ननकीराम कंवर ने पीएम मोदी को पत्र लिख सीसीएफ श्रीनिवास राव पर भ्रष्टाचार के लगाए गंभीर आरोप

रायपुर पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर एक बार फिर से पत्र को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. अबकी बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्रीनिवास राव पर कांग्रेस का एजेंट बनकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कैम्पा योजना में भारी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है. इसके साथ 1628 वनरक्षकों की भर्ती में किए गए भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने की मांग की है. ननकीराम कंवर ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कैम्पा योजना के मुख्य पद पर रहते हुए श्रीनिवास राव ने केन्द्र सरकार के बजट एवं दिशा निर्देशों की अवहेलना करते हुए अपने करीबी रिश्तेदारों एवं चहेतों को मनमर्जी तरीके से कई सौ करोड़ का काम दिया, जिसमें बाजार दर से अधिक दर पर निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति के साथ स्तरहीन कार्य कराया. इसके अतिरिक्त अधिकतर दूरस्थ स्थानों पर कार्य के नाम पर आवंटन का अगर सत्यापन किया जाएगा, तो यहां कार्य होना ही नहीं पाया जाएगा. इसके अलावा कंवर ने वनरक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए बताया कि राज्य में वन रक्षकों (फारेस्ट गार्ड) की भर्ती हेतु लगभग 1500 पदों पर नवम्बर 2024 से दिसम्बर 2024 के बीच फीजिकल टेस्ट विभिन्न वन मंडलों में किया गया. 4 लाख 25 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षण डीएफओ बालोद, सरगुजा, महासमुंद समेत अन्य ने लिया. जो 16 नवंबर 2024 से प्रारंभ होकर 17 दिसम्बर 2024 तक मंडलवार अलग-अलग तिथियों में संपन्न हुआ. राज्य शासन के शारीरिक क्षमता परीक्षा सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच पर्याप्त रोशनी में कराई जाने के निर्देश के बावजूद कुछ जिलों में कृत्रिम प्रकाश में यह कार्रवाई नियम विरुद्ध की गई. श्रीनिवास राव पर अपने पद का दुरूपयोग कर कमीशनखोरी करने की नियत से भारी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ वन अधिकारी के साथ उनके रिश्ते-नातेदार की चल-अचल संपत्ति की भी जांच कराने की मांग की है. recent visitors 37

मुहांसों से बचने के लिए अपनाए ये 8 कारण

क्या चेहरे पर जब-तब उभर आने वाले मुहांसो का कारण आप जानते हैं। सिर्फ ऑइली फूड खाने से ही नहीं बल्कि इन 5 कारणों से भी हो सकते हैं मुहांसे। मुहांसों के यह 8 कारण आप नहीं जानते होंगे, लेकिन मुहांसों से बचने के लिए इन्हें जानना जरूरी है… 1 तनाव – जी हां तनाव भी मुहांसों का एक कारण हो सकता है। दरअसल जब आप तनाव में होते हैं तो शरीर में कार्टिसोल हार्मोन का स्त्राव होता है। कार्टिसोल, सिबेकस द्वारा त्वचा पर सीबम या तेल के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है जिसके कारण त्वचा पर मुहांसे होने लगते हैं। 2 कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद भी त्वचा पर मुहांसों का कारण बनते हैं, जैसे कोल्ड क्रीम, फाउंडेशन, चिकनाई युक्त उत्पाद, तेल आदि के कारण त्वचा पर मुहांसे हो सकते हैं, खास तौ से तब, जब आपकी त्वचा तैलीय है। 3 कभी-कभी कुछ विशेष दवाओं का सेवन भी आपकी त्वचा पर मुहांसे पैदा कर सकता है। स्टीरॉयड्स, लिथियम, आयोडाइड्स के कारण त्वचा पर मुहांसों की संभावना बढ़ जाती है। 4 तापमान और मौसम में परिवर्तन के कारण भी अक्सर त्वचा पर मुहांसों की समस्या होती है। खास तौर से गर्म या नमीयुक्त मौसम पसीने के साथ ही बैक्टीरिया पैदा करता है, जो मुहांसों का भी कारण बनता है।   5 शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण मुहांसों का उभरना बेहद सामान्य घटना है। महिलाओं में मासिकधर्म के पहले या उस दौरान मुहांसे होना इसका ही एक उदाहरण है, जब हार्मोन्स परिवर्तत या असंतुलित होते हैं। 6 कई बार मुहांसों का लगातार होना अनुवांशिकता भी हो सकता है। अगर आपके माता-पिता या दादा-दादी को यह समस्या रही है, तो हो सकता है कि आपको यह समस्या अनुवांशिक रूप से प्राप्त हुई हो। 7 अत्यधिक तेल व मसालेदार भोजन करना और फास्ट फूड का सेवन त्वचा पर मुहांसे पैदा करने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा पेट खराब होना या पाच संबंधी समस्याएं भी मुहांसों का एक कारण है। 8 त्वचा पर किसी भी प्रकार की गंदगी, चाहे वह धूल मिट्टी या मृत त्वचा के जमाव के कारण हो, त्वचा पर मुहांसे पैदा करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए त्वचा की सफाई का विशेष ध्यान रखें।   recent visitors 50

