Sunday, July 5, 2026 9:01 pm

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के गौरव और हिन्दी पत्रकारिता के पुरोधा, राष्ट्रकवि पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनकी लेखनी ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को नई ऊर्जा दी और राष्ट्रभक्ति की भावना को सशक्त किया। पुष्प की अभिलाषा, सिपाही, सागर खड़ा बेड़ियाँ तोड़े… जैसी उनकी अनेक कालजयी कृतियां भावी पीढ़ियों को त्याग एवं देशभक्ति के लिए अनुप्रेरित करती रहेंगी। पं. माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को बाबई (नर्मदापुरम) में हुआ, जिसे अब उनके नाम पर माखननगर के नाम से जाना जाता है। पं माखनलाल चतुर्वेदी “कर्मवीर” और “प्रभा” के प्रतापी संपादक तथा राष्ट्रीय काव्यधारा के उन्नायक रहे। उन्हें सागर विश्वविद्यालय से वर्ष 1959 में डी.लिट. की मानद उपाधि से विभूषित किया है। इसके साथ ही वर्ष 1955 में काव्य संग्रह हिमतरंगिणी के लिए “साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारत सरकार से वर्ष 1963 में उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया गया। पं. चतुर्वेदी का 30 जनवरी 1968 को अवसान हुआ। भोपाल में पं माखनलाल चतुर्वेदी के नाम से राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय स्थापित है।   recent visitors 31

धार्मिक स्थानों की गरिमा बनाए रखने का प्रयास है, शराब बंदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जन भावनाओं का ध्यान रखते हुए धार्मिक स्थानों की पवित्र गरिमा को बनाए रखने के लिये शराब बंदी का प्रयास किया है, इसके लिये शासन ने भले ही राजस्व की हानि स्वीकार की है। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के धार्मिक शहरों में शराबबंदी का निर्णय इसी दिशा में एक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 17 से अधिक शहरों में शराब बंदी की घोषणा कर उसे क्रियान्वित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल से दतिया रवाना होने से पहले मीडिया को जारी संदेश में यह विचार रखे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन की ओर अग्रसर हो रही हमारी सरकार पर जनता की सेवा और कल्याण के लिए पीताम्बरा माई अपना आशीर्वाद बनाए रखें-यही प्रार्थना है। recent visitors 29

आज कौन मारेगा बाजी?, लखनऊ के आगे हमेशा फीकी पड़ी है मुंबई, आईपीएल 2025 में दोनों टीमों की पहली भिड़ंत है

नई दिल्ली लखनऊ सुपर जाएंट्स वर्सेस मुंबई इंडियंस आईपीएल 2025 का 16वां मैच आज यानी शुक्रवार, 4 अप्रैल को लखनऊ के ईकाना स्टेडियम में खेला जाना है। फैंस की नजरें इस पर टिकी है कि एलएसजी वर्सेस एमआई मुकाबले में से कौन सी टीम जीतेगी। आईपीएल 2025 में यह दोनों टीमों की पहली भिड़ंत है, मगर अभी तक दोनों के बीच इस रंगारंग लीग में जितने भी मुकाबले खेले गए हैं उसमें लखनऊ हमेशा मुंबई पर भारी पड़ा है। ऐसे में एलएसजी के फैंस उम्मीद करेंगे कि उनकी इस रिकॉर्ड को और बेहतर करेंगे। वहीं पिछला मैच जीतकर यहां पहुंची मुंबई की टीम अपने रिकॉर्ड को सुधारकर पॉइंट्स टेबल के टॉप-4 में अपनी जगह बनाना चाहेगी। लखनऊ सुपर जाएंट्स वर्सेस मुंबई इंडियंस हेड टू हेड लखनऊ सुपर जाएंट्स और मुंबई इंडियंस के बीच आईपीएल में अभी तक कुल 6 ही मुकाबले खेले गए हैं। हैरानी की बात यह है कि 5 बार की चैंपियन एमआई को एलएसजी ने इस दौरान 5 बार मात दी है। जी हां, मुंबई ने लखनऊ के खिलाफ एकमात्र मैच 2023 में जीता था। वहीं पिछले तीन मुकाबलों में एलएसजी ने एमआई के खिलाफ जीत की हैट्रिक लगाई है। एलएसजी और एमआई का क्या है पॉइंट्स टेबल में हाल मुंबई इंडियंस ने अपने पिछले मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ जीत का खाता खोला। वह सीजन की पहली जीत के साथ आईपीएल 2025 पॉइंट्स टेबल में 6ठे पायदान पर है। अगर आज एमआई जीतती है तो उनका पांचवे पायदान पर आना तो तय है क्योंकि उनके ऊपर मौजूद केकेआर का नेट रनरेट मुंबई से कम है। अगर एमआई बड़ी जीत दर्ज करती है तो वह टॉप-4 में भी अपनी जगह बना सकती है। वहीं पिछला मैच हारने के बाद ऋषभ पंत की अगुवाई वाली लखनऊ सुपर जाएंट्स 7वें पायदान पर है। एलएसजी आज जीत के साथ अपनी स्थिति में सुधार करना चाहेगी। recent visitors 34

