चिकित्सा मंत्री ने विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा की

जयपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि आगामी गर्मी को देखते हुए प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में जांच, दवा एवं उपचार के पुख्ता प्रबंध किए जाएं। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सभी जिलों में गर्मी के दृष्टिगत समुचित व्यवस्थाएं हों। सब सेंटर से लेकर जिला अस्पताल तक एवं मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में दवाओं और उपचार की व्यवस्थाओं में कोई कमी नहीं रहे। श्री खींवसर मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में विभागीय गतिविधियों, योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं। सभी अस्पतालों में वाटर कूलर, एसी, पंखे आदि की पर्याप्त उपलब्धता हो तथा आवश्यकतानुसार इनके मेंटीनेंस का कार्य जल्द करवाया जाए। जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां प्राथमिकता से उपलब्ध हों एम्बुलेंस चिकित्सा मंत्री ने कहा कि दुर्घटना में होने वाली मौतें चिंता का विषय है। समय पर उपचार मिलने पर इन मौतों की संख्या को कम किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परिवहन एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर अधिक दुर्घटना वाले स्थानों को चिन्हित करते हुए वहां एम्बुलेंस वाहनों की प्राथमिकता से उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि घायलों को जल्द से जल्द उपचार मिल सके। उन्होंने डार्क जोन में आवश्यकतानुसार एम्बुलेंस उपलब्ध करवाने पर विशेष जोर दिया। मा योजना में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी जल्द लागू करें श्री खींवसर ने कहा कि मा योजना गरीब एवं जरूरतमंद वर्गों के लिए जीवनदायी योजना है। इस योजना का दायरा सरकार लगातार बढ़ा रही है। विभागीय अधिकारी सुनिश्चित करें कि राजकीय अस्पतालों के साथ ही निजी अस्पतालों में योजना के तहत आमजन को सुगमता से उपचार मिले। उन्होंने योजना में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी जल्द से जल्द लागू किए जाने एवं नए पैकेज भी शीघ्र शामिल करने के निर्देश दिए। अधिकारी नियमित रूप से करें फील्ड विजिट चिकित्सा मंत्री ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं के समय—समय पर निरीक्षण की दृष्टि से अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य स्तर के साथ ही संभाग एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट के लिए जाएं और चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण कर रिपोर्ट भिजवाएं, ताकि चिकित्सा सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें। गांव—गांव तक हो कैंसर स्क्रीनिंग श्री खींवसर ने कैंसर से होने वाली मौतों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि गांव—कस्बों में जागरूकता के अभाव में समय पर स्क्रीनिंग नहीं होने से महिलाओं की ओरल, ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर से मौत हो जाती है। कैंसर से होने वाली मौतों पर प्रभावी रोकथाम के लिए विभाग स्क्रीनिंग का दायरा निरंतर बढ़ाए। मोबाइल कैंसर वैन एवं शिविरों के माध्यम से गांव—गांव तक कैंसर की स्क्रीनिंग की जाए। संभावित रोगियों की जांच कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध करवाया जाए। बड़े अस्पतालों में जल्द लागू करें क्यू मैनेजमेंट सिस्टम चिकित्सा मंत्री ने आमजन को अस्पतालों में कतारों से मुक्ति दिलाने के लिए पायटल प्रोजेक्ट के रूप में कांवटिया अस्पताल में शुरू किए गए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम की सराहना करते हुए इसे अन्य बड़े अस्पतालों में भी जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को शुद्ध आहार उपलब्ध करवाने की दृष्टि से खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित निरीक्षण करे और आमजन को मिलावट के संबंध में जागरूक भी करे। recent visitors 46

वार्ता का उद्देश्य काला सागर में समुद्री युद्ध विराम पर पहुंचना है, युद्धविराम हुई चर्चा: व्हाइट हाउस

