Friday, July 3, 2026 3:39 pm

बदलते मौसम में आयुर्वेद के इन टिप्स से रखें सेहत का ख्याल

आयुर्वेद में सभी मौसम के हिसाब से अलग-अलग दिनचर्या का महत्व बताया गया है। इसे ऋतुचर्या कहा जाता है। अगर इन दिनों में ऋतुचर्या के अनुसार आपका रहन-सहन रहे, तो शरीर पर बदलते मौसम का दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका कम हो जाती है। इस समय सुबह-शाम हल्की ठंड रहती है और दिन के समय सूर्य की किरणें प्रखर होने लगी हैं। हवा में अभी रूखापन भी है, ऐसे में सेहत को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार, इस आदान काल की अवधि में ऊर्जा की कमी महसूस होती है। शरीर शिथिलता महसूस करने लगता है। बता दें कि हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ के दोषों का संतुलन बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है। बढ़ते तापमान के बीच इस मौसम में कफ का प्रभाव बढ़ा होता है, इसलिए आपका पूरा ध्यान कफ के निकास पर होना चाहिए और इसे बढ़ने से रोकने का भी प्रयास करना चाहिए। अभी आप मौसम के अनुकूल आहार-विहार अपनाकर आप मौसमी समस्याओं जैसे, एलर्जी, सर्दी-खांसी या बुखार आदि से निजात पा सकते हैं। ध्यान रहे स्वस्थ आहार का सेवन तभी लाभकारी होता है जब हेल्दी लाइफस्टाइल भी अपना सकें। खानपान में बरतें सावधानी     सुपाच्य और हल्का भोजन करें।     भोजन की तासीर ठंडी नहीं होनी चाहिए।     भोजन गर्म और ताजा होना चाहिए।     पुराने गेहूं और बाजरा का सेवन इन दिनों उपयोगी है।     भोजन में खट्टे पदार्थों को कम रखें।     शहद का सेवन सेहत के लिए लाभप्रद है।     मुनक्का से तैयार आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन मौसमी बदलावों के लिए अच्छा है।     गले में खराश, खांसी होने पर नमक मिलाकर गुनगुने पानी से गरारा करें। इन बातों का रहे ध्यान     इस मौसम में पंचकर्म के दौरान वमन का विशेष महत्व है। इसके द्वारा शरीर में जमे हुए कफ को निकाला जाता है।     इस समय शरीर में सुस्ती होती है। दिन के समय नींद आती है, पर प्रयास करें कि दिन की अवधि में न सोएं।     इस मौसम में कसरत करें। निष्क्रियता से दूर रहें। जठराग्नि को समझें आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह जरूरी है कि जठराग्नि संतुलन में हो जठराग्नि का संतुलन अच्छे पाचन और समग्र स्वास्थ्य दोनों के लिए आवश्यक माना गया है। भूख से थोड़ा कम भोजन करना चाहिए, यह जठराग्नि के संतुलन के लिए जरूरी है। recent visitors 39