बीएसईबी बिहार बोर्ड 10वीं कंपार्टमेंट परीक्षा 2025 पंजीकरण प्रक्रिया शुरू

पटना बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, बिहार बोर्ड मैट्रिक कंपार्टमेंट परीक्षा 2025 और बीएसईबी 10वीं विशेष परीक्षा 2025 के लिए पंजीकरण आज, 4 अप्रैल से शुरू कर देगा। जो छात्र एक या एक से अधिक विषयों में अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे बिहार बोर्ड मैट्रिक परिणाम 2025 की स्कूटनी के लिए आधिकारिक वेबसाइट (matricbsebscrutiny.com) पर 120 रुपये प्रति विषय का भुगतान करके आवेदन कर सकते हैं। कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने 10वीं कंपार्टमेंट परीक्षा 2025 और मैट्रिक विशेष परीक्षा 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक छात्र इन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए अपने स्कूल प्रमुखों से संपर्क कर सकते हैं और आधिकारिक वेबसाइट (secondary.biharboardonline.com या biharboardonline.com) के माध्यम से आवेदन करने के लिए कह सकते हैं।   बीएसईबी 10वीं कंपार्टमेंट और विशेष परीक्षा 2025 में शामिल होने के लिए आवेदन करते समय सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 1,010 रुपये का शुल्क देना होगा, जबकि एससी, एसटी और ईबीसी वर्ग के छात्रों के लिए यह शुल्क 895 रुपये निर्धारित किया गया है।   फीस भुगतान में ना करें ये गलती ऑनलाइन भुगतान के बाद, छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे 24 घंटे के भीतर यह जांच लें कि उनके बैंक खाते से राशि डेबिट हुई है या नहीं। यदि राशि डेबिट हो जाती है, लेकिन समिति के खाते में जमा नहीं होती है, तो ऐसे में आवेदन को अपूर्ण माना जाएगा और वह स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए भुगतान की स्थिति की पुष्टि करना आवश्यक है। आवेदन कैसे करें? बिहार बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी के लिए आवेदन प्रक्रिया के निम्नलिखित चरण जारी किए हैं, जिनका पालन करके छात्र आवेदन कर सकते हैं:     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट matric.bsebscrutiny.com पर जाएं।     "स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें (वार्षिक माध्यमिक परीक्षा 2025)" लिंक पर क्लिक करें।     अब रोल कोड, रोल नंबर और जन्म तिथि दर्ज करें और रजिस्ट्रेशन के लिए पासवर्ड बनाएं।     यह पासवर्ड भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित कर लें।     लॉग इन करने के बाद स्कूटनी के लिए आवेदन पत्र स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा, जिसमें छात्र का विवरण और विषय अंकित होंगे।     जिस विषय में स्कूटनी करानी है, उस विषय के आगे दिए गए चेकबॉक्स को चिह्नित करें और आवेदन पूरा करें।   recent visitors 32

रेल यात्रियों का गायब मोबाइल फोन ढूंढ़ निकालेगा रेलवे सुरक्षा बल, दूरसंचार विभाग से मिलाया हाथ

