पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को नहीं दी थी दो गज जमीन, इसी को लेकर उनके भाई मनोहर राव कांग्रेस पर भड़के

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद अंत्येष्टि और स्मारक को लेकर राजनीति शुरू हो गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान कर रही है। जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार हुआ था उसी तरह मनमोहन सिंह का भी जहां अंतिम संस्कार हो, वहीं स्मारक बनना चाहिए। इसपर लोगों को पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की याद आ गई कि किस तरह से उन्हें दिल्ली में अंतिम संस्कार नहीं करने दिया गया। यहां तक कि उनके पार्थिव शरीर के लिए कांग्रेस मुख्यालय के दरवाजे भी बंद कर दिए गए। इसी को लेकर पीवी नरसिम्हा राव के भाई मनोहर राव ने कांग्रेस और सोनिया गांधी दोनों को घेरा है। मनोहर राव ने कहा, पीवी नरसिम्हा के लिए सोनिया गांधी भी नहीं पहुंची। कांग्रेस के प्रधानमंत्री का निधन हो गया और वे हैदराबाद भी नहीं आ सके। उन्हें सोचना चाहिए कि पहले खुद को सुधार लें। निगम बोध घाट में किसी का भी अंतिम संस्कार हो सकता है। आप लोगों ने पीवी नरसिम्हा राव की एक प्रतिमा तक नहीं लगाई। इतने साल सत्ता मेंरहकर भी भारत रत्न नहीं दे पाए। आपने पूर्व प्रधानंत्री को क्या सम्मान दिया क्या सम्मान किया। आप बोल रहे हैं कि मनमोहन सिंह का यह नहीं हुआ, वह नहीं हुआ। जो हुआ अच्छा हुआ। उनकी कुछ प्रक्रिया है। वे ट्रस्ट वगैरह बनाकर देंगे। उन्होंने कहा, इतने प्रधानमंत्री मरे लेकिन उन लोगों का नाम ही दिल्ली में नहीं है। मोदी ने प्रधानमंत्रियों को सम्मान दिया और एक ही जगह संग्रहालय बना दिया। इतनी जमीन दी। वहीं मनमोहन सिंह को भी जगह मिलेगी। आप प्रक्रिया तो पूरी करें। कांग्रेस वालों को यह अच्छा है या यह बुरा है। लेकिन हम तो सब देख रहे हैं। मोदी इसपर कुछ नहीं बोल रहे हैं और वह भारत के विकास के लिए काम कर रहे हैं। हमारे भाई कांग्रेस में थे और हम भी कांग्रेस में हैं। मोदी जी ने उन्हें भारत रत्न दिया। मनोहर राव ने कहा, दिल्ली में मनमोहन सिंह को हमने एक कार्यक्रम में बुलाया था। हमने उन्हें पीवी नरसिम्हा राव सम्मान दिया। इन्हें गोल्ड मेडल दिया गया। मनमोहन सिंह के साथ हमारा बहुत नजदीक का रिश्ता था। हमारी बातचीत भी होती थी। हमको उनसे कोई दिक्कत नहीं है। 10 साल उन्होंने काम किया लेकिन उनके हाथ में कुछ नहीं था। वह स्वतंत्र होकर काम नहीं कर पाए। मनमोहन सिंह बहुत पढ़े लिखे शख्स थे। कांग्रेस वालों ने तो मुख्यालय का दरवाजा तक नहीं खोला था। इससे ज्यादा अपमान क्या हो सकता है। जो कुछ हुआ था उसपर मैंने दुख प्रकट किया है। मनोहर राव ने कहा, मनमोहन सिंह के निधन पर मुझे गहरा दुख है। वह 10 साल प्रधानमंत्री थे। उससे पहले पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में वित्त मंत्री थे। उस वक्त उन्हें फ्री हैंड देकर वित्त मंत्री बनाया गया था। मनमोहन सिंह जी उस जमाने में उस जमाने में बहुत परिवर्तन लाए थे। उन्होंने हिम्मत से काम किया। प्रधानमंत्री और मनमोहन सिंह जी ने गुरु शिष्य की तरह काम किया। उस जमाने में और आज में जमीन आसमान का फर्क है। आज सब लोग यहां आकर ट्रेड करना और उद्योग लगाना पसंद करते हैं। तब से अब तक कोई नई नीति नहीं आई। बता दें कि 2004 में यूपीए की सरकार के दौरान ही पीवी नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। उनका परिवार मांग कर रहा था कि उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करवाया जाए और एक स्मारक बनवाया जाए। उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने परिवार को स्मारक बनवाने का आश्वासन देकर पार्थिव शरीर को हैदराबाद ले जाने को कहा। उनका परिवार मान गया लेकिन 10 साल के शासन के दौरान ना तो उनका स्मारक बना और ना ही भारत रत्न दिया गया। गौर करने वाली बात यह भी थी कि अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनके शव को कांग्रेस मुख्यालय में भी रखने नहीं दिया गया था। जानकारों का कहना है कि गांधी परिवार नहीं चाहता था कि आर्थिक सुधारों का क्रेडिट पीवी नरसिम्हा राव को दिया जाए। इसके अलावा गांधी परिवार यह भी मानता था कि अयोध्या में बाबरी का ढांचा गिराने के पीछे उनकी भी मिलीभगत थी। recent visitors 65

