7 साल में ऐसा क्या हुआ जो शॉ पूरी तरह से सीन से गायब ही हो गए?, जिसमें कभी अगला सचिन तेंदुलकर देखा गया

नई दिल्ली 2018 में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप दिलाने वाला कप्तान। अपने टेस्ट डेब्यू में ही वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंचुरी जड़कर इंटरनैशनल क्रिकेट में धमाका करने वाला बैटर। जिसे कभी भारतीय बल्लेबाजी का भविष्य कहा जाता था। जिसमें कभी अगला सचिन तेंदुलकर देखा गया। कुछ तो यहां तक कहते थे कि पृथ्वी शॉ में तो सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा और वीरेंदर सहवाग तीनों का अक्स दिखता है। 7 साल में ऐसा क्या हुआ जो शॉ पूरी तरह से सीन से गायब ही हो गए? मशहूर क्रिकेट एंकर तनय तिवारी भी ‘द राज शमानी पॉडकास्ट’ में शॉ को लेकर ऐसे ही हैरान, परेशान, निराश, हताश दिखे हैं। ये सवाल और ये सच सभी क्रिकेटप्रेमियों को सालते हैं। उसकी कप्तानी में अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने वाले शुभमन गिल, रियान पराग, अर्शदीप सिंह जैसे खिलाड़ी कहां से कहां पहुंच गए, लेकिन पृथ्वी शॉ गुमनामी के अंधेरों में खो गए। उसकी अर्श से फर्श की कहानी क्रिकेटप्रेमियों को टीस देती है। आखिर उसके साथ हुआ क्या? क्या ऐसे भी किसी का पतन हो सकता है? शॉ सचिन तेंदुलकर तो दूर, उनका लेश मात्र तक न बन पाए। कम से कम अभी तक तो यही हकीकत है। हां, उनकी कहानी बहुत हद तक सचिन के बालसखा विनोद कांबली की याद दिलाई है, जिन्हें कभी 'क्रिकेट के भगवान' से भी खतरनाक बल्लेबाज माना गया था। पृथ्वी शॉ का यह हश्र क्यों? तनय तिवारी 'द राज शमानी पॉडकास्ट' में कहते हैं, 'उस वर्ल्ड कप (अंडर-19 WC 2018) और अब के बीच में कहीं वह ट्रैक से उतर गए। मैं नहीं जानता कि कहां और क्या। मैं उन्हें जानने का दावा नहीं करता, लेकिन वह फिसल चुके हैं, गिर चुके हैं। शरीर संकेत देना शुरू कर चुकी है- वह उतना फिट नहीं हैं, जितना थे।' तिवारी आगे कहते हैं, 'उसने उन तीनों (शुभमन गिल, रियान पराग, अर्शदीप सिंह) से पहले डेब्यू किया। डेब्यू में ही शतक जड़ा। उसके पास जिस तरह का टैलेंट था उसे देखकर शुभमन गिल, अर्शदीप सिंह और रियान पराग कहते थे- देख यार, कितना आगे निकल गया।' शॉ की कहानी बहुत हद तक विनोद कांबली जैसे है लेकिन एक अंतर है। अभी शॉ की उम्र ही क्या है? 25 वर्ष में तो कई खिलाड़ी डेब्यू तक नहीं कर पाते हैं। अब भी समय है उनके ट्रैक पर लौटने का और कमबैक का। तनय तिवारी ने कहा, 'उनमें (शॉ और कांबली) बहुत समानता है। मैं उम्मीद करता हूं कि उनकी राह पर और आगे न बढ़े। मुझे उसके कमबैक का उम्मीद है।' recent visitors 36

50 रन से अधिक के अंतर से जीत हासिल करते हैं तो आपके गेंदबाजों ने रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया: पार्थिव पटेल

