मोहन सरकार आयुष्मान योजना में गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई एसओपी बनाने जा रही, गड़बड़ियां रोकने तत्कालिक बदलाव होंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत कई अस्पतालों ने फर्जीवाड़े किए हैं. लगातार गड़बड़ियों की शिकायतें आने के बाद अब मोहन यादव सरकार ने शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है. मरीजों के फर्जी बिल लगाकर सरकारी खजाने को चपत लगा रहे भोपाल के 200 समेत प्रदेश के एक हजार अस्पताल जांच के दायरे में हैं. सरकार आयुष्मान योजना में गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानि एसओपी बनाने जा रही है. गड़बड़ियां रोकने के लिए कुछ तत्कालिक बदलाव भी किए गए हैं. डायलिसिस का क्लैम पाने के लिए नई गाइडलाइन आयुष्मान योजना के मध्यप्रदेश के सीईओ डॉ. योगेश भरसट ने बताया "सरकार आयुष्मान योजना की गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई एसओपी तैयार कर रही है. अभी लोग शिकायत कर रहे थे कि डायलिसस के मामले में अस्पताल संचालक फर्जी बिल बनाकर सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं. ऐसे में हमने इसमें बदलाव किया है. डायलिसिस मरीजों के लिए एक जरूरी बदलाव राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) ने किया है. इसके तहत आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों को डार्यालिसस पर क्लैम तभी मिलेगा, जब डॉक्टर या अस्पताल अधीक्षक मरीज के साथ फोटो टीएसएम पोर्टल पर अपलोड करेगा. यदि टीएसएम पोर्टल पर फोटो अपलोड नहीं हुए तो क्लैम रिजेक्ट कर दिया जाएगा." शिकायत सही मिली तो इंपैनल्ड अस्पताल होंगे बाहर आयुष्मान योजना के तहत भोपाल जिले के 200 और प्रदेश के 1000 से अधिक इम्पैनल्ड अस्पतालों की नए सिरे से जांच की जा रही है. इनमें फर्जी बिलिंग और इलाज में अनियमितता की शिकायत मिल रही थी. यही शिकायतें गली-मोहल्लों में संचालित आरोग्य अस्पतालों के खिलाफ भी मिल रही थीं. अब सरकार शिकायत मिलने वाले इंपैनल्ड अस्पतालों की जांच करेगा. यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ऐसे अस्पतालों को आयुष्मान योजना की सूची से बाहर किया जाएगा. प्रदेश के एक हजार अस्पतालों की होगी स्क्रीनिंग मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत इंपैनल्ड एक हजार अस्पतालों की स्क्रीनिंग की जाएगी. इसमें उनकी मूलभूत सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बारे में जानकारी ली जाएगी. यदि ऐसे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं, तो उनके खिलाफ मान्यता रद्द करने समेत अन्य कार्रवाई होगी. गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिलने और जरूरी संसाधन नहीं होने पर ऐसे अस्पतालों को डीलिस्ट किया जाएगा. अस्पतालों के क्लैम सेटलमेंट, मरीजों की शिकायतों और इलाज की गुणवत्ता पर आधारित नए मानक तय किए जाएंगे. अस्पतालों की रैंकिंग बनाई जाएगी, जिससे अच्छे अस्पतालों को फायदा मिलेगा और खराब अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई होगी. recent visitors 33

