Tuesday, July 7, 2026 1:43 am

नई दिल्ली सहित दिल्ली के अन्य बड़े स्टेशनों पर पार्किंग शुल्क में हुई कटौती, अब काम देना होंगे पैसे: रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली नई दिल्ली सहित दिल्ली के अन्य बड़े स्टेशनों पर कैब और आटो पार्किंग के शुल्क में कमी कर दी गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर आटो व कैब चालकों और कुलियों से मुलाकात करने के बाद इसकी घोषणा की। कैब चालक को अब 12 सौ रुपये प्रति माह की जगह चार सौ और ऑटो चालकों को सात सौ की जगह मात्र दो सौ रुपये पार्किंग देना होगा। कुलियों की समस्या भी हल करने का आश्वासन दिया। मंत्री ने मौके पर ही पार्किंग शुल्क में कमी की घोषणा की प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। कैब व आटो चालकों और कुलियों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। मंत्री ने मौके पर ही पार्किंग शुल्क में कमी की घोषणा कर दी। कुलियों ने प्रत्येक स्टेशन पर आराम घर बनाने, परिवार को 20 लाख रुपये तक की बीमा व उपचार की सुविधा देने, बच्चों की पढ़ाई की सुविधा देने और वर्दी की समस्या हल करने की मांग की। रेल मंत्री ने कहा, 50 से अधिक कुली जिस स्टेशन पर होंगे उन्हें आराम घर मिलेगा।   कुलियों की समस्याओं का समाधान करने का भी दिया आश्वासन आयुष्मान योजना के अंतर्गत उनका व उनके स्वजनों का उपचार, रेलवे स्कूल में बच्चों को पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। वर्दी की समस्या हल होगी। उन्होंने कुलियों को यात्रियों से अच्छे व्यवहार की सलाह दी। कहा, ऐसा कोई काम नहीं होने चाहिए जिससे कि उन्हें व रेलवे को लेकर यात्रियों के मन में गलत धारना बने। इस मौके पर ऑटो रिक्शा संघ के महामंत्री राजेंद्र सोनी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। recent visitors 68

पीएमओ ने कहा- इन आउटलेट्स के जरिए दवाइयों की खरीद करने से नागरिकों को 5,020 करोड़ की बचत हुई, नवंबर तक बिकी 1,255 करोड़

नई दिल्ली जन औषधि केंद्रों से नवंबर 2024 के अंत तक 1,255 करोड़ रुपये से अधिक की सस्ती दवाइयों की बिक्री हुई है। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएमओ ने कहा कि इन आउटलेट्स के जरिए दवाइयों की खरीद करने से नागरिकों को 5,020 करोड़ रुपये की बचत हुई है। जन औषधि केंद्र विशेष केंद्र हैं जो आम जनता को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराते हैं। इसकी स्थापना प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत की गई थी, जो नवंबर 2008 में शुरू की गई एक जन कल्याणकारी योजना है। इस योजना को फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इससे पहले रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने बताया कि नवंबर 2024 तक देशभर में 14,320 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। 2023-24 में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के तहत पीएमबीआई ने 1,470 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की थी, जिससे नागरिकों को लगभग 7,350 करोड़ रुपये की बचत हुई थी।पिछले 10 वर्षों में इस परियोजना के तहत लगभग 30,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। 2024 में पीएमबीजेपी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और असम राइफल्स (सीएपीएफ, एनएसजी और एआर) के साथ कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे सीएपीएफ, एनएसजी और एआर (एमएचए) अस्पतालों में जन औषधि दवाएं उपलब्ध करा कर स्वास्थ्य सेवा पहुंच को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा मॉरीशस में पहला विदेशी जन औषधि केंद्र खोला जा चुका है। मंत्रालय ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने भी चालू वित्त वर्ष के दौरान 500 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ फार्मास्युटिकल उद्योग को मजबूत करने के लिए एक योजना लागू की है। इस योजना का उद्देश्य देश भर में मौजूदा फार्मा क्लस्टरों और एमएसएमई को उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता और एमएसएमई क्लस्टरों में सुधार करने के लिए सहायता प्रदान करना है। recent visitors 73

