30 द‍िनों तक खाएं मखाने जबरदस्‍त होंगे फायदे

मखाने को फॉक्स नट्स और लोटस सीड्स के नाम से भी जाना जाता है। ये खाने में ज‍ितने स्‍वाद‍िष्‍ट होते हैं उतने ही पौष्टिक भी हैं। मखाने में विटामिन मिनरल्स जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। मखाने की तासीर ठंडी होती है इसील‍िए लाेग गर्मियों में इसे खाना पसंद करते हैं। लाइफस्‍टाइल डेस्‍क, नई दि‍ल्‍ली। मार्च से ही गर्मी की शुरूआत हो चुकी है। इस बार मौसम व‍िभाग ने भीषण गर्मी पड़ने की चेतावनी जारी की है। इस मौसम में शरीर को ठंडा और ऊर्जावान बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में लोग जूस का सहारा लेते हैं। उन फलों को डाइट में शाम‍िल करते हैं जि‍नमें पानी की मात्रा अध‍िक हो। हालांक‍ि फलों के अलावा कुछ नट्स भी ऐसे होते हैं जो हमारे शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं। उन्‍हीं में से मखाना एक है। मखाना आपके शरीर को ठंडक प्रदान करने में बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। यह खाने में बेहद हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला होता है। ये गर्मियों में शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है। इसके अलावा ये तुरंत एनर्जी देने में भी मदद करता है। मखाने में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाते हैं बल्कि स्किन और हार्ट के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इसे स्नैक के रूप में खाने से वजन नियंत्रित रहता है और शरीर में ठंडक बनी रहती है। आज हम आपको गर्मी में मखाना खाने के जबरदस्‍त फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से- कैसी होती है मखाने की तासीर? मखाने की तासीर ठंडी होती है। यही कारण है क‍ि लोग गर्मियों में मखाने को प्राथम‍ि‍कता देते हैं। यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। इसकी ठंडी तासीर होने के कारण इसका सेवन कुछ स्थितियों में सावधानी पूर्वक करना चाहिए। हालांकि यह वजन घटाने में सहायक है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। ब्लड प्रेशर करता है कंट्रोल जिनका ब्‍लड प्रेशर हाई रहता है वे रोजाना मखाने को खा सकते हैं। इसमें सोडियम कम और पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है। ये दोनों चीजें ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करती है। अगर आपका बीपी हाई रहता है तो आप रोजाना मखाने का सेवन करें। शुगर रहता है नॉर्मल हाई ब्‍लड शुगर की समस्‍या से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट में मखाना जरूर शाम‍िल करना चाहि‍ए। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जो ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद करता है। आप इसे स्‍नैक्‍स के रूप में ले सकते हैं। कब्ज से द‍िलाए राहत मखाने में भरपूर मात्रा में फाइबर पाए जाते हैं। जो पेट को गैस, अपच की समस्या से बचाने का काम करते हैं। ये पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने में मददगार है। मोटापे में सहायक मखाने में एथेनोल नाम का तत्व पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कैलोरी की मात्रा भी बेहद कम होती है। मखाना खाने से मोटापे को कंट्रोल क‍िया जा सकता है। दिल की सेहत को सुधारे मखाना खाने से द‍िल की सेहत दुरुस्‍त रहती है। मखाने में एल्केलाइड जैसे तत्व पाए जाते हैं जो हार्ट संबंधी खतरे से बचाने में मदद कर सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान     अगर पहले से एलर्जी है तो मखाना खाने से बचना चाह‍िए।     मखाने खाने के बाद आपको त्वचा में खुजली, चकत्ते या कोई एलर्जी हो रही तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए।     अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से कब्ज की समस्या हो सकती है।   recent visitors 53

प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने बुलाई आवश्यक बैठक, प्रदेश के दिग्गज नेता होंगे मौजूद

रायपुर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी कल शुक्रवार को आवश्यक बैठक आयोजित की है। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने पार्टी की एक आवश्यक बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा प्रदेश के प्रभारी नितिन नबीन समेत प्रदेश के बड़े नेता शामिल होंगे। बैठक कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश कार्यालय में 21 मार्च को दोपहर दो बजे बुलाई गई है। बैठक में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, सम्भाग प्रभारी-सह प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी-सहप्रभारी, जिला अध्यक्ष, निवृत्तमान जिला अध्यक्ष, सभी मोर्चों के प्रदेश पदाधिकारी, सभी प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजक-सह संयोजक, सभी महापौर, नपा-नपं अध्यक्ष, निगम सभापति, जिला पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और जनपद पंचायत अध्यक्ष शामिल होंगे। recent visitors 28