वाशिंगटन पिछले तीन साल से चल रहे यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन कड़ी मशक्कत कर रहा है। इसी कड़ी में सऊदी अरब की राजधानी रियाद के रिट्ज-कार्लटन होटल में रूस और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने मैराथन बैठक की। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच यह बातचीत करीब 12 घंटे से ज्यादा चली। मंगलवार को दोनों देशों द्वारा एक संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद है। इससे पहले रविवार को यूक्रेन के साथ अमेरिका की बातचीत हुई थी। सूत्रों के हवाले से अरब न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ निदेशक एंड्रयू पीक और विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी माइकल एंटोन कर रहे हैं। उधर, रूस का प्रतिनिधित्व रूसी उच्च सदन की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख ग्रिगोरी करासिन और संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) के निदेशक के सलाहकार सर्गेई बेसेडा कर रहे हैं। काला सागर में युद्धविराम पर चर्चा व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस वार्ता का उद्देश्य काला सागर (Black Sea) में समुद्री युद्ध विराम पर पहुंचना है, ताकि इस क्षेत्र में जहाजों का बेरोक-टोक और सुक्षिक मुक्त प्रवाह हो सके। वॉशिंगटन को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत एक व्यापक कदम की ओर बढ़ रही है और यह शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। व्हाइट हाउस के एक प्रतिनिधि ने उम्मीद जताई है कि निकट भविष्य में सकारात्मक घोषणा होने की उम्मीद है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में रूस के एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच एक संयुक्त बयान के मसौदे पर सहमति बन गई है, जिसे मंजूरी के लिए दोनों राजधानियों को भेजा गया है। हालांकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने वार्ता के मसौदे को उम्मीदों से कम करके आंका है। रॉयटर्स के मुताबिक, पेसकोव ने कहा, "यह मुख्य रूप से नेविगेशन की सुरक्षा के बारे में है।" काला सागर क्यों अहम? काला सागर यूरोप और एशिया के बीच स्थित है। यह कई देशों और संस्कृतियों को जोड़ता है। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग उपलब्ध कराता है। इतना ही नहीं यह रूस और नाटो के बीच एक रणनीतिक बफर के रूप में कार्य करता है, इसलिए यह एक भू-रणनीतिक क्षेत्र के रूप में भी कार्य करता है। यह अमेरिका, रूस और चीन के बीच भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए एक सक्रिय स्थल बना हुआ है। दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद यह इलाका अशांत हो गया था। इससे व्यापारिक जहाजों का आना-जाना मुश्किल हो रहा था। हालांकि, हाल के महीनों में समुद्री मोर्चे पर शांति रही है। यूक्रेन ने 2023 में रूसी नौसेना को पीछे धकेलने के बाद अपने शिपिंग लेन पर कुछ नियंत्रण हासिल कर लिया है। बहरहाल, व्हाइट हाउस इस मुद्दे को दोनों पक्षों के बीच विश्वास-निर्माण के लिए एक संभावित शुरुआती बिंदु के रूप में देख रहा है। क्या था समझौता और क्यों टूटा? बता दें कि तुर्की और संयुक्त राष्ट्र ने 2022 में ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव समझौते में मध्यस्थता करने में मदद की थी, जो जुलाई 2022 में हुआ था। इस समझौते की वजह से यूक्रेन-रूस युद्ध के बावजूद काला सागर केे पार लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन यूक्रेनी अनाज का सुरक्षित निर्यात हो सका था। बाद में रूस ने 2023 में इस समझौते से खुद को अलग कर लिया था और शिकायत की कि उसके अपने खाद्य और उर्वरक निर्यात में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में रूस को काला सागर के रास्ते अपने अनाज को बाज़ार तक पहुँचाने में कोई गंभीर समस्या नहीं आ रही है। अमेरिका चाहता है कि काला सागर में युद्ध विराम लागू कर सबसे पहले दोनों देशों (यूक्रेन और रूस) के बीच विश्वास बहाली की जाए। इसके बाद धीरे-धीरे पूर्ण युद्धविराम की तरफ बढ़ा जाए। recent visitors 29

1 अप्रैल से 6% वाला गूगल टैक्स खत्म करेगा भारत?

