Wednesday, July 8, 2026 12:25 pm

कैबिनेट से वक्फ बिल को मिली मंजूरी, Parliament में अगले महीने लाएगी सरकार

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने वक्फ (संशोधन) बिल में हाल ही में संसदीय समिति द्वारा सुझाए गए बदलावों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह बिल बजट सत्र के दूसरे भाग में चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने अधिकांश बदलावों को शामिल किया है, जिसकी सिफारिश जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने की थी। कैबिनेट ने इसे पिछले सप्ताह भारतीय बंदरगाह विधेयक के साथ मंजूरी दी। इस बिल को सरकार ने अपने विधायी कार्यों की प्राथमिकता सूची में रखा है। विधेयक को अगस्त 2024 में लोकसभा में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू द्वारा पेश किए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। संसदीय पैनल ने बहुमत से अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दी। हालांकि पैनल के सभी 11 विपक्षी दलों के सांसदों ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी और असहमति नोट भी पेश किए थे। 655 पन्नों की यह रिपोर्ट इस महीने दोनों सदनों में प्रस्तुत की गई थी। पैनल ने "वक्फ बाय यूजर" प्रावधान को समाप्त कर दिया है और अब केवल मौजूदा "रजिस्टर्ड वक्फ बाय यूजर" को वक्फ के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि उन मामलों को बाहर रखा जाएगा जिनमें संपत्ति विवादित हैं या सरकारी स्वामित्व में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पैनल ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया है। इसकी संख्या चार तक हो सकती है। जिला कलेक्टरों से विवादों की जांच का अधिकार वरिष्ठ राज्य सरकार के नियुक्त अधिकारियों को सौंपने की सिफारिश की है। राज्य वक्फ बोर्डों में अब मुस्लिम ओबीसी समुदाय से एक सदस्य को शामिल किया जाएगा, जिससे अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। बता दें कि इससे पहले वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि ऐसी फर्जी रिपोर्ट को हम नहीं मानते, सदन इसे कभी नहीं मानेगा. JPC ने 29 जनवरी को दी थी मंजूरी संसदीय समिति ने वक्फ बिल में नए बदलावों पर अपनी रिपोर्ट को 29 जनवरी को मंजूरी दी थी. इस रिपोर्ट के पक्ष में 15 और विरोध में 14 वोट पड़े थे. रिपोर्ट में उन बदलावों को शामिल किया गया है, जो बीजेपी सांसदों ने दिए थे. विपक्षी सांसदों ने वक्फ बोर्डों को खत्म करने की कोशिश बताते हुए असहमति नोट जमा कराए थे. विपक्ष ने वक्फ बिल को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इसके अलावा 'वक्फ बाय यूजर' प्रावधान को हटाने के प्रस्ताव का विरोध भी किया था. recent visitors 69

Indore BRTS: इंदौर में भी टूटेगा बीआरटीएस… HC के आदेश पर बोले महापौर भार्गव- कल से ही कर देंगे काम शुरू

Indore BRTS: BRTS will be demolished in Indore too… Mayor Bhargava said on HC’s order – will start the work from tomorrow itself इंदौर। मध्य प्रदेश में भोपाल के बाद अब इंदौर में भी बीआरटीएस (इंदौर बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को हटाने का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट ने गुरुवार को इसकी अनुमति दे दी। हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सरकार खुद ही इसे हटाना चाहती थी, ताकि यातायात सुगम हो सके। अब हाई कोर्ट का आदेश भी आ गया है तो कल से ही हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद हाई कोर्ट ने भी लगाई मुहरइस तरह 12 साल पुराने इंदौर बीआरटीएस को तोड़ने का रास्ता साफ हो गया। बीआरटीएस को लेकर हाई कोर्ट में चल रही दो जनहित याचिकाओं में गुरुवार को सुनवाई हुई।वर्तमान परिस्थितियों में बीआरटीएस की उपयोगिता और व्यावहारिकता जांचने के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी। इसमें कहा कि इंदौर का बीआरटीएस वर्तमान परिस्थिति में अपनी उपयोगिता खो चुका है।इसकी वजह से अक्सर जाम की स्थिति बनती है। मुख्यमंत्री खुद इसे तोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। याचिका में भी बीआरटीएस को तोड़ने की मांग है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की युगलपीठ ने बीआरटीएस तोड़ने के सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी। recent visitors 123

