Friday, July 10, 2026 1:05 am

बिजली का बिल दे सकता है शोक, बढ़े सकता है प्रति यूनिट 50 पैसे रेट

जबलपुर बिजली कंपनी दरें बढ़ाकर घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ डालना चाह रही है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 151-300 के बीच का स्लैब खत्म कर 151 यूनिट के बाद फ्लैट रेट वसूलने का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को दिया है। प्रस्ताव स्वीकृत हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान मध्यवर्ग के उन उपभोक्ताओं को होगा जो सब्सिडी के दायरे से बाहर आते हैं। प्रदेश में ऐसे करीब 25 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जिन पर 50 पैसे प्रति यूनिट का बोझ डालने की तैयारी हो रही है। 24 जनवरी तक बुलाई गई आपत्ति मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने इस संबंध में याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दी है। इस पर सुनवाई से पूर्व आयोग ने जनता से 24 जनवरी तक आपत्ति बुलाई है। बता दें कि एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व आवश्यकता 58744 करोड़ व वर्तमान दरों पर प्राप्त राजस्व 54637 करोड़ बताया है। कंपनी ने इस अंतर की राशि 4107 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए औसत 7.52 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया है। उपभोक्ताओं की चार श्रेणियों को तीन में समेटा इस प्रस्ताव में कंपनी ने घरेलू उपभोक्ता की बिजली खपत की चार श्रेणी को तीन में समेट दिया है। पहली श्रेणी 50 यूनिट, दूसरी श्रेणी 51 से 150 यूनिट और तीसरी श्रेणी 151 से ऊपर की रखी गई है। अभी 151 से 300 यूनिट की श्रेणी के लिए अलग दर तय थी। अब कंपनी 151 यूनिट के ऊपर एक दर तय करना चाह रही है। इससे 50 पैसे का बोझ प्रति यूनिट उपभोक्ता पर डालने का प्रस्ताव है। प्रदेश में अभी एक करोड़ 27 लाख कुल घरेलू उपभोक्ता हैं। इसमें बिजली कंपनी करीब एक करोड़ उपभोक्ता को सब्सिडी देती है। ये उपभोक्ता 150 यूनिट मासिक खपत के दायरे में आते हैं। कंपनी 100 यूनिट के लिए 100 रुपये और अगली 50 यूनिट पर सामान्य दर से बिलिंग करती है, इससे उपभोक्ता को करीब 450 रुपये से अधिक की बचत होती है। इस बीच 25 लाख से ज्यादा ऐसे बिजली उपभोक्ता है जिनकी मासिक खपत 151 से 300 यूनिट के भीतर रहती है। ऐेसे उपभोक्ताओं को भी अब फ्लैट रेट पर बिल भरना होगा। मध्यवर्गीय पर बोझ अधिक बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ में बदलाव करने से मध्यम वर्ग के उपभोक्ता जिनकी मासिक खपत 151 यूनिट से 300 यूनिट के बीच है उन पर अधिक बोझ डाला जा रहा है। ये वर्ग सरकारी सब्सिडी के दायरे से बाहर होता है, इसलिए उन्हें बिजली की पूरी कीमत देनी पड़ती है। एक दर की योजना मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम शैलेंद्र सक्सेना ने बतााया कि कंपनी 151 से 300 यूनिट के स्लैब को खत्म कर एक दर तय करना चाहती है। ऐसी श्रेणी के उपभोक्ता से एक सामान्य दर से बिजली बिल लिया जाएगा। recent visitors 120

वोट दिया इसका मतलब ये नहीं कि मैं आपका मजदूर… बारामती में वोटर्स पर भड़के डिप्टी CM अजित पवार

