फाइन आर्ट्स में हुनर दिखाकर यूं कमा सकते हैं नाम और पैसा

नदी, झरने हों या फिर पहाड़, जंगल आदि के प्राकृतिक खूबसूरत दृश्य, एक कलाकार अपनी कूची से इन्हें जीवंत बना देता है। अक्सर इन कलाकृतियों को देखकर हर किसी का चेहरा खिल जाता है। लोग चकित होकर इन्हें करीब से निहारते हैं और कलाकारों को उनकी हुनरमंदी की दाद देते हैं। दरअसल, यह सब फाइन आर्ट्स का कमाल है। फाइन आर्ट्स की विभिन्न विधाओं, जैसे ड्रॉइंग, पेंटिंग, डिजाइनिंग, स्कल्पटिंग, इंस्टॉलेशन, एनिमेशन, गेमिंग आदि में लोग अपना हुनर दिखाकर दौलत और शोहरत दोनों कमा रहे हैं। फाइन आर्ट्स सेक्टर में अपनी पहचान बनाने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कहां है मांग? फाइन आर्ट्स ग्रेजुएट की देश में आजकल सबसे ज्यादा मांग सॉफ्टवेयर कंपनीज, डिजाइन फर्म्स, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, एडवरटाइजिंग कंपनीज, डिजिटल मीडिया, पब्लिशिंग हाउसेज और आर्ट स्टूडियो में है। अगर हम फील्ड की बात करें, तो फाइन आर्ट्स का कोर्स करने के बाद आप ऐड डिपार्टमेंट, अखबार या पत्रिका में इलस्ट्रेटर, कार्टूनिस्ट, एनिमेटर आदि के तौर पर अपना करियर बना सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, टेलीविजन, फिल्मध् थिएटर प्रोडक्शन, प्रोडक्ट डिजाइन, एनिमेशन स्टूडियो, टेक्सटाइल डिजाइनिंग आदि में भी ऐसे लोगों के लिए तमाम अवसर हैं। आप विजुअल आर्टिस्ट, एनिमेटर या ग्राफिक डिजाइनर जैसे पदों पर भी अपनी सेवाएं दे सकते हैं। शिक्षण संस्थानों में आपके सामने आर्ट टीचर बनने का अवसर है। आप चाहें, तो फ्रीलांस भी कर सकते हैं। ऐसे प्रोफेशनल कला समीक्षक, आर्ट स्पेशलिस्ट, आर्ट डीलर, आर्ट थैरेपिस्ट, पेंटर आदि के रूप में फुल-टाइम और पार्ट-टाइम सेवाएं दे सकते हैं। अगर आप अपनी क्रिएटिविटी डिजाइनिंग में दिखाना चाहते हैं, तो प्रोडक्ट डिजाइनिंग, ऑटोमोबाइल डिजाइनिंग या फिर इसी तरह के अन्य क्षेत्रों में हुनर दिखाकर नाम और पैसा कमा सकते हैं। जॉब प्रोफाइल फाइन आर्ट्स कोर्स और स्पेशलाइजेशन के बाद ऐसे प्रोफेशनल विभिन्न कंपनियों में इलस्ट्रेटर, एनिमेटर, ग्राफिक डिजाइनर, विजुअल डिजाइनर, डिजिटल डिजाइनर, क्रिएटिव मार्केटिंग प्रोफेशनल, फ्लैश प्रोग्रामर, 2डीध् 3डी आर्टिस्ट, वेब डेवलपर, क्राफ्ट आर्टिस्ट, लेक्चरार, आर्ट टीचर, कार्टूनिस्ट, आर्ट म्यूजियम टेक्निशियन, आर्ट कंजर्वेटर, आर्ट डायरेक्टर, क्रिएटिव डायरेक्टर, एडवरटाइजिंग एग्जीक्यूटिवध् सुपरवाइजरध् हैड, प्रोजेक्ट ऑफिसर आदि जैसे पदों पर काम कर सकते हैं। पर्सनल स्किल फाइन आर्ट्स की पढ़ाई किसी दूसरे विषय से पूरी तरह अलग है। इस तरह का कोर्स करने के लिए आपमें क्रिएटिव टैलेंट और स्किल होनी जरूरी है। इसलिए इस फील्ड में कलात्मक और सृजनात्मक प्रतिभा रखने वाले युवाओं को ही आना चाहिए क्योंकि फाइन आर्ट्स का फोकस एरिया मुख्य रूप से अप्लाइड आर्ट, ग्राफिक डिजाइन, पेंटिंग और स्कल्पचरिंग के इर्द-गिर्द ही होता है। यदि पेंटिंग के बजाए मॉडर्न डिजाइनिंग में नाम करना चाहते हैं, तो आपको बदलते वक्त के अनुसार प्रोडक्ट की डिजाइन को विजुअलाइज करना होगा। कोर्स व क्वॉलिफिकेशन देश के अधकितर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फाइन आर्ट्स में अंडरग्रेजुएट और पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अगर आप आर्टिस्ट, आर्ट टीचर या लेक्चरार बनना चाहते हैं, तो 12वीं के बाद बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (बीएफए) कोर्स कर सकते हैं। किसी भी स्ट्रीम के युवा इस तरह के कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। अगर आप चाहें, तो इसी में आगे मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स भी कर सकते हैं। फाइन आर्ट्स में एमफिल और पीएचडी भी की जा सकती है। चूंकि फाइन आर्ट्स में विजुअल और परफॉर्मिंग दोनों आयाम शामिल हैं, इसलिए इस तरह के पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को पेंटिंग, स्कल्पटिंग, अप्लाइड आर्ट्स, ग्राफिक डिजाइन, इंटीरियर डिजाइन, ड्रामा, म्यूजिक, पॉटरी जैसे कई विषयों की जानकारी दी जाती है। फाइन आर्ट्स के प्रति युवाओं का आकर्षण बीते कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। देश और समाज में ऐसे हुनरमंद आर्टिस्ट्स की स्वीकार्यता भी बढ़ी है। यही कारण है कि आजकल तमाम सरकारी और निजी संस्थान अलग-अलग तरह के कई कोर्स ऑफर कर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं: -दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली -कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली -जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ -टीजीसी एनिमेशन एंड मल्टीमीडिया, दिल्ली -सर जेजे इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट्स, मुंबई -इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स, मोदीनगर (उप्र)   recent visitors 43

