भाजपा केरल में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व वाम दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती, प्रवेश से सियासत बदली

 तिरुवनन्तपुरम केरल विधानसभा चुनाव में अभी एक वर्ष बाकी है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट की अगुवाई वाले एलडीएफ ने चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। दोनों गठबंधन जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने के साथ चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहना रहे हैं। इनके बीच मतदाताओं में पैठ बना रही भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व वाम दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती है। केरल में पिछले दस वर्षों से वाम दल सत्ता में है। हालांकि वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। यह कहना मुश्किल है कि लोकसभा का असर विधानसभा में दिखाई देगा। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद वर्ष 2021 विधानसभा चुनाव में एलडीएफ ने सरकार बनाई थी। नायर और मछुआरा समुदायों पर भाजपा की नजर चुनावी रणनीतिकार मानते हैं कि पहले मतदाताओं के सामने यूडीएफ और एलडीएफ दो ही विकल्प थे। अब आहिस्ता-आहिस्ता दोनों गठबंधनों के वोट बैंक में सेंध लगाते हुए भाजपा अपनी जगह बना रही है। नायर और मछुआरा समुदायों पर भाजपा की नजर है। दोनों समुदाय अमूमन चुनाव में एलडीएफ का समर्थन करते रहे हैं। भाजपा के प्रवेश से सियासत बदली केरल में राजनीति दो ध्रुवीय रही है, लेकिन भाजपा के प्रवेश के बाद सियासत बदल गई है। अगर भाजपा सभी सीट पर चुनाव लड़ती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। भाजपा अपने प्रदर्शन से बिगाड़ सकती है चुनावी गणित प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव में अभी अपना प्रदर्शन बरकरार रखती है तो यह यूडीएफ और एलडीएफ दोनों का गणित बिगाड़ सकती है। क्योंकि, भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा में एनडीए को 19 फीसदी वोट मिले। जबकि 2021 विधानसभा में यह 12 प्रतिशत था। हिंदू मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल रही भाजपा कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं कि एलडीएफ सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी है। पर क्या यूडीएफ मतदाताओं की इस नाराजगी को अपने पक्ष में बदल पाएगी। वहीं, एलडीएफ के लिए भी अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है। इसकी बड़ी वजह लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट से भाजपा की जीत है। भाजपा ने केरल में सिर्फ त्रिशूर सीट से जीत दर्ज नहीं की है, करीब एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिले हैं। भाजपा के इस प्रदर्शन से साफ है कि वह हिंदू मतदाताओं को भरोसा जीतने में सफल रही है। वहीं, ईसाई मतदाताओं के लिए भी भारतीय जनता पार्टी अब दूर नहीं है। recent visitors 70

बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित होंगे

उज्जैन  उज्जैन से बदनावर की दूरी 65 किमी. की है। गुजरात के श्रद्धालु महाकाल दर्शन करने के लिए बदनावर होकर ही गुजरते हैं। हाल ही में बदनावर बागेश्वर धाम से उज्जैन के इंदौर बायपास तक फोरलेन बनकर तैयार हो चुका है तथा आवागमन भी शुरू हो गया है। यह रोड भी वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ(Simhastha 2028) के मद्देजनर ही बनाया गया है। इस समय आम जनता का झुकाव इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने बदनावर में 3 जगह चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) बनाने का निर्णय लिया है, इनमें मुख्य बस स्टैंड, गणेश वडली बस स्टैंड व नागेश्वर महादेव धाम है। यह सभी स्टेशन सिहंस्थ के चलते स्थापित किए जा रहे हैं। कलेक्टर प्रियांक मिश्र ने बदनावर के साथ पीथमपुर, मनावर, सरदारपुर और कुक्षी में भी स्थानीय निकाय को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों पर बस स्टैंड और डिपो के लिए भूमि चिन्हित की जाएगी। मंगलवार को स्थान के निरीक्षण के लिए एसडीएम वसीम अहमद भट्ट, तहसीलदार सुरेश नागर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शेखर यादव, सीएमओ लालसिंह राठौर आदि उपस्थित थे। गुजरात के अधिकांश वाहन बायपास से गुजरने लगे बदनावर-उज्जैन फोरलेन बनने के बाद गुजरात से आने वाले ज्यादातर वाहन अब बायपास से होकर गुजरने लगे हैं। जिन तीन जगह को सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे है, उनमें से बागेश्वर धाम का चार्जिंग स्टेशन गुजरात जाने वाले वाहनों के लिए उपयोग में आएगा। शेष दोनों चार्जिंग स्टेशन अन्य वाहनों के लिए उपयोगी रहेंगे। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि शासन को उज्जैन से बदनावर 70 किमी लंबे फोरलेन के आसपास चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) स्थापित करना चाहिए, ताकि सिंहस्थ के दौरान चार्जिंग स्टेशन पर वाहनों की लंबी कतार न लगे। recent visitors 45