निक्षय निरामय छत्तीसगढ़ अभियान : 80 बंदियों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें से 65 का एक्स-रे किया गया

महासमुंद, समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की गंभीर बीमारियों की पहचान और उनका उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महासमुंद जिले में 'निक्षय निरामय छत्तीसगढ़' कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह 100 दिवसीय अभियान 7 दिसंबर 2024 से शुरू होकर 24 मार्च 2025 तक चार चरणों में संचालित किया जाएगा।   अभियान का उद्देश्य टीबी, मलेरिया, कुष्ठ रोग और वृद्धजनों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करना और उनका समुचित इलाज सुनिश्चित करना है। अभियान का संचालन कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ श्री एस. आलोक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी. कुदेशिया के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को अभियान के तहत जिला जेल महासमुंद में विचाराधीन बंदियों का टीबी स्क्रीनिंग किया गया। इस दौरान कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक मशीन का उपयोग किया गया। कुल 80 बंदियों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें से 65 का एक्स-रे किया गया।   इस अभियान के तहत महासमुंद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर और जरूरतमंद तबकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि समुदाय के हर वर्ग को इस अभियान से लाभान्वित किया जाए। निक्षय निरामय छत्तीसगढ़' अभियान छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने और समाज के हर व्यक्ति को स्वस्थ जीवन का अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। recent visitors 59

किसान को रमखिरिया निजी क्षेत्र से दो चमचमाते हुए हीरे मिले, चमकी किसान और उसके साथियों की किस्मत

पन्ना पन्ना जिले की धरा देश-दुनिया में बेशकीमती हीरों के लिए प्रसिद्ध है अब तो हीरों की नगरी पन्ना के खेतों में भी अनाज और सब्जी की जगह हीरे निकलने लगे हैं। कुछ ऐसा ही मामला एक बार फिर देखने को मिला। बता दें कि आज रमखिरिया निवासी किसान राम नरेश दुबे और उसके चार साथियों को रमखिरिया निजी क्षेत्र से दो चमचमाते हुए हीरे मिले। जिनका वजन क्रमशः 8 कैरेट 30 सेंट व 0.90 सेंट है। इन दोनों हीरों को आगामी हीरों की नीलामी में रखा जाएगा। किसान ने जानकारी देते हुए बताया कि हीरा मिलने से उसे और उसके सभी पार्टनर को बहुत खुशी है। हीरों नीलामी के बाद मिलने वाले रुपये से वह अपने व अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में यह पैसा खर्च करेंगे। लाखों रुपये में आंकी जा रही कीमत किसान ने बताया कि वह साल भर से अधिक समय से हीरों की तलाश कर रहे थे। वही हीरा निरीक्षक नूतन जैन ने बताया कि यह कम उज्ज्वल किस्म के हीरे हैं। इन दोनों हीरों की अनुमानित कीमत लाखों में आंकी जा रही है। recent visitors 137

इंदौर में साल के बीच में गाइडलाइन बढ़ोतरी का प्रस्ताव अटका, अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका

इंदौर साल के बीच में प्रदेश के सभी जिलों के साथ ही इंदौर में गाइडलाइन बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इंदौर जिले के प्रस्ताव पर केंद्रीय मूल्यांकन समिति की मोहर लगने के बाद भी अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। ऐसे में संभावना है कि आगामी तीन माह के लिए बढ़ोतरी का प्रस्ताव अब लागू नहीं होगा, क्योंकि पंजीयन विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष की गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार करने की पहल शुरू कर दी है। इंदौर जिले में साल के बीच में 469 लोकेशन पर गाइडलाइन बढ़ोतरी को केंद्रीय मूल्यांकन समिति भोपाल द्वारा स्वीकृत किया गया था। 31 प्रतिशत तक गाइडलाइन बढ़नी थी इसमें 0 से 31 प्रतिशत तक संपत्तियों की गाइडलाइन बढ़नी थी। वहीं 105 कॉलोनियों को गाइडलाइन में शामिल करना था। स्वीकृति के बाद भी शासन स्तर से प्रस्ताव को लागू करने का निर्णय नहीं हो सका है। तीन माह बाद एक अप्रैल से आगामी वित्तीय वर्ष की नई गाइडलाइन लागू होनी है। 2400 से अधिक लोकेशन पर बढोतरी शासन स्तर से तैयारी के निर्देश पंजीयन विभाग को दिए गए हैं। विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान गाइडलाइन की दरों का अवलोकन किया जा रहा है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2400 से अधिक लोकेशन पर 0 से 91 प्रतिशत तक गाइडलाइन में बढ़ोतरी की गई थी। वहीं 154 नई कॉलोनियों को भी गाइडलाइन में शामिल किया गया था। वर्तमान में 5149 लोकेशन पर संपत्तियां रजिस्टर्ड हो रही हैं। जनवरी से होगी नई प्रक्रिया वित्तीय वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन बढ़ोतरी प्रक्रिया जनवरी से शुरू होगी। फरवरी में चारों उप पंजीयक कार्यालयों में एसडीएम की अध्यक्षता में समिति बढ़ोतरी के प्रस्ताव तैयार करेगी। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। recent visitors 54

साल के आखिरी ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- महाकुंभ में AI करेगा कमाल, डिजिटल व्यवस्था का होगा प्रदर्शन

