हरियाणा में ग्रुप सी और डी भर्ती के कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट के लिए जल्द रजिस्ट्रेशन शुरू

हरियाणा हरियाणा में ग्रुप सी और डी भर्ती के कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) 2025 के लिए जल्द रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। इसको लेकर हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) ने फॉर्म भरने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट की लिस्ट जारी की है। HSSC के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने इसकी सूचना दी है। HSSC के चेयरमैन हिम्मत सिंह युवाओं से अपील की है कि वह अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स, सर्टिफिकेट्स तैयार रखें ताकि रजिस्ट्रेशन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। recent visitors 45

औद्योगिक परिदृश्य बेहतर बनाने सीएम सुझाव लेंगे, इंदौर में 18 फरवरी को बैठक करेंगे। सीएम उनके साथ डिनर भी करेंगे

भोपाल राजधानी में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले सीएम डॉ. मोहन यादव भोपाल और इंदौर में उद्योगपतियों से संवाद करेंगे। आज शुक्रवार को भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में शाम 7 बजे से चर्चा होगी। सीएम उद्योगपतियों को उद्योग नीतियों में किए संशोधन बताएंगे। औद्योगिक परिदृश्य बेहतर बनाने के सुझाव भी लेंगे। इंदौर में 18 फरवरी को बैठक करेंगे। सीएम उनके साथ डिनर भी करेंगे।  संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और देश के बड़े शहरों में इंटरेक्टिव सेशन किए गए हैं। सीएम ने ब्रिटेन, जर्मनी और जापान में भी रोड शो कर मप्र में निवेश की संभावनाएं और नीतियां बताई हैं। अब स्थानीय उद्योगपतियों सीएम सीधा संवाद करेंगे। मंडीदीप में भी 17 फरवरी को कार्यक्रम होगा। बैठकों के जरिए स्थानीय उद्योगपतियों को भी जीआइएस में आमंत्रण और सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उद्योगों के विस्तार पर भी बात बैठक में उद्योग विभाग और एमपीआइडीसी के अधिकारी आइटी, फूड प्रोसेसिंग, माइनिंग, पर्यटन आदि क्षेत्रों में सरकार से दी जा रही सुविधाएं, इंसेंटिव और नई नीतियों को बताएंगे। फिनलैंड की संस्था संवारेगी अपना पर्यटन भोपाल. फिनलैंड की संस्था वी रियल प्रदेश के पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों पर वर्चुअल टूर बनाएगी। मप्र टूरिज्म बोर्ड और वी रियल के बीच इसका करार हुआ है। इस दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव फिनलैंड के राजदूत किद्ब्रमो लाहदेविर्ता मौजूद रहे। ये वर्चुअल टूर जीवंत अनुभूति देंगे। इन टूर के जरिए पर्यटन, इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले मप्र के इतिहास और संस्कृति से परिचित हो सकेंगे। recent visitors 34

Apple का नया इवेंट 19 फरवरी को होगा, कम कीमत में बेहतरीन फीचर्स वाली डिवाइस पर होगा फोकस

