सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून पर फिलहाल रोक से इनकार किया, वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं

नई दिल्ली  नए वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने वक्फ कानून पर फिलहाल स्टे नहीं लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब देगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि काउंसिल और बोर्ड को कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ शामिल हैं। उनको न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर को बदला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करना चाहिए। वक्फ कानून पर SC ने नहीं लगाई रोक वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि नए संशोधन अधिनियम के तहत परिषद या बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि सरकार अगली तारीख तक उन संपत्तियों (वक्फ-बाय-यूजर) को डी-नोटिफाई नहीं करेगी जो रजिस्टर्ड और गजटेड हैं। हालांकि, सरकार अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ओवैसी बोले- हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने आगे कहा कि केंद्र ने कोर्ट से कहा कि आप संसद की ओर से पारित कानून पर रोक नहीं लगा सकते और केंद्र रोजाना सुनवाई के लिए तैयार है। इस मुद्दे को अब 5 मई के लिए लिस्ट किया गया है और उसी दिन सुनवाई शुरू होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं। 'इस एक्ट के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी' ओवैसी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा। 'वक्फ बाय यूजर' को हटाया नहीं जा सकता। जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए एक रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था। इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बड़ी बातें     सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया।     सर्वोंच्च अदालत ने कहा कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।     केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें वक्त दिया।     शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी।     याचिकाओं पर सुनवाई के दूसरे दिन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि अगर किसी वक्फ संपत्ति का रजिस्ट्रेशन 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है तो उन संपत्तियों को नहीं छेड़ा जा सकता।     केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक 'वक्फ बाय डीड' और 'वक्फ बाय यूजर' को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।     सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में और क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं किया जाएगा। सात दिनों में सरकार जवाब दाखिल करें।     जवाब तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।     सरकार फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं होगी। ना कोई नया बोर्ड बनेगा, ना काउंसिल बनेगी।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करने से पहले विचार करे कि इसका परिणाम क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी सरकार 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।     उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।     जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। उस पर प्रतिउत्तर अगले 5 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।     सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे। हम यहां केवल 5 ही चाहते हैं। आप 5 का चयन करें। अन्य को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा। हम नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। अब इसे कहा जाएगा- इन री: वक्फ संशोधन अधिनियम मामला   recent visitors 49

यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री, आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही : अन्नामलाई