आचार्य जी के उपदेश प्रकाश स्तंभ की तरह: पथ को आलोकित कर देती है सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने हमें सिखाया कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। अगर हम अपनी संस्कृति को खो देते हैं तो विश्व के समक्ष हमारी कोई पहचान नहीं रह जाती। आचार्य जी ने संप्रदायवाद, भाषावाद, जातिवाद आदि संकीर्णताओं से ऊपर उठकर मानवता एवं विश्व बंधुत्व का संदेश हम सभी को दिया है। केन्द्रीय गृहमंत्री शाह आज डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ में आचार्य विद्यासागर जी महाराज की समाधि स्मारक के भूमिपूजन और विनयांजलि समारोह को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जैन आचार्यो और मुनियों ने संपूर्ण देश को एकसूत्र में बांधने का कार्य किया है। जैन संतों और मुनियों ने उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर से लेकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला तक और बिहार के राजगीर से गुजरात के गिरनार तक हर जगह पैदल भ्रमण कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हुए त्याग और तपश्चर्या से सन्मार्ग पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने एक कल्पवृक्ष की भांति जीवन जिया। उनके तप और त्याग से प्रत्येक क्षण देशवासियों को नई प्रेरणा मिली।  उन्होंने कहा कि आज इस स्थान पर सभी लोगों ने मिलकर आचार्य जी की भव्य समाधि का निर्माण करने का निर्णय लिया है, इसके लिए  सभी साधुवाद के पात्र हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज भौतिक देह से भले ही हमारे बीच उपस्थित नहीं है, लेकिन उनके उपदेश हमें प्रकाश स्तंभ की तरह युगों युगों तक हमेशा सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे। आचार्य जी ने धर्म की रक्षा और राष्ट्र की मजबूती के लिए मीलों पैदल सफर तय किया। आहार-विहार का ऐसा संयम रखा जिसे सोचकर ही हम सब चकित रह जाते हैं। आचार्य जी ने करोड़ों लोगों को अपने जीवन से प्रेरणा दी। वे एक राष्ट्र संत थे और स्वदेशी के प्रति उनका गहरा अनुराग था। वे हमेशा कहते थे कि हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने पूज्य समता सागर जी महाराज और देशभर से आए सभी जैन मुनियों को प्रणाम करते हुए कहा कि  संतों का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ को सदैव मिलता रहे, ऐसी मेरी कामना है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, लोकसभा सांसद संतोष पाण्डेय, विधायक डोंगरगढ़ श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल, जैन समाज के अशोक पाटनी, महोत्सव के अध्यक्ष विनोद बड़जात्या, श्रीकांत प्रभात जैन, विनोद जैन, मनीष जैन एवं अन्य जनप्रतिनिधि सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 47

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय में, जब संपूर्ण विश्व आपसी भौतिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय में, जब संपूर्ण विश्व आपसी भौतिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है, ऐसे में भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। मानवता के उत्थान और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए बुद्ध के दिखाए रास्ते का अनुसरण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी बुद्ध के संदेशों का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है, जिसके कारण यहाँ सभी धर्मों के लोग आपसी सौहार्द, भाईचारे और समरसता के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय आज डोंगरगढ़ के प्रसिद्ध प्रज्ञागिरी तीर्थ स्थल में आयोजित 32वें अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस आयोजन में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षु, विद्वान एवं अनुयायी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ धार्मिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रदेश के प्राचीन बौद्ध स्थलों में सिरपुर का विशेष महत्व है, जहाँ बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक विरासत आज भी संरक्षित है। इसी प्रकार, उत्तरी छत्तीसगढ़ के मैनपाट क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, और यह क्षेत्र अब एक प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें पर्यटन भी एक महत्वपूर्ण घटक है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता इसे पर्यटन के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती है। प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सतत प्रयासरत है। इस दिशा में, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना के तहत भी इस क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिससे यहाँ पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री साय ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में देश-विदेश से पधारे बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों एवं अनुयायियों का हृदय से स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राजनांदगांव लोकसभा सांसद संतोष पाण्डेय एवं प्रज्ञागिरी ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष विनोद खाण्डेकर ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रज्ञागिरी ट्रस्ट समिति के सचिव शैलेन्द्र डोंगरे, कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार सहारे एवं बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म के अनुयायी उपस्थित रहे। recent visitors 45

भोपाल मंडल को इंटर डिविजनल टिकट चेकिंग शील्ड सहित 6 दक्षता शील्ड मिली

भोपाल  पश्चिम मध्य रेलवे के 69वें रेल सप्ताह समारोह के अंतर्गत महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय महोदया द्वारा विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार आवंटित किये गये| इस अवसर पर जबलपुर में आयोजित भव्य समारोह में रेल कर्मचारियों एवं  भोपाल, जबलपुर और कोटा मंडल के विभिन्न विभागों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भोपाल मंडल को कुल 6 दक्षता शील्ड प्राप्त हुई हैं, जो मंडल की उत्कृष्ट सेवाओं और प्रयासों को दर्शाती हैं। भोपाल मंडल के चार कर्मचारियों को व्यक्तिगत पुरुस्कार महाप्रबंधक महोदया द्वारा प्रदान किये गए । साथ ही भोपाल मंडल को इंटर डिविजनल टिकट चेकिंग ,विद्युत, इंजीनियरिंग, संरक्षा, राजभाषा और सर्वश्रेष्ठ अनुरक्षित रनिंग रूम शील्ड प्रदान की गई। इन प्रतिष्ठित शील्डस को भोपाल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी एवं मंडल के शाखाधिकारियों  ने महाप्रबंधक से प्राप्त किया। इस उपलब्धि पर भोपाल मंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हर्षोल्लास है। भोपाल मंडल ने इन विभागों में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रेलवे सेवा को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाया है। रेल प्रशासन ने सभी पुरस्कृत विभागों को बधाई दी और भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने के लिए प्रेरित किया। recent visitors 37

