संघ के बिना BJP की कामयाबी नामुमकिन नहीं, बीजेपी-RSS ने बना लिया 2029 का भी प्लान!

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी राजनीतिक सफलता का श्रेय आरएसएस को हमेशा ही देते रहे हैं। हालांकि 11 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद वह रविवार को पहली बार आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे। पीएम मोदी इससे पहले 2013 में लोकसभा चुनाव की बैठक को लेकर नागपुर आए थे। पीएम मोदी ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार के स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आरएसएस की तारीफ खरते हुए कहा कि यह एक संगठन नहीं बल्कि राजनीति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि संघ एक अमर संस्कृति के वट वृक्ष की तरह है जो कि आधुनिकता से भी ओतप्रोत है। आरएसएस कार्यकर्ता के तौर पर ही शुरू हुआ राजनीतिक सफर पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय चेताना का जो बीज 100 साल पहले बोया गया था वह एक वट वृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कार्यकर्ता पूरे देश में तन-मन से लोगों की सेवा कर रहे हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सफर 1972 में आरएसएस प्रचारक के तौर पर ही शुरू हुआ था। उनकी सक्रियता के चलते ही उन्हें 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। आरएसएस के एक सीनियर पदाधिकारी ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी का वैचारिक मेंटॉर आरएसएस है। इसके बावजूद बीजेपी ने आरएसएस से दूरी ही दिखाने की कोशिश की। सरकार और संघ का काम पूरी तरह अलग होता है। कई नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनका भविष्य आरएसएस की वजह से ही तय हो पाया है। फिर भी मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि आरएसएस कभी सरकार के कामकाज में कोई दखल नहीं देता है और ना ही इसका कोई राजनीतिक अजेंडा है। आरएसएस से अनबन की भी थी चर्चा 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह भी चर्चा थी की आरएसएस और बीजेपी की बन नहीं रही है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने यहां तक कहा था कि बीजेपी अब आत्मनिर्भर है। वहीं जब बीजेपी को हिंदी बेल्ट में सीटों का नुकसान हुआ तो आरएसएस प्रमुख ने भी कई बार इशारों-इशारों में खुले मंच पर नसीहत दे डाली। हालांकि लोकसभा में झटके के बाद बीजेपी ने फिर आरएसएस को अहमियत देनी शुरू की और इसका प्रभाव हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में दिखाई दिया। हालांकि आरएसएस नेता एचवी शेषाद्री ने कहा कि यह कोई डिबेट ही नहीं थी। जो लोग बीजेपी और आरएसएस दोनों को नहीं जानते हैं वही अनबन की अफवाह उड़ा रहे थे। इसके अलावा दो अहम कार्यक्रम भी आने वाले दिनों में होने वाले हैं। एक है बेंगलुरु में होने वाली बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक और दूसरी आरएसएस का शताब्दी वर्ष समारोह। ऐसे में दोनों ही संगठन अपने संबंधों को नई ऊंचाई देने में ललगे हैं। अगले महीने बेंगलुरु में होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी ऐलान कर सकती है। ऐसे में पीएम मोदी का आरएसएस मुख्यालय जाना अहम मानाजा रहा है। दो प्रधानमंत्रियों के दौरे के बीच कितना कुछ बदल चुका है? पच्चीस साल के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आंगन में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री की आमद हुई है. अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री संघ के दफ्तर का दौरा 27 अगस्त 2000 को किया था. ये संघ की स्थापना का 75वां साल था. अब 25 वर्ष बाद RSS की यात्रा के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर संघ मुख्यालय की यात्रा की है. 11 साल पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद नागपुर में आरएसएस मुख्यालय की अपनी पहली यात्रा में नरेंद्र मोदी ने संघ को भारत की अमर संस्कृति का 'वट वृक्ष' बताया. आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान साल 2000 में यहां का दौरा किया था. संयोग है कि पीएम मोदी जब आरएसएस के दफ्तर पहुंचे हैं तो ये उनका तीसरा कार्यकाल है. संघ भारतीय संस्कृति का अक्षय वटवृक्ष- मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास किए गए भारतीय संस्कृति की चेतना कभी समाप्त नहीं हुई. स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व डॉ.हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर ने भी इस राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया. उन्होंने 100 वर्ष पहले जिस वटवृक्ष का बीजारोपण किया था, वह आज विशाल रूप में फैल चुका है. नरेंद्र मोदी ने कहा कि संघ का यह वटवृक्ष आदर्श और सिद्धांतों की वजह से टिक पाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की राष्ट्रीय संस्कृति का कभी न समाप्त होने वाला अक्षय वटवृक्ष है. अब एक चौथाई सदी पहले उस मुलाकात की बात करते हैं जो तब हुई जब बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी संघ कार्यालय नागपुर पहुंचे थे. RSS और भारतीय जनता पार्टी के रिश्ते को वैचारिक और संगठनात्मक रूप से गहरा माना जाता है, जो समय के साथ विकसित हुआ है 10 मार्च, 2000 को के एस सुदर्शन संघ के प्रमुख बने तो देश में पीएम की कुर्सी पर वो व्यक्ति था जो कभी स्वयंसेवक रहा था. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी  के जमाने में स्वदेशी जागरण मंच, विहिप, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ जैसे संघ के अनुषांगिक संगठनों से कई मौकों पर टकराव होता रहा. हालांकि संघ के प्रति वाजपेयी की निष्ठा पर कोई सवाल ही नहीं था. 1995 में ऑर्गनाइजर में लिखे एक लेख में संघ को अपनी आत्मा बताया था. उन्होंने लिखा था, "आरएसएस के साथ लंबे जुड़ाव का सीधा कारण है कि मैं संघ को पसंद करता हूं. मैं उसकी विचारधारा पसंद करता हूं और सबसे बड़ी बात, लोगों के प्रति और एक दूसरे के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण मुझे भाता है और यह बस आरएसएस में मिलता है." अटल के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक दौर ऐसा भी आया, जब उनके संघ से रिश्ते कुछ असहज हो चले थे. उस वक्त संघ और सहयोगी संगठनों के नेता व्यक्तिगत हमले करने से भी नहीं चूकते थे. जबकि संघ में व्यक्तिगत नहीं बल्कि नीतिगत आलोचना की परंपरा रही. संघ विचारक दिलीप देवधर के अनुसार केएस सुदर्शन अपने विचारों को लेकर बहुत दृढ़ रहते थे. यह अटल बिहारी वाजपेयी जानते थे. यही वजह रहा कि भले ही रज्जू भईया ने उन्हें 1998 में उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था, मगर उन्हें सर संघचालक का … Read more

2 अप्रैल को Lok Sabha में पेश हो सकता है Waqf Amendment Bill

 नई दिल्ली संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है. इस चरण की कार्यवाही के भी चार दिन बाकी हैं और अब सरकार वक्फ बिल लाने की तैयारी में है. वक्फ बिल 2 अप्रैल को संसद में आ सकता है. सूत्रों की मानें तो वक्फ बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. सरकार अगर 2 अप्रैल को वक्फ बिल संसद में लाती है तो उसे दोनों सदनों से पारित कराने के लिए इस सत्र में केवल दो ही दिन का समय मिलेगा. वक्फ संशोधन विधेयक संसद के पिछले सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था. विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच पेश हुए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था. वक्फ बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई में जेपीसी गठित की गई थी. वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया था बताया जा रहा है कि उसी आधार पर सरकार की ओर से ईद के बाद संभवत: मंगलवार को लोकसभा में वक्फ विधेयक पेश किया जा सकता है। कोशिश यह होगी कि इसी सत्र में कम-से-कम एक सदन से विधेयक पारित हो जाए। अगस्त 2024 में वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया था। विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या जरूरी बजट सत्र के पहले सप्ताह में जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी थी। बताते हैं कि सरकार ने रिपोर्ट देख ली