 चेन्नई तमिलनाडु की डीएमके सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषा नीति, जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आदि का विरोध कर रही है. तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उनका आरोप रहा है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिणी राज्यों में लोकसभा की सीटें घट जाएंगी और संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा. अब तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने स्वायत्तता का राग अलापना भी शुरू किया है. दरअसल स्टालिन ही नहीं दक्षिण के राज्यों को यूपी से बहुत दिक्कत रही है. पिछले महीने तो स्टालिन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक को निशाने पर ले लिया. दरअसल तमिलनाडु में हिंदी विरोध के पीछे एक अहसास यह है कि यह पिछड़े और गरीब लोगों की भाषा है. अगर ऐसा नहीं होता तो विदेशी भाषा होते हुए भी अंग्रेजी को क्यों सम्मान मिलता? पर उल्लेखनीय यह भी है कि तमिलनाडु के बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को हिंदी और हिंदी भाषी प्रदेशों से कोई दिक्कत नहीं है. वो अपने राज्य में ही तर्क देकर यह बताते हैं कि जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बन गई है तब से दक्षिण के राज्यों को केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आनुपातिक बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं वो दक्षिण के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु को आगाह करते हैं कि यूपी को जगाओ मत ,अगर यह राज्य जग गया तो दक्षिण की छुट्टी हो जाएगी.  योगी को क्यों निशाने पर लिया स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि 'तमिलनाडु की भाषा नीति और निष्पक्ष परिसीमन की मांग आज पूरे देश में गूंज रही है. भाजपा इससे परेशान है, जो उनके नेताओं के इंटरव्यू से पता चलता है. अब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? हमें बख्श दीजिए. ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.' इसके बाद स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि 'हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि हम थोपने और अंधराष्ट्रीयता का विरोध कर रहे हैं. यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है बल्कि ये न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई है. दरअसल योगी ने तमिलनाडु में भाषा नीति और परिसीमन के विरोध को लेकर बयान दिया था. योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद को छोटी राजनीतिक सोच करार दिया. उन्होंने कहा कि स्टालिन धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका वोटबैंक खिसक रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए न कि बांटना चाहिए. उन्होंने लोगों को भी बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी थी. अन्नामलाई के तर्क अन्नामलाई पिछले साल एक उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत को लेकर हुए एक डिबेट में तर्कों की झड़ी लगा दी थी. वो बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली राज्यों की मदद के बंटवारे का जो फार्मूला इंदिरा गांधी के समय लाया गया उसमें जनसंख्या का आधार 50 प्रतिशत रखा गया. अन्नामलाई समझाते हैं कि अगर 100 रुपये केंद्र को राज्यों को बांटने थे उसमें स 50 रुपये का आधार जनसंख्या होने के चलते उत्तर के राज्यों को फायदा मिलता था. बाद में जनसंख्या का बेस और बढ़ा. पर आज बीजेपी के राज में यह कम होकर केवल 15 परसेंट हो गया है. यानि केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता है. इसके साथ ही 45 परसेंट आधार अमीर और गरीब राज्यों के लिए बराबर हो गया है. इसी तरह 15 प्रतिशत वेटेज वित्तीय सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिया रखा गया है.15 प्रतिशत का वेटेज विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रखा गया है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत का वेटेज इकोलॉजी को दिया गया है. 15 प्रतिशत भौगोलिक एरिया को वेटेज मिल रहा है.  अन्नामलाई के कहने का मतलब साफ है कि उपरोक्त आधारों का अगर विश्वेषण करें तो साफ पता चलता है कि दक्षिण के राज्यों के हितों का ध्यान उत्तर से ज्यादा रखा गया है. जनसंख्या के आधार को कहां 60 प्रतिशत से नीचे लाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. गुड गवर्ननेंस के नाम पर कोई फायदा नहीं होता था पर आज इसके नाम पर 15 प्रतिशत का लाभ होता है. अन्ना मलाई इस बात के लिए स्टालिन और अन्य नेताओं की आलोचना करते हैं कि वे देश और राज्य को चलाने के लिए जिस फार्मूले की बात कर रहे हैं वो न्यायपूर्ण नहीं है. वो उदाहरण देते हैं कि तमिलनाडु में 34 परसेंट रेवेन्यू 4 जिलों से आता है. क्या राज्य के कुल रेवेन्यू का 34 प्रतिशत इन चार जिलों को ही मिलना चाहिए? अन्नामलाई कहते हैं कि इस तरह से देश नहीं चल सकता है. यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री अन्ना मलाई बताते हैं कि तमिलनाडु में यूपी के 25 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. अगर अनऑफिशियल को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 40 लाख लेबर यूपी के तमिलनाडु में हैं. अन्ना कहते हैं कि कल्पना करिए अगर योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार कहें कि इतने सस्ता श्रम क्यों आपको उपलब्ध कराएं तो तमिलनाडु क्या कर लेगा? आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही है. वास्तव में अगर यूपी और बिहार की ओर से यह मांग रख दी जाए कि उनके राज्य के लोगों को एक निश्चित रकम जरूर मिलना चाहिए अन्यथा उनके जाने पर रोक लगा दी जाएगी . कल को योगी और नीतीश कुमार अगर यह मांग करें कि हर मजदूर के नाम 10 हजार रुपये उनके राज्य को चाहिए तो हम क्या इनकार कर पाएंगे?  पर देश ऐसे नहीं चलता है. अन्ना मलाई कहते हैं कि याद करिए जब कोविड के समय मजदूरों को वापस बुलाने के लिए तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार हिंदी में प्रेस रिलीज जारी किया गया था. 4- वास्तव में यूपी की तरक्की हैरान करने वाली है अन्नामलाई कहते हैं कि जिस तरह कहा जाता है कि चीन सो रहा है उसे मत छेड़ो, उसी तरह यूपी सो रहा उसे जगाओगे तो … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारी शुरू, भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान कराना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे वर्ष 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ की तारीख शासन ने घोषित कर दी है। सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इस बार सिंहस्थ दो माह का होगा। 27 मार्च से 27 मई तक लगेगा। नौ अप्रैल से आठ मई तक तीन अमृत स्नान और सात स्नान पर्व होंगे। गत सिंहस्थ एक माह का था। उज्जैन में हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ सिंहस्थ लगता है, जिसमें दुनियाभर से साधु-संत और श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं और धर्म, संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। इस बार के महाकुंभ में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान सरकार ने लगाया है। सिंहस्थ में अब 35 महीने का समय शेष रह गया है और स्थिति यह है कि सड़क, पुल, बिजली सहित अधिकांश प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमटे पड़े हैं। आगे चलकर हो सकती है बड़ी मुसीबत प्रमुख बात यह है कि सालभर में सिंहस्थ मद के केवल दो काम ही धरातल पर प्रारंभ हो पाए हैं। विभागीय मद के अधिकांश प्रोजेक्ट सक्षम स्वीकृति और ठेकेदार चयन प्रक्रिया में ही उलझा रखे हैं। यह विशुद्ध रूप से अफसरों की उदासीनता एवं लापरवाही का प्रमाण है, जो समय रहते काम प्रारंभ और समाप्त न होने से आगे चलकर बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। श्रद्धालुओं के लिए होगी व्यवस्थाएं एक रिपोर्ट के अनुसार सिंहस्थ की महत्ता और विशालता को ध्यान में रख श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करने को 11 विभाग 15751 करोड़ रुपये के 102 कार्य की योजना प्रस्तावित हैं, जिनमें 5133 करोड़ रुपये से 75 कार्य इस वर्ष सिंहस्थ मद से कराने की अनुशंसा संभागीय समिति ने की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश बजट में सिंहस्थ मद दो हजार करोड़ का ही रखा गया है। प्रश्न उठता है कि भविष्य में मद बढ़ाया जाएगा या कुछ कार्यों की छंटनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान सिंहस्थ कराने में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में श्रद्धालुओं को स्नान कराने की है। भीड़ प्रबंधन तभी संभव है जब शहर की आंतरिक सड़कें चौड़ी, पुलों का दोहरीकरण और शिप्रा नदी पर घाट की लंबाई बढ़े। ये तीनों ही काम करने में यहां का प्रशासन पिछड़ा है। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बनी रोप-वे, फ्रीगंज समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज सरिकी अनेक विभागीय योजना सक्षम स्वीकृति के बाद भी धरातल पर शुरू न हो सकी है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा। recent visitors 63