वाइल्ड-लाइफ कंजर्वेशन की राजधानी बना मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश जैव विविधता संरक्षण के साथ वन्य जीवों और मनुष्य के सह-अस्तित्व का अद्भुत उदाहरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कान्हा-किसली से माधव राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व्स की 52 वर्ष की यात्रा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाइल्ड-लाइफ कंजर्वेशन की राजधानी बना मध्यप्रदेश  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में 9 हुए टाइगर रिजर्व, वन्य जीव संरक्षण हुआ सशक्त मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में आगे भोपाल मध्यप्रदेश ने वन्य जीव संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिवपुरी स्थित माधव राष्ट्रीय उद्यान को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 58वें और मध्यप्रदेश के नौवें टाइगर रिजर्व की स्थापना की घोषणा करते हुए कहा, “भारत वन्य जीव विविधता से समृद्ध है, यहां की संस्कृति वन्य जीवों का सम्मान करती है। हम हमेशा पशुओं की रक्षा करने में सबसे आगे रहेंगे।” उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व के शुभारंभ के प्रतीक पर स्वरूप एक बाघिन को स्वच्छंद विचरण के लिए मुक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए बाघ अभयारण्य को विकसित करते समय अन्य प्रजातियों के सह-अस्तित्व को बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह कोई चिड़ियाघर नहीं है, बल्कि एक खुला आवास है, जो वन्य जीवों और आम जनता दोनों के लिए सुलभ है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में मानव और वन्य जीवों के सह-अस्तित्व का अनोखा परिदृश्य मौजूद है। इस कदम से बाघों के संरक्षण को नया बल मिलेगा और जैव विविधता को सहेजने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व म.प्र. के प्राकृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। वन एवं वृक्ष आवरण में अग्रणी मध्यप्रदेश ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2023’ के अनुसार, मध्यप्रदेश 85,724 वर्ग किलोमीटर वन और वृक्ष आवरण के साथ देश में शीर्ष स्थान पर है। राज्य का वन आवरण क्षेत्र 77,073 वर्ग किलोमीटर है, जो देश में सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश ने देश में सबसे पहले 1973 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू किया था। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश में सबसे अधिक 9 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। इनमें कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा, वीरांगना दुर्गावती, संजय-डुबरी, रातापानी और अब माधव टाइगर रिजर्व शामिल हैं। प्रदेश में 11 नेशनल पार्क, 24 अभयारण्य हैं। सफेद बाघों के संरक्षण के लिए मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी विकसित की गई है। प्रदेश में टाइगर रिजर्व की यात्रा को हुए 52 वर्ष प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व में सबसे पहले 1973 में कान्हा-किसली राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके बाद पेंच टाइगर रिजर्व-1992, पन्ना टाइगर रिजर्व-1993-94, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व-1993-94, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व-1999-2000, संजय टाइगर रिजर्व-2011, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व-2023, रातापानी टाइगर रिजर्व-2024 और माधव टाइगर रिजर्व-2025 में घोषित किये गए। पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा नवीन रातापानी और माधव टाइगर रिजर्व के विकास से इन क्षेत्रों में न केवल वन्यजीवों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। दोनों ही रिजर्व शहरों के नजदीक है। रातापानी प्रदेश की राजधानी भोपाल और माध्व रिजर्व शिवपुरी के नजदीक है। मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने की योजना मध्यप्रदेश सरकार ने वन्य जीव संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए वन्य जीव कॉरिडोर विकसित किए हैं। साथ ही, 14 रीजनल और 1 राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वॉड गठित किया गया है। मानव-वन्य जीव संघर्ष के मामलों में क्षतिपूर्ति राशि 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। 9वां माधव टाईगर रिजर्व : एक संक्षिप्त परिचय कभी सिंधिया रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहे शिवपुरी में माधव राष्ट्रीय उद्यान की घोषणा वर्ष 1958 में की गई थी। अब यह टाइगर रिजर्व बन गया है। इसका क्षेत्रफल 375233 वर्ग किलोमीटर है। सांख्य सागर और माधव सागर झीलें इस अभयारण्य को हरा भरा बनाए रखने के साथ ही यहां के भू-जल स्तर को बनाए रखती हैं। सांख्य सागर झील को वर्ष 2022 में रामसर साइट भी घोषित किया गया है। इनके किनारे दलदली क्षेत्र में मगरमच्छ भी बहुतायत में पाए जाते हैं। इसके अलावा यहां हिरण चिंकारा, भेड़िये, साही अजगर, खरगोश, तेंदुए और अन्य कई वन्य जीव प्रजातियों के साथ ही देशी व प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा रहता है। माधव टाइगर रिजर्व की नई सौगात मध्यप्रदेश की ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान को और सशक्त बना कर वन्य जीव संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।   recent visitors 21

लिए 7 फेरे , सुहागरात मनाई, 8 दिन तक संस्कारी बहू बनकर भी रही… फिर लाखों रुपए का माल समेट कर फरार