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार उस वक्त अपना आपा खो बैठे, जब एक वोटर ने अपनी समस्या के बारे में उन्हें बताया, और समस्या के समाधान की बात कही. जिस पर पवार भड़के और बोले कि आपने वोट दिया इसका ये मतलब नही की आप मेरे मालिक हैं. अजित पवार का ये बयान अब राजनीतिक गलियारों की सुर्खियां बन चुका है. ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव के पहले जनता के हित की बात करने वाले नेता चुनाव के बाद जनता के साथ कैसा व्यवहार करते हैं. इसकी चर्चा हो रही है. परेशानी के जवाब में अजित पवार ने कहा कि आपने मुझे वोट दिया है, इसका मतलब ये नहीं कि आप मेरे बॉस यानी मालिक बन गए. क्या आपने मुझे अब खेतिहर मजदूर बना दिया है? दरअसल बारामती की इस सभा में अलग अलग तहसीलों और गांवो से किसान अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे. जिनके समाधान की आस सबको थी. किसानों को उम्मीद थी कि जनसमस्याओं को अजित पवार सुनेंगे. और इन समस्याओं को सॉल्व करने को लेकर कुछ कदम उठाएंगे. लेकिन डिप्टी सीएम का ये रवैया देखकर हर कोई हैरान रह गया. बयान के बाद वहां का माहौल कुछ गंभीर हो गया. जिसको देखते हुए कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने पूरा मोर्चा संभाला, और बचाव करते हुए कहा कि कभी-कभी जनप्रतिनिधि जब काम कर रहा होता है तो कुछ मतदाता कुछ मुद्दों पर अपनी जिद करने लगते हैं, लेकिन उसमें जनप्रतिनिधि के ही कमेंट्स या बयानों को हाईलाइट किया जाता है जबकि वोटर्स का बर्ताव कहीं नहीं दिखाया जाता. विदेश दौरे से लौटने के बाद डिप्टी सीएम अजित पवार ने रविवार को बारामती क्षेत्र का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने कई नए कामों का शिलान्यास भी किया. अजित पवार ने कहा कि बारामती का रियल एस्टेट बाजार बढ़ रहा है, लेकिन मुंबई और पुणे के बड़े डेवलपर्स अभी तक इसमें एंटर नहीं कर पाए हैं. समस्याओं पर भड़कने के बाद उन्होंने अधिकारियों की भी क्लास लगा दी, और हिदायत दी कि काम में कोई कमी नहीं आनी चाहिए. हर समस्या समाधान किया जाए. recent visitors 277

Deva Teaser: शाहिद कपूर के फैंस का इंतजार खत्म, धुआंधार एक्शन

मुंबई शाहिद कपूर के फैंस का इंतजार खत्म हो गया है. उनकी मच-अवेटेड फिल्म 'देवा' का टीजर रिलीज किया गया, जहां उनका जबरदस्त खूंखार और खतरनाक अंदाज देखने को मिला. अब तक आपको लगा होगा कि कमीने, हैदर और कबीर सिंह में जिस शाहिद कपूर को आपने देखा उससे किलर अंदाज उनका और क्या ही होगा? तो आप गलत हो सकते हैं. देवा के टीजर में शाहिद अपने सबसे खूंखार लुक में नजर आ रहे हैं, जिसे खून खराबे और मार पिटाई से जरा भी खौफ नहीं है. फिल्म में वैसे तो शाहिद एक पुलिसवाले का किरदार निभा रहे हैं लेकिन उनका अंदाज एकदम रिबेलियस और कातिलाना है. धुआंधार गोली चलाते, दुश्मनों का खात्मा करते और अपने ही सनकी अंदाज में डांस करते शाहिद का लुक बेहद जानदार है. टीजर को देख फैंस ट्रेलर के इंतजार में बेसब्र हो रहे हैं. माना जा रहा है कि इस एक्शन थ्रिलर फिल्म से शाहिद कपूर भी अपनी इमेज को अमिताभ बच्चन जैसे एंग्री यंग मैन के तौर पर स्थापित करने को तैयार है. टीजर में वो ताबड़तोड़ एक्शन सीक्वेंस करते नजर आ रहे हैं. हालांकि इससे पहले जारी किए गए पोस्टर में भी शाहिद को अमिताभ की जंजीर का फैन दिखाया गया था. पोस्टर में वो मुंह में सिगरेट दबाए, खतरनाक लुक देते दिखे थे. वहीं उनके पीछे बिग बी का जंजीर का आइकॉनिक लुक था. शाहिद कपूर के बेखौफ लुक को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि साल 2025 शाहिद के लिए गुड लक लेकर आया है. शाहिद का ये रैम्पेज मोड सबको अच्छा लग रहा है. यूजर्स ने लिखा- कबीर सिंह वाइब्स, आला रे आला देवा आला. एक और ने लिखा- शाहिद कपूर की अब तक इंडस्ट्री को पहचान नहीं हो पाई है.  वो डांस-रोमांस से लेकर एक्शन तक में जबरदस्त हैं. अब लग रहा है वो अपने फॉर्म में आ रहे हैं. मलयालम सिनेमा के मशहूर डायरेक्टर रोशन एंड्रूज की इस एक्शन थ्रिलर में शाहिद एक कॉप का रोल करने वाले हैं, जो कि एक्शन पैक्ड फिल्म है. देवा 31 जनवरी को थियेटर्स में रिलीज होगी. फिल्म में उनके साथ पूजा हेगड़े भी हैं. देखना तो दिलचस्प होगा कि फैंस को उनका ये अंदाज कितना लुभाता है. फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी शानदार है. इसके अलावा शाहिद के खाते में विशाल भारद्वाज की एक फिल्म, कॉकटेल 2 भी है. माना जाए कि साल 2025 शाहिद के लिए धमाकेदार साबित हो सकता है तो गलत नहीं होगा.   recent visitors 62

