशल 28 दिसंबर एवं चार जनवरी को निरस्त रहेगी। ट्रेन 04718 तिरुपति-हिसार स्पेशल 30 दिसंबर एवं छह जनवरी को निरस्त रहेगी। ट्रेन 06509 केएसआर बेंगलुरू – दानापुर एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन 30 दिसंबर एवं छह जनवरी को निरस्त रहेगी। ट्रेन 06510 दानापुर – केएसआर बेंगलुरू एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन एक जनवरी एवं आठ जनवरी को निरस्त रहेगी। भोपाल मंडल की पैसेंजर, मेमू ट्रेनें हुईं निरस्त महाकुंभ के कारण भोपाल मंडल में यात्री ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। रेल प्रशासन ने अपरिहार्य कारणों से कई पैसेंजर और मेमू ट्रेनों को अस्थायी रूप से निरस्त करने का निर्णय लिया है। यात्री यात्रा करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति के बारे में रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ये ट्रेनें हुईं निरस्त 27 दिसंबर से 28 फरवरी तक ट्रेन 06603-06604 – बीना-कटनी मुडवारा-बीना पैसेंजर स्पेशल मेमू ट्रेन 06623-06624 – कटनी-बरगवां-कटनी मेमू स्पेशल ट्रेन 11606-11605 – भोपाल-बीना मेमू ट्रेन 06632 – बीना-भोपाल पैसेंजर स्पेशल मेमू 28 दिसंबर से 1 मार्च तक ट्रेन 06631 – भोपाल-बीना पैसेंजर स्पेशल मेमू   recent visitors 56

अगर 31 दिसंबर तक आचार संहिता नहीं लगी, तो निगम चुनाव पर लग सकता है मतदाता सूची का ग्रहण

रायपुर  नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव को लेकर दावेदार और मतदाता पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं। अब इसमें सबसे बड़ी बात जो निकलकर सामने आ रही है, उसमें अगर 31 दिसंबर तक आचार संहिता नहीं लगी, तो वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण करना पड़ेगा। इससे चुनाव दो से तीन माह तक टल सकता है। दरअसल, आयोग को एक जनवरी 2025 के हिसाब से नई मतदाता सूची तैयार करनी पड़ सकती है। निगम के चुनाव विशेषज्ञों की मानें, तो नई मतदाता सूची एक जनवरी 2024 के आधार पर तैयार की गई है। वहीं, एक जनवरी 2025 से फिर 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवाओं के लिए लिस्ट का पुनरीक्षण करना पड़ेगा। साथ ही पांच जनवरी से निगम की शहरी सरकार का कार्यकाल भी पूर्ण होने जा रहा है। ऐसे में छह जनवरी 2025 को महापौर एजाज ढेबर का इस्तीफा देना तय है। लिहाजा, कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर सरकार को चुनाव कराना होगा, तो 31 दिसंबर से पहले अचार संहिता लग जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है 29 वर्ष बाद फिर निगम में एक बार प्रशासक बैठने की पूरी संभावना है। नगर निगम में महापौर के बराबर प्रशासक का ओहदा होता है। वहीं, पहले निगम में प्रशासक के तौर पर काम करने वाले अधिकारियों ने भी शहर को बहुत कुछ दिया था। इसमें 1985 से 1995 तक सात प्रशासक कार्य किए थे। इस दौरान रायपुर निगम की प्रशासनिक बागडोर भारतीय और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के हाथों में रही। इन प्रशासकों ने शहर को बहुत कुछ दिया है। 1985 में शासन द्वारा नगर निगम में ओंकार प्रसाद दुबे को प्रशासक नियुक्त किया था। वे 1985 से 1987 तक प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी संभालते रहे। 1987 से 88 तक अजयनाथ को प्रशासक की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने रायपुर को सबसे बड़ा होलसेल सब्जी मार्केट शास्त्री बाजार दिया। मनोज श्रीवास्तव भी 1990 से 93 तक प्रशासक रहे। वहीं, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जीएस मिश्रा 1993 से 95 तक रायपुर निगम में प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनके अलावा बजरंग सहाय, बीएस श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव भी प्रशासक रह चुके हैं। 27 को होगा महापौर का आरक्षण नगर निगम के वार्डों का आरक्षण होने के बाद अब 27 दिसंबर को महापौर के लिए आरक्षण होगा। आरक्षण की प्रक्रिया पं. दीनदयाल उपाध्याय आडोटोरियम में सुबह 10 बजे होगा। वहीं, इस बार चक्रानुगत तरीके से आरक्षण की प्रक्रिया होने की संभावना है। ऐसे में महापौर पद के लिए ओबीसी की सीट आरक्षित हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो बीते पांच वर्षों से महापौर बनने के लिए तैयारी कर रहे निगम के कई दिग्गज नेताओं की मेहनत पर पानी फिर सकता है। दो से तीन माह के लिए बैठा सकते हैं प्रशासक नगर निगम में इस बार प्रशासक बैठने की संभावना लगभग तय लग रही है। 29 वर्ष बाद ऐसा होगा जब निगम की कमान प्रशासन संभालेंगे। हालांकि, इस बार अगर प्रशासक बैठाया जाएगा, तो वह दो से तीन माह के लिए ही बैठेगा। निगम के उच्चाधिकारियों की माने तो रायपुर कलेक्टर या संभाग आयुक्त को प्रशासक के तौर पर बैठाया जा सकता है। हालांकि, निगम आयुक्त अबिनाश मिश्रा को भी यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, क्योंकि शासन स्तर उन्हें प्रशासक के तौर जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा है। recent visitors 48