नई दिल्ली गुजरात टाइटंस के सहायक कोच पार्थिव पटेल ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के लिए टीम के गेंदबाजों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने बल्लेबाजी के लिए अनुकूल विकेट पर अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया। साई सुदर्शन (53 गेंदों में 82 रन) ने शानदार अर्धशतक लगाया, इसके बाद सभी गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन करके गुजरात टाइटंस को 58 रन से जीत दिलाई। गुजरात के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने 24 रन देकर तीन विकेट लिए तो राशिद खान और साई किशोर ने दो-दो विकेट लेकर राजस्थान को 159 रन पर आउट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्थिव ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘जब आप इस तरह के विकेट पर 50 रन से अधिक के अंतर से जीत हासिल करते हैं तो इसका मतलब होता है कि आपके गेंदबाजों ने रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया। मोहम्मद सिराज ने वास्तव में अच्छी गेंदबाजी की। प्रसिद्ध कृष्णा टूर्नामेंट में शुरू से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। साई किशोर शायद अभी तक टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ स्पिनर है। हमारे सभी गेंदबाजों ने गेंदबाजी के लिए मुश्किल परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया।’’ पार्थिव ने कहा, ‘‘यह देखकर अच्छा लग रहा है कि प्रत्येक मैच में कोई गेंदबाज आगे बढ़कर लीड कर रहा है। निश्चित तौर पर बल्लेबाजों ने जीत की नींव रखी लेकिन वास्तव में गेंदबाज आपको मैच जिताते हैं।’’ उन्होंने कहा,‘‘हमारी टीम में किसी को कोई खास भूमिका नहीं सौंपी गई है। एक टीम के रूप में हमारा रवैया बेहद सरल है। हम परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करते हैं।’’ राजस्थान रॉयल्स के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने कहा कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता था लेकिन उनकी टीम अच्छी साझेदारी निभाने में नाकाम रही। बहुतुले ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता था। यह बल्लेबाजी के लिए बहुत अच्छा विकेट था। ईमानदारी से कहूं तो 200 रन बराबरी का स्कोर था। मुझे लगता है कि हमने 20 रन अधिक दिए लेकिन उन्होंने अच्छी बल्लेबाजी की। सुदर्शन में शानदार बल्लेबाजी की और उन्होंने पावर प्ले का अच्छा उपयोग किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनके बल्लेबाजों ने हमारी तुलना में अच्छी साझेदारियां निभाई। यही कारण था कि उन्होंने बड़ा स्कोर खड़ा किया लेकिन मेरा मानना है कि अगर हमने अच्छी साझेदारियां निभाई होती तो हम लक्ष्य के काफी करीब पहुंच सकते थे।’’ recent visitors 34

26/11 हमला: प्रत्यर्पित तहव्वुर राणा दिल्ली लाया गया, प्रत्यर्पण पर इजरायली राजदूत ने भारत सरकार को शुक्रिया कहा

