Tuesday, July 7, 2026 12:19 am

महू में भीषण सड़क हादसे में 6 की मौत व 10 घायल, ट्रैवलर में सवार थे कर्नाटक के यात्री

महू  मानपुर थाना क्षेत्र में देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में 6  लोगों की मौत हो गई है, वहीं 10 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. घटना की सूचना लगते ही मानपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है. पुलिस के मुताबिक घटना गुरुवार-शुक्रवार मध्यरात्रि 2:30 बजे की है. दुर्घटनाग्रस्त हुई टेंपो ट्रैवलर में सवार यात्री कर्नाटक के रहने वाले हैं, जो उज्जैन से महाकाल के दर्शन कर महाराष्ट्र की ओर जा रहे थे. मानपुर भैरव घाट के पास की घटना मानपुर पुलिस के अनुसार मानपुर भैरव घाट में करीब ढाई बजे टेंपो ट्रैवलर आगे चल रहे टैंकर में जा घुसी. इस घटना में ट्रैवलर में सवार दो यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं टक्कर से पहले ट्रैवलर वाहन ने पास से गुजर रहे दो बाइक सवारों को भी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी भी मौत हो गई. इसके अलावा ट्रैवलर में बैठे 10 लोग जिनमें महिला पुरुष और बच्चे शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हो गए. 6  में से 2 मृतकों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है. ट्रैवलर के उड़े परखच्चे, मृतकों में दो एमपी से मानपुर थाने के एएसआई रवि ने बताया, '' ट्रैवलर और ट्रक के टक्कर से पहले ट्रैवलर ने बाइक को टक्कर मारी थी. इसमें मध्यप्रदेश के सेंधवा निवासी शुभम और धरमपुरी निवासी हिमांशु की मौत हो गई है. वहीं ट्रैवलर में सवार दो महिलाओं की मौत हुई है. उनकी भी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है.'' पुलिस के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि ट्रैवलर वाहन के परखच्चे उड़ गए. इसमें सवार सभी यात्री कर्नाटक के रहने वाले हैं. घायलों का उपचार इंदौर के एम वाय अस्पताल में किया जा रहा है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. हादसे में ये 15 घायल     सविता पत्नी तुकाराम, 40 साल     सुभाष रेन, 35 साल     शीतल रामचंद्र, 27 साल     तीरथ पिता रामचंद्र, 48 साल     श्रुति पति अमर, 32 साल     भाव सिंह, 36 साल     शिव सिंह पिता श्रीकांत, 31 साल     बबीता पति फकीरा, 56 साल     राजू, 63 साल     मालवा पति कृष्णा, 60 साल     सुनीता पति श्रीकांत, 50 साल     प्रशांत, 52 साल     शंकर, 60 साल     लता, 62 साल     बांगल वडियप्पा, 55 साल recent visitors 42

इंग्लैंड में अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबला बॉयकॉट करने की मांग उठी, 19 फरवरी से चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज

नई दिल्ली चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज 19 फरवरी से होने जा रहा है, मगर इससे पहले इंग्लैंड में अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबला बॉयकॉट करने की मांग उठ रही थी। वहां कई राजनेताओं ने अफगानिस्तान के खिलाफ मैच का विरोध किया था। दरअसल, 2021 में जब तालिबान ने दोबारा अफगानिस्तान में अपना राज शुरू किया था तभी से वहां पर महिलाओं की क्रिकेट पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। ICC के नियमों के मुताबिक जो भी देश पुरुष क्रिकेट खेल रहे हैं उन्हें महिला क्रिकेट को भी बढ़ावा देना है और कम से कम अपनी एक टीम तो जरूर रखनी है। हालांकि, तीन साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अफगानिस्तान की महिला टीम मैदान पर नहीं उतर सकी है। इसको लेकर ही लगातार अफगानिस्तान की टीम को विरोध भी झेलना पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया ने कई मौकों पर अफगानिस्तान के खिलाफ मैच खेलने से मना किया है। पिछले महीने, ब्रिटिश सांसदों के एक ग्रुप ने इंग्लैंड से अफगानिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज के मैच का बॉयकॉट करने का आग्रह किया था, जो 26 फरवरी को लाहौर में आयोजित किया जाएगा। साउथ अफ्रीका के खेल मंत्री गेटन मैकेंजी ने भी इसका समर्थन किया था। हालांकि, ईसीबी के अध्यक्ष रिचर्ड थॉम्पसन ने कहा कि वे सरकार, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और खिलाड़ियों के साथ विचार-विमर्श के बाद मैच खेलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले क्रिकेट समुदाय अफगानिस्तान की समस्याओं से नहीं निपट सकता। थॉम्पसन ने एक बयान में कहा, "हमने सुना है कि कई आम अफगानी नागरिकों के लिए उनकी क्रिकेट टीम को खेलते देखना ही मनोरंजन के कुछ बेहद कम बचे साधनों में से एक बचा है। हम यह कंफर्म कर सकते हैं कि हम ये मुकाबला खेलेंगे।" तालिबान का कहना है कि वे इस्लामी कानून और स्थानीय रीति-रिवाजों की अपनी व्याख्या के अनुसार महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करते हैं और ये आंतरिक मामले हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए। recent visitors 25

