Sunday, July 5, 2026 4:21 pm

सीबीआई की छापेमारी को लेकर बड़ा सवाल, हमने ही कार्रवाई की तो हम पर संरक्षण का आरोप कैसे? : भूपेश बघेल

रायपुर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महादेव सट्टा एप को लेकर सीबीआई की छापेमारी को लेकर सवाल खड़ा किया है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर किए अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब हमने ही कार्रवाई की तो हम पर संरक्षण का आरोप कैसे? ये कैसी जाँच है? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा है कि महादेव एप के बारे में देश में कोई नहीं जानता था. मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस सरकार में ही 74 FIR दर्ज हुई हैं. 200 से अधिक गिरफ़्तारी हुई हैं. 2000 से अधिक बैंक खाते सीज किए गए. हमारी सरकार में ही गूगल को पत्र लिखकर प्ले स्टोर से इस एप को हटाया गया. वहीं ईडी पर निशाना साधते हुए कहा कि ईडी ने झूठी खबर छपवाई कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई में गिरफ़्तार हो गए हैं, लेकिन वे वहाँ शिवकथा की जजमानी करते पाए गए. तो ये कैसी जाँच है? षड्यंत्र रचने की जताई आशंका इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेशबघेल ने पोस्ट में कहा कि CBI अधिकारियों ने न तो मेरे रायपुर स्थित शासकीय आवास में सूचना दी, और न ही भिलाई निवास में कोई सूचना दी. मेरी अनुपस्थिति में मेरे शासकीय आवास में बिना मुझे सूचना दिए प्रवेश करना पूर्णतः अनाधिकृत है. क्या भाजपा अब सीबीआई के माध्यम से कोई षड्यंत्र रच रही है? recent visitors 21

कल रायगढ़ में प्लेसमेंट कैंप का आयोजन , 305 पदों पर नकली भर्ती

रायगढ़ बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर है. 28 मार्च 2025 को जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, रायगढ़ में प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा. इस कैंप में 305 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें कई निजी कंपनियां भाग लेंगी. यह प्लेसमेंट कैंप सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा, जहां इच्छुक और योग्य उम्मीदवार अपने मूल प्रमाण पत्रों और रिज्यूम के साथ उपस्थित होकर भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. विस्तृत जानकारी जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र रायगढ़ से प्राप्त की जा सकती है. इन पदों पर होगी भर्ती प्राप्त जानकारी के अनुसार मे.मुथुट माइक्रोफिन लिमिटेड रायपुर में रिलेशनशिप ऑफिसर, मे.फिजिक्स वाला ढिमरापुर रोड रायगढ़ में क्लास इंचार्ज, काउंसलर, मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव, मे.चैतन्य इंडिया फिन क्रेडिट प्रा.लिमिटेड रायगढ़ में सीआरई (कस्टमर रिलेशनशिप एक्जीक्यूटिव), मे.अपराजिता सर्विसेस ढिमरापुर रोड रायगढ़ में वर्कशॉप मैनेजर, मैकेनिक, सेल्स मैनेजर, सेल्समैन, मे.एसबी टे्रडर्स कबीर चौक कोरबा में ड्राईवर(कैम्पर, बोलेरो), मे.शिवशक्ति एग्रीटेक तेलीबांधा रायपुर में सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव, मे.सिंघल स्टील एंड पावर प्रा.लि.तराईमाल गेरवानी रायगढ़ में सीआरओ (डीआरआई), जूनियर कैमेस्टि/असिस्टेंट कैमिस्ट, फिटर (डीआरआई), सीनियर फिटर (डीआरआई), फील्ड ऑपरेटर (डीआरआई) तथा टे्रनी एवं मे.पावर लाइन एक्सेसरिज भानपुरी रायपुर में टेक्नीशियन एवं अनस्कील्ड के रिक्त पदों पर भर्ती होगी. recent visitors 24