नई दिल्ली  26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा दिल्ली पहुंच चुका है। तहव्वुर राणा को अमेरिका से एनआईए की 7 सदस्यीय टीम दिल्ली लेकर पहुंची है। दिल्ली एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह यहां पहुंचा। तहव्वुर राणा का मेडिकल कराया जाएगा और फिर एनआईए उसे कोर्ट में पेश करेगी। राणा को अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद तिहाड़ जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जा सकता है। तिहाड़ की हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि 64 साल का तहव्वुर राणा दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि आतंकवादी को रखने के लिए जेल में सभी आवश्यक तैयारियां पहले ही कर ली गई हैं। तहव्वुर राणा साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमेन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी है। राणा को लेकर एक विशेष चार्टर्ड विमान बुधवार (9 अप्रैल) को अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुआ था। 2008 के आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। NIA हेडक्वाटर में होगी पूछताछ तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रत्यर्पित किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में लिया जाएगा, जो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के साथ मिलकर उसके प्रत्यर्पण का कोर्डिनेशन कर रही है। संभावना है कि उसे जल्द ही दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जाएगा। किन किन धाराओं में आरोपी है राणा? राणा पर कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, हत्या, जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम शामिल हैं। हालांकि, मुंबई पुलिस को अभी तक उसके शहर में स्थानांतरण के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन माना जा रहा है कि उसे मुंबई ले जाने पर ऑर्थर रोड जेल के इस सेल में रखा जाएगा जहां आतंकी कसाब को रखा गया था। ट्रंप की हरी झंडी के बाद मिली कामयाबी डेविड कोलमेन हेडली का सहयोगी होने के अलावा, ऐसा माना जाता है कि राणा के पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ करीबी संबंध थे। राणा के प्रत्यर्पण की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान की थी। इसके बाद राणा ने सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण को रोकने की कोशिश की, लेकिन अब उसकी सभी कानूनी अपीलों को खारिज कर दिया गया है। भारत ने रचा ऐसा चक्रव्यूह कि शिकंजे में आ गया राणा  ……. 26/11 के मुंबई हमलों के वांछित और साजिशकर्ता तहव्वुर राणा भारत प्रत्यर्पित हो चुका है। यह काम इतना आसान और सहज नहीं था, लेकिन भारत ने इसे सच कर दिखाया। यह केंद्रीय एजेंसियों के सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यर्पणों में से एक है क्योंकि इसके लिए NIA अधिकारियों को कई बार अमेरिका के चक्कर लगाने पड़े और अमेरिकी सरकार को राणा को प्रत्यर्पित करने के लिए मनाना पड़ा। एक बार तो राणा को तब अमेरिकी जेल में रखने के लिए अमेरिकी सरकार को मनाना पड़ा , जब वह रिहा होने वाला था। इस दौरान भारतीय अधिकारियों ने ना केवल राणा के प्रत्यर्पण की गारंटी सुनिश्चित की बल्कि उसके खिलाफ सबूत भी जुटाए। गिरफ्तारी, दोबारा गिरफ्तारी, सजा, भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध 64 वर्षीय तहव्वुर हुसैन राणा, पाकिस्तान में जन्मा एक कनाडाई नागरिक है। उसे अमेरिकी अधिकारियों ने 18 अक्टूबर, 2009 को गिरफ्तार किया था। इससे दो हफ्ते पहले 3 अक्टूबर, 2009 को उसके बचपन के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली की गिरफ्तारी हो चुकी थी। भारत ने हेडली के लिए भी प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उसे देने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसने मुंबई हमलों और डेनमार्क में नाकाम साजिश से संबंधित कई मामलों सहित आतंकवाद से संबंधित 12 आरोपों में दोषी होने की बात स्वीकार की थी। चूंकि वह अमेरिकी जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने के लिए तैयार था, इसलिए हेडली के याचिका समझौते में गैर-प्रत्यर्पण प्रावधान शामिल था। दूसरी ओर, राणा पर अमेरिका में तीन मामलों में मुकदमा चलाया गया। इनमें भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश, डेनमार्क में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश और एक विदेशी आतंकवादी संगठन को सहायता प्रदान करना शामिल था। इस बीच, भारत ने तहव्वुर राणा को वांछित घोषित कर दिया था और 28 अगस्त, 2018 को उसके खिलाफ साजिश, युद्ध छेड़ने, हत्या करने, जालसाजी, आतंकवादी हमले के आरोपों पर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया। उधर, राणा के बचपन के दोस्त हेडली ने अमेरिकी अभियोजन पक्ष के सामने गवाही दी और यूएस जूरी ने 9 जून, 2011 को राणा को डेनमार्क से संबंधित आतंकवादी साजिश और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को भौतिक सहायता प्रदान करने का दोषी ठहरा दिया, लेकिन भारत से संबंधित आतंकवादी साजिश से उसे बरी कर दिया। 17 जनवरी, 2013 को अमेरिकी डिसेट्रिक कोर्ट ने उसे 168 महीने के कारावास की सजा सुनाई। 7 साल जेल में रहने के बाद, कोविड-19 महामारी के दौरान राणा की अनुकंपा रिहाई की याचिका भी मंजूर कर ली गई। इसी बीच, जब वह रिहा होने वाला था, तब भारत द्वारा प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया। इसके बाद राणा को 10 जून, 2020 को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। भारतीय वकील दयान कृष्णन ने की ‘निःशुल्क’ सहायता 2009 में 26/11 हमलों की जांच शुरू करने के बाद से, डेविड हेडली और तहव्वुर राणा की हिरासत पाने के लिए एनआईए अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई और न्याय विभाग के साथ नियमित संपर्क में था। NIA की एक टीम ने पहली बार 2010 में अमेरिका का दौरा किया और हेडली से पूछताछ की थी लेकिन उस समय राणा से पूछताछ नहीं की जा सकी थी। इसके बाद, 2018 में मामले में सबूत इकट्ठा करने के लिए एनआईए के अफसरों ने फिर यूएस का दौरा किया। इसके दो साल बाद राणा के प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू हुई। 2020 में राणा के प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू होने के बाद, NIA की टीमों ने मामले के दस्तावेजों, आरोपों आदि को समझाने में अमेरिकी अभियोजकों की सहायता के लिए कई बार दौरे किए। अमेरिका में राणा की पैरवी ब्रिटिश बैरिस्टर पॉल गार्लिक कर रहे थे, जबकि … Read more

