मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर किया दुःख व्यक्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि  पूर्व प्रधानमंत्री, प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह जी अर्थशास्त्र के उन दिग्गजों में से एक थे, जो देश के वित्त मंत्री, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर और योजना आयोग के प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्होंने  शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों और शुभचिंतकों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। recent visitors 48

पांढुर्णा: भाजपा जिला अध्यक्ष के लिए संगठन ने भेजा नामों का पैनल, आलाकमान करेगा अंतिम फैसला

पांढुर्णा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पांढुर्णा जिला संगठन में जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। रायशुमारी के माध्यम से संभावित नामों का चयन किया गया और पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा गया। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व इन नामों का आकलन कर अंतिम निर्णय करेगा। जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया: पहली बार नई रणनीति भाजपा ने पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह जिलाध्यक्षों के चयन के लिए विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई है। पार्टी ने तय किया है कि संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण, और नेतृत्व कौशल को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया का स्वरूप भाजपा जिला कार्यालय में 12 मंडल अध्यक्षों, तीनों तहसीलों (पांढुर्णा, सौंसर, नांदनवाड़ी) के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ रायशुमारी की गई। रायशुमारी के आधार पर तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया गया। सभी नाम प्रदेश भाजपा कार्यालय भेजे गए, जहां से यह सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। केंद्रीय नेतृत्व दावेदारों का मूल्यांकन कर अंतिम चयन करेगा। प्रबल दावेदार और सामाजिक समीकरण जिलाध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मुख्यतः कुनबी समाज से वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताई महाले, राहुल मोहोड़, संदीप मोहड़, देवीदास राउत, वही पावर समाज से श्रीमती सुनीता यादवराव डोबले, क्रिष्णकुमार डोबले और तेली समाज से श्रीमती मीनाक्षी ताई खुरसंगे, ठाकुर समाज से नरेंद्र परमार जैसे दावेदार भी चर्चा में रहे। हालाकि संगठन नेतृत्व में प्रबल नाम वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली महाले का माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला संगठन ने सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की अनुभवजन्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए पैनल तैयार किया है। केंद्रीय नेतृत्व सभी नामों का आकलन करेगा और जनवरी 2025 तक जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है। संघ की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक अनुभव को मिलेगी प्राथमिकता भाजपा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि है, और जिन्होंने संगठन में अनुकरणीय कार्य किया है। भाजपा की नई रणनीति इस बार भाजपा ने जिलाध्यक्ष चयन में पारदर्शिता और संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। पार्टी का उद्देश्य है कि सक्षम और प्रभावी नेतृत्व तैयार किया जाए, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में संगठन को मजबूत कर सके। recent visitors 64

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे, 92 साल की उम्र में AIIMS में निधन