नया भारत आक्रांताओं को स्वीकार नहीं करेगा, आक्रांता के महिमामंडन का मतलब देशद्रोह : CM योगी

बहराइच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच की तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) के मुख्य भवन के उद्घाटन कार्यक्रम शिरकत की. इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में बहराइच की पहचान को महाराजा सुहेलदेव के शौर्य के साथ जोड़ा. योगी आदित्यनाथ ने सैयद सालार मसूद गाजी का बिना नाम लिए कहा कि विदेशी आक्रांता को महाराजा सुहेलदेव ने इस बहराइच में धूल धूसरित करने का काम किया था. बहराइच ऋषि बालार्क के नाम पर था. सीएम योगी ने महाराजा सुहेलदेव और ऋषि बालार्क को बहराइच की पहचान बताते हुए कहा कि अधिकारी कर्मचारियों को अब अपने पोस्टिंग स्थल पर रात्रि निवास करना होगा. योगी आदित्यनाथ ने कहा, "भारत की सनातन संस्कृति का गुणगान दुनिया कर रही है. हर नागरिक का दायित्व है कि वो भी ऐसा करे. किसी आक्रांता का महिमामंडन नहीं करना चाहिए. नया भारत आक्रांताओं को स्वीकार नहीं करेगा. आक्रांता के महिमामंडन का मतलब देशद्रोह है. बहराइच में किसके नाम पर विवाद? संभल के बाद सैयद सालार मसूद गाजी को लेकर बहराइच में भी हलचल बढ़ गई है. दरअसल, 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के समीप बहने वाली चित्तौरा झील के किनारे महराजा सुहेलदेव ने अपने 21 अन्य छोटे-छोटे राजाओं के साथ मिलकर सालार मसूद गाजी से युद्ध किया था और उसे युद्ध में पराजित कर मार डाला था. उसके शव को बहराइच में ही दफना दिया गया था, जहां सालाना जलसा होता है. जानिए गजनवी के सेना के मुखिया के बारे में जानकारों के मुताबिक, सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 1014 ईस्वी में अजमेर में हुआ था. वह विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा होने के साथ उसका सेनापति भी था. तलवार की धार पर अपनी विस्तारवादी सोच के साथ सालार मसूद गाजी 1030-31 के करीब अवध के इलाकों में सतरिख (बाराबंकी ) होते हुए बहराइच, श्रावस्ती पहुंचा था.   recent visitors 51

सरकार ने स्थानीय रूप से निर्मित 307 तोपों के साथ-साथ टोइंग व्हीकल्स के लिए 7,000 करोड़ के सौदे पर लगाई मुहर

नई दिल्ली भारतीय सेना जल्द ही स्वदेशी आर्टिलरी गन से लैस होगी। देश के रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 7000 करोड़ रुपए के सौदे को मंजूरी दे दी है। मामले से अवगत अधिकारियों ने गुरुवार को बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने स्थानीय रूप से निर्मित 307 तोपों के साथ-साथ टोइंग व्हीकल्स के लिए 7,000 करोड़ रुपये के सौदे पर मुहर लगा दी है। अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है कि इस ATAGS ( एडवांस्ड टॉड आर्टिलरी गन सिस्टम) सौदे में 327 टोइंग ट्रक भी शामिल हैं, जिससे मार्च के अंत तक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का रास्ता साफ हो गया है। 155 मिमी/52-कैलिबर की इस तोप की रेंज लगभग 48 किमी है। नई तोपों की खरीद से भारत में आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और इससे भारतीय सेना की तैयारी भी बढ़ेगी। सेना ने 2017 से अब तक 720 मिलियन डॉलर के अनुबंध के तहत 100 ऐसी तोपों को अपने बेड़े में शामिल किया है और उनमें से कई को पहाड़ों में संचालन को सक्षम करने के लिए अपग्रेड करने के बाद लद्दाख सेक्टर में तैनात किया गया है। तोपों को मूल रूप से रेगिस्तानी इलाकों के लिए खरीदा गया था। ATAGS प्रोजेक्ट क्या है? बता दें कि DRDO ने 2013 में ATAGS प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य सेना की पुरानी तोपों को आधुनिक 155mm आर्टिलरी गन सिस्टम से बदलना था। DRDO ने तोप के निर्माण के लिए दो निजी फर्मों, भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ समझौता किया है। यह ऑर्डर दोनों कंपनियों के बीच विभाजित किया जाएगा। भारत फोर्ज, जो ATAGS टेंडर के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है, 60% तोपों का निर्माण और आपूर्ति करेगी। वहीं बचे हुए 40 फीसदी तोपों का उत्पादन TASL द्वारा किया जाएगा। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा इससे पहले 1 फरवरी को भारत ने केंद्रीय बजट में रक्षा बजट के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की थी। इसमें सेना के आधुनिकीकरण के लिए 1.8 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। सेना की खरीदारी सूची में फिलहाल कई लड़ाकू जेट, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बी, टैंक, तोपें, ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल शामिल हैं। आधुनिकीकरण के बजट का 75% रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए घरेलू स्रोतों से हथियार और उपकरण खरीदने पर खर्च किया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2015-19 और 2020-24 के बीच भारत का हथियार आयात 9.3 फीसदी तक कम हो गया है। recent visitors 27

