Tuesday, July 7, 2026 7:31 am

अब भारत के कई शहरों में कोविड-19 के नए केस सामने आने लगे, बढ़ा संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा

नई दिल्ली हांगकांग और सिंगापुर सहित एशिया के कई हिस्सों के बाद अब भारत के भी कई शहरों में कोविड-19 के नए केस सामने आने लगे हैं। इसके बाद देश का स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। कोरोना संक्रमण के उभरने पर लगातार नजर रखी जा रही है और जहाँ नए केस दर्ज किए गए हैं वहाँ संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल भारत में मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र में बढ़े केस, पुणे में 50 बेड आरक्षित महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अकेले मुंबई में ही मई के महीने में कोविड-19 के 95 नए केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से लगभग 16 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और अधिकांश को मुंबई केईएम अस्पताल से सेवेन हिल्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। इसी के साथ जनवरी से अब तक राज्य में कोरोना संक्रमण के कुल केसों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है। कोविड-19 के बढ़ते केसों के मद्देनजर यहाँ इन्फ्लूएंजा और सांस संबंधी संक्रमण वाले सभी रोगियों की एहतियातन कोरोना की जाँच कराई जा रही है। महाराष्ट्र में कोरोना के नए केस बढ़ने के बाद पुणे के स्थानीय निकाय अलर्ट मोड पर हैं। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मई में 87 वर्षीय एक व्यक्ति में कोविड-19 का संक्रमण पाया गया था वो अब ठीक हो चुका है। फिलहाल पुणे में कोविड का कोई सक्रिय मामला नहीं है लेकिन एहतियातन नायडू अस्पताल में कोविड-19 के मरीजों के लिए 50 बिस्तर आरक्षित रखे गए हैं। पुणे नगर निगम की स्वास्थ्य प्रमुख डॉ. नीना बोराडे ने जानकारी दी कि फिलहाल सिविल अस्पतालों में कोविड टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं इसके लिए दिशानिर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। पुडुचेरी, कर्नाटक और गुजरात में भी नए मामले केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में भी 12 नए केस सामने आए हैं। चेन्नई के चिकित्सकों के मुताबिक पहले बुखार वाले जिन रोगियों को इन्फ्लूएंजा का मरीज माना जाता था कोविड के नए केस आने के बाद उनकी कोविड जाँच कराई जा रही है। कुछ अस्पतालों में तो हार्ट और अंग प्रत्यारोपण जैसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन को भी टाला जा रहा है। वहीं पब्लिक हेल्थ डायरेक्टर डॉ. टी.एस. सेल्वाविनायगम ने लोगों से घबराने की बजाय भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क लगाने जैसे उपाय करने की सलाह दी है। कर्नाटक और गुजरात में भी कोरोना के नए मामले दर्ज किए गए हैं। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने अपने एक बयान में बताया है कि कर्नाटक में कोविड-19 के 16 सक्रिय केस हैं। जबकि गुजरात के अहमदाबाद में एक ही दिन में सात नए केस सामने आने के बाद अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है। सभी रोगी अपने घरों में आइसोलेशन में हैं। अधिकारियों ने इनके सैंपल को जेनॉमिक परीक्षण के लिए भेजे हैं। बता दें कि एक साल से हर महीने अहमदाबाद में औसतन एक कोविड केस आ रहा था लेकिन अचानक 7 मामले आने के बाद अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों के मुताबिक इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मई 2023 में कोरोना महामारी के खत्म होने की घोषणा कर दी थी लेकिन कम संख्या में ही सही लगातार इसके केस सामने आ रहे थे। भारत में अभी तक सामने आए केस हल्के हैं और गंभीर प्रकृति के नहीं हैं। फिर भी बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना चाहिए। साथ ही घर से बाहर की चीजों को छूने के बाद हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए और इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण भी करा लेना चाहिए। recent visitors 46