iPhone SE 4 और MacBook का इंतजार कर रहे Apple फैन्स के लिए एक नई खबर सामने आई है। Apple 19 फरवरी को एक इवेंट करने जा रहा है। इसमें कंपनी की तरफ से कई नए प्रोडक्ट्स लाए जा सकते हैं। टिम कुक ने 'X' पर जानकारी देते हुए लिखा, 'Apple के नए सदस्य से मिलने के लिए तैयार हो जाइये। ऐपल का लॉन्च 19 फरवरी (बुधवार) को होगा।' कुक की तरफ से शेयर की गई जानकारी से साफ हो गया है कि ऐपल के नए प्रोडक्ट दस्तक देने जा रहे हैं। कौन-से प्रोडक्ट हो सकते हैं लॉन्च ? Bloomberg से मिली जानकारी से पता चलता है कि iPhone SE 4 (2025) को मार्केट में उतारा जा सकता है। इस फोन को iPhone 14 की तर्ज पर लॉन्च किया जाएगा। डिस्प्ले को लेकर टिप्सटर की तरफ से दावा किया गया है कि इसमें नॉच मिलने वाला है। यानी इस फोन में Apple की तरफ से Dynamic Island का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। साथ ही डिजाइन भी काफी हद तक iPhone 14 जैसा ही हो सकता है। SE 2 और SE 3 मॉडल्स की बात करें तो इसे ज्यादा यूजर्स ने पसंद नहीं किया था। यही वजह है कि ऐपल को एक समय बाद इन प्रोडक्ट्स को डिस्कंटीन्यू भी करना पड़ा था। iPhone SE मॉडल पर कंपनी कोई बड़ा इवेंट नहीं करेगी। वीडियो अनाउंसमेंट की मदद से ही नया प्रोडक्ट लाया जा सकता है। इस बार कंपनी का पूरा फोकस ऐसे iPhone को लाने पर रहेगा जिसमें कम कीमत में बेहतरीन फीचर्स मिल सकें। भारत में iPhone से सस्ते मॉडल्स की डिमांड हमेशा रहती है। सामने आई जानकारी से पता चलता है कि लॉन्च के एक हफ्ते बाद 28 फरवरी को इसकी सेल शुरू हो सकती है। क्या फीचर्स हो सकते हैं खास ?     6.1 Inch OLED 460ppi Super Retina XDR Display     A18 Chip के साथ 8GB रैम सपोर्ट     Apple Intelligence सपोर्ट और Apple का मॉडम     48MP का मेन कैमरा, 12MP का फ्रंट कैमरा recent visitors 42

ग्वालियर के मुरैना मार्ग नगर द्वार का नाम दाता बंदी छोड़ द्वार होगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव

 ग्वालियर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पवित्र सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह के नाम पर दाता बंदी छोड़ द्वार मुरैना के रास्ते पर रखने की हम घोषणा कर रहे हैं। ग्वालियर शहर ग्वालियर चंबल संभाग में सिख समुदाय का बड़ा प्राचीन गौरवशाली इतिहास रहा है। बड़ी संख्या में सिख परिवार इस क्षेत्र में निवास भी करते हैं। सिखों के छठवें गुरु परम पूज्य हरगोविंद सिंह महाराज साहब को ग्वालियर के किले में मुगल बादशाह जहांगीर ने कई वर्षों तक बंदी बनाए रखा था। गुरु गोविंद सिंह के साथ 52 अन्य हिंदू राजा भी उनकी कैद में थे। डॉ यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि आज गर्व के साथ हम ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र में बनने वाले नगर द्वार का नाम सिख धर्म के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी के सम्मान में ‘दाता बंदी छोड़ द्वार’ रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर शहर और चंबल संभाग सिख समुदाय के अद्वितीय इतिहास और समृद्ध संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं। गुरु हरगोबिंद सिंह जी का साहस और बलिदान हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। जब मुग़ल बादशाह ने गुरु हरगोविंद सिंह को रिहा करने का निर्णय लिया तो उन्होंने अपनी अकेली रिहाई से मना कर दिया था और 52 हिंदू राजाओं के साथ निकल के आने की इच्छा व्यक्त की थी। मुगल बादशाह ने मजबूर होकर 52 हिंदू राजाओं को भी हमारे छठवें सिख गुरु हरगोविंद सिंह जी महाराज साहब के साथ में रिहा किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मैं आज इस अवसर पर ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र में बनने वाले नगर द्वार का नाम दाता बंदी छोड़ द्वार रखने की घोषणा करता हूं। सिख लोग पहले दीवाली नहीं मनाते थे, लेकिन ग्वालियर में एक ऐसा घटनाक़म घटा कि उसके बाद से उन्होंने दो दिन दिवाली मनाना शुरू कर दिया. इन दिनों उनके धार्मिक स्थल भी रोशनी से जगमगाते है. इसकी कहानी भी बड़ी रोमांचक और अविस्मरणीय है. क्या है कहानी? ग्वालियर के विश्व प्रसिद्ध दुर्ग के ही एक बड़े हिस्से व ऊंचाई पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा मौजूद है, जिसका नाम 'दाता बंदी छोड़' है. यह गुरुद्वारा सिख संगत में बड़े तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है. दुनिया भर से सिख सपरिवार हर साल यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं. मान्यता है और इतिहास में उल्लेख भी कि मुगल काल के दौरान लोगों में सिख धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मुगल शासक जहांगीर ने सिखों के छठे गुरु हरगोविंद साहिब को बंदी बना लिया था. गुरु हरगोविंद साहिब ने मुस्लिम शासकों की धार्मिक शर्तें मानने से इनकार कर दिया था. जहांगीर ने गुरु महाराज को बंदी बनाकर ग्वालियर के किले में कैद कर दिया था. मुगल उस समय इस किले को अपने राजनीतिक बंदियों की कैद के लिए उपयोग करते थे. इस किले में साहिब के आने से पहले से ही 52 हिंदू राजा कैद थे. गुरु हरगोविंद जी जब जेल में पहुंचे तो सभी राजाओं ने उनका स्वागत किया. जहांगीर ने गुरु हरगोविंद को 2 साल 3 महीने तक जेल से बाहर नहीं आने दिया. इस घटना के बाद रिहा हुए सिख गुरू उसी दौरान अचानक एक घटना घटी. जहांगीर की तबीयत खराब होने लगी. हकीम से लेकर वैद्य तक सब उपचार में जुटे थे, लेकिन उनकी तबियत बिगड़ती ही जा रही थी. तभी एक शाही पीर ने जहांगीर को बताया कि ग्वालियर किले पर नजरबंद गुरु हरगोविंद साहिब को मुक्त कर दो, तभी आप ठीक हो सकते हैं. जान जाने से भयभीत जहांगीर ने उनकी बात मान ली. इसके बाद गुरू हरगोविंद साहिब को रिहा करने के लिए जहांगीर तैयार हुआ. आखिरकार इसके बाद गुरु हरगोविंद साहिब की शर्त को स्वीकार करते हुए जहांगीर ने भी एक शर्त रखी. जहांगीर ने कहा कि कैद में गुरु जी के साथ सिर्फ वही राजा बाहर जा सकेंगे, जो गुरुजी का कोई कपड़ा पकड़े होंगे. इसके बाद गुरु हरगोविंद साहिब ने जहांगीर की शर्त को स्वीकार कर लिया. चालाकी पर भारी पड़ा चमत्कार जहांगीर की चालाकी को देखते हुए गुरु हरगोविंद साहिब ने एक 52 कलियों का चोंगा (कुर्ता) सिलवाया. इस तरह एक एक कली को पकड़ते हुए सभी 52 हिंदू राजा जहांगीर की कैद से आजाद हो गए. 52 हिंदू राजाओं को ग्वालियर के इसी किले से एक साथ छोड़ा गया था. इसलिए यहां बने इस स्थान का नाम दाताबन्दी छोड़ रखा गया था लेकिन कालांतर में यहां बने गुरुद्वारे का नाम 'दाता बंदी छोड़' के नाम से ही प्रसिद्ध हो गया. चूंकि यह रिहाई दीपावली के मौके पर हुई थी, इसलिए सिखों ने उनकी अगवानी के लिए घर घर दिए जलाए और तभी से सिख समाज भी अमावस्या और उसके एक दिन बाद तक घरों में दीपक जलाकर दीवाली मनाने लगा. ग्वालियर स्थित दाताबन्दी छोड़ गुरुद्वारे में भी दीपोत्सव होता है. यहां लाखों की तादात में सिख धर्म के अनुयाई अरदास करने आते हैं. यह पूरे विश्व में सिख समाज का छठवां सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है.     recent visitors 34