खो खो फेडरेशन ने विश्वकप मैचों के नियम किये अधिसूचित, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैचों में तत्काल प्रभाव से लागू होंगे

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय खो खो फेडरेशन ने 13 से 19 जनवरी तक नई दिल्ली में होने वाले वाले खो खो विश्वकप मैचों के लिए नए नियम अधिसूचित कर दिये गये है। यह नियम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खो खो मैचों में तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। अंतरराष्ट्रीय खो खो फेडरेशन के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने बताया कि खो खो मैच की अवधि 50 मिनट की होगी और मैच से पहले टॉस के जरिए दोनों टीमों को अटैकिंग और डिफेंस का विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। प्रत्येक टीम में 15 खिलाड़ी होंगे जिनमें से 12 खिलाड़ी मैदान में खेलेंगे जबकि तीन बचे खिलाड़ी स्थानापन्न(सब्स्टिटूट) होंगे। जारी नियमों के मुताबिक सेंट्रल लेन को पार करना, जल्दी उठ जाना, पीछे हटना और दिशा बदलना फाउल माना जायेगा। खो खो विश्वकप के लिए खेल का मैदान का आकार 26 बाई 20 मीटर आयताकार होगा। प्रत्येक मैच दो पारी का होगा। प्रत्येक पारी सात मिनट की अटैकिंग और डिफेंसिव टर्न में विभाजित होगी। प्रत्येक पारी के बाद चार मिनट का विश्राम होगा और टर्न के बीच तीन मिनट का ब्रेक होगा। टर्न के शुरुआत में तीन डिफेंडर्स बैच खेल के मैदान में होगा। जब तीनों डिफेंडर्स को आउट घोषित कर दिया जायेगा तो 30 सेकेंड का ब्रेक मिलेगा और डिफेंडर्स के अगले बैच को 30 सेकेंड के अन्दर मैदान में प्रवेश करना पड़ेगा और अगर वह निर्धारित समय अवधि के अन्दर खेल के मैदान में प्रवेश नहीं करते हैं तो उन्हें लेट एंट्री के लिए आउट करार दिया जायेगा। अगर डिफेंडिंग टीम का कोई बैच तीन मिनट तक मैदान में डटा रहता है तो उसे एक अतिरिक्त अंक प्रदान किया जायेगा और इसके बाद प्रत्येक 30 सेकंड के लिए एक अतिरिक्त अंक मिलता रहेगा। ‘खो’ को कार्यान्वित करने के लिए उकडूर बैठे हुए अटैकर की पीठ को अपनी हथेली-हाथ से छूएगा और तत्काल जोर से ‘खो’ शब्द का उच्चारण करेगा जोकि अंपायर और रेफरी को सुनाई देना चाहिए। अटैकिंग टीम को प्रत्येक सफल आउट के लिए दो अंक मिलेंगे। प्रत्येक टीम को दो रिव्यू की अनुमति होगी। दो पारी के अंत में ज्यादा नम्बर पाने वाली टीम विजयी होगी।   recent visitors 194