है और उसी अनुसार पुराने विधेयक में कुछ बदलाव की तैयारी हो गई है। विपक्षी दलों को इसका अहसास है कि सरकार के पास किसी विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या है। भाजपा बना रही यह योजना ऐसे में विपक्षी दलों की ओर से भाजपा के सहयोगी दलों-जदयू, तेदेपा और लोकजनशक्ति पार्टी के नेताओं से संपर्क साधने की कोशिश हो रही है और सार्वजनिक बयानों में उन्हें आगाह भी करने की कोशिश हो रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार सहयोगी दलों में किसी तरह का संशय नहीं है। उनके नेता जेपीसी में भी मौजूद थे और उनके सुझावों पर अच्छे से विचार किया गया। फिर भी विधेयक पेश होने से पहले सहयोगी दलों के नेताओं को औपचारिक रूप से इस बारे में बताया जा सकता है। विधेयक पारित कराने मे सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी सूत्रों के अनुसार, कोशिश यह होगी कि कम-से-कम एक सदन से विधेयक पारित करा लिया जाए। यह तय है कि इस पर संसद गर्म रहेगी। वैसे यह भी तय है कि विधेयक पारित कराने मे सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी और चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। बजट सत्र चार अप्रैल को खत्म हो रहा है। अमित शाह बोले- संसद के इसी सत्र में पेश होगा वक्फ विधेयक गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक संसद के इसी सत्र में फिर से पेश किया जाएगा। अगस्त 2024 में इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। चार अप्रैल को समाप्त होने वाले मौजूदा बजट सत्र में अब केवल चार कार्यदिवस बचे हैं। विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है- शाह अमित शाह ने एक निजी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हम इसी सत्र में संसद में वक्फ विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून से किसी को डरना नहीं चाहिए, क्योंकि नरेन्द्र मोदी सरकार संविधान के दायरे में रहकर वक्फ अधिनियम में संशोधन कर रही है। विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है। मुसलमानों के किसी भी अधिकार पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा। विपक्ष सिर्फ झूठ पर झूठ बोल रहा है। एनडीए के दो घटक दलों जेडीयू और टीडीपी के रुख की भी चर्चा हो रही है लेकिन माना जा रहा है कि इस बिल को लेकर दोनों दलों की चिंताओं का निवारण हो गया है. जेपीसी में भी दोनों दलों के सदस्य थे ही, जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट की जिस बैठक में संशोधित रिपोर्ट के आधार तैयार नए बिल को मंजूरी दी गई थी, उसमें भी एनडीए के दोनों घटक दलों के कोटे के मंत्री मौजूद थे. राज्यसभा में छोटे दलों के समर्थन की उम्मीद राज्यसभा में एनडीए वक्फ बिल पारित कराने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे है. ऐसे में सरकार को कुछ छोटे दलों के समर्थन की उम्मीद है. राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार ने पहले भी कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए हैं और इस बार भी नजर फ्लोर मैनेजमेंट पर होगी. recent visitors 50

नए वित्तीय वर्ष कर्मचरियों को वेतनवृद्धि होने जा रही

भोपाल  01 अप्रैल 2005 यानी मंगलवार से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने जा रहा है. नए वित्तीय वर्ष से टैक्स और बैंक से जुड़े कई नियम बदलने जा रहे हैं. मध्यप्रदेश में भी कई नए बदलाव 01 अप्रैल से होने जा रहे हैं. इन बदलावों से प्रदेश के कर्मचारी वर्ग से लेकर छात्र तक प्रभावित होंगे. आम आदमी पर इन बदलावों का सीधा असर पड़ने वाला है. ये असर आम आदमी की जेब का भार बढ़ाएगा. वहीं, कर्मचरियों को वेतनवृद्धि होने जा रही है. अब ज्यादा देना होगा टोल टैक्स भोपाल से इंदौर की यात्रा करने पर वाहन चालकों को टोल टैक्स के रूप में अब ज्यादा राशि देनी होगी. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 01 अप्रैल से टोल की दरों को बढ़ा दिया है. इससे भोपाल से इंदौर-देवास बायपास, मांगलिया और इंदौर-अहमदाबाद रोड से गुजरना महंगा हो जाएगा. अब कार चालकों को 100 रुपए का भुगतान करना होगा, जबकि अभी तक सिर्फ 65 रुपए का भुगतान करना होता था. इसी तरह टैक्सी, मिनी बस और लाइट मोटर व्हीकल को 160 रुपए का भुगतान करना होगा, अभी 105 रुपए देने होते थे. बिजली बिल का झटका भी लगेगा मध्य प्रदेश के लोगों की जेब पर भार 01 अप्रैल से बढ़ने जा रहा है. विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में 3.46 फीसदी की औसत वृद्धि को मंजूरी दे दी है. अब यह बढ़ी हुई बिजली दरें 01 अप्रैल से लागू होने जा रही हैं. इस तरह मई माह में आना वाला बिजली बिल बढ़ी हुई दरों के साथ ही आएगा. उधर, ऐसे बिजली उपभोक्ता जो प्रदेश में स्मार्ट मीटर का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें बिजली दरों में राहत मिलेगी. सौर ऊर्जा अवधि के दौरान बिजली शुल्क में 20 फीसदी की छूट उपभोक्ताओं को मिलेगी. विद्युत नियामक आयोग ने लो टेंशन और हाई टेंशन के मामले में उपभोक्ताओं को न्यूनतम शुल्क में राहत दी है. कर्मचारियों की जेब में आएगा पैसा मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 01 अप्रैल से बड़ा लाभ होने जा रहा है. कर्मचारियों को 01 अप्रेल से सातवें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा. इस वजह से अब बढ़ा हुआ पैसा कर्मचारियों की जेब में आएगा. राज्य सरकार ने 01 अप्रैल से सांतवें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ते का लाभ दिए जाने का कैबिनेट में निर्णय लिया था. इस वजह से हाउस रेंट के अलावा तमाम मदों में 7 वें वेतनमान के हिसाब से पैसा मिलेगा. मकान खरीदना होगा महंगा वहीं, कर्मचारियों का पैसा बढ़ेगा, लेकिन प्रदेश में मकान खरीदना और महंगा हो जाएगा. 01 अप्रैल से प्रदेश में जमीनों की कीमतों में बढोत्तरी हो गई है. भोपाल में जमीन की कीमतों में 14 फीसदी और इंदौर में 30 फीसदी तक कीमतें बढ़ गई हैं. उधर, अब प्रदेश में रजिस्ट्रियां और स्टांप सिर्फ संपदा 2 पोर्टल पर ही होंगे. 01 अप्रैल से संपदा 1 पोर्टल को बंद किया जा रहा है. संपदा 2 पोर्टल पर पंजीयन और संपत्ति को सर्च करना आसान हो जाएगा. recent visitors 35

बुस एक काम करे और करे अयोध्या में रामलला के मुफ्त दर्शन

इंदौर  इंदौर में भिक्षावृत्ति की सूचना देने पर जिला प्रशासन की तरफ से इनाम की घोषणा के बाद अब राशन दुकानों पर कालाबाजारी और मिलावट आदि की जानकारी देने वालों को अब अयोध्या के राम मंदिर जाने का मौका मिलेगा. साथ उन्हें वहां रहने और खाने की सुविधा भी दी जाएगी. जबकि नकद पुरस्कार चाहने वालों को 1100 से 2100 रुपये तक दिए जाएंगे. इंदौर नगर निगम परिषद में गरीबी उपशमन विभाग के प्रमुख मनीष शर्मा ने यह घोषणा की है. अब तक 40 से ज्यादा अनाज व्यापारियों के खिलाफ दर्ज की गई है एफआईआर जानकारी के मुताबिक इंदौर में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जरूरतमंद हितग्राहियों को राशन की दुकान से मिलने वाला अनाज खुले बाजार में व्यापारियों को बेच दिया जाता है. इसकी धर पकड़ के लिए अभियान चलाकर अब तक 40 से ज्यादा अनाज व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा कुछ व्यापारियों के खिलाफ रासुका के तहत भी कार्रवाई की गई है. हालांकि अब भी बड़े पैमाने पर या तो राशन की दुकान संचालक सरकारी अनाज को बेच देते हैं. ऐसे तमाम मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए इंदौर नगर निगम के एमआईसी मेंबर मनीष शर्मा उर्फ मामा ने ऐसे मामलों की सूचना देने वालों के लिए बाकायदा पुरस्कार देने की घोषणा की है. अयोध्या की फ्री टिकट के साथ ही रहने-खाने की निशुल्क होगी व्यवस्था एमआईसी मेंबर मनीष शर्मा के मुताबिक "शहर में अब कोई भी राशन माफिया को पकड़ता है या उन्हें अनाज की कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की सूचना देता है तो उन्हें अयोध्या जाकर तीर्थ यात्रा करने का फ्री टिकट और रहने-खाने की व्यवस्था की जाएगी. जबकि नकद राशि चाहने वालों को 1100 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा. जबकि बड़े मामलों में पुरस्कार की यह राशि 2100 रुपए होगी." दरअसल यह पहला मामला है जब शहर में राशन माफिया के खिलाफ धरपकड़ और कार्रवाई को लेकर