Friday, July 10, 2026 12:41 pm

शहरों में सड़कों के किनारे पेशाब से लोग बाज नहीं आ रहे, शख्स मंत्रालय के बाहर ही सड़क पर पेशाब करता दिख रहा

नई दिल्ली गांवों में जिस तरह खुले में शौच की समस्या अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है उसी तरह शहरों में सड़कों के किनारे पेशाब से लोग बाज नहीं आ रहे। देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अलग नहीं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स मंत्रालय के बाहर ही सड़क पर पेशाब करता दिख रहा है। लोग इस वीडियो को शेयर कर सिविक सेंस की याद दिला रहे हैं। 6 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक सफेंद पैंट शर्ट पहना एक शख्स फुटपाथ पर पेशाब करता दिख रहा है। उसके सामने 'पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय' लिखा है। लोदी रोड स्थित इस मंत्रालय के बाहर किसी कार चालक ने फुटपाथ पर पेशाब करते शख्स को टोका। वह वीडियो बनाते हुए कहता है, 'अरे चाचा, वो मूत्रालय नहीं मंत्रालय लिखा है।' देसी मोजितो नाम के एक्स हैंडल पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा गया, 'कोई सिविक सेंस नहीं है और फिर वो सरकार को दोष देंगे। जो लोग कह रहे हैं कि सरकार को और ज्यादा पब्लिक टॉयलेट बनाना चाहिए उन्हें बता दूं कि दीवार के आगे ही पब्लिक टॉयलेट मौजूद है।' वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग तरह-तरह के कॉमेंट कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इस पर मीम भी बना डाले तो कुछ ने इसे गंभीर समस्या बताते हुए सड़कों पर और शौचालय बनाने की मांग की। वहीं, कुछ ने इसे लोगों की आदत का मामला बताया। recent visitors 22

मंत्री सिलावट ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत केरवा डैम के समीप किया श्रमदान

जल की बूंद-बूंद का संरक्षण करें : मंत्री सिलावट मंत्री तुलसी राम सिलावट ने 'जल गंगा संवर्धन' अभियान के अंतर्गत केरवा डैम के समीप श्रमदान किया मंत्री सिलावट ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत केरवा डैम के समीप किया श्रमदान भोपाल जल संसाधन विभाग मंत्री तुलसी राम सिलावट ने बुधवार को 'जल गंगा संवर्धन' अभियान के अंतर्गत केरवा डैम के समीप श्रमदान किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी नागरिकों से जल की एक-एक बूंद को संरक्षित करने का आह्वान किया। मंत्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प को पूरा करने और नदियों एवं तालाबों के संवर्धन के लिए प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून तक 'जल गंगा संवर्धन' अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में जल स्रोतों के संरक्षण, जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य व्यापक पैमाने पर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सभी अपनी सक्रिय भागीदारी से सफल बनाएं। केरवा डैम, भोपाल के समीप जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजित किए गए श्रमदान कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक विष्णु खत्री, तीरथ मीणा, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद राजपूत, सरपंच श्रीमती मीरा तोमर, पर्यावरण विद अभिलाष खांडेकर, विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने अधिकारियों को जल स्रोतों के सौंदर्यीकरण और गहरीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संसाधन विभाग के तालाबों पर हर प्रकार के अतिक्रमण को तत्काल हटाने के भी सख्त निर्देश दिए। सिलावट ने कहा कि जल संकट का समाधान जल गंगा संवर्धन अभियान में निहित है। उन्होंने झाबुआ जिले की प्रसिद्ध हलमा प्रथा से प्रेरणा लेते हुए सभी से अपने जीवन में कम से कम 1 घंटा श्रमदान करने का आग्रह किया। मंत्री सिलावट ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान के संकल्प को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध नदी जोड़ो परियोजनाओं के माध्यम से पूरा किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सिलावट ने मध्य प्रदेश में अगले पांच वर्षों में सिंचाई रकबे को 65 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने के लक्ष्य की भी बात कही। मंत्री सिलावट ने वहां उपस्थित सभी लोगों को जल संसाधनों की रक्षा और संरक्षण करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि यह अभियान हम सभी का है और इसकी सफलता की नींव प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी पर टिकी हुई है।   recent visitors 16

