Monday, July 6, 2026 9:34 pm

हमने दो सीजन से अपने घरेलू मैदान पर खेलने का इंतजार किया है और अब यह सपना पूरा हो रहा है: दीप्ति शर्मा

लखनऊ वुमेंस प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) के तीसरे सीजन में पहली बार यूपी वॉरियर्स की टीम अपने घरेलू मैदान, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम, लखनऊ में खेलेगी। टीम 28 फरवरी को लखनऊ पहुंची। दीप्ति शर्मा की कप्तानी वाली यह टीम 3 मार्च को गुजरात जायंट्स, 6 मार्च को मुंबई इंडियंस और 8 मार्च को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से भिड़ेगी। कप्तान दीप्ति शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमने दो सीजन से अपने घरेलू मैदान पर खेलने का इंतजार किया है और अब यह सपना पूरा हो रहा है। घरेलू दर्शकों के सामने खेलना हमेशा खास होता है, और हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं टीम के कोच जॉन लुईस ने कहा कि यूपी वॉरियर्स की सफलता के लिए अनुकूलनशीलता (एडप्टेबिलिटी) महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि टीम के पास संतुलित संयोजन है और खिलाड़ी चुनौती के लिए तैयार हैं। युवा खिलाड़ी वृंदा दिनेश ने कहा, यूपी वॉरियर्स के लिए खेलना मेरे लिए बड़े गर्व की बात है। मैंने अब तक इस अनुभव का पूरा आनंद लिया है और लखनऊ में खेलने को लेकर उत्साहित हूं। कैप्री स्पोर्ट्स की निदेशक जिनिशा शर्मा ने कहा कि यूपी वॉरियर्स न केवल क्रिकेट में बल्कि महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और खेल के विकास में भी योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि टीम यूपी क्रिकेट एसोसिएशन और स्कूलों के साथ मिलकर युवा लड़कियों को क्रिकेट से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। यूपी वॉरियर्स डब्ल्यूपीएल 2025 टीम कप्तान: दीप्ति शर्मा (कप्तान), उमा छेत्री (विकेटकीपर), चिनेल हेनरी, पूनम खमनार, किरण नवगिरे, दिनेश वृंदा, जॉर्जिया वोल, ग्रेस हैरिस, अलाना किंग, तहलिया मैकग्राथ, श्वेता सेहरावत, अंजलि सरवानी, सोफी एक्लेस्टोन, राजेश्वरी गायकवाड़, साइमा ठाकोर, आरुषि गोयल, क्रांति गौड़, गौहर सुल्ताना।   recent visitors 34

तमिलनाडु के IAS का शर्मसार करने वाला बयान, 3 साल की बच्ची ने यौन उत्पीड़न के लिए आरोपी को उकसाया

चेन्नै  तमिलनाडु में मायिलादुथुराई के कलेक्टर एपी महाभारती ने तीन साल की बच्ची से जुड़े POCSO केस पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा कि हो सकता है बच्ची ने खुद आरोपी लड़के को उकसाया हो। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद, शुक्रवार शाम को उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। उनकी जगह इरोड नगर निगम के कमिश्नर एच एस श्रीकांत को नया कलेक्टर नियुक्त किया गया। यह मामला एक 16 साल के लड़के का है। उस पर स्कूल जाने वाली एक 3 साल की छोटी बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। पुलिस ने बताया कि लड़के ने बच्ची के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। जब बच्ची भागने लगी तो लड़के ने ईंट से उस पर हमला कर दिया। इससे बच्ची के सिर और चेहरे पर चोटें आईं। लड़के को मंगलवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पॉक्सो ऐक्ट की मीटिंग में कही बात इस मामले में कलेक्टर महाभारती का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे POCSO एक्ट पर एक मीटिंग में बोल रहे हैं। वीडियो में वे कहते सुनाई दे रहे हैं कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा, 'मुझे जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार उस बच्ची ने सुबह लड़के के चेहरे पर थूका था। हो सकता है इसी वजह से लड़के ने ऐसा किया हो। दोनों पक्षों को देखना ज़रूरी है।' विवाद के बाद आईएएस ने दी सफाई विवाद के बाद एपी महाभारती ने सफाई दी। उन्होंने कहा, 'मेरे कमेंट्स को गलत तरीके से लिया गया।' उन्होंने कहा, 'मेरा इरादा गलत नहीं था। मैंने अच्छे इरादे से यह बात कही थी।' भड़के अन्नामलाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने इस मामले में कलेक्टर की कड़ी निंदा की। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, 'मायिलादुथुराई के जिला कलेक्टर ने दावा किया है कि साढ़े तीन साल की पीड़िता भी इस भयानक यौन उत्पीड़न मामले में कुछ हद तक दोषी है। BJP तमिलनाडु की तरफ से हम उनकी इस शर्मनाक टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं।' अन्नामलाई ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री और मंत्री लगातार पीड़ितों को दोष देते रहे हैं और उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करते रहे हैं। यही वजह है कि जिला कलेक्टर ने ऐसा बयान दिया है।' डीएमके सांसद ने भी सुनाई द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की सांसद कनिमोझी ने भी इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'ऐसे लोग खुद को पढ़ा-लिखा या इंसान कैसे कह सकते हैं? और हमसे ऐसी बातें सहन करने की उम्मीद क्यों की जाती है?' यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि बच्चों के यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में अधिकारियों को किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। कलेक्टर का बयान बेहद गैर-जिम्मेदाराना है और इससे पीड़िता और उसके परिवार को और भी तकलीफ पहुंची है। इस मामले में सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे बयान न दिए जाएं। बच्चों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और हमें इसके लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए। recent visitors 53