समर्थकों के विरोध के बाद फैसला, दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति योल की गिरफ्तारी में जांचकर्ताओं ने पुलिस से मांगी मदद

सियोल. दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट लगातार गहरा रहा है और अब महाभियोग का सामना कर रहे राष्ट्रपति यून सुक योल को गिरफ्तार करना जांचकर्ताओं के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। यून सुक योल की गिरफ्तारी का विरोध होने के बाद जांचकर्ताओं ने पुलिस से मदद मांगी है। शुक्रवार को जब जांचकर्ता यून सुक योल को गिरफ्तार करने पहुंचे तो यून सुक योल के सुरक्षाकर्मी उनसे भिड़ गए थे। इससे पहले गुरुवार को यून सुक योल के समर्थकों ने जांचकर्ताओं को आवास में घुसने नहीं दिया था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया का भ्रष्टाचार जांच कार्यालय (CIO) यून सुक योल के खिलाफ जांच कर रहा है। जांचकर्ताओं ने वारंट की अवधि समाप्त होने से पहले पुलिस को पत्र भेजकर मदद मांगी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार जांच कार्यालय ने बिना किसी पूर्व परामर्श के हमारे सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने हमें पत्र भेजा है। हम इसकी कानूनी समीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार जांच कार्यालय (CIO) ने कहा कि यून सुक योल की गिरफ्तारी को लेकर हो रहे विरोध के चलते वारंट को तामील कराना संभव नहीं हो पा रहा है। हम समीक्षा के बाद आगे की योजना बना रहे हैं। हम समर्थकों के विरोध पर खेद जताते हैं, क्योंकि इससे कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हो सका। राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मियों ने नहीं होने दी गिरफ्तारी दक्षिण कोरियाई जांचकर्ता शुक्रवार को यून सुक योल को उनके आवास पर गिरफ्तार करने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति के सुरक्षा बलों ने जांचकर्ताओं को रोक दिया और यून की गिरफ्तारी फिर नहीं हो सकी। यून जिन्हें हटाने के लिए पहले ही सांसद अपना समर्थन दे चुके हैं, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति पद से हट जाएंगे। यून की गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है, लेकिन दो बार कोशिश करने के बाद भी जांचकर्ता यून को गिरफ्तार नहीं कर सके हैं। अगर वे गिरफ्तार हो जाते हैं तो यून गिरफ्तार होने वाले दक्षिण कोरिया के पहले राष्ट्रपति बन जाएंगे। यून ने 3 दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लगाने का फैसला किया था। हालांकि हंगामे के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। इसके लिए यून सुक योल को जेल की सजा और मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। समर्थक भी जांचकर्ताओं को घुसने नहीं दे रहे गुरुवार को यून समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी नहीं होने दी थी और यून समर्थक जांचकर्ताओं की टीम से भिड़ गए थे। यून की गिरफ्तारी के रोकने के लिए यून समर्थक उनके आवास के बाहर जमे हैं और प्रार्थनाओं का दौर चल रहा है। वहीं जांचकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति यून की गिरफ्तारी रोकने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 68