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सिंहस्थ-2028 की मंत्रि-मंडलीय समिति की द्वितीय बैठक, कार्यों की प्रगति की प्रत्येक 15 दिन में हो समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 में उज्जैन और इंदौर संभाग गतिविधियों के मुख्य केंद्र रहेंगे। इन संभागों में 2 ज्योतिर्लिंग होने से श्रद्धालुओं का आवागमन तथा धार्मिक गतिविधियां तुलनात्मक रूप से अधिक होंगी। इंदौर-उज्जैन संभाग में जारी विभिन्न विभागों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण हों, यह मॉनिटरिंग प्रत्येक 15 दिन में सुनिश्चित करें। सक्षम स्तर के अधिकारी बैठक कर, कार्यों की प्रगति की समीक्षा करें। ऐसे विषय जिन में उच्च स्तर से समन्वय या मार्गदर्शन आवश्यक है, वे विषय राज्य शासन के संज्ञान में लाए जाएं। निर्माण एजेंसियों को सौंपे गए कार्यों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित कर विलंब के कारणों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई सिंहस्थ-2028 की मंत्रि-मंडलीय समिति की द्वितीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उज्जैन तथा इंदौर जिलों में नवीन बस अड्डों के विकास के लिए दिए गए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अधोसंरचना से संबंधित जिन कार्यों के निर्माण में अधिक समय लगना है, उन सब की मंत्रि-मंडलीय समिति से स्वीकृति प्राप्त करने और निविदा प्रक्रिया पूर्ण करने का कार्य मार्च-2025 तक कर लिया जाए। जल प्रदाय, सीवरेज के कार्य तत्काल आरंभ किए जाएं। इसके साथ ही उज्जैन तथा इंदौर जिलों में बस अड्डों की क्षमता वृद्धि या नवीन बस अड्डों के विकास की कार्य योजना भी मार्च-2025 तक तैयार की जाए। सिंहस्थ-2028 के लिए समस्त विभागों के अधोसंरचनात्मक कार्यों की कार्य-योजना को सितंबर-2025 तक अंतिम रूप दिया जाए। प्रयागराज कुंभ के साथ ही हरिद्वार कुंभ मॉडल का भी होगा अध्ययन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की व्यवस्थाओं को श्रेष्ठतम स्वरूप देने के लिए प्रयागराज कुंभ के साथ ही हरिद्वार कुंभ मॉडल का अध्ययन भी किया जाएगा। प्रयागराज कुंभ पूर्ण होने के बाद वहां क्रॉउड मैनेजमेंट, ड्रोन सर्वे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग तथा अन्य गतिविधियों में लगी कंपनियों व स्टार्ट-अप का उज्जैन में सम्मेलन आयोजित कर वहां की बेस्ट प्रैक्टिसेस का क्रियान्वयन सिंहस्थ-2028 में करने की कार्य योजना बनाई जाएगी। रेलवे से समन्वय के लिए विशेष सेल गठित किया जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धालुओं के आवागमन में सुगमता के लिए रेलवे से समन्वय के उद्देश्य से विशेष सेल गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घाटों तक श्रद्धालुओं