भोपाल नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की अपील,डामर की सड़कों पर ना करें होलिका दहन

भोपाल  मध्य प्रदेश में हर साल होलिका दहन का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इसे लेकर शहर के कामकाजी लोगों में खासा उत्साह देखा जाता है। भाग दौड़ वाली जिंदगी से खुशी के कुछ पल निकालकर वे लोग अपनों के साथ मस्ती मजाक करने बाहर आते हैं। उन्हे इस दौरान अपनी कुछ जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसा मानना है भोपाल नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का। उन्होंने शहरवासियों से होलिका दहन सड़कों पर न करने की अपील की है। होलिका दहन से सड़कों को नुकसान पहुंचता है और करोड़ों रुपये का खर्चा आता है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने नगर निगम कमिश्नर को पत्र भी लिखा है। उन्होंने होलिका दहन के लिए सड़कों के अलावा दूसरी जगहों पर व्यवस्था करने को कहा है। यह अपील खासतौर पर होलिका दहन के त्यौहार से पहले की गई है। ताकि समय रहते इस पर एक्शन लिया जा सके। डामर पर होलिका दहन से रोड को नुकसान भोपाल में हजारों जगहों पर होलिका दहन होता है। कई लोग डामर की सड़कों पर ही होलिका दहन कर देते हैं। इससे सड़कें खराब हो जाती हैं और डामर पिघल जाता है। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का मानना है कि इस वजह से हर साल काफी आर्थिक का नुकसान होता है। लोगों को जागरूक करने की जरूरत हाल ही में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए शहर की सड़कों की मरम्मत की गई थी। अब इन नई सड़कों को नुकसान से बचाना जरूरी है। ताकि लंबे समय तक लोग इनका लाभ उठा सकें। सूर्यवंशी ने लोगों से होलिका दहन सड़कों पर न करने का आग्रह किया है। उन्होंने होलिका दहन के लिए ऐसी जगह चुनने को कहा है जहां डामर न हो। इससे सड़कें सुरक्षित रहेंगी और नगर निगम के पैसे की भी बचत होगी। उनका मानना है कि लोग अनजाने में ही सड़कों पर होलिका दहन कर देते हैं। इसलिए इस बार लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। recent visitors 54