निजी तौर पर किसी पुरस्कार के तौर पर तीर्थ यात्रा करने की घोषणा की गई हो. इसे लेकर मनीष शर्मा का मानना है "सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज लोगों के निजी उपयोग के लिए है लेकिन कई राशन दुकानदार इसे वापस खरीद कर राशन माफिया को बेच देते हैं. बाजार में राशन कार्ड के आधार पर लिया गया चावल 15 से 17 रुपए किलो तक बेच दिया जाता है जो केंद्र सरकार और शासन की गरीबी उपशमन योजना के खिलाफ है." गुजरात महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों में जा रहा राशन का अनाज दरअसल इंदौर में बीते कुछ सालों में ऐसे बड़े मामले सामने आए हैं, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली का गेहूं या चावल शहर में किराए के गोदाम या अन्य स्थानों पर चोरी छुपे रखा गया था. छापेमारी की कार्रवाई में गेहूं और चावल के हजारों कट्टे बरामद हुए हैं. जिसको देखते हुए खाद्य विभाग और जिला प्रशासन ने ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई का फैसला किया है. बीते दिनों अरविंदो कॉलेज के पास एक गोदाम में छापे की कार्रवाई के दौरान एक वाहन और 800 कट्टे बरामद हुए लेकिन कोई उस पर दावा करने नहीं आया. recent visitors 43

MP में अब हिंदी और अंग्रेजी नहीं बल्कि तमिल और तेलुगू भाषाओं में भी पढ़ाई होगी: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब हिंदी और अंग्रेजी नहीं बल्कि तमिल और तेलुगू भाषाओं में भी पढ़ाई होगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राजभवन में आयोजित 'कर्मयोगी बनें' कार्यशाला में की. इस कार्यशाला में सीएम के साथ राज्यपाल मंगूभाई पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के साथ विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे. इस अवसर पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि "हमारे यहां विद्यार्थियों को केवल हिंदी ही नहीं तमिल-तेलुगू जैसी भाषा में भी पढ़ाने के लिए हम प्रेरित करेंगे. जो बच्चे इसमें जाएंगे उनको विशेष अंक देकर प्रोत्साहन देंगे. ये भाषाओं का गुलदस्ता हमारा है, हमें इस पर गर्व होना चाहिए." 'हर व्यक्ति अपने कर्मों से बंधा' सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि "भगवत गीता में कर्म, अकर्म और विकर्म को समझााने का प्रयास किया गया है. जिसने जन्म लिया है, उसे सांस लेना, सोना और खाना भी कर्म है. हर व्यक्ति अपने कर्मो से बंधा हुआ है. हम जो भी कार्य करें, उसका दोष भगवान को न दें. हमने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है. लेकिन वर्तमान में जिनको जैसी बातें करनी है, वो राजनीतिक दृष्टि से करते होंगे. हम तो राष्ट्रनीति के आधार पर सोचते हैं. हम अपने कर्मो के आधार पर जिस जगह भी पहुंचते हैं, वहां पूरी निष्ठा, उर्जा और आनंद के साथ काम करना चाहिए." हम मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण कर रहे राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश इतिहास के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां से साफ दिख रहा है कि 21वीं सदी भारत की होगी. इतिहास साक्षी है, जापान, जर्मनी, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया 4 से 5 दशक पहले ऐसे ही मोड़ पर थे. जहां से एकजुट होकर उन्होंने अपने राष्ट्र के विकास की नई इबारत लिखी. आज भारत भी उसी दौर से गुजर रहा है और हम मिलकर विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं." राज्यपाल ने कर्मयोगी की परिभाषा बताते हुए कहा कि "व्यक्तिगत लाभ, सफलता-असफलता की चिंता किए बगैर निरंतर कार्य करने वाला ही सच्चा कर्मयोगी है." recent visitors 32

केंद्र सरकार का बड़ा कदम, इन लोगों को मिलेगा 5 लाख की लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड

नईदिल्ली नए फाइनेंशियल ईयर में कई ऐसे नियम लागू होंगे, जो बजट में लागू हुए थे। बीते एक फरवरी को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों के हित में भी कई बड़े ऐलान किए थे। इनमें से एक ऐलान- किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का है। किसान क्रेडिट कार्ड से लोन की लिमिट को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है। किस तरह की जरूरतों के लिए मददगार बता दें कि किसान क्रेडिट कार्ड एक बैंकिंग उत्पाद है जो किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक जैसी कृषि वस्तुएं खरीदने में मददगार है। इसके साथ ही फसल उत्पादन और इससे जुड़ी गतिविधियों से संबंधित नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए समय पर और किफायती क्रेडिट प्रदान करता है। 2019 में केसीसी योजना को पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया था। बता दें कि चालू किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों के तहत राशि 31 दिसंबर, 2024 तक 10 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है। इससे 7.72 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है। मार्च, 2014 में चालू केसीसी की राशि 4.26 लाख करोड़ रुपये थी। बजट में कटौती बीते एक फरवरी को पेश बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र के बजट में कटौती की थी। केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि मंत्रालय का बजट आवंटन 2.75 प्रतिशत घटाकर 1.37 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इस कमी की भरपाई संबद्ध क्षेत्रों के लिए बढ़े हुए आवंटन से हुई है, जिसमें मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए आवंटन को 37 प्रतिशत बढ़ाकर 7,544 करोड़ रुपये और खाद्य प्रसंस्करण के लिए आवंटन को 56 प्रतिशत बढ़ाकर 4,364 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और खाद्य प्रसंस्करण के लिए कुल बजट आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। नई योजनाओं के लिए आवंटन विस्तृत होने के बाद इसके चालू वर्ष के संशोधित अनुमान 1.47 लाख करोड़ रुपये को पार करने की उम्मीद है। recent visitors 33

1 अप्रैल से बदले पैसे और टैक्स से जुड़े ये नियम, 12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री, UPI, GST, क्रेडिट कार्ड रूल्स भी चेंज

नई दिल्ली 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष चालू हो रहा है। आज  यानी एक अप्रैल से पैसे और टैक्स से जुड़े कुछ नियमों में बड़ा बदलाव हो जाएगा। इनमें से अधिकतर बदलावों की जानकारी पिछले महीने यानी मार्च 2025 में ही दे दी गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने फरवरी में आए बजट के दौरान इनकम टैक्स (Income Tax) से जुड़े कुछ बड़े ऐलान किए थे और अब इन नियमों को 1 अप्रैल 2025 यानी आज  से लागू किया जाएगा। प्रमुख वित्तीय और टैक्स परिवर्तनों में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स छूट, लंबे समय तक इस्तेमाल न किए गए मोबाइल नंबरों के लिए यूपीआई को डीएक्टिवेट करना और पैन-आधार लिंक नहीं होने पर कोई डिविडेंड (लाभांश) नहीं देना शामिल है। 1 अप्रैल से लागू हो रहे पैसे और टैक्स से जुड़े ये बदलाव… नया इनकम टैक्स नियम: New income tax rule     वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में नए टैक्स रेट और स्लैब का ऐलान किया था, जो 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके तहत 12 लाख रुपये तक सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए होगा। यानी इस तरह न्यू टैक्स रिजीम में 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यूपीआई नियमों में बदलाव: Changes in UPI rules नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 1 अप्रैल से लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किए गए यूपीआई नंबर निष्क्रिय यानी डीएक्टिवेट हो जाएंगे। अगर आपका मोबाइल नंबर यूपीआई से लिंक है और आप लंबे समय से इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो 1 अप्रैल से पहले इसे अपडेट कर लें, नहीं तो आपका यूपीआई अकाउंट एक्सेस नहीं हो पाएगा। क्रेडिट कार्ड रिवार्ड पॉइन्ट में बदलाव: Changes in credit card reward points     कुछ क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए रिवॉर्ड प्वाइंट के नियम बदलने जा रहे हैं। एसबीआई सिंपलीक्लिक और एयर इंडिया एसबीआई