उज्जैन :रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते हुए नृसिंहघाट तक के मार्ग को 24 मीटर चौड़ा किया जा रहा, जिसके टेंडर हो चुके

उज्जैन नगर निगम ने रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते नृसिंहघाट तिराहे तक के मार्ग चौड़ीकरण के चलते मंगलवार को प्रभावित होने वाले मकानों पर लाल निशान लगाए। मार्ग के करीब 171 मकानों को चिह्नित किया है। तीन चौराहे पर मौजूद 20 मकानों पर बाद में निशान लगाए जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 के तहत निगम शहर के 6 मार्गों का चौड़ीकरण कर रहा है। इसी क्रम में रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते हुए नृसिंहघाट तक के मार्ग को 24 मीटर (80 फीट) चौड़ा किया जा रहा है, जिसके टेंडर हो चुके हैं। महापौर के सामने जताया लोगों ने विरोध वार्ड भ्रमण के दौरान महापौर मुकेश टटवाल के सामने रविशंकर नगर के रहवासियों ने विरोध जताया। उनका कहना है कि 24 मीटर रोड़ चौड़ा होने से मकान का बड़ा हिस्सा टूट जाएगा। निगम 18 मीटर के मान से चौड़ीकरण करें। हालांकि रहवासियों को बताया गया कि मास्टर प्लान के मुताबिक ही मार्ग चौड़ा किया जा रहा है। तीन साल पूर्व स्मार्ट सिटी के माध्यम से मार्ग चौड़ा किए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। 171 मकानों पर लगाए लाल निशान निगम ने चौड़ीकरण में प्रभावित होने वाले 171 मकानों पर लाल निशान लगाए। वहीं हरिफाटक ब्रिज, महाकाल लोक और जयसिंहपुरा चौराहे पर बने 20 मकानों को फिलहाल छोड़ दिया गया। यहां चौराहे विकास के चलते भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। मकानों पर लगे लाल निशान के तहत कई मकान 25 फीट तक चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। जोन 2 के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने गाड़ी अड्डे चौराहे से लेकर शीतला माता मंदिर तक शेष मकान एवं दुकानों पर लाल निशान लगाए। recent visitors 52

आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध तेज, कांग्रेस ने की पदयात्रा शुरू