ज्योतिर्लिंग के साथ द्वारका एवं शिर्डी यात्रा के लिए रवाना होगी आई.आर.सी.टी.सी. की भारत गौरव पर्यटक ट्रैन

ज्योतिर्लिंग के साथ द्वारका एवं शिर्डी यात्रा के लिए रवाना होगी आई.आर.सी.टी.सी. की भारत गौरव पर्यटक ट्रैन भोपाल मंडल के रानी कमलापति एवं इटारसी से होकर गुजरेगी भोपाल मध्यप्रदेश के तीर्थयात्रियों के लिए एक विशेष अवसर—आईआरसीटीसी द्वारा संचालित भारत गौरव पर्यटक ट्रेन, जो 25 मार्च 2025 को रीवा से रवाना होगी। इस ट्रेन के माध्यम से यात्री ज्योतिर्लिंगों और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। यह विशेष ट्रेन रीवा, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, इटारसी, रानी कमलापति, शुजालपुर, इंदौर, देवास, उज्जैन और रतलाम जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी, जहाँ से यात्री इसमें सवार हो सकते हैं। 10 रातों/11 दिनों की इस यात्रा में द्वारका, सोमनाथ, त्र्यंबकेश्वर, शिरडी, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों का भ्रमण शामिल होगा। आईआरसीटीसी द्वारा इस यात्रा के लिए विशेष रूप से एलएचबी कोच वाली भारत गौरव ट्रेन चलाई जा रही है, जिसमें यात्रियों के लिए सुविधाजनक रेल यात्रा, ऑन-बोर्ड एवं ऑफ-बोर्ड भोजन, सड़क परिवहन, दर्शनीय स्थलों की यात्रा, आवास, टूर एस्कॉर्ट्स, यात्रा बीमा और ऑन-बोर्ड सुरक्षा जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यात्रा में शामिल होने के इच्छुक यात्री आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट (www.irctctourism.com) पर जाकर बुकिंग कर सकते हैं। यह यात्रा विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए एक अनुकूल विकल्प हो सकती है, जो एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं। recent visitors 50

आचार्य जी ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन, देश के गौरव का विश्वभर में प्रसार और देश की पहचान ‘इंडिया’ की बजाय ‘भारत’ से होने पर जोर दिया:अमित शाह

