हनुमान जयंती पर रिलीज हुआ फिल्म विश्वम्भरा का पहला गाना ‘राम राम’

मुंबई, मेगास्टार चिरंजीवी की आने वाली फिल्म विश्वम्भरा का पहला गाना 'राम राम' आज हनुमान जयंती के अवसर पर रिलीज हो गया है। फिल्म ‘विश्वम्भरा’, जिसे वशिष्ठ ने निर्देशित किया है, इस साल की सबसे बहुप्रतीक्षित पैन-इंडिया फिल्मों में से एक है। पहले ही इसके पोस्टर और टीज़र ने दर्शकों की अपेक्षाएं आसमान पर पहुंचा दी हैं। और अब, विक्रम, वामसी और प्रमोद द्वारा यूवी क्रिएशन्स के बैनर तले निर्मित यह फिल्म, अपने पहले गाने ‘राम राम’ के साथ संगीत प्रचार की शुरुआत कर रही है। हनुमान जयंती के अवसर पर, फिल्म का पहला सिंगल ‘राम राम’ रिलीज़ किया गया है,जो भगवान हनुमान की अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति और श्रद्धा को खूबसूरती से दर्शाता है। यह गाना एक आत्मा को छू लेने वाली महिला स्वर से शुरू होता है, जिसके बाद चिरंजीवी की प्रभावशाली आवाज में “जय श्री राम” की गूंज सुनाई देती है। यह भव्य गीत श्रीराम और सीता के कल्याणम उत्सव की पृष्ठभूमि में फिल्माया गया है।एक विशाल जनसमूह इस दिव्य उत्सव में भाग लेता है, और गाना भगवान राम और माता सीता के दिव्य गुणों और अनंत कृपा का गुणगान करता है।इस गाने को संगीत के जादूगर एमएम कीरवाणी ने स्वरबद्ध किया है।शंकर महादेवन और लिप्सिका ने इसे गाया है। फिल्म ‘विश्वम्भरा’, में मुख्य भूमिका में चिरंजीवी, त्रिशा कृष्णन, आशीका रंगनाथ और कुणाल कपूर है। इस फिल्म की दृश्य कथा को सिनेमैटोग्राफर छोटा के. नायडू ने खूबसूरती से कैमरे में कैद किया है, और इसकी भव्य दुनिया को कला निर्देशक ए.एस. प्रकाश ने सजीव किया है। संगीत एमएम कीरवाणी का और प्रोडक्शन डिज़ाइन ए.एस. प्रकाश का है।   recent visitors 45

रायपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 2 अंतर्राज्यीय तस्कर 20 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार

रायपुर रायपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना गंज क्षेत्र के नहरपारा रोड पर आत्मानंद स्कूल के पास 20 किलो 270 ग्राम गांजा जब्त किया. इस दौरान दो अंतर्राज्यीय तस्करों आकाश कुशवाहा (राजस्थान) और नीलेश मालवीय (मध्य प्रदेश) को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया. जब्त गांजे की कीमत 2,02,000 रुपये आंकी गई है. एण्टी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना गंज पुलिस की टीम ने मुखबिर की सूचना पर 11 अप्रैल को यह कार्रवाई की. पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर नशे के खिलाफ अभियान (War On Drugs) चलाया जा रहा है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले और संदीप मित्तल के नेतृत्व में टीम ने तस्करों को पकड़ा. आकाश कुशवाहा (26, राजस्थान) और नीलेश मालवीय (30, मध्य प्रदेश) के कब्जे से गांजा बरामद हुआ. आकाश पहले भी मारपीट और बलवा के मामले में जेल जा चुका है. दोनों के खिलाफ थाना गंज में अपराध क्रमांक 99/25, धारा 20बी नारकोटिक एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेजेस के आधार पर अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है. प्रभारी निरीक्षक यशवंत सिंह और एण्टी क्राइम यूनिट के परेश कुमार पाण्डेय सहित कई अधिकारियों की इस कार्रवाई में अहम भूमिका रही. recent visitors 37