जनरल स्टोर में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, लाखों का माल जलकर खाक

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में एक जनरल मर्चेंट स्टोर में भीषण आग लग गई. देर रात से सुलगती इस आग ने दुकान के ऊपरी हिस्से को पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया. दुकान में रखा लाखों रुपये का सामान भी इस हादसे में नष्ट हो गया. प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना जताई जा रही है. घटना बीती रात करीब 2 बजे की है. घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने के प्रयास में जुट गई. फायर ब्रिगेड ऑपरेटर ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है. यह दुकान रिहायशी इलाके में होने के बावजूद गनीमत रही कि आग ने आसपास के घरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है. recent visitors 27

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री मुरुगन ने की सौजन्य भेंट

  भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री  एल. मुरुगन ने सोमावार को मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर एवं अंग वस्त्रम ओढ़ाकर केंद्रीय मंत्री  मुरुगन का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय राज्य मंत्री मुरुगन ने मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की। recent visitors 36

ऐसे बचाइए अपने स्मार्टफोन को हैकिंग से

एसएमएस के जरिए ऐप्स डाउनलोड करने से बचें। इससे आपकी डिवाइस जल्द ही वायरस से ग्रस्त हो सकती है। -समय-समय पर स्मार्टफोन के सॉफ्टवेयर को अपडेट करें। कंपनियां अपडेट वर्जन में हैकर्स से डिवाइस को बचाने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव करती रहती है। -स्मार्टफोन को हमेशा पासकोड से सुरक्षित रखे। इससे डिवाइस के आसानी से हैक होने या फिर बिना अनुमति के स्मार्टफोन के उपयोग करने की संभावना 100 गुना तक कम हो जाती है। -एसएमएस या फिर ईमेल में आई अज्ञात वेबसाइट लिंक्स को खोलने से बचें। -सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा से ज्यादा समय ब्लूटूथ बंद रखने की कोशिश करें। ब्लूटूथ की कम रेंज में हैकर्स बेहद आसानी से स्मार्टफोन को अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। स्मार्ट ऐप्स से सुरक्षित रखे स्मार्टफोन… लास्टपास यह एक पासवर्ड मैनेजर ऐप है जिससे आप अपने ईमेल तक के पासवर्ड सुरक्षित रख सकते हैं। स्मार्टफोन पर किसी भी वेबसाइट को खोलने पर यह ऐप खुद ही उस पर आपका ईमेल और पासवर्ड डाल देती है। साइजः डिवाइस के अनुसार अलग-अलग कीपर इस पासवर्ड मैनेजर ऐप को खासतौर पर आईफोन के लिए बनाया गया है। इसमें आप पासवर्ड के अलावा, फाइल, फोटो और वीडियो सुरक्षित रख सकते हैं। इसके जरिए आप ऐपल वॉच का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। साइजः 37.7एमबी परफेक्ट ऐपलॉक इससे आप स्मार्टफोन पर वॉट्सऐप, ईमेल, कैमरा और फोटो गैलरी को सुरक्षित रख सकते हैं। आम ऐप्स की तरह गलत पासवर्ड डालने पर ऐप खुद यूजर की तस्वीर ले लेती है।   recent visitors 54