नदी किनारे रेत में मिली लाश का 8 दिन बाद खुला राज, शख्स ने उतारा मौत के घाट

लातेहार आज भी हमारे देश में लड़कियों के प्रति नकारात्मक सोच बनी हुई है. झारखंड के लातेहार जिले में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां 26 वर्षीय रेशमा कुमारी की हत्या के बाद उसकी लाश को नदी किनारे बालू में दफना दिया गया. यह मामला तब उजागर हुआ जब हत्या के आठ दिन बीत चुके थे. रेशमा के पिता ने उसके पति, सास-ससुर, जेठ-जेठानी और ननद के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है, जो इस मानसिकता की गंभीरता को दर्शाता है. एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि ससुराल के लोग दो बच्चियों के जन्म से नाराज थे. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि रेशमा के पति का किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध है. घटना के सामने आने के बाद आरोपी फरार हो गया है, और पुलिस परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है. 16 मई को गारू थाना क्षेत्र की पुलिस ने लुहूरटांड़ गांव के निकट कोयल नदी के किनारे बालू में दबी एक महिला का शव बरामद किया. बाद में उसकी पहचान रेशमा कुमारी के रूप में हुई, जो 12 मई से लापता थी. पति और ससुराल के लोग बेटी को प्रताड़ित करते थे रेशमा के पिता सरयू प्रसाद ने एफआईआर में उल्लेख किया है कि उन्होंने 2016 में अपनी बेटी की शादी लातेहार के सुकरी निवासी मुकेश कुमार से की, जो गारू प्रखंड कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर हैं. शादी के बाद से, विशेषकर दो बेटियों के जन्म के बाद, रेशमा को पति और ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया गया. 2017 में उसके जेठ ने भी उसके साथ मारपीट की, जिसके खिलाफ उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके अलावा, रेशमा से दहेज की मांग भी की जा रही थी. उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ संबंध बन गया था, जिससे वह काफी परेशान हो गई थी. इस स्थिति के कारण, उसने अपनी दोनों बेटियों के साथ डाल्टनगंज जाने का निर्णय लिया. 12 मई को रेशमा का पति मुकेश बेटियों को लेने डाल्टनगंज आया, और उसी दिन से रेशमा भी लापता हो गई. उसका मोबाइल भी बंद आ रहा था. महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल इस दिल दहला देने वाली घटना ने झारखंड में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं. रेशमा की कहानी एक ऐसी सामाजिक वास्तविकता को उजागर करती है, जिसमें बेटियों के जन्म, दहेज और अवैध संबंधों के कारण एक महिला को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है. recent visitors 32

कभी चावल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उनके समर्थक उन्हें उपहार में हमेशा चावल दे देते हैं: जापान कृषि मंत्री

टोक्यो जापान के कृषि मंत्री तकु एतो ने चावल खरीदने पर अपनी अनुचित टिप्पणी के कारण बुधवार को इस्तीफा दे दिया। देश की जनता पारंपरिक मुख्य भोजन की ऊंची कीमतों से परेशान है। सागा प्रान्त में रविवार को एक सेमिनार के दौरान एतो ने कहा था कि उन्हें कभी चावल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उनके समर्थक उन्हें उपहार में हमेशा चावल दे देते हैं। उनकी यह टिप्पणी देश में चावल की महंगाई से परेशान लोगों के प्रति असंवेदनशील मानी गई। इस्तीफे के बाद एतो ने कहा, "जब उपभोक्ता चावल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तब मेरी टिप्पणी अत्यंत अनुचित थी। मैंने प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा को अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।" उन्होंने जनता से माफी मांगी और बयान वापस लेते हुए कहा कि वह खुद चावल खरीदते हैं। मीडिया की खबरों के अनुसार, एतो की जगह पूर्व पर्यावरण मंत्री शिंजिरो कोइजुमी को नियुक्त किया जा सकता है। चावल की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्षी दलों ने एतो के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी थी। जापान में चावल की किल्लत की शुरुआत अगस्त 2024 में तब हुई जब सरकार ने भूकंप की चेतावनी के बाद नागरिकों से तैयारी करने को कहा। इससे घबराकर लोगों ने भारी मात्रा में चावल खरीद लिया। शरद ऋतु की फसल के बाद थोड़ी राहत मिली, लेकिन 2025 की शुरुआत में फिर से किल्लत बढ़ी और कीमतों में तेजी आई। अधिकारियों ने इसके लिए 2023 की गर्मी में खराब फसल, उर्वरक और उत्पादन लागत में वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया। कुछ विशेषज्ञ सरकार की दीर्घकालिक चावल उत्पादन नीति को भी इसके लिए दोषी मानते हैं।     recent visitors 57

गाजा में 48 घंटों में मानवीय सहायता नहीं पहुंची तो 14,000 बच्चों की जान जा सकती है: संयुक्त राष्ट्र