राज्य में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, सुपोषण और कुपोषण उन्मूलन के उद्देश्य से 8 से 22 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन

रायपुर राज्य में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, सुपोषण और कुपोषण उन्मूलन के उद्देश्य से 8 से 22 अप्रैल 2025 तक पोषण पखवाड़ा का व्यापक रूप से आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार सभी विभाग प्रमुखों को महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय करते हुए इस अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है।     पोषण पखवाड़ा की शुरुआत 8 अप्रैल को साइकिल और बाइक रैली तथा पोषण रथ के माध्यम से की गई, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को कुपोषण से मुक्ति की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जनसमुदाय की भागीदारी से विभिन्न तिथियों पर खास गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।     महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों  ने बताया कि इस दौरान जीवन के पहले 1000 सुनहरे दिनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसमें गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को पोषण, स्तनपान और पूरक आहार की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से माताओं की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की गई है।     पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत बच्चों में कुपोषण प्रबंधन, मोटापे की रोकथाम, संतुलित आहार की महत्ता, जंक फूड के दुष्प्रभाव और स्वच्छता के महत्व पर भी जागरूकता फैलाई जा रही है। ‘हमर स्वस्थ लईका‘ अभियान के तहत आंगनबाड़ी के बच्चों की पोषण स्थिति का आकलन किया जा रहा है।     इसके अलावा, किशोरी बालिकाओं और माताओं में एनीमिया जागरूकता अभियान के अंतर्गत हीमोग्लोबिन जांच की जा रही है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्लास्टिक उपयोग में कटौती का संदेश भी दिया जा रहा है।     सभी गतिविधियों को ‘जन आंदोलन डैशबोर्ड‘ पर दर्ज किया जा रहा है, ताकि प्रयासों की मॉनिटरिंग और मूल्यांकन संभव हो सके। पोषण पखवाड़ा राज्य के नागरिकों को सुपोषित और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आ रहा है, जिसमें जनभागीदारी और विभागीय समन्वय की विशेष भूमिका है। recent visitors 23

यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में वैश्विक क्षितिज पर उभर रहा है। यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल सफल रिट्रीट भोपाल में एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ऑल इंडिया काउंसिल मीट-2025 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने एसोसिएशन के सभी प्रतिनिधियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं एवं श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों प्रतिनिधियों को सम्मानित किया अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते है उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को आशा और संभावनाओं की दृष्टि से देख रही है। भारत वह राष्ट्र है जो विश्व में शांति स्थापित करने की सामर्थ्य रखता है। आज का भारत अपने निर्णय अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं, बल्कि वैश्विक हित में लेता है। हमारी सेनाएं पूरी मजबूती के साथ खड़ी हैं। अब वह समय नहीं जब हम ज़मीन पर विजय के बाद टेबल पर हार जायें, अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भारतीय सेना के साथ जुड़कर कार्य करना गौरव और राष्ट्रसेवा का अवसर है। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। सैन्य क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता, अनुशासन और प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और एसोसिएशन इन सभी मानकों पर खरा उतर रहा है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। भविष्य में हथियार भी भारतीय होंगे उन्हें चलाने वाले भी स्वदेशी होंगे। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य भारतीय सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर भारत माता की सेवा कर रहे हैं, यह अत्यंत गर्व की बात है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 80 जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारी, बिल्डर्स, सैन्य क्षेत्र से जुड़े अधिकारी एवं प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।   recent visitors 26