दिल्ली में केजरीवाल पर पहला बड़ा एक्शन! 51 लाख लोगों को जारी होंगे आयुष्मान भारत कार्ड, मोहल्ला क्लिनिक बनेंगे ‘आरोग्य मंदिर’

नई दिल्ली दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, जिसके बाद कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। भाजपा ने इसे लेकर प्लान भी बनाने शुरू कर दिए हैं। इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सरकार बनने के बाद दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों के स्टेटस की समीक्षा करने वाला है, जिसमें उन्हें संभावित रूप से 'आरोग्य मंदिर' में बदलने की योजना है। यह कदम क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उठाया गया है, जिसके चलते मंत्रालय ने नए स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट मांगी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 'केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय योजनाओं पर चर्चा करेगा और दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिकों को आरोग्य मंदिर के रूप में बेस्ट पॉसिबल मेकओवर के रूप से बदलने की कोशिश करेगा। साथ ही, मोहल्ला क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर नए स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट भी मांगेगा।' एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, मंत्रालय दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) को लागू करने पर भी जोर देगा। 51 लाख लोगों को मिलेंगे आयुष्मान कार्ड मंत्रालय आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना (AB-PMJAY) के कार्यान्वयन की भी समीक्षा करेगा. सूत्रों के अनुसार, 51 लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए जाने की संभावना है. यदि मोहल्ला क्लिनिकों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला जाता है, तो उन्हें योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. एक सूत्र ने बताया, "सरकार मोहल्ला क्लिनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बहुत चिंतित है. दिल्ली के नए स्वास्थ्य मंत्री से मोहल्ला क्लिनिकों की स्थिति पर और यह जानने के लिए रिपोर्ट मांगी जाएगी कि क्या इन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला जा सकता है." जनवरी में, उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने दिल्ली सरकार द्वारा संचालित मोहल्ला क्लिनिकों में निजी प्रयोगशालाओं को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी डायग्नोस्टिक टेस्ट के आरोपों पर सीबीआई जांच का आदेश दिया था. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के तहत, सामान्य गैर-संक्रामक बीमारियों (NCDs) जैसे कि सर्वाइकल, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा है. AAP के नेतृत्व वाली रही दिल्ली सरकार और टीएमसी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल ने अभी तक AB-PMJAY योजना को लागू नहीं किया. AAP सरकार ने लागू नहीं की थी योजना AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और पश्चिम बंगाल ने अभी तक AB-PMJAY योजना को लागू नहीं किया है. AB-PMJAY सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो भारत की आबादी के आर्थिक रूप से कमज़ोर 40 प्रतिशत हिस्से में से 12.37 करोड़ परिवारों के लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों को माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है. हाल ही में, इस योजना का विस्तार करके 4.5 करोड़ परिवारों के 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया गया है, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. सूत्रों ने बताया, 'एक और बड़ा कदम दिल्ली में एबी-पीएमजेएवाई योजना को लागू करना है, जिसके तहत 51 लाख लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने की संभावना है।' आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करती है। इस योजना में 70 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा ने अपने घोषणापत्र में आयुष्मान योजना को लागू करने का वादा किया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली शानदार जीत के बाद अब पार्टी से इस वादे को पूरा करने की उम्मीद है। इस योजना से दिल्ली के करीब 51 लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आयुष्मान कार्ड जारी किए जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दिल्ली के सभी सात भाजपा सांसदों द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद आप सरकार द्वारा आयुष्मान योजना को लागू न करने पर सवाल उठाए थे। भाजपा को जनता ने ऐतिहासिक जनादेश दिया है। पार्टी ने 48 सीटें जीतीं, जिसमें 27 साल बाद दिल्ली में उसकी सत्ता में वापसी हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप के कई नेता अपनी सीटें हार गए, जबकि आतिशी अपनी सीट बचाने में सफल रहीं। 8 फरवरी को घोषित दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। ​​पार्टी ने दिल्ली विधानसभा का नेतृत्व करने के लिए अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की फिलहाल घोषणा नहीं की है। दिल्ली में पिछली भाजपा सरकार 1993 से 1998 तक थी। recent visitors 32