नई दिल्ली भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार, 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। 92 वर्षीय डॉ. मनमोहन सिंह को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद गुरुवार शाम एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एम्स नई दिल्ली ने मनमोहन के निधन की पुष्टि करते हुए न्यूज बुलेटिन जारी किया है। एम्स ने कहा, "अत्यंत दुःख के साथ हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की सूचना देते हैं। उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण उपचाराधीन थे और 26 दिसंबर 2024 को घर पर अचानक बेहोश हो गए थे। घर पर ही उन्हें तुरंत पुनर्जीवित करने के उपाय शुरू किए गए। उन्हें रात 8:06 बजे एम्स, नई दिल्ली के मेडिकल इमरजेंसी में लाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और रात 9:51 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।" पीएम मोदी ने भी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने लिखा, "भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन पर शोक मना रहा है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। संसद में उनके हस्तक्षेप भी बहुत ही व्यावहारिक थे। हमारे प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए।" इससे पहले कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस खबर की पुष्टि की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मनमोहन सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि दी। डॉ. मनमोहन सिंह अपनी सरलता, ईमानदारी और उत्कृष्ट आर्थिक नीतियों के लिए जाने जाते थे। उनका निधन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।  मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने जताया दुख पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, "देश ने एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक अर्थशास्त्री भी खो दिया है। पंजाब के एक गांव में जन्म लेने से लेकर अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्हें उनकी सादगी और उनके आर्थिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। आर्थिक सुधार के प्रणेता और ‘अनिच्छुक राजा’ ब्रिटिश मीडिया BBC ने डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की जानकारी देते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, ‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधार के प्रणेता मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे और उन्हें प्रमुख उदारवादी आर्थिक सुधारों का निर्माता माना जाता है.’ न्यूज़ एजेंसी Reuters ने लिखा है, ‘प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में वह ‘अनिच्छुक राजा’ के तौर पर वर्णित किए गए. मृदुभाषी मनमोहन सिंह, जिनका गुरुवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया, यकीनन भारत के सबसे सफल नेताओं में से एक थे. वह भारत का नेतृत्व करने वाले पहले सिख प्रधानमंत्री थे. उन्हें भारत को अभूतपूर्व आर्थिक विकास की ओर ले जाने और करोड़ों लोगों को भयंकर गरीबी से बाहर निकालने का श्रेय दिया जाता है. क़तरी ब्रॉडकास्टर अल जज़ीरा ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर लिखा है कि, वह 90 के दशक में भारत के आर्थिक उदारीकरण के वास्तुकार थे. पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाया. अलजज़ीरा ने लिखा कि, ‘सौम्य स्वभाव वाले टेक्नोक्रेट सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे. डॉ. मनमोहन सिंह: एक महानायक की जीवन यात्रा डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान में) के गाह गांव में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। बचपन से ही वे मेधावी छात्र रहे। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय गए। डॉ. सिंह ने 1950 के दशक में अपने करियर की शुरुआत आर्थिक मामलों में शोधकर्ता के रूप में की। उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें 1971 में भारत सरकार में आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया। बाद में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर भी रहे। उदारीकरण के जनक 1991 में, भारत जब गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, उस समय डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसने भारत को आर्थिक उदारीकरण की राह पर आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश के दरवाजे खुले और आर्थिक विकास को गति मिली। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक दो कार्यकालों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो लोकसभा चुनाव नहीं जीते थे और राज्यसभा सदस्य रहते हुए इस पद पर आसीन हुए। उनके कार्यकाल में आर्थिक विकास और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। निजी जीवन डॉ. मनमोहन सिंह एक सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले नेता थे। उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं। वे साहित्य, संगीत और अध्यात्म में गहरी रुचि रखते थे। डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। 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महाकुंभ: प्रयागराज जाने के लिए छत्तीसगढ़ से कुंभ मेला पांच स्पेशल ट्रेनों का परिचालन होगा, जानिए शेड्यूल

रायपुर प्रयागराज में हो रहे महाकुंभ को ध्यान में रखकर रेलवे ने संगम में स्नान करने वाले श्रद्वालुओं को बड़ी सुविधा दी है। दक्षिण रेलवे से चलने वाली पांच महाकुंभ स्पेशल ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के गोंदिया, बालाघाट और नैनपुर होकर गुजरेगी। महाकुंभ के दौरान 3,000 स्पेशल ट्रेनें सहित 13,000 से अधिक ट्रेनें दौड़ेगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा तीन कुंभ मेला स्पेशल ट्रेनों का परिचालन रायगढ़-वाराणसी, दुर्ग-वाराणसी और बिलासपुर-वाराणसी के मध्य तीन फेरे के लिए चलाई जा रही है। ट्रेन नंबर 08251/08252 रायगढ़-वाराणसी-रायगढ़ कुंभ मेला स्पेशल, ट्रेन नंबर 08791/08792 दुर्ग-वाराणसी-दुर्ग कुंभ मेला स्पेशल और ट्रेन नंबर 08253/08254 बिलासपुर-वाराणसी-बिलासपुर कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन व्हाया बिलासपुर, कटनी, प्रयागराज के मार्ग से चलाई जा रही है। इन स्टेशन्स से होकर गुजरेंगी ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर चलने वाली ट्रेन नंबर 08530/08529 विशाखपत्तनम-पंडित दीनदयाल उपाध्याय-विशाखपत्तनम और ट्रेन नंबर 08562/08561 विशाखपत्तनम-गोरखपुर–विशाखपत्तनम कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन चल रही है। ये सभी ट्रेनें रायपुर, बिलासपुर, उसलापुर, रायगढ़, चांपा, पेंड्रारोड, अनूपपुर, शहडोल और उमरिया स्टेशन पर ठहरकर गंतव्य तक जाएगी। इसी प्रकार दक्षिण रेलवे से चलने वाली पांच महाकुंभ मेला स्पेशल ट्रेन में 06005/06006 कन्याकुमारी-गया- कन्याकुमारी साप्ताहिक कुंभ मेला स्पेशल, ट्रेन नंबर 06021/06022 कोचुवेलि-गया-कोचुवेलि साप्ताहिक कुंभ मेला स्पेशल, ट्रेन नंबर 06001/06002 चेन्नई सेंट्रल-गोमती नगर-चेन्नई सेंट्रल साप्ताहिक कुंभ मेला स्पेशल, ट्रेन नंबर 06003/06004 कन्याकुमारी-बनारस-कन्याकुमारी साप्ताहिक कुंभ मेला स्पेशल और ट्रेन नंबर 06007/06008 कोचुवेलि-बनारस-कोचुवेलि साप्ताहिक कुंभ मेला स्पेशल शामिल हैं। इतवारी-टाटानगर रद चक्रधरपुर मंडल के राजगांगपुर स्टेशन यार्ड में एफओबी गर्डर लांचिंग के लिए रेलवे ने मेगा ब्लॉक लिया है। इसके चलते 29 दिसंबर को नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी एवं टाटानगर से रवाना होने वाली ट्रेन नंबर 18110/18109 इतवारी एक्सप्रेस रद रहेगी। वहीं, 28 दिसंबर को हैदराबाद से रवाना होने वाली ट्रेन नंबर 07051 हैदराबाद-रक्सौल स्पेशल एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चार घंटे देरी से रवाना होगी। इसी तरह से 28 दिसंबर को सिकंदराबाद जंक्शन से रवाना होने वाली ट्रेन नंबर 17007 सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से एक घंटे देर से चलेगी। वहीं, 29 दिसंबर को दुर्ग से रवाना होने वाली ट्रेन नंबर 13287 दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से पांच घंटे देरी से रवाना होगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि असुविधा से बचने पूछताछ सेवा 139 से ट्रेनों की सही स्थिति की जानकारी लें। recent visitors 78