हाउस ऑफ पुचका रायपुर की संस्थापक ईशा पटेल ने पीएम मोदी को बताई अपनी बिजनेस जर्नी

रायपुर पीएम नरेंद्र मोदी ने रायपुर की युवा उद्यमी से बातचीत की है। इसका वीडियो सीएम विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  X पर पोस्ट किया है। सीएम ने लिखा कि आसमान की कोई सीमा नहीं होती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी रायपुर की एक युवा उद्यमी और हाउस ऑफ पुचका की संस्थापक से बातचीत की। इन्होंने घर पर खाना पकाने से लेकर एक सफल कैफे व्यवसाय स्थापित करने तक की अपनी प्रेरक यात्रा साझा की। ईशा का रायपुर में गोलगप्पे (गुपचुप) का कैफे है। हाउस ऑफ पुचका नाम का ये स्टार्टअप हाल ही में ईशा ने शुरू किया है। बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन कर चुकीं ईशा मुंबई की एक कंपनी में 6 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर काम कर रही थीं। कॉर्पोरेट कंपनी में काम से उब चुकीं 23 साल की ईशा ने, अपना बिजनेस शुरू करने का सोचा। दोस्तों और परिवार के लोगों से मिले सपोर्ट के बाद उन्होंने इसे शुरू किया। 6 लाख रुपए का मुद्रा लोन लिया। फंडिंग एजेंसियों ने शुरू में नहीं जताया भरोसा ईशा बताती हैं जब मैंने फंडिंग के बारे सोचा तो लोन चाहिए था। तब मेरी उम्र 22 थी, इस उम्र में बैंक लोन दें और ये पैसे कैसे वापस बैंक को हम लौटाएंगे, इसे लेकर फंडिंग एजेंसी भरोसा नहीं जता पा रही थीं। ऐसे में मैंने रिसर्च किया तो सरकारी योजना के बारे पता चला और हमें मदद मिली। हर महीने की 50 हजार की सैलरी छोड़ना रिस्क था PM नरेंद्र मोदी ने ईशा से मुलाकात में कहा कि आपने इतना रिस्क लिया। आपके दोस्त इसपर क्या सोचते हैं, ईशा ने जवाब में बताया कि प्रॉपर रिसर्च के साथ काम करें तो रिजल्ट मिलते हैं। दैनिक भास्कर से चर्चा में ईशा ने कहा कि अच्छी सैलरी छोड़ कर आना रिस्क तो था ही मगर काम करने के दौरान कुछ सेविंग की और कैफे बिजनेस के बारे में लगातार दोस्तों से बात की। स्टडी किया तो समझ आया कि कैसे प्रॉफिट जनरेट किया जाए। इसके बाद काम शुरू किया, आज रिस्पॉन्स अच्छा है। अहमदाबाद से ली मशीन ईशा ने बताया कि हम 5 तरह के चटपटे पानी के साथ गोलगप्पे सर्व करते हैं। कोलकाता वाला पानी खूब पसंद किया जाता है। इसलिए हमनें अपने स्टार्टअप का नाम हाउस ऑफ पुचकास रखा। इसके लिए हमनें अहमदाबाद से मशीनें मंगवाई हैं, जो हाइजीन के साथ गोलगप्पे तैयार करती है। ईशा ने बताया कि उनका परिवार रायपुर के खमतराई में रहता है। पिता नवीन पटेल बिजनेसमैन और मां रश्मि होममेकर हैं। PM Mudra Yojana: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंटरप्रेन्योर ईशा पटेल की बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। पीएम मोदी (PM Narendra Modi) और हाउस ऑफ पुचका की संस्थापक ईशा पटेल के बीच बातचीत इस प्रकार है… लाभार्थी ईशा पटेल– सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते हैं। मुसीबतें होंगी और