GATE 2025 की Answer Key हुई जारी, यहां जानें कैसे करें डाउनलोड और कब आएगा रिजल्ट

GATE 2025 की आंसर की का इंतजार कर रहे छात्रों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। दरअसल, IIT रुड़की द्वारा GATE 2025 की आधिकारिक Answer Key 27 फरवरी यानी आज जारी की गई है। इसके लिए IIT रुड़की द्वारा PDF जारी किया गया है, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आपको GATE की आधिकारिक वेबसाइट gate2025.iitr.ac.in पर जाना होगा। बता दें कि जिन छात्रों ने 1, 2, 15 और 16 फरवरी को GATE 2025 परीक्षा में भाग लिया था, वे अब GOAPS पोर्टल पर जाकर आंसर की डाउनलोड कर सकते हैं। वहीं, जिन उम्मीदवारों को आंसर की पर आपत्ति जतानी है, वे 1 मार्च 2025 तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। ऐसे डाउनलोड करें Answer Key यदि आप GATE 2025 की आधिकारिक आंसर की का PDF डाउनलोड करना चाहते हैं, तो सबसे पहले GATE की आधिकारिक वेबसाइट gate2025.iitr.ac.in पर जाएं। इसके बाद वेबसाइट पर दिखाई दे रही GATE Answer Key की लिंक पर क्लिक करें। यहां से आप अपनी Application ID और Password के जरिए लॉग इन कर सकेंगे। याद रखें कि आंसर की का PDF डाउनलोड कर सुरक्षित रखें, क्योंकि यह भविष्य में आपके काम आ सकता है। कब जारी किया जाएगा GATE 2025 रिजल्ट? अगर आपको आंसर की में कोई गलती नजर आती है और आप आपत्ति दर्ज कराना चाहते हैं, तो ₹500 प्रति प्रश्न शुल्क देकर GATE प्रोविजनल आंसर की के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए आपको GOAPS पोर्टल के माध्यम से आपत्ति दर्ज करनी होगी। बता दें कि IIT रुड़की 19 मार्च 2025 को GATE परीक्षा के परिणाम जारी करेगा। आप अपने परिणाम Enrollment ID और Password के जरिए देख सकेंगे। वहीं, स्कोरकार्ड 28 मार्च से 31 मई 2025 तक डाउनलोड किया जा सकेगा। हालांकि, इसके बाद भी आप ₹500 प्रति टेस्ट पेपर शुल्क देकर स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। recent visitors 124

हमेशा होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधक : शिवराज सिंह चौहान