पाकिस्तानी सेना छोड़ने के बाद भी वर्दी पहनता रहा तहव्वुर राणा, ISI और लश्कर संग बैठकें, खुले राज

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा से पूछताछ कर रही है। अब तक के सवाल-जवाब में कई सारे नए खुलासे हुए हैं। पता चला कि पाकिस्तानी सेना का मेडिकल कोर छोड़ने के बाद भी वह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े लोगों से मिलते वक्त सैन्य वर्दी पहना रहता था। रिपोर्ट के अनुसार, राणा पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के चिचावटनी गांव का रहने वाला है और उसके पिता स्कूल प्रिंसिपल थे। तहव्वुर राणा को लेकर तीन भाई हैं। उसका एक भाई पाकिस्तानी सेना में साइकोलॉजिस्ट है, जबकि दूसरा पत्रकार है। उसने कैडेट कॉलेज हसनाबदल में पढ़ाई की, जहां उसकी मुलाकात डेविड कोलमैन हेडली (दाऊद सईद गिलानी) से हुई, जो 26/11 हमलों से जुड़ा है और फिलहाल अमेरिकी जेल में बंद है। तहव्वुर हुसैन राणा साल 1997 में अपनी पत्नी समरज राणा अख्तर के साथ कनाडा चला गया, जो डॉक्टर है। यहां उसने इमिग्रेशन कंसल्टेंसी शुरू की और बाद में हलाल मांस का कारोबार करने लगा। कंसल्टेंसी ही उसकी आतंकी गतिविधियों का मुखौटा बनी, जिसमें हेडली ने सलाहकार की भूमिका निभाई। मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मेडिकल डिग्री रखने वाला राणा ने सर्विस छोड़ने के बाद भी सैन्य वर्दी पहनता था। यूनिफॉर्म में उसने आतंकी शिविरों का दौरा किया और लश्कर-ए-तैयबा व आईएसआई से जुड़े गुटों के संपर्क में रहा। तहव्वुर राणा ग्लोबल आतंकी साजिद मिर के भी टच में था, जो भारत का मोस्ट वांटेड भगोड़ा है। मिर ने ही 26/11 हमलों के दौरान मुंबई के चबाड हाउस पर हमले की साजिश रची थी, जिसमें 6 बंधकों की मौत हुई थी। तहव्वुर राणा का मेजर इकबाल से कनेक्शन अमेरिका ने साजिद मिर की गिरफ्तारी के लिए 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है। साल 2022 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र को एक ऑडियो सौंपा था, जिसमें मिर हमलावरों से बातचीत करता सुनाई देता है। एनआईए सूत्रों के अनुसार, तहव्वुर राणा पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहनकर मेजर इकबाल से मिला था, जो एक संदिग्ध ISI अधिकारी है। इकबाल पर हेडली की ओर से टोही मिशनों के लिए फंड देने, निगरानी रखने और निर्देश देने का आरोप है। रिपोर्ट में कहा गया कि हेडली ने 2010 में मृत्युदंड से बचने के लिए अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने उस व्यक्ति के साथ 20 से अधिक ईमेल शेयर करने का खुलासा किया, जिसे वह चौधरी खान के नाम से जानता था और जिसका मेजर इकबाल उपनाम था। recent visitors 30

17 जिला स्तरीय आयोगों में जल्द शुरू होगी ई-सुनवाई की सुविधा – न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया

 उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के कार्य सराहनीय – अरुण साव उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, आयोग के द्विवार्षिक प्रतिवेदन का किया विमोचन 17 जिला स्तरीय आयोगों में जल्द शुरू होगी ई-सुनवाई की सुविधा – न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया उपभोक्तताओं को जागरूक करने व्यापक प्रचार-प्रसार कार्यक्रम संचालित किया जाएगा रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा विधि एवं विधाई कार्य मंत्री अरुण साव आज छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा आयोजित उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राजधानी रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित सम्मेलन में आयोग के द्विवार्षिक प्रतिवेदन के मुद्रित एवं ई-संस्करण का विमोचन भी किया। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा और सचिव अन्बलगन पी. विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मेलन में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने, धोखाधड़ी व ठगी से बचाने तथा जागरूक करने में राज्य एवं जिला स्तरीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सराहनीय कार्य कर रहा है। उपभोक्ताओं को ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सुविधाएं भी मिल रही हैं। उनकी सहूलियत के लिए आयोग ऑनलाइन सुनवाई प्रारंभ करने की भी तैयारी कर रही है। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद विधि के छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे उपभोक्ताओं को जागरूक करने और उन्हें उनके अधिकारों से अवगत कराने का काम करें। साव ने आयोग के कार्यों को मजबूती प्रदान करने और विस्तारित करने राज्य शासन से हर तरह का सहयोग प्रदान करने की बात कही। उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने व्यापक प्रचार-प्रसार कार्यक्रम संचालित करने की घोषणा की। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य शासन की ओर से आयोग को भरपूर सहयोग मिल रहा है। हमारे सभी प्रस्तावों को सरकार ने स्वीकृत किया है। वर्तमान में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में ई-सुनवाई की व्यवस्था है। आगामी तीन महीनों में हम इस व्यवस्था को प्रदेश के सभी 17 जिला स्तरीय आयोगों में लागू करने जा रहे हैं। उपभोक्ताओं को शीघ्र न्याय मिले, इसके लिए राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के साथ ही सभी जिला स्तरीय आयोग सक्रियता से काम कर रहे हैं। न्यायमूर्ति चौरड़िया ने कहा कि पिछले दो वर्षों में लोगों को न्याय दिलाने आयोग ने मामलों की तेजी से सुनवाई की है। दो वर्ष पहले पूरे प्रदेश में दस हजार 600 मामले लंबित थे, जो अब घटकर 6500 रह गए हैं। अगले छह महीनों में सभी लंबित प्रकरणों के निराकरण का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि आयोग आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए केस फाइलिंग, सुनवाई और दस्तावेजीकरण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार शुरू करने जा रहा है। उन्होंने रायपुर में ज्यादा प्रकरणों को देखते हुए आयोग की एक अतिरिक्त बेंच प्रारंभ करने की भी जानकारी दी। उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि राज्य व जिला स्तरीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के संचालन के लिए समुचित व्यवस्थाएं प्रदान करना राज्य शासन का दायित्व है। आयोग द्वारा संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए ई-फाइलिंग और ई-सुनवाई की सुविधा विकसित की जा रही है। उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए राज्य शासन और आयोग मिलकर काम करते रहेंगे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अन्बलगन पी. ने अपने संबोधन में कहा कि विगत 25-30 वर्षों में बाजार में हर सामग्री की वेराइटी काफी बढ़ी है। उत्पादों और उत्पादकों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच उपभोक्ता हितों के संरक्षण की जरूरत भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं को जागरूक व शिक्षित करने तथा न्याय दिलाने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं। राज्य शासन और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की पूरी कोशिश है कि सभी नागरिकों तक इसका लाभ पहुंचे। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा, संयुक्त रजिस्ट्रार श्रीमती मोना चौहान, लेखाधिकारी सुमधुलिका यादव, रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा और रायपुर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हितेन्द्र तिवारी सहित विभिन्न जिलों के उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता तथा विधि के विद्यार्थी बड़ी संख्या में सम्मेलन में शामिल हुए। recent visitors 38

’90 दिनों के भीतर बिल पर फैसला लेना जरूरी’, पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय की