गाजा गाजा पट्टी में हालात हर घंटे बिगड़ते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है  कि अगर अगले  48 घंटों में मानवीय सहायता नहीं पहुंचाई गई तो करीब 14,000 बच्चों की जान  जा सकती है। मार्च 2025 से इज़राइल की ओर से जारी पूरी नाकेबंदी ने गाजा को भुखमरी और कुपोषण की आग में झोंक दिया है।मार्च में इज़राइली सरकार ने गाजा में भोजन, पानी और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी थी। अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते हाल ही में कुछ राहत ट्रकों को अंदर जाने की अनुमति मिली है, लेकिन जहां गाजा को रोज़ाना 500 ट्रकों की ज़रूरत है वहां सिर्फ 5 से 10 ट्रक भेजे जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर गाजा की सरकार के मुताबिक करीब 3 लाख बच्चे भुखमरी के कगार पर हैं जबकि  11 लाख बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं । हर पांचवां वयस्क भी भूखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ ‘भूख’ नहीं, बल्कि वह तीन-चरणीय भुखमरी  है जिसमें शरीर धीरे-धीरे  मांसपेशियों और हड्डियों को खाकर जीवित रहने की कोशिश करता है। ‘खुली जेल’ में तब्दील हुआ गाजा गाजा एक 40 किलोमीटर लंबा क्षेत्र है, जहां प्रति वर्ग किलोमीटर लगभग 6000 लोग  रहते हैं। 2007 में हमास के सत्ता में आने के बाद से ही इज़राइल और मिस्र ने इस क्षेत्र की सीमाएं सील कर दीं, जिसे संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने ‘ओपन एयर प्रिज़न’ (खुली जेल) करार दिया।   क्या UN और ICJ सिर्फ चेतावनी देंगे? इस भीषण मानवीय संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) इस स्थिति में सिर्फ चेतावनी जारी करते रहेंगे या इज़राइल पर युद्ध अपराधों को लेकर कोई कठोर कदम उठाएंगे ?अब तक इस संघर्ष में इज़राइल में 1,726 और गाज़ा में 57,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।   अंतर्राष्ट्रीय कानून   जनसंख्या को जानबूझकर भोजन, पानी और दवा से वंचित रखना अंतरराष्ट्रीय कानून में ‘वॉर क्राइम’ की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद, ICJ और UN जैसे संगठनों की कार्रवाई केवल ‘अपील’ और ‘चेतावनी’ तक सीमित नजर आती है। गाजा में मानवीय त्रासदी अब अलार्मिंग मोड से आगे निकल चुकी है । बच्चों की भूख से मौतें, बंद सीमाएं और नाकाफी राहत सब एक साथ मिलकर इंसानियत को शर्मसार कर रही हैं।अब सवाल यह है कि क्या दुनिया की बड़ी ताकतें सिर्फ रिपोर्ट पढ़ती रहेंगी, या कुछ करेंगी भी? recent visitors 41

चल रहा है बुरा वक्त तो करें ये काम, सुख-समृद्धि और सफलता चूमेगी कदम

भारत के स्वर्णिम इतिहास में कई बड़े-बड़े विद्वान हुए जिनकी कही गई बातें आज भी हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। इन्हीं में से एक थे महान दार्शनिक और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य।जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके बारे में आचार्य को ज्ञान नहीं था। आज हम आचार्य के बताए कुछ कुछ जीवन सूत्रों के बारे में ही जानेंगे। जैसा कि हम सभी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार व्यक्ति के जीवन में इतना बुरा समय भी आ जाता है कि उस दौरान सब कुछ एकदम खत्म सा हो गया लगता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जब व्यक्ति के सामने ऐसा बुरा समय आए तो उसे क्या करना चाहिए कि वो बुरा समय जल्द की अच्छे समय में तब्दील हो जाए। आइए जानते हैं- कड़ी मेहनत का ना छोड़ें साथ आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बुरा समय चल रहा है तो उसे हताश या निराश हो कर बैठने के बजाए कड़ी मेहनत का सहारा लेना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मजबूत इरादों के साथ कड़ी मेहनत पर अटल रहता है, तो बुरा समय भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। वहीं अगर वह निराश हो कर मेहनत से किनारा कर लेता है तो ये बुरा समय उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जीवन में रखें लक्ष्य आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना बेहद जरूरी है। यदि जीवन का लक्ष्य तय है तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आसानी से कट जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य ही नहीं पता तो वो कठिन परिस्थितियों के आते ही भटकाव की स्थिति में चला जाता है, जहां से निकालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। आचार्य के अनुसार यदि कठिन परिस्थितियों के चलते आपका लक्ष्य पाना असंभव लग रहा है, तो उसे छोड़ने के बजाय उसे पाने के तरीके में बदलाव करें और निरंतर प्रयास में लगे रहें। करते रहें नए और बेहतर अवसरों की तलाश केवल प्रतिभावान होना ही काफी नहीं है बल्कि सही समय पर सही अवसर मिलना भी बेहद जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार बुरा वक्त होते हुए भी नए और बेहतर अवसरों की तलाश में लगे रहना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि आलसी लोग हमेशा सही अवसर ना मिलने की शिकायत में लगे रहते हैं। वहीं मेहनती इंसान स्वयं सही अवसर की तलाश करता है और अपना अच्छा समय खुद लाता है। आचार्य के अनुसार परेशानी को ले कर बैठने के बजाए उसके समाधान को ले कर चिंतित होना ज्यादा बेहतर है। चीजों को ना समझें असंभव आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार की कोई भी चीज असंभव नहीं है। अगर आप किसी ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहां से निकालना आपको असंभव लग रहा है, तो सबसे पहले खुद को समझाएं कि असंभव जैसा कुछ भी नहीं है। आचार्य के मुताबिक सही दिशा में लगातार कठिन परिश्रम करते रहने से आप हर स्थिति को अपने अनुकूल मोड़ सकते हैं। recent visitors 53