रेल यात्रियों का गायब मोबाइल फोन ढूंढ़ निकालेगा रेलवे सुरक्षा बल, दूरसंचार विभाग से मिलाया हाथ रेल यात्रियों के गुम हो गए मोबाइल फोन को ढूंढ़ने के लिए दूरसंचार विभाग के सीईआईआर पोर्टल का उपयोग करेगा रेलवे सुरक्षा बल भोपाल रेल यात्रियों के खो गए या गायब मोबाइल फोन को ढूंढ़ निकालने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने दूरसंचार विभाग से हाथ मिलाया है। इसके तहत आरपीएफ ने दूरसंचार विभाग के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल के साथ सफल साझेदारी की है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) में एक पायलट प्रोग्राम की सफलता के बाद यह पहल की गई है। भारतीय रेल द्वारा इस पहल को पूरे भारत में लागू किए जाने के बाद करोड़ों रेल यात्रियों को फायदा मिलेगा। अपना गुम मोबाइल फोन प्राप्त करने के लिए यात्री इसकी रिपोर्टिंग रेल मदद या 139 डायल के जरिए कर सकते हैं। यदि यात्री एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहते, तो उन्हें सीईआईआर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराने का भी विकल्प मिलेगा। सीईआईआर पंजीकरण का विकल्प चुनने पर आरपीएफ की जोनल साइबर सेल शिकायत को सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज करेगी और आवश्यक विवरण दर्ज करने के बाद डिवाइस को ब्लॉक करेगी। अगर नई सिम के साथ खोए हुए फोन का पता चलता है, तो डिवाइस के उपयोगकर्ता को निकटतम आरपीएफ पोस्ट पर लौटाने की सलाह दी जाएगी। इसके बाद मोबाइल का असली उपयोगकर्ता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके अपना फोन वापस पा सकता है। अनुपालन न होने की स्थिति में रेलवे सुरक्षा बल एफआईआर दर्ज कर सकता है और मामला जिला पुलिस को भेजा जा सकता है। रिकवरी के बाद, शिकायतकर्ता सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से फोन को अनब्लॉक करने का अनुरोध कर सकता है, जिसमें जरूरत पड़ने पर आरपीएफ से सहायता मिलेगी। सीईआईआर पोर्टल के ट्रेनिंग कार्यक्रम की शुरुआत के मौके पर रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक श्री मनोज यादव ने कहा कि "दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर सीईआईआर पोर्टल को संचालित करने की आरपीएफ की साझेदारी रेलवे सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। डिजिटल तकनीक का उपयोग करके, हमारा लक्ष्य यात्रियों को उनके खोए या गायब हुए मोबाइल फोन को पुनर्प्राप्त करने के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी तंत्र प्रदान करना है। यह पहल हमारी क्षमताओं को मजबूत करती है और रेल यात्रियों के बीच अधिक विश्वास पैदा करती है। हम यात्री संपत्ति की सुरक्षा और रेल नेटवर्क पर सुरक्षित यात्रा के लिए प्रतिबद्ध हैं।" सीईआईआर पोर्टल, दूरसंचार विभाग द्वारा शुरू किया गया है। यह मोबाइल फोन को पुनर्प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो खोए या चोरी हुए उपकरणों को ब्लॉक करने, ट्रैक करने और प्रबंधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके जरिए आरपीएफ अब खोए/गायब हुए मोबाइल फोन को उनके आईएमईआई नंबर को ब्लॉक करके बेकार कर सकेगा, जिससे इन उपकरणों के अवैध कब्जे और पुनर्विक्रय को रोकने में मदद मिलेगी। यह पहल उन्नत ट्रैकिंग क्षमताओं के माध्यम से खोए हुए फोन की तेजी से रिकवरी को भी सुगम बनाएगी। आरपीएफ ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में यात्रियों की खो गई या गायब हुई संपत्ति को पुनर्प्राप्त करने के प्रयासों में सबसे आगे रहा है। आरपीएफ ने इसके लिए "ऑपरेशन अमानत" चला रखा है, जिसका एकमात्र उद्देश्य कीमती सामानों को उनके असली मालिकों तक पहुंचाना है। जनवरी 2024 से फरवरी 2025 के बीच आरपीएफ ने 84.03 करोड़ रुपये मूल्य की खोई या छूटी हुई वस्तुओं को पुनर्प्राप्त कर 1.15 लाख से अधिक यात्रियों को वापस किया। सीईआईआर को रेलवे सुरक्षा संचालन में शामिल करने से आरपीएफ के प्रयासों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे खोए हुए मोबाइल फोन अपने असली मालिकों तक पहुंच सकें। मई 2024 में, आरपीएफ ने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था ताकि सीईआईआर पोर्टल का सक्रिय उपयोग किया जा सके और आरपीएफ के लिए इसकी उपयोगिता का अध्ययन किया जा सके। इस प्रयोग से कई खोए हुए मोबाइल फोन की सफल रिकवरी हुई और मोबाइल चोरी में शामिल व्यक्तियों को पकड़ा गया। इस पहल को पूरे देश में विस्तारित करने के साथ, आरपीएफ को भरोसा है कि यह रेल यात्रियों के उपकरणों की तेज रिकवरी में मददगार साबित होगा।   recent visitors 14