महासमुंद : सखी वन स्टॉप सेंटर हेतु विभिन्न पदां पर महिला अभ्यर्थियों से 30 अप्रैल तक आवेदन आमंत्रित

महासमुंद, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर महासमुंद में नवीन वित्तीय मापदण्ड एवं मानव संसाधन की स्वीकृति के अनुसार सेवा प्रदाताओं की भर्ती की जा रही है। केंद्र का संचालन नवीन मार्गदर्शिका 2022 के तहत किया जाएगा। सखी वन स्टॉप सेंटर, जो कि महिलाओं से संबंधित सहायता संस्था है, जिसमें दैनिक कार्यों के संचालन हेतु निम्न पदों के लिए केवल महिला अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इनमें साइको-सोशल काउंसलर, केस वर्कर एवं कार्यालय सहायक सह कम्प्यूटर ऑपरेटर के एक-एक पद शामिल है। इच्छुक महिला अभ्यर्थी अपना आवेदन पत्र 30 अप्रैल 2025 तक प्रातः 10ः00 बजे से सायं 5ः30 बजे के बीच पंजीकृत डाक/स्पीड पोस्ट/कोरियर के माध्यम से जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद, पिन कोड 493445 के पते पर प्रेषित कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी जिले की आधिकारिक वेबसाइट अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद के सूचना पटल का अवलोकन कर सकते हैं। सखी वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं से संबंधित सेवाएं प्रदान की जाती हैं, इसलिए सभी पदों पर केवल महिला अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। recent visitors 45