सांसदों की मुलाकातों से डरे उद्धव ठाकरे, एडवाइजरी जारी, शिंदे गुट के नेताओं से मुलाकात न करने की दी नसीहत

मुंबई शरद पवार की ओर से एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार दिया गया था। इस सम्मान को लेकर टकराव खत्म भी नहीं हुआ था कि उद्धव सेना ने सांसदों को लेकर एडवाइजरी जारी कर दी है। उद्धव सेना के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं से मिल रहे थे। इसे लेकर उद्धव खेमा चिंतित था और अब उसने एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं से ज्यादा मुलाकात न करने की नसीहत दी है। आदित्य ठाकरे की ओर से यह एडवाइजरी दी गई है। दरअसल खबरें थीं कि कई सांसदों ने एकनाथ शिंदे और उनके गुट के अन्य नेताओं से मुलाकात की है। एकनाथ शिंदे ने ढाई साल सरकार चलाई थी और अब भाजपा की लीडरशिप वाली सरकार में वह डिप्टी सीएम हैं। ऐसे में उद्धव खेमे के सांसदों और विधायकों को लगता है कि सत्ता से करीबी के लिए एकनाथ शिंदे गुट के साथ रहना मुनासिब होगा। यह बात उद्धव गुट के लिए चिंता की वजह बन गई है। अब आदित्य ठाकरे की ओर से कहा गया है कि किसी भी आयोजन का न्योता स्वीकार करने से पहले लीडरशिप की मंजूरी जरूरी है। एकनाथ शिंदे खेमे की ओर से यदि कोई डिनर या लंच का इनवाइट आता है तो उसके लिए भी परमिशन लेकर ही जाना होगा। दरअसल 11 फरवरी को शरद पवार ने एकनाख शइंदे को सम्मानित किया था। दिल्ली में यह आयोजन हुआ था, जिसमें उद्धव सेना के सांसद संजय पाटिल भी मौजूद थे। यह बात उद्धव खेमे को अखर गई है। सम्मान को लेकर संजय राउत ने यहां तक कह दिया कि ऐसे सम्मान या तो खरीदे जाते हैं या फिर बेचे जाते हैं। इन पुरस्कारों को हासिल करने का और कोई तरीका नहीं है। एकनाथ शिंदे के सम्मान समारोह में मौजूद रहने वाले सांसद शाम को श्रीकांत शिंदे की ओर से दिए गए डिनर में भी पहुंचे थे। इस बात को लेकर टेंशन है। यही नहीं 12 नवंबर को एकनाथ शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव डिनर दिया था। उसमें भी उद्धव ठाकरे के कई सांसद पहुंचे थे। इन सभी को लेकर उद्धव ठाकरे गुट ने आपत्ति जताई है। दरअसल उद्धव खेमे का कहना है कि शरद पवार की ओर से एकनाथ शिंदे को सम्मानित करना एक तरह से उनके गुट को वैधता प्रदान करना है। इसके अलावा सांसदों के बार-बार मिलने से गलत संदेश जाता है। एक तरफ नैरेटिव खराब होता है तो वहीं ऐसी मुलाकातें सुर्खियां बनती हैं। इन्हीं मुलाकातों के चलते अकसर खबरें आती हैं कि उद्धव सेना के कई विधायक और सांसद पालाबदल कर सकते हैं। ऐसी खबरें उद्धव खेमे को असहज करने वाली होती हैं। यहां तक कि बीते सप्ताह मुंबई में एक मीटिंग हुई थी। इसमें उद्धव खेमे ने सभी सांसदों की परेड कराई थी। दिलचस्प बात है कि संजय पाटिल इसमें नहीं थे, जो श्रीकांत शिंदे के डिनर और एकनाथ शिंदे के सम्मान कार्यक्रम में पहुंचे थे। recent visitors 60