आज से इंदौर से दिल्ली के लिए स्पेशल ट्रेन का संचालन होगा, इंदौर से पटना के लिए स्पेशल ट्रेन भी शुरू हुई

 इंदौर पश्चिम रेलवे ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर स्पेशल ट्रेन शुरू की है। इंदौर-पुणे स्पेशल ट्रेन के बाद गुरुवार को इंदौर से पटना के लिए स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। वहीं आज से इंदौर से दिल्ली के लिए स्पेशल ट्रेन का संचालन होगा। रेलवे ने महू-इंदौर-पटना के बीच गुरुवार से स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया है। यह ट्रेन 26 जून तक प्रति गुरुवार महू से और प्रति शुक्रवार पटना से रवाना होगी। महू-इंदौर-पटना एक्सप्रेस गुरुवार शाम 7.15 बजे इंदौर से रवाना हुई और शुक्रवार शाम 6.30 बजे पटना पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन पटना से शुक्रवार रात 8.20 बजे रवाना होगी और शनिवार रात 11.20 बजे इंदौर पहुंचेगी। ट्रेन दोनों दिशाओं में फतेहाबाद, उज्जैन, मक्सी, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पं. दीनदयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा और दानापुर स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन में सेकंड एसी, थर्ड एसी, थर्ड एसी इकोनामी, स्लीपर जनरल क्लास कोच रहेंगे। आज रवाना होगी दिल्ली स्पेशल ट्रेन इंदौर-हजरत निजामुद्दीन सुपरफास्ट स्पेशल का संचालन शुक्रवार और रविवार को इंदौर से शाम पांच बजे किया जाएगा। शुक्रवार से यह ट्रेन 29 जून तक संचालित होगी। शुक्रवार को शाम पांच बजे रवाना होकर शनिवार सुबह 5 बजे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में यह स्पेशल ट्रेन हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से प्रति शनिवार और सोमवार को सुबह 8.20 बजे रवाना होकर रात नौ बजे इंदौर पहुंचेगी। ट्रेन दोनों दिशाओं में देवास, उज्जैन, नागदा, शामगढ़, रामगंज मंडी, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर और मथुरा स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन में सेकंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर और जनरल सेकंड क्लास कोच होंगे। recent visitors 33

नया पंबन पुल: राष्ट्र का गौरव – इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक

भोपाल ऐतिहासिक महत्व का एक अद्वितीय पुल भारत के दक्षिणी समुद्री किनारे पर, मुख्यभूमि को पवित्र रामेश्वरम द्वीप से जोड़ता नया पंबन पुल आज देश की आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है। यह पुल पुराने पंबन पुल (जो 100 वर्षों से अधिक समय तक सेवा में रहा) का स्थान ले रहा है और भारत की बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मंडपम रेलवे स्टेशन और रामेश्वरम द्वीप के बीच बना यह नया रेलवे समुद्री पुल केवल एक प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग क्षमताओं में भारत की एक बड़ी छलांग है। यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, जो तकनीकी उन्नयन, पर्यावरणीय अनुकूलता और वैश्विक कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह नवभारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। पंबन पुल की ऐतिहासिक विरासत 1914 में बने मूल पंबन पुल ने समुद्र के ऊपर 2.078 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए तमिलनाडु की मुख्यभूमि (मंडपम) को रामेश्वरम द्वीप से जोड़ा। इसका ‘Scherzer रोलिंग लिफ्ट स्पैन’ जलयानों को नीचे से गुजरने की अनुमति देता था और यह अपने समय से काफी आगे की तकनीक थी। यह पुल रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं की जीवनरेखा था। नया पुल क्यों जरूरी था? 100 वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद, पुराना पुल जंग और संरचनात्मक क्षरण के कारण जर्जर होने लगा था। साथ ही इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियाँ — जैसे कि भूकंपीय गतिविधियाँ, चक्रवाती तूफान और खारे समुद्री वातावरण — ने एक ऐसे आधुनिक पुल की आवश्यकता को जन्म दिया जो इन सभी स्थितियों का सामना कर सके। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को इस ऐतिहासिक कार्य को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई और उसने इस सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। RVNL की भूमिका RVNL ने इस परियोजना को केवल एक निर्माण परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मानक स्थापित करने वाले इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में देखा। हमारी टीम ने नवीनतम तकनीकों, पर्यावरणीय संतुलन और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण तरीकों के साथ काम किया। पुल को मौजूदा पुल के पास ही बनाया गया, इस दौरान समुद्री और रेल यातायात को निर्बाध रूप से चालू रखा गया। निर्माण की चुनौतियाँ पाक जलडमरूमध्य की तेज हवाएँ, तूफानी मौसम और ज्वार-भाटा ने निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। भारी निर्माण सामग्री को इस दूरस्थ क्षेत्र तक पहुँचाना, और सीमित समय में कार्य संपन्न करना एक बड़ा कार्य था। फिर भी, 1400 टन से अधिक स्टील निर्माण, 99 गर्डर, लिफ्ट स्पैन और समुद्र के भीतर विद्युतीकरण जैसे कार्य पूरी तरह दुर्घटनारहित तरीके से पूरे किए गए — यह RVNL की सुरक्षा और गुणवत्ता प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सहयोग और टीमवर्क यह परियोजना रेल मंत्रालय, दक्षिण रेलवे, तमिलनाडु सरकार और देश के विभिन्न ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं व सलाहकारों के सहयोग से संभव हो पाई। खास बात यह है कि इस पुल का निर्माण पूरी तरह भारतीय ठेकेदारों द्वारा किया गया — जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुल की प्रमुख विशेषताएँ वर्टिकल लिफ्ट तंत्र: पुल का सबसे विशेष फीचर इसका 72 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जो 22 मीटर ऊपर उठता है, जिससे बड़े जहाज़ आसानी से निकल सकते हैं। तेज़ रफ्तार क्षमता: पुराने पुल पर ट्रेनें केवल 10 किमी/घंटा की गति से चलती थीं, जबकि नया पुल 160 किमी/घंटा तक की क्षमता वाला है (फिलहाल 98 किमी/घंटा तक)। अधिक भार वहन क्षमता: 25 टन एक्सल लोड के अनुसार डिजाइन किया गया है, जिससे माल और यात्रियों की आवाजाही में बढ़ोतरी होगी। जंगरोधी निर्माण: समुद्री वातावरण के प्रभाव से बचाव हेतु उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील, मोटे सदस्य और पॉलीसिलॉक्सेन पेंटिंग का उपयोग किया गया है, जिससे पुल की सेवा आयु न्यूनतम 35 वर्ष हो गई है। भूकंप और चक्रवात प्रतिरोधक: पुल को भूकंपीय और चक्रवाती परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूती से डिजाइन किया गया है। रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: वायु गति, संरचना की स्थिति, और ट्रेनों की निगरानी हेतु स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं। विद्युतीकृत दोहरी पटरियों की व्यवस्था: भविष्य में दोहरी लाइन की सुविधा और ट्रैक्शन सिस्टम पहले से मौजूद है। सामाजिक और आर्थिक प्रभाव रोजगार सृजन: निर्माण के दौरान और बाद में पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा: रामनाथस्वामी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब यात्रा ज्यादा सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक हो गई है। पर्यटन में वृद्धि: इसका दृश्यात्मक सौंदर्य, तकनीकी आकर्षण और रामसेतु जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। आर्थिक सुधार: सामानों की आवाजाही में तेजी से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। एक हरित और सतत परियोजना निर्माण के दौरान पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। इको-फ्रेंडली सामग्री, ऊर्जा कुशल लाइटिंग और निगरानी प्रणाली जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया जिससे यह परियोजना भविष्य के लिए भी टिकाऊ बनी रहे। वैश्विक तुलना नया पंबन पुल भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट समुद्री रेलवे पुल है और यह विश्व की प्रतिष्ठित संरचनाओं — जैसे कि गोल्डन गेट ब्रिज (अमेरिका), टॉवर ब्रिज (लंदन), और ओरेसुंड ब्रिज (डेनमार्क-स्वीडन) — की श्रेणी में स्थान पाता है। यह भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा का जीवंत उदाहरण है। निष्कर्ष: भविष्य की दिशा में एक कदम नया पंबन पुल केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत बनकर रहेगा। RVNL इसी भावना के साथ देशभर में ऐसी और परियोजनाएं लाने के लिए प्रतिबद्ध है।   recent visitors 29