पर्वतीय चुनौती और प्राकृतिक खतरों के बीच भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग परियोजना पर मंडराया संकट

हिमालय हिमालय की कठोर पर्वतीय चुनौती और प्राकृतिक खतरों के बीच भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग देवप्रयाग से जनासू तक का निर्माण कार्य अब सफलता के मुकाम पर पहुँच चुका है। यह न केवल इंजीनियरिंग की एक अनोखी मिसाल है, बल्कि परियोजना के दौरान आई कठिनाइयों और खतरों को मात देने की एक प्रेरक गाथा भी है। लगभग 14.57 किलोमीटर लंबी यह सुरंग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का हिस्सा है और इसे दुनिया में सबसे तेज़ गति से बनी सुरंगों में गिना जा रहा है। भयावह क्षण: जब सुरंग ढहने का बना खतरा इस मेगाप्रोजेक्ट के पीछे कार्यरत कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के परियोजना निदेशक राकेश अरोड़ा ने बताया कि सुरंग बोरिंग मशीन (TBM) "शक्ति" को जब सुरंग के करीब 5 किलोमीटर अंदर भेजा गया था, तभी 1,500 लीटर प्रति मिनट की दर से पानी का अत्यधिक बहाव शुरू हो गया। इस वक्त सुरंग के भीतर करीब 200 लोग मौजूद थे। अरोड़ा के शब्दों में, "यह हमारे लिए सबसे कठिन और डरावने क्षणों में से एक था। उस समय सुरंग में बाढ़ आने या उसके ढहने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था।" महीनों तक चला संघर्ष, इंजीनियरों ने खोजा समाधान खतरे को देखते हुए टीम ने फौरन सुधारात्मक उपाय शुरू किए। लेकिन परिस्थिति इतनी जटिल थी कि लगभग एक महीने तक कोई खास सुधार नहीं दिखा। अंततः इंजीनियरों ने सीमेंट ग्राउटिंग और रासायनिक मिश्रणों का इस्तेमाल कर सुरंग की रिंग और आसपास की चट्टानों को स्थिर करना शुरू किया। इससे पानी का दबाव कम हुआ और स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रित हुई। चट्टानों का दबाव और टीबीएम की भूमिका प्राकृतिक तौर पर हिमालय की चट्टानें बेहद नरम और अस्थिर होती हैं। ऐसे में बोरिंग मशीन पर भारी दबाव आया, जिससे निर्माण बाधित होने का खतरा पैदा हो गया। टीम ने स्थिति से निपटने के लिए बेंटोनाइट का उपयोग करते हुए टीबीएम के खुदाई कार्य को तेज किया। इसके चलते सुरंग निर्माण फिर से पटरी पर आया। विश्व रिकॉर्ड: पहली बार हिमालय में प्रयोग हुआ सिंगल शील्ड हार्ड रॉक टीबीएम यह परियोजना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार हिमालय की पहाड़ियों में खुदाई के लिए 9.11 मीटर व्यास वाली सिंगल शील्ड हार्ड रॉक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया गया। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सका। औपचारिक शुरुआत और ऐतिहासिक उपलब्धि 16 अप्रैल को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सुरंग के अंतिम ब्रेक-थ्रू की घोषणा की गई। देवप्रयाग और जनासू के बीच बनी यह सुरंग भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का हिस्सा देवप्रयाग-जनासू सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है। इस रेल लिंक के माध्यम से न केवल चारधाम यात्रा को सरल बनाया जा सकेगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कठिनाइयों के बीच सफलता की मिसाल इस परियोजना में जिस प्रकार प्राकृतिक आपदाओं और तकनीकी चुनौतियों को मात देकर लक्ष्य प्राप्त किया गया, वह भारतीय इंजीनियरिंग कौशल, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। देवप्रयाग-जनासू सुरंग केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि भविष्य की राह को प्रशस्त करने वाली एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। recent visitors 49