छत्तीसगढ़ में दिखा पानी पर घोंसला बनाने वाला दुर्लभ पक्षी ब्लैक-नेक्ड ग्रीब

खैरागढ़. छत्तीसगढ़ में पहली बार दुर्लभ पक्षी ब्लैक-नेक्ड ग्रीब देखा गया है, जो प्रदेश की जैव विविधता के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. बिलासपुर के कोपरा डैम में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है. यह पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी खोज मानी जा रही है. छत्तीसगढ़ में इस दुर्लभ पक्षी के दिखने का यह पहला रिकॉर्ड है. 14 दिसंबर, 2024 को एक नियमित बर्डवॉचिंग सर्वे के दौरान डॉ. लोकश शरण ने इस अनोखे पक्षी को देखा, उसी समय इसकी तस्वीरें भी खींची गई. बाद में, इन तस्वीरों को विशेषज्ञों और विश्वसनीय वैज्ञानिक स्रोतों से मिलाने के बाद पुष्टि हुई कि यह वास्तव में ब्लैक-नेक्ड ग्रीब ही है. इस खोज के बाद, बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी और शोधकर्ता कोपरा डैम पहुंचने लगे. अनुराग विश्वकर्मा और उनकी टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया कि यहां 113 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है, जिनमें पेंटेड स्टॉर्क, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, मिस्र का गिद्ध, यूरेशियन कर्ल्यू और ब्लैक-टेल्ड गॉडविट जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं. लेकिन अब ब्लैक नेक्ड ग्रीब का यहां देखे जाने से पक्षी विज्ञानियों की जिज्ञासा बढ़ा दी है. ब्लैक-नेक्ड ग्रीब अपनी अनूठी बनावट के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है. इसकी गहरी लाल आंखें, माथे का उठा हुआ भाग और सिर पर काले रंग की टोपी जैसी आकृति, जो आंखों के नीचे तक फैली होती है, इसे अन्य ग्रीब प्रजातियों से अलग बनाती है. यह आकार में छोटे लिटिल ग्रीब और बड़े ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब के बीच होता है. यह पक्षी आमतौर पर यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के ठंडे इलाकों में पाया जाता है और सर्दियों में प्रवास करते हुए भारत के कुछ हिस्सों में पहुंचता है. यह पानी पर तैरते हुए घोंसले बनाता है, जो जलीय पौधों और घास से बने होते हैं. हर साल, इसके उड़ने वाले पंख झड़ जाते हैं, जिससे यह 1-2 महीने तक उड़ नहीं पाता. दिलचस्प बात यह है कि यह दुनिया के सबसे सामाजिक ग्रीब प्रजातियों में से एक है और हजारों की संख्या में झुंड बनाकर प्रवास करता है. खासकर सर्दियों में जब यह नमकीन समुद्री झीलों की ओर जाता है. क्या कोपरा डैम बन सकता है नया प्रवासी ठिकाना? बिलासपुर से 12-13 किमी की दूरी पर स्थित कोपरा डैम को सिंचाई और पेयजल स्रोत के रूप में जाना जाता है. लेकिन ब्लैक-नेक्ड ग्रीब की मौजूदगी यह संकेत देती है कि यह जगह प्रवासी पक्षियों के लिए एक नया ठिकाना बन सकती है. इससे पहले यह प्रजाति गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और गंगा के मैदानी इलाकों में देखा गया था, लेकिन छत्तीसगढ़ में पहली बार इसका दस्तावेजीकरण हुआ है. इस खोज को उत्तर प्रदेश जर्नल ऑफ जूलॉजी ने वॉल्यूम-46 में 28 फरवरी 2025 को प्रकाशित किया है. यह शोध प्रकृति शोध एवं संरक्षण सोसाइटी के डॉ. लोकेश शरण और प्रतीक ठाकुर ने लिखा है. आने वाले समय में कोपरा डैम और आसपास के क्षेत्रों में दूसरे दुर्लभ पक्षियों का भी दस्तावेजीकरण किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह स्थान प्रवासी पक्षियों के अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है. ब्लैक-नेक्ड ग्रीब की यह उपस्थिति सिर्फ एक नई प्रजाति की खोज नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इस खोज से यह भी साबित होता है कि राज्य में अभी कई अनदेखे प्राकृतिक रहस्य छिपे हुए हैं, जिन्हें खोजे जाने की जरूरत है. पक्षी प्रेमियों, वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है, जिससे छत्तीसगढ़ को बर्डवॉचिंग के एक नए गंतव्य के रूप में उभरने का मौका मिल सकता है. recent visitors 47

गुड़ी रेंज में वन भूमि पर से 1600 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराई, अब बनेंगे वॉच टॉवर

खंडवा जिले के गुड़ी रेंज में वन भूमि पर काबिज अतिक्रमण कारियों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। नहारमाल बीट से कार्रवाई शुरू की गई है। अब तक 1600 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा दिया है। इसके साथ ही अब इस जमीन को अतिक्रमण कारियों से बचाने के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है। दरअसल जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद जेसीबी मशीन से गड्ढे खोदे जा रहे हैं। इससे की यहां फिर से खेती नहीं हो सके। अब वाच टावर से निगरानी वन विभाग गुड़ी रेंज में वॉचटावर से निगरानी की तैयारी में है। जंगल में गश्त करने के साथ ही वॉचटावर से भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए पांच वॉचटावर बनाए जाने का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा है। वॉचटावर में वनकर्मी और वन सुरक्षा समिति के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। हर एक वॉचटावर में एक कमरा भी होगा। जहां वनकर्मी रह भी सकेंगे। फिलहाल इस क्षेत्र में एक भी पक्का वॉचटावर नहीं है। इससे की कर्मचारी यहां रहकर निगरानी कर सके। जहां वन चौकी बनना थी वहीं अब वॉच टॉवर गुड़ी रेंज के पास ही सरमेश्वर रेंज के सीताबेड़ी बीट में वन चौकी बनना तय थी। चौकी के भवन के लिए खड़ी की गई दीवारों को अतिक्रमण कारियों ने तोड़ दिया था, मलबा भी फैलाकर चले गए थे। कई बार अतिक्रमणकारियों ने रात में आकर काम को रुकवा दिया था। इसके बाद अब यहां वॉचटावर बनाए जाने की तैयारी की गई है। इसके लिए वन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है।     डीएफओ राकेश कुमार डामोर ने बताया वन भूमि को अतिक्रमण से बचाने पांच वॉचटॉवर का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा है। वॉचटॉवर से निगरानी में आसानी होगी। वनकर्मियों की अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाएगी। recent visitors 39

भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 5.8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जानें इंदौर-ग्वालियर का हाल

भोपाल  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में मध्य प्रदेश को ₹26.61 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। यह समिट दो दिन चला। भोपाल को सबसे ज़्यादा ₹5.8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इंदौर और उज्जैन को लगभग ₹4.7 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अडानी ग्रुप, टोरेंट पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अवाडा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों ने निवेश का वादा किया। ये निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, हॉस्पिटैलिटी, माइनिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, IT, डेटा सेंटर और अर्बन डेवलपमेंट जैसे कई क्षेत्रों में होंगे। भोपाल संभाग में सबसे अधिक दिलचस्पी भोपाल और आसपास के इलाकों में ग्रीन एनर्जी, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स, हेल्थकेयर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और अर्बन डेवलपमेंट में निवेश की खास रुचि दिखाई गई। NHAI ने इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की योजना का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में ₹1.3 लाख करोड़ का निवेश होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ MoU साइन हुआ है। यह MoU जमीन अधिग्रहण और स्थानीय सहायता के लिए है। केन्स टेक्नोलॉजी ने भोपाल के IT पार्क में SMT मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹352 करोड़ निवेश करने का वादा किया है। इससे करीब 1,650 नौकरियां पैदा होंगी। InAvia Aviation Consultants GmbH और MP सिविल एविएशन के बीच ₹500 करोड़ के निवेश से भोपाल में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल यूनिट बनाने के लिए MoU साइन हुआ। प्रधान एयर के साथ एक और MoU हुआ। इसके तहत ₹150 करोड़ के निवेश से मध्य प्रदेश में उज्जैन एयर नाम की एक छोटी इंट्रा-स्टेट एयरलाइन शुरू होगी। नीतियां कर रहीं आकर्षित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल में अपनी एक सुविधा स्थापित करेगा। इससे क्षेत्र के शैक्षणिक और अनुसंधान परिदृश्य को और समृद्ध करेगा। MPIDC के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि हर सेक्टर पर केंद्रित नई नीतियों से प्रमुख निवेश प्रस्तावों को आकर्षित करने में मदद मिली है। आकर्षक नीतियों और राज्य में भूमि की उपलब्धता के कारण लगभग हर क्षेत्र ने शिखर सम्मेलन में निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। इंदौर क्षेत्र में बहुत सारी पूछताछ हुई थी। शिखर सम्मेलन के दौरान विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन और शहरी विकास ने अधिकतम निवेश के इरादे हासिल किए हैं। यानी हर सेक्टर के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं। इससे निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिली है। राज्य में अच्छी नीतियां और ज़मीन उपलब्ध होने के कारण लगभग हर क्षेत्र को निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर क्षेत्र में निवेशकों ने काफी पूछताछ की। सबसे ज़्यादा निवेश मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, माइनिंग और अर्बन डेवलपमेंट में आए हैं। इंदौर में भी दिलचस्पी इंदौर क्षेत्र ने ₹4.76 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए। इंदौर में टोरेंट पावर और अक्षत ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े निवेश का वादा किया है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में, इंडो यूरोपियन रिसर्च एंड हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, रुसान फार्मा लिमिटेड, अल्फा लैबोरेटरीज लिमिटेड और मयंक वेलफेयर सोसाइटी इंडेक्स सिटी हॉस्पिटल ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह समिट मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रस्तावों से लाखों नौकरियां पैदा होंगी। यह समिट राज्य के विकास के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है संभाग- निवेश की प्रस्तावित राशि     भोपाल – 5 लाख 82 हजार 93 करोड़     उज्जैन- 4 लाख 77 हजार 506 करोड़     शहडोल – 1 लाख 58 हजार 402 करोड़     जबलपुर – 1 लाख 6 हजार 970 करोड़     रीवा – 68 हजार 475 करोड़     इंदौर– 4 लाख 76 हजार 245 करोड़     नर्मदापुरम– 2 लाख 93 हजार 522 करोड़     सागर – 53 हजार 657 करोड़     चंबल – 52 हजार 92 करोड़     ग्वालियर – 27 हजार 363 करोड़     कुल- 22 लाख 96 हजार 325 करोड़ रुपए गौरतलब है कि एमपी में निवेशकों को लुभाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले रीजनल समिट आयोजित किए गए थे। रीजनल समिट के जरिए सरकार की कोशिश की थी कि हर क्षेत्र में विकास हो। उसका भी प्रभाव देखने को मिला है। recent visitors 51

