मीडिया संस्थानों से डिफेंस ऑपरेशंस और सुरक्षा बलों की लाइव कवरेज को दिखाने से बचने की दी सलाह: सरकार

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। सरकार ने शनिवार को मीडिया संस्थानों से डिफेंस ऑपरेशंस और सुरक्षा बलों की आवाजाही की लाइव कवरेज को दिखाने से बचने के लिए कहा है। इस एडवाइजरी के पीछे सरकार का तर्क है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से अनजाने में शत्रुतापूर्ण तत्वों को मदद मिल सकती है। यह सलाह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद रक्षा मामलों पर रिपोर्टिंग के मद्देनजर दी गई है। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी की गई सलाह में कहा गया है, “राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में, सभी मीडिया प्लेटफॉर्म, समाचार एजेंसियों और सोशल मीडिया यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे रक्षा और अन्य सुरक्षा-संबंधी अभियानों से संबंधित मामलों पर रिपोर्टिंग करते समय अत्यधिक जिम्मेदारी का प्रयोग करें और मौजूदा कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करें।” इसमें कहा गया है, "विशेष रूप से: रक्षा संचालन से संबंधित कोई भी रियल टाइम कवरेज, दृश्यों का प्रसार या सोर्स-आधारित' जानकारी के आधार पर रिपोर्टिंग नहीं की जानी चाहिए।" सलाह में यह भी कहा गया है कि संवेदनशील जानकारी का समय से पहले खुलासा अनजाने में शत्रुतापूर्ण तत्वों की सहायता कर सकता है और परिचालन पर प्रभाव और कर्मियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। सलाह में कारगिल युद्ध, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों और कंधार अपहरण जैसी पिछली घटनाओं का हवाला दिया गया, जब कवरेज ने राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले थे।   recent visitors 45

भोपाल में शुरू हुआ पहला राष्ट्रीय मनोरोग सम्मेलन: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 में विकसित भारत के लिये जो विजन तैयार किया है, उसे प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रखकर ही पूरा किया जा सकता है। इसके लिये हमें विभिन्न रोगों के साथ-साथ मनोरोग से भी छुटकारा पाना होगा। इस कार्य में मनोचिकित्सकों की अहम भूमिका रहेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल आज भोपाल में मध्य भारत के पहले राष्ट्रीय मनोरोग सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। भोपाल में हो रहे 2 दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 45 प्रमुख वक्ता शामिल हो रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जीवन का पहला सुख निरोगी काया को माना गया है। आज के वैश्विक दौर में युवाओं में मानसिक तनाव मुख्य रूप से देखने को मिल रहा है। इसकी प्रमुख वजहव्यावहारिक जीवन में भारी चिंता, असीमित प्रतिस्पर्धा, असफल होने का डर और अत्यधिक मोबाइल समेत अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना प्रमुख है। ऐसे माहौल में मनोचिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर वर्ष करीब 10 लाख लोगों की आत्महत्या के प्रकरण चिंता का विषय हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि इन सब का उपाय भारत की प्राचीन परांपरा में समाहित है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि अनेक संस्थाएँ ध्यान और योग की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इन सबके और विस्तार की संभावनाएँ है। मनोरोग के उपचार में राज्य सरकार के प्रयास उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जिला अस्पताल में मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के उपचार और सलाह के लिये विशेष कक्ष में सेवाएँ शुरू की है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के साथ-साथ मनोरोगी के साथ लगातार संवाद भी जरूरी है। समाज में फोबिया, युवाओं में मानसिक बीमारियाँ, चिंता रोग, सिजोफ्रेनिया और ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर के रोगी सामने आ रहे है। इन सबसे निपटने में मनोचिकित्सक समर्पण भाव को प्रदर्शित करे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन म.प्र. की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में मानसिक रोग के उपचार को विशेष स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि मनोरोगी के उपचार के पहले उसके परिवेश को समझा जाये तो समस्या का बेहतर तरीके से निदान किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में टेली-मानस हेल्पलाइन पर 24X7 पर नि:शुल्क परामर्श दिये जाने की व्यवस्था की गई है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि इस हेल्पलाइन पर 3 लाख कॉल पर परामर्श दिया गया। कार्यक्रम को भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह, इंडिया एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट साइकियाट्री (आईएपीपी) के पदाधिकारी डॉ. आर.एन. साहू, डॉ. मृगेश वैष्णव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. समीक्षा साहू ने किया। रैली का आयोजन राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरूआत में गांधी मेडिकल कॉलेज से इकबाल मैदान तक रैली निकाल कर मनोरोग के प्रति जन-जागरूकता और इससे सावधान रहने का संदेश दिया गया। रैली में मनो चिकित्सक और गांधी मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी शामिल थे।   recent visitors 53