युवाओं को लुभा रहा है ब्रांड मैनेजमेंट

किसी खास उत्पाद, उत्पाद लाइन या ब्रांड में मार्केटिंग तकनीकों के अनुप्रयोग को ब्रांड मैनेजमेंट कहते हैं। इसका उपयोग उत्पाद की उपभोक्ताओं में प्रचलित वेल्यू को बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे ब्रांड फ्रेंचाइज के साथ-साथ ब्रांड इक्विटी भी बढ़ती है। सामान्यतः बाजारों में मार्केट्स द्वारा किसी भी ब्रांड को एक ऐसे आश्वासन के रूप में माना जाता है, जिसकी गुणवत्ता के स्तर की ग्राहकों को अपेक्षा होती है। इसी गुण के आधार पर ब्रांड वेल्यू तय होती है, जो भविष्य की खरीदी में निर्णायक भूमिका निभाती है। इसके द्वारा प्रतिस्पर्धी उत्पादों से अपने उत्पाद की तुलना कर विक्रय बढ़ाया जाता है। जैसे कि मेरी शर्ट से इसकी शर्ट सफेद क्यों? ब्रांड वेल्यू के आधार पर ही निर्माता अपने उत्पाद की अधिक कीमत वसूल करता है। ब्रांड की वेल्यू का निर्धारण निर्माता के लिए निर्मित लाभ की राशि के आधार पर किया जाता है। इसे विक्रय में वृद्धि तथा कीमत में वृद्धि कर हासिल किया जा सकता है अथवा बेचे जाने वाले उत्पाद की लागत घटाकर भी प्राप्त किया जा सकता है। अधिक प्रभावी मार्केटिंग निवेश से भी यह प्राप्त होता है। इन सभी कयासों से किसी ब्रांड की लाभप्रदता बढ़ाई जा सकती है और इस तरह ब्रांड मैनेजर किसी भी ब्रांड की लाभ-हानि के जिम्मेदार होते हैं। इस संदर्भ में ब्रांड मैनेजमेंट की रणनीतियुक्त भूमिका मार्केटिंग से अधिक व्यापक होती है। ब्रांडनेम की विशेषताएं… -किसी भी ब्रांडनेम में निम्नलिखित विशेषताएं होना चाहिए -उसे ट्रेडमार्क कानून के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए या वह कम से कम ऐसा होना चाहिए कि जिसे संरक्षित रखा जा सके। -ब्रांडनेम उच्चारण करने में आसान होना चाहिए। -ब्रांडनेम आसानी से याद रखने लायक होना चाहिए। -ब्रांडनेम आसानी से पहचाना जा सकने जैसा होना चाहिए। -ब्रांडनेम बाजारों में जहां ब्रांड का उपयोग किया जाएगा, वह सभी भाषाओं में अनुवादित करने लायक होना चाहिए। – ब्रांडनेम से कंपनी या उत्पाद का अनुमान लग जाना चाहिए। -ब्रांडनेम आकर्षक होना चाहिए। ब्रांडों की किस्में:- बाजार में कई किस्मों के ब्रांड उपलब्ध हैं। आमतौर पर प्रीमियम ब्रांड की कीमत उसी श्रेणी के अन्य ब्रांडों से ज्यादा होती है, जबकि इकॉनॉमी ब्रांड बाजार के आम ग्राहकों को लक्षित होता है। फाइटिंग ब्रांड को विशेष रूप से प्रतिस्पर्धात्मक खतरों का सामना करने के लिए बनाया जाता है। जब किसी कंपनी का नाम उत्पाद के ब्रांड नाम के रूप में उपयोग में लाया जाता है, उसे फैमेली ब्रांडिंग कहा जाता है। जब कंपनी के सभी उत्पादों को अलग-अलग ब्रांडनेम दिए जाते हैं, उसे इनडिविजुअल अथवा वैयक्तिक ब्रांड कहकर पुकारा जाता है। जब कोई कंपनी नए ब्रांड को प्रस्तुत करने के लिए मौजूदा ब्रांड के साथ ब्रांड इक्विटी का उपयोग करती है, उसे ब्रांड लिवेरेजिंग कहा जाता है। जब कोई बड़ा रिटेलर किसी निर्माता से थोक मात्रा में कोई उत्पाद खरीदकर उन पर अपना ब्रांडनेम डाल देता है, उसे प्राइवेट ब्रांडिंग, स्टोर ब्रांड, व्हाइट लेबलिंग, प्राइवेट लेबल या ओन ब्रांड (यूके) कहा जाता है। प्राइवेट ब्रांडों को निर्माता के ब्रांडों से अलग किया जा सकता है। जब दो या अधिक ब्रांड अपने उत्पाद को मार्केट करने के लिए एकसाथ काम करते हैं, इसे को-ब्रांडिंग