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जिस नक्सली क्षेत्र में डर का माहौल रहता था वहां अब ''बस्तर ओलंपिक'' जैसे खेल कुंभ का आयोजन हो रहा है जो खेल प्रतिभाओं को सामने लाकर देश मे बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। पीएम मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 117वीं कड़ी में रविवार को कहा कि देश में ऐसे अनोखे खेल कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं जो हमारे देश में बदलाव और युवा साथियों के जोश एवं जज्बे के प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने प्रयागराज कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि यह न केवल विशाल और भव्य होगा बल्कि अनेकता में एकता का संदेश देते हुए पूरे कुंभ क्षेत्र में पहली बार डिजिटल व्यवस्था का प्रदर्शन होगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगले माह प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा है जो देश की विविधता और भव्यता को प्रदर्शित कर 'महाकुंभ का संदेश एक हो पूरा देश और गंगा की अविरल धारा न बंटे समाज हमारा' का पूरा देश को संदेश देगा। उन्होंने कहा 'हमारे बस्तर में एक अनूठा ओलंपिक शुरू हुआ है। जी हाँ, पहली बार हुए बस्तर ओलंपिक से बस्तर में एक नई क्रांति जन्म ले रही है। मेरे लिए ये बहुत ही खुशी की बात है कि बस्तर ओलंपिक का सपना साकार हुआ है। आपको भी ये जानकार अच्छा लगेगा कि यह उस क्षेत्र में हो रहा है जो कभी माओवादी हिंसा का गवाह रहा है। बस्तर ओलंपिक का शुभंकर है – ''वन भैंसा'' और ''पहाड़ी मैना''। इसमें बस्तर की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखती है। इस बस्तर खेल महाकुंभ का मूल मंत्र है–''करसाय ता बस्तर बरसाए ता बस्तर'' यानि ''खेलेगा बस्तर–जीतेगा बस्तर''। पहली ही बार में बस्तर ओलंपिक में सात जिलों के एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं– हमारे युवाओं के संकल्प की गौरव-गाथा है। एथलेटिक, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो और वालीबाल –हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।'' PM मोदी ने प्रतिभाओं की कहानी सुनाई और कहा 'कारी कश्यप जी की कहानी मुझे बहुत प्रेरित करती है। एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है। वे कहती हैं–बस्तर ओलंपिक ने हमें सिर्फ खेल का मैदान ही नहीं, जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। सुकमा की पायल कवासी जी की बात भी कम प्रेरणादायक नहीं है। भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल जी कहती हैं–अनुशासन और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। सुकमा के दोरनापाल के पुनेम सन्ना जी की कहानी तो नए भारत की प्रेरक कथा है। एक समय नक्सली प्रभाव में आए पुनेम जी आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं। उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। कोडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी जी को ''बस्तर यूथ आईकॉन'' चुना गया है। उनका मानना है–बस्तर ओलंपिक दूरदराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है।' उन्होंने कहा ''बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है। यह एक ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है। जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अपने क्षेत्र में ऐसे खेल आयोजनों को प्रोत्साहित करें। खेलेगा भारत–जीतेगा भारत के साथ अपने क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की कहानियां साझा करें। स्थानीय खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें। याद रखिए, खेल से न केवल शारीरिक विकास होता है बल्कि ये खिलाड़ी की स्प्रिट से समाज को जोड़ने का भी एक सशक्त माध्यम है। तो खूब खेलिए-खूब खिलिए।'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस बार प्रयागराज महाकुंभ न केवल विशाल और भव्य होगा बल्कि अनेकता में एकता का संदेश देते हुए पूरे कुंभ क्षेत्र में पहली बार डिजिटल व्यवस्था का प्रदर्शन होगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगले माह प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा है जो देश की विविधता और भव्यता को प्रदर्शित कर 'महाकुंभ का संदेश एक हो पूरा देश और गंगा की अविरल धारा न बंटे समाज हमारा' का पूरा देश को संदेश देगा। उन्होंने कहा 'अगले महीने 13 तारीख से प्रयागराज में महाकुंभ होने जा रहा है। इस समय वहां संगम तट पर जबरदस्त तैयारियाँ चल रही हैं। मुझे याद है अभी कुछ दिन पहले जब मैं प्रयागराज गया था तो हेलिकॉप्टर से पूरा कुंभ क्षेत्र देखकर दिल प्रसन्न हो गया था। इतना विशाल, इतना सुंदर, इतनी भव्यता। महाकुंभ की विशेषता केवल इसकी विशालता में ही नहीं है, कुंभ की विशेषता इसकी विविधता में भी है। इस आयोजन में करोड़ों लोग एक साथ एकत्रित होते हैं। लाखों संत, हजारों परम्पराएँ, सैकड़ों संप्रदाय, अनेकों अखाड़े, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनता है। कहीं भेदभाव नहीं दिखता, कोई बड़ा नहीं होता, कोई छोटा नहीं होता। अनेकता में एकता का ऐसा दृश्य विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा। इसलिए हमारा कुंभ एकता का महाकुंभ भी होता है। इस बार का महाकुंभ भी एकता के महाकुंभ के मंत्र को सशक्त करेगा। मैं आप सबसे कहूँगा जब हम कुंभ में शामिल हों तो एकता के इस संकल्प को अपने साथ लेकर वापस आयें। हम समाज में विभाजन और विद्वेष के भाव को नष्ट करने का संकल्प भी लें। कम शब्दों में कहूँ-महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश। और अगर दूसरे तरीके से कहना है तो मैं कहूँगा…गंगा की अविरल धारा, न बँटे समाज हमारा।''   recent visitors 91

लोग बोले- ‘ऐसा लग रहा मानो हम हम कश्मीर आए’, राजस्थान-माउंट आबू में बिछी बर्फ की चादर