मुंबई भारत सरकार 1 अप्रैल से उन विदेशी कंपनियों से "गूगल टैक्स" हटा देगी, जो डिजिटल विज्ञापनों के जरिए पैसा कमाती हैं। इसका मतलब यह है कि अब कंपनियों जैसे Google और Meta को भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं पर कम टैक्स देना पड़ेगा। इस बदलाव से इन कंपनियों को बड़ा फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें पहले से कम टैक्स देना होगा, जिससे वे अपने कारोबार को और बढ़ा सकेंगी। Equalisation Levy क्या था? भारत सरकार ने इस टैक्स को "इक्वलाइजेशन लेवी" कहा था, जिसे 2016 में लागू किया गया था। यह टैक्स विदेशी कंपनियों पर लगाया जाता था जो भारतीय यूजर्स को ऑनलाइन सेवाएं देती थीं, जैसे विज्ञापन, शॉपिंग, और क्लाउड सेवाएं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता था कि विदेशी कंपनियां भारतीय टैक्स सिस्टम का हिस्सा बने और भारत में उनके द्वारा किए गए कारोबार पर टैक्स लिया जाए। कैसे होगा इन कंपनियों को फायदा? अब इस 6% टैक्स को हटा दिया जाएगा, जिससे कंपनियों को भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं की कीमतें और ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाने का मौका मिलेगा। इससे इन कंपनियों को भारत में अपने ऑपरेशंस को और बढ़ाने का अवसर मिलेगा और वे भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकेंगी। इन कंपनियों को अब भारत में अपनी डिजिटल सर्विसेस से होने वाली इनकम पर कम टैक्स देना होगा। इससे उनका कुल टैक्स बिल कम होगा और वे अपनी इनकम का ज्यादा हिस्सा अपने इन्वेस्टमेंट या ग्रोथ के लिए यूज कर सकेंगी। यह टैक्स कटौती अमेरिकी कंपनियों जैसे Google और Meta के लिए एक बड़ी राहत है, और इससे भारतीय डिजिटल मार्केट में और निवेश और विकास की संभावना बढ़ सकती है। EY के वरिष्ठ सलाहकार सुधीर कपाड़िया ने रॉयटर्स से कहा कि ये शुल्क हटाना सरकार का एक स्मार्ट कदम है, क्योंकि कलेक्‍शन बहुत अधिक नहीं था और यह अमेरिकी सरकार के लिए चिंता का विषय था. इस कदम को आगे के व्यापार विवादों को रोकने और एक स्थिर व्यापारिक माहौल बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.   गूगल और मेटा जैसे प्‍लेटफॉर्म पर विज्ञापन लागत कम करने से भारतीय व्यवसायों द्वारा डिजिटल विज्ञापन पर अधिक खर्च करने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप इन प्लैटफॉर्म पर अधिक विज्ञापनदाता आकर्षित होंगे और उनके राजस्व में वृद्धि होगी. इसके अलावा, इस कदम से इन तकनीकी कंपनियों के लिए प्रॉफिट में सुधार होने की संभावना है. इस फैसले से भारत के डिजिटल क्षेत्र में और अधिक विदेशी निवेश आने की भी उम्मीद है. डिजिटल विज्ञापन को सस्ता बनाकर सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और विकास और नवाचार के अवसर प्रदान करने की उम्मीद करती है. टैक्‍स हटाने के साथ-साथ सरकार विदेशी टेक कंपनियों को पहले से उपलब्ध कुछ टैक्‍स छूट को भी कैंसिल करने की योजना बना रही है. हालांकि टैक्‍स हटा दिया जाएगा, लेकिन इन कंपनियों पर अभी भी अन्य प्रावधानों के तहत टैक्‍स लगाया जा सकता है, जिससे एक संतुलित टैक्‍स बना रहेगा. recent visitors 42