कहा जाता है। कोई भी एम्प्लायमेंट ब्रांड तब निर्मित होता है, जब कोई कंपनी संभावित प्रत्याशियों के साथ जागरूकता निर्मित करना चाहती है। कई मामलों में यह ब्रांड उनके ग्राहकों के लिए एक अटूट विस्तार बन जाता है। क्या होता है ब्रांड आर्किटेक्चर:- किसी कंपनी के स्वामित्व वाले अलग-अलग किस्म के ब्रांड ब्रांड आर्किटेक्चर के माध्यम से एक-दूसरे से संबंधित होते हैं। प्रॉडक्ट ब्रांड आर्किटेक्चर में कंपनी कई अलग-अलग उत्पादों को सहायता प्रदान करती है, जिसमें प्रत्येक उत्पाद का अपना एक अलग नाम तथा उसे अभिव्यक्त करने की शैली जुदा होती है, लेकिन ग्राहकों को कंपनी कहीं भी दिखाई नहीं देती है। कई लोगों का मानना है कि प्रॉक्टर एंड गैम्बल उत्पाद ब्रांडिंग का निर्माण करती है, जबकि टाइड, पैम्पर्स, आइवोरी तथा पेंटिन जैसे कई कंजूमर ब्रांडों का आपस में कोई संबंध नहीं है। कंपनी कुछ ब्रांडों के साथ अपना नाम इसलिए भी जोड़ देती है, ताकि उन्हें मदर ब्रांड का फायदा मिल सके और कंपनी का मार्केटिंग खर्च बच सके। तीसरे मॉडल में सारे उत्पादों के साथ ब्रांड नेम का ही उपयोग किया जाता है और सारे विज्ञापन एक स्वर में इसके गुणगान करते हैं। ब्रांड आर्किटेक्चर का एक अच्छा उदाहरण है यूके स्थित सम्पिण्डित वर्जिन। वर्जिन द्वारा अपने सारे उत्पादों के साथ वर्जिन का उपयोग किया जाता है जैसे कि वर्जिन मेगास्टोर, वर्जिन एटलांटिक, वर्जिन ब्राइडस आदि। इन सारे उत्पादों के साथ एक ही स्टाइल में वर्जिन को प्रदर्शित किया जाता है, ताकि दूर से भी देखने वाला इसे पहचान सके। ब्रांड तकनीक:- कभी-कभी कंपनियां उनके द्वारा मार्केट करने वाले ब्रांडों की संख्या घटाना चाहती है। इस प्रक्रिया को ब्रांड राशनेलाइजेशन कहा जाता है। कुछ कंपनियों की प्रवृत्ति ब्रांड के अंदर ही ज्यादा ब्रांड तथा उत्पाद अंतर निर्मित करने की होती है। कभी-कभी वह लक्षित प्रत्येक बाजारों के लिए कतिपय विशिष्ट सेवा अथवा उत्पाद ब्रांड का निर्माण करेंगी। प्रॉडक्ट ब्रांडिंग के मामले में इसका उद्देश्य खुदरा विक्रेताओं को लाभान्वित करना है। चुनौतियां ब्रांड मैनेजरों की:– ब्रांड मैनेजरों के सामने ये चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं कि ब्रांड के संदेश को ताजा तथा प्रासंगिक बनाए रखते हुए एकसंगत ब्रांड का निर्माण करें। पुराने ब्रांड की पहचान परिष्कृत बाजारों के साथ जोड़ने से गड़बड़ी हो सकती है। इसके लिए उसे दोबारा विजन स्टेटमेंट तथा मिशन स्टेटमेंट आरंभ करने की आवश्यकता होगी। इससे जनसांख्यिकीय विकास से उनके लक्षित बाजार में ब्रांड पहचान गुम हो सकती है। इसके लिए ब्रांड को दोबारा स्था पित करने की आवश्येकता होती है। इस प्रक्रिया को रिब्रांडिंग कहा जाता है। क्याय करता है ब्रांड मैनेजर:- ब्रांड मैनेजर का सबसे पहला काम अपने उत्पारद को इस तरह से निर्मित करना है कि वह उपभोक्ताहओं के बीच आसानी से लोकप्रिय हो जाए तथा उत्पातद की पहचान बन जाए। कभी-कभार ब्रांड मैनेजर अपना कार्य सीमित कर वित्तीय और बाजार के निष्पाएदन लक्ष्यों  पर ज्यानदा ध्याबन देते हैं। अधिकांश ब्रांड मैनेजर अल्प कालीन लक्ष्यर निर्धारित करते हैं, क्योंिकि उपनका कंपनसेशन पैकेज अल्प कालीन व्यपवहार के लिए ही उपयुक्त होता है। अल्पलकालीन लक्ष्यों  को दीर्घकालीन लक्ष्यों  की दिशा में मील के पत्थवर के रूप में देखा जाता … Read more