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट का राज्यपाल के मामले में फैसला शुक्रवार को ऑनलाइन अपलोड हो गया है। इस फैसले में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की तरफ से उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना चाहिए। शीर्ष अदालत की तरफ से तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि की तरफ से राष्ट्रपति के विचार के लिए रोके गए और आरक्षित किए गए 10 विधेयकों को मंजूरी देने और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए सभी राज्यपालों के लिए समयसीमा निर्धारित की थी। फैसला करने के चार दिन बाद, 415 पृष्ठों का निर्णय शुक्रवार को रात 10.54 बजे शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। देरी पर राज्य को देनी होगी जानकारी शीर्ष अदालत ने कहा कि हम गृह मंत्रालय की तरफ से निर्धारित समय-सीमा को अपनाना उचित समझते हैं… और निर्धारित करते हैं कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की तरफ से उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना आवश्यक है। इस अवधि से परे किसी भी देरी के मामले में, उचित कारणों को दर्ज करना होगा और संबंधित राज्य को सूचित करना होगा। राज्यों को भी सहयोगात्मक होना चाहिए और उठाए जा सकने वाले प्रश्नों के उत्तर देकर सहयोग करना चाहिए और केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सुझावों पर शीघ्रता से विचार करना चाहिए।' अनुच्छेद 200 का किया गया जिक्र जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 8 अप्रैल को राष्ट्रपति के विचार के लिए दूसरे चरण में 10 विधेयकों को आरक्षित करने के फैसले को अवैध और कानून की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा था कि जहां राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखता है और राष्ट्रपति उस पर अपनी सहमति नहीं देते हैं, तो राज्य सरकार के लिए इस न्यायालय के समक्ष ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार खुला रहेगा। संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को अपने समक्ष प्रस्तुत विधेयकों पर अपनी सहमति देने, सहमति नहीं देने या राष्ट्रपति के विचार के लिए उसे आरक्षित रखने का अधिकार देता है। recent visitors 42

वास्तविक आय में ठहराव अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, खासकर वेतनभोगी और सफेदपोश वर्ग के लिए: जयराम रमेश

नई दिल्ली कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि देश में लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति घटती जा रही है, लेकिन मोदी सरकार इस संकट को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यदि सरकार इस संकट को स्वीकार करती है, तो उसे पिछले 11 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए "संरचनात्मक नुकसान" को भी स्वीकार करना होगा। रमेश ने इस विषय पर अपनी चिंता ‘एक्स’ पर साझा की और महंगाई और वेतन वृद्धि के संदर्भ में महत्वपूर्ण बिंदु उठाए। वास्तविक आय में ठहराव का मुद्दा जयराम रमेश ने कहा कि वास्तविक आय में ठहराव अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, खासकर वेतनभोगी और सफेदपोश वर्ग के लिए। उनका दावा था कि पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति औसतन 6 प्रतिशत के आसपास रही है, जबकि इस दौरान सफेदपोश नौकरियों में वेतन वृद्धि महज 3-4 प्रतिशत तक सीमित रही। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई के मुकाबले वेतन में बहुत कम वृद्धि हुई है, जिसका परिणाम यह हुआ है कि लोगों की जेब में पैसा बचा नहीं है। रमेश का निवेश बैंकर के हवाले से बयान रमेश ने निवेश बैंकर कनिष्क कर का हवाला देते हुए कहा कि वास्तविक क्रय शक्ति खत्म हो रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि हॉस्टल की रसोई में मैगी का पैकेट भी अब महंगा हो गया है। उनका कहना था कि घटती क्रय शक्ति भारत में उपभोग से जुड़ी एक प्रमुख कहानी के अंत का कारण बन रही है। यही कारण है कि निजी निवेश में मंदी भी आ रही है। उनका कहना था कि उपभोग की गिरावट ही आर्थिक संकट का एक प्रमुख कारण है। मोदी सरकार पर हमला: संकट स्वीकारने से इनकार कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने यह भी कहा कि मोदी सरकार इस संकट को स्वीकार करने से इनकार करती है, क्योंकि इसके लिए उसे पिछले 11 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए संरचनात्मक नुकसान को स्वीकार करना होगा। रमेश ने कहा, "सरकार ने न केवल महंगाई और वेतन वृद्धि के मुद्दे को नजरअंदाज किया है, बल्कि उसने इस तथ्य को भी नकारा है कि देश की वास्तविक क्रय शक्ति लगातार घट रही है।" वर्तमान स्थिति पर कांग्रेस की चिंता रमेश ने बताया कि आर्थिक असमानता और वृद्धि की दर में कमी देश की मुख्य समस्याएं बन चुकी हैं। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार इस संकट से निपटने के बजाय सच्चाई से मुंह मोड़े बैठी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इस संकट को सही तरीके से स्वीकारे, तो देश को भविष्य में आर्थिक स्थिति को सुधारने का अवसर मिलेगा। लेकिन इसके लिए सरकार को सच्चाई का सामना करना होगा। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस की आलोचना कांग्रेस ने इस आरोप के साथ यह भी कहा कि देश में वृद्धि और विकास के मुद्दों पर सरकार की नीतियां असफल साबित हो रही हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि आर्थिक असमानता और सामाजिक न्याय की दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। कांग्रेस का कहना है कि क्रय शक्ति में गिरावट की स्थिति से निपटने के लिए सरकार को ठोस आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाने होंगे।   recent visitors 39