ट्रंप के ऑर्डर से फिर मची खलबली, अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर लगाया बैन; क्या नेतन्याहू है वजह?

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराध न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ICC की ओर से गाजा में इजरायल के युद्ध अपराध की जांच के चलते अमेरिका ने ये कार्रवाई की है। अमेरिका के प्रमुख सहयोगी इजरायल पर गाजा में नरसंहार के गंभीर आरोप लगे हैं। ICC ने बीते साल इजरायली नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। ट्रंप ने ICC की कार्रवाई को खतरनाक मिसाल बताते हुए बैन का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों में ICC अधिकारियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमलों के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ ICC के गिरफ्तारी वारंट जारी करने के चलते यह कदम उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका और सहयोगी देशों की ICC जांच का विरोध कर रहा है। उन्होंने इन जांचों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल ICC के सदस्य नहीं हैं और दोनों ही देश इसके ऑर्डर नहीं मानते। ट्रंप पर हमलावर रहे हैं ट्रंप ICC को दूसरी बार अमेरिकी प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है। साल 2020 में ट्रंप प्रशासन ने तत्कालीन अभियोजक फातौ बेन्सौडा और एक शीर्ष सहयोगी पर प्रतिबंध लगाए थे। ये प्रतिबंध अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्ध अपराधों की ICC की जांच की प्रतिक्रिया में लगाए गए थे। ICC को अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इससे अदालत के कामकाज पर असर पड़ा है। ICC अध्यक्ष ने कुछ समय पहले चिंता जताई थी कि अमेरिकी प्रतिबंध न्यायालय के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्यायालय की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया है। ICC 125 सदस्य देशों वाला ICC एक स्थायी न्यायालय है। यह युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों, नरसंहार और सदस्य देशों या उनके नागरिकों के खिलाफ आक्रामकता के लिए मुकदमा चलाता है। हालांकि कई बड़े देश इसके सदस्य नहीं है। इंटरनेशनल कोर्ट ने पिछले नवंबर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट और हमास नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अदालत ने माना था कि नेतन्याहू और गैलेंट ने मानवीय सहायता रोककर गाजा में नागरिकों की भुखमरी को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया। हालांकि इजरायल ने आरोपों को झूठा बताकर खारिज कर दिया था। recent visitors 26

हार्दिक पटेल को सुप्रीम राहत, पटेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज किए गए राजद्रोह का केस वापस

अहमदाबाद गुजरात बीजेपी के विधायक हार्दिक पटेल (31) काे बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने हार्दिक पटेल और अन्य के खिलाफ दर्ज राजद्रोह में मामले को वापस ले लिया है। पाटीदार अनामत आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल और उनके साथियों के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था। आंदोलन के बाद हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2022 गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले हार्दिक पटेल बीजेपी में शामिल हो गए थे। हार्दिक पटेल वर्तमान में अहमदाबाद जिले की वीरमगाम से विधायक हैं। गुजरात में पाटीदार अनामत आंदोलन साल 2015 में हुआ था। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। 2017 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी इसी आंदोलन की वजह से सिर्फ 99 सीटें जीत पाई थी। फैसले पर बोले हार्दिक पटेल राज्य सरकार के फैसले पर हार्दिक पटेल ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि गुजरात में हुए पाटीदार आंदोलन के दौरान मेरे समेत समाज के अनेक युवाओं पर लगे गंभीर राजद्रोह समेत के मुकदमें आज भूपेंद्र भाई पटेल की सरकार ने वापिस लिए है। मैं समाज की ओर से गुजरात की भाजपा सरकार का विशेष आभार व्यक्त करता हूं। पाटीदार आंदोलन से गुजरात में बिन आरक्षित वर्गों के लिए आयोग-निगम बना, 1000 करोड़ की युवा स्वावलंबन योजना लागू हुई और देश में आर्थिक आधार पर स्वर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिला हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित भाई शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल पुनः दिल की गहराई से आभार व्यक्त करता हूं। जीएमडीसी मैदान में की थी सभा 20 जुलाई 1993 को जन्में हार्दिक पटेल बी कॉम की डिग्री ली है। वह अक्टूबर 2012 में सरदार पटेल ग्रुप से जुड़ गए थे। इसके बा वह एसपीजी की वीरमगाम यूनिट के अध्यक्ष बन गए थे। 2015 में हार्दिक पटेल को मतभेदों के बाद एसपीजी प्रमुख ने निकाल दिया था। हार्दिक पटेल ने गुजरात पाटीदार अनामत आंदोलन को लीड किया था। इसके बाद वह पूरे देश में बड़ा चेहरा बन गए थे। उन्होंने जीएमडीसी मैदान में बड़ी सभा करके उस वक्त की सरकार को हिला दिया था। उनके आंदोलन को पास (PAAS) यानी पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने संचालित किया था। गुजराती में अनामत का मतलब आरक्षण से है। recent visitors 37