योगेश शर्मा बने विप्र सेना के प्रदेश अध्यक्ष

सतना  बुधवार शाम विप्र सेना की आवश्यक बैठक गुप्ता पैलेस में संपन्न हुई,कार्यक्रम की अध्यक्षता सेना के मार्गदर्श श्री रावेंद्र तिवारी ने की सर्व प्रथम कार्यक्रम अध्यक्ष द्वारा भगवान परशुराम जी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर बैठक का शुभारम्भ किया गया बैठक का मुख्य उद्देश्य विप्र सेना का विस्तार करना रहा,सामाजिक कार्यक्रमो में अपनी भगीदारी सुनिश्चित करना समाज मे जागरूकता लाना का संकल्प लिया गया कार्यक्रम की अगली कड़ी में विप्र सेना के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से समाजसेवी योगेश शर्मा को अपना प्रदेश अध्यक्ष चुना,आगे कार्यक्रम में श्री शर्मा ने अपनी कार्यकारणी का भी गठन किया जिसमें अविन शर्मा संदीप भारती,शिव द्विवेदी एवं विकास मिश्रा प्रदेश उपाध्यक्ष बने।संदीप गर्ग,प्रणय धाराधर, लोकेश द्विवेदी शब्द,अभिषेक पांडेय को प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी मिली। डॉ.शैलेश पांडेय,सुनील मिश्रा गप्पी,उदित तिवारी,अभिषेक तिवारी को प्रदेश सहसचिव।दीपक मिश्रा प्रदेश कोषाध्यक्ष,रजनीश द्विवेदी प्रदेश प्रवक्ता एवं पंकज शुकुल को प्रदेश मीडिया की कमान सौंपी गई।संगठन ने नवनिर्वाचित सदस्यों से संगठन विस्तार हेतु विशेष मुहिम चलाने का निर्णय लिया है एवं आने वाले समय में प्रदेश कार्यकारणी के नेतृत्व में जिला मंडल और बूथ स्तर तक संगठन विस्तार की योजना बनाई है। बैठक में युवा साथियों ने भी अपने अपने विचार रखे। recent visitors 39