मुश्किलें भी आएंगी, जो संघर्ष करेगा, वही सफलता पाएगा। ईशा पटेल– I am the founder of हाउस ऑफ़पुचका. घर पर खाना-वाना बनाते थे तो हाथों में टेस्ट अच्छा था, तो सबने सजेस्ट किया कि आप कैफे फील्ड में जाओ। फिर उसमें रिसर्च करके पता चला कि प्रॉफिट मार्जिन वगैरा भी अच्छा है, तो फूड कॉस्ट वगैरा मैनेज करेंगे, तो आप एक सक्सेसफुल बिजनेस रन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी– एक यूथ, एक जनरेशन है, कुछ पढ़ाई की तो उनको लगता है कि नहीं-नहीं मैं तो कहीं नौकरी करके सेटल हो जाऊंगा, रिस्क नहीं लूंगा। आप में रिस्क टेकिंग कैपेसिटी है। ईशा पटेल– जी। प्रधानमंत्री मोदी– तो आपके रायपुर के भी दोस्त होंगे और corporate वर्ल्ड के दोस्त होंगे, स्टूडेंट दोस्त भी होंगे। उन सब में इसकी क्या चर्चा है? क्या सवाल पूछते हैं? उनको क्या लगता है? ऐसा कर सकते हैं? करना चाहिए, उनको भी आगे आने का मन करता है? ईशा पटेल– सर, मैं जैसे कि अभी मेरी ऐज 23 ईयर्स है, तो मेरे पास अभी रिस्क टेकिंग एबिलिटी भी है, और टाइम भी है, तो यही समय होता है, मैं ना यूथ को लगता है कि हमारे पास फंडिंग नहीं है, बट वह गवर्नमेंट स्कीम्स के बारे में अवेयर नहीं है, तो मैं अपनी साइड से यहीं उन्हें सजेशन देना चाहूंगी, आप थोड़ा रिसर्च करो, जैसे मुद्रा लोन भी है, वैसे पीएम ईजीपी लोन भी है, कई लोन जो आपको विदाउट mortgage मिल रहे हैं, तो अगर आप में पोटेंशियल है तो आप जब ड्रॉप करो, क्योंकि sky has no limits for you, तो आप बिजनेस करिए और जितना चाहे उतना grow कर सकते हैं। PM मोदी ने किया स्टार्टअप के लिए इंस्पायर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुद्रा योजना के 10 साल पूरे होने पर ये मिट-अप किया। प्रधानमंत्री ने यूथ को स्टार्टअप के लिए इंस्पायर करते हुए बताया कि मुद्रा लोन से वो ये काम कर सकते हैं। शुरुआत में 50,000 रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक के लोन का दायरा था। अब इसे बढ़ाकर अब 20 लाख रुपए कर दिया गया है। इस योजना के तहत 52 करोड़ का लोन अब तक दिया गया है। आप भी ले सकते हैं लोन और शुरू करें स्टार्टअप 2015 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर छोटे कारोबार को बिना किसी जमानत के लोन मुहैया कराना है। इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन ले सकता है।     इस योजना की सबसे अच्छी बात ये है कि इसके तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है। इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है।     लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी जरूरत पर आने वाले खर्चों का पेमेंट उससे कर सकता है।     ये लोन वाणिज्यिक (कमर्शियल) बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे फाइनेंस बैंकों, सहकारी बैंकों, माइक्रो-फाइनेंस संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में आवेदन देकर पाया जा सकता है। recent visitors 35