सुभाष नायर के खिलाफ यह केस नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने पर हुआ, अब हुई जेल

सिंगापुर सिंगापुर में भारतीय मूल के रैपर सुभाष नायर को जेल हो गई है। सुभाष नायर के खिलाफ यह केस नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने पर हुआ है। पांच फरवरी को उन्हें छह हफ्तों के लिए जेल में डाल दिया गया। 32 साल के सुभाष ने सिंगापुर में चीन को मिलने वाली छूट और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार को लेकर लगातार आवाज उठाई है। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट्स और कार्यक्रमों के दौरान नस्लवाद पर बोलने के कई केस हैं। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वह सिंगापुर में भेदभाव के खिलाफ मुंह खोलने की सजा पा रहे हैं। उनके मुताबिक सिंगापुर के अधिकारी उनकी सामाजिक लड़ाई को रोकने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। क्या हैं मामले सुभाष नायर की मुश्किलें 2020 में शुरू हुईं जब उन्हें अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर चेतावनी मिली। यह पोस्ट उन्होंने 2019 के ऑर्चर्ड टॉवर्स मर्डर को लेकर की थी। इस घटना में 31 साल के भारतीय मूल के सिंगापुरियन सतीश नोएल गोबीदास की कुछ लोगों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। मामले में चैन जिया जिंग के ऊपर पहले तो हत्या का मामला दर्ज किया गया। लेकिन बाद में कुछ शर्तों पर उसके केस को कमजोर करते हुए चेतावनी दे दी गई। इसके मामले में नस्लीय पूर्वाग्रह के आरोप लगे थे। इंस्टाग्राम पर पोस्ट सुभाष ने इस मामले को लेकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने लिखा कि ‘नस्लवाद और चीनी विशेषाधिकार की आलोचना करना=दो साल की सशर्त चेतावनी और मीडिया में बदनामी का अभियान। एक भारतीय आदमी की हत्या की साजिश करना=हल्की सजा और मीडिया की सहानुभूति। इसको लेकर भी सुभाष को चेतावनी मिली थी। लेकिन उन्होंने अपने म्यूजिक शोज और कार्यक्रमों के दौरान नस्लवाद के मामलों को उठाना जारी रखा। साल 2021 में एक कार्यक्रम के दौरान ऑर्चर्ड टॉवर केस में अपनी पोस्ट को लेकर संकेत किया था। बाद में इस केस में उनके खिलाफ केस हुआ था। इसी तरह साल 2019 में अभिनेता डेनिस चियू को एक सरकारी विज्ञापन में दिखाने की सुभाष ने आलोचना की थी। इस मामले में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इस वीडियो में चाइनीज सिंगापुरियंस के लिए आक्रामक भाषा इस्तेमाल की गई थी। इसी तरह 2021 में एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उनके खिलाफ आरोप लगा था। इसमें उन्होंने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर जोआना थेंग और सिटी रिवाइवल चर्च के संस्थापक जेमी वोंग के खिलाफ ढंग से कार्रवाई न होने पर आलोचना की थी। इन दोनों ने एलजीबीटीक्यू आंदोलन को शैतान से जोड़ा था। नायर ने तर्क दिया कि अगर दो मलय मुसलमानों ने ऐसा किया होता तो जांच तेजी से होती। recent visitors 22