ग्वालियर ग्वालियर शहर में एक बार फिर लुटेरी दुल्हन का मामला सामने आया है, जो अपने दूल्हे के घर में हाथ साफ करके फरार हो गई। वह लाखों रुपए का माल तो समेट कर तो ले ही गई साथ ही में उस परिवार को बदनामी का दाग भी दे गई। युवक ने पहले भोपाल जाकर इस महिला के साथ रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के जरिए शादी की थी और फिर इसके बाद परिवार के सभी लोगों के सामने उसके साथ सात फेरे भी लिए थे। इसके बाद महिला 8 दिन उसके साथ पत्नी बनकर भी रही। इसी बीच एक दिन जब दूल्हा नौकरी पर गया, तो सही मौका पाकर लुटेरी दुल्हन दहेज में मिला सोना और और नगदी लेकर फरार हो गई। वहीं जब युवक ने पत्नी के आधार कार्ड की जांच कराई तो वह भी फर्जी निकला। लुटेरी दुल्हन का यह पूरा मामला ग्वालियर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रॉय कॉलोनी का है। यहां रहने वाले युवक शिवम कुमार के परिजन उसकी शादी के लिए कई दिनों से लड़की तलाश कर रहे थे। इसी बीच शमशाबाद आगरा निवासी उसकी बहन के ससुर ने भोपाल में एक लड़की को तलाश कर रिश्ते की बात चलाई। बातचीत के बाद मामला जम गया और बात शादी तक आ पहुंची, लड़का भी लड़की को देखकर राजी हो गया और इसके बाद भोपाल में दोनों के परिवारों के बीच शादी का मुहूर्त निकाला गया और धूमधाम से शादी की गई, इसके बाद दूल्हा और दुल्हन ग्वालियर आ गए। कुछ दिन तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चला और दोनों आठ दिन तक एक-दूसरे के साथ भी रहे, परंतु आठवें दिन दुल्हन दहेज में मिला पूरा सामान लेकर ससुराल से फरार हो गई। ग्वालियर की लुटेरी दुल्हन। दुल्हन के घर से गायब होते ही दूल्हे ने सबसे पहले उसे फोन लगाया, लेकिन उसका मोबाइल बंद आया। इसके बाद उसने अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन उसमें भी उसको सफलता हासिल नहीं हुई। दरअसल जब वह फैक्ट्री से लौटा तो देखा कि घर में उसकी पत्नी नहीं है। ऐसी में उसने सबसे पहले अपनी पत्नी पूजा को कॉल किया तो उसका मोबाइल बंद आया इसके बाद उसने अपनी बहन को कॉल कर जानकारी दी और इंतजार करता रहा। जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो युवक को दुल्हन के गायब होने पर शक हुआ। इसके बाद युवक सबसे पहले महिला के आधार कार्ड की सच्चाई जानने पहुंचा, जहां पता चला कि आधार कार्ड तो फर्जी है। इस बात का पता चलते ही युवक फौरन घर पहुंचा और घर में रखी ज्वेलरी और कैश चेक किया। इसके बाद तो युवक के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, क्योंकि वह महिला लॉकर में रखे जेवर और कैश लेकर फरार हो चुकी थी। फिलहाल दुल्हन के फरार होने की शिकायत युवक के द्वारा ग्वालियर थाने में दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि यदि युवक थाने में शिकायत करने आता है तो जरूर कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 15

रामकी इनवायरो के इंसीनेटर में 900 डिग्री से अधिक तापमान पर यूका कचरे को जलाया गया

धार धार जिले में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण के लिए तीसरा ट्रायल रन सफलता के साथ पूरा किया गया। रामकी इनवायरो में स्थित इंसीनेटर में 900 डिग्री से अधिक तापमान पर कचरे को जलाया गया। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, मध्यप्रदेश के रीजनल ऑफिसर श्रीनिवास द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह ट्रायल हाई कोर्ट के आदेशानुसार किया गया था। तीसरे ट्रायल रन की शुरुआत 10 मार्च को शाम 7:41 बजे हुई थी, जिसमें 12 मार्च सुबह 8:43 बजे तक कचरा जलाया गया। इस ट्रायल रन में लगभग 37 घंटे का समय लगा और कुल 10 टन कचरा जलाया गया। इस ट्रायल रन में 10 टन कचरा 270 किलो प्रति घंटे की दर से जलाया गया। ये अब तक का सबसे तेज और सफल ट्रायल साबित हुआ। इससे पहले दो ट्रायल रन और हो चुके हैं। पहले ट्रायल रन में 135 किलो प्रति घंटे की दर से कचरा जलाया गया। वहीं दूसरे ट्रायल रन में  10 टन कचरा 180 किलो प्रति घंटे की दर से जलाया गया। यह यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुरूप परिणाम इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कंपनी और आसपास के गांवों में विशेष संयंत्र लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मानकों के अनुरूप कचरे का निस्तारण किया गया और यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित पाई गई। हाई कोर्ट के आदेश के तहत हुआ ट्रायल यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निस्तारण मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत किया जा रहा है। हाई कोर्ट के आदेशानुसार तीन ट्रायल रन किए गए, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कचरे को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से नष्ट किया जा सके। recent visitors 30