के आसानी से आवागमन के लिए उपयुक्त पहुंच मार्ग विकसित किए जाएं। उज्जैन, इंदौर और देवास में होने वाले निर्माण कार्यों में सीवरेज, स्वच्छता और हरियाली का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यटकों की सुविधा की दृष्टि से धर्मशालाओं के उन्नयन के लिए भी कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को देखते हुए, आवश्यकतानुसार विभागों में प्रशासकीय संरचनाओं का विस्तार तत्काल किया जाए। सिंहस्थ, सदियों पुरानी सनातन परम्परा को जीवंत करने का उत्सव – मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सिंहस्थ, सदियों पुरानी सनातन परम्परा को जीवंत करने का उत्सव है। सिंहस्थ-2028 में पधार रहे श्रद्धालुओं के आवागमन और उनकी सुविधाजनक आवास व्यवस्था के लिए इंदौर, उज्जैन और देवास क्षेत्र में समन्वित रूप से व्यवस्थाएं विकसित की जाएं। क्षिप्रा नदी में निरंतर जल प्रवाह के लिए जारी है कार्य बैठक में जानकारी दी गई कि मंत्रि-मंडलीय समिति द्वारा प्रथम बैठक में जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, संस्कृति, पुरातत्व और नगरीय विकास एवं आवास विभाग के लगभग 5 हजार 955 करोड़ रूपए लागत के 19 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई थी। बैठक में क्षिप्रा नदी में निरंतर जल प्रवाह के लिए संचालित योजना सहित क्षिप्रा व कान्ह नदी पर प्रस्तावित बैराजों के निर्माण, कान्ह नदी डायवर्शन और घाट निर्माण की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही महाकाल लोक कॉरीडोर में पाषाण प्रतिमाओं के निर्माण, इंदौर-उज्जैन मार्ग के सिक्स लेन में चौड़ीकरण कार्य सहित उज्जैन के महत्वपूर्ण मार्गों, उज्जैन शहर की सीवरेज परियोजना आदि का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। गृह, पर्यटन, संस्कृति तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग के कार्यों को मिली स्वीकृति मंत्रि-मंडलीय समिति ने गृह, पर्यटन, संस्कृति तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एक हजार 451 करोड़ रूपए लागत के 56 कार्य को स्वीकृति प्रदान की। इनमें गृह विभाग के अंतर्गत निर्मित होने वाले कंपोजिट कंट्रोल रूम उज्जैन, नवीन थाना भवन, इंटीग्रेटेड कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर खण्डवा सहित उज्जैन, खण्डवा, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, खरगोन में बनने वाले पुलिस आवास, थाना, ट्रांजिट हॉस्टल व कैम्प, बैरक आदि शामिल हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत सिंहस्थ के दौरान आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण 5 सड़कों के चौड़ीकरण कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।   recent visitors 75