सतना में अवैध क्‍लीनिकों पर 2010 की धारा 41 के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील करने कार्रवाई की गई

सतना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी एक बानगी शनिवार को उस वक्त देखने को मिली। जब सिटी एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग का अमलें ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत से विपरीत संचालित पांच क्लिीनिक पकड़े। यह कार्रवाई अनुविभागीय दंडाधिकारी रघुराजनगर राहुल सिलाडिया के नेतृत्व में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय अरख, सीएमएचओ कार्यालय के लिपिक आशुतोष प्यासी एवं पुलिस बल की उपस्थिति में की गई। इस दौरान जिले में अवैध रूप से संचालित पांच क्लीनिकों पर व्यापक एवं संगठित कार्रवाई की गई। यह सभी क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के विपरीत संचालित होना पाए गए।सभी प्रतिष्ठानों पर क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 की धारा 41 के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील करने कार्रवाई की गई है। अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी प्रकरण पंजीबद्ध किए जाने की कार्रवाई प्रचलन में है। सभी क्लिनिक पर इंजेक्शन का अवैध प्रयोग और लापरवाही पूर्ण डिस्पोजल करना पाया गया।   स्थल पर जांच के दौरान न तो कोई वैध चिकित्सकीय डिग्री प्रस्तुत की गई और न ही कोई चिकित्सकीय योग्यता प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। क्लीनिक में एक व्यक्ति जो स्वयं को सफाईकर्मी बता रहा था, वही मरीजों का उपचार एवं दवाओं का वितरण करता पाया गया। मरीजों से ली गई फीस एवं वितरित दवाइयों का रिकॉर्ड बरामद कर जब्त किया गया। क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। बड़ी संख्या में एलोपैथिक दवाइयाँ बिना किसी विधिवत पंजीकृत चिकित्सक की उपस्थिति में पाई गईं। क्लीनिक का संचालन एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था। क्लीनिक सील कर अग्रिम विधिक कार्यवाही हेतु रिपोर्ट तैयार की गई। निरीक्षण में पाया गया कि प्रतिष्ठान के पास क्लीनिक रजिस्ट्रेशन नहीं था तथा स्वघोषित डॉक्टर केवल बीएससी और एमए (गैर-चिकित्सा विषय) की डिग्री रखता था। चिकित्सकीय सेवा हेतु वैध योग्यता प्रमाणित नहीं थी। हॉस्पिटल को तत्काल प्रभाव से सील कर आगे विधिक प्रक्रिया शुरू की गई। एक कथित बंगाली चिकित्सक द्वारा संचालित इस क्लीनिक से भारी मात्रा में इंजेक्शन व अन्य दवाइयाँ बरामद हुईं। दो मरीज भी उपचाररत पाए गए, जिन्हें सरकारी अस्पताल भेजा गया। क्लीनिक बिना पंजीयन पाया गया एवं त्वरित प्रभाव से सील किया गया। recent visitors 31

मुख्यमंत्री साय बोले- सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता से करें निराकरण