मोहन भागवत ने कहा- भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है, पड़ोसियों को तंग नहीं करते

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है। हिंदू मैनिफेस्टो इसी उद्देश्य से प्रस्तावित है, जो व्यापक चर्चा और सहमति के लिए प्रमाणित पुस्तक है। यह विश्व को नया रास्ता देने का भारत का कर्तव्य है, क्योंकि 2000 वर्षों के आस्तिक, नास्तिक और जड़वादी प्रयोग असफल रहे। भौतिक सुख बढ़ा, लेकिन असमानता और पर्यावरण हानि भी बढ़ी। एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन दृष्टि पर आधारित जीवन व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए। पुस्तक में आठ सूत्र पूर्ण हैं, लेकिन भाष्य काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं। पिछले 1500 वर्षों से नया शास्त्र नहीं आया, जिसके कारण जाति व्यवस्था जैसे दोष समाज में आए। वेदों का सही भाष्य आज आवश्यक है। शास्त्रों में अस्पृश्यता या जाति का कोई स्थान नहीं, जैसा उडुपी के संत समाज ने भी कहा। आततायियों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म: भागवत उन्होंने जोर दिया कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, लेकिन आततायियों को सबक सिखाना भी धर्म है। पड़ोसियों को तंग नहीं करते, लेकिन उपद्रव करने वालों को दंड देना राजा का कर्तव्य है। भ्रष्टाचारियों को छोड़ना उचित नहीं, क्योंकि धर्म में अर्थ और काम को मर्यादा में रखना जरूरी है। धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं करना चाहिए; यह सत्य, करुणा और सुचिता है। हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत: भागवत हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत है। हिंदू मैनिफेस्टो शास्त्रार्थ के माध्यम से शुद्ध परंपरा को सामने लाएगा और कालानुरूप स्वरूप स्थापित करेगा। यह पुस्तक विश्व कल्याण के लिए है, और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। recent visitors 43

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे ‘एमपी टेक ग्रोथ’ कॉन्क्लेव-2025’ का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 अप्रैल को मध्यप्रदेश को टेक्नोलॉजी और डिजिटल नवाचार का केन्द्र बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025’ का शुभारंभ इंदौर के ‘ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर’ में करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कॉन्क्लेव देश-दुनिया के टेक दिग्गजों के लिए निवेश का स्वर्णिम अवसर सिद्ध होगा। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का यह आयोजन जीआईएस-भोपाल में आए निवेश प्रस्तावों को मूर्त रूप देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ प्रदेश का पहला पूर्णतः सेक्टर आधारित टेक-कॉन्क्लेव होगा, जो फरवरी में भोपाल में आयोजित जीआईएस में प्राप्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर साकार करने का मंच बनेगा। कार्यक्रम में Google, Microsoft, NVIDIA जैसी बिग-टेक कंपनियों सहित 300 से अधिक तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योगपति, नीति-निर्माता और निवेशक शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में प्रदेश की चार नई तकनीकी नीतियों – GCC नीति, ड्रोन नीति, सेमीकंडक्टर नीति एवं AVGC-XR नीति की गाइडलाइन्स जारी करेंगे।यह नीतियां नवाचार, अनुसंधान और निर्माण को प्रोत्साहित कर प्रदेश में क्षेत्रीय स्तर तक तकनीकी उद्य्मिता और क्षमताओं को नई ऊँचाइयाँ देंगी। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव नए IT पार्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स और स्टार्ट-अप इन्क्यूबेटरों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और इन्क्यूबेशन हब का शुभारंभ करेंगे, प्रमुख निवेशकों के साथ एमओयू और आवंटन-पत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे। इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। इस पोर्टल से निवेशकों को प्रोजेक्ट्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग और सिंगल विंडो सिस्टम की सुविधा मिलेगी। कॉन्क्लेव में सेक्टर-स्पेसिफिक राउंड टेबल मीटिंग्स, सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार बोर्ड से वीसी संवाद और मुख्यमंत्री की टेक-लीडर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें भी होंगी। मध्यप्रदेश को भविष्य के डिजिटल भारत में अग्रणी बनाने और जीआईएस-भोपाल की निवेश प्रतिबद्धताओं को साकार करने की दिशा में ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025’ एक निर्णायक पहल सिद्ध होगी।   recent visitors 37