इंदौर आउटर रिंग रोड के लिए किए जा रहे सर्वे का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने इसे रुकवा दिया था। अब कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रभावित गांवों के किसानों तक पहुंचने के लिए पदयात्रा निकालने की योजना बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद इस यात्रा का नेतृत्व करेंगे और आठ दिनों तक इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में पदयात्रा करेंगे।   सर्वे को लेकर क्यों हुआ विरोध?   जब आउटर रिंग रोड का सर्वे किया जा रहा था, तब प्रभावित गांवों के किसानों ने इसका जबरदस्त विरोध किया। भारतीय किसान संघ ने किसानों के साथ मिलकर नेशनल हाईवे के अधिकारियों को किसी भी गांव में सर्वे करने से रोक दिया। यहां तक कि प्रशासन को कलेक्टर कार्यालय पर हुए धरने के बाद यह आश्वासन देना पड़ा कि जब तक मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हो जाती, तब तक सर्वे नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद सर्वे कार्य पूरी तरह रोक दिया गया। अब कांग्रेस इस मुद्दे पर सक्रिय हो गई है और किसानों के बीच जाकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है।  आउटर रिंग रोड और पूर्वी रिंग रोड के प्रभावित गांव   आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत धार जिले के पांच गांव, देपालपुर तहसील के 16 गांव और सांवेर तहसील के 18 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से देपालपुर तहसील का 35 किलोमीटर और सांवेर तहसील का 37 किलोमीटर का हिस्सा इस परियोजना में शामिल है। जीतू पटवारी इन सभी गांवों में पदयात्रा करेंगे। इसके अलावा, पूर्वी रिंग रोड भी इस पदयात्रा का हिस्सा होगी। यह रोड पीर कराड़िया गांव से शुरू होकर नेटरेक्स तक फैली हुई है। इस क्षेत्र में चार केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर सेंटर से 200 बीघा जमीन अधिग्रहित की जानी है। बेटमा खुर्द को भी एक केंद्र बनाया गया है। इस पूरे क्षेत्र की कुल लंबाई 77 किलोमीटर है, जिसे चार दिन में कवर किया जाएगा।   कैसा रहेगा पदयात्रा का कार्यक्रम? पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है।   – हर दिन सुबह नाश्ते के बाद पदयात्रा शुरू होगी।   – दिन में किसी गांव में रुककर भोजन किया जाएगा।   – शाम को जिस स्थान पर यात्रा रुकेगी, वहां पर सभा का आयोजन होगा।   – इस दौरान कांग्रेस के नेता किसानों से मिलकर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएंगे।   – जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव के अनुसार, यह यात्रा 10 मार्च तक तय की गई है और होली के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।   किसानों को 15 गुना कम मुआवजा देने का आरोप कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक कीमत से 15 गुना कम मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता सदाशिव यादव का कहना है कि जिस गांव में सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 10 लाख रुपए प्रति एकड़ है, वहां की वास्तविक कीमत 1.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है। इसके बावजूद सरकार केवल दोगुना मुआवजा देने की योजना बना रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए।   किसानों को पक्ष में लेने का प्रयास कांग्रेस इस पदयात्रा के जरिए किसानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार पर दबाव बनाकर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग करेगी।   समय बताएगा पदयात्रा का कितना असर होगा आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पहले भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध करके सर्वे रुकवा दिया, और अब कांग्रेस ने पदयात्रा निकालकर इस मुद्दे को और गरमा दिया है। जीतू पटवारी की यह यात्रा किसानों को जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए की जा रही है। अब देखना होगा कि इस पदयात्रा का कितना असर पड़ता है और क्या किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिल पाता है या नहीं। recent visitors 64

उमरिया में पंजीयन विभाग ने बनाया रिकॉर्ड, कोल ब्लॉक के एक ही दस्तावेज में मिला 17 करोड़ 53 लाख का राजस्व