आबू. राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में रविवार को एक बार फिर मौसम का बदला मिजाज देखने को मिला। चल रही सर्द हवा के साथ यहां का तापमान -4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके चलते सुबह घरों के बाहर खड़े वाहनों और खुले मैदान में बर्फ की चादर बिछ गई। माउंटआबू घूमने आए पर्यटक इस सर्द मौसम का जमकर मजा ले रहे हैं। दरअसल, हिल स्टेशन माउंट आबू में शनिवार शाम से ही तेज ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो गया था। रात में कड़ाके की ठंड के बाद सुबह-सुबह जागे लोगों को बर्फ की चादर बिछी मिली। पोलो ग्राउंड, ओरिया, गुरुशिखर, अचलगढ़ अैर देलवाड़ा जैन मंदिर समेत शहर के खुले मैदानों, पार्कों और पार्किंग स्थलों पर खड़े वाहनों पर बर्फ नजर आई। वहीं, नलों और बर्तनों में रखा गया पानी जम गया। तापमान में आई गिरावट से सुबह धूप खिलने तक बर्फ की धुंध बनी रही। इससे विजिबिलिटी भी काफी कम रही। नक्की लेक सहित विभिन्न  पर्यटकों ने बोटिंग का लुत्फ उठाया और प्रकृति के नजारों का मजा लिया।  लगातार हो रही है पर्यटकों की आवाजाही उधर, शनिवार और रविवार वीकेंड पर समीपवर्ती गुजरात सहित विभिन्न क्षेत्रों से पर्यटकों की लगातार आवाजाही हो रही है। यहां का खुशनुमा मौसम पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना है। अहमदाबाद के जितेशभाई जैन ने बताया कि यहां का मौसम अकल्पनीय है। रविवार को बर्फ देखकर ऐसा लग रहा है कि वे कश्मीर में घूमने आए हैं। वहीं, मोनिका ने कहा कि माउंटआबू किसी स्वर्ग से कम नहीं है। recent visitors 153

‘रसायन रहित बागवानी ही कारगर, प्राकृतिक उद्यानिकी को बढ़ाएं: राज्यपाल’, राजस्थान-अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ की संगोष्ठी

जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कृषि उद्यानिकी के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को देश में रसायन रहित कृषि के लिए वातावरण निर्माण किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से रोग बढ़ रहे, धरती की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। उन्होंने उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती के लिए कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पानी बचाकर उसके निर्माण के लिए भी देशभर में कार्य करने का आह्वान किया।राज्यपाल श्री बागडे रविवार को अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ द्वारा "उद्यानिकी फसलों के संरक्षण"  विषयक आयोजित 16 वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कम पानी से होने वाली फसलों, फल, फसलों को प्राकृतिक प्रकोप से बचाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जाने पर भी जोर दिया।  उन्होंने सभी कृषि विश्वविद्यालयों में  सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भी आवश्यक रूप से कार्य करने की आवश्यकता जताई।राज्यपाल ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन द्वारा 2008 में प्रस्तुत कृषि सुधारों की बनी समिति के सुझावों पर चर्चा करते हुए कहा कि लाभकारी कृषि के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कृषि उद्यानिकी के प्राचीन ज्ञान के आलोक में कृषि की नवीन तकनीक से खेती को लाभकारी किए जाने पर जोर दिया। श्री बागडे ने कहा कि हमारे यहां धीरे धीरे जंगल कम होता जा रहा है। पहले अनाज जब नहीं होता था और खेती की पैदावार नहीं थी तब उद्यानिकी फसलों पर ही मनुष्य निर्भर था। पर धीरे धीरे इस दिशा में ध्यान नहीं देने के कारण जंगलों में बहुत सी उद्यानिकी फसलें लोप हो गई। उन्होंने स्थान विशेष की जलवायु के अनुरूप उद्यानिकी फसलों के अधिकाधिक उत्पादन के लिए कार्य किए जाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने आरंभ में विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी फॉर टिश्यू कल्चर का शिलान्यास किया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत गेहूं और अन्य नवीन कृषि उत्पाद प्रौद्योगिकी का भी शुभारंभ किया।  वहीं उन्होंने माइक्रोस्कोप से फसलों में सूक्ष्म कीट परीक्षण भी किया और विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का लोकार्पण किया। आरंभ में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने संरक्षित खेती के साथ राष्ट्रीय सिंपोजियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर पद्मश्री डा. बी. एस. ढिल्लो, अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और बागवानी विश्वविद्यालय,  उत्तराखंड के  कुलपति प्रो. परविंदर कौशल, अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ के कार्यकारी सचिव प्रो. दिनेश कुमार ने भी विचार रखे। सभी का आभार डा. एन. के. गुप्ता ने जताया। recent visitors 103