MP परिवहन विभाग ई बस, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को 26 मार्च 2027 तक देगा टैक्स में छूट, हाइब्रिड वाहनों पर लागू नहीं होगी यह छूट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च 2026 तक पंजीकृत होने वाले ई वाहनों पर मोटरयान कर में 100 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, 26 मार्च 2027 तक पंजीकृत होने वाले ई बस, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को भी मोटरयान कर में 100 प्रतिशत की छूट (EV registration tax exemption) दी जाएगी। किसी भी प्रकार के हाइब्रिड वाहनों पर यह छूट लागू नहीं होगी। परिवहन विभाग ने बुधवार को मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें दी गई छूट का लाभ अधिसूचना जारी होने की तिथि से मिलेगी। उल्लेखनीय है कि बुधवार को  'ईवी पालिसी लागू, फिर भी ईवी वाहन खरीदने पर नहीं मिल रहा वाहन पंजीयन में छूट का लाभ'  इसके बाद प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अधिकारियों से इस संबंध में बात कर अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए, जिसके बाद परिवहन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। एक साल के लिए टैक्स में दी गई छूट बता दें कि मध्य प्रदेश की इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025 (MP EV scheme 2025) के तहत प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण पर 100 प्रतिशत मोटरयान कर में छूट देने का प्रविधान किया है। दो पहिया, तीन पहिया और कार के लिए एक वर्ष तक मोटरयान कर में शत प्रतिशत की छूट का प्राविधान किया है। दो पहिया वाहनों पर पांच हजार, तीन पहिया पर 10 हजार और ई कार पर 25 हजार रुपये की छूट वाहन कर और पंजीयन शुल्क में एक वर्ष के लिए देने का प्रविधान है। 26 मार्च 2026 तक ई वाहन में छूट     दो पहिया – पंजीकृत वाहन पर मोटरयान कर में 100 प्रतिशत छूट।     तीन पहिया वाहन – पंजीकृत वाहन पर मोटरयान कर में 100 प्रतिशत छूट।     ई कार – 20 लाख रुपये तक मूल्य वाली कारों पर 100 प्रतिशत छूट।     ई हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी) – पंजीकृत वाहन पर 100 प्रतिशत छूट।     ई बस ( गैर सरकारी, स्कूल बस निजी बस आपरेटर) – पंजीकृत वाहनों पर 100 छूट।     ई बस ( मिनी मिडी स्टैंडर्ड एसी बस) – पंजीकृत वाहन पर 100 प्रतिशत छूट।     ई ट्रक – पंजीकृत वाहन पर 100 प्रतिशत छूट।     ई ट्रैक्टर – पंजीकृत वाहन पर 100 प्रतिशत छूट।     ई एंबुलेंस – पंजीकृत वाहन पर 100 प्रतिशत छूट। बैटरी स्वैपिंग पर वित्तीय सहायता ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए भी सरकार ने आकर्षक योजनाएं बनाई हैं। चार्जिंग स्टेशन लगाने वाले सेवा प्रदाताओं को भूमि और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। चार्जिंग स्टेशन के लिए सब्सिडी     छोटे चार्जिंग स्टेशन (500 तक): 30% पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम 1.5 लाख रुपए।     मध्यम चार्जिंग स्टेशन (300 तक): अधिकतम 3 लाख रुपए की सहायता।     बड़े चार्जिंग स्टेशन (200 तक): अधिकतम 10 लाख रुपए की सहायता।     इसके अलावा, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिए पहले 300 स्टेशनों को 5 लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। रेट्रोफिटिंग पर भी मिलेगा लाभ पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने (रेट्रोफिटिंग) के लिए भी सरकार एक साल तक आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।     दोपहिया वाहनों के लिए: 5 हजार रुपए प्रति वाहन     तीन पहिया वाहनों के लिए: 10 हजार रुपए प्रति वाहन     कार के लिए: 25 हजार रुपए प्रति वाहन इसके अलावा, बस-ट्रकों के लिए सहायता तभी मिलेगी जब रेट्रोफिटिंग को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया या इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से मान्यता प्राप्त हो। इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर विशेष छूट नई पॉलिसी के तहत, दो पहिया, तीन पहिया और 20 लाख रुपए तक की कार और छोटे व्यवसायिक वाहनों पर 100% टैक्स छूट दी जाएगी। यह छूट 27 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा, ई-बसों को भी दो साल तक मोटर वाहन कर और पंजीकरण शुल्क में छूट मिलेगी, साथ ही परिवहन विभाग द्वारा परमिट में भी छूट प्रदान की जाएगी।   recent visitors 19

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियों के गठन के निर्देश दिए गए