उमरिया  जिले में एक जमीन की रजिस्ट्री से 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व मिला है। यह रजिस्ट्री मध्य प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ी रजिस्ट्रियों में से एक हो सकती है। यह रकम उमरिया जिले के सालाना राजस्व लक्ष्य, जो कि 21 करोड़ रुपए है, का एक बड़ा हिस्सा है। यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया और शहडोल जिलों के पांच गांवों की लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन 30 साल की लीज पर दी गई है। एमपी का छोटा सा जिला है उमरिया उमरिया, जो कि एक छोटा सा जिला है। इस जिला ने एक ही रजिस्ट्री से राजस्व संग्रह में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में तो करोड़ों की रजिस्ट्रियां आम हैं। लेकिन उमरिया जैसे छोटे जिले के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। जहां जिले का सालाना लक्ष्य ही 21 करोड़ है, वहां एक ही दिन में 17 करोड़ 53 लाख की रजिस्ट्री होना आश्चर्यजनक है। संपदा 2.0 पोर्टल के जरिए हुई रजिस्ट्री सब रजिस्ट्रार आशीष श्रीवास्तव ने इस रजिस्ट्री की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 पोर्टल के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया जिले के तीन और शहडोल जिले के दो गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन की 30 साल की लीज पर रजिस्ट्री हुई है। इससे सरकार को 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उमरिया जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने आगे कहा कि और जहां तक मैं समझता हूं कि शहडोल संभाग की सबसे बड़ी रजिस्ट्री है। जब उनसे प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वहीं पूंछा गया कि प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री सुनने को नही मिली है तो बोले कि शहडोल संभाग में तो नहीं है लेकिन प्रदेश की जानकारी नहीं है। शहडोल संभाग के लिए है रेकॉर्ड यह रजिस्ट्री न केवल उमरिया जिले के लिए, बल्कि पूरे शहडोल संभाग के लिए भी एक रिकॉर्ड हो सकती है। संपदा 2.0 के लागू होने के बाद से यह प्रदेश की सबसे बड़ी एकल रजिस्ट्री भी हो सकती है। इससे उमरिया जिले का नाम प्रदेश भर में चर्चा में आ गया है। यह रजिस्ट्री भविष्य में जमीनों की रजिस्ट्री के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है। इससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी काफी मदद मिलेगी। यह एक मिसाल है कि कैसे छोटे जिले भी बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं। recent visitors 58

रेलवे के नए नियम RAC यात्रियों को पैकेट बंद बेडरोल मिलेगा, जिसमें दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और तौलिया

भोपाल ट्रेनों के एसी कोच में आरएसी टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे ने बड़ी सौगात दी है। रेलवे ने रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (आरएसी) टिकट के नियमों में बदलाव कर इसको लागू कर दिया है। रेलवे के नए नियम के अनुसार अब ट्रेनों में आरएसी टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को एसी कोच में फुल बेडरोल की सुविधा रेल प्रशासन प्रदान करेगी। नए नियम से पहले तक होती थी ये परेशानी नए नियम से पहले तक आरएसी टिकट वाले यात्रियों को साइड लोअर बर्थ की आधी सीट पर यात्रा करनी पड़ती थी। किसी दूसरे व्यक्ति के साथ में सीट शेयर करनी होती थी। साथ ही एसी में आरएसी टिकट लेकर यात्रा करने वाले दो यात्री को मिला कर एक ही बेडरोल दिया जाता था। लेकिन अब यात्रियों को पूरी एक सीट, पूरे बेडरोल सेट के साथ मिलेगी। रेलवे के इस फैसले के बाद उन सभी यात्रियों को मदद मिलेगी, जो कि टिकट के लिए पैसा तो पूरा देते थे। मगर उनको आधी सीट ही मिलती थी। रेलवे के नए नियम के मुताबिक आरएसी यात्रियों को पैकेट बंद बेडरोल मुहैया कराएगा, जिसमें यात्रियों को दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और तौलिया शामिल होगा। पैसा पूरा, फिर भी आधी सुविधा: RAC टिकट वाले यात्री पूरे किराए का भुगतान करते हैं लेकिन उन्हें साइड लोअर बर्थ की आधी सीट पर सफर करना पड़ता है. हालांकि, अब इन यात्रियों को कंफर्म टिकट धारकों की तरह बेडरोल की सुविधा मिलेगी. कोच अटेंडेंट बर्थ पर पहुंचते ही बेडरोल उपलब्ध कराएगा. क्या कहते है अधिकारी: जागरण.कॉम के हवाले से जनसंपर्क अधिकारी (वाराणसी) अशोक कुमार ने बताया कि, "आरएसी यात्रियों को कंफर्म टिकट वालों की तरह सुविधा मिलेगी. कोच अटेंडेंट बर्थ पर पहुंचते ही बेडरोल उपलब्ध कराएगा. यह व्यवस्था यात्रियों की सुविधा और संतोष के लिए लागू की गई है." अब मिलेगी ये सुविधाएं: अब प्रत्येक RAC यात्री को एक पैकेट बंद बेडरोल प्रदान किया जाएगा, जिसमें बेडशीट, पिलो, ब्लैंकेट, और तोलिया शामिल होंगे.     आरएसी यात्रियों को पूरी सुविधा: अब आरएसी (RAC) टिकट पर सफर करने वाले दोनों यात्रियों को अलग-अलग बेडरोल दिए जाएंगे, जिससे असुविधा और कहासुनी खत्म होगी.     ठंड से राहत: एसी कोच में ठंड से बचने के लिए पैकेट में शामिल सभी सामान (बेडशीट, पिलो, ब्लैंकेट, और तोलिया) मिलेगा.     कंफर्म टिकट के बराबर सेवा: आरएसी यात्री भी अब कंफर्म टिकट धारकों की तरह सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे. रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर RAC यात्री तक बेडरोल सही समय पर पहुंचे, ताकि यह सुविधा सुचारू रूप से लागू हो सके. ह कदम आरएसी यात्रियों के अधिकारों और उनकी यात्रा को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है. recent visitors 61