दुनिया की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों (अमेरिका और चीन) के बीच व्यापार युद्ध गहरा गया, पूरी दुनिया पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मुख्य व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी चीन पर 104 फीसदी का जवाबी शुल्क लगा दिया है। इससे दुनिया की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों (अमेरिका और चीन) के बीच व्यापार युद्ध गहरा गया है। ट्रंप प्रशासन की नई शुल्क दरें बुधवार (9 अप्रैल) मध्यरात्रि से ही लागू हो चुकी हैं। ट्रंप ने इससे पहले 2 अप्रैल को रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की थी, जिसके जरिए चीन पर तब 34 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स लगाया गया था। इस पर पलटवार करते हुए चीन ने भी अमेरिकी सामानों के आयात पर 34 फीसदी का टैक्स लगा दिया था। चीन के पलटवार के बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन से 24 घंटे के अंदर शुल्क हटाने को कहा था और ऐसा नहीं करने की स्थिति में चीनी वस्तुओं पर 50 फीसदी अतिरिक्त शुल्क और लगाने की धमकी दी थी। जब चीन अमेरिकी धमकी के आगे नहीं झुका तो मंगलवार तक दी गई मियाद खत्म होते ही ट्रंप प्रशासन ने चीन पर 50 फीसदी यानी कुल मिलाकर 104 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। चीन-अमेरिका व्यापार का क्या हिसाब-किताब? दोनों देशों के रुख से साफ हो गया कि कोई भी पक्ष नरमी बरतने के मूड में नहीं है और दोनों ही देश अंत तक व्यापार युद्ध लड़ने को तैयार हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दो आर्थिक महाशक्तियों की आपसी लड़ाई की पूरी दुनिया पर क्या असर पड़ेगा। इसका अर्थ इन दोनों देशों के व्यापार आंकड़े में छिपा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दोनों आर्थिक दिग्गजों ने करीब 585 अरब डॉलर मूल्य के सामान का व्यापार किया था। इनमें से अमेरिका ने चीन से 440 अरब डॉलर मूल्य के सामान आयात किए, जबकि एशियाई दिग्गज ने 145 अरब डॉलर मूल्य के यूएस उत्पाद आयात किए। यानी अमेरिका का व्यापार असंतुलन 295 अरब डॉलर का रहा है, जिसे वह टैरिफ लगाकर पाटने की कोशिशों में जुटा है। क्या-क्या हो जाएगा महंगा? चीन ने अमेरिका से सबसे ज्यादा सोयाबीन आयात किया है। इसे 4.40 करोड़ सुअरों के खिलाने के लिए मंगवाया है। इसके बाद बड़ी मात्रा में अमेरिका से फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद मंगवाए हैं, जबकि अमेरिका चीन से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर और खिलौने आयात करता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारों के लिए बैटरी भी चीन से ही निर्यात किया जाता है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन से अमेरिका में होने वाले आयात में सबसे बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन का है, जो कुल आयात का 9 फीसदी है। इन स्मार्टफोन्स का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी एप्पल के लिए चीन में बनाया जाता है। अब ट्रंप के 104 फीसदी के जवाबी शुल्क से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में इन सामानों की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है और इसका बोझ कहीं न कहीं अमेरिका जनता की जेब पर ही पड़ने वाला है। हालांकि, इस प्रतिशोध में अमेरिका से आयातित सामान की कीमतें भी चीन में बढ़नी तय हैं, जिसका बोझ चीनियों को उठाना पड़ेगा। इस जंग का पूरी दुनिया पर क्या असर? इस व्यापार युद्ध का पहला असर तो दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखने लगा है। बुधवार को चीन का ब्लू-चिप सीएसआई300 इंडेक्स 1.2 प्रतिशत नीचे खुला, जबकि शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 1.1 प्रतिशत गिरा। भारतीय शेयर बाजार में भी बुधवार को गिरावट देखने को मिली है। बाजा विशेषज्ञ इस टैरिफ वार से ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आने और मंदी आने की आशंका जता रहे हैं। विशेषज्ञ चीन की जीडीपी में गिरावट की आशंका भी जता रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स और बीएनपी पारिबा के अनुसार, 54 फीसदी टैरिफ पर ही 2025 में चीन की जीडीपी में 2.4 फीसदी की गिरावट आ सकती है। बड़ी बात यह है कि कोविड महामारी और आर्थिक मंदी से पहले ही चीनी अर्थव्यवस्था डगमग हाल में है और अभी संभल ही रही थी, तभी अमेरिकी टैरिफ से एक बार फिर चीन का आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह भी है कि इस व्यापार युद्ध में चीन अकेली ऐसी अर्थव्यवस्था नहीं होगी जिसे संकट झेलना पड़ेगा। अमेरिका को तो भुगतान करना ही होगा, साथ में कई पड़ोसी वियतनाम, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन-अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 43% अमेरिका में चीनी माल के दाम में बढ़ोत्तरी की वजह से उसकी मांग घट सकती है। इसके फलस्वरूप चीनी सामान आस-पड़ोस के बाजारों पर कब्जा कर सकता है। इससे उन देशों में उत्पादन, रोजगार और बाजार प्रभावित हो सकता है। इससे कई देशों में मंदी आ सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह सकती है। वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फिति और मंदी का खतरा इसलिए भी गना हुआ है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यस्था में IMF के अनुसार अमेरिका और चीन की हिस्सेदारी करीब 43 फीसदी की है। recent visitors 26