ज्यादा तनाव और लगातार स्ट्रेस सेहत के लिए खतरनाक, इन आसान तरीको से करे कम

स्ट्रेस सिर्फ मानसिक नहीं बल्कि शारीरिक रूप से भी असर डालता है। हल्का तनाव सामान्य है लेकिन ज्यादा और लगातार स्ट्रेस सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। यह हार्ट अटैक हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है। एक्सरसाइज अच्छी नींद और सोशल इंटरैक्शन से इसे कम किया जा सकता है। आइए जानें आखिर एक इंसान कितना स्ट्रेस लेने के लिए बना है? हमारे आस-पास स्ट्रेस या तनाव के बारे में लोग काफी मजाकिया लहजे में बात करते हुए मिल जाते हैं। कई तो स्ट्रेस से गुजर रहे लोगों पर कमेंट करने से भी चूकते हैं कि तुम्हें किस बात का स्ट्रेस है भला! लेकिन क्या आपको पता है ये आम सा लगने वाला स्ट्रेस गंभीर असर भी छोड़ सकता है। क्या आपके भी मन में ये सवाल उठता है कि आखिर एक इंसान कितना स्ट्रेस झेल सकता है? ये भी स्ट्रेस है क्या वैसे तो किसी मुश्किल काम के दौरान स्ट्रेस होने की आशंका ज्यादा होती है, लेकिन कई बार डरावनी फिल्म देखकर या डेट पर जाने जैसी बातों से भी स्ट्रेस हो सकता है। खतरा या कुछ आसामान्य महसूस होने पर आपका शरीर अचानक ही एड्रेनलाइन या कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन से भर जाता है। ऐसे में आपके दिल की धड़कन बढ़ जाती है, ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है, एनर्जी भी बढ़ी हुई महसूस होती है ताकि आप अचानक आए इस स्ट्रेस से लड़ पाएं। इसका असर तो कुछ देर रहता है और शरीर फिर सामान्य स्थिति में भी आ जाता है। ऐसा किसी खास स्थिति या काम को लेकर होता है जब आप तनाव महसूस करते हैं। लेकिन जैसे ही स्थिति सामान्य होती है आपको अच्छा महसूस होने लगता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक हमारा शरीर कम मात्रा में स्ट्रेस लेने के लिए बना है, लेकिन जब यह स्ट्रेस लंबा या क्रॉनिक हो जाता है, तो हमारे शरीर पर उसके कई बुरे परिणाम देखने को मिलते हैं। पेट में भी कुछ-कुछ होता है पेट में तितली उड़ने की बात तो करते हैं, लेकिन स्ट्रेस उसे सही मायने में महसूस कराता है। कोई भी प्रेजेंटेशन देने से पहले आपको पेट में कुछ गड़बड़ या दर्द जैसा महसूस हो सकता है। कई बार स्ट्रेस के पीछे बड़े कारण भी दिख सकते हैं, जैसे पति-पत्नी की आपसी लड़ाई या फिर भूकंप या आतंकवादी हमले जैसी स्थिति में भी ऐसा हो सकता है। बार-बार होने से क्या होता है अगर बार-बार एक्यूट स्ट्रेस रहता है, तो उससे दिल की आर्टरीज में सूजन तक हो सकती है। हार्ट अटैक आने के कई सारे कारणों में ये भी एक कारण होता है। वहीं, कोई व्यक्ति स्ट्रेस से किस तरह लड़ता है, उसका असर कोलेस्ट्रॉल लेवल पर भी पड़ता है। कैसे मैनेज करें इसे     दोस्त बनाएं और लोगों से मिलते-जुलते रहें     एक्सरसाइज करना ना भूलें     हर रात अच्छी नींद लें     अगर आपको लगातार स्ट्रेस महसूस हो रहा है, तो किसी साइकोलॉजिस्ट से मिलें।   recent visitors 33

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विष्णु राजोरिया का निजी अस्पताल में निधन