दिल्ली में चुनावी इतिहास पर एक नजर, कांग्रेस पार्टी ने 39 सीटों पर जीत हासिल की थी, 2013 में आया था नया मोड़

नई दिल्ली दिल्ली में पहली बार विधानसभा चुनाव 1951 को हुए थे। उस समय कुल 48 सीटों पर चुनाव हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 39 सीटों पर जीत हासिल की और बहुमत प्राप्त किया। इसके बाद चौधरी ब्रह्मप्रकाश को दिल्ली का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन उनका कार्यकाल विवादों में घिर गया। इसके बाद सरदार गुरमुख निहाल सिंह को दूसरा मुख्यमंत्री बनाया गया। 1956 में विधानसभा और मंत्रिपरिषद भंग: 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के बाद दिल्ली की विधानसभा और मंत्रिपरिषद को भंग कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली में केंद्र का सीधा शासन लागू किया गया। यह दिल्ली की राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव था और इसने दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे को नया रूप दिया। मेट्रोपॉलिटन काउंसिल का गठन (1966): दिल्ली में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 1966 में दिल्ली प्रशासन अधिनियम लागू किया गया, जिसके तहत मेट्रोपॉलिटन काउंसिल का गठन हुआ। इस काउंसिल में 56 सदस्य चुने जाते थे, जबकि 5 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते थे। काउंसिल का काम दिल्ली के प्रशासन को संभालना था, लेकिन यह केवल सलाहकार भूमिका निभाती थी, क्योंकि इसके पास विधायी शक्तियां नहीं थीं। मेट्रोपॉलिटन काउंसिल का कार्यकाल (1966-1990): 1966 से लेकर 1990 तक मेट्रोपॉलिटन काउंसिल दिल्ली के प्रशासन का संचालन करती रही। इस दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यकारी पार्षद बने, जिनमें मीर मुश्ताक अहमद, विजय कुमार मल्होत्रा, केदार नाथ साहनी और जग प्रवेश चंद्र जैसे नेता शामिल थे। हालांकि, काउंसिल को विधायी शक्तियां नहीं थीं, जिससे इसका कार्यक्षेत्र सीमित था। दिल्ली को फिर से विधानसभा कैसे मिली? 1987 में केंद्र सरकार ने सरकारिया समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य दिल्ली के प्रशासन से जुड़ी समस्याओं का समाधान ढूंढना था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता, लेकिन दिल्ली की जनता के मामलों को संभालने के लिए एक विधानसभा दी जा सकती है। इस सिफारिश को ध्यान में रखते हुए 1991 में संविधान के 69वें संशोधन को पारित किया गया, जिसके तहत दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का विशेष दर्जा मिला और फिर से दिल्ली विधानसभा का गठन हुआ। 1993 में हुआ पहला विधानसभा चुनाव: 37 साल बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 49 सीटों पर जीत हासिल की और मदन लाल खुराना को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि, यहां पर बीजेपी सरकार चलाने में विफल रही। उन्हें कम समय में 3 बार मुख्यमंत्री बदलने पड़े। 26 फरवरी 1996 को साहिब सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया गया, लेकिन 12 अक्तूबर 1998 को उनको हटा दिया गया और बीजेपी ने सुष्मा स्वराज को नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। पार्टी के अंदर कार्यकाल के दौरान जारी रही और फिर 1998 में ही कांग्रेस ने वापसी कर बीजेपी को झटका दे दिया। शीला दीक्षित लगातार 3 बार रहीं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (कांग्रेस) ने तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने 1998 से 2013 तक लगातार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और उनके कार्यकाल में दिल्ली में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए। 2013 में आया था नया मोड़ दिल्ली में चुनावी इतिहास में एक बड़ा मोड़ 2013 में आया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी शुरुआत की। यह पार्टी अरविंद केजरीवाल द्वारा 2012 में बनाई गई थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में AAP ने धमाकेदार शुरुआत की और दिल्ली विधानसभा में 70 सीटों में से 28 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी।  4. 2015 में AAP की ऐतिहासिक जीत 2015 में हुए विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। AAP ने 70 में से 67 सीटों पर विजय प्राप्त की, जबकि भाजपा और कांग्रेस को बहुत कम सीटें मिलीं। यह एक निर्णायक जनादेश था, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली की जनता अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में विश्वास रखती थी। इस जीत के बाद, AAP ने दिल्ली में अपने शासन को मजबूत किया और कई जनहित योजनाओं की शुरुआत की। 5. 2019 में फिर AAP भारी दिल्ली में 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन किया। दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से BJP ने 6 सीटों पर जीत हासिल की। यह दिल्ली में BJP की बढ़ती हुई प्रभावी स्थिति का संकेत था। हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP ने फिर से 2020 में जीत हासिल की, जिससे दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक संतुलन बना। आप ने 70 में से 62 सीटों पर जीत दर्ज की, जो एक जबरदस्त सफलता थी। बीजेपी को 8 सीटें मिलीं, जो 2015 में जीती गई 3 सीटों से बहुत अधिक थी, लेकिन फिर भी यह AAP के मुकाबले बहुत कम थी। कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में कोई भी सीट नहीं जीती और उनका खाता भी नहीं खुला। अब फिर भाजपा और AAP के बीच प्रतिस्पर्धा दिल्ली में चुनावी राजनीति अब मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच होती है। भाजपा, जो राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पार्टी है, दिल्ली में भी प्रभावी रही है, जबकि AAP ने दिल्ली के स्थानीय मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत की है और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी छवि को आगे बढ़ाया है। दिल्ली के चुनाव अब पूरी तरह से इन दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा का रूप ले चुके हैं।  आप ने स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों पर जोर दिया, वहीं बीजेपी ने राष्ट्रीय सुरक्षा, शीश महल और हिंदुत्व जैसे मुद्दों को प्रमुख बनाया। recent visitors 200