धमतरी जिले में एक महिला ने एक साथ चार स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। इनमें तीन लड़की और 1 लड़का

धमतरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के गांव कौहाबाहरा में रहने वाली एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है। यह जिले में ऐसा पहला केस है, जहां एक साथ चार बच्चों का जन्म हुआ है। धमतरी जिले के निजी अस्पताल उपाध्याय नर्सिंग होम में 15 मार्च को नगरी ब्लॉक के 30 वर्षीय एक महिला प्रसूता ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है। चार बच्चों में एक लड़का तो वही तीन लड़कियों को महिला ने जन्म दिया है। जच्चा बच्चा दोनों ही स्वस्थ बताये जा रहे हैं। वही निजी अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रश्मि उपाध्याय का कहना है कि जब महिला अस्पताल में आई थी। तभी उसके सोनोग्राफी रिपोर्ट को देखकर चार बच्चों का उन्हें पता चल गया था। वही प्रसूता महिला की निर्धारित समय से पहले 7 महीने में ही डिलीवरी हो गई। वहीं जब महिला अस्पताल आई तब उसकी स्थिति सही नहीं थी जिसे अस्पताल में एडमिट किया गया और चारों बच्चों का जन्म ऑपरेशन के जरिए हुआ। चारों बच्चों में से एक बच्चे का वजन 1 किलो 500 ग्राम, दूसरे बच्चे का वजन 1 किलो 300 ग्राम, इसके साथ ही तीसरे बच्चे का वजन 1 किलो 100 ग्राम तो वहीं चौथे बच्चे के वजन की बात की जाए तो 900 ग्राम बताया जा रहा है। फिलहाल डॉक्टर ने अभी चारों शिशुओं के इलाज के लिए अस्पताल के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में सी मैप पर रखा है। वही बच्चों के डॉक्टर और वहां मौजूद नर्स के द्वारा अच्छे से उनकी देखभाल की जा रही है। वही प्रसूता महिला की बात की जाए तो वह अभी भी ऑब्जर्वेशन में है। क्योंकि समय से पहले महिला का डिलीवरी हुई जिससे महिला काफी कमजोर थी और थोड़ी-थोड़ी देर में महिला का बीपी डाउन हो रहा है। शरीर में सूजन की स्थिति भी बनी हुई है जिसे सामान्य करने के लिए अभी इलाज जारी है। डॉक्टर ने बताया कि मां और बच्चे दोनों ही स्वस्थ हैं। उन्हें कुछ दिन अस्पताल में ही रखा जाएगा और स्थिति सामान्य होने के बाद डिस्चार्ज किया जाएगा। वही इस मामले में चार बच्चों के पिता और बुआ नानी, दादी ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए। बताया कि 5 साल से बच्चे को लेकर प्रयास किया जा रहा था। लेकिन बच्चे नहीं हो रहे थे। वही एक साथ उन्हें इतनी बड़ी खुशी मिल गई कि उनके पास बोलने के लिए शब्द ही नहीं बचे। वही यह भी कहा कि परिवार में ऐसा पहली बार हुआ है। सभी आश्चर्य में है और बच्चों को और उनकी माता को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। वही बच्चों के पिता ने कहा कि वह मजदूरी का कार्य करते हैं और इसके अलावा घर में आय का कोई साधन नहीं है। वही शासन प्रशासन से आर्थिक मदद को लेकर भी गुहार परिजन लगा रहे हैं। बच्चों के पिता का कहना है कि अगर एक बच्चा होता तो जैसे तैसे उसका पालन पोषण हो जाता लेकिन यहां चार बच्चे एक साथ हो गए हैं तो उन्हें पालन पोषण में तकलीफ होगी जिसे लेकर शासन प्रशासन से मदद की उम्मीद परिजन कर रहे हैं और वही डॉक्टर और नर्स का भी परिजनों ने धन्यवाद दिया कि उनके वजह से आज मां और बच्चे सभी स्वस्थ हैं। 