भारत से यूरोप तक बनेगा सीधा रास्ता, अब इस प्रोजेक्ट पर तेजी लाने को लेकर पीएम मोदी की सऊदी अरब के नेताओं से होगी बात

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी अप्रैल के तीसरे सप्ताह में सऊदी अरब जा सकते हैं। अभी तारीखों पर अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन उनका दौरा करीब-करीब तय हो गया है। दो दिनों का उनका यह दौरा होगा, जिसमें वह सऊदी अरब के नेताओं के साथ कारोबार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर बात करेंगे। इसके अलावा एक बड़ा एजेंडा IMEC यानी इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर भी होगा। इस पर जी-20 समिट के दौरान सहमति बनी थी और अब इस प्रोजेक्ट पर तेजी लाने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब के नेताओं से बात होगी। भारत से यूरोप तक बनने वाले रास्ते में सऊदी अरब भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो दुनिया का सबसे ताकतवर इस्लामिक मुल्क है। चार सालों के अंतराल के बाद पीएम नरेंद्र मोदी सऊदी अरब पहुंचने वाले हैं। दिल्ली में 2023 में जी-20 समिट का आयोजन हुआ था। इसी दौरान IMEC को लेकर सहमति बनी थी। यह कॉरिडोर भारत के लिए भू-राजनीतिक और आर्थिक तौर पर बेहद अहम है। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत से मिडल ईस्ट होते हुए यूरोप तक जो गलियारा जाएगा, उसमें रेल, रोड नेटवर्क शामिल होगा। इसके अलावा सड़क परिवहन भी शामिल रहेगा। पहले चरण में यह भारत से मध्य पूर्व तक होगा। इसके अलावा दूसरा हिस्सा मध्य पूर्व से यूरोप के बीच होगा। पहले पार्ट को पूर्वी कॉरिडोर कहा गया है, जो भारत के मुंबई से होते हुए मिडल ईस्ट तक जाएगा। फिर मिडल ईस्ट से सऊदी अरब तक के रास्ते को नॉदर्न कॉरिडोर कहा जाएगा। IMEC कॉरिडोर में इलेक्ट्रिसिटी केबल, हाइड्रोजन पाइपलाइन और हाईस्पीड डेटा केबल भी शामिल होंगे। इस कॉरिडोर में भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इटली, फ्रांस और जर्मनी शामिल होंगे। इसके अलावा यूरोपियन यूनियन भी इसका हिस्सा है। इस रूट पर भारत के तीन पोर्ट शामिल होंगे- गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह। इसके अलावा नवी मुंबई का जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट भी इसका हिस्सा होगा। फिर मध्य पूर्व देश फुजैराह, जेबेल अली और अबू धाबी बंदरगाह भी इसमें शामिल होंगे। सऊदी अरब के दम्मम और रास अल खैर भी इस कॉरिडोर का हिस्सा होंगे। दिलचस्प बात है कि रेलवे लाइन भी इस कॉरिडोर में होगी और इसका हिस्सा इजरायल भी होगा। रेलवे लाइन संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट से गुजरेगी। इसके अलावा इजरायल के हाइफा पोर्ट को भी रेलवे लाइन कनेक्ट करेगी। फिर सऊदी अरब और जॉर्डन भी इस रेल लाइन का हिस्सा होंगे। अब यूरोप की बात करें तो ग्रीस का पिराएस पोर्ट, साउथ इटली का मेसिना और फ्रांस का मार्सिले पोर्ट भी इसी रूट पर आएगा। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत से यूरोप तक सस्ता और सुगम सफऱ होगा। इसके अलावा मालवाहक जहाजों का सफऱ भी आसान होगा। खासतौर पर पाकिस्तान के भू-राजनीतिक महत्व को भी भारत कमतर कर पाएगा। इसके अलावा चीन के बेल्ट ऐंड रोड प्रोजेक्ट को भी यह गलियारा टक्कर दे सकेगा। खासतौर पर यूरेशिया क्षेत्र में चीन के बीआरआई को इससे टक्कर मिलेगी। अमेरिका भी इस परियोजना में खास दिलचस्पी है क्योंकि वह इसके माध्यम से एशिया से यूरोप तक चीन को टक्कर देने की कोशिश में है। recent visitors 33