मध्यप्रदेश अब देश का डिजिटल स्टेट बनने की ओर तेजी से अग्रसर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बढ़ते विश्वास के साथ आईटी क्षेत्र में निवेश के सकारात्मक रूझान और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए लागू की गई नई नीतियों से मध्यप्रदेश अब देश का डिजिटल स्टेट बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। पिछले एक वर्ष में हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव , देश के विभिन्न महानगरों के साथ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यूके, जर्मनी और जापान में रोड-शो के जरिये उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया। इसी के साथ गत फरवरी माह में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के सफल परिणामों ने मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। इसमें सबसे प्रमुख रहा आईटी सेक्टर, जो प्रदेश को आईटी क्षेत्र में एक नई पहचान देने का माध्यम बना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इसी पहल के तहत रविवार को इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में प्रदेश के पहले "एमपी टेक ग्रोथ" कॉन्क्लेव-25 का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें देश-दुनिया के टेक दिग्गज शामिल होंगे। मध्यप्रदेश डिजिटल नवाचार की दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य के 02 शहरों को AI सिटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल पर विकसित करने जा रहा है। इस पायलेट प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। राज्य में अभी एग्रीटेक, स्कूल एजुकेशन, वन, बिजली और पुलिस महकमें में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है।    ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन (TMZ),12 हजार करोड़ के निवेश और 5 हजार नौकरियों के साथ जल्द आकार लेगा। यह TMZ देश में अपनी तरह का पहला जोन होगा। इसमें सिम, चिप, एंटीना और अन्य उपकरण निर्मित होंगे। यहाँ सभी एसेसरीज सिस्टम्स, कम्पोनेंटस, वाइ-फाई, ऑप्टिकल्स, मोबाइल डिवाइसेज, सिमकार्ड, एंटीना, टेलीकॉम चिप्स सहित टेलीकॉम सेक्टर में नई 6जी टेक्नॉलाजी के लिए अनुसंधान एवं विकास के कार्य भी किए जाएंगे। टेलीकॉम सेक्टर की डिक्सॉन, वॉयकॉन, आईबीएम, निक्सन एवं एरिक्सन जैसी सभी बड़ी कम्पनियां यहां निवेश करने के लिए आएंगी। ग्वालियर आईटी पार्क में लगभग 70 एकड़ एवं साडा ग्वालियर क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि की मांग निवेशकों द्वारा की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर साडा ग्वालियर की 271 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय हो चुका है। नवीन आईटी नीतियां मध्यप्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बेहद अनुकूल हैं। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में उभरते सभी अवसरों का लाभ उठाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) 2.0 देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक अग्रणी पहल है। यह योजना एक गेम चेंजर है और निश्चित रूप से इस क्षेत्र को अगले स्तर पर ले जाएगी। ईएमसी 2.0 योजना में  भोपाल के बैरसिया रोड पर बांदीखेड़ी में और जबलपुर में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर डेवलप होगा । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस – भोपाल में प्रदेश में बेहतर निवेश के लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इस तारतम्य में लिए गए निर्णयों का नतीजा है नीति क्रियान्वयन और आधारभूत संरचना विकास। विभागीय सक्रियता ने राज्य को आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम क्षेत्रों में एक संभावित निवेश स्थल से वास्तविक और समृद्ध निवेश-स्थल में परिवर्तित कर दिया है। जीआईएस- भोपाल में लगभग 100 आईटी कंपनियों के लगभग 34 हजार करोड़ राशि के निवेश प्रस्ताव से दो लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इनमें से 28 प्रोजेक्ट दो माह में मूर्तरूप ले रहे हैं। राज्य के दो उभरते तकनीकी केंद्र इंदौर और भोपाल इन क्षेत्रों में निवेश के लिये आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ), बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) और डाटा सेंटर की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित किया है। राज्य में डाटा सेंटर के क्षेत्र में कंपनियां आ रहीं हैं , जिससे निवेश का आकार लगातार बढ़ रहा है। सेन्ट्रल ऑफ एक्सीलेंस, इन्क्यूबेशन सेन्टर और आईटी स्टार्ट-अप का मध्यप्रदेश में बेहतर ईको सिस्टम विकसित हो रहा है। "एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव – 2025" में स्टेक होल्डर डिजिटल एक्सपर्टस एवं निवेशकों को प्रदेश के तकनीकी और डिजिटल नवाचार और उससे संबंधित आर्थिक दृष्टिकोण बारे में बताया जायेगा। इस अवसर पर नीतिगत घोषणाएं , ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स, सेमीकंडक्टर्स, कॉमिक्स और एक्सटेन्डेड रियलिटी और ड्रोन्स से संबंधित गाइडलाइन्स जारी की जाएंगी। राज्य की जीसीसी, आईटी, आईटीईस, सेमीकंडक्टर्स, ड्रोन्स और एवीजीस-एक्सआर पॉलिसी मध्यप्रदेश को देश के डिजिटल स्टेट के रूप में उभारने में बेहद कारगर होंगी। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025, जहाँ डिजिटल भारत की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा वहीं प्रदेश देश का डिजिटल स्टेट बनकर उभरेगा। डिजिटल इंडस्ट्री के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों के साथ समन्वय, स्टार्ट-अप में उद्यमिता की संस्कृति को विकसित करने, प्राकृतिक गैस पर टैक्स कम करने और प्रदेश में स्टार्ट-अप कम्युनिटी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। वॉक-टू-वर्क सुविधा के साथ आईटी पार्क विकसित करने, प्रदेश में डिजिटल इकोनॉमी मिशन प्रारंभ करने के साथ ही AI -आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित गतिविधियों की अन्य उद्योगों में स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव डिजिटल इंडस्ट्री के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों के बीच मजबूत रिश्तों का आधार बनेगी और सबके सहयोग से मध्यप्रदेश आईटी सेक्टर में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा। recent visitors 40