चीन के वैज्ञानिकों ने खोजा थोरियम का विशाल भंडार, 60000 साल तक खत्म हो सकती है बिजली की टेंशन

बीजिंग चीन के हाथ ऐसा अकूत खजाना हाथ लगा है जिससे उसकी ऊर्जा जरूरतें हमेशा के लिए पूरी हो सकती हैं। चीन के एक राष्ट्रीय सर्वे में चीन के पास थोरियम के अथाह भंडार का पता चला है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक विशेषज्ञ के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह रेडियोधर्मी धातु अकेले वैश्विक ऊर्जा उत्पादन में क्रांति ला सकती है, जिससे जीवाश्वम ईंधन पर दुनिया भर की निर्भरता खत्म हो सकती है। चीन के पास पहले ही बड़ा थोरियम भंडार मौजूद है। हालांकि, 2020 में किए गए सर्वे की क्लासीफाइड रिपोर्ट के अनुसार, यह वास्तव में पिछले अनुमानों से कई गुना अधिक हो सकते हैं। भारत के पास सबसे बड़ा भंडार जनवरी में चीनी पत्रिका जियोलॉजिकल रिव्यू में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इनर मंगोलिया में एक लौह अयस्क साइट से केवल पांच साल के खनन अपशिष्ट में इतना थोरियम है कि अमेरिका की घरेलू ऊर्जा मांगों को 1000 से अधिक वर्षों तक पूरा कर सकता है। खास बात ये है कि भारत के पास भी थोरियम का बहुत बड़ा भंडार है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में भारत का थोरियम भंडार दुनिया में सबसे बड़ा है। भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने देश में उपलब्ध थोरियम के विशाल भंडार को दीर्घकालिक विकल्प के रूप में इस्तेमाल की योजना बनाई है। कुछ विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, पूरी तरह से दोहन किए जाने पर बायन ओबो खनन परिसर दस लाख टन थोरियम पैदा कर सकता है, जो चीन को 60,000 वर्षों तक ईंधन देने के लिए पर्याप्त है। बीजिंग स्थित एक भूविज्ञानी ने नाम न बताने की शर्त पर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि यह पता चला है कि अंतहीन ऊर्जा स्रोत हमारे पैरों के ठीक नीचे हैं। क्या है थोरियम? थोरियम एक चांदी के रंग की धातु है जिसका नाम पुराने स्कैंडिनेवियन देवता थोर के नाम पर रखा गया है। यह यूरेनियम की तुलना में 200 गुना अधिक ऊर्जा पैदा करता है। यूरेनियम रिएक्टरों के विपरीत थोरियम मोल्टेन-साल्ट रिएक्टर (TMSR) छोटे होते हैं। पिघल नहीं सकते और उन्हें पानी से ठंडा करने की आवश्यकता भी नहीं होती है। इसके अलावा वे रेडियोधर्मी अपशिष्ट भी कम मात्रा में छोड़ते हैं। पिछले साल चीन ने गोबी के रेगिस्तान में दुनिया के पहले TMSR पावर प्लांट के निर्माण को मंजूरी दी थी। 10 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाला यह पायलट प्रोजेक्ट 2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। अभी राह आसान नहीं सर्वेक्षण के अनुसार, पूरे चीन में 233 थोरियम समृद्ध क्षेत्रों की पहचान की गई है, जो पांच प्रमुख बेल्टों में स्थित हैं। हालांकि, उम्मीद के बावजूद बाधाएं बनी हुई हैं। दुर्लभ मृदा अयस्कों से थोरियम को अलग करने के लिए भारी मात्रा में एसिड और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 1 ग्राम थोरियम को शुद्ध करने के लिए लगभग सैकड़ों टन अपशिष्ट जल की जरूरत होती है।   recent visitors 74