MIC की पहली बैठक, .50 करोड़ का स्ट्रीट लाइट टेंडर किया निरस्त के बाद हंगामा

बिलासपुर बिलासपुर नगर निगम की मेयर इन कौंसिल (MIC) की पहली बैठक हुई। जिसमें सड़क, नाली, पानी और लाइट जैसे बुनियादी मुद्दों के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर 37 प्रस्ताव पर चर्चा की गई। बिलासपुर नगर निगम के नए कार्यकाल की पहली एमआईसी बैठक में ही स्ट्रीट लाइट टेंडर को लेकर हंगामा हुआ। एमआईसी सदस्य विजय ताम्रकार ने टेंडर पर आपत्ति जताई, जिस पर सदस्यों से चर्चा के बाद 5.50 करोड़ रुपए के इस टेंडर को निरस्त कर दिया गया। दरअसल, शहर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए नगर निगम ने 5.50 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। यह टेंडर 2.31 प्रतिशत बिलो रेट पर जांजगीर की उदयश्री ग्रुप कंपनी को दिया गया था। बैठक में विजय ताम्रकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रदेश में आमतौर पर 20 से 25 प्रतिशत बिलो रेट पर काम होता है। ऐसे में इस टेंडर से निगम को लगभग 1.25 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। उनकी आपत्ति के बाद बैठक में गर्मागर्म बहस हुई। पेयजल सहित 37 प्रस्ताव पास नवनिर्वाचित महापौर पूजा विधानी की अध्यक्षता में यह पहली एमआईसी बैठक बुधवार शाम 5 बजे विकास भवन के दृष्टि सभागार में आयोजित हुई। इसमें कुल 37 प्रस्ताव पारित किए गए। गर्मी को देखते हुए बैठक में शहर में पानी की आपूर्ति को दुरुस्त करने के लिए जरूरी कदम उठाने तथा सड़क, नाली और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। भाजपा ही लगाती है शहर में स्ट्रीट लाइट स्ट्रीट लाइट के ठेके को लेकर हुई बहस के बीच यह चर्चा होती रही कि शहरभर में स्ट्रीट लाइट का काम भाजपा का एक वरिष्ठ नेता, गोलबाजार के एक फर्म के नाम से टेंडर लेकर करता है। टेंडर भी इसी कारण निरस्त किया गया ताकि नेताजी को टेंडर मिल सके। recent visitors 31

जल गंगा संवर्धन अभियान :पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता

प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश में बनेगा जन आंदोलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च से होगा प्रारंभ होकर 30 जून तक चलेगा "जल गंगा संवर्धन अभियान" पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता पानीदार प्रदेश बनने की ओर बढ़ता देश का हृदय प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के क्षिप्रा तट से करेंगे प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत अभियान में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत मुख्यमंत्री हर दिन एक जल संरचना का लोकार्पण करेंगे तीन माह लगातार चलेगा अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का "जल गंगा संवर्धन" महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन 30 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित क्षिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ "जल गंगा संवर्धन अभियान" का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। उन्होंने कहा है कि जल संरक्षण के इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार आएगा। पानी की बूंद-बूंद बचाएं, तभी हमारी सांसें बचेंगी। मध्यप्रदेश सरकार जन, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बना है। राज्य सरकार भी 'खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में' के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। पानी दे, गुरुबाणी दे। जल बिन सब सूना है। जो सबको जीवन दे, वो है जल। जल ही जीवन है। इससे हम आज सुरक्षित है, इसी से हमारा कल भी सुरक्षित है। जल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, समाज को भी आगे आना होगा। इसी मंशा से मध्यप्रदेश सरकार जल गंगा जल संवर्धन महा अभियान प्रारंभ करने जा रही है। हमारी धरा के कुल जल का केवल एक छोटा हिस्सा ही पीने योग्य स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है। पृथ्वी के कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत महासागरों में खारा जल है, जो पीने योग्य नहीं है। शेष 3 प्रतिशत मीठा जल है, लेकिन इसमें से भी अधिकांश हिमखंडों और बर्फ की चोटियों में जमा है। सिर्फ 0.5 प्रतिशत से भी कम पानी झीलों, नदियों और भूजल के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम उपयोग कर सकते हैं। पृथ्वी पर स्वच्छ और पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही सीमित है और इसे संरक्षित करना बेहद ज़रूरी है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने जल बचाने के लिए कदम बढ़ाये हैं। जल बचाने लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान" में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान", प्रदेश में जल संकट को खत्म करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेशव्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के कार्य करेंगे। अभियान की थीम 'जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण' रखी गई है। नागरिकों के सहयोग से जल संरक्षण अभियान बनेगा जन-आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संचय की विभिन्न गतिविधियां संचालित करने जैसे – पौध-रोपण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम चलाने, स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने, ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनाएं। "जल गंगा संवर्धन अभियान" में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्य     पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किये जायेंगे।     अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।     नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।     लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।     ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।     प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।     नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।     नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।     ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।     प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।     सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।     नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।     नहरों को मार्क … Read more