भोपाल  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं. सरकारें पूरे साल चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती हैं, जिससे प्रशासनिक अमला भी चुनावी गतिविधियों में लगा रहता है और विकास योजनाओं की गति धीमी हो जाती है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारें केवल चुनावी फायदों वाली योजनाएं बनाने में जुट जाती हैं और ऐसे में कई अहम और कड़े फैसले पीछे रह जाते हैं. इससे न केवल लॉन्गटर्म विकास प्रभावित होता है बल्कि जनता को भी वास्तविक सुधारों से वंचित रहना पड़ता है. बार-बार चुनाव से संसाधनों की भारी बर्बादी – शिवराज सिंह चौहान चौहान ने बार-बार होने वाले चुनावों को संसाधनों की भारी बर्बादी करार दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक चुनाव में लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. चुनाव आयोग की ओर से जब्त किए गए पैसों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि देश में एक साथ चुनाव कराए जाएं तो इस धन को विकास कार्यों में लगाया जा सकता है. एक साथ चुनाव से धन और संसाधनों की होगी बचत शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लागू करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस विषय पर व्यापक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें सभी संभावित समस्याओं के समाधान दिए गए हैं. उन्होंने जनता, विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे राजनीतिक दलों पर दबाव बनाएं ताकि धन और संसाधनों की बचत करते हुए देश में एक साथ चुनाव कराए जा सकें. सारे राजनैतिक दल अगले चुनाव की तैयारी में लगे रहते हैं शिवराज ने कहा, अपने देश में और कुछ हो या न हो लेकिन सारे राजनैतिक दल पांचों साल, 12 महीने, हर सप्ताह, 24 घंटे एक ही तैयारी करते हैं वो है अगला चुनाव। उसी तैयारी में लगे रहते हैं। अब एक साल ही देख लो पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विधानसभा चुनाव हुए। विधानसभा चुनाव की थकान उतरी नहीं थी कि चार महीने बाद ही लोकसभा घोषित हो गया। विधानसभा चुनाव में 6 महीने तो कुछ हुआ ही नहीं था। आचार संहिता, कोड ऑफ कंडक्ट के कारण विकास के काम ठप थे। वो चुनाव संपन्न हुए और चार महीने बाद फिर लोकसभा के चुनाव आ गए। फिर चार-छह महीने नहीं गुजरे फिर हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड, महाराष्ट्र के चुनाव आ गए और नेता फिर चुनाव में भिड़ गए।   एक भी चुनाव हारे तो मीडिया कहता है जमीन खिसक गई शिवराज ने कहा, अभी एक चुनाव निपटा नहीं कि दिल्ली का दंगल शुरू हो गया। दिल्ली के चुनाव खत्म नहीं हुए कि हम लोगों ने बिहार के लिए कमर कस ली। चलो बिहार। और कोई काम हो न हो, चौबीसों घंटे चुनाव की तैयारी। ये हमेशा होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में कितने बाधक हैं। एक तो सभी की एनर्जी लगती है, जिसमें प्रधानमंत्री भी चुनाव की तैयारी में लगते हैं। एक भी विधानसभा चुनाव अगर हार गए तो मीडिया कहती है, पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है। गए काम से। सबको लगता है कि कमर कस के चुनाव जीतना है। गवर्नेंस पर ध्यान नहीं रह पाता। तीन महीने सब छोड़कर झारखंड में पड़ा रहा शिवराज ने कहा, चुनाव में पीएम, सीएम सब लगे रहे। केन्द्रीय मंत्री मुझे बनाया गया कृषि और ग्रामीण विकास का और कहा गया झारखंड के चुनाव में जाओ । तीन महीने वहीं पड़े रहे। कृषि की तरफ ध्यान ही नहीं रहा। फोकस चुनाव पर हो गया। मेरे जैसे कितने लोग लगे रहे। ये केवल एक पार्टी में नहीं सभी पार्टियों के मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक सांसद लगे रहते हैं। अभी कहा अब सब बिहार जाओ, चार महीने सब छोड़ो। आप गंभीरता से सोचकर देखिए। बार-बार चुनाव से गवर्नेंस पर ध्यान नहीं रहता। पैसा अलग खर्च होता है।   पैसा बर्बाद होता है सरकारें लंबी प्लानिंग नहीं करतीं शिवराज ने कहा- अलग-अलग चुनाव क्यों होने चाहिए? हर चार-छह महीने में चुनाव हो रहे हैं। गवर्नेंस प्रभावित होती है। धन का अपव्यय होता है। असल में तो औपचारिक खर्चा दिखता है, पीछे से और कितना खर्चा होता है। चुनाव आयोग ने इस चुनाव में गाडियों से पैसे पकड़े थे। अकेले पैसा नहीं कई और चीजें पकड़ी जाती हैं। एक तरफ धन का अपव्यय होता है दूसरी तरफ सरकारें लॉन्ग टर्म प्लानिंग नहीं करतीं। एक बार चुनाव कराने में साढ़े चार लाख करोड़ का खर्च आता है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर यह खर्च हो तो कितना फायदा होगा। चुनाव के डर से कई फैसले नहीं हो पाते केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी ने कई बडे़ और कड़े फैसले लिए हैं। लेकिन, कई बार चुनाव के डर में कई ऐसे फैसले नहीं हो पाते कि वोट बिगड़ गया और नुकसान हो गया तो वोट बचाओ। ऐसे कई फैसले प्रभावित होते है जो बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं प्रदेश का विकास कर सकते हैं। देश को आगे बढ़ा सकते हैं। वोट के डर में फैसले प्रभावित होते हैं। कितना विकास प्रभावित होता है। अगर संविधान में संशोधन करके लोकसभा विधानसभा के चुनाव एक साथ हो जाएं तो साढ़े चार साल जनता और विकास के लिए ईमानदारी से मिलेंगे। अपने देश में भी लोकसभा के चुनाव के साथ उड़ीसा और तीन विधानसभा के चुनाव हुए। मोदी की लोकप्रियता से घबराते हैं शिवराज ने कहा- मैं पूछता हूं कि एक साथ चुनाव से डरते क्यों हैं तो कुछ लोग कहते हैं कि मोदी जी बहुत लोकप्रिय हैं तो गड़बड़ हो जाएगी। जनता बहुत समझदार है वो लोकसभा में अलग वोट डालती है विधानसभा में अलग वोट डालती है। उड़ीसा में दो बार लोकसभा विधानसभा के एक साथ चुनाव हुए लेकिन उसी राज्य की जनता ने पिछले चुनाव में राज्य के लिए बीजेडी के नवीन पटनायक को चुना और देश के लिए मोदी जी को चुना। अब समय आ गया है कि देश ये तय करे कि फालतू का खर्चा चुनाव आचार संहिता के साथ विकास ठप होना, देश की प्रगति और … Read more

पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

The way is cleared for disposal of Union Carbide’s toxic waste in Pithampur, Supreme Court rejects the petition खबर एक संवेदनशील और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण मुद्दे को दर्शाती है। यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाने की प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, सरकार की तैयारियाँ, और सामाजिक कार्यकर्ताओं की चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। मुख्य बिंदु: क्या आगे हो सकता है? आप इस विषय पर अपनी राय या इस मुद्दे से जुड़े किसी विशेष पहलू पर गहराई से चर्चा करना चाहेंगे? recent visitors 106

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद और भारत रत्न नानाजी देशमुख को दी श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद और राष्ट्र ऋषि भारत रत्न श्री नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर इन महान विभूतियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि इनका जीवन हर देशभक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित चंद्रशेखर आजाद का जीवन ऊर्जा, संकल्प और सेवा का अप्रतिम अध्याय है। मैं उन्हें बारम्बार नमन करता हूँ। उन्होंने कहा कि आजाद का बलिदान देश के युवाओं को सदैव राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और समाज सुधारक राष्ट्र ऋषि भारत रत्न श्री नानाजी देशमुख को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, गरीब कल्याण एवं सर्वांगीण विकास के प्रति नानाजी देशमुख जी के विचार और कृतित्व राष्ट्र निर्माण के आधार हैं और हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. नानाजी देशमुख ने ग्रामीण विकास और शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक रहेगा। उन्होंने ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए जीवन पर्यन्त काम किया और समाजसेवा को ही अपना ध्येय बनाया।   recent visitors 52

महाकुंभ में अंतिम स्नान पर्व के साथ ही ट्रेन में यात्रियों की भीड़ का रुख बदल गया