4 साल पहले हुई थी शादी बच्चों के पिता नंदेश्वर नेताम (30) ने बताया कि वह कौहाबाहरा गांव के रहने वाले हैं। 4 साल पहले यानी 2020 में उनकी शादी लक्ष्मी नेताम (30) से हुई थी। दोनों की पढ़ाई भी साथ में हुई है। वह मजदूरी और कृषि कार्य करते हैं। उनकी पत्नी लक्ष्मी नेताम घर में सिलाई कार्य करती है। 4 बच्चे की डिलीवरी होना रेयर मामला डॉक्टर रोशन उपाध्याय ने बताया कि निजी नर्सिंग होम अस्पताल में महिला ने 4 बच्चों को जन्म दिया है। चारों बच्चों को आईसीयू में रखा गया है। मामला ज्यादा गंभीर होने के कारण परिवार की सहमति से बच्चों को ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया। 4 से 5 बच्चे एक साथ पैदा होना दुर्लभ – डॉक्टर डॉक्टर रोशन उपाध्याय ने कहा कि, आईवीएफ इलाज के बाद 2 से 3 बच्चे एक साथ होते हैं, लेकिन बिना IVF के इस तरह का मामला रेयर होता है। महिला सरकारी अस्पताल से इलाज करवा रही थी। डॉक्टर ने कहा कि 2 से 3 बच्चे तो सामान्य देखे जाते हैं, लेकिन 4 से 5 बच्चे एक साथ पैदा होने का मामला दुर्लभ है। अब जानिए कहां-कहां कितने सबसे ज्यादा बच्चे पैदा हुए ? इंडियाना में महिला ने 11 बच्चों को दिया जन्म 2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका के इंडियाना की एक महिला ने एक साथ 11 बच्चों को जन्म दिया था। 42 साल की उम्र में 11 बच्चों को एक साथ जन्म हुआ था। महिला का नाम मारिया हर्नानडेस है। जब मारिया को डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल लाया गया। इस दौरान सभी लोग इनको देख कर हैरान थे। सभी की हैरानी उस समय और बढ़ गई जब मारिया ने महज 17 मिनट में 11 बच्चियों को जन्म दिया। दक्षिण अफ्रीका में महिला ने 10 बच्चों को दिया जन्म 2021 में दक्षिण अफ्रीका के गोटेंग प्रांत की महिला ने एक साथ 10 बच्चों को जन्म दिया था। महिला का नाम गोसेम थमारा सिथोले है। गोसेम ने 7 जून को 7 लड़कों और 3 लड़कियों को जन्म दिया था। गोसेम के पहले ही 6 साल के जुड़वा बच्चे थे। प्रेग्नेंसी की शुरुआत में डॉक्टर्स ने 6 बच्चों की पुष्टि की थी। कुछ समय बाद हुईं जांचों में सामने आया कि गर्भ में 8 बच्चे हैं, लेकिन डिलीवरी के दौरान 10 बच्चों का जन्म हुआ। गोसेम कहती हैं, 2 बच्चे ट्यूब के गलत हिस्से में थे, इसलिए शुरुआती जांच के दौरान दिखाई नहीं दिए थे। पश्चिम अफ्रीका में 26 साल की महिला ने 9 बच्चों को दिया जन्म 2021 में पश्चिमी अफ्रीकी देश माली की रहने वाली 26 साल की हेलीमा सिसे ने 9 बच्चों को दिया था। डॉक्टर्स ने 50 फीसदी बच्चों के ही जिंदा रह पाने की आशंका जाहिर की थी, लेकिन सभी बच्चे स्वस्थ थे। इनमें 5 लड़कियां और 4 लड़के हैं। हेलीमा और उनके 35 वर्षीय पति कादेर आर्बे 9 बच्चों को पाकर काफी खुश … Read more