सिंगरौली में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई

 सिंगरौली  मध्य प्रदेश में गुरुवार को सिंगरौली जिले में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। झटके इतने हल्के थे कि कई लोगों को यह महसूस नहीं हुए, हालांकि कुछ लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर था।हालांकि कई स्थानों पर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। सिंगरौली और आसपास के जिलों में काफी लोगों ने भूकंप के झटके को महसूस किया तो कुछ को धरती की कंपन का अहसास नहीं हुआ। जिन लोगों को भूकंप महसूस हुआ वे तुरंत घरों से बाहर निकल आए। लोग एक दूसरे से भूकंप की चर्चा करने लगे। प्रशासन को कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता वाले भूकंपों को हल्के दर्जे में गिना जाता है। इतनी तीव्रता के भूकंप में नुकसान की आशंका ना के बराबर होती है। हालांकि, हल्के से हल्का भूकंप भी लोगों को डरा जरूर देता है। क्यों आता है भूकंप? दरअसल, पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं, जिसे इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट कहते हैं। जानकारी के अनुसार, पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेट्स घूमती रहती हैं, जिसके आपस में टकराने पर पृथ्वी की सतह के नीचे कंपन शुरू होता है। जब ये प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती हैं तो भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। इस जगह पर सबसे ज्यादा भूकंप का असर रहता है। हालांकि, भूकंप की तीव्रता अगर ज्यादा होती है तो इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं। भूकंप के दौरान क्या करें?     भूकंप के दौरान जितना संभव हो उतना सुरक्षित रहें। इस बात को लेकर सावधान रहे कि भूकंप कितनी तीव्रता के साथ आ सकता है। इसकी पूर्व-चेतावनी देने वाले भूकंप के झटके होते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है।     धीरे-धीरे कुछ कदमों तक की हलचल करें, जिससे पास में किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें और भूकंप के झटकों के रुकने पर घर में तब तक रहें जब तक कि आपको यह सुनिश्चित हो जाएं कि बाहर निकलना सुरक्षित है।   recent visitors 50

Nandini Milk की कीमतों में बढ़ोतरी, 4 रुपये बढ़ाने का लिया गया फैसला

बेंगलुरु कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लिया. राज्य में दूध की कीमत 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई है. यह बढ़ी हुई रकम सीधे किसानों को दी जाएगी. यह फैसला किसानों, कई संगठनों और पशुपालन विभाग की भारी मांग के बाद लिया गया है. राज्य की दूध फेडरेशनों ने भी इस कीमत बढ़ोतरी का समर्थन किया है. पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि दूध की कीमत तभी बढ़ाई जाएगी, जब बढ़ी हुई पूरी रकम किसानों को मिले. वह इस बढ़ोतरी के खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) को भरोसा दिया था कि कैबिनेट जल्द ही इस पर फैसला लेगी. खबर थी कि गुरुवार को कर्नाटक कैबिनेट KMF से सप्लाई होने वाले नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने पर फैसला करेगी. सूत्रों के हवाले से IANS ने बताया था कि KMF और किसान संगठन 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे. लेकिन सरकार ने पहले 3 रुपये बढ़ाने का मन बनाया था. आखिरकार, 4 रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी मिली. पहले भी कीमत बढ़ाने की बात हुई थी इससे पहले 5 मार्च को कर्नाटक सरकार ने कहा था कि वह लोकप्रिय नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही है. 10 फरवरी को कर्नाटक राज्य रायता संघ और ग्रीन ब्रिगेड ने बेंगलुरु में KMF ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया था. उन्होंने मांग की थी कि दूध की खरीद कीमत को कम से कम 50 रुपये प्रति लीटर किया जाए. साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू होने तक 10 रुपये प्रति लीटर का अंतरिम समर्थन मूल्य देने की मांग भी उठी थी. पिछले साल भी बढ़ी थी कीमत 25 जून 2024 को कर्नाटक सरकार ने दूध की कीमत 2 रुपये बढ़ाई थी. साथ ही हर पैकेट में 50 मिलीलीटर दूध अतिरिक्त जोड़ा गया था. इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी. किसानों को राहत की उम्मीद इस नई बढ़ोतरी से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. KMF और किसान संगठनों का कहना है कि दूध उत्पादन की लागत बढ़ गई है, इसलिए कीमत बढ़ाना जरूरी था. अब देखना यह है कि इस फैसले का असर आम लोगों पर कितना पड़ता है. लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों के हित में उठाया गया है. recent visitors 33

साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया

नई दिल्ली बीते कुछ साल में मकानों की कीमत (House Price) आसमान को छूने को बेताब है। इधर, जियो-पोलिटिकल टेंशन और शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया है। तभी तो इस साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया है। तभी तो इस दौरान मकानों की बिक्री में 28 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट से हुआ है खुलासा रियल एस्टेट कंसल्टेंट एनारॉक (Anarock) का कहना है कि आवासीय संपत्तियों की आसमान छूती कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण Q1, 2025 में भारतीय आवास बाजार की तेजी धीमी हो गई है। उसकी वजह से घरों की बिक्री में कमी आ रही है। इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से मार्च के दौरान करीब 93,280 यूनिट्स की बिक्री हुई है। पिछले साल इसी समय में 1,30,170 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस हिसाब से इस साल 28% की गिरावट दिख रही है। दिल्ली एनसीआर में बिक्री 20 फीसदी घटी दिल्ली-NCR में बिक्री 20% तक घटी है। यहां इस साल पहली तिमाही के दौरान करीब 12,520 यूनिट्स की बिक्री हुई है। जबकि पिछले साल इसी दौरान 15,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 26% तक गिरी है। वहां इस साल करीब 31,610 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जबकि पिछले साल 42,920 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मकानों (इकाइयों में) की बिक्री में साल-दर-साल % परिवर्तन   शहरों के नाम Q1-2025 Q1-2024 % परिवर्तन (Q1-2024 बनाम Q1-2025) एनसीआर 12,520 15,650 -20% एमएमआर 31,610 42,920 -26% बैंगलोर 15,000 17,790 -16% पुणे 16,100 22,990 -30% हैदराबाद 10,100 19,660 -49% चेन्नई 4,050 5,510 -26% कोलकाता 3,900 5,650 -31% कुल 93,280 1,30,170 -28% स्रोत: एनारॉक रिसर्च   बेंगलुरु-हैदराबाद में भी घटी बिक्री इस अविध के दौरान बेंगलुरु में मकानों की बिक्री 16% तक गिरी है। वहां इस साल की करीब 15,000 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 17,790 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। पुणे में बिक्री 30% तक गिर सकती है। यहां 16,100 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 22,990 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हैदराबाद में घरों की बिक्री 49% तक गिर सकती है। यहां 10,100 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 19,660 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। चेन्नई में बिक्री 26% तक गिर सकती है। यहां 4,050 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 5,510 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। कोलकाता में आवासीय संपत्तियों की बिक्री इस साल जनवरी-मार्च में 31% तक कम हो सकती है। यहां 3,900 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी समय में 5,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। अर्थव्यवस्था ठीक तब भी गिरावट एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि भारत का समग्र आर्थिक परिदृश्य इस समय सकारात्मक बना हुआ है। GDP विकास दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहने और मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में रहने का अनुमान है। लेकिन, तब भी मकानों की बिक्री में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा "हालांकि, मकानों की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनावों जैसे चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और एक कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था ने भारत के आवासीय बाजार की गतिविधि पर असर डाला है। इन कारकों का असर Q1 2025 में आवास बाजार पर पड़ा है।" recent visitors 44