महाकुंभ को सफल बनाने उप्र सरकार और भारत सरकार मिलकर व्यापक स्तर पर काम कर रही : गजेंद्र सिंह शेखावत

जोधपुर  केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने  कहा कि इस बार का महाकुंभ दिव्य और भव्य होगा। इस दौरान भारत की सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वैदिक सभ्यता से लेकर के महाभारत काल में गुप्त शासन काल में चालुक्य वंश के समय में और उसके बाद पूरे मध्यकालीन भारत इतिहास में कुंभ का उल्लेख मिलता है। पिछले कुंभ में लगभग 20 करोड़ लोगों ने स्नान किया था। इस बार लगभग 45 करोड़ लोग महाकुंभ का गवाह बनेंगे। इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार मिलकर व्यापक स्तर पर काम कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि वहां डेढ़ लाख से ज्यादा शौचालय बनाए गए हैं। कुंभ में आने वाले कल्पवासी जो पूरे समय में रहकर के वहां पर कल्प साधना करते हैं, उनकी संख्या 10 लाख की बजाय 20 लाख के आसपास रहने वाली है। जो पूरे समय में एक स्थान पर रहेंगे। उन सबके लिए कुंभ एक अच्छा अनुभव देने वाला ऐसा कुंभ बने, इसको लेकर के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय कम कर रहा है। वहीं 20 लाख विदेशी सैलानी महाकुंभ में आने वाले है। इस बार का कुंभ दुनिया के लिए ऐसा अवसर होगा, जहां भारत की सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिलेगी। हर 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी 2025 को प्रयागराज में समाप्त होने वाला है। महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और श्रद्धा का भी प्रतीक है। इस बार महाकुंभ मेला 2025 में प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले 2013 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था। महाकुंभ में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत भी जुटते हैं। इस दौरान वह हवन, पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। महाकुंभ में कुछ विशिष्ट दिनों को शाही स्नान के रूप में मनाया जाता है। इसमें श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।     recent visitors 84

लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं का मतदान % 65.78 रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.55 था : निर्वाचन आयोग