ईरान में महिला ने नग्न होकर पुलिस के सामने हंगामा किया, हिजाब बैन के विरोध में

तेहरान इस्लामिक देश ईरान ने वैसे तो पिछले साल दिसंबर में ही सख्त हिजाब कानून को लागू करने पर रोक लगी दी है लेकिन अभी भी वहां हिजाब बैन के खिलाफ महिलाएं हल्ला बोल रही हैं। इसी तरह के एक वाकए में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए पहले अपने सभी कपड़े उतार दिए फिर नग्न होकर पुलिस वाहन के बोनट पर खड़ी होकर हंगामा करने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में महिला सशस्त्र बलों के अधिकारियों पर चिल्लाती हुई दिखाई दे रही है। ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने महिला की इस करतूत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि हंगामा करने वाली महिला पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर विंडशील्ड की ओर बढ़ते हुए और अपने दोनों पैरों को फैलाकर बैठ रही है। महिला की हालत देखकर वहां मौजूद एक सशस्त्र पुरुष अधिकारी मामले में दखल देने में हिचकिचाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो के अंत में महिला ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए और विरोध में चिल्लाने लगीं। महिला इस्लामी गणराज्य में महिलाओं के लिए सख्त प्रावधानों का विरोध कर रही थी। वह शरीर को पूरी तरह से ढकने से इनकार भी करती दिखी। हालांकि, हंगामा बढ़ने पर उस महिला के पति ने कहा कि फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत ठीक नहीं है। बता दें कि दिसंबर में, ईरानी सांसद ने विवादास्पद 'पवित्रता और हिजाब' कानून पारित किया था, जिसमें उन महिलाओं और लड़कियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया था जो अपने बाल, हाथ या पैर का प्रदर्शन करती हैं। हालांकि, महिलाओं के व्यापक विरोध के बाद ईरानी सरकार झुक गई थी और इस कानून को लागू करने पर रोक लगा दी थी। तब ईरानी सरकार ने कहा था कि इसमें सुधार की जरूरत है। एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई वैश्विक संगठनों ने ईरान के इस कानून की निंदा की थी और इसे दमनकारी और दमघोंटू व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कहा था। प्रस्तावित कानून में भारी जुर्माना और बार-बार अपराध करने वालों के लिए 15 साल तक की कैद का भी प्रावधान किया गया था। recent visitors 60

दलित दूल्हे की घुड़चढी को रस्म पूरा करने एसपी ने पुलिसकर्मियों की फौज उतारी

अहमदाबाद  गुजरात के बनासकांठा जिले में दलित वकील मुकेश परेचा ने घोड़ी पर बैठकर अपनी शादी की बारात निकाली। इलाके में किसी दलित परिवार में घुड़चढ़ी का यह पहला मौका था। इस बारात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। बाद में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी के साथ पुलिस अफसरों ने दूल्हे की गाड़ी ड्राइव की। हालांकि घोड़ी के उतरकर कार पर चढ़ने के दौरान किसी ने उनकी कार पर पत्थर फेंका। दूल्हे परेचा ने कहा कि वह एक-दो दिन में इसकी शिकायत देंगे। शादी में घुड़चढ़ी के लिए मांगी थी सुरक्षा बनासकांठा ज़िले के पालनपुर तहसील के गडलवाड़ा गांव में गुरुवार को एक अनोखी शादी देखने को मिली। यह शादी आम शादियों से बिल्कुल अलग थी। दूल्हे मुकेश परेचा अपनी शादी में घुड़चढ़ी की रस्म करना चाहते थे। इलाके के दबंगों ने दलितों की घुड़चढ़ी पर रोक लगा रखी थी। परेचा ने इस रस्म के लिए स्थानीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से सुरक्षा मांगी। उन्होंने 22 जनवरी को बनासकांठा ज़िले के पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन दिया। आवेदन में परेचा ने बताया कि उनके गांव में दलित कभी घुड़चढ़ी या वरघोड़ा नहीं निकालते हैं। मैं पहला व्यक्ति हूं जो वरघोड़ा निकालूंगा, जिसमें किसी अनहोनी की पूरी संभावना है। आपसे निवेदन है कि हमें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। इंस्पेक्टर ने खुद चलाई दूल्हे की कार पुलिस ने उनकी बरात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई। खुद जिग्नेश मेवाणी भी पुलिस अफसरों के साथ बारात में शामिल हुए। बनासकांठा ज़िला अदालत में वकालत करने वाले परेचा ने कहा कि पुलिस सुरक्षा के बीच उनकी बारात निकली। जब वह घोड़े पर सवार थे, तब कुछ नहीं हुआ। लेकिन जब वह घोड़े से उतरे और अपनी कार में बैठे तो किसी ने उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंक दिया। फिर पुलिस इंस्पेक्टर के. एम. वसावा ने खुद स्टेयरिंग थाम लिया। उनके साथ कार में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी भी मौजूद थे। recent visitors 29