प्लैटिनम क्रेडिट कार्ड धारकों को नए रिवॉर्ड स्ट्रक्चर के तहत बदलाव देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, एक्सिस बैंक एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के कारण विस्तारा क्रेडिट कार्ड के लाभों को भी रिवाइज करेगा। यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस): Unified Pension Scheme (UPS) सरकार द्वारा अगस्त 2024 में लॉन्च की गई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) 1 अप्रैल से लागू होगी। यह पुरानी पेंशन स्कीम की जगह लेगी और लगभग 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को प्रभावित करेगी। इसके तहत 25 साल या उससे अधिक की सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को पिछले 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा। जीएसटी नियमों में बदलाव: Changes in GST rules     1 अप्रैल से जीएसटी पोर्टल पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) अनिवार्य कर दिया जाएगा, जिससे सुरक्षा और मजबूत होगी। इसके अलावा अब केवल उन्हीं दस्तावेजों पर ई-वे बिल जेनरेट किया जा सकेगा जो 180 दिन से ज्यादा पुराने न हों। होटल रूम टैरिफ और जीएसटी: Hotel room tariff and GST अब, किसी भी वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन 7,500 रुपये से ज्यादा कमरे का किराया रखने वाले होटलों को ‘Specified Premises’ माना जाएगा। ऐसे होटलों में ऑफर की जाने वाली रेस्तरां सेवाओं पर 18% जीएसटी लगेगा, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा। बैंक अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस का नियम: Bank account minimum balance rules     एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और अन्य बड़े बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस की जरूरतों को अपडेट किया है। अगर आपके बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं है तो 1 अप्रैल से आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। पैन-आधार लिंक नहीं तो डिविडेंड भी नहीं: Dividend will not be received if PAN-Aadhaar is not linked अगर आपने 31 मार्च तक अपने पैन और आधार को लिंक नहीं किया तो 1 अप्रैल से आपको डिविडेंड इनकम नहीं मिलेगी। इसके अलावा टीडीएस भी बढ़ जाएगा और फॉर्म 26AS में कोई क्रेडिट नहीं मिलेगा। म्यूचुअल फंड और डीमैट केवाईसी अनिवार्य: Mutual fund and demat KYC mandatory 1 अप्रैल, 2025 से म्यूचुअल फंड और डीमैट खातों के लिए केवाईसी अनिवार्य हो जाएगी। इसके तहत सभी नामांकित विवरणों (nominee details) को फिर से सत्यापित किया जाएगा। चेक क्लियरेंस के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम बैंक फ्रॉड रोकने के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम लागू किया जाएगा। अब 50,000 रुपये से अधिक के चेक भुगतान के लिए खाताधारक को चेक का विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से बैंक को देना होगा, जिसे बैंक भुगतान से पहले सत्यापित करेगा। प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में बदलाव: Changes in Priority Sector Lending 1 अप्रैल से होम लोन लेने वाले लोग प्रायोरिटी सेक्टर लोन के तहत बड़े शहरों में 50 लाख रुपये, मीडियम-साइज वाले शहरों में 45 लाख रुपये और छोटे शहरों में 35 लाख रुपये तक का लोन ले सकेंगे। टीडीएस लिमिट में बढ़ोतरी: Increase in TDS limit     वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। टीसीएस नियमों में बदलाव: Changes in TCS rules टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) की नई दरें 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगी। अब विदेश यात्रा, निवेश और अन्य बड़े लेनदेन पर टीसीएस की सीमा 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। गौर करने वाली बात है कि इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी जेब और वित्तीय लेनदेन पर पड़ेगा। इसलिए जरूरी वित्तीय कामों को 1 अप्रैल से पहले पूरा कर लें ताकि कोई परेशानी न हो।   recent visitors 32