13 छात्र झुलसे, त्रिपुरा में पिकनिक मनाने गए स्कूली बच्चों की बस में लगी आग

अगरतला/नई दिल्ली। पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां रविवार को पिकनिक मनाने आए छात्रों से भरी एक बस में आग लग गई, जिससे 13 स्कूली छात्र झुलस गए। मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) किरण कुमार ने बताया कि इनमें से नौ छात्रों को जीबीपी अस्पताल भेजा गया, जबकि बाकी चार को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के बाद घर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि यह आग बस में रखे जनरेटर के विस्फोट के कारण लगी थी। मामले की जांच चल रही है। मामले में राज्य के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और सभी घायल छात्रों के जल्दी ठीक होने की कामना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखा कि मोहनपुर में हुई इस दुखद घटना से मैं बहुत चिंतित हूं, जहां जनरेटर के विस्फोट के बाद पिकनिक बस में आग लग गई। उन्होंने कहा कि मैं घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और घायल छात्रों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी से पिकनिक का आनंद लेते समय सतर्क और सावधान रहने की अपील की है। recent visitors 57

बंगलूरू में आठ महीने की बच्ची में दिखे संक्रमण के लक्षण ने किया अलर्ट, HMPV वायरस भारत पहुंचा?

बंगलूरू। चीन में फैल रहे ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) संक्रमण की भारत में दस्तक हो गई। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि बंगलूरू में एक आठ महीने की बच्ची एचएमपीवी संक्रमित पाई गई है। हालांकि अभी तक भारत में एचएमपीवी का केस मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं कर्नाटक सरकार का कहना है कि वायरस के स्ट्रेन के बारे में जानकारी नहीं है। चीन में इन दिनों ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) का प्रकोप देखने को मिल रहा है। वायरस से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की खबरें आ रही हैं। इसे लेकर भारत में भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। कई राज्यों ने एडवाइजरी और अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही भारत में एचएमपीवी वायरस जैसा का पहला केस सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बंगलूरू के बैपटिस्ट अस्पताल में एक आठ महीने की बच्ची में एचएमपीवी वायरस जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि बच्ची में संक्रमण की पुष्टि एक निजी लैब में हुई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उनकी प्रयोगशाला में नमूने की जांच नहीं हुई है। निजी अस्पताल की रिपोर्ट में यह सामने आया है। स्ट्रेन को लेकर जानकारी नहीं है। नमूने को सरकारी प्रयोगशाला में भेजा गया है। वहीं सरकार ने वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है। सतर्कता बरती जा रही है। क्या है ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी)? 0- ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस, जिसे एचएमपीवी के छोटे नाम से भी जाना जाता है, इंसानों की श्वसन प्रक्रिया पर प्रभाव डालने वाला वायरस है। इसकी पहली बार पहचान 2001 में हो गई थी। तब नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया था। यह पैरामाइक्सोविरीडे परिवार का वायरस है। 0- श्वसन संबंधी अन्य वायरस की तरह यह भी संक्रमित लोगों के खांसने-छींकने के दौरान उनके करीब रहने से फैलता है। 0- कुछ स्टडीज में दावा किया गया है कि यह वायरस पिछले छह दशकों से दुनिया में मौजूद है। एचएमपीवी का किस पर और कितना असर? 0- यह मुख्य तौर पर बच्चों पर असर डालता है। हालांकि, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों और बुजुर्गों पर भी इसका प्रभाव दर्ज किया गया है। 0- इस वायरस की वजह से लोगों को सर्दी, खांसी, बुखार, कफ की शिकायत हो सकती है। ज्यादा गंभीर मामलों में गला और श्वांस नली के जाम होने से लोगों के मुंह से सीटी जैसी खरखराहट भी सुनी जा सकती है। 0- कुछ और गंभीर स्थिति में इस वायरस की वजह से लोगों को ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों में ऑक्सीजन ले जाने वाली नली में सूजन) और निमोनिया (फेफड़ों में पानी भरना) की स्थिति पैदा कर सकता है। इसके चलते संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। 0- चूंकि इसके लक्षण कोरोनावायरस संक्रमण और आम फ्लू से मिलते-जुलते हैं, इसलिए इन दोनों में अंतर बता पाना मुश्किल है। हालांकि, जहां कोरोनावायरस की महामारी हर सीजन में फैली थी। वहीं एचएमपीवी अब तक मुख्यतः मौसमी संक्रमण ही माना जा रहा है। हालांकि, कई जगहों पर इसकी मौजूदगी पूरे साल भी दर्ज की गई है। 0- कोरोना के इतर इस वायरस के कारण ऊपरी और निचले दोनों श्वसन पथ में संक्रमण का खतरा हो सकता है। 0- सामान्य मामलों में इस वायरस का असर तीन से पांच दिन तक रहता है। वैक्सीन और उपचार के क्या तरीके हैं? मौजूदा समय में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस से बचाव के लिए कोई टीका (वैक्सीन) मौजूद नहीं है। इसके अलावा एंटी वायरल दवाइयों का प्रयोग इस पर असर नहीं डालता। ऐसे में एंटी वायरल का प्रयोग इंसानों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम कर सकता है। इस वायरस से जूझ रहे लोगों को लक्षण हल्का करने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं। हालांकि, वायरस को खत्म करने लायक उपचार अभी मौजूद नहीं है। recent visitors 40