जमीन का कब्जा दिलाने पहुंचे कोर्ट कर्मी पर हमला, पुलिस ने 3 महिलाओं समेत 6 आरोपियों को भेजा जेल

गरियाबंद ज़िले के अमलीपदर थाना क्षेत्र में न्यायालय के आदेश पर ज़मीन का कब्जा दिलाने मूढ़गेलमाल के माहुलपारा पहुंचे कोर्ट कर्मचारी के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना 24 अप्रैल 2025 की है, जब आदेशिका वाहक रामराव सोलंके ज़मीन कब्जा से संबंधित न्यायालयीन कार्यवाही के तहत मौके पर पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, कब्जा दिलाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और रामराव सोलंके पर लात, घूंसे, लाठी से जानलेवा हमला कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने बैग छीनकर दस्तावेज़ को फाड़ने की भी कोशिश की। मारपीट से कर्मी के शरीर में कई चोटें आई हैं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि अब इस मामले में पीड़ित रामराव सोलंके द्वारा थाना अमलीपदर में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, यह हमला न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न करने की नीयत से किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों में राजस्व विभाग के अधिकारी, कोटवार, पटवारी और ग्रामीण भी शामिल थे, जिन्होंने बीच-बचाव का प्रयास किया। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि रिपोर्ट पर आरोपी मेघनाथ यादव, चूलेश्वर यादव, दिलेश्वरी यादव, चयमनी यादव, गौमनी यादव, खमयबाई यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 126(2), 221, 121(1), 132, 296, 351(2), और 191(2) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया है। recent visitors 38

आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी ने अम्बेडकर अस्पताल का किया निरीक्षण

रायपुर, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय का निरीक्षण कर मरीजों को प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर, रेडियो डायग्नोसिस (एक्स-रे) विभाग, डीएसए ब्लॉक, स्त्री एवं प्रसूति रोग वार्ड, नियोनेटल केयर यूनिट (नर्सरी), एचडीयू वार्ड, कैंसर ओपीडी, कीमोथेरेपी कक्ष सहित प्रस्तावित एकीकृत 700 बिस्तरों वाले अस्पताल स्थल का अवलोकन भी किया। उन्होंने विभिन्न विभागों में स्थापित चिकित्सा उपकरणों की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों को उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं तथा भोजन व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने अस्पताल के किचन का निरीक्षण कर किचन की स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता का जायजा लिया। साथ ही अस्पताल के विभिन्न विभागों में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियनों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरे एवं रिक्त पदों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सालय के ऐसे विभाग, जहां मानव संसाधन की तत्काल आवश्यकता है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत संविदा नियुक्ति के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ चर्चा की। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी ने कहा कि चिकित्सा एक अत्यंत आवश्यक सेवा है, और अस्पताल के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों  को मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध रहना चाहिए। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। recent visitors 40