दो वर्षों में माँ क्षिप्रा के 29 किमी घाट और तैयार हो जायेंगे, जिससे माँ क्षिप्रा की परिक्रमा करने वाले यात्रियों को सुविधा होंगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ क्षिप्रा के घाटों की सफाई कर जल गंगा संवर्धन अभियान में सहभागिता की माँ नर्मदा परिक्रमा मार्ग के सौंदर्यीकरण करण के साथ यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दो वर्षों में माँ क्षिप्रा के 29 किमी घाट और तैयार हो जायेंगे, जिससे माँ क्षिप्रा की परिक्रमा करने वाले यात्रियों को सुविधा होंगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंच कोशी यात्रियों का स्वागत, सम्मान कर यात्रा का शुभारंभ कराया नगर निगम के स्वच्छता मित्रों का सम्मान किया उज्जैन जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन क्षिप्रा के रामघाट पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत घाटों की सफाई की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षिप्रा नदी में उतरकर घाटों की सफाई की। उन्होंने सफाई के बाद क्षिप्रा में स्नान किया। उन्होंने माँ क्षिप्रा का पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारे प्रदेश के पुराने ऐतिहासिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का विशेष अभियान है। इसमें नदियों को पुनः प्रवहमान बनने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। भोपाल के पास बेतवा नदी के उद्गम स्थल को पुनर्जीवित कर दिया गया है, इस अभियान की यह विशेषता है कि हम अपनी ऐतिहासिक, पुरानी बावड़ी, कुएँ, तालाब, जल स्त्रोत को पुनर्जीवित कर रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में और पूरे विश्व में हमारे मध्यप्रदेश की माँ नर्मदा ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की जाती है, मध्यप्रदेश सरकार नर्मदा नदी के परिक्रमा स्थल को सुव्यवस्थित कर तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं बनाएंगे और माँ क्षिप्रा के घाटों को 29 किलोमीटर और बनाया जा रहा है, जिससे माँ क्षिप्रा के परिक्रमा करने वाले यात्रियों को भी सुविधा होगी। उज्जैन में माँ क्षिप्रा को प्रवहमान बनाने के लिए सिलारखेड़ी सेवरखेड़ी जलाशय योजना, माँ क्षिप्रा की स्वच्छता बनाए रखने के लिए खान डायवर्सन नदी परियोजना भी चल रही है। इसका 50% काम लगभग पूरा हो चुका है, आने वाले 2 वर्षों में माँ क्षिप्रा कल-कल होकर बहेगी, इसी संकल्प के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन ऐतिहासिक पौराणिक नगरी के साथ-साथ काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है, अकबर, शाहजहां, जहांगीर ने भी उज्जैन में प्रवास किया था और भर्तहरी गुफा पहुंचकर काल गणना के ज्ञान को समझा था, यहां पर उन्होंने टकसाल भी स्थापित कराई थी। यह केवल ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी के साथ एक वैज्ञानिक नगरी भी है हम इसके वैभव को पुनः स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं राजा भृतहरि, सम्राट विक्रमादित्य, सम्राट अशोक के साथ-साथ अन्य महान राजाओं के द्वारा उज्जैन के लिए अनेक प्रकार के प्रमाणिक कार्य किए गए हैं। श्रीमंत महाद जी सिंधिया ने पानीपत के युद्ध के बाद इसके गौरव को पुनर्स्थापित किया और लाल किले पर धवज फहराया था। इन सभी महान राजाओं की गाथा का आज भी उज्जैन की भूमि आज भी यशोगान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा सलामतपुर से आए पंचकोशी यात्रियों का सम्मान किया गया और उनकी यात्रा का शुभारंभ कराया गया और नगर निगम के स्वच्छता मित्रों का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव नगर निगम महापौर मुकेश टटवाल, संजय अग्रवाल और जन प्रतिनिधि एवं संभाग आयुक्त संजय गुप्ता, आईजी उमेश जोगा, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकाल थाने को आईएसओ प्रमाण पत्र मिलने पर शुभकामनाएं दी हैं। recent visitors 35

आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन बोले- विकसित राष्ट्र के लिए भारत को हर साल 80 लाख Jobs पैदा करने की जरूरत

नई दिल्ली भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले 10-12 वर्षों तक प्रति वर्ष कम से कम 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी तथा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। नागेश्वरन ने  यहां कहा, “हमारा दृष्टिकोण 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करना है। भारत के आकार के अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगले 10-20 वर्षों तक बाहरी वातावरण उतना अनुकूल नहीं रहने वाला है, जितना 1990 के बाद पिछले 30 वर्षों में रहा होगा।” उन्होंने कहा, “लेकिन इस संदर्भ में यह तो तय है कि आप एक सीमा से आगे अपना बाह्य वातावरण नहीं चुन सकते – हमें कम से कम अगले 10 से 12 वर्षों तक प्रति वर्ष 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी और जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा बढ़ाना होगा। हमें यह देखना होगा कि चीन ने विनिर्माण में, खासकर कोविड महामारी के बाद जबरदस्त प्रभुत्व हासिल कर लिया है।” नागेश्वरन कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स’ में भारतीय आर्थिक नीतियों पर ‘दीपक और नीरा राज केंद्र’ द्वारा आयोजित ‘कोलंबिया भारत शिखर सम्मेलन-2025’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई), प्रौद्योगिकी और रोबोटिक्स ऐसी चुनौतियां हैं जिनका सामना आज के कुछ विकसित देशों को अपनी वृद्धि यात्रा में नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “…लेकिन भारत को अपने आकार के हिसाब से इस विशाल, जटिल चुनौती से निपटना होगा और इसका कोई आसान जवाब नहीं है। अगर आप उन नौकरियों की संख्या देखें जिन्हें हमें बनाने की ज़रूरत है, तो यह हर साल लगभग 80 लाख नौकरियां हैं। …और शुरुआती स्तर की नौकरियों को खत्म करने में एआई की बड़ी भूमिका हो सकती है, या कम आईटी-सक्षम सेवाओं वाली नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।”   recent visitors 33