28 या 29 मार्च, जानिए कब है शनि अमावस्या

हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि बड़ी पावन और विशेष मानी गई है. अमावस्या का दिन पितरों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. साल में 12 अमावस्या पड़ती है. जो अमावस्या शनिवार को पड़ती है, उसको शनि या शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं. इस दिन शनि देव की पूजा का विधान हिंदू धर्म शास्त्रों में है. शनि अमावस्या का दिन शनि देव के पूजन के लिए सबसे अच्छा और शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि अमावस्या के दिन सच्चे भक्ति भाव से शनि देव का पूजन करने पर जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है. जीवन की बाधाएं दूर होती है. पृत और ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिल जाती है. हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि अमावस्या के दिन शनि देव के पूजन के साथ ही कुछ नियमों का पालन करने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए. कब है शनि अमावस्या? इस साल शनि अमावस्या 29 मार्च को मनाई जाएगी. ये चैत्र माह की अमावस्या होगी. इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा. इसी दिन शनि देव कुंभ से मीन राशि में जाएंगे. चैत्र माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 28 मार्च को रात को 7 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 29 मार्च को शाम 4 बजकर 27 मिनट पर हो जाएगा. इसलिए उदया तिथि के अनुसार, शनि अमावस्या 29 मार्च रहेगी. ये इस साल की पहली शनि अमावस्या होगी. शनि अमावस्या पर क्या करें इस दिन शनि देव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं. उसमें काली उड़द की साबुत दाल, काले तिल और एक लोहे की कील डालें. इस दिन काले तिल, काले रंग का कंबल और काले रंग कपड़े गरीबों में दान करें. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर सात बार उसकी परिक्रमा करें. शमि के पेड़ की पूजा करें. काले कुत्ते को सरसों का तेल लगी रोटी खिलाएं. गंगा स्नान करें. क्या न करें शनि अमावस्या के दिन मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचें. बड़ों और पूर्वजों का अनादर न करें. इस दिन गाय, कुत्ते और कौवे को कष्ट न दें. ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता. बाल, दाढ़ी, और नाखून न काटें. इससे ग्रह दोष लग सकता है. किसी तरह का विवाद न करें. लोहे का सामान और शनि से जुड़ी वस्तुएं न खरीदें. recent visitors 40

विश्व जल दिवस पर मर्सी फॉर एनिमल्स ने मरीन ड्राइव तेलीबांधा तालाब पर किया प्रदर्शन

रायपुर विश्व जल दिवस पर मर्सी फॉर एनिमल्स ने मरीन ड्राइव, तेलीबांधा तालाब पर मांस उत्पादन में जल की खपत के बारे में जागरूकता बढ़ाने प्रदर्शन किया. प्रतीकात्मक वेशभूषा पहने दो स्वयं सेवक ने पानी की टंकियों में डूबकर मांस उत्पादन के लिए खपत किए गए पानी की विशाल मात्रा के साथ पौधे-आधारित खाद्य पदार्थों के कम जल खपत को उजागर किया. स्वयं सेवक तख्तियां लिए खड़े थे, जिस पर लिखा था “1 किलो मांस के उत्पादन में लगभग 8,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि 1 किलो सब्जियों में केवल 322 लीटर पानी की आवश्यकता होती है”. यह असमानता हमारे आहार विकल्पों के पर्यावरणीय प्रभाव और अधिक टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की ओर बदलाव की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है. मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया के आयोजन समन्वयक कुशल समद्दार ने कहा, “जल संकट एक वैश्विक समस्या है, और भोजन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.” समद्दार आगे कहते हैं, “हम लोगों से पौधे-आधारित आहार पर स्विच करने और सभी के लिए एक टिकाऊ भविष्य बनाने पर विचार करने का आग्रह करते हैं.” भोजन के लिए जानवरों को पालने, खिलाने और मारने के लिए बड़ी मात्रा में ताजे पानी का उपभोग करते हैं, जिससे पशु कृषि वैश्विक ताजे पानी के उपयोग के लगभग 20% के लिए जिम्मेदार है. पौधे-आधारित आहार को अपनाने से एक व्यक्ति के भोजन संबंधी पानी के उपयोग में 50% तक की कमी आ सकती है. मर्सी फॉर एनिमल्स जनता से उनके आहार विकल्पों के पर्यावरणीय परिणामों पर विचार करने और उनके जल पदचिह्न को कम करने और अधिक टिकाऊ भविष्य में योगदान करने के लिए पौधे-आधारित विकल्पों को अपनाने का आग्रह करता है. मर्सी फॉर एनिमल्स के बारे में Mercy For Animals (MFA) इंडिया एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है, जो भोजन के लिए पाले जाने वाले जानवरों की पीड़ा और क्रूरता को कम करने और पौध-आधारित भोजन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है. फिल्मी सितारे जॉन अब्राहम, सोनाक्षी सिन्हा, दक्षा नागरकर और ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक जैसे ब्रांड एंबेसडर के साथ Mercy For Animals कानूनी पैरवी, कॉर्पोरेट अभियानों और जनसंपर्क के माध्यम से एक ऐसा भविष्य बनाने का प्रयास करता है जिसमें जानवरों का सम्मान किया जाए, उनकी रक्षा हो और वे स्वतंत्र रहें. 800 से अधिक स्वयंसेवकों के देशव्यापी नेटवर्क के साथ, Mercy For Animals भारत में जानवरों के लिए सार्थक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है. अधिक जानकारी के लिए कृपया विजिट करें. recent visitors 25