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विष्णु राजोरिया का मंगलवार शाम निजी अस्पताल में निधन हो गया है। उनकी इच्छानुसार नेत्रदान किया गया है। वे कई संस्थाओं के अध्यक्ष रहे। वे कुछ दिन से बीमार थे। बुधवार सुबह 11 बजे सुभाष नगर विश्राम घाट में अंतिम संस्कार होगा।  पूर्व मंत्री विष्णु राजोरिया मंगलवार शाम भोपाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 83 साल के थे। उन्होंने’ करीब 6 दशक पहले मासिक पत्रिका शिखर वार्ता के साथ करियर महाविद्यालय, कैरियर अस्पताल और आदर्श प्रायवेट लिमिटेड की स्थापना की थी। वे प्रदेश की अनेक शैक्षणिक एवं सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं के अध्यक्ष एवं सदस्य भी रहे है। परिजन ने किया नेत्रदान राजोरिया के बड़े पुत्र आशीष राजोरिया ने बताया कि, वे कुछ समय से बीमार थे। छोटे बेटे मनीष राजोरिया नें बताया कि, पिताजी की इच्छानुसार परिजन ने उनके नेत्रदान का संकल्प पूरा किया। उनकी अंतिम यात्रा निज निवास बी-244, ‘शाहपुरा से सुबह- 11 बजे सुभाष नगर स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेगी। देशभर में शोक की लहर पूर्व मंत्री के निधन पर कांग्रेस, भाजपा एवं अन्य राजनीतिक दलों के अनेक, वर्तमान मंत्री, पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व विधायक समेत तमाम नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक प्रकट किया। recent visitors 49

पोंटिंग ने कहा – रोहित ने जब यह घोषणा की होगी तो उनके दिमाग में कोई खास लक्ष्य रहा होगा

नई दिल्ली 2021 में जब रोहित शर्मा 34 साल के थे तो उनको टीम इंडिया की कप्तानी मिली थी। 2022 में पहली बार उन्होंने आईसीसी इवेंट में कप्तानी की। टीम टी20 विश्व कप 2022 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड से हार गई। अगले साल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भारत हार गया और उसी साल वनडे विश्व कप का फाइनल भी भारत ने गंवाया। हालांकि, इसके बाद टी20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 उनकी कप्तानी में भारत ने जीती और अब वे कुछ महीने के बाद 38 साल के हो जाएंगे। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से टी20 विश्व कप जीतने के बाद वे रिटायरमेंट ले चुके हैं। ऐसे में उनके वनडे क्रिकेट से रिटायरमेंट को लेकर बातें हो रही हैं, लेकिन रोहित शर्मा ने साफ कर दिया है कि वे रिटायरमेंट नहीं ले रहे। इस पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने कहा है कि रोहित के दिमाग में ये बात है कि उनको कब रिटायर होना है। आईसीसी रिव्यू पर मेजबान क्रिस्टल अर्नाल्ड के साथ बात करते हुए पोंटिंग ने कहा कि रोहित ने जब यह घोषणा की होगी तो उनके दिमाग में कोई खास लक्ष्य रहा होगा। उन्होंने कहा, "जब आप अपने करियर के उस बिंदु पर पहुंचने लगते हैं, तो हर कोई आपके रिटायर होने का इंतजार कर रहा होता है। मुझे नहीं पता कि क्यों, जब आप अभी भी उतना ही अच्छा खेल सकते हैं, जितना उन्होंने (फाइनल में) खेला है, मुझे लगता है कि वह बस उन सवालों को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश कर रहे थे और कह रहे थे, 'नहीं, मैं अभी भी काफी अच्छा खेल रहा हूं। मुझे इस टीम में खेलना पसंद है। मुझे इस टीम का नेतृत्व करना पसंद है।" रिकी पोंटिंग ने हिटमैन को लेकर आगे कहा, "और मुझे लगता है कि उन्होंने जो कहा, उसका मतलब है कि उनके मन में अगले (50 ओवर) विश्व कप (2027 में) खेलने का लक्ष्य अवश्य होगा।" पोंटिंग का मानना ​​है कि रोहित के दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले 2027 पुरुष क्रिकेट विश्व कप तक कप्तान बने रहने के फैसले के पीछे एक अधूरे काम को फिनिश करने की भावना हो सकती है। ये अधूरा काम है वनडे विश्व कप जीतना, जो वे 2023 में चूक गए थे। 10 मैच जीतने के बाद फाइनल में उनको हार मिली थी। ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने कहा, "मुझे लगता है कि शायद यह तथ्य कि वे पिछले फाइनल मैच को हार गए थे और वह कप्तान थे, शायद यही बात उनके दिमाग में चल रही है। टी20 विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी और वनडे विश्व कप जीतने की कोशिश में बस एक और मौका है। मेरा मतलब है कि जब आप उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेलते हुए देखेंगे, तो आप यह नहीं कहेंगे कि उनका समय अभी खत्म हो गया है।" recent visitors 24