चिकित्सालय में आवश्यक सभी चिकित्सा उपकरण, तकनीकी संसाधन, और मरीजों की सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए: मंत्री जायसवाल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनकल्याण के संकल्प के साथ काम कर रही है, और हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज मंत्रालय नवा रायपुर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में अधिकारियों को दिशानिर्देश देते हुए यह बात कही। बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में अस्पताल की संरचना और सेवाओं को आधुनिक और जनसुलभ बनाने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बैठक में मंत्री जायसवाल ने निर्देश दिए कि चिकित्सालय में आवश्यक सभी चिकित्सा उपकरण, तकनीकी संसाधन, और मरीजों की सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने  कहा कि अस्पताल में  विस्तारीकरण और विद्युतीकरण के कार्यों में विभागीय समन्वय मजबूत किया जाए, ताकि निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण परिणाम प्राप्त हो सकें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा सुकिरण कौशल, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के डीन, अस्पताल प्रबंधन प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। recent visitors 41

आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुपोषण चौपाल आयोजित, नन्ही बालिकाओं को कराया अन्नप्राशन

महासमुंद पोषण पखवाड़ा अंतर्गत महासमुंद शहरी परियोजना अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में सुपोषण चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण की रोकथाम और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना है। पोषण पखवाड़ा 8 अप्रैल से 22 अप्रैल तक आयोजित होगा। इसी क्रम में महासमुंद शहरी परियोजना अंतर्गत गुरु नानक वार्ड स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित सुपोषण चौपाल में नन्ही बालिका अमायरा का अन्नप्राशन संस्कार विधिवत रूप से संपन्न कराया गया। वहीं, डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड के आंगनबाड़ी केंद्र में बालिका सिमरन भोई और नर्गिस देवांगन का भी अन्नप्राशन संस्कार किया गया। इस दौरान पोषक आहार से संबंधित खाद्य पदार्थों को टेबल पर सजाया गया था तथा इन पौष्टिक पदार्थां के महत्व को भी बताया गया। इस अवसर पर वार्ड पार्षद धनेंद्र चंद्राकर, समाजसेवी श्रीमती निरंजना चंद्राकर, महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती शीला प्रधान एवं कुंती यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, और क्षेत्र की महिलाएं उपस्थित रहीं। आयोजन के दौरान गर्भवती महिलाओ और शिशुवती महिलाओं को पोषण, स्वच्छता और शिशु देखभाल के विषय में जानकारी भी दी गई, जिससे वे अपने बच्चों के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। पर्यवेक्षक श्रीमती शीला प्रधान ने बताया कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि इस समय शरीर को उचित मात्रा में पोषक तत्व की आवश्यकता होती है। पोषक आहार ना खाने से माता और शिशु कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए सुपोषण चौपाल अभियान एक सार्थक पहल है। recent visitors 44

चांदी की कीमत 96,000 रुपये प्रति किलो पहुंची, सोना 1100 रुपये बढ़कर 98,983 रुपये प्रति 10 ग्राम

 इंदौर और दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना 1100  रुपये की बड़ी बढ़त के साथ 98,983 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में गोल्ड में ऐतिहासिक बढ़त चांदी 1,900 रुपये उछलकर 99,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का पिछला बंद भाव 96,450 रुपये था। इस साल की शुरुआत में यानी 1 जनवरी 2025 को सोने का भाव 79,390 रुपये था, जो अब तक 18,710 रुपये या करीब 23.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर चुका है। क्यों आ रही है सोने में तेजी यह तेजी अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध बढ़ने, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद के चलते आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 3,318 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। वहीं, हाजिर चांदी भी करीब दो प्रतिशत की बढ़त के साथ 32.86 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इंदौर में भी सोना मजबूत इंदौर के स्थानीय सर्राफा बाजार में भी बुधवार को सोने और चांदी की मांग में इजाफा देखने को मिला। व्यापारियों के अनुसार मंगलवार की तुलना में बुधवार को ग्राहकों की संख्या और खरीदारी दोनों में बढ़ोतरी हुई। इंदौर में सोने का औसत भाव 93,150 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं चांदी 97,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी के सिक्के का भाव 1,100 रुपये प्रति नग दर्ज किया गया। निवेशकों की नजर एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और आर्थिक आंकड़ों के कारण आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर आने वाले बयानों और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, डिजिटल माध्यमों जैसे ऑनलाइन गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड म्युचुअल फंड्स में भी निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दौर में सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग और बढ़ सकती है। कुल मिलाकर वैश्विक हालात और निवेशकों की सोच में बदलाव के चलते सर्राफा बाजार में सोना और चांदी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। recent visitors 67