MP: कागजों में पॉलीहाउस बनाकर 7.80 करोड़ का लोन, निर्माण हुआ नहीं; फर्जीवाड़ा कर रकम निकाली

MP: Loan of ₹7.80 crore obtained for polyhouses that existed only on paper; no construction took place; funds siphoned off through fraud. इंदौर। कागजों में पॉलीहाउस बनाकर करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने निजी फर्म के साझेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। आरोपितों द्वारा संगठित रूप से मामला बैंक ऑफ बड़ौदा की खरगोन शाखा से जुड़े 33 ऋण प्रकरणों और सात करोड़ 80 लाख 85 हजार रुपये का है। जांच में बैंक अधिकारियों, निजी फर्मों और उनके साझेदारों के बीच मिलीभगत का आरोप भी सामने आया है। ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वर यादव के अनुसार एवीआईडी एग्रीकल्चर साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को पांच पॉलीहाउस बनाने थे, लेकिन दो का भी निर्माण नहीं किया गया। इसके बावजूद पांचों के कूटरचित कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार कर बैंक से भुगतान प्राप्त करने का आरोप है। इसी तरह किसान एग्रो को 20 पॉलीहाउस बनाने थे। आरोप है कि बिना निर्माण कराए सभी 20 के कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार किए गए और डीसीसी बैंकिंग चैनल के माध्यम से भुगतान ले लिया गया। सिरांश टेक्नो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आठ पॉलीहाउस बनाने के लिए एजेंसी के रूप में तय किया गया था। जांच में आरोप है कि यहां भी निर्माण के बिना कूटरचित प्रमाणपत्र तैयार कर भुगतान हासिल किया गया। कहीं लोन से पहले तो कहीं भुगतान वाले दिन प्रमाणपत्रजांच में ईओडब्ल्यू को सभी कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र प्रथम दृष्टया कूटरचित मिले। सबसे अहम तथ्य यह सामने आया कि 33 में से तीन मामलों में जिस दिन लोन राशि का भुगतान हुआ, उसी दिन कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर दिया गया। 12 मामलों में भुगतान की तारीख से पहले ही प्रमाणपत्र तैयार था, जबकि 16 प्रकरणों में लोन स्वीकृत होने की तारीख से भी पहले कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र बना हुआ था। ईओडब्ल्यू के मुताबिक किसानों का भरोसा हासिल कर उनसे भूमि संबंधी दस्तावेज लिए गए। फिर उनके नाम पर ऋण स्वीकृत कर निजी फर्मों को राशि का भुगतान कराया गया। जांच में इसे किसानों और बैंक के साथ धोखाधड़ी का हिस्सा माना गया है। जांच में ग्राम भीलगांव, तहसील कसरावद, खरगोन निवासी नारायण सिंह पुत्र मानसिंह तंवर का प्रकरण भी सामने आया। उसकी कृषि भूमि बैंक आफ बड़ौदा की खरगोन शाखा में पहले से बंधक थी। इसके बावजूद बैंक की सहमति और एनओसी लिए बिना उसी जमीन को दोबारा बंधक रखकर सात दिसंबर 2015 को 1.90 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट ऋण स्वीकृत किए जाने का आरोप है। ईओडब्ल्यू के अनुसार नारायण सिंह, राजेंद्रसिंह तंवर, नितिन गांवशिंदे और तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक केके सरवटे ने आपस में साजिश कर बैंक में बंधक संपत्ति का बंटांकन कराकर उसका लैंड यूज परिवर्तन कराया और फिर उसी बैंक में दोबारा बंधक रख दिया। इस प्रकरण में बैंक को 1.90 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक क्षति का आरोप है। इस तरह 7.80 करोड़ रुपये के पॉलीहाउस ऋण और कथित कूटरचित पुनर्बंधक से 1.90 करोड़ रुपये, यानी कुल नौ करोड़ 70 लाख 85 हजार रुपये की बैंक को आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप एफआईआर में लगाया गया है। इन पर एफआईआरईओडब्ल्यू ने राज इको फार्म्स व उसके साझेदार राजेंद्रसिंह तंवर और नितिन गांवशिंदे, सिरांश टेक्नो इंडिया प्रालि के डायरेक्टर सौरभ दुबे, किसान एग्रो के साझेदार नरेंद्र पंवार, एवीआइडी एग्रीकल्चर साल्यूशन प्रालि के डायरेक्टर बजपालसिंह चौधरी व अविनाश पाटीदार, नारायणसिंह तंवर, तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक केके सरवटे, ऋण प्रबंधक शुभम सोहनी, तत्कालीन बैंक अधिकारी चंद्रशेखर राठौड़ सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। recent visitors 2

जबलपुर के गणेश पंडाल का कथित अश्लील डांस वीडियो वायरल, हिंदू धर्म सेना ने उठाए सवाल

Video of alleged obscene dance at a Jabalpur Ganesh pandal goes viral; Hindu Dharma Sena raises questions. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर में सोशल मीडिया पर गणेश पांडाल में कुछ युवकों द्वारा अश्लील डांस किए जाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो शुभम बैरागी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस कथित पोस्ट और वीडियो को लेकर हिंदू धर्म सेना ने पुलिस से जांच और कार्रवाई की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राजपूत ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा है। जिसमें बताया गया कि शुभम बैरागी नामक व्यक्ति की सोशल मीडिया आईडी से संबंधित यह वीडियो शेयर करने की जानकारी सामने आई है। मामला गौर चौकी के पास गणेश प्रतिमा पंडाल में कथित अश्लील डांस का वीडियो वायरल होने का है। पंडाल में फिल्मी गानों पर आपत्तिजनक डांस और कथित अश्लील गानों के वीडियो ने हिंदू संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया। एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएसंगठन ने पुलिस से सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की सत्यता, संदर्भ तथा डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच में यदि धार्मिक भावनाओं को आहत करने या किसी कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। recent visitors 5

उमंग सिंघार – अमृत 2.0 के नाम पर घर-घर साफ पानी का दावा, लेकिन पाइपलाइन में ही 12,000 करोड़ का भ्रष्टाचार!

Umang Singhar – Claims of providing clean water to every household under AMRUT 2.0, yet corruption worth ₹12,000 crore in the pipeline project alone! घर-घर साफ पानी पहुंचाने के दावों के बीच मध्यप्रदेश में अमृत 2.0 योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत लगाए जा रहे SCADA सिस्टम में स्वीकृत ब्रांड के उपकरणों की जगह सस्ते लोकल सेंसर लगाए जा रहे हैं और उन पर दूसरे ब्रांड के स्टीकर चिपकाकर कथित तौर पर सरकारी व्यवस्था को गुमराह किया जा रहा है। सिंघार के मुताबिक, मध्यप्रदेश में अमृत 2.0 के तहत 622 जलप्रदाय प्रोजेक्ट मंजूर हैं। ऐसे में यदि उनके लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला सिर्फ घटिया उपकरण लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन, परियोजनाओं की निगरानी और जनता को मिलने वाली पानी की सुविधा की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उपकरण स्वीकृत मानकों के मुताबिक नहीं थे, तो उन्हें पास किसने किया? कंसल्टेंट और इंजीनियरों की जांच व्यवस्था कहां थी? भुगतान किस आधार पर हुआ? और यदि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है, तो उसकी भरपाई और जिम्मेदारी कौन तय करेगा? उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के नाम पर सरकारी पैसे के कथित दुरुपयोग को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। recent visitors 4