डीएम ने सर्दी के चलते स्कूलों में छुट्टियों का आदेश जारी किये, 8वीं तक के सभी स्कूल 11 जनवरी तक रहेंगे बंद

कानपुर हवा में नमी का स्तर 92 से बढ़कर 95 होने के साथ बादल पूरे दिन छाए रहे। इससे सूरज पूरे दिन भर मुंह छुपाता रहा और दिन का तापमान लगातार दूसरे दिन भी 14.2 डिग्री पर बना रहा। न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 3.8 डिग्री नीचे रहा जिससे शीत दिवस में शामिल हो गया। मौसम विभाग के अनुसार सर्दी का मौसम अभी पूरे सप्ताह बना रहेगा। कानपुर व आसपास के जिलों में इस दौरान घना कोहरा भी रह सकता है। वहीं, सर्दी बढ़ने पर डीएम राकेश कुमार सिंह ने नर्सरी से आठवीं तक के स्कूल 11 जनवरी तक बंद रखने और नौ से 12वीं तक की कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने के आदेश जारी किए। जिन स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की व्यवस्था नहीं हैं, वहां सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक स्कूल संचालन किया जाएगा। दिन भर ठिठुरते रहे लोग कड़ाके की सर्दी अपना पूरा असर दिखा रही है। सुबह से दोपहर तक कोहरा छाया रहा। दोपहर बाद में सूरज की हल्की झलक दिखी लेकिन बादलों ने उसे तुरंत छुपा दिया। शाम को चार बजे से ही कोहरे ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। सूरज की गर्मी नहीं मिलने से दिन भर लोग सर्दी से ठिठुरते दिखे। हवा की औसत गति रविवार के 3.4 किमी प्रति घंटा के मुकाबले घटकर 2.4 किमी प्रति घंटा पर पहुंच गई। इससे बर्फीली हवाओं की चुभन कम रही। मौसम विशेषज्ञ डा. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि सात जनवरी को भी सुबह से मध्यम कोहरा छाए रहने की उम्मीद है। दिन में थोड़ी देर के लिए सूर्य दिख सकता है लेकिन सर्दी कम होने के आसार कम हैं। सुबह-शाम को घना कोहरा, धुंध भी रहेगी। उत्तर-पश्चिमी सर्द बर्फीली हवाओं का प्रकोप भी बढ़ने के आसार हें। इससे रात के तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। अगले सप्ताह होगी बरसात उन्होंने बताया कि सर्दी के इस मौसम में पश्चिमी विक्षोभ से भी बदलाव आने के आसार हैं। अगले सप्ताह में सर्दी के साथ ही बारिश भी होगी जो फसलों के लिए लाभकारी होगी। एक और पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय की ओर बढ़ रहा है। इससे लगातार सर्दी का मौसम बना रहेगा। स्कूल में यूनिफार्म पहनकर आने की बाध्यता नहीं डीएम ने सर्दी के चलते स्कूलों में छुट्टियों का आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि कक्षाओं में विद्यार्थियों को सर्दी से बचाने के लिए पर्याप्त प्रबंध हों। बच्चों को खुले में न बिठाया जाए। विद्यार्थियों के लिए यूनिफार्म पहनकर आने की बाध्यता खत्म करते हुए गरम कपड़े पहनकर स्कूल पहुंचने की रियायत दी गई है। डीआइओएस अरुण कुमार ने बताया, आदेश का पालन न करने की शिकायत मिलने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। recent visitors 116

पिछले तीन दिनों से मेवाड़ सहित आसपास के इलाकों में सर्दी का असर कम हुआ, सर्दी का प्रकोप, बिछी बर्फ की चादर

राजसमंद पिछले कई दिनों से पूरे राजस्थान में ठंड का प्रकोप जारी है। वहीं पिछले तीन दिनों से मेवाड़ सहित आसपास के इलाकों में सर्दी का असर कम हुआ है। कोहरे के बाद लगातार तीन दिनों धूप से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वही राजसमंद के अरावली पहाड़ी क्षेत्र में बसे कुंभलगढ़ इलाके में शीतलहर का प्रकोप नजर आने लगा है। बीती रात यहां का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। वहीं उपखंड मुख्यालय सहित आधा दर्जन गांवों में घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों पर बर्फ जम गई। कुंभलगढ़ के वरदड़ा, उदावड़ के साथ मजेरा व आसपास के गांवों में कड़ाके की ठंड के चलते वाहनों पर बर्फ की परत जम गई। वहीं खेतों में भी बर्फ की चादर बिछी दिखाई दी। हालांकि छुट्टियां खत्म होने से पर्यटकों की आवक में भी कमी देखने को मिल रही है। मौसम विभाग ने अगले 7 दिनों तक शीत लहर जारी रहने की चेतावनी जारी की है। आपको बता दें राजसमंद में कुंभलगढ़ और भी इलाके को छोड़कर बाकी जगह सर्दी से थोड़ी राहत मिली है। बता दें कि राजस्थान में मौसम में फेरबदल देखने को मिल रहा है। वहीं कई जिलों में घना कोहरा भी देखने को मिला। मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक दूसरे सप्ताह से प्रदेश में तापमान में गिरावट होने के साथ बारिश होने की भी संभावना दिखाई दे रही है। मौसम विभाग ने पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के 19 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें जालौर, सिरोही, पालो, जोधपुर, नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनू, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, हनुमानगढ़, गंगानगर, जैसलमेर, बाड़मेर शामिल हैं।   recent visitors 126