पार्टी के भीतर ही बढ़ रहा विरोध, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जल्द दे सकते हैं इस्तीफा

ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जल्द ही लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे सकते हैं। कनाडा के समाचारपत्र द ग्लोब एंड मेल ने रविवार को अपनी रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिन ट्रूडो अगले एक या दो दिनों के भीतर पद छोड़ सकते हैं। दरअसल ट्रूडो की लोकप्रियता में हाल के समय में भारी गिरावट आई है और उन्हें पार्टी के भीतर भी विरोध झेलना पड़ रहा है। विभिन्न सर्वे में दावा किया गया है कि आगामी चुनाव में पिएरे पोलिएवरे के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी सत्ता में आ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी ये तय नहीं है कि ट्रूडो कब इस्तीफा देंगे, लेकिन माना जा रहा है कि बुधवार को होने वाली राष्ट्रीय कॉकस बैठक से पहले ट्रूडो अपना पद छोड़ सकते हैं। सहयोगी पार्टी एनडीपी ने भी छोड़ दिया था साथ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस ट्रूडो को सत्ताधारी लिबरल पार्टी के नेता के पद से भी हटाने पर विचार किया जा रहा है। अभी ये साफ नहीं है कि ट्रूडो इस्तीफे के बाद तुरंत पद छोड़ देंगे या फिर नए नेता की नियुक्ति तक पद पर बने रहेंगे। जस्टिस ट्रूडो बीते एक दशक से कनाडा की सत्ता पर काबिज हैं, लेकिन बीते कुछ समय में उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। ट्रूडो की सहयोगी पार्टी और जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली एनडीपी ने बीते दिनों ट्रूडो सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। एक हालिया सर्वे में दावा किया गया कि 73 प्रतिशत कनाडा के नागरिक चाहते हैं कि ट्रूडो प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दें। इनमें 43 प्रतिशत लिबरल मतदाता भी शामिल हैं। इन वजहों से ट्रूडो से नाराज हैं कनाडा के लोग कनाडा में जस्टिन ट्रूडो की सरकार की लोकप्रियता में गिरावट की कई वजह हैं। इनमें प्रमुख वजहों में अर्थव्यवस्था, कनाडा में घरों की कीमतों में जबरदस्त उछाल, अप्रवासी मुद्दा आदि शामिल हैं। कोरोना महामारी के बाद कनाडा में महंगाई 8 फीसदी तक बढ़ गई थी। हालांकि फिलहाल यह दो प्रतिशत से नीचे है। कनाडा में बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है, जो फिलहाल छह फीसदी के आसपास है। ट्रूडो सरकार के कार्बन टैक्स कार्यक्रम की भी विपक्ष द्वारा आलोचना की जा रही है। कनाडा में महंगे घर एक बड़ी समस्या है। कनाडा के अधिकतर बड़े शहरों में घर खरीदना आम लोगों के बजट के बाहर हो गया है। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है और सरकार इसे नियंत्रित कर पाने में नाकाम रही है। ये भी एक बड़ी वजह है कि लोगों में ट्रूडो सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है। कनाडा में अप्रवासन भी बड़ा मुद्दा है। हालांकि ट्रूडो सरकार ने हाल के समय में अप्रवासन को लेकर नई नीतियां बनाई हैं, जिससे अप्रवासियों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि अभी भी लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई है। अप्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से कनाडा की स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ा है। कनाडा में खालिस्तानियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी कई कनाडाई नागरिक नाराज हैं। हाल ही में कनाडा की डिप्टी पीएम और वित्त मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद ट्रूडो पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ा है। recent visitors 50