सीएम साय ने पीएम आवास के हितग्राहियों को सौंपी चाबी, बोर्ड टॉपर्स का किया सम्मान

जशपुर आम जनता की समस्या का समाधान साय सरकार की खास पहल “सुशासन तिहार” के माध्यम से किया जा रहा है. इस विशेष अभियान का तीसरा चरण चल रहा है, जिसमें सीएम साय स्वंय जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्या सुन रहे हैं और योजनाओं का फीडबैक भी ले रहे हैं. आज सीएम साय का हेलिकॉप्टर जशपुर जिले के ग्राम दोकड़ा में उतरा है. मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल गए. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सीएम साय का गुलाब फूल भेंटकर स्वागत किया. कांसाबेल विकासखंड के ग्राम दोकड़ा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समाधान शिविर में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने मुद्रा लोन चेक, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित घरों की चाभी, राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, मत्स्य पालन हेतु जाल व आइस बॉक्स आदि का वितरण किया. मुख्यमंत्री साय ने बालिका खिलाड़ियों को कीट का वितरण किया. वहीं 10वीं और 12वीं बोर्ड के मेरिट लिस्ट में जगह बना पाने वाले विघार्थियों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी कौशल्या साय, सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और पत्थलगांव विधायक गोमती साय, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह समाधान शिविर में उपस्थित रहे. बता दें कि 5 मई से ‘सुशासन तिहार’ के तीसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मई तक आकस्मिक दौरे पर निकलेंगे. इस विशेष अभियान के दौरान मुख्यमंत्री किसी भी समय, किसी भी जिले या गांव में अचानक पहुंच सकते हैं. सीएम साय का दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया है. स्थानीय प्रशासन से लेकर आम जनता तक, किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं होगी कि मुख्यमंत्री साय कब और कहां पहुंचेंगे. सीएम साय किसी भी जिले में पहुंचकर आमजनों से सीधे संवाद करेंगे और ग्रामीणों से मिलकर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लेंगे. वे समाधान शिविरों में भी शामिल होंगे और लोगों की समस्याओं को मौके पर ही सुनकर समाधान की दिशा में कार्य करेंगे. recent visitors 32

केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट: बेसिक सैलरी ₹40,000 से ₹1 लाख! जानिए कब बढ़ेगा वेतन

नई दिल्ली सरकारी नौकरी करने वालों के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से जिस घोषणा का इंतजार किया जा रहा था, वह अब जल्द पूरी हो सकती है। केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर अहम ऐलान करने की तैयारी में है। इससे देशभर के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, आयोग के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अगर सब कुछ तयशुदा योजना के अनुसार चला, तो यह आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। क्या है फिटमेंट फैक्टर और कैसे तय होगी सैलरी? वेतन बढ़ोतरी की गणना के लिए सबसे अहम भूमिका निभाता है फिटमेंट फैक्टर। यह एक तय गुणांक (Multiplier) होता है, जो सभी कर्मचारियों के वेतन को एक समान आधार पर बढ़ाने में मदद करता है। इस बार फिटमेंट फैक्टर के 1.90 से लेकर 2.50 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह 2.5 तक पहुंचता है, तो कर्मचारियों के वेतन में 40% तक की वृद्धि हो सकती है।  कैसे बढ़ेगा वेतन? एक उदाहरण से समझिए: मान लीजिए किसी कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन है ₹40,000 प्रति माह। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो संशोधित वेतन कुछ ऐसा हो सकता है: पेंशनर्स को भी मिलेगा बड़ा फायदा सिर्फ काम कर रहे कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड पेंशनभोगियों को भी इस आयोग से अच्छी-खासी राहत मिलने की उम्मीद है। पहले की तरह पेंशन में भी फिटमेंट फैक्टर के अनुसार संशोधन किया जाएगा, जिससे न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी संभव है। क्या नई स्वास्थ्य सुविधाएं भी जुड़ेंगी? पिछले 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने कर्मचारियों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम की शुरुआत की थी। ऐसे में इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्वास्थ्य और अन्य भत्तों को लेकर कुछ नई सुविधाएं जोड़ सकती है। recent visitors 53