शराब के शौकीनों के लिए बड़ी सौगात, ठेकों पर लगी लम्बी-लम्बी कतार

नोएडा नोएडा में मंगलवार को शराब की दुकानों पर शराब प्रेमियों की भीड़ टूट पड़ी। देखते ही देखते कई दुकानों से शराब का स्टॉक खत्म हो गया। एक पेटी पर एक पेटी फ्री का ऑफर लेने के लिए दुकानों पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। शराब विक्रेताओं को 31 मार्च तक पुराना स्टॉक खत्म करना है, इसलिए शराब की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। नोएडा के सेक्टर 18 में शराब की दुकानों पर छूट की सूचना मिलते ही लोग की भीड़ उमड़ रही है। कुछ लोग लाइन में लगे हैं और कुछ लोग अपनी बारी न आने पर आपस में बहस करते नजर आ रहे हैं। तभी एक शख्स की मानो लाटरी लग गई है। वह पेटी के साथ दारू ले जाता दिखाई दिया। जानकारी के अनुसार यह खबर यूपी के नोएडा से सामने आयी है। बताया जा रहा है कि आबकारी विभाग का वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। ऐसे में जिन दुकानदारों के पास अभी कोटा बचा हुआ है वह आफर के साथ उसे बेचकर खत्म करने की जुगत लगा रहे हैं। इसीलिए नोएडा में कुछ चुनिंदा दुकानों ने अपना स्टॉक खत्म करने के लिए एक के साथ एक बोतल ​फ्री का आफर निकाला है। सस्ते में शराब खरीदने की होड़ के चलते कई ठेकों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। ग्राहक पूरी पेटी ही खरीद कर ले जा रहे हैं। शराब के ठेकों पर लगी भीड़ का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। नोएडा में शराब की दुकानों पर भारी भीड़। इस भीड़ और मारामारी का कारण यह है कि पिछले दिनों ई-लाटरी से दुकानों का आवंटन किया गया है। जिसके चलते काफी पुराने शराब की दुकानें के संचालकों की ई-लाटरी में दुकानें नहीं मिल सकी। पुराने दुकानों पर 31 मार्च तक स्टॉक खत्म करना जरूरी है। जिसके चलते कई दुकानों ने शराब की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की छूट दी है। नोएडा में शराब की दुकानों के बाहर कुछ वैसी ही भीड़ नजर आ रही है जिस तरह कुछ साल पहले दिल्ली में नई शराब नीति लागू होने के बाद एक पर एक बोतल मुफ्त वाली ऑफर के बाद दिखी थी। recent visitors 29

प्रदेश का पहला पॉड होटल भोपाल स्टेशन पर खुल रहा , सस्ते में मिलेगा लग्जरी स्टे,अप्रैल में होगा भव्य उद्घाटन

भोपाल भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आरामदायक ठहराव के लिए एक नई पहल की गई है। प्रदेश का पहला पॉड होटल पूरी तरह से तैयार हो चुका है और जल्द ही इसका उद्घाटन भी किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस पॉड होटल का उद्घाटन 3 या 4 अप्रैल को होने की संभावना जतायी जा रही है। इस अवसर पर रेलवे के जनरल मैनेजर शोभना बंदोपाध्याय डिविजनल मैनेजर देवांश त्रिपाठी और कई जन प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। आपको बता दें, यह पॉड होटल भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर 6 पर बनाया गया है। इसका स्थान यात्रियों के लिए बेहद सुविधाजनक है, वो इसलिए क्योंकि यह सीधे प्लेटफॉर्म पर स्थित है। यहाँ से यात्री आसानी से ट्रेनों तक पहुँच सकते हैं और अपने प्रस्थान समय तक आराम से ठहर सकते हैं। क्या होता है पॉड होटल? पॉड होटल जिसे कैपसूल होटल भी कहा जाता है, यह एक नई और मॉर्डन सुविधा है जो जापान से शुरू हुई। यह होटल छोटे-छोटे कैप्सूल जैसे कमरों में यात्रियों को ठहरने की जगह देता है। ख़ासतौर पर यह उन लोगों के लिए बिलकुल सही माना जा रहा है जो कम पैसों में आरामदायक को सुरक्षित जगह चाहते हैं। इस होटल की सबसे बड़ी ख़ास बात यह होती है कि इसमें कम जगह में ही बढ़िया सुविधाएँ मिलती है। हर कैप्सूल में एक बिस्तर, लाइट, चार्जिंग प्वाइंट, TV और फ़्री वाई फ़ाई की सुविधा भी मिलती है। इन कैप्सूल को कुछ इस तरह से बनाया जाता है कि यात्री आराम से सो सके और उन्हें प्राइवसी भी मिल सके। भोपाल में पॉड होटल की जरूरत भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस पॉड होटल की योजना बनाई गई थी। नई बिल्डिंग 20 अक्टूबर 2019 को शुरू की गई थी और लगभग 6 साल बाद यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। इससे पहले साल 2021 में मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पहला पॉड होटल खोला गया था। अब भोपाल स्टेशन पर यह सुविधा यात्रियों के आरामदायक और किफायती ठहराव को सुनिश्चित करेगी। दो तरह के पॉड सिंगल पॉड यह पॉड एकल यात्रियों के लिए बनाया गया है जिन्हें कुछ घंटो यार रात भर के लिए आराम की ज़रूरत होती है। यह उन लोगों के लिए बेस्ट ऑप्शन हैं जो अकेले यात्रा कर रहे हैं और सुरक्षित और आरामदायक जगह चाहते हैं। फ़ैमिली पॉड यह पॉड परिवार या ग्रुप में यात्रा करने वाले लोगों के लिए हैं। इसमें एक साथ कई लोग ठहर सकते हैं। यह उन परिवारों या दोस्तों के लिए बहुत उपयोगी है, जो एक साथ यात्रा कर रहे हैं और एक ही जगह पर ठहरना चाहते हैं। फ़ैमिली पॉड में जगह थोड़ी ज़्यादा होती है, जिससे सभी लोग आराम से रह सकें। किराया क्या होगा? अभी तक पॉड होटल का किराया तय नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अगले दो दिनों में किराये का निर्धारण किया जाएगा। हालाँकि, यह उम्मीद की जा रही है कि किराया यात्रियों के लिए किफ़ायती होगा, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग सुविधा का लाभ उठा सकें। भोपाल में पॉड होटल की ज़रूरत क्यों? दरअसल, भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसी को ध्यान में रखते हुए पॉड होटल बनाने की योजना बनायी गई। यहाँ हर दिन हज़ारों यात्री आते जाते हैं, और कई बार उन्हें कुछ घंटो या रात भर के लिए ठहरने की ज़रूरत पड़ती है। ऐसे में पॉड होटल जैसी सुविधा यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। recent visitors 26