नई दिल्ली  निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में हुए लोकसभा चुनाव में 64.64 करोड़ मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया और इन मतदाताओं में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही। निर्वाचन आयोग ने कहा कि महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.78 रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.55 था। आयोग ने कहा कि इस बार चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 रही जबकि 2019 के चुनावों में यह संख्या 726 थी। निर्वाचन आयोग ने कहा, ‘‘स्वतः संज्ञान लेकर की गई इस पहल का मकसद जनता का विश्वास बढ़ाना है, जो भारत की चुनावी प्रणाली का आधार है।’’ ये आंकड़े इन आरोपों की पृष्ठभूमि में जारी किए गए हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के आंकड़ों में हेराफेरी की गई थी। ये आंकड़े चार विधानसभा चुनावों – अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम से भी संबंधित हैं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 2019 में 540 की तुलना में कुल 10.52 लाख मतदान केंद्रों में से 40 मतदान केंद्रों या 0.0038 प्रतिशत केंद्रों पर पुनर्मतदान किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस चुनाव में महिला मतदाताओं ने अपनी उपस्थिति और भागीदारी से लोकतंत्र को नई ऊंचाई दी, जो महिलाओं के मताधिकार के नए मानक का संकेत है। महिला मतदाताओं का मतदान औसत 65.78 प्रतिशत रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का यह औसत 65.55 प्रतिशत था। महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 थी जबकि 2019 में यह संख्या 726 थी। 2019 की तुलना में थर्ड-जेंडर मतदाताओं में 46.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2024 में जहां 90,28,696 पंजीकृत दिव्यांग मतदाता रहे वहीं 2019 में यह संख्या 61,67,482 थी। वर्ष 2019 में 540 मतदान केंद्रों की तुलना में वर्ष 2024 में केवल 40 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ। दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2024 पर 42 सांख्यिकीय रिपोर्ट और एक साथ कराए गए चार राज्य विधानसभा चुनावों पर 14-14 रिपोर्टें जारी की हैं। आयोग का कहना है कि ये लगभग 100 सांख्यिकीय रिपोर्ट गहन विश्लेषण और नीतिगत अंतर्दृष्टि के लिए दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण खजाने की तरह होंगी। आयोग के अनुसार इस रिपोर्ट में उपलब्ध डेटा सेट संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों और राज्यवार मतदाताओं, मतदान केंद्रों की संख्या, राज्य तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्रवार मतदाता मतदान, पार्टी के आधार पर वोट शेयर, लिंग आधारित मतदान व्यवहार, महिला मतदाताओं की राज्यवार भागीदारी, क्षेत्रीय विविधताएं, निर्वाचन क्षेत्र डेटा सारांश रिपोर्ट, राष्ट्रीय पार्टियों, राज्य स्तरीय पार्टियों, पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) का प्रदर्शन, जीतने वाले उम्मीदवारों का विश्लेषण, निर्वाचन क्षेत्रवार विस्तृत परिणाम और बहुत कुछ का विवरण प्रदान करते हैं। यह विस्तृत डेटा सेट हितधारकों को भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पहले से उपलब्ध पिछले चुनावों के डेटा सेट से तुलना के साथ बारीक स्तर के विश्लेषण के लिए डेटा को काटने-छांटने का अधिकार देता है। आयोग का कहना है कि ये रिपोर्ट चुनावी और राजनीतिक परिदृश्य में दीर्घकालिक दृष्टिकोण और बदलावों को ट्रैक करने के लिए समय-शृंखला विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेगी।     recent visitors 88

खंडवा मेंअब रविवार के दिन भी शहर के मुख्य मार्गों की सफाई होगी, साथ ही अब घर घर वाहन डोर टू डोर कचरा लेने जाएंगे

खंडवा शहर में बेहतर सफाई के लिए निगम ने नया प्रयास शुरू किया. अब रविवार छुट्टी के दिन भी शहर के मुख्य मार्गों की सफाई होगी. साथ ही रविवार को भी अब घर घर वाहन डोर टू डोर कचरा लेने जाएंगे. इसका यह फायदा होगा कि रविवार के दिन लोग ज्यादा कचरा इकट्ठा कर बाहर फेंक देते हैं, लेकिन अब वह गाड़ी में ही डालेंगे, जिससे शहर स्वच्छ सुंदर बनेगा. पूर्व पार्षद सुनील जैन ने कहा कि शहर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए निगम आयुक्त एवं प्रशासन नित नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे शहर को साफ सुथरा रखा जा सके. इन सभी प्रयासों का एक ही उद्देश्य है कि खंडवा शहर भी स्वच्छता के मामले में नंबर वन बने. अलग-अलग प्रयोग करके आम जनता के साथ मिलकर स्वच्छता की इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा रहा है. पहले रविवार के दिन छुट्टी होने की वजह से कचरा इकट्ठा हो जाता था. कई लोग कचरा बाहर फेंक देते थे जिसकी वजह से परेशानियां होती थीं, लेकिन अब नगर निगम प्रशासन एवं महापौर के आदेश अनुसार रविवार के दिन भी डोर टू डोर कचरा वाहन जाएंगे और कचरा इकट्ठा करेंगे. प्रशासन की मुहिम यही है कि खंडवा शहर को फिर से नंबर वन बनाया जाए और साफ सफाई  हर जगह रखी जाए. हालांकि यह समस्या कई दिनों से थी, रविवार अवकाश होने की वजह से लोगों को मजबूरन कचरा बाहर इकट्ठा करना पड़ता था, लेकिन प्रशासन की इस मुहिम की वजह से अब लोगों को कचरा इकट्ठा नहीं करना पड़ेगा और वाहन डोर टू डोर जाकर कचरा इकट्ठा करके इसका निष्पादन करेगा. इससे यह कह सकते हैं कि सप्ताह भर कचरा वाहन चलने की वजह से कहीं ना कहीं शहर में साफ सफाई जरूर बढ़ेगी. recent visitors 116