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में राजस्व विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का त्वरित और सहज लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने फौती–नामांतरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने और समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि विधिक वारिसान के पक्ष में फौती नामांतरण समय पर सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समय सीमा में नामांतरण न होने पर संबंधित पटवारियों की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आरबीसी 6-4 के अंतर्गत पीड़ित परिवारों को तात्कालिक सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यवाही में विलंब न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक भटकना न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को इसकी सतत निगरानी करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग का सीधा संबंध आम जनता से है, अतः मैदानी अमले की लापरवाही शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने और सभी आवेदनों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय का संचालन सप्ताह में न्यूनतम दो दिन अनिवार्य रूप से किया जाए और दो पेशी में ही प्रकरणों का निराकरण हो। अति आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर पेशी की तिथि बढ़ाने से बचा जाए। मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डायवर्सन प्रक्रिया को सरल और सहज बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने अविवादित नामांतरण और बंटवारे के मामलों में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करते हुए उन्होंने राजस्व, कृषि, खाद्य तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों की संयुक्त टीम गठित कर भूमि और फसल से संबंधित सटीक जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए। राजस्व सचिव अविनाश चंपावत ने विभागीय कार्यों और गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूमि अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण, पंजीयन का डिजिटलीकरण तथा मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का कार्य पूर्णता की ओर है। साथ ही उन्होंने  राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण, किसान पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे और जियो-रेफरेंसिंग कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया। श्री चंपावत ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री साय के पूर्व निर्देशों के अनुरूप जिलों में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों का स्थानांतरण नियमित रूप से किया जा रहा है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही जमीन की खरीदी-बिक्री सुनिश्चित की जाए और राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर भू-धारकों को शीघ्र राहत दी जाए। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, राहुल भगत, डॉ. बसवराजू, चिप्स के सीईओ प्रभात मलिक तथा राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। "राजस्व विभाग का कार्य सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, त्वरित निष्पादन और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है। आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का त्वरित और सहज लाभ मिले, इसके लिए सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। फौती–नामांतरण सहित सभी राजस्व प्रकरणों में अनावश्यक विलंब न हो, पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिले, और राजस्व न्यायालयों का संचालन सप्ताह में न्यूनतम दो दिन नियमित रूप से किया जाए। मैदानी अमले की लापरवाही शासन की छवि को प्रभावित करती है, इसलिए अविवादित नामांतरण,  बंटवारे सहित अन्य राजस्व मामलों के निराकरण में अनावश्यक देरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डायवर्सन प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।" मुख्यमंत्री विष्णु देव साय "शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही जमीन की खरीदी-बिक्री सुनिश्चित की जाए। राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर भू-धारकों को शीघ्र राहत प्रदान करें। आम नागरिकों को न्याय और सुविधा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।" राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा   recent visitors 30

प्रतिदिन कॉफी के सेवन से घटाएं वजन, जानिए कैसे

अगर आप वजन घटाने के लिए जिम जाना, वॉक करना एवं कई तरह की कवायदें कर रहे हैं, तो कॉफी आपके इस मिशन में काफी मददगार साबित होगी। जरूर जानिए कॉफी कैसे करेगी आपकी मदद, वजन कम करने में –   -अगर आप वजन घटाने के लिए जिम जा रहे हैं, तो जूस, फल या हल्के नाश्ते के बजाए 1 कप कॉफी पीकर जाएं। यह आपको जिम में एक्सरसाइज के लिए अतिरिक्त ऊर्जा देगी और आप नियमित दिनचर्या से ज्यादा और बेहतर तरीके से एक्सरसाइज कर पाएंगे, जो वजन घटाने की प्रक्रिया को और आसान करेगा। -प्रतिदिन एक्सरसाइज या वॉक करने से पहले कॉफी का सेवन आपके शरीर के तापमान को बढ़ाएगा और आप एक्सरसाइज के दौरान पहले से अधिक पसीना बहा पाएंगे। इससे शरीर से हानिकारक तत्व और केलोरी शरीर से बाहर होंगे।   -कॉफी का सेवन न केवल आपको ऊर्जा देगा, बल्कि मस्तिष्क को भी ऊर्जा देगा। इससे आपको एक्सरसाइज के दौरान सजग रहकर एक्सरसाइज करने में मदद मिलेगी और बेहतर परिणाम मिलेंगे। -एक्सरसाइज के बाद अगर आपको जल्दी भूख लगती है तो कॉफी पीने की यह आदत मददगार साबित होगी। कॉफी आपकी भूख को कुछ समय के लिए कम कर देती है, जिसका फायदा आपको एक्सरसाइज के बाद मिलेगा।   -सामान्य कॉफी तो सेहत के लिए फायदेमंद होती ही है, आजकल ग्रीन कॉफी भी बाजार में उपलब्ध है जो तेजी से वजन कम करने के लिए जानीजर रही है। आप इसका प्रयोग करके भी आसानी से वजन कम कर सकते हैं।   recent visitors 43