रायपुर : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के ‘प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव’ और 1008 सिद्धचक्र विधान विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आचार्य विद्यासागर जी महाराज एक युग पुरुष थे, उन्होंने एक नए विचार और नए युग का प्रवर्तन किया आचार्य विद्यासागर जी के शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण धर्म, संस्कृति और राष्ट्र को समर्पित रहा आचार्य जी ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन, देश के गौरव का विश्वभर में प्रसार और देश की पहचान ‘इंडिया’ की बजाय ‘भारत’ से होने पर जोर दिया जी-20 सम्मेलन के निमंत्रण पत्र पर ‘प्राइम मिनिस्टर ऑफ भारत’ लिख कर, मोदी जी ने विद्यासागर जी के विचारों को जमीन पर उतारने का काम किया आचार्य विद्यासागर जी अपने कर्मों से भारत, भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषाओं और भारत की पहचान के प्रतिबिंब बने आचार्य विद्यासागर जी का संदेश, प्रवचन व लेखन जैन समुदाय के साथ-साथ पूरे राष्ट्र के लिए अनमोल धरोहर मोदी जी के नेतृत्व में भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के सिद्धांतों का प्रचार कर रहा है जिस देश में अनेक भाषाएँ, लिपियाँ, बोलियाँ, व्याकरण और गाथाएँ हों, वह देश सांस्कृतिक रूप से उतना ही समृद्ध होता है रायपुर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया और 1008 सिद्धचक्र विधान विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए। इस दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आचार्य विद्यासागर जी की स्मृति में ₹100 का स्मारक सिक्का, डाक विभाग का ₹5 का विशेष लिफाफा, 108 चरण चिन्हों व चित्र का लोकार्पण और प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ का शिलान्यास किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूज्य मुनि समता सागर जी महाराज सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज एक युग पुरुष थे, जिन्होंने एक नए विचार और नए युग का प्रवर्तन किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में जन्मे आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महामुनिराज अपने कर्मों से भारत, भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषाएँ और भारत की पहचान के ज्योतिर्धर बने। शाह ने कहा कि शायद ही यह सम्मान किसी ऐसे धार्मिक संत को मिला होगा, जिन्होंने धर्म के साथ-साथ देश की पहचान की व्याख्या विश्व भर में की हो। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी के शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण धर्म, संस्कृति और राष्ट्र को समर्पित रहा। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्हें कई बार आचार्य विद्यासागर जी का सान्निध्य मिला और हर बार आचार्य जी ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन, देश के गौरव का विश्वभर में प्रसार और देश की पहचान ‘इंडिया’ की बजाय ‘भारत’ से होने पर जोर दिया। अमित शाह ने कहा कि जी-20 सम्मेलन के निमंत्रण पत्र पर ‘प्राइम मिनिस्टर ऑफ भारत’ लिख कर, मोदी जी ने विद्यासागर जी के विचारों को जमीन पर उतारने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आचार्य जी के विचार को जरा भी राजनीति किए बगैर जमीन पर उतारा और उनके संदेश का अनुकरण करने का काम किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आचार्य जी ने जीवन के अंतिम क्षण तक तपस्या का मार्ग नहीं छोड़ा। शाह ने कहा कि आचार्य जी ने न केवल जैन धर्म के अनुयायियों को बल्कि जैनेत्तर अनुयायियों को भी अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से मोक्ष का मार्ग बताने का काम किया। अमित शाह ने कहा कि यह बोलने वाले बहुत लोग मिलते हैं कि धर्म, राष्ट्र और समाज के लिए जीवन का हर क्षण समर्पित होना चाहिए। लेकिन पूरा जीवन इसी तरह जीने वाले लोग कभी-कभार ही दिखते हैं और आचार्य जी का जीवन ऐसा ही रहा। उन्होंने कहा कि आचार्य जी ने ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के सिद्धांत की समय अनुकूल व्याख्या कर पूरे विश्व में इसे स्थापित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने जैन धर्म के सिद्धांत के अनुरूप इस बात का ख़याल रखा कि उनके शिष्य भी उन्हीं सिद्धांतों पर जीवन व्यतीत करें। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के सिद्धांतों का प्रचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस अवसर के लिए स्मारक सिक्का और विशेष लिफाफा की स्वीकृति देने के लिए वह मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य जी को दी गई यह कार्यांजलि संत परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि आचार्य जी का प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ युगों-युगों तक आचार्य जी के सिद्धांतों, संदेशों और उपदेशों के प्रचार का स्थान बनकर रहेगा। शाह ने कहा कि जिस संत ने अपना पूरा जीवन विद्या की उपासना में बिताया, उनकी समाधि का नाम ‘विद्यायतन’ के अलावा कुछ और नहीं हो सकता। अमित शाह ने कहा कि इस अवसर पर मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में निः शुल्क कन्या विद्यालय का भी शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय में कौशल विकास और रोजगार दोनों सम्मिलित होंगे और अध्यापन कार्य मातृभाषा में होगा। उन्होंने कहा कि आचार्य जी के 108 चरण चिह्नों का भी लोकार्पण हुआ है, जो त्याग, तपस्या और संयम के जीवन का संदेश देंगे। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत की संत परंपरा बहुत समृद्ध है। उन्होंने कहा कि देश को जब जिस भूमिका की ज़रूरत पड़ी, संत परंपरा ने उस भूमिका का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि संतों ने ज्ञान का सृजन किया, देश को एकता के सूत्र में बाँधा और जब गुलामी का कालखंड था, तब संतों ने भक्ति के माध्यम से राष्ट्र चेतना की लौ जलाए रखी। उन्होंने कहा कि देश का शासन और देश जब आज़ादी के बाद पाश्चात्य विचारों से प्रभावित होकर चलने लगा, तब विद्यासागर जी महाराज एकमात्र आचार्य थे जिन्होंने भारत, भारतीयता और भारतीय संस्कृति से खुद को जोड़े रखा।अमित शाह ने कहा कि जैन मुनियों ने पूरे देश को एक करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर से लेकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला तक, बिहार … Read more