राज्य तीरंदाजी अकादमी के खिलाड़ी एक साथ इस्तीफा देने पहुंचे

 जबलपुर  मध्य प्रदेश राज्य तीरंदाजी अकादमी के खिलाड़ी एक साथ इस्तीफा देने पहुंचे। खिलाड़ियों का आरोप है कि पिछले दो-तीन वर्षों से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। खेलो इंडिया गेम्स के लिए जरूरी प्रशिक्षण और उपकरण नहीं मिल रहे, ऊपर से जबरन सेशन ऑफ बताकर छुट्टी पर भेजा जा रहा है। 2006-07 में शुरू हुए मप्र अकादमी मॉडल में यह पहला मामला है, जब सभी खिलाड़ी एक साथ सामूहिक इस्तीफा देने पहुंचे। अकादमी खाली करने का फरमान जानकारी के मुताबिक खिलाड़ियों को अकादमी खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया है। खिलाड़ियों का आरोप है कि खेल अधिकारी की मनमानी के चलते वे प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। जबकि अप्रैल महीने में ही खिलाड़ियों के कई मेजर टूर्नामेंट होने वाले हैं। वहीं मई महीने में भी इंटरनेशनल टूर्नामेंट होने है, ऐसे में अकादमी शिफ्ट करने के नाम खिलाड़ियों से अकादमी खाली करवाई जा रही है। इस्तीफा देने पहुंचे खिलाड़ियों ने जानबूझकर टूर्नामेंट में न भेजने का भी गंभीर आरोप लगाया है। जिला खेल अधिकारी पर प्रताड़ना का लगाया आरोप तीरंदाजी के खिलाड़ियों ने जिला खेल अधिकारी आशीष पांडे पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इसके पहले भी तीरंदाजी संगठन के बीच में विवाद  हो चुके हैं। भोपाल और दिल्ली के अधिकारी द्वारा समझाइश के बाद भी बात नहीं बन पाई है। वहीं, जिला खेल अधिकारी आशीष पांडे ने कहा कि जो नियम है, जो गाइडलाइन है उसी के तहत बच्चों का चयन होता है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन के बीच जो विवाद था उसे सुलझा लिया गया है, बच्चों और कोचेस को आपस में तालमेल बैठना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अकादमी को रांझी में नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है, इसलिए एक महीने की छुट्टी दी गई है।  खिलाड़ी ने बताई व्यथा   तीरंदाजी खिलाड़ी रागिनी मार्को ने कहा कि पिछले तीन साल से अकादमी में यही स्थिति बनी हुई हैं, हम ठीक तरह से प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। हमें खेल अधिकारी आशीष पांडे की तरफ से सपोर्ट नहीं किया जा रहा है। खिलाड़ी ने कहा कि हम सरकार की तरफ से चयनित हुए है, जब हमें प्रैक्टिस ही करने नहीं दिया जाएगा तो एकेडमी में रह कर हम क्या ही करें।  recent visitors 27