रंग-बिरंगी कैंडी, जूस, चॉकलेट आदि में इस्तेमाल किए जाने वाला आर्टिफिशियल फूड कलर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक

उत्तराखंड आज की इस दुनियां में प्रचलित रंग-बिरंगी खाने की चीजें सभी को मोह रही है। विशेष तौर पर ये चीजें बच्चों को खाने में बेहद पसंद आ रही है। लेकिन इन रंग-बिरंगी कैंडी, जूस, चॉकलेट आदि में इस्तेमाल किए जाने वाला आर्टिफिशियल फूड कलर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे में बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।       आपको बताते चलें कि रंग-बिरंगी कैंडी, जूस, चॉकलेट,स्नैक्स आदि चीजों में Red 40, Yellow 5, Yellow 6 और Blue 1 जैसे आर्टिफिशियल फूड कलर मिलाए जाते हैं। जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं जैसे कि अधिक चमड़ी रोग, अस्थमा, नींद में कमी, पेट दर्द, डायरिया और ट्यूमर का सामना करना पड़ सकता है। कुछ रिसर्च बताती हैं कि ये रंग बच्चों के ब्रेन फंक्शन और बिहेवियर को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे होते हैं और पेरेंट्स अक्सर इसे नखरे या टेम्परामेंट समझ कर टाल देते हैं। जानिए कैसे बचाएं बच्चों को? बाजार से खरीदारी करते समय हर पैक्ड फूड का लेबल ध्यान से पढ़ें। अगर उसमें E Numbers (जैसे E102, E110, E129) या फूड कलर लिखा हो, तो उसे अवॉइड करें। बच्चों को घर का बना ताजा खाना ही दें फल, सब्जी, दाल, दूध और होममेड स्नैक्स बच्चों के लिए सबसे सेफ और हेल्दी होते हैं। इसलिए अपने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उन्हें घर का बना हुआ ताजा व शुद्द भोजन ही दें। इन सब्जियों व फलों से बनाएं रंगीन खाना चुकंदर (Beetroot), अनार        लाल रंग हल्दी, केसर                            पीला रंग पालक,धनिया,पुदीना                 हरा रंग जामुन, ब्लूबेरी                         बैंगनी रंग इन प्राकृतिक रंगों से ना सिर्फ खाना सुंदर दिखेगा, बल्कि बच्चों को पौष्टिक तत्व भी मिलेंगे।   recent visitors 21