मध्य प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करके नागरिक सेवाओं में सुधार किया जाएगा

 भोपाल  भोपाल सहित प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में एआइ तकनीक से नागरिक सेवाएं बेहतर बनाई जाएंगी। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं सतना का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है। चिह्नित शहरों में सुशासन और नागरिक सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन चयनित शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) और इंटेलिजेंट ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) को लागू किया गया है। रियलटाइम डाटा आईसीसीसी तकनीक स्मार्ट सिटी में नागरिक सेवाओं में डाटा संचालन और निर्णय लेने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आईसीसीसी और आईटीएमएस इन दोनों प्रणालियों में रियलटाइम में डाटा एकत्र कर त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता है। इन प्रणालियों के जरिए स्मार्ट सिटी में जल आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटिंग और सार्वजनिक सुरक्षा जैसी शहर की सेवाओं की लगातार निगरानी संभव है। नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन में एआई को किया शामिल केंद्र सरकार ने नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन (एनडीयूएम) में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को शामिल करने का निर्णय लिया है। आईसीसीसी तकनीक से स्मार्ट सिटी में अपशिष्ट संग्रह वाहनों की वास्तविक समय की ट्रैकिंग से समय पर कचरा निपटान और सफाई सुनिश्चित हो रही है। भविष्य में इन केंद्रों को स्वचलित अलर्ट स्वच्छता संबंधी मुद्दों को तुरंत निराकृत करने में भी सक्षम बनाया जाएगा। स्मार्ट सिटी में जल वितरण और रिसाव का पता लगाने वाली प्रणालियों को कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी में रखा जा सकेगा। इससे पानी के अपव्यय को काफी हद तक कम करने और शहर में पानी की समान रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसी के साथ आईसीसीसी के माध्यम से स्मार्टग्रिड और स्ट्रीटलाइट आटोमेशन ऊर्जा की खपत को कम करने और विद्युत वितरण व्यवस्था को और दक्ष बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अपराध की रोकथाम और यातायात प्रबंधन में भी मिल रही मदद वर्तमान में इन सात स्मार्ट सिटी में आईसीसीसी के साथ एकीकृत निगरानी प्रणाली अपराध की रोकथाम और यातायात प्रबंधन में मदद कर रही है। स्मार्ट सिटी में आईटीएमएस द्वारा भीड़-भाड़ को कम करने, दुर्घटनाओं को कम करने और शहरी गतिशीलता को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। इस प्रणाली के माध्यम से ट्रैफिक सिग्नल और रियल टाइम ट्रैफिक का विश्लेषण भी किया जा रहा है। सातों स्मार्ट सिटी में 303 स्थानों पर 2301 कैमरे लगाए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में इस प्रणाली के माध्यम से करीब 27 लाख 25 हजार ई-चालान की कार्रवाईयां की गई हैं। recent visitors 54