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। गृह विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं। यह नीति, नक्सल हिंसा में पीड़ित हुए व्यक्तियों एवं परिवारों जैसे कि मृत्यु, गंभीर घायल या स्थायी अपंगता के शिकार लोगों के साथ-साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और राहत के उद्देश्य से तैयार की गई है। जिला स्तर पर गठित की जाएगी पुनर्वास समिति अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक जिले में गठित होने वाली समिति में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे, जबकि पुलिस अधीक्षक को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत के सीईओ, कलेक्टर द्वारा नामांकित दो अन्य अधिकारी तथा सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त प्रत्येक जिले एवं सब-डिविजनल स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जिनका मोबाइल नंबर व ई-मेल पता राज्य शासन को प्रेषित किया जाएगा। यह अधिकारी समस्त पुनर्वास कार्यों की निगरानी करेंगे। गृह विभाग ने निर्देशित किया है कि राज्य गठन के उपरांत से अब तक के सभी पीड़ित प्रकरणों को चिन्हित किया जाए और आत्मसमर्पित नक्सलियों का चयन कर राहत एवं पुनर्वास की कार्यवाही प्राथमिकता पर की जाए। इस नीति के अंतर्गत एक विशेष पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पीड़ित एवं आत्मसमर्पित व्यक्ति की जानकारी दर्ज की जाएगी और उन्हें एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। संबंधित अधिकारी इस पोर्टल के डैशबोर्ड का नियमित रूप से अवलोकन कर राहत एवं पुनर्वास के कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे। गृह विभाग ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे इस नीति के अंतर्गत निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राहत एवं पुनर्वास की कार्यवाही को समय सीमा में प्रभावी रूप से पूरा करेंगे। recent visitors 33

विक्रम व्यापार मेले ने ग्वालियर मेले के सभी रिकॉर्ड तोड़े, शासन का भरा खजाना, मिले 175 करोड़

उज्जैन उज्जैन में महाशिवरात्रि से शुरू हुए विक्रम व्यापार मेले में इस साल 35 हजार गाड़ियां बिकीं, जिससे शासन को 175 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं, मेले से खरीदारी करने वाले ग्राहकों को भी इतनी ही राशि की छूट प्राप्त हुई। इस बार विक्रम व्यापार मेले ने ग्वालियर मेले के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए लोगों ने मेले में वाहनों की जमकर खरीदारी की। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ ) संतोष मालवीय ने बताया कि इस बार मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की है। पूरे प्रदेश से लोग मेले में गाड़ियां खरीदने पहुंचे, खासकर उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने बड़ी संख्या में गाड़ियां खरीदीं, जिन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप शासन से छूट भी प्राप्त हुई। आरटीओ संतोष मालवीय ने कहा कि पहले ही वर्ष हमने ग्वालियर मेले के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। इस बार भी ग्वालियर मेले की तुलना में अधिक गाड़ियों की बिक्री मेले में हुई है। इस बार बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी लग्जरी गाड़ियां भी अधिक बिकी हैं। लोगों ने वीआईपी नंबर भी खूब खरीदे हैं, एक नंबर की नीलामी 9 लाख रुपये में हुई। 64 दिन तक चला व्यापार मेला दरअसल, मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में विक्रम उत्सव के अंतर्गत विक्रम व्यापार मेला आयोजित किया गया। यह मेला पिछले वर्ष से शुरू हुआ है, इस बार इसका दूसरा साथ था। मेले के अंतिम दिन वाहन खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। 64 दिन तक चले मेले में 35,000 से अधिक वाहनों की बिक्री हुई। विक्रमोत्सव में बिके ये वाहन विक्रम मेले में बाइक, कार, प्राइवेट ओमनी बस और हल्के परिवहन वाहनों पर वर्ष 2024-25 के लिए परिवहन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी। कारों में मिल रही 50 फीसदी छूट के कारण उज्जैन समेत प्रदेश के अन्य जिलों से बड़ी संख्या में लोग यहां वाहन खरीदने पहुंचे। मेले में मर्सिडीज बेंज के साथ 10 बीएमडब्ल्यू कारें भी बिकीं हैं। पिछले साल का टूटा रिकॉर्ड जिला कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष 2024 में मेले में 22,000 वाहनों की बिक्री हुई थी। वहीं, इस बार  35,000 वाहन बिके हैं, यह एक रिकॉर्ड है। विक्रम मेले ने ग्वालियर मेले का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है।   recent visitors 17