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ‘एकात्म धाम‘ मंडपम् में शंकर गाथा की प्रस्तुति से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

भोपाल सनातन संस्कृति की दिव्य अनुभूति के महापर्व "प्रयागराज महाकुम्भ " में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा अद्वैत वेदान्त दर्शन के लोकव्यापीकरण एवं सार्वभौमिक एकात्मता की संकल्पना के उद्देश्य से "एकात्म धाम शिविर" सेक्टर-18, हरिश्चन्द्र मार्ग, महाकुम्भ क्षेत्र, झूंसी, प्रयागराज में गुरुवार को हजारों दर्शकों की उपस्थिति में आदि शंकराचार्य के जीवन पर केंद्रित दो दिवसीय नृत्य नाटिका के प्रथम दिन ‘शंकर गाथा‘ की प्रस्तुति हुई तो पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा, गाथा के सूत्रधार की भूमिका महाभारत के श्रीकृष्ण के रूप में लोकप्रिय अभिनेता नितेश भारद्वाज ने निभाई। वहीं इसका निर्देशन विश्व प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ने किया।    दैनिक दिनचर्या में साधना से ‘दिव्य रूपांतरण‘ विषय पर जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित सत्र में चिन्मय मिशन चेन्नई के स्वामी मित्रानन्द सरस्वती, नेशनल कैपिसिटी बिल्डिंग कमीशन (NPCSCB) से आर.बाला सुब्रमण्यम ,03 बार के ग्रेमी अवार्ड विजेता पद्मरिकी केज (Ricky Kej, UNHCR Goodwill Ambassador), ऐश्वर्या हेगड़े (नेशनल एजुकेशन फाउंडेशन की न्यासी सचिव) एवं प्राच्यम के सह-संस्थापक प्रवीण चतुर्वेदी ने अपने विचार व्यक्त किये। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा, “शंकर भगवत्पाद का अद्वैत सिद्धांत समाधान मूलक है। विश्व में जो अशांति व्याप्त है, उसका समाधान यदि कहीं से निकलेगा तो वह अद्वैत वेदांत से होगा। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के प्रयास प्रशंसनीय हैं। आने वाला युग और शताब्दियाँ आदि शंकराचार्य के विचारों का अनुसरण करेंगी।” स्वामी मित्रानंद सरस्वती ने कहा, “हमारे हर छोटे से छोटे कार्य को प्रार्थना में बदला जा सकता है। जब हम अपने कार्यों को भगवान को समर्पित करके करते हैं, तो वह कर्म योग बन जाता है। ऐसा कार्य कर्मों से प्रभावित नहीं होता।” अपने कार्य के प्रति अद्वितीय जुनून होना चाहिए : ग्रेमी अवार्ड विजेता पद्मरिकी केज संगीतकार पद्मरिकी केज ने कहा, “संगीत और प्रकृति एक ही हैं। अपने कार्य के प्रति अद्वितीय जुनून होना चाहिए। सभी पर्यावरणीय और सामाजिक समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या यह सोच है कि कोई और दुनिया को बदलेगा। हम खुद को बदलने के लिए तैयार नहीं होते।” प्रवीण चतुर्वेदी ने कहा, “जीवन में दो साधनाएँ आवश्यक हैं—आंतरिक साधना, जो आत्म साक्षात्कार की ओर ले जाती है, और बाहरी साधना, जो संसार में रहकर कर्मों को कुशल बनाती है। ज्ञान और परंपरा की अविरल धारा को आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है। तभी जीवन में पवित्र परिवर्तन आएगा।”*महाभारत के कृष्ण जब ‘शंकरगाथा‘ को लेकर मंच पर उतरे तो तालियों से गूंज उठा सभागार सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘शंकर गाथा’ में आदि शंकराचार्य विरचित निर्वाण षट्कम – मनोबुद्ध्यहंकार चित्तानि नाहम्, नर्मदाष्टकम् – त्वदीय पाद पंकजम् नमामि देवी नर्मदे, कृष्णाष्टकम् – भजे व्रजैक मंडनम् सहित भज गोविन्दम् आदि पर आधारित विभिन्न नृत्य विधाओं की प्रस्तुतियाँ देशभर से आए कलाकारों द्वारा दी गईं। प्रस्तुति में मणिपुरी, ओडिशी, भरतनाट्यम् के समवेत कलाकारों ने सांस्कृतिक एकता का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया।   recent visitors 40