दिल्ली में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद से ही नए मुख्यमंत्री और कैबिनेट को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाईं जा रही हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को लेकर कई नामों की चर्चा तेज है। संभव है कि रविवार तक नए मुख्यमंत्री का चुनाव हो जाए और अगले सप्ताह शपथ ग्रहण हो सकता है। दिल्ली में सीएम समेत अधिकतम 7 मंत्री बनाए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के 10 साल पुराने शासन को खत्म करके भाजपा ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुमत से 12 अधिक सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने चुनाव से पहले किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था। पीएम मोदी के नाम और उनकी गारंटियों पर बनी सरकार का चेहरा कोई ऐसा शख्स भी हो सकता है, जो अभी तक रेस में नहीं बताया जा रहा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भाजपा चौंका चुकी है। हालांकि, कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे 8 में से कम से कम 3 विधायकों की कुर्सी पक्की बताई जा रही है। पहले जाट चेहरों की बात, एक केजरीवाल का पुराना साथी पिछले दो चुनावों में भाजपा एक भी जाट बहुल सीट नहीं जीत पाई। लेकिन इस बार जाटों ने खुलकर भगवा पार्टी का साथ दिया। यही वजह है कि भाजपा ने सभी 10 जाट बहुल सीटों मुंडका, नजफगढ़, नांगलोई जाट, मटियाला, बिजवासन, महरौली, बवाना, नरेला, रिठाला और विकासपुरी में जीत दर्ज की। ऐसे में अब जाटों को रिटर्न गिफ्ट भी मिल सकता है। नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा भी जाट समुदाय से आते हैं। सीएम की रेस में भी वह सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि नेतृत्व ने सीएम के तौर पर किसी और को भी चुना तो प्रवेश वर्मा को मंत्री पद मिलना लगभग तय है। वहीं, जाट चेहरे के तौर पर पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत भी रेस में हैं। गहलोत ने चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी सरकार को बड़ा झटका दिया था। इस बार वह भाजपा के टिकट पर बिजवासन से विधायक बने हैं। 'आप' सरकार में गृह और परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके कैलाश गहलोत के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार में शामिल किया जा सकता है। 3 में से एक सिख नेता को मिल सकता है पद भाजपा के टिकट पर तीन दिग्गज सिख नेता भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इनमें किसी एक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। राजौरी गार्डन से जीत हासिल करने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अरविंदर सिंह लवली भी रेस में आगे बताए जा रहे हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया को जंगपुरा जैसी सीट से हराने वाले तरविंदर सिंह मारवाह को भी दांव लग सकता है। इन तीन में से एक सिख नेता का मंत्री बनना लगभग तय बताया जा रहा है। 3 पूर्वांचली नेताओं में भी रेस दिल्ली में इस बार भाजपा ने उन सीटों पर भी शानदार सफलता हासिल की है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की अधिकता है। भाजपा ने झुग्गी-झोपड़ी और कच्ची कॉलोनियों वाली 17 सीटों पर जीत हासिल की है। चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच पूर्वांचली वोटर्स के लिए खूब खींचतान देखने को मिली। दिल्ली की राजनीति में पूर्वांचलियों की अहमियत को देखते हुए कैबिनेट में कम से कम एक पूर्वांचली नेता का शामिल होने की पूरी गुंजाइश है। इस मामले में लक्ष्मी नगर से जीते अभय वर्मा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है तो आप लहर में भी यहां कमल खिलाने में कामयाब रहे थे। अभय मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। अभय वर्मा के अलावा संगम विहार से जीते चंदन चौधरी और विकासपुरी से जीते पंकज कुमार सिंह भी दावेदार हैं। recent visitors 46