जब कम हो जाए शरीर में प्रोटीन

हर पोषक तत्व की ही तरह शरीर को प्रोटीन की भी जरूरत एक निश्चित मात्रा में होती है। इसकी अधिकता और कमी दोनों ही सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसी संदर्भ में जानिए प्रोटीन की कमी से होने वाली समस्याओं के बारे में। समस्याएं जो उभरती हैं… इस महत्वपूर्ण पोषक तत्व के न होने या पर्याप्त मात्रा में न होने से मसल्स और हड्डियों के अलावा हृदय संबंधी दिक्कतें भी उपज सकती हैं। इसकी कमी से होने वाली समस्याएं कुछ इस तरह के लक्षण दर्शा सकती हैं- -वजन का अधिकता से कम होना इसकी कमी का संकेत हो सकता है। यह लक्षण मसल्स के बर्बाद होने के कारण जन्म ले सकता है। दरअसल शरीर को जब प्रोटीन नहीं मिलता तो वह मसल्स को तोड़कर प्रोटीन लेने की कोशिश शुरू कर देता है। परिणामस्वरूप मसल्स खोने लगती हैं। इससे वजन में गंभीर कमी हो सकती है। बालों का कमजोर होना, टूटना या झड़ना भी इस कमी को दर्शा सकता है। बालों के बनने में चूंकि प्रोटीन का योगदान होता है, ऐसे में बाल इसकी कमी से तकलीफ में आ सकते हैं। इसी तरह नाखूनों की कमजोरी भी प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकती है। इसके कारण हाथ पैरों के नाखूनों पर उभार उठना, सफेद लकीरें बनना और नाखूनों का टूटना आदि समस्याएं हो सकती हैं। एडेमा यानी शरीर के कुछ हिस्सों में पानी या द्रव्य का इकठ्ठा हो जाना। यह परेशानी भी प्रोटीन की कमी से हो सकती है, क्योंकि प्रोटीन शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मददगार होता है। इसका असर ज्यादातर पैरों, एड़ियों आदि पर दिखाई देता है। मुरझाई हुई स्किन या स्किन पर पड़े रैशेस भी इस कमी से पनप सकते हैं। साथ ही कमजोरी, नींद में असंतुलन, घावों को ठीक होने में देर लगना, बार-बार भूख लगना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, चिड़चिड़ापन और ऊर्जा में कमी, सिरदर्द और चक्कर आना, आदि तकलीफें भी प्रोटीन की कमी से हो सकती हैं। इस तरह पनपती है मुश्किल… प्रोटीन की कमी से होने वाली परेशानियों में सामान्य से लेकर विशेष और गंभीर समस्याएं तक शामिल होती हैं। इसके पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे डाइट का बैलेंस्ड न होना, प्रोटीन के स्रोत की सही जानकारी न होना तथा किसी विशेष प्रकार की डाइट को ही फॉलो करना, आदि। इन तमाम चीजों से प्रोटीन की कमी पनप सकती है। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि प्रोटीन्स की आवश्यकता केवल एथलीट्स या बॉडी बनाने वालों को होती है। जबकि हर सामान्य व्यक्ति को एक निश्चित परिमाण में प्रोटीन की जरूरत होती है। भोजन को बनाएं संतुलित… -प्रोटीन की कमी से बचने के लिए चावल, गेहूं, मक्का, ओट्स आदि साबुत अनाज, सोया, मूंगफली, पालक, मटर, आलू, शकरकंद, डेयरी उत्पाद, फिश, अंडे आदि को अपने भोजन का जरूरी हिस्सा बनाएं। यदि आपको इसके लक्षण ज्यादा तीव्र नजर आ रहे हैं तो डॉक्टर से जांच करवाकर सप्लीमेंट्स और औषधियां भी लें। समय पर इस ओर ध्यान देने से बहुत हद तक समस्या पर काबू पाया जा सकता है।   recent visitors 55