 जबलपुर  महाकुंभ में अंतिम स्नान पर्व के साथ ही ट्रेन में यात्रियों की भीड़ का रुख बदल गया है। बुधवार रात से प्रयागराज से जबलपुर की ओर आने वाली ट्रेनों में यात्री दबाव बढ़ गया है। महाकुंभ से लौटने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ से लंबी दूरी की ट्रेन के वातानुकूलित कोच की स्थित जनरल जैसी बन गई है। स्लीपर कोच भी यात्रियों से ठसाठस भरे हुए है। घर आने की हड़बड़ी में अनारक्षित टिकिट लेकर यात्री आरक्षित कोच में चढ़ रहे है। इनकी संख्या अधिक होने से महीनों आरक्षण कराने वाले यात्रियों में आक्रोश पनप रहा है। ठसाठस भरकर आ रही महाकुंभ स्पेशल ट्रेनें     आरक्षित कोचों में क्षमता से अधिक यात्री होने से स्टेशन से ट्रेन में चढ़ने-उतरने में भी यात्री परेशानी से जूझ रहे है। वहीं, यात्रियों की सुविधा के लिए प्रयागराज से अनारक्षित स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। ये ट्रेनें ठसाठस भरकर आ रही है।     प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर श्रृद्धालुओं की भीड़ नियंत्रित करने के लिए जबलपुर होकर चलने वाली कुछ ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया गया है। इसके कारण भी लंबी दूरी की जबलपुर होकर जाने वाली अन्य ट्रेनों में श्रृद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है।     बीच के स्टेशनों से एक्सप्रेस ट्रेन में टिकट आरक्षित कराने वाले यात्री कई बार भीड़ के कारण ट्रेन में सवार होने से चूक रहे हैं। वहीं, दरवाजे तक भीड़ होने के कारण यात्रियों गंतव्य में उतरने के लिए कोच की आपातकालीन खिड़की से बाहर आने की नौबत बन रही है। स्पेशल ट्रेन के रैक रिजर्व प्रयागराज से जबलपुर रेलखंड में सतना और कटनी तक भीड़ का दबाव अधिक है। बुधवार को भी प्रयागराज से जबलपुर की ओर स्पेशल ट्रेन संचालित की गई है। जबलपुर रेल मंडल की ओर स्पेशल अनारक्षित ट्रेन के लिए कुछ रैक रिजर्व रखे गए है। इन ट्रेनों को सतना और कटनी स्टेशन में यात्रियों की भीड़ होने पर जिस दिशा में यात्री अधिक होंगे, वहां तुरंत चलाने के लिए तैयार रखा गया है। श्रृद्धालुओं की आवश्यकतानुसार कटनी से बीना की ओर स्पेशल ट्रेन चलाने की भी योजना है। ताकि प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या से लौटने वाले श्रृद्धालुओं के सतना और कटनी पहुंचने के बाद आगे का रेल संपर्क सुविधा प्रदान किया जा सकें। जबलपुर के रास्ते आयी महानगरी महाकुंभ स्पेशल ट्रेनों के संचालन की सुविधा के लिए रेलवे ने वाराणसी-मुंबई के मध्य संचालित होने वाली महानगरी का मार्ग परिवर्तित किया था। ये ट्रेन बुधवार को अपने निर्धारित पथ पर लौट आयी। जबलपुर के रास्ते संचालित हुई। ट्रेन में प्रयागराज से जबलपुर की ओर यात्री की भीड़ अपेक्षाकृत अधिक रही। रेल अधिकारियों के अनुसार प्रयागराज की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या में कमी आयी है। वापसी में भीड़ बढ़ी है, लेकिन यात्री बंटकर आने के कारण पहले जैसी भीड़ की स्थिति नहीं है। जबलपुर से सतना के मध्य रेलवे स्टेशनों में रेल सुरक्षा बल को सतर्क किया गया है। वह ट्रेन आने पर नजर रख रहे है। कोच के दरवाजे बंद होने पर उन्हें खुलवा रहे है, ताकि यात्रियों को चढ़ने-उतरने में समस्या न हो। recent visitors 54