उषा वेंस 27 मार्च को अपने बेटे के साथ ग्रीनलैंड की यात्रा पर जाने वाली हैं, भड़क गए PM- ये लोग हमारे यहां क्या कर रहे

ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूट बी. एगेदे ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज की ग्रीनलैंड की यात्रा को "अत्यधिक आक्रामक" करार दिया है। यह बयान तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के इस स्वायत्त क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की धमकी दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया है। उषा वेंस गुरुवार, 27 मार्च को अपने बेटे के साथ ग्रीनलैंड की यात्रा पर जाने वाली हैं। व्हाइट हाउस के एक बयान के अनुसार, यह यात्रा सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए है, जिसमें वह ग्रीनलैंड के राष्ट्रीय डॉगस्लेड रेस, अवन्नाता किमुस्सेरसु को देखेंगी और स्थानीय संस्कृति और एकता का जश्न मनाएंगी। इसके अलावा, माइक वाल्ट्ज और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट भी इस सप्ताह ग्रीनलैंड का दौरा करने वाले हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री एगेदे ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की यह यात्रा केवल दबाव बनाने के लिए की जा रही है और इनकी किसी भी आधिकारिक बैठक के लिए आमंत्रण नहीं दिया गया है। शक्ति प्रदर्शन कर रहे ट्रंप- डेनमार्क रविवार को एक अखबार से बातचीत में प्रधानमंत्री एगेदे ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ग्रीनलैंड में क्या कर रहे हैं? इसका केवल एक ही उद्देश्य है- हम पर अपनी पावर का रौब दिखाना। वे शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि "उनकी मौजूदगी मात्र से ट्रंप के अभियान को और समर्थन मिलेगा और हमारे ऊपर दबाव बढ़ेगा।" ट्रंप सरकार ने इस यात्रा को "मित्रता का प्रतीक" करार दिया और दावा किया कि अमेरिकी टीम को ग्रीनलैंड में "आमंत्रित" किया गया था। हालांकि, एगेदे ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने उषा वेंस या वाल्ट्ज को किसी भी बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की और कहा कि ग्रीनलैंड की अखंडता और लोकतंत्र का सम्मान किया जाना चाहिए। ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर, नाटो से समर्थन लेने की कोशिश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जता चुके हैं। अब उन्होंने इस मुद्दे पर नाटो महासचिव मार्क रुटे से भी चर्चा की है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने रुटे से कहा, "मार्क, हमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है… हमारे कुछ 'पसंदीदा खिलाड़ी' वहां के तट के आसपास सक्रिय हैं, और हमें सतर्क रहना होगा।" ट्रंप के इस बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में गहरी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि डेनमार्क खुद भी नाटो का सदस्य देश है। वहीं, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिका की इन योजनाओं को लेकर स्पष्ट नाराजगी जाहिर की है। 14वीं शताब्दी से डेनमार्क के अधीन है ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। ये द्वीप 14वीं शताब्दी से डेनमार्क के अधीन रहा है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके पास दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार हैं और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यह अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गया है। ट्रंप प्रशासन की इस यात्रा से पहले ही डेनिश राष्ट्रीय पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को ग्रीनलैंड भेज दिया है, जिससे संभावित विरोध प्रदर्शनों की आशंका जताई जा रही है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ग्रीनलैंड की सरकार एक अस्थायी अवधि से गुजर रही है, क्योंकि 11 मार्च को हुए आम चुनाव के बाद नई सरकार का गठन अभी बाकी है। इस संवेदनशील समय में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को ग्रीनलैंड के नेताओं ने "अनादर" का प्रतीक बताया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और डेनमार्क की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।   recent visitors 31